Saturday, 6 August 2016

"कौन सवर्ण कौन दलित... कौन अल्पसंख्यक कौन बहुसंख्यक... कौन अगड़ा कौन पिछड़ा... जब तक देश की व्यवस्था तंत्र के लिए देश की जनता में यह भेदभाव महत्वपूर्ण रहेगा योजनाएं राजनीतिक तुस्टिकरण के लिए बनेंगी ..राष्ट्रहित के लिए नहीं।
, व्यवस्था में किसी भी तरह के परिवर्तन की शुरुआत समाज से ही हो सकती है। व्यवस्था तंत्र में समाज का प्रतिनिधित्व अगर सामाजिक नेतृत्व करता है तो समाज, सामाजिक प्रतिनिधि और व्यवस्था तंत्र की मानसिकता और समस्याओं के प्रति दृष्टिकोण को बदलने के लिए सामाजिक नेतृत्व का परिवर्तन ही एक मात्र विकल्प बचता है; यह प्रक्रिया जितनी सरल प्रतीत होती है उतनी ही कठिन है पर आवश्यकताएं ही अपने प्रयास से कठिन को सरल बनाती हैं, इसलिए, बात यह नहीं की व्यवस्था में परिवर्तन संभव है अथवा नहीं बल्कि बात केवल इतनी सी है की क्या हम आज व्यवस्था परिवर्तन की आवश्यकता को महसूस कर पा रहे हैं या नहीं?
 अगर विविधताओं के बजाये एकता के कारकों को महत्वपूर्ण बनाया जाये तो न केवल व्यवस्था तंत्र की योजनाएं और अधिक प्रभावशाली होंगी बल्कि देश की एकता और अखंडता को भी बल मिलेगा, पर दुर्भाग्यवश, हमें करना क्या था और हम कर क्या रहे हैं ! अगर आज धार्मिक होना साम्प्रदायिक माना जाने लगा है तो इसका अर्थ केवल यही है की वर्तमान के धर्म की समझ ही विकृत है तभी परिस्थितियां इतनी वीभत्स है।
राष्ट्रीय स्तर पर देश को आज एक ऐसा नेतृत्व चाहिए जो न केवल समाज में विधि व्यवस्था के प्रति विश्वसनीयता का कारन दे बल्कि समाज के लोगों में भी नयी ऊर्जा, स्फूर्ति और आत्वविश्वास का संचार करे और यह तभी संभव है जब देश अपने नेतृत्व का दायित्व किसी राजनीतिक दल के प्रतिनिधि को नहीं बल्कि सामान्य जनता को दे।
, समाज के राजनीतिकरण के इस दौर में जब लोगों के लिए राष्ट्र से अधिक राजनीति महत्वपूर्ण हो गयी है तो स्वाभाविक है की ऐसा नेता खोज पाना सरल न होगा, पर इसे सरल बनाना होगा क्योंकि आवश्यकताओं का कोई विकल्प जो नहीं होता।
हम राम मंदिर बनाने की बात तो करते हैं पर राम राज्य लाने की कोई कोशिश नहीं करते , अगर समय के सन्दर्भ के परिवर्तन ने यह आवश्यक बना दिया है की एक बार फिर यह स्थापित किया जाए की आखिर श्री राम हमारे इष्ट क्यों हैं तो हमें राम राज्य की पुनः स्थापना के प्रयास से इस संशय को मिटाना होगा , क्योंकि राम राज्य की व्यवस्था ही वह कारन थी जिसने मर्यादा पुरषोत्तम श्री राम को हमारा आदर्श और आराध्य बना दिया ; दुर्भाग्यवश, आज हमें श्री राम तो याद हैं पर उनके राज्य की आदर्श व्यवस्था का हमारे लिए कोई महत्व नहीं।
हम राम राज्य भी लाएंगे और अयोध्या में श्री राम मंदिर भी बनवाएंगे पर उसके पहले इस देश को श्री राम का मंदिर बनाना होगा; श्री राम तो हमारे प्रिय हैं पर क्या कभी सोचा है की हम श्री राम के प्रिय हैं भी या नहीं? कम से कम, वर्तमान के भारत के कृत और मानसिकता को देखकर यह संशय स्वाभाविक है।
हनुमान श्री राम के प्रिय इसलिए थे क्योंकि उनके ह्रदय में श्री राम का वास था क्या आज भारत वंशियों के ह्रदय में श्री राम के लिए जगह बची है, शायद नहीं, लोभ, स्वार्थ, द्वेष और ईर्ष्या से सब इतने संक्रमित हैं की लोगों ने धर्म को आडम्बर और श्री राम को राजनीतिक हथियार बना दिया है; तभी सब राजनीती से खुश हैं और देश तथा देशवासियों की किसी को सुध ही नहीं;
आखिर ऐसा धर्म किस काम का जो मनुष्य के लिए केवल सैद्धान्तिक हो, ऐसी व्यवस्था किस काम की जो राजनीती का पोषण और जनता का शोषण करने पर केंद्रित हो, ऐसा विकास किस काम का जिससे देश आगे बढ़ने के बजाये पीछे जाए और ऐसा लोकप्रिय नेता किस काम का जिसमें अपने काम से महत्व कमाने की क्षमता न हो और जो अपने महत्व के लिए प्रचार तंत्र पर आश्रित हो; क्या ऐसे हम भारत को उसके परम वैभव तक पहुंचा पायेंगे?
...कभी समय मिले तो इस विषय में सोचियेगा; यह आवश्यक है क्योंकि आखिर यह देश हमारा है और वर्तमान होने के नाते इसके भविष्य के निर्णय का अधिकार हमारा जो है !"
Mohan Bhagwat ji

sosial megiya

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एनआईए ऑफिसर तंजिल अहमद की हत्या करने वाले उसके भतीजे ने पुलिस को बताया कि तंजिल अहमद दरअसल अंडरवर्ल्ड को ऑपरेट करते थे और एनआईए की गुप्त सूचनाएं अंडरवर्ल्ड को देते थे और उसका भतीजा उसके लिए बिचौलिए का काम करता था लेकिन पिछले कई महीनों से तंजिल अपने भजिते को पूरा पैसा नहीं देते थे जिससे वो गुस्से में उनका कत्ल करवा दिया ।।
अब NDTV को समझ जाना चाहिए कि सेना में बड़े पदों पर मुस्लिम क्यों नहीं है । कुछ महीने पहले एनडीटीवी ने बकायदा इस पर स्टोरी चलाई थी इस सेना, रा और आईबी जैसे संस्थानों में उच्च पदों पर मुस्लिम क्यों नहीं है ..क्या सरकारो को मुस्लिमों पर भरोसा नहीं है मुझे लगता है ndtv कोई इसका जवाब मिल चुका है
Jitendra Pratap Singh
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हिन्दू जनजागृति समिति कर्नाटक द्वारा एक अभियान शुरू किया गया है जिसमें बसों, ट्रेनों इत्यादि में जगह-जगह चिपके हुए बंगाली बाबा, गुलशन बाबा, सलीम बाबा, कासिम बाबा, काला जादू, गंडा-ताबीज बंधवाओ, वशीकरण मन्त्र जैसे सभी पोस्टरों एवं स्टीकरों को फाड़ा-उखाड़ा जाएगा... ताकि भोले-भाले लोगों, सभ्य महिलाओं एवं ग्रामीणों को इनके चंगुल में फँसने से बचाया जा सके...
उम्मीद करते हैं कि दाभोलकर छाप "अंधश्रध्दा निर्मूलन समिति" वाले इस मुहिम की तारीफ़ ही करेंगे... साथ ही महाराष्ट्र-कर्नाटक सरकार जो कि अंधविश्वास हटाओ के आव्हान में लगी हुई है, इस मुहिम का समर्थन करेंगी...
आप इस बारे में क्या सोचते हैं?? क्या अन्य राज्यों में भी ऐसी मुहिम शुरू होनी चाहिए?? इसमें आपकी जेब से लगना भी क्या है?? जब कभी सफर के दौरान ऐसा स्टीकर-पोस्टर देखो, तुरंत फाड़ो या फाड़ न सको तो पेन से पोत दो...
और फिर यह समाजसेवा ही तो है..

Suresh Chiplunkar

कश्मीर में ताबड़तोड़ छापे

 500 से ज्यादा अलगाववादी गिरफ्तार...

कश्मीर में पुलिस ने जिहादी तत्वों के खिलाफ सख्त करवाई करते हुए अभी तक 500 लोग पकड़े हैं। हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी एवं उसके दो साथियों को सेना द्वारा मौत के के घाट उतरने के बाद घाटी में भड़की हिंसा में लगभग 50 पत्थरबाज मारे गए और छह हज़ार से ज्यादा घायल हो गए थे।
पुलिस द्वारा जवानों की वर्दी में लगे कमरों की मदद से दंगाइयों की विडियो रिकॉर्डिंग की गयी थी, पथराव कर रहे थे उन लोगों की फोटो और विडियो रिकार्डिंग पुलिस के पास है और पुलिस फोटो और विडियो रिकार्डिंग की मदद से दंगा भड़काने वाले और पथराव के लिए उकसाने वाले आतंकियों को चिन्हित कर पकड़ रही है।

Wednesday, 3 August 2016

हिंदुत्व जबरन धर्मपरिवर्तन 

की इजाजत नहीं देता...

                                               सरसंघचालक

 ‘‘हिंदू एक संस्कृति है, ना कि धर्म।  ‘‘हिंदू एक परंपरा है’’ जो ‘‘सभी अन्य पहचानाों को स्वीकार करने, उनका सम्मान करने और उनकी सराहना करने में यकीन रखता है।

 हिंदू परंपरा ऐसे धर्मपरिवर्तन की इजाजत नहीं देता, जिसमें किसी व्यक्ति के मानवाधिकार का उल्लंघन होता हो।  हिंदुत्व कोई धर्म नहीं है, बल्कि एक परंपरा है जो सभी तरह की पहचान को स्वीकार करने और सम्मान करने की बात करता है।  ‘‘किसी दर्शन या धर्म पर विचार करने के बाद यदि किसी की खुद की इच्छा या आकांक्षा उसे बदलने की हो…तो हमारी परंपरा कहती है कि प्रत्येक व्यक्ति स्वतंत्र रूप से फैसला कर सकता है कि उसकी आस्था क्या होनी चाहिए। लेकिन लोगों को प्रलोभन देना या कुछ अन्य तरीके का सहारा लेना व्यक्ति के अधिकारों में हस्तक्षेप होगा और उसकी इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।
 ’’ सरसंघचालक ने ब्रिटेन आधारित धर्मार्थ संस्था हिंदू स्वयंसेवक संघ (एचएसएस) की 50 वीं वर्षगांठ के मौके पर ‘पहचान एवं एकीकरण’ विषय पर एक सेमिनार को संबोधित करते हुए यह कहा।
 ‘‘हिंदू एक संस्कृति है, ना कि धर्म। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘हिंदू एक परंपरा है’’ जो ‘‘सभी अन्य पहचानाों को स्वीकार करने, उनका सम्मान करने और उनकी सराहना करने में यकीन रखता है।’’  ‘‘हमें पहचानों में कोई समस्या नहीं है, हम एक एकीकृत समाज की तरह तथा मानवीय एवं सार्र्वभौम रूप से रह सकते हैं। इसे हासिल किया गया है और आम आदमी ने इसे जिया है तथा इसे कहीं भी पाया जा सकता है जहां हिंदू रहते हैं। हिंदू धर्म कहता है कि विविधता को सराहा जाना होगा।’’
भागवत ने प्राचीन काल में भी विविधता मौजूद होने और ‘विविधता में एकता’ हिंदुत्व का केंद्रीय मंत्र होने के पक्ष में अथर्वेवद की सूक्तियों का हवाला दिया। उन्होंने कहा, ‘‘अपने इतिहास के बावजूद, हमने किसी के साथ विदेशी जैसा बर्ताव नहीं करते…कभी कभी सिर्फ राजनीति इन सभी में व्यवधान डालती है। लेकिन ये पानी के बुलबुले की तरह रहे हैं और फिर हम सामान्य स्थिति की ओर लौट जाते हैं क्योंकि यह हमारे खून में है।’’
 ‘‘आखिरकार हम सभी मानव हैं , सभी आत्मा हैं । हमें सभी की पहचान का सम्मान करना चाहिए और स्वीकार करना चाहिए लेकिन एकता पर नजरें टिकाए रखनी चाहिए। यह उदाहरण हिंदू समाज ने दुनिया में कहीं भी दिया है और यह सभी संघर्ष का हल कर सकता है।’’ 
 महाशिविर 2016 में भारी सुरक्षा बल की मौजूदगी के बीच 65 वर्षीय आरएसएस नेता प्रमुख अतिथि थे।  भागवत ने ब्रिटेन में प्रवासी भारतीयों को अपने संदेश में कहा, ‘‘हिंदू आपको हिंदू कहने के लिए जोर नहीं देते हैं। लेकिन मूल्य समान हैं…हम सभी अस्तित्व की एकता और सेवा करने, एक दूसरे से नहीं लड़ने, एकजुट रहने और संसार की भलाई का काम करने में यकीन करते हैं।’’

318 किलो वजन उठा कर दौड़ने वाला दुनिया का एक मात्र पराक्रमी घोडा था चेतक...

318 किलो वजन उठाकर सबसे तेज दौड़ने वाला और सबसे ऊँची छलांग लगाने वाला घोडा था महाराणा प्रताप का चेतक. एक अरबी व्यापारी तीन घोड़े लेकर महाराणा प्रताप के समक्ष प्रस्तुत हुआ जिनके नाम चेतक, त्राटक और अटक थे. राणा ने उन तीनों घोड़ो का परिक्षण किया जिसमे अटक मारा गया त्राटक और चेतक बचे जिसमे चेतक ज्यादा बुद्धिमान और फुर्तीला था. प्रताप ने चेतक को रखा और त्राटक को अपने छोटे भाई शक्तिसिंह को दे दिया.

चेतक से जुड़ा एक प्रसंग

हल्दीघाटी के युद्ध में बिना किसी सैनिक के राणा अपने पराक्रमी चेतक पर सवार हो कर पहाड़ की ओर चल पडे‌. उनके पीछे दो मुग़ल सैनिक लगे हुए थे, परन्तु चेतक ने अपना पराक्रम दिखाते हुए रास्ते में एक पहाड़ी बहते हुए नाले को लाँघ कर प्रताप को बचाया जिसे मुग़ल सैनिक पार नहीं कर सके. चेतक द्वारा लगायी गयी यह छलांग इतिहास में अमर हो गयी इस छलांग को विश्व इतिहास में नायब माना जाता है.
चेतक ने नाला तो लाँघ लिया, पर अब उसकी गति धीरे-धीरे कम होती जा रही थी पीछे से मुग़लों के घोड़ों की टापें भी सुनाई पड़ रही थी उसी समय प्रताप को अपनी मातृभाषा में आवाज़ सुनाई पड़ी, ‘नीला घोड़ा रा असवार’ प्रताप ने पीछे पलटकर देखा तो उन्हें एक ही अश्वारोही दिखाई पड़ा और वह था, उनका सगा भाई शक्तिसिंह. प्रताप के साथ व्यक्तिगत मतभेद ने उसे देशद्रोही बनाकर अकबर का सेवक बना दिया था और युद्धस्थल पर वह मुग़ल पक्ष की तरफ़ से लड़ता था. जब उसने नीले घोड़े को बिना किसी सेवक के पहाड़ की तरफ़ जाते हुए देखा तो वह भी चुपचाप उसके पीछे चल पड़ा, परन्तु केवल दोनों मुग़लों को यमलोक पहुँचाने के लिए. जीवन में पहली बार दोनों भाई प्रेम के साथ गले मिले थे.
इस बीच चेतक इमली के एक पेड़ तले गिर पड़ा, यहीं से शक्तिसिंह ने प्रताप को अपने घोड़े पर भेजा और वे खुद चेतक के पास रुके. चेतक लंगड़ा (खोड़ा) हो गया, इसीलिए पेड़ का नाम भी खोड़ी इमली हो गया. कहते हैं, इमली के पेड़ का यह ठूंठ आज भी हल्दीघाटी में उपस्थित है.

फेसबुक पर मौजूद सभी महिलाएं एक बार यह कहानी जरूर पढ़े और शेयर करे.....

सलोनी ने आज कई दिनों के बाद फेसबुक खोला था, एग्जाम के कारण उसने अपने स्मार्ट फोन से दूरी बना ली थी, फेसबुक ओपन हुआ तो उसने देखा की 35-40 फ्रेंड रिक्वेस्ट पेंडिंग पड़ी थीं, उसने एक सरसरी निगाह से सबको देखना शुरू कर दिया, तभी उसकी नज़र एक लड़के की रिक्वेस्ट पर ठहर गई, उसका नाम राजशर्मा था, बला का स्मार्ट और हैंडसम दिख रहा था अपनी डी पी मे, सलोनी ने जिज्ञासावश उसके बारे मे पता करने के लिये उसकी प्रोफाइल खोल कर देखी तो वहाँ पर उसने एक से बढ़कर एक रोमान्टिक शेरो शायरी और कवितायेँ पोस्ट की हुई थीं, उन्हें पढ़कर वो इम्प्रेस हुए बिना नहीं रह पाई, और फिर उसने राज की रिक्वेस्ट एक्सेप्टकर ली, अभी उसे राज की रिक्वेस्ट एक्सेप्ट किये हुए कुछ ही देर हुई होगी की उसके मैसेंजर का नोटिफिकेशन के साथ बज उठा, उसने चेक करा तो वो राज का मैसेज था, उसने उसे खोल कर देखा तो उसमें राज ने लिखा था " थैंक यू वैरी मच ", वो समझ तो गई थी की वो क्यों थैंक्स कह रहा है फिर भी उससे मज़े लेने के लिये उसने रिप्लाई करा " थैंक्स किसलिये ?" उधर से तुरंत जवाब आया " मेरी रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करने के लिये "। सलोनी ने कोई जवाब नहीं दिया बस एक स्माइली वाला स्टीकर पोस्ट कर दिया और फिर मैसेंजर बंद कर दिया, वो नहीं चाहती थी की एक ही दिन मे किसी अनजान से ज्यादा खुल जाये और फिर वो घर के कामों मे व्यस्त हो गयी।

अगले दिन उसने अपना फेसबुक खोला तो उसे राज के मैसेज नज़र आये, राज ने उसे कई रोमान्टिक कवितायेँ भेज रखीं थीं, उन्हें पढ़ कर उसे बड़ा अच्छा लगा, उसने जवाब मे फिर से स्माइली वाला स्टीकर सेंड कर दिया, थोड़ी देर मे ही राज का रिप्लाई आ गया, वो उससे उसके उसकी होबिज़ के बारे मे पूँछ रहा था, उसने राज को अपना संछिप्त परिचय दे दिया, उसका परिचय जानने के बाद राज ने भी उसे अपने बारे मे बताया कि वो एम बी ए कर रहा है और जल्दी ही उसकी जॉब लग जायेगी, और फिर इस तरह से दोनों के बीच चैटिंग का सिलसिला चल निकला। सलोनी की राज से दोस्ती हुए अब तक डेढ़ महीना हो चुका था, सलोनी को अब उसके मेसेज का इंतज़ार रहने लगा था, जिस दिन उसकी राज से बात नहीं हो पाती थी तो उसे लगता जैसे कुछ अधूरापन सा है, राज उसकी ज़िन्दगी की आदत बनता जा रहा था,आज रात फिर सलोनी राज से चैटिंग कर रही थी, इधर-उधर की बात होने के बाद राज ने सलोनी से कहा ...
" यार हम कब तक यूंहीं सिर्फ फेसबुक पर बाते करते रहेंगे, यार मै तुमसे मिलना चाहता हूँ, प्लीज कल मिलने का प्रोग्राम बनाओ ना "।

सलोनी खुद भी उससे मिलना चाहती थी और एक तरह से उसने उसके दिल की ही बात कह दी थी लेकिन पता नहीं क्यों वो उससे मिलने से डर रही थी, शायद अंजान होने का डर था वो,
सलोनी ने यही बात राज से कह दी," अरे यार इसीलिये तो कह रहा हूँ की हमें मिलना चाहिये, जब हम मिलेंगे तभी तो एक दूसरे को जानेंगे "

राज ने उसे समझाते हुए मिलने की जिद्द की," अच्छा ठीक है बोलो कहाँ मिलना है, लेकिन मै ज्यादा देर नहीं रुकुंगी वहाँ " सलोनी ने बड़ी मुश्किल से उसे हाँ की," ठीक है तुम जितनी देर रुकना चाहो रुक जाना " राज ने अपनी खुशी छिपाते हुए उसे कहा, और फिर वो सलोनी को उस जगह के बारे मे बताने लगा जहाँ उसे आना था।

अगले दिन शाम को 6 बजे, शहर के कोने मे एक सुनसान जगह पर एक पार्क, जहाँ पर सिर्फ प्रेमी जोड़े ही जाना पसंद करते थे, शायद एकांत के कारण, राज ने सलोनी को वहीँ पर बुलाया था, थोड़ी देर बाद ही सलोनी वहाँ पहुँच गई, राज उसे पार्क के बाहर गेट के पास अपनी कार से पीठ लगा के खड़ा हुआ नज़र आ गया,
पहली बार उसे सामने देख कर वो उसे बस देखती ही रह गई, वो अपनी फोटोज़ से ज्यादा स्मार्ट और हैंडसम था।

सलोनी को अपनी तरफ देखता हुआ देखकर उसने उसे अपने पास आने का इशारा करा, उसके इशारे को समझकर वो उसके पास आ गई और मुस्कुरा कर बोली " हाँ अब बोलो मुझे यहाँ किसलिये बुलाया है "
" अरे यार क्या सारी बात यहीं सड़क पर खड़ी-2 करोगी, आओ कार मे बैठ कर बात करते हैं "

और फिर राज ने उसे कार मे बैठने का इशारा करके कार का पिछला गेट खोल दिया, उसकी बात सुनकर सलोनी मुस्कुराते हुए कार मे बैठने के लिये बढ़ी, जैसे ही उसने कार मे बैठने के लिये अपना पैर अंदर रखा तो उसे वहाँ पर पहले से ही एक आदमी बैठा हुआ नज़र आया,
शक्ल से वो आदमी कहीँ से भी शरीफ नज़र नहीं आ रहा था, सलोनी के बढ़ते कदम ठिठक गये, वो पलट कर राज से पूँछने ही जा रही थी की ये कौन है कि तभी उस आदमी ने उसका हाँथ पकड़ कर अंदर खींच लिया और बाहर से राज ने उसे अंदरधक्का दे दिया, ये सब कुछ इतनी तेजी से हुआ की वो संभल भी नहीं पाई, और फिर अंदर बैठे आदमी ने उसका मुँह कसकर दबा लिया ताकि वो चीख ना पाये और उसकेहाँथों को राज ने पकड़ लिया, अब वो ना तो हिल सकती थी और ना ही चिल्ला सकती थी, और तभी कार से दूर खडा एक आदमी कार मे आ के ड्राइविंग सीट पर बैठ गया और कार स्टार्ट करके तेज़ी से आगे बढ़ा दी,और पीछे बैठा आदमी जिसने सलोनी का मुँह दबा रखा था वो हँसते हुए राज से बोला " वाह असलम भाई वाह....... मज़ा आ गया...... आज तो तुमने तगड़े माल पर हाँथ साफ़ करा है... शबनम बानो इसकी मोटी कीमत देगी "

उसकी बात सुनकर असलम उर्फ़ राज मुँह ऊपर उठा कर ठहाके लगा के हँसा, उसे देख कर ऐसा लग रहा था जैसे कोई भेड़ियाअपने पँजे मे शिकार को दबोच के हँस रहा हो, और वो कार तेज़ी से शहर के बदनाम इलाके जिस्म की मंडी की तरफ दौड़ी जा रही थी.....

ये कोई कहानी नहीं बल्कि सच्चाई है छत्तीसगढ़ की सलोनी । जो मुम्बई से छुड़ाई गई है ।

ये सलोनी की कहानी उन लड़कियो को सबक देती है जो सोशल मीडिया से अनजान लोगो से दोस्ती कर लेती है और अपनी जिंदगी गवां लेती है ।

Tuesday, 2 August 2016

“गुरुकुल” के इस 14 साल के बच्‍चे ने 18 देशों में बजाया भारत का डंका...

गुरुकुल मे इस समय कोई सर्टिफिकेट नहीं है पर आने वाले 10-12 सालों में ये भी हो जाएगा जब Gurukul को एक ब्रैंड वैल्यू मिल जाएगी.

New Delhi, Aug 2 : हाल ही में इंडोनेशिया में हुए International mathematics competition को जीत कर भारत के तुषार तालावत ने यह साबित कर दिया है कि हम किसी से कम नहीं हैं. आपको जान कर हैरानी होगी कि तुषार सिर्फ 14 साल का है. बता दें कि तुषार अहमदाबाद के गुरुकुल हेमचन्द्रचार्य संस्कृत पाठशाला का छात्र है.
गौरतलब है कि यह प्रतियोगिता अबेकस लर्निंग ऑफ हायर एकेडमिक इंटरनेशनल द्वारा 24 जुलाई को आयोजित की गई थी. इसमें कुल मिलकर 18 देशों के लगभग 1300 बच्‍चों ने हिस्‍सा लिया था. जिसमे भारत के तुषार तालावत ने पहला स्थान हासिल कर इंडोनेशिया में देश का डंका बजाया है.
अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले भी तुषार कई स्टेट और नेशनल लेवल के कॉम्पटीशन में अपनी योग्यता का बेहतरीन प्रमाण दे चुका है. आरएसएस एफेलिएटेड भारतीय शिक्षण मंडल (BSM) के ज्‍वाइंट ऑर्गेनाइजर सेकेटरी मुकुल कनितकर ने बताया कि तुषार की इस जीत ने ना केवल देश को गर्व महसूस कराया है बल्कि अपने गुरुकुल से प्राप्त की विद्या की ओर भी लोगों का ध्यान केंद्रित किया है. इसके साथ ही उन्‍होंने यह भी कहा कि प्राचीन वैदिक गणित अब एक बार फिर वर्ड लेवल पर चमकने लगी है.
आगे बताते हुए उन्होनें कहा, Gurukul मे इस समय कोई सर्टिफिकेट नहीं है पर आने वाले 10-12 सालों में ये भी हो जाएगा जब Gurukul को एक ब्रैंड वैल्यू मिल जाएगी. हालांकि स्‍टूडेंट Gurukul में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग की ओर से अपना एकेडमिक एग्जाम दे सकते हैं.

Monday, 1 August 2016

http://hindutva.info/what-is-nation-and-a-national-threat/
https://www.youtube.com/watch?v=R8zD11oxhRk
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https://www.youtube.com/watch?v=iRaLxibaC2s
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https://www.youtube.com/watch?v=dLE0gefs8Uk
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https://www.youtube.com/watch?v=emiPEStFsK8
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