Tuesday, 7 February 2017

यूनेस्को ने नालंदा को वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में किया शामिल ...

सम्पूर्ण भारत के लिए गौरव का विषय ...

बिहार के लिए ये किसी उत्सव से कम नहीं है, क्यों कि बोध गया मंदिर के बाद यह दूसरा ऐसा स्थान है जिससे विश्व विरासत स्थल का दर्ज़ा प्राप्त हुआ है। नालंदा पटना से 98 किमी की दुरी पर स्थित है और यह स्थल अब एक खंडहर में बदल चुका है।
यूनेस्को ने अपनी वेबसाइट के माध्यम से बताया, “नालंदा भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय है। इसने 800 वर्षों से ज्यादा अवधि के लिए निर्बाध रूप से शिक्षा का संचार किया है। ऐतिहासिक विकास की नज़र से यह स्थल और भी महत्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि इसने बौद्ध धर्म के विकास और शिक्षा परंपराओं में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।”

आजाद हिन्‍दुस्‍तान की वो काली रात

 जब बेटियों को खाना पड़ा था जहर ...

आजाद भारत में एक ऐसी काली रात घटी थी जिसमें हिन्दू अपनी जवान बेटियों को जहर दे रहे थे। अपने देश के अविभाज्य कहे जाने वाले राज्य कश्मीर की एक काली रात, जिसको पढ़कर हर हिन्दू की आखों से आंसू आ जाएंगे। यह वो घिनोनी सच्चाई है जो कांग्रेस के राज में घटित हुई थी और अपने ही देश के नागरिकों के ऊपर हुए जुल्म पर उस समय के तमाम बड़े नेताओं ने चुप्पी साध ली थी,  यहाँ तक की मीडिया के लोगों ने कभी भी उस काली रात की घटना पर कोई रिपोर्ट नही दिखाई थी। सालों बाद कुछ समय पहले जी न्यूज़ ने उसकी कवरेज जरुर की थी पर बाकि के मीडिया के लोग आज भी मौन है।
यह 19 जनवरी 1990 की बात है। हर हिन्दू अपने घर में थर-थर काँप रहा था , आखों से आंसू बह रहे थे और भगवान से बस जान बचा देने की प्रार्थनाएं की जा रही थी। एक आध को छोड़कर सालों साल साथ रहने वाले उनके मुस्लिम पडोसी , दोस्त अपने घरों में दुबके बैठे थे पर कोई मदद को आगे नहीं आया था।
उस रात को कश्मीर में एक चाल खेली गयी थी,  केंद्र की उस समय की कांग्रेस सरकार कश्मीर के मुस्लिमों और अलगाववादियों को खुस करने के वास्ते और उनका वोट बटोरने के लिए ये चाहती थी कि कश्मीर से हिन्दूओं को मार कर भगा दिया जाये। इस चाल को सफल बनाने के लिए पुलिस और सेना सभी को चुप रहने को कहा गया था,  और कोई भी करवाई ना करने के निर्देश दिए गये थे। राज्य में कोई सरकार तो थी ही नहीं और ना ही सेना और पुलिस को इस घटना के रोकथाम करने के दिए जाने वाले गैरसेक्युलर केंद्रीय नेतागण।
हालाँकि केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर के लिए जगमोहन जी को गवर्नर बना कर भेजा था पर अफ़सोस  कि वो भी उस रात घाटी तक पहुंचे ही नहीं थे। हिन्दुओं को अहसास हो गया था कि ये रात उनके जीवन की सबसे भयानक रात होने होने वाली है। मुसलमानों ने पहले से ही प्लान बना रखा था और अपने प्लान और सरकार के संरक्षण पर हजारों की संख्या में मुस्लिम अलगाववादियों की भीड़ ने हिन्दुओं के घरों पे मशालें लेकर हमला करना शुरू किया।
मुसलमानों की उग्र भीड़ के द्वारा नारे लग रहे थे ” कश्मीर बनेगा पाकिस्तान ” और ये कश्मीर जो पाकिस्तान बनेगा इसमे हिन्दू पुरुष नही होंगे पर हिन्दुओं की औरतों को यहीं रख लिया जाएगा। इसी डर से हिन्दुओं ने अपनी जवान लड़कियों और औरतों को तहखानों में छुपा दिया था और हर एक के हाथ ने अपनी लड़कियों,  माता बहनों को कड़े मन से जहर के पैकेट दे दिए, ताकि अगर इज्ज़त पे कोई आंच आये तो वे मासूम लड़कियां जहर खाकर अपनी जान दे दें। कितना दर्दनाक रहा होगा ये सब।
वहां नारे लग रहे थे हिन्दुओं की औरतों को उठा लो , हिन्दुओं को मुसलमान बना लो और जो ना बने उसको काट के फेंक दो , कहते हैं उस रात के बाद करीब 4 लाख हिन्दुओं का पलायन कश्मीर से हुआ और करीब 2000 से ज्यादा हिन्दुओं की हत्या एक ही रात में की गयी थी। प्री प्लान और भ्रस्टाचार का खेल देखिये,  कश्मीर के अंदर घटी इस घटना पर मीडिया बिलकुल शांत रहा और उसने देश को कुछ भी नहीं बताया। ऐसी है इस देश की विडंबना।

Monday, 6 February 2017

पानी पूरी के पानी में टॉइलट क्लीनर ...
 अहमदाबाद के लाल दरवाजा इलाके में एक पानी पूरी वेंडर गोलगप्पे के साथ दिए जाने वाले पानी का जायका बढ़ाने के लिए उसमें टॉइलट क्लीनर मिलाता था।

अहमदाबाद नगर निगम को लाल दरवाजा इलाके के पानी पूरी वेंडर के बारे में शिकायत मिली थी कि वह पानी में कुछ मिलाता है। इस बात की भी शिकायत की गई थी कि वह अपनी लॉरी गटर के पास खड़ी करता है और पास की सड़क भी बचे हुए पानी और पानीपुरी के फेंके जाने से खराब हो रही थी। इस शिकायत के बाद निगम ने सैंपल लिया और टेस्टिंग के लिए लैब भेजा।

लैब टेस्टिंग के बाद जो सामने आया, वह हैरान करने वाला था। गोलगप्पे के पानी में ऐसा ऐसिड मिला जो टॉइलट क्लीनर में इस्तेमाल किया जाता है। टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद स्पेशल कोर्ट में पानी पूरी वेंडर चेतन नान्जी के खिलाफ मिलावट का केस दर्ज किया गया, वह दोषी पाया गया और उसे 6 महीने की जेल सुनाई गई।

Sunday, 5 February 2017

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 बलूचिस्तान का हिन्दू इतिहास और अखंड भारत के लिए उसका महत्व
भारत का इतिहास विश्व में सबसे प्राचीन इतिहास है। कुछ समय पहले तक अफगानिस्तान, बलूचिस्तान, पाकिस्तान, आदि सब स्थान भारत के हिस्से थे। ‘अखंड भारत’ अर्थात् भारत समेत वो तमाम स्थान जो कभी भारत में आते थे। मगर कभी मुगलों ने, कभी अंग्रेजों ने तो कभी कांग्रेस जैसी पार्टियों ने भारत के ढेरों हिस्सों को खंड खंड कर भारत से दूर कर दिया।
बलूचिस्तान का हिन्दू इतिहास
आपको जानकर हैरानी होगी कि बलूचिस्तान आर्यों की प्राचीन धरती आर्यावर्त का एक हिस्सा है। वैदिक युग में आर्यों की भूमि पारस (कालांतर में फारस) से लेकर गंगा, सरयू और ब्रह्मपुत्र तक की भूमि थी जिसमें सिंधु घाटी का क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण था।आर्यों के पंचनंद या पंचकुल अर्थात पुरु, यदु, तुर्वस, अनु और द्रुहु थे। भारत के प्राचीन इतिहास अनुसार अफगानी, बलूच, पख्तून, पंजाबी, कश्मीरी आदि पश्‍चिम भारत के लोग पुरु वंश से संबंध रखते हैं अर्थात वे सभी पौरव हैं।
पुरु वंश में ही आगे चलकर कुरु हुए जिनके वंशज कौरव कहलाए। 7,200 ईसा पूर्व अर्थात आज से 9,200 वर्ष पूर्व ययाति के इन पांचों पुत्रों में से पुरु का धरती के सबसे अधिक हिस्से पर राज था। बलूच भी मानते हैं कि हमारे इतिहास की शुरुआत 9 हजार वर्ष पूर्व हुई थी और बलूचिस्तान का हिन्दू इतिहास उनके लिए महत्व रखता है।
51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ हिंगलाज माता
माता सती के 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ हिंगलाज माता का मंदिर बलूचिस्तान में है। माना जाता है कि बलूचिस्तान की भूमि पर दुर्गम पहाड़ियों के बीच माता का मंदिर है जहां माता का सिर गिरा था। ये मंदिर बलूचिस्तान के राज्य मंज में स्थित हिंगोल नदी के पास स्थित पहाड़ी पर है।इस स्थान पर भगवान श्रीराम, परशुराम के पिता जमदग्नि, गुरु गोरखनाथ, गुरु नानक देवजी भी आ चुके हैं। चारणों की कुल देवी हिंगलाज की माता ही थी। ये चारण लोग बलूची ही थे और आज इनका नाम कुछ और कबीले से जुड़ा हुआ है। बलूचिस्तान में भगवान बुद्ध की सैंकड़ों मूर्तियां पाई गईं। यहां किसी काल में बौद्ध धर्म अपने चरम पर था।
16 महा-जनपदों में से एक जनपद संभवत: गांधार जनपद का हिस्सा  बलूचिस्तान
भारत के 16 महा-जनपदों में से एक जनपद संभवत: गांधार जनपद का हिस्सा बलूचिस्तान भी था। चन्द्रगुप्त मौर्य का लगभग 321 ईपू का शासन पश्चिमोत्तर में अफगानिस्तान और बलूचिस्तान तक फैला था।बलूचिस्तान का वर्तमान भूगोल
बलूचिस्तान दक्षिण-पश्चिम पाकिस्तान, ईरान के दक्षिण-पूर्वी प्रांत सिस्तान तथा बलूचिस्तान और अफगानिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत तक फैला हुआ है, मगर इसका अधिकांश इलाका पाकिस्तान के कब्जे में है, जो पाकिस्तान के कुल क्षेत्रफल का लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा है। इसी इलाके में अधिकांश बलूच आबादी रहती है। यह सबसे गरीब और उपेक्षित इलाका भी है।
एक बलूचिस्तान कई बीमार 
उल्लेख में कहें तो बलूचिस्तान के दक्षिण-पूर्वी हिस्से पर ईरान, दक्षिण-पश्चिमी हिस्से पर अफगानिस्तान और पश्चिमी भाग पर पाकिस्तान ने कब्जा कर रखा है। सबसे बड़ा हिस्सा तकरीबन पाकिस्तान के कब्जे में है। चीन भी इस पर अपनी लुटेरी निगाहें रखे हुए है क्यूंकि प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर इस संपूर्ण क्षेत्र में यूरेनियम, गैस और तेल के भंडार पाए गए हैं।आजाद बलूचिस्तान का भारत के लिए महत्व 
भारत की दृष्टि से देखें तो बलूचिस्तान का ग्वादर बंदरगाह ईरान, अफगान और भारत को टारगेट करने के लिए अच्छा बेस बन सकता है।
भारत ने 2003 में ईरान के साथ ओमान की खाड़ी में होर्मूज जलडमरू के बाहर चाबहार पोर्ट के विकास का समझौता किया है। यह बंदरगाह बलूचिस्तान-ईरान की सीमा के पास ईरान के सिस्तान प्रांत में है।
साथ ही पाकिस्तान से गुजरे बिना ही भारत, अफगानिस्तान पहुंच सकता है। 2015 में यह डील फाइनल हुई और अब वहां विकास कार्य शुरू हो चुका है।

चीन को हिन्दुराष्ट्र बनाने वाले – पुष्यमित्र शुंग

पुष्यमित्र शुंग – बात आज से 2100 साल पहले की है। एक किसान ब्राह्मण के घर एक पुत्र ने जन्म लिया। नाम रखा गया पुष्यमित्र। पूरा नाम पुष्यमित्र शुंग। और वो बना एक महान हिन्दू सम्राट जिसने भारत को बुद्ध देश बनने से बचाया। अगर ऐसा कोई राजा कम्बोडिया, मलेशिया या इंडोनेशिया में जन्म लेता तो आज भी यह देश हिन्दू होते।
जब सिकन्दर ब्राह्मण राजा पोरस से मार खाकर अपना विश्व विजय का सपना तोड़ कर उत्तर भारत से शर्मिंदा होकर मगध की और गया था उसके साथ आये बहुत से यवन वहां बस गए। अशोक सम्राट के बुद्ध धर्म अपना लेने के बाद उनके वंशजों ने भारत में बुद्ध धर्म लागू करवा दिया। ब्राह्मणों के द्वारा इस बात का सबसे अधिक विरोध होने पर उनका सबसे अधिक कत्लेआम हुआ। हज़ारों मन्दिर गिरा दिए गए। इसी दौरान पुष्यमित्र के माता पिता को धर्म परिवर्तन से मना करने के कारण उनके पुत्र की आँखों के सामने काट दिया गया। बालक चिल्लाता रहा मेरे माता पिता को छोड़ दो। पर किसी ने नही सुनी। माँ बाप को मरा देखकर पुष्यमित्र की आँखों में रक्त उतर आया। उसे गाँव वालों की संवेदना से नफरत हो गयी। उसने कसम खाई की वो इसका बदला बौद्धों से जरूर लेगा और जंगल की तरफ भाग गया।
एक दिन मौर्य नरेश बृहद्रथ जंगल में घूमने को निकला। अचानक वहां उसके सामने शेर आ गया। शेर सम्राट की तरफ झपटा। शेर सम्राट तक पहुंचने ही वाला था की अचानक एक लम्बा चौड़ा बलशाली भीमसेन जैसा बलवान युवा शेर के सामने आ गया। उसने अपनी मजबूत भुजाओं में उस मौत को जकड़ लिया। शेर को बीच में से फाड़ दिया और सम्राट को कहा की अब आप सुरक्षित हैं। अशोक के बाद मगध साम्राज्य कायर हो चुका था। यवन लगातार मगध पर आक्रमण कर रहे थे। सम्राट ने ऐसा बहादुर जीवन में ना देखा था। सम्राट ने पूछा ” कौन हो तुम”। जवाब आया ” ब्राह्मण हूँ महाराज”। सम्राट ने कहा “सेनापति बनोगे”? पुष्यमित्र शुंग ने आकाश की तरफ देखा, माथे पर रक्त तिलक करते हुए बोला “मातृभूमि को जीवन समर्पित है”। उसी वक्त सम्राट ने उसे मगध का उपसेनापति घोषित कर दिया।
जल्दी ही अपने शौर्य और बहादुरी के बल पर वो सेनापति बन गया। शांति का पाठ अधिक पढ़ने के कारण मगध साम्राज्य कायर ही चूका था। पुष्यमित्र के अंदर की ज्वाला अभी भी जल रही थी। वो रक्त से स्नान करने और तलवार से बात करने में यकीन रखता था। पुष्यमित्र एक निष्ठावान हिन्दू था और भारत को फिर से हिन्दू देश बनाना उसका स्वपन था।
आखिर वो दिन भी आ गया। यवनों की लाखों की फ़ौज ने मगध पर आक्रमण कर दिया। पुष्यमित्र शुंगसमझ गया की अब मगध विदेशी गुलाम बनने जा रहा है।
 बौद्ध राजा युद्ध के पक्ष में नही था। पर पुष्यमित्र ने बिना सम्राट की आज्ञा लिए सेना को जंग के लिए तैयारी करने का आदेश दिया। उसने कहा की इससे पहले दुश्मन के पाँव हमारी मातृभूमि पर पड़ें हम उसका शीश उड़ा देंगे। यह नीति तत्कालीन मौर्य साम्राज्य के धार्मिक विचारों के खिलाफ थी। 
सम्राट पुष्यमित्र के पास गया। गुस्से से बोला ” यह किसके आदेश से सेना को तैयार कर रहे हो”। पुष्यमित्र का पारा चढ़ गया। उसका हाथ उसके तलवार की मुठ पर था। तलवार निकालते ही बिजली की गति से सम्राट बृहद्रथ का सर धड़ से अलग कर दिया और बोला ” ब्राह्मण किसी की आज्ञा नही लेता”।
हज़ारों की सेना सब देख रही थी। पुष्यमित्र ने लाल आँखों से सम्राट के रक्त से तिलक किया और सेना की तरफ देखा और बोला “ना बृहद्रथ महत्वपूर्ण था, ना पुष्यमित्र, महत्वपूर्ण है तो मगध, महत्वपूर्ण है तो मातृभूमि, क्या तुम रक्त बहाने को तैयार हो??”। उसकी शेर सी गरजती आवाज़ से सेना जोश में आ गयी। सेनानायक आगे बढ़ कर बोला “हाँ सम्राट पुष्यमित्र । हम तैयार हैं”। पुष्यमित्र ने कहा” आज मैं सेनापति ही हूँ।चलो काट दो यवनों को।”
जो यवन मगध पर अपनी पताका फहराने का सपना पाले थे वो युद्ध में गाजर मूली की तरह काट दिए गए। एक सेना जो कल तक दबी रहती थी आज युद्ध में जय महाकाल के नारों से दुश्मन को थर्रा रही है। मगध तो दूर यवनों ने अपना राज्य भी खो दिया। पुष्यमित्र ने हर यवन को कह दिया की अब तुम्हे भारत भूमि से वफादारी करनी होगी नही तो काट दिए जाओगे।
इसके बाद पुष्यमित्र शुंग का राज्यभिषेक हुआ। शुंग वंशवली ने कई सदियों तक भारत पर हुकूमत की। इनके पुत्र सम्राट अग्निमित्र शुंग ने अपना साम्राज्य तिब्बत तक फैला लिया और तिब्बत भारत का अंग बन गया। वो बौद्धों को भगाता चीन तक ले गया। वहां चीन के सम्राट ने अपनी बेटी की शादी अग्निमित्र से करके सन्धि की। उनके वंशज आज भी चीन में “शुंग” surname ही लिखते हैं।




रघुपति राघव राजा राम' इस प्रसिद्ध भजन का नाम है.."राम धुन" .
जो कि बेहद लोकप्रिय भजन था.. गाँधी ने बड़ी चालाकी से इसमें परिवर्तन करते हुए अल्लाह शब्द जोड़ दिया..
आप भी नीचे देख लीजिए..
असली भजन और गाँधी द्वारा बेहद चालाकी से किया गया परिवर्तन..
गाँधी का भजन
रघुपति राघव राजाराम,
पतित पावन सीताराम
सीताराम सीताराम,
भज प्यारे तू सीताराम
ईश्वर अल्लाह तेरो नाम,
सब को सन्मति दे भगवान

** असली राम धुन भजन **

रघुपति राघव राजाराम
पतित पावन सीताराम
सुंदर विग्रह मेघश्याम
गंगा तुलसी शालग्राम
भद्रगिरीश्वर सीताराम
भगत-जनप्रिय सीताराम
जानकीरमणा सीताराम
जयजय राघव सीताराम

अब सवाल ये उठता है, की, गाँधी को ये अधिकार किसने दिया की,..
हमारे श्री राम को सुमिरन करने के भजन में ही अल्लाह को घुसा दे..
अल्लाह का हमसे क्या संबंध?
क्या अब हिंदू अपने ईष्ट देव का ध्यान भी अपनी मर्ज़ी से नही ले सकता..?
और जिस भी व्यक्ति को हमारी बात से कष्ट हुआ हो..
वो इसी भजन को अल्लाह शब्द वाला संस्करण ज़रा किसी मस्जिद मे चलवा कर दिखा दे.. फिर हमसे कोई गीला शिकवा करे ।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩जय श्री राम🚩🚩🚩🚩🚩🚩
भारत में महाभारत का निम्नलिखित श्लोक अधूरा क्यों पढाया जाता है ??
गांधी की वजह से।।
"अहिंसा परमो धर्मः"जबकि पूर्ण श्लोक इस तरह से है।
"अहिंसा परमो धर्मः धर्महिंसा तदैव च: l
"अहिंसा मनुष्य का परम धर्म है और धर्म की रक्षा के लिए हिंसा करना उस से भी श्रेष्ठ है... क्या हमारे कोई भी भगवान् बिना शस्त्र के हैं?
नहीं ना... फिर हिन्दुओं के घर में शस्त्र क्यों नहीं होते?

Saturday, 4 February 2017

mediya

हिंदुस्तान के मुसलिमों से कुछ सवाल पूछो..जवाब कुछ ऐसे मिलेंगे
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1-अमेरिका जाओगे? – ना जी …वहा क्या घुट घुट कर मरना है
2-पाकिस्तान जाओगे? – अरे नहीं वो तो बर्बाद देश है
3-ब्रिटेन जाओगे? – नहीं, वह पर फिर से दंगे हो गए है मुस्लिमो के खिलाफ

4-बांग्लादेश जाओगे – नहीं वहा तो कुछ है ही नहीं
5-जापान जाओगे ?- नहीं, वो नागरिकता नहीं देता
6-सीरिया जाओगे – नहीं, वहा गृह युद्ध हो रहा है
7-सोमालिया जाओगे – नहीं, वह के मुस्लिम खतरनाक है
8-साउदी अरब जाओगे – नहीं, रहेंगे नहीं, सिर्फ पैसे कमाने जा सकते है
9-ईराक जाओगे – नहीं, वहा तो बर्बादी का मंजर है
10-किसी अन्य मुस्लिम देश में रहोगे -नहीं
11-चीन जाओगे – नहीं, चीन भी आज कल मुस्लिमो को वीजा नहीं देता
12-वन्दे मातरम् बोलोगे ?- नहीं
13-हिन्दू अच्छे लगते है तुम्हे? -नहीं, वो काफिर है
14-भारत में रहोगे – हाँ
15-आबादी बढाओगे -हाँ
16-यानी, इसे मुगलिस्तान बनाओगे – हाँ
17-मुगलिस्तान बनाकर कहा जाओगे, क्या तब भी ये देश तुम्हे उतना ही अच्छा लगेगा,
क्या इसका हाल भी अन्य मुस्लिम देशो जैसा नहीं होगा?
क्या इसे भी पाकिस्तान जैसा बना दोगे, क्या कोई हिन्दू इस देश में रह पाएगा?
बस इन आखरी सवालो के जवाब नहीं मिले है, कि
सी को पता लगे अगर तो इन सवालों के जवाब का इन्तेजार रहेगा,
  Jitendra Pratap Singh
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मिडिया हर वो छोटे से छोटे मामले को बड़े बना कर पेश करती हैं जिससे बीजेपी याने मोदीजी को बदनाम किया जा सकता है, कोसा जा सकता है और वोट काटा जा सकता है... पर इनको पता नहीं है कि आज कल लोग अपने किसी दोस्त के फेसबुक पोस्ट पर भरोसा कर लेते हैं पर करोड़ों के न्यूज़ चैनल पर नहीं .....
Bsf के एक जवान ने जब भोजन में थोड़ी सी गड़बड़ी की शिकायत की तो मीडिया के लोगों ने हाथों हाथ इसे लपक लिया ... और इसी बहाने भाजपा या मोदी जी के खिलाफ माहौल बनाने के लिए जो कर सकते थे वो करते रहे...
और जब उसी सरकार ने पाकिस्तान से अपने एक जवान को सकुशल छुड़ा कर के आये तो न्यूज़ तो बनी.. लेकिन जैसे ही चंदू और उसके गाँव के लोगों ने इसके लिए मोदीजी को धन्यवाद देना शुरू किया तो अचानक से न्यूज़ बंद होने लगे और चंदू चव्हाण की न्यूज़ खत्म कर दी ....
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80 घाट बनारस - कुछ लोग कहते थे थे की यह जगह साफ़ हो ही नहीं सकता !
जब माँ गंगा के आशीर्वाद से कोई इंसान कदम बढ़ाये तो परिणाम अच्छे जरुर होंगे!
धन्यवाद मोदी जी का जिन्होंने ये कदम बढ़ाये लेकिन विरोधी इसपर भी राजनीती करने के लिए स्वतंत्र है आप अपना काम करते रहिये !!
 — Rakesh KumarRajnish Varma,