Samaadhan

Saturday, 24 November 2012

जानिये कौन कौन से देश में कैसे कैसे फैला इस्लाम ? Share it !

जानिये कौन कौन से देश में कैसे कैसे फैला इस्लाम ? Share it !

1) सौदी अरब में मुहम्मद के जन्म के (इस 570) वक्त अधिकतर लोग यहूदी (Jew) और ईसाई (Christian) धर्मि थे, और कुछ आदिवासीयों का अलग धर्म था जो अब लुप्त हो चूका है! वहा पर आतंक फैला कर मुहम्मद और उसके अनुयायियों ने जनता को मुसलमान बनाया और सौदी अरब इस्लामी देश बन गया !

2) फ़िर सौदी अरब के मुस्लिमों ने कुरान से प्रभावित होकर येमेन, फिलिस्तीन,

इजिप्त, जोर्डन आदि यहूदी (Judaism) धर्मि राष्ट्रों को हमला कर मुस्लिम देशो में तब्दील किया !

3) कुछ हि सालो में पड़ोस के उत्तर आफ्रिका, ओमान, टर्की, ईराक आदि ईसाई (Christian) देशो को हमला कर मुसलमान बनाया गया !

4) इरान एक पारसी (Zoroastrian) देश था, लेकिन इरान के पारसी धर्मी लोगो को जिस क्रूरता से मुसलमान बनाया गया यह हम नहीं भूल सकते. आज कोई यकीन भी नहीं करेगा की इतिहास में इरान का इस्लाम से दूर दूर तक कोई नाता नहीं था ! आज पारसी धर्म लुप्त होने के कगार पर है !

5) फ़िर आया अफगानिस्तान का नंबर, जहा बौद्ध (Buddhism) धर्म का प्रभाव था. अफगानिस्तान को भी रक्तपात कर इस्लामी देश बनाया गया. बामियान की बौद्ध की मुर्तिया तालिबान ने किस तरह तोड़ी यह तो पूरी दुनिया देख चूका है !

6) फ़िर आया पाकिस्तान याने भारत का हि एक हिस्सा ! यहाँ पंजाब, सिंध राज्यों में जो भी हिंदू राजा थे उनका कत्लेआम कर सभी हिंदू जनता से इस्लाम काबुल करवाया गया ! मुघलो ने भारत में करोडो लोगो को मुसलमान बनाया, लेकिन वे भारत को पूरी तरह इस्लामी राष्ट्र बनाने में कामयाब नहीं हो सके !

7) बाद में समुन्दर के रास्ते से मुसलमान मलेशिया और इंडोनेशिया तक पहुच गये, ये दोनों बौद्ध राष्ट्र आज इस्लामी राष्ट्र बन चुके है !

मित्रों संभल जाओ, इन मुस्लिम राष्ट्रों की स्थिति क्या है हम देख हि रहे है ! इनकी जिंदगी में आतंकवाद, जिहाद, मदरसे, बम धमाके, शिया-सुन्नी दंगे, कुर्बानी, इस्लाम के अलावा कुछ भी नहीं ! अगर भारतीय अब भी नहीं संभले तो भारत का हिंदू से मुस्लिम देश बनना तय है !
Posted by Vivek Surange at 04:28 No comments:
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Sunday, 11 November 2012

आयुर्वेदिक दोहे--------
_____________________________________________________

1.जहाँ कहीं भी आपको,काँटा कोइ लग जाय। दूधी पीस लगाइये, काँटा बाहर आय।।
2.मिश्री कत्था तनिक सा,चूसें मुँह में डाल। मुँह में छाले हों अगर,दूर होंय
तत्काल।।
3.पौदीना औ इलायची, लीजै दो-दो ग्राम। खायें उसे उबाल कर, उल्टी से आराम।।
4.छिलका लेंय इलायची,दो या तीन गिराम। सिर दर्द मुँह सूजना, लगा होय आराम।।
5.अण्डी पत्ता वृंत पर, चुना तनिक मिलाय। बार-बार तिल पर घिसे,तिल बाहर आ
जाय।।
6.गाजर का रस पीजिये, आवश्कतानुसार। सभी जगह उपलब्ध यह,दूर करे अतिसार।।
7.खट्टा दामिड़ रस, दही,गाजर शाक पकाय। दूर करेगा अर्श को,जो भी इसको खाय।।
8.रस अनार की कली का,नाक बूँद दो डाल। खून बहे जो नाक से, बंद होय तत्काल।।
9.भून मुनक्का शुद्ध घी,सैंधा नमक मिलाय। चक्कर आना बंद हों,जो भी इसको खाय।।
10.मूली की शाखों का रस,ले निकाल सौ ग्राम। तीन बार दिन में पियें, पथरी से
आराम।।
11.दो चम्मच रस प्याज की,मिश्री सँग पी जाय। पथरी केवल बीस दिन,में गल बाहर
जाय।
12.आधा कप अंगूर रस, केसर जरा मिलाय। पथरी से आराम हो, रोगी प्रतिदिन खाय।।
13.सदा करेला रस पिये,सुबहा हो औ शाम। दो चम्मच की मात्रा, पथरी से आराम।।
14.एक डेढ़ अनुपात कप, पालक रस चौलाइ। चीनी सँग लें बीस दिन,पथरी दे न दिखाइ।।
15.खीरे का रस लीजिये,कुछ दिन तीस ग्राम। लगातार सेवन करें, पथरी से आराम।।
16.बैगन भुर्ता बीज बिन,पन्द्रह दिन गर खाय। गल-गल करके आपकी,पथरी बाहर आय।।
17.लेकर कुलथी दाल को,पतली मगर बनाय। इसको नियमित खाय तो,पथरी बाहर आय।।
18.दामिड़(अनार) छिलका सुखाकर,पीसे चूर बनाय। सुबह-शाम जल डाल कम, पी मुँह
बदबू जाय।।
19. चूना घी और शहद को, ले सम भाग मिलाय। बिच्छू को विष दूर हो, इसको यदि
लगाय।।
20. गरम नीर को कीजिये, उसमें शहद मिलाय। तीन बार दिन लीजिये, तो जुकाम मिट
जाय।।
21. अदरक रस मधु(शहद) भाग सम, करें अगर उपयोग। दूर आपसे होयगा, कफ औ खाँसी
रोग।।
22. ताजे तुलसी-पत्र का, पीजे रस दस ग्राम। पेट दर्द से पायँगे, कुछ पल का
आराम।।
23.बहुत सहज उपचार है, यदि आग जल जाय। मींगी पीस कपास की, फौरन जले लगाय।।
24.रुई जलाकर भस्म कर, वहाँ करें भुरकाव। जल्दी ही आराम हो, होय जहाँ पर घाव।।
25.नीम-पत्र के चूर्ण मैं, अजवायन इक ग्राम। गुण संग पीजै पेट के, कीड़ों से
आराम।।
26.दो-दो चम्मच शहद औ, रस ले नीम का पात। रोग पीलिया दूर हो, उठे पिये जो
प्रात।।
27.मिश्री के संग पीजिये, रस ये पत्ते नीम। पेंचिश के ये रोग में, काम न कोई
हकीम।।
28.हरड बहेडा आँवला चौथी नीम गिलोय, पंचम जीरा डालकर सुमिरन काया होय॥
29.सावन में गुड खावै, सो मौहर बराबर पावै॥
 — with
Posted by Vivek Surange at 04:52 No comments:
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Saturday, 3 November 2012

इसाई बनाने के तौर - तरीके


  • Jugal Kishore Somani


    दोस्तों , आज मेरी जिन्दगी में हुई एक घटना का विवरण आपके साथ बांटना चाहता हूँ :-
    सन २००५ की १७ फरवरी को मैं मेरी धर्मपत्नी श्रीमती शांता के साथ बैंगलोर से जयपुर की ट्रेन में यात्रा के लिए दोपहर को रवाना हुआ . अर्द्ध रात्रि सिकंदराबाद / हैदराबाद स्टेशन पर कुछ वनवासी से युवक हमारे कोच में आ घुसे , संयोग से उनके डिब्बे में आते ही ट्रेन चल पड़ी . ये वनवासी , जो करीब ५ - ६ थे , घबराए हुए से थे . हिन्दी भाषा तो उनको आती नहीं थी किन्तु राजस्थान का एक परिवार जो बेल्लारी में रहता था , इसी कम्पार्टमेंट में था , उन्होंने उनसे बात की तो मालुम पडा कि ये लोग करीब ३०० की संख्या में धर्मावरम से कोटा जा रहे हैं , जहां इन हिन्दुओं को धर्मांतरण कर इसाई बनाया जाना है . इन लोगों को लाने वाले एजेंट टाइप पादरी ( ४ पुरुष और २ महिलाएं ) इसी कोच में यात्रा कर रहे हैं और उनके पास ही इनकी टिकटें हैं . साधारण कोच में यात्रा कर रहे इन लोगों को टिकट चेकर ने पकड़ लिया इस कारण ये लोग अपनी टिकटें लेने हेतु इस कोच में आये हैं . चूंकि अगले स्टेशन के आने में करीब २ घण्टों की देरी थी अतः हमने धीरे - धीरे इन लोगों से धर्मांतरण संबंधी पूरी जानकारी प्राप्त कर ली . इन लोगों को काफी लालच देकर ये लोग ले जा रहे थे किन्तु इन भोले भाले वनवासियों के मन में भारी क्लेश भी था . ये कत्तई अपना हिन्दू धर्म छोड़ने को तैयार नहीं थे किन्तु भयंकर भुखमरी के शिकार विवश होकर इस कुकृत्य को करने तैयार हुए .
    मैंने करीब ४ बजे प्रातः ( १८ फरवरी ) सरदारशहर के डा. महेश शर्मा को मोबाइल से संपर्क कर पूरी कहानी बताई . फिर जयपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुख्यालय " भारती भवन " के पधाधिकारियों ( माननीय शंकर जी भाई साहब एवं माननीय अजेय जी भाई साहब ) को पूरी स्थिति से अवगत कराया . चूंकि यह ट्रेन अगले दिन ( १९ फरवरी ) अर्द्ध रात्रि को कोटा पहुँचती है अतएव इस कुकृत्य का भंडाफोड़ की पूरी तैयारी कर ली गयी .
    इस बीच एजेंटो को कुछ संदेह हुआ कि यह ( यानि मैं ) कोई न कोई गड़बड़ कर रहा है . इटारसी आने से पहले एक छोटे स्टेशन पर कारण वश गाड़ी रुक गयी , मैं मोबाइल चार्ज करने हेतु एक कर्मचारी के सामने ही बने कमरे की ओर गया . चूंकि हमारा कोच सामने ही था - देखता हूँ कि चारों पुरुष एजेंटों ने अपने सूटकेशों से रिवाल्वरे / पिस्तोले निकाल कर अपनी कमर में दबा ली और डिब्बे से नीचे उतर कर मेरी तरफ बढ़ने लगे . प्रभु कृपा से उसी समय ट्रेन ने चलने की व्हीशल बजा दी , कोच के दूसरे दरवाजे से मैं भी भाग कर कोच में चढ़ गया . मुझे खतरे का ज्ञान तो हो ही गया था , अतः मैं कम्पार्टमेंट के अन्दर की तरफ बैठ गया ( हम दोनों की सीट ७ ; ८ थी - साइड वाली ) इटारसी आते आते नेटवर्क आ गया और मैंने जयपुर सारी बात बता दी . उन्होंने भोपाल तक सावधान रहने को कहा . भोपाल स्टेशन पर २ हट्टे कट्टे स्वयं सेवक कोच में चढ़ कर मेरे पास ही बैठ गए . भवानी मंडी में २ और कार्यकर्ता आ गए .
    २ घंटे विलम्ब से गाड़ी करीब ४ बजे कोटा पहुँची . भयंकर शर्दी थी . करीब १५०० स्वयं सेवकों ने गाड़ी को घेर लिया . सारे वनवासियों को उन्होंने संरक्षण प्रदान किया और उन एजेंटों को पुलिस के हवाले किया .
    चूंकि मैंने पहले ही बता दिया था कि इन वनबंधुओं के पास कोई गर्म कपड़ा भी नहीं है और भूखें भी हैं अतएव कोटा के साथी कम्बले आदि लेकर ही स्टेशन आये थे . जहां इनके रुकने की व्यवस्था संघ परिवार ने की थी वहाँ इन लोगों के सहायतार्थ २ - ३ कन्नड़ / हिन्दी भाषी बंधुओं की भी व्यवस्था के साथ ही साम्भर - चावल आदि दक्षिण भारतीय भोजन का प्रबंध भी था . नंगे पैरों में चप्पल / जूतों तक पहनाने की अतुलनीय व्यवस्था कोटा साथियों ने की .
    मुझे सीधे जयपुर पहुँचाने का आदेश था ताकि रूबरू पूरी बात बता सकूँ .
    तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा जी ने विधान सभा में धर्मांतरण रोकने संबंधी विधेयक पारित कर राज्यपाल ( उस समय श्रीमती प्रतिभा पाटिल थी ) के समक्ष प्रस्तुत किया , जो आज तक पास नहीं हो सका . आशा है कि यदि आगामी राज्य सरकार गैर कांग्रेसी आई तो हो सकता है कि यह विधेयक पुनः सदन पटल पर रख कर पास कराया जाय .
    -------------------------------
    साथियों , इस तरह के कुकृत्य न जाने देश में कहाँ कहाँ हो रहे हैं , यदि हम सोये रहें , अपने ही भाइयों से छुआछूत जैसा भेदभाव करते रहें तो ....... हाँ , ऐसा ही होता रहेगा ...........
Posted by Vivek Surange at 23:57 No comments:
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Tuesday, 30 October 2012




Mahendra Singh shared अनिल गुप्ता's photo.
अब तक मिली जानकारी के अनुसार ''पी ऍफ़ आई'' (popular front of india )नामक संगठन ने (जो की सिमी का बदला हुआ रूप है और फिलहाल मजदुर संगठन और मुस्लिम आरक्षण जैसी योजनाओं का चोला ओढ़े है )कोंग्रेस और दक्षिण के राज्यों में स्थित वामपंथी नेताओ और मुलायम सिंह के राजनेतिक संरक्षण और विभिन्न मुस्लिम मदरसों से प्राप्त होने वाली आर्थिक सहायता से 7 लाख सशस्त्र सेनिक इस देश में तैयार कर लिए है .......जो की आ
ने वाले कुछ ही सालों में में बहुत ही भयानक स्तिथि इस देश में पैदा करने वाले है यूँ तो संघ के अनुसार वो इससे निपटने की पूरी तय्यारी कर रहा है मगर फिर भी चूँकि पी ऍफ़ आई को राजनेतिक और देश विरोधी संरक्षण प्राप्त है तो ग्रह युद्ध की स्तिथि भयानक ही होगी .................

(ये संगठन पहले एक पादरी का हाथ काट कर मीडिया में चर्चा में आया था और हाल ही में मंगलोर में हुई एबीवीपी के सदस्यों सचिन और विशाल की हत्या में भी इनका हाथ होना पाया गया है )


ऐसा नहीं है की इसकी जानकारी इस देश की खुफिया एजेंसी को नहीं है ..मगर अभी केवल वेट एंड वाच की रणनीति के तेहत खुफिया एजेंसियों का काम करना ...मेरी समझ से परे हो रहा है .........

एक खुफिया एजेंसी में नियुक्त व्यक्ति इस मज़बूरी को राजनेतिक संरक्षण के द्वारा पैदा हुई मज़बूरी बता रहे है और कहते है की हमारे हाथ सरकार ने बाँध रखे है ...................अब में सोच नहीं पा रहा हूँ की ये खुफिया एजेंसियां सरकार के लिए कार्य करती है या देश के लिए ??????
प्रशांत शिशोदिया ....
.
नोट : इस तस्वीर में सबसे पहली फोटो आईबीएन 7 की उस रिपोर्ट की है जो एक बार ही फ्लेश हो कर रह गयी और दबा दी गयी ,दूसरी तस्वीर पी.ऍफ़.आई. की परेड रिहर्सल की है तथा तीसरी तस्वीर पिछले साल २६ नवम्बर की है जब दिल्ली में इनका आयोजन हुआ था और मुलायम ने भी उसमे शिरकत की थी
अब तक मिली जानकारी के अनुसार ''पी ऍफ़ आई'' (popular front of india )नामक संगठन ने (जो की सिमी का बदला हुआ रूप है और फिलहाल मजदुर संगठन और मुस्लिम आरक्षण जैसी योजनाओं का चोला ओढ़े है )कोंग्रेस और दक्षिण के राज्यों में स्थित वामपंथी नेताओ और मुलायम सिंह के राजनेतिक संरक्षण और विभिन्न मुस्लिम मदरसों से प्राप्त होने वाली आर्थिक सहायता से 7 लाख सशस्त्र सेनिक इस देश में तैयार कर लिए है .......जो की आ
ने वाले कुछ ही सालों में में बहुत ही भयानक स्तिथि इस देश में पैदा करने वाले है यूँ तो संघ के अनुसार वो इससे निपटने की पूरी तय्यारी कर रहा है मगर फिर भी चूँकि पी ऍफ़ आई को राजनेतिक और देश विरोधी संरक्षण प्राप्त है तो ग्रह युद्ध की स्तिथि भयानक ही होगी .................

(ये संगठन पहले एक पादरी का हाथ काट कर मीडिया में चर्चा में आया था और हाल ही में मंगलोर में हुई एबीवीपी के सदस्यों सचिन और विशाल की हत्या में भी इनका हाथ होना पाया गया है )


ऐसा नहीं है की इसकी जानकारी इस देश की खुफिया एजेंसी को नहीं है ..मगर अभी केवल वेट एंड वाच की रणनीति के तेहत खुफिया एजेंसियों का काम करना ...मेरी समझ से परे हो रहा है .........

एक खुफिया एजेंसी में नियुक्त व्यक्ति इस मज़बूरी को राजनेतिक संरक्षण के द्वारा पैदा हुई मज़बूरी बता रहे है और कहते है की हमारे हाथ सरकार ने बाँध रखे है ...................अब में सोच नहीं पा रहा हूँ की ये खुफिया एजेंसियां सरकार के लिए कार्य करती है या देश के लिए ??????
प्रशांत शिशोदिया ....
.
नोट : इस तस्वीर में सबसे पहली फोटो आईबीएन 7 की उस रिपोर्ट की है जो एक बार ही फ्लेश हो कर रह गयी और दबा दी गयी ,दूसरी तस्वीर पी.ऍफ़.आई. की परेड रिहर्सल की है तथा तीसरी तस्वीर पिछले साल २६ नवम्बर की है जब दिल्ली में इनका आयोजन हुआ था और मुलायम ने भी उसमे शिरकत की थी
Posted by Vivek Surange at 05:07 No comments:
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Sunday, 28 October 2012

भगवान राम जब अयोध्या लौट कर आये थे


Sumit Chawla
भगवान राम जब अयोध्या लौट कर आये थे, यदि उस समय हमारी मिडिया रही होती तो प्रेस कांफ्रेंस में कैसे कैसे सवाल करती.....

-आपके टीम के श्री हनुमान को लंका सन्देश देने भेजा था पर उन्होंने वहाँ आग लगा दी.... क्या आपकी टीम में अंदरूनी तौर पर वैचारिक मतभेद है?

- क्या हनुमान के ऊपर अशोक वाटिका उजाड़ने के आरोप में वन विभाग द्वारा मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए?

- आपके सहयोगी श्री सुग्रीव पर अपने भाई का राज्य हड़पने का आरोप है|....क्या आपने इसकी जांच करवाई?

- क्या ये सच है कि सुग्रीव की राज्य हड़पने की साजिश के मास्टर माइंड आप है?

- आप चौदह साल तक वनवास में रहे... आपको अपने खर्चे चलाने के लिए फंड कहाँ से मिले?

- क्या आपने उस फंड का ऑडिट करवाया है?

- आपने सिर्फ रावण पर हमला क्यों किया, जबकि राक्षस और भी थे? क्या ये लंका की डेमोक्रेसी को अस्थिर करने की साजिश थी?

- क्या ये सच नहीं है कि रावण को परेशान करने के मकसद से आपने उनके परिवार के निर्दोष लोगो जैसे कुम्भकरण पर हमला किया?

- क्या आपकी टीम के हनुमान द्वारा संजीवनी बूटी की जगह पूरा पहाड उखाड़ लेना सरकारी जमीन के साथ छेड़छाड़ नहीं?

- क्या ये सच नहीं कि आपने हमले से पहले समुद्र पर पुल बनाने का ठेका अपने करीबी नल और नील को नहीं दिया?

- आपने पुल बनाने के लिए छोटी छोटी गिलहरियों से काम करवाया..... क्या इसके लिए आप पर बाल श्रम कानून के तहत मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए?

- आपने बिना किसी पद पर रहते हुए युद्ध के समय इन्द्र से सहायता प्राप्त की और उनका रथ लेकर रावण पर हमला किया.. क्या आप इन्द्र की टीम ए है?

- इस सहायता के बदले में क्या आपने इन्द्र को ये वादा नहीं किया कि अयोध्या का राजा बनने के बाद आप उन्हें अयोध्या के आस पास की जमीन दे देंगे?

- आप युद्ध में अयोध्या से रथ न मंगवा कर इन्द्र से रथ लिया.... क्या ये इन्द्र की कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया?

- क्या आपने जामवंत को सहायता के बदले राष्ट्रपति बनाने का वादा नहीं किया?
विभीषण अपने टीम में शामिल करके आपने दल-बदल क़ानून का सरासर उलंघन नहीं किया ?

- और आखिरी सवाल, कि आपने भरत को राजा बनाया ... क्या आपको अपनी नेतृत्व क्षमता संदेह था?

बोलो सियापति श्री रामचंद्र की जय.... :) :)
Posted by Vivek Surange at 20:17 No comments:
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हिन्दू धर्म में 33 करोड़ देवी-देवता हैं. ??

गलतफहमी---

लोगों को इस बात की बहुत बड़ी गलतफहमी है कि...... हिन्दू सनातन धर्म में 33 करोड़ देवी-देवता हैं...!
लेकिन ऐसा है नहीं..... और, सच्चाई इसके बिलकुल ही विपरीत है...!

दरअसल.... हमारे वेदों में उल्लेख है .... 33""कोटि"" देवी-देवता..!
अब ""कोटि"" का अर्थ""प्रकार"" भी होता है.. और ............ ""करोड़"" भी...!

तो... मूर्खों ने उसे हिंदी में.... करोड़ पढना शुरू कर दिया...... जबकि वेदों का तात्पर्य ..... 33 कोटि... अर्थात ..... 33 प्रकार के देवी-देवताओं से है...(उच्च कोटि.. निम्न कोटि..... इत्यादि शब्दतो आपने सुना ही होगा.... जिसका अर्थ भीकरोड़ ना होकर..प्रकार होता है)

ये एक ऐसी भूल है.... जिसने वेदों में लिखे पूरे अर्थ को ही परिवर्तित कर दिया....!
इसे आप इस निम्नलिखित उदहारण से और अच्छी तरह समझ सकते हैं....!
--------------- ------
अगर कोई कहता है कि......बच्चों को""कमरे में बंद रखा"" गया है...!
और दूसरा इसी वाक्य की मात्रा को बदल कर बोले कि...... बच्चों को कमरे में "" बंदर खा गया"" है.....!! (बंद रखा= बंदर खा)
--------------- ------

कुछ ऐसी ही भूल ..... अनुवादकों से हुई ..... अथवा... दुश्मनों द्वारा जानबूझ कर दिया गया.... ताकि, इसे HIGHLIGHT किया जा सके..!

सिर्फ इतना ही नहीं....हमारे धार्मिक ग्रंथों में साफ-साफउल्लेख है कि....""निरंजनो निराकारो..एको देवो महेश्वरः""..... ........ अर्थात.... इस ब्रह्माण्ड में सिर्फ एक ही देव हैं... जो निरंजन...निराका र महादेव हैं...!
साथ ही... यहाँ एक बात ध्यान में रखने योग्य बात है कि..... हिन्दू सनातन धर्म..... मानव की उत्पत्तिके साथ ही बना है..... और प्राकृतिक है...... इसीलिए ... हमारे धर्ममें प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर जीना बताया गया है...... और, प्रकृति को भी भगवान की उपाधि दी गयी है..... ताकि लोगप्रकृति के साथ खिलवाड़ ना करें....!
जैसे कि....

@@ गंगा को देवी माना जाता है...... क्योंकि ... गंगाजल में सैकड़ों प्रकार की हिमालय की औषधियां घुली होती हैं..!

@@ गाय को माता कहा जाता है ... क्योंकि .... गाय का दूध अमृततुल्य ... और, उनका गोबर... एवंगौ मूत्र में विभिन्न प्रकार की... औषधीय गुण पाए जाते हैं...!

@@ तुलसी के पौधे को भगवान इसीलिए माना जाता है कि.... तुलसी के पौधे के हर भाग में विभिन्न औषधीय गुण हैं...!

@@ इसी तरह ... वट और बरगद के वृक्ष घने होने के कारण ज्यादा ऑक्सीजन देते हैं.... और, थके हुए राहगीर को छाया भी प्रदान करते हैं...!

यही कारण है कि.... हमारे हिन्दू धर्म ग्रंथों में ..... प्रकृति पूजा को प्राथमिकता दी गयी है.....क्योंकि, प्रकृति से ही मनुष्य जाति है.... ना कि मनुष्य जाति से प्रकृति है..!
अतः.... प्रकृति को धर्म से जोड़ा जाना और उनकी पूजा करना सर्वथा उपर्युक्त है.... !
यही कारण है कि........ हमारे धर्म ग्रंथों में.... सूर्य, चन्द्र...वरुण.... वायु.. अग्नि को भी देवता माना गया है.... और, इसी प्रकार..... कुल 33 प्रकार के देवी देवता हैं...!
इसीलिए, आपलोग बिलकुल भी भ्रम में ना रहें...... क्योंकि... ब्रह्माण्ड में सिर्फ एक ही देव हैं... जो निरंजन...निराका र महादेव हैं...! —

.अतः कुल 33 प्रकार के देवता हैं......

12 आदित्य है ----->धाता,मित्, अर्यमा,शक्र,वरुण,अंश,भग , विवस्वान,पूषा,सविता,त्वष्टा,एवं विष्णु..!

8 वसु हैं......धर,ध्रुव,सोम,अह,अनिल,अनल,प्रत्युष,एवं.,प्रभाष

11 रूद्र हैं...हर ,बहुरूप.त्र्यम्बक.अपराजिता.वृषाकपि .शम्भू.कपर्दी..रेवत ..म्रग्व्यध.शर्व..तथा.कपाली.

2 अश्विनी कुमार हैं.....

कुल................12 +8 +11 +2 =33


धन्यवाद !
Posted by Vivek Surange at 20:13 No comments:
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Monday, 8 October 2012

जब उन्हें गुजरात का मुख्यमंत्री बनाने का फैसला लिया गया -




मित्रों मेरे यहाँ जब मैं गांधीनगर में आया तो उससे पहले मैं दिल्ली में रहता था ,कई वर्षों से गुजरात आया नहीं था ,अचानक गुजरात का कार्य मेरे जिम्मे आ गया ,और मुझे याद है जब मुझे मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया गया तो उस समय अटल जी ने मेरे पास फोन किया मुझे ये बताने के लिए, उन्होंने पूछा कि भई कहाँ हो ,मैंने कहा कि मैं शमशान में हूँ, ये सुनकर वे हंस पड़े और बोले कि यार तुम श्मशान में हो ,मैं तुमसे अब क्या बात करूँ ,मैंने कहा नहीं अटल जी आपने मुझे फोन किया है तो कोई काम होगा आप बताइए ,अटल जी बोले अच्छा ये बताओ कि कितनी बजे लौटोगे और ये तुम शमशान में क्यों हो, मैंने बताया कि ये जो माधवराव सिंधिया जी का निधन हुआ है एक्सीडेंट होने के कारण उसमें उनके साथ एक पत्रकार भी था गोपाल नाम का ,उसकी भी उनके साथ ही मृत्यु हुई है ,तो मैं गोपाल के क्रियाकर्म में आया हूँ क्योंकि माधवराव जी के क्रियाकर्म में तो सब जायेंगे लेकिन गोपाल के क्रियाकर्म में कौन जाएगा,उसके क्रियाकर्म में भी तो कोई होना चाहिए , मैं उस गोपाल के क्रियाकर्म में था कोई और राजनेता नहीं था बस दो-चार उसके पत्रकार मित्र थे ,

तो उसके बाद रात को मैं अटल जी से मिलने गया वहाँ जाकर पता चला कि मुझे ये गुजरात का मुख्यमंत्री बनाने का फैसला हुआ है और कुछ दिनों बाद मुझे मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेनी है, तो ये जानने के बाद मैंने दिल्ली से गुजरात में फोन मिलाया अपनी पार्टी के दफ्तर में , मैंने कहा भई ये तुम मुझे बुला तो रहे हो लेकिन मैं रहूँगा कहाँ क्योंकि मेरे पास तो घर नहीं है, तो उन्होंने कहा कि आप चिंता मत कीजिये हम सर्किट हॉउस में आपको एक कमरा बुक करवा देंगे , तो मैंने उनसे कहा कि देखो भैया आप कमरा जरूर बुक करवाइए लेकिन एक बात का ध्यान रहे ,मैं कोई MLA या अभी सरकार का हिस्सा नहीं हूँ इसलिए अगर उस कमरे के किराए का पूरा पैसा राज्य कि सरकार लेती है तो ही कमरा बुक करवाइयेगा, वो अलग बात है कि गुजरात में सरकार मेरी ही पार्टी कि थी लेकिन फिर भी मैंने पूरा चार्ज देकर वो कमरा बुक करवाया और वहीं से जिंदगी कि शुरुआत एक नए मोड़ पे हुई दोस्तों

खैर कुछ दिनों सर्किट हाउस के उस कमरे में रहा, फिर उसके बाद शपथ-समारोह हुआ ,मुख्यमंत्री बना और फिर उसके कारण एक quarter दे दिया गया रहने के लिए लेकिन जब मैं वहाँ सर्किट हाउस के कमरे में था और अभी मेरा मुख्यमंत्री बनना बाकी था तो ढेरों लोग मुझे मिलने आते थे ,सब कहते थे मोदी जी अब आप आये हो ,चुनाव सिर पे है ,कैसे जीतोगे , कुछ भी करो या ना करो लेकिन बस एक काम जरूर कर दो, कम से कम गाँव में शाम को खाना खाते समय तो बिजली मिले बस इतना कर दो , मित्रों आपको जानके आश्चर्य होगा कि उस समय मेरे गुजरात में शाम को भोजन के समय भी बिजली उपलब्ध नहीं होती थी ,अँधेरा रहता था और लोग मुझे यही कहते थे कि साहब बस इतना कर दो , मित्रों मैं भी गाँव से हूँ और एक गरीब परिवार से हूँ तो मुझे मालुम था कि जब परीक्षा के दिन होते हैं और रात को बिजली चली जाती है तो एक विद्यार्थी को कितनी पीड़ा होती है ,उस पीड़ा को मैंने भुगता हुआ था , तो मैंने तय किया कि मैं कुछ करूँगा और मैं उस पर सोचने लगा लेकिन करीब एक साल तक मैं इस बारे में कुछ कर नहीं पाया क्योंकि उसी साल चुनाव हुए और मैं दौबारा चुनकर आया,

जब मैं दौबारा चुना गया तो मैंने अपने अफसरों को बुलाया और कहा कि हमें जनता को 24 घंटे बिजली देनी है , उन सारे अफसरों ने और मेरी पूरी सरकार ने मना कर दिया कि गुजरात में 24 घंटे देने के लिए बिजली है ही नहीं और ये सम्भव ही नहीं है , छह महीने तक फाइलें घुमती रही मैं चीखता रहा कि अरे भई कुछ करो लेकिन कुछ नहीं हुआ

आखिर में मैंने फैसला किया कि अब इस काम को मैं अपने हाथ में लूँगा और मैंने एक ज्योतिग्राम योजना बनाई जिसके जरिये मैंने केवल 1000 दिन के अंदर-२ गुजरात में 24 घंटे 3-Phased Uninterrupted Power Supply उपलब्ध करवाई , मित्रों ये मात्र 1000 दिन में 24 घंटे बिजली देना कैसे सम्भव हुआ ,ये बातें मैं आपको सिर्फ इसलिए बता रहा हूँ कि आपको विश्वास हो जाए कि देश को बदला जा सकता है , वो ही मुलाजिम ,वो ही बिजली कम्पनियां ,वो ही फाइलें ,वो ही दफ्तर ,वो ही सरकारी अफसर सब कुछ वही लेकिन फिर भी स्तिथियाँ बदली जा सकी , और कोई ऐसा नहीं था कि मोदी से पहले बिजली के बटन बंद कर रखे थे और मोदी के कहने से वे बटन चालू कर दिए , इस ज्योतिग्राम योजना को जमीन पर उतारने के लिए मुझे 1000 दिन में बिजली के 23 लाख नए खम्बे डालने पड़े , Can You Imagine केवल 1000 दिनों में बिजली के 23 लाख नए खम्बे डालना......क्या लगता है

मैंने महाराष्ट्र से पूरा माल उठवा लिया ,मध्य-प्रदेश से उठवा लिया ,राजस्थान से उठवा लिया, उस समय देश में इनका जितना भी जहां भी manufacturing होता था सारा का सारा मैं खरीद कर गुजरात में ले आता था, इन्हीं 1000 दिनों में मैंने बिजली के 53,000 नए Transformers लगवाए गुजरात में , मित्रों आपके महाराष्ट्र के गाँव में अगर कोई Transformer जल जाता होगा तो 3-4 महीनों तक उसे बदला या ठीक नहीं किया जाता होगा, मेरे यहाँ भी यही होता था ,किसान रोता था ,वो बिजली कम्पनियों के दफ्तर में जाकर आरती उतारता था और साथ में प्रसाद भी चढा देता था लेकिन उसके बाद भी 45 दिनों तक Transformer change नहीं होता था ,उसकी फसल बर्बाद हो जाती थी ,उसके सपने चूर-२ हो जाते थे लेकिन परिस्तिथि बदलती नहीं थी मित्रों , ऐसी व्यवस्था के भीतर भी सिर्फ 1000 दिन में मैंने 56,000 नए Transformers लगवाकर दिखाए और इन्हीं 1000 दिनों में 75000 Kms कि बिजली कि तारें बिछवाई ,अब आप सोचिये मित्रों वही मुलाजिम, वही बिजली कम्पनियां ,वही फाइलें ,वही दफ्तर ,वही सरकारी अफसर लेकिन इस सबके बावजूद जब मैं कर सकता हूँ तो आप भी कर सकते हैं दोस्तों ,आप भी कर सकते हैं बस करने का नेक और मजबूत इरादा चाहिए साथियों ''

- नरेंद्र मोदी
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