Tuesday, 25 July 2017

चीन के ऊपर ऋण उसकी कई ट्रिलियन GDP का 282% गुना है*।
लन्दन के इकोनामिक टाइम्स का सन्दर्भ देते हुए INDIA TODAY में अमेरिका, चीन और भारत की आर्थिक स्थिति पर एक विवरण छपा है। जिसके अनुसार:-
1..वर्ष 2015 के बाद से भारत विश्व मे सबसे उभरती हुई इकोनामी है जो नरेंद मोदी के अथक प्रयासो के फलस्वरूप वर्ष 2020 तक कई क्षेत्रो में चीन से आगे निकल जायेगी।
2..इकोनामिक टाइम्स कहता है कि कर्ज आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है लेकिन चीन के ऊपर तो कर्ज का अंबार है।
कर्ज GDP से 150 गुना से ज्यादा नही होना चाहिए जबकि चीन के ऊपर ऋण उसकी कई ट्रिलियन GDP का 282% गुना है। इकोनॉमिक्स कहता है कि वैसे तो अमेरिका के ऊपर उसकी GDP का 331%गुना ज्यादा रिन है लेकिन अमेरिकी अर्थव्यवस्था सुधार पर है और चीन की और नीचे जा रही है।
3..भारत के ऊपर ऋण उसकी GDP का 135% है जो संतुलित तो है ही,पिछले 3 सालों से घटता भी जा रहा है।
4... चीन का कुल निर्यात उसकी GDP का 21% है जो मैनुफेक्चरिंग ड्राइवेन है जिसमे से 18% केवल अमेरिका को जाता है। जो चीन की GDP का 4% है। चीन को यंहा खतरा यह हो गया कि डोनॉल्ड ट्रंम्प का चीन के राष्ट्रपति से समझौता हुआ है कि वे चीन से आयात घटाते रहेगे ताकि उनकी मैनुफेक्चरिंग अमेरिका में हो और यंहा रोजगार बढ़े।
5..चीन के विपरीत भारत की मैनुफेक्चरिंग ड्राइवेन लोकल उपयोग के ऊपर आधारित है जो कम के बजाय ज्यादा ही होती जाएगी।
6.. भारत अपने services sector का export करता है जिसके भविष्य में और बढ़ने की अपार सम्भावनाये है।
वांशिगटन में ट्रंम्प-मोदी मुलाकात वार्ता में यह तय हुआ है कि अमेरिका भारत से services sector में आयात बढ़ाएगा।
7..अब चीन के निर्यात की कुंजी ट्रंम्प के हाथ मे। जैसे-जैसे
ट्रंम्प अमेरिका में चीन से आयात किये जाने वाले मैनुफेक्चरिंग गुड्स की मैनुफेक्चरिंग यूनिट्स अमेरिका में लगाते जाएंगे वैसे-वैसे चीन का निर्यात घटता जाएगा फलस्वरूप चीन की GDP भी घटेगी।
8..चीनी बैंक दिवालाइया होने की कगार पर खड़े है क्योंकि उनके द्वारा चीन में दिए गए ऋण की रिकवरी लगभग शून्य है।

Monday, 24 July 2017


अक्षौहिणी प्राचीन भारत में सेना का माप हुआ करता था जिसका संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है:
किसी भी अक्षौहिणी सेना के चार विभाग होते थे:
गज (हाँथी सवार)
रथ (रथी)
घोड़े (घुड़सवार)
सैनिक (पैदल सिपाही)
इसके प्रत्येक भाग की संख्या के अंकों का कुल जमा 18 आता है। एक घोडे पर एक सवार बैठा होगा. हाथी पर कम से कम दो व्यक्तियों का होना आवश्यक है, एक पीलवान और दूसरा लडने वाला योद्धा. इसी प्रकार एक रथ में दो मनुष्य और चार घोडे रहे होंगें.
एक अक्षौहिणी सेना 9 भागों में बटी होती थी:
पत्ती: 1 गज + 1 रथ + 3 घोड़े + 5 पैदल सिपाही
सेनामुख (3 x पत्ती): 3 गज + 3 रथ + 9 घोड़े + 15 पैदल सिपाही
गुल्म (3 x सेनामुख): 9 गज + 9 रथ + 27 घोड़े + 45 पैदल सिपाही
गण (3 x गुल्म): 27 गज + 27 रथ + 81 घोड़े + 135 पैदल सिपाही
वाहिनी (3 x गण): 81 गज + 81 रथ + 243 घोड़े + 405 पैदल सिपाही
पृतना (3 x वाहिनी): 243 गज + 243 रथ + 729 घोड़े + 1215 पैदल सिपाही
चमू (3 x पृतना): 729 गज + 729 रथ + 2187 घोड़े + 3645 पैदल सिपाही
अनीकिनी (3 x चमू): 2187 गज + 2187 रथ + 6561 घोड़े + 10935 पैदल सिपाही
अक्षौहिणी (10 x अनीकिनी): 21870 गज + 21870 रथ + 65610 घोड़े + 109350 पैदल सिपाही
इस प्रकार एक अक्षौहिणी सेना में गज, रथ, घुड़सवार तथा सिपाही की सेना निम्नलिखित होती थी:
गज: 21870
रथ: 21870
घुड़सवार: 65610
पैदल सिपाही: 109350
इसमें चारों अंगों के 218700 सैनिक बराबर-बराबर बंटे हुए होते थे। प्रत्येक इकाई का एक प्रमुख होता था.
पत्ती, सेनामुख, गुल्म तथा गण के नायक अर्धरथी हुआ करते थे.
वाहिनी, पृतना, चमु और अनीकिनी के नायक रथी हुआ करते थे।
एक अक्षौहिणी सेना का नायक अतिरथी होता था.
एक से अधिक अक्षौहिणी सेना का नायक सामान्यतः एक महारथी हुआ करता था.
पांडवों के पास (7 अक्षौहिणी सेना):
153090 रथ
153090 गज
459270 अश्व
765270 पैदल सैनिक
कौरवों के पास (11 अक्षौहिणी सेना):
240570 रथ
240570 गज
721710 घोड़े
1202850 पैदल सैनिक
इस प्रकार महाभारत की सेना के मनुष्यों की संख्या कम से कम 4681920, घोडों की संख्या (रथ में जुते हुओं को लगा कर) 2715620 और इसी अनुपात में गजों की संख्या थी. इससे आप सहज ही अनुमान लगा सकते हैं कि महाभारत का युद्ध कितना विनाशकारी था.

अरून शुक्ला
वो कुँए का मैला कुचला पानी पिके भी 100 वर्ष जी लेते थे
हम RO का शुद्ध पानी पीकर 40 वर्ष में बुढे हो रहे है।
वो घाणी का मैला सा तैल खाके बुढ़ापे में भी दौड़~मेहनत कर लेते थे।
हम डबल~ट्रिपल फ़िल्टर तैल खाकर जवानी में भी हाँफ जाते है। 
वो डळे वाला लूण खाके बीमार ना पड़ते थे और हम आयोडीन युक्त खाके हाई~लो बीपी लिये पड़े है।
वो निम~बबूल कोयला नमक से दाँत चमकाते थे और 80 वर्ष तक भी चब्बा~चब्बा कर खाते थे
और हम कॉलगेट सुरक्षा वाले रोज डेंटिस्ट के चक्कर लगाते है ।।
वो नाड़ी पकड़ कर रोग बता देते थे और
आज जाँचे कराने पर भी रोग नहीं जान पाते है।
वो 7~8 बच्चे जन्मने वाली माँ 80 वर्ष की अवस्था में भी घर~खेत का काम करती थी
और आज 1महीने से डॉक्टर की देख~रेख में रहते है फिर भी बच्चे पेट फाड़ कर जन्मते है।।
पहले काळे गुड़ की मिठाइयां ठोक ठोक के खा जाते थे
आजकल तो खाने से पहले ही सुगर की बीमारी हो जाती है।
पहले बुजर्गो के भी गोडे मोढे नहीं दुखते थे और जवान भी घुटनो और कन्धों के दर्द से कहराता है ।
और भी बहुत सी समस्याये है फिर भी लोग इसे विज्ञान का युग कहते है, समझ नहीं आता ये विज्ञान का युग है या अज्ञान का ?????
महावीर वैष्णव
की वाल से साभार।
चीन को अब समझ आ रहा कि .. मोदी ने हमला कब का कर दिया था...

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जिन्हें लग रहा है कि रिलायंस ने ये फ्री फ़ोन अचानक लांच कर दिया उन्हें दोबारा सोचने की ज़रूरत पड़ेगी। मोदी ने 3 साल पहले Make in India लांच किया, विदेश की 70+ मोबाइल कंपनियां भारत आयीं और अपनी फैक्टरियां लगाईं ।
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जिस देश मे मोबाइल का स्क्रीन गार्ड, कवर और ग्लास तक नही बनता था वहां अब मोबाइल बनने शुरू हो गए...। अब इन विदेशी कंपनियों ने भारत मे Made in India हैंडसेट बेचने शुरू कर दिए, जिसमे Xiaomi, Gionee, Oppo, Vivo आदि शामिल हैं।
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लेकिन मोदी का ये सपना नही था, उन्हें तो कुछ और चाहिए था, मोदी को भारत की बादशाहत चाहिए थी विश्व बाजार में, तो जब सब ने अपनी अपनी फैक्ट्री लगा ली प्रोडक्शन चालू कर लिया। तब उन्हें विदेशों में माल बेचने के लिए प्रोत्साहित किया गया, टैक्स में छूट दी गयी, नतीजा ये हुआ कि Xiaomi जैसी कंपनी Made in India हैंडसेट को US और Europe में बेचने लगी, बेच तो पहले भी रही थी पर तब चीन में बना हैंडसेट बेचा जा रहा था और अब भारत मे बना, यानी चीन का व्यापार छीन कर भारत ने ले लिया, और ऐसा एक चीनी कंपनी से करवा लिया, चीन की बौखलाहट की वजह यही है।
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अब कल Jio का फ्री फ़ोन लांच हो गया यानी ऐसी 70+ कंपनियों की वाट लग गयी ,अब वे क्या करेंगी? ज़ाहिर है हजारों करोड़ के इन्वेस्टमेंट के बाद ये कंपनियां बंद तो करेंगी नही क्योंकि बंद करने में पूरा पैसा डूब जाएगा,
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अब इन कंपनियों के लिए भारत का बाजार तो खत्म हो गया ऐसे में अब ये सभी कंपनियां एक्सपोर्ट पर दिमाग लगाएंगी, यानी सभी विदेशी कंपनियां अब मोबाइल बनाएंगी भारत मे और बेचेंगी विदेश में, यही तो मोदी का सपना था, यही सही मायने में Make in India है, जहां भारतीयों को काम मिले, माल भारत मे बने और विदेशों में बेचा जाए।
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वैसे फ्री फ़ोन का कांसेप्ट Jio के साथ लांच होना था पर इसे एक साल तक रोके रखा गया, आप इतने समझदार है कि ये समझने की ज़रूरत नही कि क्यों रोका गया । जो लोग अडानी अम्बानी के लिए हर वक़्त गालिया देते है, वो सबसे पहले लाइन में लगे है .. मुफ्त के मोबाइल के लिए .. !!

Hardik Savani

Sunday, 23 July 2017


3 ऐसे भक्त, जिनके शरीर का कुछ भी पता नहीं चल सका

कबीरदास (1398-1518)— 1518 में कबीर ने काशी के पास मगहर में देह त्याग दी। मृत्यु के बाद उनके शव को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया था। हिन्दू कहते थे कि उनका अंतिम संस्कार हिन्दू रीति से होना चाहिए और मुस्लिम कहते थे कि मुस्लिम रीति से। इसी विवाद के चलते जब उनके शव पर से चादर हट गई, तब लोगों ने वहाँ फूलों का ढेर पड़ा देखा। बाद में वहाँ से आधे फूल हिन्दुओं ने ले लिए और आधे मुसलमानों ने। मुसलमानों ने मुस्लिम रीति से और हिंदुओं ने हिंदू रीति से उन फूलों का अंतिम संस्कार किया। मगहर में कबीर की समाधि है।

चैतन्य महाप्रभु (1486-1534)— 15 जून, 1534 को रथयात्रा के दिन जगन्नाथपुरी में संकीर्तन करते हुए
वह जगन्नाथ जी में लीन हो गए और शरीर का कुछ भी पता नहीं चल सका I

मीराबाई (1498-1547)— मीराबाई बहुत दिनों तक वृन्दावन में रहीं और जीवन के अंतिम दिनों में द्वारका चली गईं। जहाँ 1547 ई. में वह नाचते-नाचते
श्री रणछोड़राय जी के मन्दिर के गर्भग्रह में प्रवेश कर गईं और मन्दिर के कपाट बन्द हो गये। जब द्वार खोले गये तो देखा कि मीरा वहाँ नहीं थी। उनका चीर मूर्ति के चारों ओर लिपट गया था और मूर्ति अत्यन्त प्रकाशित हो रही थी। मीरा मूर्ति में ही समा गयी थीं। मीराबाई का शरीर भी कहीं नहीं मिला।....

हरि हरि बोल
1 जुलाई 
 


रसूल का घरेलू व्यभिचार!
विश्व में भारतीय संस्कृति और परम्परा को महान माना जाता है .क्योंकि इस में स्त्रियों को देवी की तरह सम्मान दिया जाता है .यहाँ तक मौसी , बुआ चचेरी बहिन और पुत्र वधु पर सपने में भी बुरी दृष्टि रखने को महापाप और अपराध माना गया है . लेकिन इन्हीं कारणों से कोई भी समझदार व्यक्ति इसलाम को धर्म कभी नहीं मानेगा , क्योंकि मुहम्मद अपनी वासना पूर्ति के लिए कुरान का सहारा लेकर ऎसी ही स्त्रियों से सहवास करने को वैध बना देते थे , जिसका पालन मुसलमान आज भी कर रहे हैं .इस विषय को स्पष्ट करने के लिये कुरान की उन आयतों , हदीसों और उनकी ऐतिहासिक प्रष्ट भूमि को देखना होगा , कि मुहम्मद ने अपनी सगी मौसी , चचेरी बहिन और अपने दत्तक पुत्र की पत्नी से सहवास कैसे किया था . और इस पाप को कुरान की आयत बना कर कैसे जायज बना दिया .

इस्लामी परिभाषा में अपने शहर को छोड़ कर पलायन करने को हिजरत (Migration ) कहा जाता है . लगभग सन 622 में मुहम्मद को मक्का छोड़ कर मदीना जाना पडा था .उनके साथ कुछ पुरुष और महिलायें भी थी . साथ में उनकी प्रिय पत्नी आयशा भी थी . इसी घटना की प्रष्ट भूमि में कुरआन की सूरा अहजाब की वह आयतें दी गयी हैं जिनमे मौसी, चचेरी बहिन , और पुत्रवधु से शादी करना या उनसे सम्भोग करने को जायज ठहरा दिया गया है .ऐसी तीन औरतों के बारे में इस लेख में जानकारी दी जा रही है , जिन से मुहम्मद ने कुरान की आड़ में अपनी हवस पूरी की थी .

1.मौसी के साथ कुकर्म
मुहम्मद की हवस की शिकार होने वाली पहली औरत का नाम " खौला बिन्त हकीम अल सलमिया خولة بنت حكيم السلمية " था . और उसके पति का नाम "उसमान बिन मजऊम عثمان بن مظعون‎ " था . खौला मुहम्मद साहब की माँ की बहिन यानि उनकी सगी मौसी ( maternal aunt ) थी . इसको मुहम्मद ने अपना सहाबी बना दिया था . मदीना की हिजरत में मुहम्मद आयशा के साथ खौला को भी ले गए थे .यह घटना उसी समय की है इस औरत ने अय्याशी के लिए खुद को मुहम्मद के हवाले कर दिया था .यह बात मुसनद अहमद में इस प्रकार दी गयी है .
"खौला बिन्त हकीम ने रसूल से पूछा कि जिस औरत को सपने में ही स्खलन होने की बीमारी हो , तो वह औरत क्या करे , रसूल ने कहा उसे मेरे पास लेटना चाहिए "
"Khaula Bint Hakim al-Salmiya,asked the prophet about the woman having a wet dream, he said she should lay with me "

محمد بن جعفر قال حدثنا شعبة وحجاج قال حدثني شعبة قال سمعت عطاء الخراساني يحدث عن‫حدثنا """‬ ‫سعيد بن المسيب أن خولة بنت حكيم السلمية وهي إحدى خال ت النبي صلى ال عليه وسلم سألت النبي صلى ال‬ ‫عليه وسلم عن المرأة تحتلم فقال رسول ال صلى ال عليه وسلم لتغتسل‬Translation:26768 -

Musnad Ahmad (‫مسند أدحمد‬ )hadith 26768

तब खौला मुहम्मद साहब के पास सो गयी , और मुहम्मद साहब ने उसके साथ सम्भोग किया .

2.आयेशा ने खौला को धिक्कारा
जब आयशा को पता चला कि रसूल चुपचाप खौला के साथ सम्भोग कर रहे हैं तो उसने खौला को धिक्कारा और उसकी बेशर्मी के लिए फटकारा यह बात इस हदीस में दी गयी है ,
"हिशाम के पिता ने कहा कि खौला एक ऎसी औरत थी जिसने सम्भोग के लिए खुद को रसूल के सामने प्रस्तुत कर दिया था .इसलिए आयशा ने उस से पूछा ,क्या तुझे एक पराये मर्द के सामने खुद को पेश करने में शर्म नही आयी ? तब रसूल ने कुरान की सूरा अहजाब 33:50 की यह आयत सुना दी , जिसमे कहा था " हे नबी तुम सम्भोग के लिए अपनी पत्नियों की बारी ( Turn ) को टाल सकते हो .इस पर आयशा बोली लगता है तुम्हारा अल्लाह तुम्हें और अधिक मजे करने की इजाजत दे रहा है ."( I see, but, that your Lord hurries in pleasing you)
"حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلاَمٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ فُضَيْلٍ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ كَانَتْ خَوْلَةُ بِنْتُ حَكِيمٍ مِنَ اللاَّئِي وَهَبْنَ أَنْفُسَهُنَّ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَتْ عَائِشَةُ أَمَا تَسْتَحِي الْمَرْأَةُ أَنْ تَهَبَ نَفْسَهَا لِلرَّجُلِ
لِلرَّجُلِ فَلَمَّا نَزَلَتْ ‏{‏تُرْجِئُ مَنْ تَشَاءُ مِنْهُنَّ‏}‏ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا أَرَى رَبَّكَ إِلاَّ يُسَارِعُ فِي هَوَاكَ‏.‏ رَوَاهُ أَبُو سَعِيدٍ الْمُؤَدِّبُ وَمُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ وَعَبْدَةُ عَنْ هِشَامٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ يَزِيدُ بَعْضُهُمْ عَلَى بَعْضٍ‏.‏

बुखारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 48

3.आयेशा को ईर्ष्या हुई

कोई भी महिला अपने पति की दूसरी महिला से अय्याशी को सहन नहीं करेगी . आयशा ने रसूल से कहा कि मुझे इस औरत से ईर्ष्या हो रही है . यह बात इस हदीस में इस प्रकार दी गयी है
"आयशा ने कहा कि मैं रसूल से कहा मुझे उस औरत से जलन हो रही है जिसने सम्भोग के लिए खुद को तुम्हारे हवाले कर दिया . क्या एसा करना गुनाह नहीं है . तब रसूल ने सूरा अहजाब की 33:50 आयत सुना कर कहा इसमे कोई पाप नहीं है ,क्योंकि यह अल्लाह का आदेश है . तब आयशा ने कहा लगता है , तुम्हारे अल्लाह को तुम्हें खुश करने की बड़ी जल्दी है "(It seems to me that your Lord hastens to satisfy your desire. )

सही मुस्लिम -किताब 8 हदीस 3453

4.चचेरी बहिन से सहवास
मुहम्मद साहब के चाचा अबू तालिब की बड़ी लड़की का नाम "उम्मे हानी बिन्त अबू तालिब - أُمِّ هَانِئٍ بِنْتِ أَبِي طَالِبٍ " था .जिसे लोग "फकीतः और " हिन्दा " भी कहते थे .यह सन 630 ईसवी यानि 8 हिजरी की बात है . जब मुहम्मद साहब तायफ़ की लड़ाई में हार कर साथियों के साथ जान बचाने के लिए काबा में छुपे थे .लकिन मुहम्मद साहब चुपचाप सबकी नजरें चुरा कर उम्मे हानी के घर में घुस गए ,लोगों ने उनको काबा में बहुत खोजा .और आखिर वह उम्मे हानी के घर में पकडे गए .इस बात को छुपाने के लिए मुहम्मद साहब ने एक कहानी गढ़ दी और लोगों से कहा कि मैं यरुशलेम और जन्नत की सैर करने गया था .मुझे अल्लाह ने बुलवाया था .उस समय उनकी पहली पत्नी खदीजा की मौत हो चुकी थी वास्तव में .मुहम्मद साहब उम्मे हानी के साथ व्यभिचार करने गए थे .उन्होंने कुरान की सुरा अहजाब की आयत 33:50 सुना कर सहवास के लिए पटा लिया था .यह बात हदीस की किताब तिरमिजी में मौजूद है . जिसे प्रमाणिक माना जाता है . पूरी हदीस इस प्रकार है ,

"उम्मे हानी ने बताया उस रात रसूल ने मुझ से अपने साथ शादी करने का प्रस्ताव रखा , लेकिन मैं इसके लिये उन से माफी मागी . तब उन्होंने कहा कि अभी अभी अल्लाह की तरफ से मुझे एक आदेश मिला है ".हे नबी हमने तुम्हारे लिए वह पत्नियां वैध कर दी हैं ,जिनके मेहर तुमने दे दिये .और लौंडियाँ जो युद्ध में प्राप्त हो ,और चाचा की बेटीयाँ , फ़ूफ़ियों की बेटियाँ ,मामू की बेटियाँ,खालाओं की बेटियाँ और जिस औरत ने तुम्हारे साथ हिजरत की है ,और वह ईमान वाली औरत जो खुद को तुम्हारे लिए समर्पित हो जाये " यह सुन कर मैं राजी हो गयी और मुसलमान बन गयी "

" عَنْ أُمِّ هَانِئٍ بِنْتِ أَبِي طَالِبٍ، قَالَتْ خَطَبَنِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَاعْتَذَرْتُ إِلَيْهِ فَعَذَرَنِي ثُمَّ أَنْزَلَ اللَّهُ تَعَالَى ‏:‏ ‏(‏إنَّا أَحْلَلْنَا لَكَ أَزْوَاجَكَ اللاَّتِي آتَيْتَ أُجُورَهُنَّ وَمَا مَلَكَتْ يَمِينُكَ مِمَّا أَفَاءَ اللَّهُ عَلَيْكَ وَبَنَاتِ عَمِّكَ وَبَنَاتِ عَمَّاتِكَ وَبَنَاتِ خَالِكَ وَبَنَاتِ خَالاَتِكَ اللاَّتِي هَاجَرْنَ مَعَكَ وَامْرَأَةً مُؤْمِنَةً إِنْ وَهَبَتْ نَفْسَهَا لِلنَّبِيِّ ‏)‏ الآيَةَ قَالَتْ فَلَمْ أَكُنْ أَحِلُّ لَهُ لأَنِّي لَمْ أُهَاجِرْ كُنْتُ مِنَ الطُّلَقَاءِ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ مِنْ حَدِيثِ السُّدِّيِّ ‏.‏ "-هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ -

तिरमिजी -जिल्द 1किताब 44 हदीस 3214 पे.522

5.पुत्रवधु से सहवास

मुहम्मद साहब के समय अरब में दासप्रथा प्रचलित थी .लोग युद्ध में पुरुषों , औरतों , और बच्चों को पकड़ लेते थे .और उनको बेच देते थे .ऐसा ही एक लड़का मुहम्मद साहब ने खरीदा था . जिसका नाम " जैद बिन हारिस - زيد بن حارثة‎ " था .(c. 581-629 CE) मुहम्मद साहब ने उसे आजाद करके अपना दत्तक पुत्र बना लिया था अरबी में . दत्तक पुत्र (adopt son ) को " मुतबन्ना " कहा जाता है . यह एक मात्र व्यक्ति है जिसका नाम कुरान सूरा अह्जाब 33:37 में मौजूद है .इसी लिए लोग जैद को " जैद मौला "या " जैद बिन मुहम्मद भी कहते थे .यह बात इस हदीस से साबित होती है ,

""حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ، عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ مَا كُنَّا نَدْعُو زَيْدَ بْنَ حَارِثَةَ إِلاَّ زَيْدَ بْنَ مُحَمَّدٍ حَتَّى نَزَلَتْ ‏:‏ ‏(‏ ادعُوهُمْ لآبَائِهِمْ هُوَ أَقْسَطُ عِنْدَ اللَّهِ ‏)‏ ‏.‏ قَالَ هَذَا حَدِيثٌ صَحِيحٌ ‏.‏ "

तिरमिजी -जिल्द 1 किताब 46 हदीस 3814

कुछ समय के बाद् जैद की शादी हो गयी उसकी पत्नी का नाम "जैनब बिन्त जहश - زينب بنت جحش‎ " था वह काफी सुन्दर और गोरी थी . इसलिये मुहम्मद साहब की नजर खराब हो गयी .उन्होंने घोषित कर दिया कि आज से मेरे दत्तक पुत्र को मेरे नाम से नहीं उसके असली बाप के नाम से पुकारा जाय .और इसकी पुष्टि के लिये कुरान की सूरा 33:5 भी ठोक दी .यह बात इस हदीस से सबित होती है ,

6-रसूल की नीयत में पाप

जैनब को हासिल करने के लिए मुहम्मद साहब ने फिर कुरान का दुरुपयोग किया .और लोगों से जैद को मुहम्मद का बेटा कहने से मना कर दिया , ताकि लोग जैनब को उनके लडके की पत्नी नहीं मानें .
" जैनब कुरैश कबीले की सब से सुंदर लड़की थी .और जब अल्लाह ने अपनी किताब में जैद के बार में सूरा 33 की आयत 5 नाजिल कर दी , जिसमे कहा था कि आज से तुम लोग जैद को उसके असली बाप के नाम से पुकारा करो .,क्योंकि अल्लाह की नजर में यह बात तर्कसंगत प्रतीत लगती है .और यदि तुम्हें किसी के बाप का नाम नहीं पता हो ,तो उस व्यक्ति को भाई कह कर पुकारा करो ,

मलिक मुवत्ता -किताब 30 हदीस 212

7-कुरान की सूरा 33:5 की व्याख्या

कुरान की सूरा अहजाब की आयत 5 के अनुसार दत्तक पुत्र जैद को असली पुत्र का दर्जा नहीं दिया गया , इस आयत की व्याख्या यानी तफ़सीर "जलालुद्दीन सुयूती - جلال الدين السيوطي‎ " ने की है . इनका काल c. 1445–1505 AD है .इन्होने कुरान की जो तफ़सीर की है ,उसका नाम " तफ़सीर जलालैन -تفسير الجلالين " है .इसमे बताया गया है कि रसूल ने जैद को अपने पुत्र का दर्जा नहीं देने के लिए यह तर्क दिए थे ,1 .दत्तक पुत्र रखने की परंपरा अज्ञान काल है , अब इसकी कोई जरुरत नहीं है .2 . मैंने जिस समय जैद को खरीदा था ,उस समय अल्लाह ने मुझे रसूल नही बनाया था .3. लोग जैद को मेरा सगा बेटा मान लेते थे . जिस से मेरी बदनामी होती थी .4. जैद ने मुझ से जैनब को तलाक देने का वादा कर रखा है .

{ وَإِذْ تَقُولُ لِلَّذِيۤ أَنعَمَ ٱللَّهُ عَلَيْهِ وَأَنْعَمْتَ عَلَيْهِ أَمْسِكْ عَلَيْكَ زَوْجَكَ وَٱتَّقِ ٱللَّهَ وَتُخْفِي فِي نَفْسِكَ مَا ٱللَّهُ مُبْدِيهِ وَتَخْشَى ٱلنَّاسَ وَٱللَّهُ أَحَقُّ أَن تَخْشَاهُ فَلَمَّا قَضَىٰ زَيْدٌ مِّنْهَا وَطَراً زَوَّجْنَاكَهَا لِكَيْ لاَ يَكُونَ عَلَى ٱلْمُؤْمِنِينَ حَرَجٌ فِيۤ أَزْوَاجِ أَدْعِيَآئِهِمْ إِذَا قَضَوْاْ مِنْهُنَّ وَطَراً وَكَانَ أَمْرُ ٱللَّهِ مَفْعُولاً }

Tafsir al-Jalalayn - (تفسير الجلالين )Sura -ahzab 33:5

इन्हीं कुतर्कों के आधार पर लगभग सन625 ईसवी में मुहम्मद साहब ने अपने दत्तक पुत्र जैद की पत्नी से शादी कर डाली .यानी जैनब के साथ व्यभिचार किया .
देखिये विडिओ -Prophet Muhammad lusts after & steals his adopted son's wife Pt. 2

http://www.youtube.com/watch?v=wp3pMgmGuVo

अपने निकट सम्बन्ध की स्त्रियों के साथ शारीरिक संबंध बनाने को इनसेस्ट (incest ) कहा जाता है , विश्व के सभी धर्मों और हर देश के कानून में इसे पाप और अपराध माना गया है . लेकिन मुहम्मद साहब अपनी वासना पूर्ति के लिए तुरंत कुरान की आयत सूना देते थे . और इस निंदनीय काम को जायज बना देते थे .कुरान की इसी तालीम के कारण हर जगह व्यभिचार और बलात्कार हो रहे हैं .क्योंकि मुसलमान इन नीच कर्मों को गुनाह नहीं मानते ,बल्कि रसूल की सुन्नत मानते हैं .
Vithal Vyas
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मुसलमान मोहम्मद के चरित्र चित्रण से क्यों डरते हैं?
मोहम्मद का कार्टून बना तो पूरी दुनिया के मुसलमानों ने अपनी-२ जगहों पर बलवा किया | दुनिया को इतिनी बुरी तरह से बदलने वाला व्यक्ति रहस्य बना हुआ हैं | कोई कुछ जानता ही नहीं उसके बारे में | प्रश्न तो ये उठता हैं के इसाई ईशा मसीह के नाटक मंच पर दोहराते हैं ताकि उनके अच्छे गुण अन्य लोग जान सके और ले सके | हिंदू राम लीला रचाते हैं ताकि राम के अच्छे कृत्यों को दिमाग में रख सके | अच्छाई की बुराई पर जीत | पर मोहम्मद के नाम पर ऐसा क्या की उनका कोई चित्र नहीं हो सकता | मुस्लिम कहते हैं इस्लाम में बुत परस्ती मना हैं इसलिए | बुत परस्ती मना होने से चित्रण का क्या लेना देना ? क्या काबा मंदिर (उनके लिये मस्जिद) की तस्वीर रखना नहीं गलत हैं पर रखते हैं | तस्वीर रखने से उसकी बुत परस्ती थोड़े हो जाती हैं बल्कि अपने आदर्श के कृत्यों की याद बनी रहती हैं | जैसे आर्य समाजी ऋषि दयानंद की तस्वीर रखते हैं | दूसरा तर्क ये दे सकते के इस से उनका अपमान होगा | मान-अपमान तो जीवित लोगो का होता हैं अगर ये भेद नहीं पता उन्हें तो बुत परस्ती भी नहीं पता | इसी लिए वे हजरे अस्वाद को सरक्षित करे हुए हैं और बुत परस्ती के विरोध में होने का ढोंग करते हैं |

वास्तविक बात तो ये हैं के मोहम्मद का कोई चरित्र ही नहीं था जिसका चित्रण किया जाए | क्या दिखाएंगे मुसलमान की कैसे मोहम्मद के दादा अबू मत्लिब काबा मंदिर का सरक्षण करते थे तीर्थ यात्रियों का प्रबंध करते थे | किस प्रकार मोहम्मद को बचपन में मिर्गी के दौरे पड़ते थे | कैसे उसने अपने से १५ वर्ष आयु में बड़ी और अरब की अमीर बुडिया से शादी की | उस अमीर बुडिया के मरते ही किस प्रकार ५१ वर्षीया मोहम्मद ने ६ वर्ष की बच्ची से शादी(माफ़ी चाहूँगा इस गंदे कृत्य को मुस्लिम शादी कहते हैं) की | किस प्रकार ९ वर्ष की होने पर उस बच्ची से सम्भोग किया | अपनी मू बोले बेटे की बीवी से शादी की और कैसे भिन्न भिन्न ३१ से ऊपर औरते रखी | कैसे मोहम्मद ने उम् किर्फा की वृद्ध नेत्रानी बनू फस्रह के हाथ पावो को २ उटो से बंधवा के फड़वा दिया | ऊट की चोरी करने वाले ८ लोगो के हाथ पाँव कटवा दीये | वो ऊट जो खुद मोहम्मद ने चुराए थे |

बनू कुइनैका, बनू नादिर, बनू कुरैज़ा के लोगो पर कितने अमानुषी अत्याचार किये | दूनिया का सबसे पहला इस्लामी आतंकवादी मोहम्मद ही तो था जो ये सब देखने पर सब समझ जाएगा | जो मोहम्मद को बचपन से जानता था उसका चाचा जिसने ना जाने कितनी बार उसकी जान बचाई पर मरते दम तक कभी कुरैशो का मजहब नहीं छोड़ा और इस्लाम नहीं स्वीकार क्यों की उसे पता था के उसका भतीजा पागल हैं | खुद आयशा ने हफ्सा के साथ मिल कर मोहम्मद को जेहर दे दिया कहते हैं मोहम्मद फिर एक बच्ची से शादी की योजना बना रहा था | फिर लाभ तो आयेशा के बाप अबू बक्र को मिला पहला खलीफा वही हुआ | पर बचा कोई नहीं खानदान में दिया जलने वाला कोई नहीं रहा | आयेशा बुरी तरह क़त्ल कर दी गई | जिसने कुरान लिखी उसे खुद मोहम्मद ने मरवा दिया | खैर इतना शैतानियत जो भी लिखेगा मरेगा तो हैं ही | पूरी दुनिया आज इस्लामीकरण के खतरे के तले डगमगा रही हैं, बेकसूर मारे जा रहे हैं | इन सब का कारण मोहम्मद था जो कोई भी ये सब देख लेगा उसे समझने में एक पल नहीं लगेगा |

पर मोहम्मद को तो ऐसा हौवा बना रखा हैं के उसके बारे में तो बात करनी ही नहीं | वो इसलिए क्यों की खुद मोहम्मद ने उन सबको बुरी तरह क़त्ल करवा दिया जिसने भी उसके पैगम्बर होने का प्रमाण माँगा | खुद मोहम्मद ने ना जाने कितनी बार अपनी बात से पलटा हैं इसका प्रमाण कुरान की विपरीत बाते हैं | इसी लिए मुसलमान मोहम्मद को छुपा के रखते हैं | मोहम्मद ने ज़न्नत में खुद की सिफारिश का पेच भी फसा रखा हैं ताकि कोई उसके गलत कामो पर ऊँगली ना उठाए | पर खुद जिनको भी ये बाते पता चलती हैं उनका मानवीय पक्ष इस्लाम छुडवा देता हैं | पर जो वाकई शैतान हैं वो सही जगह हैं क्यों के दुनिया के सारे गलत काम इस्लाम में जायज हैं अगर वो गैर मुसलमान के साथ किये जाए | तो कोई क्यों लूटने, बलात्कार, हत्या, झूठ बोलने की इजाजत छोड़ेगा अगर वह अपराधी परवर्ती का हैं |

एक बात और के मोहम्मद देखने में बदसूरत था हदीसो की माने तो |जिस व्यक्ति ने उसकी तस्वीर बने मोहम्मद ने उसे देश निकाला दे दिया | औरते उस से नफरत करती थी | शायद इसी लिए वो औरतो का बलात्कार करता था | बात दिखने की नहीं हैं बात तो कर्मो की हैं जो इतने गलत थे की उनको छुपा के रखने में ही इस्लाम की भलाई हैं |

5 जुलाई 
 कर्ण की उदारता

एक बार भगवान श्रीकृष्ण पाण्डवों के साथ बातचीत कर रहे थे। भगवान उस समय कर्ण की उदारता की बार-बार प्रशंसा कर रहे थे। यह बात अर्जुन को अच्छी नहीं लगी। 

अर्जुन ने कहा – श्यामसुन्दर! हमारे बड़े भाई धर्मराज जी से बढ़कर उदार तो कोई है ही नहीं, फिर आप उनके सामने कर्ण की इतनी प्रशंसा क्यों करते हैं?

भगवान ने कहा – ये बात मैं तुम्हें फिर कभी समझा दूँगा।

कुछ दिनों के बाद अर्जुन को साथ लेकर भगवान श्रीकृष्ण धर्मराज युधिष्ठिर के राजभवन के दरवाजे पर ब्राह्मण का वेश बनाकर पहुँचे।

उन्होंने धर्मराज से कहा – हमको एक मन चन्दन की सूखी लकड़ी चाहिये। आप कृपा करके मँगा दें।

उस दिन जोर की वर्षा हो रही थी। कहीं से भी लकड़ी लाने पर वह अवश्य भीग जाती। महाराज युधिष्ठिर ने नगर में अपने सेवक भेजे, किन्तु संयोग की बात ऐसी कि कहीं भी चन्दन की सूखी लकड़ी सेर-आध-सेर से अधिक नहीं मिली।

युधिष्ठिर ने हाथ जोड़कर प्रार्थना की – आज सूखा चन्दन मिल नहीं रहा है। आप लोग कोई और वस्तु चाहें तो तुरन्त दी जा सकती है।

भगवान श्रीकृष्ण ने कहा – सूखा चन्दन नहीं मिलता तो न सही। हमें कुछ और नहीं चाहिये।

वहाँ से अर्जुन को साथ लिये उसी ब्राह्मण के वेश में भगवान श्रीकृष्ण कर्ण के यहाँ पहुँचे। कर्ण ने बड़ी श्रद्धा से उनका स्वागत किया।

भगवान ने कहा – हमें इसी समय एक मन सूखी लकड़ी चाहिये।

कर्ण ने दोनों ब्राह्मणों को आसन पर बैठाकर उनकी पूजा की। फिर धनुष चढ़ाकर उन्होंने बाण उठाया। बाण मार-मारकर कर्ण ने अपने सुन्दर महल के मूल्यवान किवाड़, चौखटें, पलंग आदि तोड़ डाले और लकड़ियों का ढेर लगा दिया। सब लकड़ियाँ चन्दन की थीं।

यह देखकर श्रीकृष्ण ने कर्ण से कहा – तुमने सूखी लकड़ियों के लिये इतनी मूल्यवान वस्तुऍ क्यों नष्ट की ?

कर्ण हाथ जोड़कर बोले – इस समय वर्षा हो रही है। बाहर से लकड़ी मँगाने में देर होगी। आप लोगों को रुकना पड़ेता। लकड़ी भीग भी जाती। ये सब वस्तुएँ तो फिर बन जायेगीं किन्तु मेरे यहाँ आये अतिथि को निराश होना पड़े या कष्ट हो तो वह दुःख मेरे हृदय से कभी दूर नहीं होगा।

भगवान श्रीकृष्ण ने कर्ण को यशस्वी होने का आशीर्वाद दिया और वहाँ से अर्जुन के साथ चले आये।

लौटकर भगवान ने अर्जुन से कहा – अर्जुन! देखो, धर्मराज युधिष्ठिर के भवन के द्वार, चौखटे भी चन्दन के हैं। चन्दन की दूसरी वस्तुएँ भी राजभवन में है। और पांडव उन्हें देने में कृपण भी नहीं हैं लेकिन चन्दन की लकड़ी माँगने पर भी उन वस्तुओं को देने की याद धर्मराज को नहीं आयी। पर भी कर्ण ने अपने घर की मूल्यवान वस्तुएँ तोड़कर लकड़ी दे दी। दान-धर्म में जिसके प्राण बसते हैं उसी को समय पर याद आता है कि वस्तु कैसे देनी है।
कर्ण स्वभाव से उदार हैं और धर्मराज युधिष्ठिर विचार करके धर्म पर स्थिर रहते हैं। मैं इसी से कर्ण की प्रशंसा करता हूँ।

सीख 👉 इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि परोपकार, उदारता, त्याग तथा अच्छे कर्म करने का स्वभाव बना लेना चाहिये। जो लोग नित्य अच्छे कर्म नहीं करते और सोचते हैं कि कोई बड़ा अवसर पर महान कार्य करेंगे उनको अवसर आने पर भी सूझता ही नहीं। और जो छोटे-छोटे अवसरों पर भी त्याग तथा उपकार करने का स्वभाव बना लेता है, वही महान कार्य करने में भी सफल होता है।

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मेवाड़ की वीरांगना पन्नाधाय के बलिदान की अमर कथा
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मेवाड़ के सिंहासन पर विराजमान विक्रमादित्य ढीठ और अभिमानी राजा था। विभिन्न प्रसिद्ध व्यक्तियों ने उसके राज्य को छोड़ना आरम्भ कर दिया था। रानी कर्णावती, विक्रमादित्य के भय से अपने पुत्र उदय को पालन पोषण के लिए पन्ना धाय के पास छोड़ दिया जिससे वो अपने छोटे शिशु के साथ उदय की देखभाल कर सके।
महाराजा राणा सांगा का देहान्त हुआ तब उनके पु्त्र उदयसिंह बहुत छोटे थे, बनवीर को सोंपा गया था काम नन्हें उदयसिंह की रक्षा व लालन पालन करके बडा करने का और समुचित शिक्षा दिलवाने का पर बनवीर के मन में कुछ ‌और ही चल रहा था। उसनें नन्हें बालक उदयस
पन्ना धाय उस समय नन्हें राजकुमार उदयसिंह की धाय मां थी और उनके लालन पालन में व्यस्त थी | साथ ही पन्ना धाय एक बहुत ही स्वाभिमानी, देशभक्त और राणा का एहसान मानने वाली महिला थी | पन्ना धाय का भी एक पुत्र था जो लगभग उम्र में उदयसिंह के जितना ही था।
जब पन्ना को बनवीर के गंदे नापाक इरादों का पता चला तो उसने नन्हें बालक उदयसिंह की जगह अपने पुत्र को सुला दिया तभी बनवीर नें नंगी तलवार लिये कक्ष में प्रवेश किया और पन्नाधाय से पूछा की कहां है उदयसिंह तो पन्ना धाय नें सिर्फ इशारा किया और तत्काल बनवीर नें पन्ना के पुत्र को मौत के घाट उतार दिया, वह समझ रहा था की मेनें मेवाड के होने वाले राजा उदयसिंह को मार डाला है पर हकीहत में पन्ना धाय नें अपने पुत्र की कुर्बानी दे दी थी और मेवाड राजवंश के चिराग को बचा लिया था।
एक गुप्त रास्ते से पन्नाधाय नें बालक उदयसिंह को झूठे पत्तल से भरे टोकरे में रखवाकर किसी विश्वासपात्र के हाथों महल से बाहर सुरक्षित जगह पहुंचा दिया | कोई महिला या नारी अपने राजा के पु्त्र की रक्षा करने के लिये इतना बडा बलिदान करे ये बहुत बडी बात है और पन्नाधाय एक बहुत बडा उदाहरण है नारी शक्ति के त्याग और बलिदान का | पन्ना नें अपने पुत्र का बलिदान करते हुए राणा के पु्त्र के जीवन को बचा लिया था और आज भी वह अपने इस अनोखे बलिदान के लिये जानी जाती है | पन्ना धाय अमर है |



🌺विट्ठलव्यास 🌺