Sunday, 23 July 2017


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जिनका भी बहिष्कार हुआ उनके कुकर्मों के कारण हुआ ...
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आज तक भारत के हजारों वर्षों के इतिहास मर एक भी व्यक्ति का जातिगत शोषण नहीं हुआ; एक भी व्यक्ति का बहिष्कार जातिगत आधार पर नहीं हुआ; जिनका भी बहिष्कार हुआ उनके कुकर्मों के कारण हुआ फिर वे हिन्दू समाज के लिए वैसे ही हो गए जैसे कि आज अमेरिका के लिए नॉर्थ कोरिया।
वर्तमान समय मे बना हुआ जातिगत आरक्षण तब तक खत्म नहीं हो सकता जब तक इन काल्पनिक शोषण की कहानियों का झूठ सामने नहीं लाया जाता। शोषण की कहानियां उसी तर्ज पर बनीं है जैसे कि आर्यन-द्रविड़ियन और कांग्रेस द्वारा बनाई भगवा आतंकवाद की कहानियां...
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राजस्थान के दलितों में एक जाति होती है "बेड़िया". इनका पुश्तैनी काम होता है अपने परिवार की महिलाओं से वेश्यावृत्ति करवाना।
अब आप सोच रहे होंगे कि मैं भांग खा के यह पोस्ट लिख रहा हूँ पर इसकी सत्यता आप इस पर गूगल करके जान सकतें हैं, कई लिंक मिलेंगे; बेड़िया लोगों की पुश्तैनी वेश्यावृत्ति पर यू ट्यूब पर वीडियो और दूरदर्शन की डाक्यूमेंट्री भी देख सकतें हैं।
अगर आप बेड़ियों के इलाके में शाम के समय जाएं तो आपको नुक्कड़ या फुटपाथ पर अकेले खड़े हुए बेड़िया दलित मिल जाएंगे जो अपनी बहन, पत्नी या बेटी के लिए रात का ग्राहक तलाश रहे होतें हैं। बेड़िये, अपनी लड़कियों को अच्छे से खिला पिला कर रखतें है क्योंकि लड़की जितनी भरी-भरी, गदरायी होगी; उसका मार्केट में रेट और अच्छा मिलेगा।
बेड़िया लड़कियां वेश्यावृत्ति अपनी माँ से सीखतीं है, उनकी माँ अपनी नानी से और ये क्रम सैकड़ों सालों से चलता आ रहा है। बेड़िया समाज से हिंदुओं की कोई जाति रोटी-बेटी का संबंध नहीं रखती, यहाँ तक कि असमानता का रोना रोने वाली दलितों की बाहुबली जातियाँ मीणा, जाटव, चमार, पासी इत्यादि जातियाँ भी अपनी बेटी बेड़ियों को देने में घबरातीं है क्योंकि इन्हें पता है इनकी बेटी को अगले दिन से कोठे पर बिठा दिया जाएगा और उसके बेड़िया पति, ससुर और देवर बाजार में उसका रेट लगाने लगेंगे।
बेड़ियों की इन्ही हरकतों के कारण ये हिन्दू समाज से बहिष्कृत रहे, पर अम्बेडकर ने इन्हें मनुस्मृति द्वारा अछूत बनाना प्रचारित किया।
बहिष्कृत जातियों की बात सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा में एक दलित जाति है "बावरिया". यह ब्रिटिश सरकार के समय से आपराधिक जाति (criminal tribe) है। यह जाति अपहरण, हत्या, चोरी, डकैती, लूटपाट, बलात्कार आदि जैसी घटनाओं के लिए कुख्यात है।
लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर यह जाति अभी लूटपाट भी कर रही है। ये सड़कों कर कीलें बिछा देतें है; उसके बाद कोई बस या कार पंचर टायर की वजह से आगे जा के रूकती है तो यात्रियों को बंधक बना के लूटते हैं और महिलाओं, लड़कियों के साथ बलात्कार करतें है। किसी पुरुष ने रोकना चाहा तो उसकी हत्या कर देतें है। बहुचर्चित बुलंदशहर गैंग रेप भी बावरिया गिरोह के दलितों ने किया था जिसमे एक महिला और 14 वर्ष की बेटी का गैंगरेप किया था। अगर आप कभी भी लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर अपनी कार से जाएं तो सुनिश्चित कीजिये कि कार की टंकी में पेट्रोल फुल है और कार अच्छी कंडीशन में हैं। क्योंकि आपकी कार यदि हाईवे पर रोक गई तो फिर आपके साँसों की डोर बावरिया गिरोह के भीमटों के हाथ मे होगी।
बावरिया, अपनी आपराधिक प्रवृत्ति कर कारण वर्तमान समय मे भी बहिष्कृत जाति है।
अब महाराष्ट्र आतें है। देश में सबसे महत्वपूर्ण बहिष्कार यदि किसी जाति का हुआ है तो वे महाराष्ट्र के महार लोग हैं, माने अम्बेडकर की जाति। रोचक बात ये है कि न तो ये जाति बावरिया की तरह लूटपाट करती थी, न ही बावरिया की तरह वेश्यावृत्ति, फिर भी बुरी तरह बहिष्कृत हुए। महार एक सवर्ण क्षत्रिय जाति हुआ करती थी। महारों के हाथ मे चौकीदारी, राज्य के महत्वपूर्ण लोगों की सुरक्षा, काफिलों और खजाने का जिम्मा महारों के पास होता था। महारों की समाज मे बहुत इज़्ज़त थी। जब कभी दो लोगों के बीच भूमि विवाद होता था तो इसे सुलझाने के लिए महार आते थे और इनकी कही बात अंतिम होती थी। महारों के लिए परिस्थितियां तब बदल गईं जब इन्होंने जमीन के लालच में अंग्रेजी सेना के साथ मिल कर 1 जनवरी 1818 को पुणे के कोरेगांव में 28,000 पेशवा सैनिकों को मार दिया। आज भी पुणे में भीमा कोरेगांव की मीनार, महारों के देशद्रोह और अपराध की गवाही दे रही है। इसके युद्ध के लिए महारों में कोई पछतावा नही बल्कि आज भी हर बरस 1 जनवरी को कई महार वहां उसी युद्ध के लिए शौर्य दिवस मनाने के लिए इकट्ठा होतें हैं।
इस युद्ध के बाद महारों को सभी मराठी लोगों ने बहिष्कृत कर दिया। दूध वाले ने दूध देने बंद, पुजारी ने मंदिर में घुसना बंद, अध्यापकों ने इन्हें शिक्षा देना बंद कर दिया, कुएं से पानी भरना बंद कर दिया।
तत्कालीन ईसाई मिशनरी John Muir, जो संस्कृत का विद्वान भी था, उसने महारों के साथ मिल कर मनु स्मृति को एडिट किया और इतिहास बना कर ये प्रचारित किया गया कि महारों का बहिष्कार मनु स्मृति द्वारा हुआ है।
1920 में अम्बेडकर ने महारों के भीमा कोरेगांव युद्ध में बात छुपाई और अपनी जाति के बहिष्कार का आरोप ब्राह्मणों पर लगा के ब्राह्मण विरोध (Anti Brahminism) को संस्थागत रूप दिया और इसके बात दलित आंदोलन ने राजनैतिक रूप लिया। ये वे बातें हैं जो इतिहास के पन्नों से मिटा दीं गईं हैं। हिन्दू संगठन भी भाईचारे के चक्कर इन सब बातों को उजागर नहीं करते।
आज तक भारत के हजारों वर्षों के इतिहास मर एक भी व्यक्ति का जातिगत शोषण नहीं हुआ; एक भी व्यक्ति का बहिष्कार जातिगत आधार पर नहीं हुआ; जिनका भी बहिष्कार हुआ उनके कुकर्मों के कारण हुआ फिर वे हिन्दू समाज के लिए वैसे ही हो गए जैसे कि आज अमेरिका के लिए नॉर्थ कोरिया।
वर्तमान समय मे बना हुआ जातिगत आरक्षण तब तक खत्म नहीं हो सकता जब तक इन काल्पनिक शोषण की कहानियों का झूठ सामने नहीं लाया जाता। शोषण की कहानियां उसी तर्ज पर बनीं है जैसे कि आर्यन-द्रविड़ियन और कांग्रेस द्वारा बनाई भगवा आतंकवाद की कहानियां।
कलम उठाइये और झूठे इतिहास को बदल दीजिये..!!
15 जुलाई 
 


मैं जानता हूँ, भाजपा को और कट्टर बनने की जरूरत है
 लेकिन हिन्दू ही मूर्ख है। क्या किया जाय ..?

जब भी मैं मुल्लों की असलियत बताने वाला पोस्ट डालता हूँ तो कई गधे हिन्दू कमेंट करते हैं “क्या कलाम साहब मुस्लिम नहीं हैं”.....अबे ढक्कन हिंदुओं ....बंगाल में क्यों नहीं ,कोई कलाम जा कर हिंदुओं को बचाता ..?

जिस कलाम की बात करते हो उसे खुद 100% मुल्ले ही मुसलमान नहीं मानते। कलाम ने कुरान पढ़ी ही नहीं ...जितनी पढ़ी उसे माना हि नही ...इसलिये उन्हे मुसलमान नही माना जा सकता... वह तो महामानव था जो गलती से इस्लाम मे पेदा हुआ
 भाजपा 
इसीलिए कट्टर हिंदुओं की बात नहीं करती ..क्योंकि हिन्दू मूर्ख हैं...आज भाजपा राम मंदिर बनाना शुरू करे तो हिन्दू ही सबसे ज्यादा विरोध करेंगे... बाबरी ढांचा गिराने वाली पार्टी भाजपा ही है जिसे हिंदुओं ने यूपी की सत्ता से दूर रखा ..और हिंदुओं पर गोली चलाने वाला दोगला मुलायम को.. हिंदुओं ने ही सत्ता सौंपी और आज लात खा रहे हैं।

हने हमारे पुरखो की कट्टरता के कारण ही विजय मिली...बस वही उर्जा मैं नवयुवकों मे भरने का प्रयास करता हूँ अपने पोस्ट के द्वारा। सबकुछ भाजपा सरकार नही करती भाइसाब.. कुछ तो हमे ही करना होगा। भाजपा सरकार सहायक हो सकती हे

आप कट्टर बनेंगे तो सरकार भी कट्टर मिलेगी ...सरकार आपमे से ही कोई चलाता है...अपनी रक्षा स्वम करो।


Vithal Vyas
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Tarishi Jain मत बनिए, अपने बगल में पल रहे अजगर को पहचानिये ...

"हाँ ... हैं मेरे 3 मुस्लिम पति, कर लो क्या कर लोगे मेरा" ऐसा बुर्का दत्त ने कहा था।

ऐसे लोगों को Dhimmi कहा जाता है । यूँ धिम्मी का Dictionary meaning है , किसी इस्लामिक राज्य का ऐसा विधर्मी जिसे जज़िया चुकाने के एवज़ में राज्य की सुरक्षा और विशेषाधिकार प्राप्त हों और जिसे शरिया क़ानून से छूट मिली हुई हो ।

मुझे ढाका में मारी गयी Tarishi Jain से कोई हमदर्दी नहीं अब नहीं हो पा रही है... उसी तरह मुझे दिल्ली के उस dentist से भी कोई हमदर्दी नहीं , वो जिसे कुछ मुल्ले बांग्लादेशियों ने उसके घर में घुस के मार दिया था ...इसी तरह मुझे बंगाल के उन हिंदुओं से भी कोई हमदर्दी नहीं , जो वहाँ रोज़ाना मोमता बानो के राज में पिटते हैं । 

Tarishi Jain नव सेक्युलर धिम्मी प्रजाति की वो जीव थी जो बांग्लादेश जैसे घटिया गलीज देश में जिसका नाम भर लेने से घिन आती है वहाँ अपने गोभक्षी मित्रों के साथ छुट्टियां मनाने गयी थी .... Tarishi Jain का जब नाम आता है तो मुझे उस लड़की की कहानी याद आती है जिसने एक अजगर का बच्चा पाल रखा था , और वो उस से इतना प्यार करती थी कि उसी के साथ ही सोती थी ।

उस लड़की ने अपने स्कूल में निबंध लिखा , my favourite pet तो उस अजगर का ज़िक्र किया । निबंध पढ़ के उसकी teacher डर गयी और उसने इस लड़की को चेताया । लड़की ने कहा कि नहीं मेरा प्यारा अजगर तो बड़ा मासूम है । वो मुझे कुछ नहीं कहता । तब उसकी teacher ने पूछा , क्या जब ये तुम्हारे साथ सोया होता है तो अपने शरीर को stretch कर लंबा करने की कोशिश करता है ।

हाँ करता तो है ........

हाँ बेटा , वो अपने शरीर को खींच के लंबा कर रहा है और उस दिन की इंतज़ार कर रहा है , जिस दिन वो तुम्हें निगल के पचा सके ... याद रखिये कि आपके बगल में एक मासूम सा अजगर पल रहा है जो रोज़ खुद को खींच के लंबा कर रहा है ....... उस दिन के इंतज़ार में , कि आपको निगल सके ।

Tarishi Jain मत बनिए, अपने बगल में पल रहे अजगर को पहचानिये ...
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अमीर बनने पर एक मुस्लिम क्या करता है-

1. हज़ जाता है। 
2. मदरसा खोलता है। 
3. हिन्दुओं को मुस्लिम बनाने में सहयोग करता हैं। 
4. आतंकवाद के लिए धन मुहिया करवाता है।

अमीर बनने पर एक हिन्दू क्या करता है-

1. साईं (चाँद मुहम्मद) की संध्या करवाता है।
2. होटल, बार , शॉपिंग माल में जाने लगता है।
3. विदेश में छुट्टियां बनाने जाता है।
4. थाईलैंड में मसाज करवाने जाता है।

जिस जाति का धनी वर्ग उसकी रक्षा, उसके विकास और उसकी वृद्धि में कोई सहयोग नहीं देगा तो उस जाति का भविष्य अंधकारमय नहीं तो क्या होगा?

मित्रों जरा सोचो!
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एक बार एक मुसलमान ने मुझसे पूछा- भैया तुम क्यों हम मुसलमानो से इतनी नफरत करते हो।#विट्ठलव्यास
मैंने कहा मैंने कब नफरत की तुमसे बताओ ।
वो कहने लगा तुम्हारी कट्टर हिन्दू वाली बातें और तुम्हारे पोस्ट से ही पता चलता है की तुम हमसे कितनी घृणा करते हो।
अब मैंने पूछा मियां तुम सूअर से इतनी घृणा करते हो भला सूअर ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है।
उसने कहा- क्योंकि हमारे मजहब सूअर हराम है।
मैंने पूछा क्यों हराम है- क्योंकि ये एक गन्दा जानवर है। मल- मूत्र खाने वाला और गंदगी फ़ैलाने वाला जानवर है।
मैंने कहा- यदि किसी सूअर को महंगे से साबुन से नहला कर परफ्यूम लगा कर साफ जगह पर रखा जाए तो क्या तब भी उससे नफरत करोगे।
उसने कहा- हाँ , क्योंकि सूअर तो सूअर है चाहे उसे जितना भी नहला साफ़ रख लो वह तो गंद फैलायेगा ही।
चाहे उसे जन्नत जैसी जगह पर भी रखो वो तो वहां भी जहन्नुम मचा देगा।
मैंने कहा - बिलकुल ठीक कहा तुमने जैसे सूअर सूअर ही रहता है वैसे ही मुसलमान मुसलमान रहता है। उसे दुनियां के किसी भी हिस्से में बसाया जाये वहां वो जिहाद नाम की गंदगी फैलाता है। यूरोप एशिया अमेरिका...... कहाँ आतंक नहीं फैला रखा है।
तुमने सीरिया इराक अफगान लीबिया लेबनान....... किसे छोड़ा है।
स्वर्ग जैसे कश्मीर को नर्क बना डाला।
तुम में और सूअर में फर्क ही क्या है।
फिर भी अजीब बात है सूअर तुम्हारे लिए हराम है।
अब वो मुझे जलती हुई आँखों से देखकर बोला- तुम कुछ ज्यादा आगे बढ़ गए हो।
मैंने कहा मियां सच तो सच होता है बुरा तो लगेगा ही।
उसने कहा ,अच्छा तो क्या तुम हिन्दू सुअरो से प्यार करते हो।
मैंने कहा मियां हिन्दू धर्म में किसी भी प्राणी से घृणा करना नहीं सिखाते । 

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 भारत सोने की चिड़िया नाही बल्कि "सोने का बाज"रहा होगा.
जब से मोदी जी प्रधानमंत्री बने थे तभी उन्होंने कहा था ना खाऊंगा ना खाने दूंगा इस पर लोगो ने उनका बहुत मजाक उड़ाया था कालेधन पर उनकी घोषणा पर भी उन्हें जुमलेबाज और ना जाने क्या क्या संज्ञाएँ देकर उनके ईमानदारी और मेहनत से किये कार्य का मजाक उड़ाया....लेकिन हम कितने अज्ञानी है और देश के प्रति कितने लापरवाह है ये रिपोर्ट पढ़कर हमे अंदाजा लग जायेगा कि चोर लोगो ने देश को किस कदर लूटा. नोटबंदी जैसा फैसला लेने के लिए कलेजा लगता है और मोदी जी का ये निर्णय देश को क्या दे गया देखिए.
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि बीते 3 साल में 71 हजार 941 करोड़ रुपए की अघोषित संपत्ति मिली है। सरकार ने बताया कि ये पैसा इनकम टैक्स (IT) डिपार्टमेंट की बड़े पैमाने पर की गई सर्चिंग और सर्वे के दौरान मिला। नोटबंदी के दौरान 5400 करोड़ जमा हुए...
फाइनेंस मिनिस्ट्री ने कोर्ट को बताया कि 9 नवंबर से 10 जनवरी तक नोटबंदी के दौरान 5400 करोड़ की अघोषित आय जमा हुई। इसमें 303.367 किलो का सोना जब्त हुआ।
सरकार ने 1 अप्रैल, 2014 से 28 फरवरी, 2017 तक की अघोषित आय का ब्यौरा दिया है। इसमें नोटबंदी का समय भी शामिल है।सरकार के सुप्रीम कोर्ट में दिए एफिडेविट के मुताबिक, "तीन सालों के दौरान आईटी डिपार्टमेंट ने 2,027 ग्रुप्स पर छापे मारे, जिसमें 36,051 करोड़ से ज्यादा की अघोषित आय बरामद हुई। इसके अलावा 2890 करोड़ की अघोषित संपत्ति भी जब्त की।
3 साल में 15000 सर्वे किए
एफिडेविट के मुताबिक, आईटी डिपार्टमेंट ने 1 अप्रैल, 2014 से लेकर 28 फरवरी, 2017 तक 15 हजार सर्वे किए, जिसमें 33 हजार करोड़ की अघोषित आय का पता चला।
सरकार ने नोटबंदी के अचीवमेंट्स बताते हुए कहा कि 9 नवंबर से शुरू हुई नोटबंदी के 2 महीनों के दौरान आईटी डिपार्टमेंट द्वारा सख्त कदम उठाए गए।
नोटबंदी के दौरान आईटी डिपार्टमेंट ने 1100 सर्चिंग-सर्वे और 5100 वेरिफिकेशंस किए। इस कार्रवाई के चलते 610 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई, जिसमें 513 करोड़ का कैश शामिल है।
फाइनेंस मिनिस्ट्री ने उस बात को खारिज कर दिया था, जिसमें 500 और 1000 के पुराने नोटों को बदलने के लिए और मोहलत देने की बात कही गई थी।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, 11 जुलाई को गृह मंत्रालय ने कहा था कि इंटेलिजेंस एजेंसीज के मुताबिक पुराने नोटों को बदलने का बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल हो रहा था।
एफिडेविट के मुताबिक, "नवंबर 2016 में 147.9 करोड़ और दिसंबर में 306.897 करोड़ रु. का कैश जब्त किया गया। वहीं नवंबर में 69.1 किलो और दिसंबर 2016 में 234.267 किलो सोना जब्त किया गया।"
नोटबंदी के दौरान गड़बड़ियों के चलते 400 से ज्यादा मामले सीबीआई और एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) को रैफर किए गए।
देश के लोगो को समझना होगा कि मोदी जी वो शख्स है जो देशहित में कड़े निर्णय लेते वक्त वोट बैंक का ख्याल नही रखते.
Abhay Arondekar


Saturday, 22 July 2017



"भजन और आरती" को नमाज़ से तुलना करने से पहले ये जान लीजिये कि नमाज़ क्या है ??
पहले आप जानिए मस्जिदों में लाउडस्पीकर 📢📣 पर अजान में क्या बोला जाता है ? 
सर्वप्रथम चार बार 'अल्लाहो अकबर' अर्थात्
"अल्लाह सबसे बड़ा है !"
इसके बाद दो बार 'अशहदो अल ला इलाह इल्लल्लाह' अर्थात्
"मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं है।"
फिर दो बार 'अशहदु अन-ना मुहम्मदर्रसूलुल्लाह'
जिसका अर्थ है:
"मैं गवाही देता हूँ कि हजरत मुहम्मद अल्लाह के रसूल (उपदेशक) हैं।"
फिर दाहिनी ओर मुँह करके दो बार, 'हय-या अललसला' अर्थात्
"आओ नमाज की ओर।"
फिर बांई ओर मुँह करके दो बार, 'हय-या अलल फलाह' अर्थात्
"आओ कामयाबी की ओर।"
इसके बाद फिर सामने (पश्चिम) मुँह करके,
'अल्लाहो अकबर'
अर्थात्
"अल्लाह ही एकमात्र सबसे बड़ा है।"
अंत में एक बार, 'ला इलाह इल्लल्लाह'
अर्थात्
"अल्लाह के सिवा कोई भी पूज्य नहीं है।"
🌄 "भोर की अजान" में एक वाक्य अधिक कहा जाता है, 'अस्सलात खैरूम मिनननौम'
अर्थात्
"नमाज नींद से बेहतर है।"
अब भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में क्या इस तरह से लाउडस्पीकर 📢 पर दूसरे धर्मों के मानने वालों की भावनाओं को ठेस पहुंचाया जा सकता है ?? 
क्या कोई यह कह सकता है कि सिर्फ अल्लाह ही एकमात्र पूज्य है, दूसरे कोई पूज्य नहीं है ? 😡
देशहित में जन-जागरण हेतु अधिक से अधिक शेयर करें!
 🚩🚩 वंदेमातरम, भारत माता की जय ! 🚩
Vithal Vyas
स्मार्ट फोन छोटे बच्चों के लिए बहुत हानिकारक..

आजकल लगभग हर आदमी के पास स्मार्टफोन है, और हमारे इस फ़ोन में इतना कुछ होता है कि हम या तो हर वक़्त फ़ोन में ही लगे रहते हैं, या फिर बार बार चेक करते रहते हैं. थोड़ी देर तक कोई टू टां की आवाज न आये तो चेक करना पड़ता है न, कि चल तो रा है की नहीं?
छोटे-छोटे 4-6 महीने के बच्चे भी इसकी स्क्रीन में रोशनी और रंग देखकर आकर्षित होते हैं, और फिर इसे छूना चाहते हैं. पकड़ना चाहते है, इसे देखना चाहते हैं की आखिर ये है क्या ? दरअसल फिर हम उन्हें फ़ोन दे देते हैं, और फिर धीरे धीरे बच्चों को स्मार्टफोन की आदत हो जाती है. जैसे जैसे बच्चे बड़े होने लगते हैं. उनकी ये आदत हमारे लिए ही समस्या बन जाती है.
अमेरिकी एकेडमी ऑफ पेड्रियाटिक ने एक चेतावनी भी जारी की है, जिसमें ये कहा गया है कि बच्चों को स्मार्टफोन से जितना हो सके दूर ही रखें. डॉक्टर्स भी कहते हैं कि छोटे बच्चों का स्क्रीन वाचिंग टाइम कम से कम रखें. यानि फ़ोन,टैब, लैपटॉप, कंप्यूटर, टीवी से उन्हें दूर ही रखें. अभी हाल ही में हुयी रिसर्च से ये बात सामने आयी है, कि स्मार्टफोन्स का इस्तेमाल बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में बाधक हो सकता है. अगर आपका बच्चा चीज़ों की और आकर्षित होकर उनकी और जाता है, उन्हें छूता है, उठता है, पटकता है, इधर उधर घूमता है, इधर उधर देखता है, सुनता है, चीज़ों को मुँह में डाल कर उनका स्वाद देखता है, उनको छूता है,उनके बारे में जानने की कोशिश करता है तो उसका विकास हो रहा है, लेकिन अगर वो सिर्फ फ़ोन को हाथ में लेकर बैठा रहे तो उसका कितना विकास होगा आप खुद समझ सकते हैं.
.बच्चों के डिजीटल मीडिया के ज्यादा इस्तेमाल से उनकी नींद की क्वालिटी पर असर पड़ता है. नींद कम हो जाती है, और नींद पूरी भी नहीं होती!इससे बच्चों के मानसिक विकास पर बहुत बुरा असर पड़ता है. माता पिता के अपने बच्चे के साथ रिलेशन ख़राब होंगे, छोटी उम्र में आपका बच्चा आपके साथ वक़्त गुज़ारे तो ज़ादा अच्छा है. ये आपके बच्चे के क्रिएटिव माइंड को सिमित कर देता है. अभी बच्चे का मानसिक विकास हो. वो अपने आसपास की दुनिया को देखने समझने की बजाये अगर फ़ोन में ही लगा रहेगा तो उसकी सोच वही तक रह जाएगी. ये आपके बच्चे की सीखने की क्षमता को रोक देता है!

बच्चों को इसकी आदत क्यों और कैसे पड़ती है?
पेरेंट्स ने कुछ काम करता होता है, बच्चों को कुछ देर शांत रखने के लिए लोग अपने बच्चों के हाथ में फ़ोन दे देते हैं.
रोते हुए बच्चे को चुप करने के लिए उसके हाथ में फ़ोन दे देते हैं.
उन्हें खाना खिलाना है तो हाथ में फ़ोन देके उसे बहलाने की कोशिश करना या फिर किसी भी वजह से बच्चे के हाथ में फ़ोन देना देने से इस आदत की शुरूआत होती है.
क्या करें की बच्चे को इसकी आदत न पड़े?
बच्चों के सामने फ़ोन का इस्तेमाल कम से कम करें.
बच्चों को बिजी रखने के लिए उनके हाथ में फ़ोन न दें, कोई और खिलौना दें.
रोते बच्चे को चुप करने के लिए उसके हाथ में फ़ोन न दें.
वा चींटी आला ए ठीक था. चींटी मरगी चींटी मरगी, न्यू करते थे, अर बच्चे चुप भी करां थे।
बच्चों को खेलने के लिए कोई और खिलौना दे दें.

ऐसे दूर करें ये समस्या
बच्चों को फ़ोन से रखें दूर
बच्चों के सामने फ़ोन का इस्तेमाल कम से कम करें
बच्चों को बिजी रखने के लिए उन्हें फ़ोन न दें,
रोते बच्चे को चुप करने के लिए उन्हें में फ़ोन न दें
बच्चों को बहलाने के लिए कोई और खिलौना दें
धीरे-धीरे बच्चों की स्क्रीन टाइमिंग कम करते चले जाएं
बच्चों की आउटडोर एक्टिविटी बढ़ाएं।
 बच्चों को ये हैं हानियाँ
1..नींद का कम और ख़राब होना
2..बच्चे की सृजनात्मकता को करता है सीमित
बच्चे बन जाते हैं ज़िद्दी.
महात्मा गांधी का एक कारनामा---

हुतात्मा महाशय राजपाल की बलिदान-गाथा एवं रंगीला रसूल

विट्ठलव्यास 

सन १९२३ में मुसलमानों की ओर से दो पुस्तकें "१९ वीं सदी का महर्षि" और “कृष्ण,तेरी गीता जलानी पड़ेगी ” प्रकाशित हुई थी। पहली पुस्तक में आर्यसमाज का संस्थापक स्वामी दयानंद का सत्यार्थ प्रकाश के १४ सम्मुलास में कुरान की समीक्षा से खीज कर उनके विरुद्ध आपतिजनक एवं घिनोना चित्रण प्रकाशित किया था। जबकि दूसरी पुस्तक में श्री कृष्ण जी महाराज के पवित्र चरित्र पर कीचड़ उछाला गया था। उस दौर में विधर्मियों की ऐसी शरारतें चलती ही रहती थी पर धर्म प्रेमी सज्जन उनका प्रतिकार उन्ही के तरीके से करते थे। 

महाशय राजपाल ने स्वामी दयानंद और श्री कृष्ण जी महाराज के अपमान का प्रति उत्तर १९२४ में "रंगीला रसूल" के नाम से पुस्तक छाप कर दिया, जिसमे मुहम्मद साहिब की जीवनी व्यंग्यात्मक शैली में प्रस्तुत की गयी थी। यह पुस्तक उर्दू में थी और इसमें सभी घटनाएँ इतिहास सम्मत और प्रमाणिक थी। पुस्तक में लेखक के नाम के स्थान पर “दूध का दूध और पानी का पानी "छपा था। वास्तव में इस पुस्तक के लेखक पंडित चमूपति जी थे जो की आर्यसमाज के श्रेष्ठ विद्वान् थे। वे महाशय राजपाल के अभिन्न मित्र थे। मुसलमानों के ओर से संभावित प्रतिक्रिया के कारण चमूपति जी इस पुस्तक में अपना नाम नहीं देना चाहते थे। इसलिए उन्होंने महाशय राजपाल से वचन ले लिया की चाहे कुछ भी हो जाये,कितनी भी विकट स्थिति क्यूँ न आ जाये वे किसी को भी पुस्तक के लेखक का नाम नहीं बतायेगे। महाशय राजपाल ने अपने वचन की रक्षा अपने प्राणों की बलि देकर की पर पंडित चमूपति सरीखे विद्वान् पर आंच तक न आने दी। १९२४ में छपी रंगीला रसूल बिकती रही पर किसी ने उसके विरुद्ध शोर न मचाया

फिर महात्मा गाँधी ने अपनी मुस्लिम परस्त निति में इस पुस्तक के विरुद्ध एक लेख लिखा। इस पर कट्टरवादी मुसलमानों ने महाशय राजपाल के विरुद्ध आन्दोलन छेड़ दिया। सरकार ने उनके विरुद्ध १५३ए धारा के अधीन अभियोग चला दिया। अभियोग चार वर्ष तक चला। राजपाल जी को छोटे न्यायालय ने डेढ़ वर्ष का कारावास तथा १००० रूपये का दंड सुनाया गया। इस फैसले के विरुद्ध अपील करने पर सजा एक वर्ष तक कम कर दी गई। इसके बाद मामला हाई कोर्ट में गया। कँवर दिलीप सिंह की अदालत ने महाशय राजपाल को दोषमुक्त करार दे दिया। 

मुसलमान इस निर्णय से भड़क उठे। खुदाबख्स नामक एक पहलवान मुसलमान ने महाशय जी पर हमला कर दिया जब वे अपनी दुकान पर बैठे थे पर संयोग से आर्य सन्यासी स्वतंत्रानंद जी महाराज एवं स्वामी वेदानन्द जी महाराज वह उपस्थित थे। उन्होंने घातक को ऐसा कसकर दबोचा की वह छुट न सका। उसे पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया गया, उसे सात साल की सजा हुई। रविवार ८ अक्टूबर १९२७ को स्वामी सत्यानन्द जी महाराज को महाशय राजपाल समझ कर अब्दुल अज़ीज़ नमक एक मतान्ध मुसलमान ने एक हाथ में चाकू ,एक हाथ में उस्तरा लेकर हमला कर दिया। स्वामी जी घायल कर वह भागना ही चाह रहा था की पड़ोस के दूकानदार महाशय नानकचंद जी कपूर ने उसे पकड़ने का प्रयास किया। इस प्रयास में वे भी घायल हो गए तो उनके छोटे भाई लाला चूनीलाल जी जी उसकी ओर लपके। 

उन्हें भी घायल करते हुए हत्यारा भाग निकला पर उसे चौक अनारकली पर पकड़ लिया गया। उसे चोदह वर्ष की सजा हुई ओर तदन्तर तीन वर्ष के लिए शांति की गारंटी का दंड सुनाया गया। स्वामी सत्यानन्द जी के घाव ठीक होने में करीब डेढ़ महीना लगा। ६ अप्रैल १९२९ को महाशय राजपाल अपनी दुकान पर आराम कर रहे थे। तभी इल्मदीन नामक एक मतान्ध मुसलमान ने महाशय जी की छाती में छुरा घोप दिया जिससे महाशय जी का तत्काल प्राणांत हो गया।

इलमदीन को फांसी से बचाने के लिए पूरा मुस्लिम समाज लग गया मगर आर्य्यों के पुरुषार्थ के आगे विफल हो गए। धर्म रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देकर महाशय राजपाल जी अमर हो गए। 

सलंग्न चित्र- हुतात्मा महाशय राजपाल
 — Niftyearner Software's के साथ.

Friday, 21 July 2017


हिन्दूत्व राष्ट्रवाद से चिढ़ गांधी और नेहरू को थी, जिंन्ना को थी, पाकिस्तान को शुरू से है और अब चीन की सरकारी मीडिया को भी हो गई है।
अब राहुल, राबर्ट वाड्रा और प्रियंका गांधी की आव भगत चीनी दूतावास में हो रही है।
मणिशंकर अय्यर का पाकिस्तानियो और कश्मीर के अलगाव वादी आतंकवादियो से प्यार तो जग जाहिर है।
इन सबकी खिचड़ी सिक्किम-भूटान के डोकलाम मामले में एक साथ पक रही है।
लेकिन हमें देश के कुल 22.50 लाख सुरक्षा बल की ताकत पर गर्व है। चीन, पाकिस्तान और अन्य देश दुश्मनों को करारा जबाब मिलेगा..
उमा शंकर सिंह
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कांग्रेस अपनी खोयी सत्ता को पाने के लिए भारत के किसी भी दुश्मन या दुश्मन देश अथवा आतंकवादी संगठन की मदद ले सकती है .भविष्य में भी ये वर्तमान मोदी सरकार के खिलाफ किसी भी स्तर तक जा सकते है .इस पार्टी ने इसी तरह के काम तब किये थे .जब देश में अटल विहारी बाजपेयी की सरकार थी !!
पवन अवस्थी 
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