Monday, 4 December 2017


11 भविष्यवाणियां सत्य होती दिख रहीं हैं..!
1. एक दिन आएगा जब वोट के लिए कांग्रेसी नेता कोट पर जनेऊ पहनेंगे ~ सावरकर जी १९५९
2. एक दिन पूरे देश पर भाजपा का राज होगा 
~ अटल जी १९९९ संसद में
3. मैं कांग्रेस मुक्त भारत करके रहूंगा ~ मोदी जी २०१०
4. मै आज कांग्रेस छोड रहा हूं , पर मै शपथ लेता हूं कि मै इसी कांग्रेसी विचारधारा के विरुद्ध ऐसा संगठन खडा करूंगा जो इसका नामोनिशान मिटाकर रख देगा , चाहे इसके लिये 100 साल क्यों न लगे , 800 साल की गुलामी मे 100 साल और सही पर यही संगठन भारत को फिर अखंड भारत बनाकर रहेगा ...
-- प. पू. केशव बलिराम हेडगेवार , संस्थापक एवं प्रथम सरसंघचालक
१९२२
नागपुर
5. अगर मैं प्रधानमंत्री बना तो सबसे पहले काले धन और आतंकवाद को समाप्त करने के लिये 500 और 1000 के नोट अचानक बंद कर दूंगा
-- नरेंद्र मोदी , २००७ , गुजरात में
6. भारत सरकार 500 और 1000 के नोट अचानक बंद करें , देश की आधी समस्या कुछ ही साल मे खत्म हो जायेंगी
-- बाबा रामदेव २००६ से २०१३ तक कई बार कहा
7. जिस दिन मरा हुवा हिंदुत्व गर्व से कहेगा मैं हिंदु हूं उस दिन अमेरिका भी भारत की परंपराओं के सामने नतमस्तक होगा और कहेगा कि फलां देश को समझाओ
-- स्वामी विवेकानन्द , १८९३ , शिकागो , अमेरिका में
( सनद रहे दो दिन पहले UN ने भारत से कहा है कि उत्तर कोरिया का इलाज सिर्फ भारत कर सकता है , अमेरिका नहीं)
8. आज गौहत्याबंदी आंदोलन मे संसद के सामने इंदिरा गांधी ने एक घंटे में 400 साधुओं को गोली चलाकर मार डाला
मैं कांग्रेस पार्टी को श्राप देता हूं कि एक दिन हिमालय मे तपश्चर्या कर रहा एक साधू आधुनिक वेशभूषा मे इसी संसद को कब्जा करेगा और कांग्रेसी विचारधारा को नष्ट कर देगा ...यह एक ब्राह्मण का श्राप है और ब्राह्मण का श्राप कभी खाली नहीं जाता ..
--- करपात्री महाराज , संसद के सामने रोते और साधुवों की लाशें उठाते हुवे , १९६६
9. कांग्रेस पार्टी वोटबैंक के लिये इतनी नीचे गिर जायेगी कि वो JNU जैसे नेहरू के वामपंथी सेक्स केंद्र के नारों का समर्थन करेगी और गौहत्या का समर्थन खुलेआम करेगी
स्वयं को नक्सली साबित करेगी
-- डॉ सुब्रमण्यम स्वामी , आप की अदालत में ,२००९
10. कांग्रेस को मै खत्म करूंगा , एक ऐसा आदमी (मोदी) संघ से निकालूंगा जो कांग्रेस का अंतिम संस्कार करेगा
- डॉ सुब्रमण्यम स्वामी , १९८४ , संसद में जब उनका Citizen Charted प्रस्ताव नकारा गया
11. नरेंद्र मोदी ही भारत का भविष्य है , 2002 , गुजरात दंगों का दोष उसपर मत दो , वो निष्पाप है , अटलजी और RSS को कहता हूं वे उन्हें continue करें वरना भारत से हिंदुत्व खत्म हो जायेगा
-- बालासाहब ठाकरे , 6 जून 2002 , उसके बाद 9 जून को अटलजी ने गोवा में नरेंद्र मोदी जी को continue किया , वरना आज हमें ऐसा PM नहीं मिलता
Manish Soni


इस्लाम से पहले अरब में था सनातन धर्म, आज भी बगदाद में मौजूद है ये त्रिदेवियों की पेंटिंग
मुहम्मद के माता पिता का देहांत हो चूका था, मुहम्मद का पालन पोषण उनके चाचा ने किया था, मुहम्मद के चाचा शिव भक्त थे, और भारत में भ्रमण करने की खवाइश भी रखते थे, वो गंगा और जमुना की धरती को चूमना चाहते थे


मुहम्मद ने पहले मदीना पर कब्जा किया, फिर मक्का जहाँ पर 360 मूर्तियां थी उसपर हमला किया 360 में से 359 मूर्तियां तोड़ दी, ये सारी हिन्दू मूर्तियां थी, बस 1 मूर्ति नहीं तोड़ी गयी, जो की असल में शिवलिंग थी, जो की आज भी मक्का के काबा में मौजूद है


मुहम्मद से पहले अरब के देशों में सऊदी अरब, इराक, सीरिया, यमन, इन इलाकों में सनातन धर्म ही था, उसका एक और सबूत लीजिये मुहम्मद से पहले की है ये पेंटिंग, जो आज भी इराक के बगदाद मयूजियम में मौजूद है, इस पेंटिंग में अल्लाह बैठे हुए है (अल्लाह माने ईश्वर) और उनके सामने उनकी 3 बेटियां खड़ी है, अल्लाह की इन तीन बेटियों के नाम है अल-लत, अल-उज़्ज़ा, और तीसरी है मन्नत, इस पेंटिंग को इराक के इतिहासकारों ने नयी शक्ल दी है, ये शक्ल इस पेंटिंग के नीचे दिए गए जानकारियों के आधार पर बनाये गए, ये भी बगदाद में मौजूद हैअल्लाह की 3 बेटियों को देखिये, ये मुहम्मद से पहले इस इलाके में मानी जाती थी
बीच वाली बेटी के तो माथे पर बिंदी भी है, और किसी भी बेटी ने बुरखा नहीं पहना है, साथ ही साथ बीच वाली बेटी के हाथों में तलवार जैसा कुछ है, और बाघ-बिल्ली जैसा कुछ उनके कदमो में है


ऐसा प्रतीत होता है जैसे अरब में मुहम्मद से पहले लोगों ने माता दुर्गा के चित्र को बनाने की कोशिश की थी, उन्होंने माता दुर्गा के बारे में सुना होगा, भारत से जानकारी मिली होगी और उन्होंने माता दुर्गा के चित्र को बनाने की कोशिश की


ये तीनो ही बेटियां ऐसी प्रतीत होती है जैसे माँ सरस्वती हो, एक माँ दुर्गा (पार्वती) और तीसरी माँ लक्ष्मी हो, आप देख सकते है मन्नत के हाथों में कलश भी है, माता लक्ष्मी के हाथों में भी कलश होता है जिसमे से धन आता है


वहीँ जो पहली बेटी है, जो सफ़ेद वस्त्र में है वो कदाचित माँ सरस्वती की नक़ल है, भारत से जो जानकारियां मिली, अरब के लोगों ने उसे कॉपी कर बनाने की कोशिश की, ऐसा इस पेंटिंग से आप समझ सकते है , साफ़ है की अरब में मुहम्मद से पहले सनातन धर्म ही था, और उसके सबूत मिटाये गए पर आज भी कई सारी चीजें मौजूद है
आखिर वह किताब मुझे मिल ही गयी ..!

जर्मनी के होलगर क्रिस्टीन वह पहले लेखक थे, जिन्होंने लंबे समय तक इजरायल से लेकर भारत तक शोध किया और यह साबित किया कि इतिहास के किसी कालखंड में जीजस नामक कोई व्यक्ति कभी नहीं हुए। वह येशुआ थे, जिसकी उत्पत्ति संस्कृत के ईश या ईश्वर से हुयी थी। 

जीजस के क्रूसेड की झूठी कहानी का भंडाफोड़ सबसे पहले रूसी नोटोविच ने किया, लेकिन 1895 में उनकी पुस्तक को बैन कर सेंटपिट्सबर्ग में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद अपनी शोध से क्रिस्टेन ने इसे और विस्तृत किया और पुस्तक का आकार दिया।

हिमालय की गुफाओं-कश्मीर से तिब्बत तक की यात्रा कर उन्होंने सबूत के साथ यह साबित किया कि ईशा ने सारा ज्ञान भारत से पाया और क्रूसेड के अधूरे झूठ के बाद वह भारत में ही आकर मृत्युपर्यन्त रहे।

क्रिस्टीन ने 1973 में यह खोज शुरू की और पुस्तक 'Jesus Live in India' पहली बार 1981 में प्रकाशित हुयी। अभी तक दुनिया की अधिकांश भाषाओं में इसका अनुवाद हो चुका है, बस हिंदी को छोड़कर।

ईशा के भारत में होने को लेकर ओशो के प्रवचन, बीबीसी की डक्यूमेंट्री, हालिवुड सिनेमा, सीरियल, नेशनल ज्योग्राफी के डक्यूमेंटरी से लेकर 30 से अधिक पुस्तकें इसे ही आधार बनाकर लिखी गयी है। यह मूल है।

मैं यह पुस्तक अरसे से ढू़ंढ रहा था और मुझे यह मिली तो एक फुटपाथ पर! मैं पढ़ना शुरू कर चुका हूं। किताब बेहद रोमांचक और तथ्यों से भरी है। क्रिश्चियनिटी का कोई वजूद ही नहीं है। बस यह 'पॉलिज्म' है, सेंट पॉल का खड़ा किया वितंडावाद!

चूंकि हिंदी के ज्यादातर साहित्यकार और लेखक सेक्यूलर वामपंथी हैं, इसलिए हिंदी के पाठकों को अभी तक इससे महरूम रखा गया है। हद है!

खैर, आप भी खोजिए इसे और पढ़िये। सन् 2001 में इसका नया एडिशन आ चुका है!

आप सभी का आभार कि आप सभी चाहते हैं कि मैं हिंदी में ईशा के भारत प्रवास पर लिखूं। लेकिन मैं अभी एक साल केवल पढ़ना चाहता हूं ताकि उसके बाद अगले दो सालों में#कहानीकम्युनिस्टोंकी के बचे दोनों भाग लिखकर आपके सामने रख सकूं।

मैं इसीलिए चाहता हूं कि नयी पीढ़ी मेरे साथ आकर काम करे। मैं एक साथ इतने विषय पर कैसे लिख सकता हूं? साधारण इनसान हूं। आप सब साथ आइए तो अभियान आगे बढ़े। हां हिंदी का कोई अनुवादक सामने आए और पेंगुइन हिंदी से संपर्क कर होल्गर क्रिस्टीन की पुस्तक हिंदी में अनुवाद करने की इच्छा जाहिर करे तो वो मान जाएंगे और काम आसान हो जाएगा। नयी किताब लिखने की जरूरत ही नहीं है।

अभी कुछ मित्रों के बताया की amazon पर भी उपलब्ध है नीचे link दे रहा हूँ आप सबसे निवेदन है इससे पहले ख़त्म हो जाये कृप्या जरूर खरीद लें

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 ईसा मसीह की समाधि को पुराने कश्मीर के खनियार मोहल्ले में हमने स्वयं देखा है, उसे रोजाबल बोलते हैं, सरकार ने कट्टर मुसलमानों के दबाव में अब उसे मुस्लिम फकीर की मजार घोषित कर दिया गया है, गैर मुस्लिम केवल इस्लामिक हिजरी कैलेंडर की तेरह तारीख को ही उस मजार को निकट से देख सकते हैं।---Vishwajeet Singh Abhinav Anant

सेंसर बोर्ड के सदस्य और बीजेपी नेता "अर्जुन गुप्ता" ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर 'भंसाली के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है।' 
पत्र में लिखा है,

"मैं फिल्म पद्मावती के निर्माता 'संजय लीला भंसाली' की नियमविरुद्ध कार्यप्रणाली की तरफ आपका ध्यान आकर्षित करके, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाही की मांग करता हूँ। ताकि भविष्य में कोई फिल्म निर्माता इस तरह भारतीय कानूनों का मखौल ना बना सके।"
उन्होंने कहा,

"फिल्म पद्मावती के निर्माता ने सर्वप्रथम बिना सेंसर बोर्ड से पास कराये, कुछ चुनिन्दा "पत्रकारों" को फिल्म दिखाई और उनके जरिये मीडिया में कहलवाया कि फिल्म में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है, यह कानून के अनुसार नहीं है।"

"अभी हाल ही में उन्होंने 'ब्रिटेन के सेंसर बोर्ड' को दिखाकर सर्टिफिकेट ले लिया। बिना भारतीय सेंसर बोर्ड से पास कराये वे इसे ब्रिटेन तक ले गए। "भारतीय कस्टम विभाग" ने कैसे इसकी अनुमति दी? या वह इसे स्मगल करके बाहर ले गए!!! इसकी जांच हो और उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही हो, क्योंकि सिनेमैटोग्राफ एक्ट 1952 अनुसार फिल्म तब तक ट्रेवल नहीं कर सकती, जब तक कि उसके साथ "सर्टिफिकेट" ना हो। उन्होंने कहा कि "सुब्रमनियम स्वामी" ने भी इस बात का दावा किया है कि फिल्म की 'फंडिंग' दुबई से हुई है। उनकी फंडिंग की भी ED से जांच कराई जाय।"
उन्होंने कहा, "फिल्म के निर्माता ना सिर्फ इतिहास से बल्कि भारतीय कानून से भी खिलवाड़ कर रहे हैं, मैं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाही की मांग करता हूँ।"

Sunday, 3 December 2017


वास्को दी गामा: एक खोजी नाविक अथवा एक ईसाई समुद्री डाकू
डॉ विवेक आर्य
हमारे देश में पढ़ाई जाने वाली किसी भी इतिहास पुस्तक को उठाकर देखिये। वास्को दी गामा को भारत की खोज करने का श्रेय देते हुए इतिहासकार उसके गुणगान करते दिखेंगे। उस काल में जब यूरोप से भारत के मध्य व्यापार केवल अरब के माध्यम से होता था। उस पर अरबवासियों का प्रभुत्व था। भारतीय मसालों और रेशम आदि की यूरोप में विशेष मांग थी। पुर्तगालवासी वास्को दी गामा समुद्र के रास्ते अफ्रीका महाद्वीप का चक्कर लगाते हुए भारत के कप्पाड तट पर 14, मई, 1498 कालीकट, केरल पहुँचा। केरल का यह प्रदेश समुद्री व्यापार का प्रमुख केंद्र था। स्थानीय निवासी समुद्र तट पर एकत्र होकर गामा के जहाज को देखने आये क्यूंकि गामा के जहाज की रचना अरबी जहाजों से अलग थी।
केरल के उस प्रदेश में शाही जमोरियन राजपरिवार के राजा समुद्रीन का राज्य था। राजा अपने बड़े से शाही राजमहल में रहता था। गामा अपने साथियों के साथ राजा के दर्शन करने गया। रास्ते में एक हिन्दू मंदिर को चर्च समझ कर गामा और उसके साथी पूजा करने चले गए। वहां स्थित देवीमूर्ति को उन्होंने मरियम की मूर्ति समझा और पुजारियों के मुख से श्री कृष्ण के नाम को सुनकर उसे क्राइस्ट का अपभ्रंश समझा। गामा ने यह सोचा कि लम्बे समय तक यूरोप से दूर रहने के कारण यहाँ के ईसाईयों ने कुछ स्थानीय रीति रिवाज अपना लिए है। इसलिए ये लोग यूरोप के ईसाईयों से कुछ भिन्न मान्यताओं वाले है। गामा की सोच उसके ईसाईयत के प्रति पूर्वाग्रह से हमें परिचित करवाती है।
राजमहल में गामा का भव्य स्वागत हुआ। उसे 3000 सशस्त्र नायर सैनिकों की टुकड़ी ने अभिवादन दिया। गामा को तब तक विदेशी राजा के राजदूत के रूप में सम्मान मिल रहा था। सलामी के पश्चात गामा को राजा के समक्ष पेश किया गया। जमोरियन राजा हरे रंग के सिंहासन पर विराजमान था। उनके गले में रतनजड़ित हीरे का हार एवं अन्य जवाहरात थे। जो उनकी प्रतिष्ठा को प्रदर्शित करते थे। गामा द्वारा लाये गए उपहार अत्यंत तुच्छ थे। राजा उनसे प्रसन्न नहीं हुआ। फिर भी उसने सोने, हीरे आदि के बदले मसालों के व्यापार की अनुमति दे दी। स्थानीय अरबी व्यापारी राजा के इस अनुमति देने के विरोध में थे। क्यूंकि उनका इससे व्यापार पर एकाधिकार समाप्त हो जाता। गामा अपने जहाज़ से वापिस लौट गया। उसकी इस यात्रा में उसके अनेक समुद्री साथी काल के ग्रास बन गए। उसका पुर्तगाल वापिस पहुंचने पर भव्य स्वागत हुआ। उसने यूरोप और भारत के मध्य समुद्री रास्ते की खोज जो कर ली थी। आधुनिक लेखक उसे भारत की खोज करने वाला लिखते है। भारत तो पहले से ही समृद्ध व्यापारी देश के रूप में संसार भर में प्रसिद्द था। इसलिए यह कथन यूरोपियन लेखक की पक्षपाती मानसिकता को प्रदर्शित करता है।
पुर्तगाल ने अगली समुद्री यात्रा की तैयारी आरम्भ कर दी। इस बार लड़ाकू तोपों से सुसज्जित 13 जहाजों और 1200 सिपाहियों का बड़ा भारत के लिए निकला। कुछ महीनों की यात्रा के पश्चात यह बेड़ा केरल पहुंचा। कालीकट आते ही पुर्तगालियों ने राजा के समक्ष एक नाजायज़ शर्त रख दी कि राजा केवल पुर्तगालियों के साथ व्यापारिक सम्बन्ध रखेंगे। अरबों के साथ किसी भी प्रकार का व्यापार नहीं करेंगे। राजा ने इस शर्त को मानने से इंकार कर दिया। झुंझला कर पुर्तगालियों ने खाड़ी में खड़े एक अरबी जहाज को बंधक बना लिया। अरबी व्यापारियों ने भी पुर्तगालियों की शहर में रुकी टुकड़ी पर हमला बोल दिया। पुर्तगालियों ने बल प्रयोग करते हुए दस अरबी जहाजों को बंधक बना कर उनमें आग लगा दी। इन जहाजों पर काम करने वाले नाविक जिन्दा जल कर मर गए। पुर्तगालियों यहाँ तक नहीं रुके। उन्होंने कालीकट पर अपनी समुद्री तोपों से बमबारी आरम्भ कर दी। यह बमबारी दो दिनों तक चलती रही। कालीकट के राजा को अपना महल छोड़ना पड़ा। यह उनके लिया अत्यंत अपमानजनक था। पुर्तगाली अपने जहाजों को मसालों से भरकर वापिस लौट गए। यह उनका हिन्द महासागर में अपना वर्चस्व स्थापित करने का पहला अभियान था।
गामा को एक अत्याचारी एवं लालची समुद्री लुटेरे के रूप में अपनी पहचान स्थापित करनी थी। इसलिए वह एक बार फिर से आया। इस बार अगले तीन दिनों तक पुर्तगाली अपने जहाजों से कालीकट पर बमबारी करते रहे। खाड़ी में खड़े सभी जहाजों और उनके 800 नाविकों को पुर्तगाली सेना ने बंधक बना लिया। उन बंधकों की पहले जहाजों पर परेड करवाई गई। फिर उनके नाक-कान, बाहें काटकर उन्हें तड़पा तड़पा कर मारा गया। अंत में उनके क्षत-विक्षत शरीरों को नौकाओं में डालकर तट पर भेज दिया गया। ज़मोरियन राजा ने एक ब्राह्मण संदेशवाहक को उसके दो बेटों और भतीजे के साथ सन्धि के लिए भेजा गया। गामा ने उस संदेशवाहक के अंग भंग कर, अपमानित कर उसे राजा के पास वापिस भेज दिया। और उसके बेटों और भतीजे को फांसी से लटका दिया। पुर्तगालियों का यह अत्याचार केवल कालीकट तक नहीं रुका। वे पश्चिमी घाट के अनेक समुद्री व्यापार केंद्रों पर अपना कहर बरपाते हुए गोवा तक चले गए। गोवा में उन्होंने अपना शासन स्थापित किया। यहाँ उनके अत्याचार की एक अलग दास्तान फ्रांसिस ज़ेवियर नामक एक ईसाई पादरी ने लिखी।
पुर्तगालियों का यह अत्याचार केवल लालच के लिए नहीं था। इसका एक कारण उनका अपने आपको श्रेष्ठ सिद्ध करना भी था। इस मानसिकता के पीछे उनका ईसाई और भारतीयों का गैर ईसाई होना भी एक कारण था। इतिहासकार कुछ भी लिखे मगर सत्य यह है कि वास्को दी गामा एक नाविक के भेष में दुर्दांत, अत्याचारी, ईसाई लुटेरा था। खेद है वास्को डी गामा के विषय में स्पष्ट जानकारी होते हुए भी हमारे देश के साम्यवादी इतिहासकार उसका गुणगान कर उसे महान बनाने पर तुले हुए है। इतिहास का यह विकृतिकरण हमें संभवत विश्व के किसी अन्य देश में नहीं मिलेगा।
(चित्र में वास्को दी गामा को जमोरिअन राजा से प्रथम बार मिलते हुए दिखाया गया है)

गाजियाबाद में NIA और पुलिस पर हमला, एक जवान को गोली लगी

गाजियाबाद : लुधियाना में आरएसएस कार्यकर्ता रवींद्र गुसाईं की हत्या के आरोपी को गिरफ्तार करने एनआईए और स्थानीय पुलिस की टीम जब यूपी के गाजियाबाद के एक गांव में पहुंची, तो वहां एनआईए और स्थानीय पुलिस की टीम पर आरोपी के साथियों ने हमला कर दिया। इस हमले में यूपी पुलिस के एक जवान को गोली लगी है।
NIA को गाजियाबाद के थाना भोजपुर में स्थित गांव नहाली में एक बदमाश के होने की खुफिया जानकारी मिली थी। जानकारी के आधार पर NIA गाजियाबाद पुलिस के साथ रविवार को तड़के बदमाश को उठाने के लिए गांव में दबिश देने गई थी लेकिन इस दौरान बड़ी संख्या इकट्ठा हुए गांव के पुरुषों और महिलाओं ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया। इस मौके का फायदा उठाकर ग्रामीणों के बीच से कुछ लोगों ने पुलिस पर फायरिंग भी की। इसके बाद ग्रामीणों ने पथराव शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने पुलिस के काम को बाधित करने के उद्देश्य से कई जगहों पर रोड भी जाम कर दिया।
गाजियाबाद पुलिस और NIA के जवानों को भी आत्मरक्षा में गोलियां चलानी पड़ीं। गायिजाबाद पुलिस में कांस्टेबल तहजीब खान के पैर में गोली लगी है। पुलिस का एक वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गया। मामले में गिरफ्तार किए गए दो संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। जानकारी के मुताबिक राउंड फायरिंग के दौरान मूलक पुलिस को चकमा देकर फरार होने में कामयाब हो गया था हालाँकि पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को मौके से गिरफ्तार किया है। फिलहाल पुलिस ने उसके नाम का खुलासा नहीं किया है।
गौरतलब है कि 17 अक्टूबर को लुधियाना में आरएसएस कार्यकर्ता रवींद्र गोसाईं की बाइक सवार दो हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उनकी हत्या की जांच की जिम्मेदारी एनआईए को सौंपी थी. इसके बाद एजेंसी ने आईपीसी की विभिन्न धाराओं और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत एक एफआईआर दर्ज की. इस मामले में 2 अन्य संदिग्ध बदमाशों को एनआईए की टीम पहले ही हिरासत में ले चुकी हैं। वहीं मलूक पर हत्या आरोपियों को हथियार देने का आरोप है। जिसकी तलाश में गाजियाबाद, मेरठ पुलिस के साथ एनआईए की टीम ने आज दबिश दी थी।
जल_महोत्सव
ग्राम धाबा और सावलमेंढा में मनाया जल महोत्सव
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ग्रमीणों ने मेघा और #पूर्णा नदी पर बनाया बोरी बंधान 
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बैतूल जिले में पानी रोको अभियान के तहत ग्राम से बहने वाली नदियों पर बोरी बंधान कर पानी रोकने का क्रम जारी है । रविवार के दिन भैंसदेही विकासखंड के ग्राम धाबा और सावलमेंढा में में ग्रामीणों ने बोरी बंधान बनाकर #जल_संरक्षण को जल महोत्सव के रूप में मनाया । इस अवसर पर विद्या भारती जनजाति शिक्षा के प्रान्त प्रमुख श्री बुधपाल सिंह, ग्राम धाबा, घुघरी, सावलमेंढा, सातकुंड के सरपंच, उपसरपंच, सरस्वती शिशु मंदिर सावलमेंढा के प्रधानाचार्य श्री संतोष महाजन, श्री पप्पू शिवहरे, भाजपा के जिला महामंत्री श्री श्रीराम भलावी, श्री गणेश जायसवाल, पत्रकार महेंद्र सिंह, श्री कैलाश शिवहरे, गाँव के महिला पुरुष तथा जनजाति छात्रावास धाबा के छात्रों , विद्या भारती जनजाति शिक्षा के एकल विद्यालयों के शिक्षकों, पंच, सतपंच तथा गाँव के जनप्रतिनिधियों ने मिलकर डेढ़ हजार से ज्यादा बोरियों से इन दोनों #सदा_नीरानदियों पर सुबह नो बजे से दोपहर तीन बजे तक दोनों बंधानों में पांच सौ से ज्यादा लोगों ने श्रमदान किया ।
इस क्षेत्र में पहाड़ों पर लाखों की संख्या में आज भी पेड़ है, इसलिए ये दोनों नदियाँ सदा नीरा बनी हुई है । अतः हम न केवल पेड़ों की रक्षा करें अपितु हर वर्ष नया पौधरोपण कर पेड़ों की संख्या बढ़ाएं ।
दोनों ग्रामों में #"बोरी_बंधान के पूर्व व पश्चात ढोल-ढमाकों के साथ जल महोत्सव रैली निकाली गई, जिसमे गाँव का पानी गाँव में, खेत का पानी खेत मे, जल ही जीवन आदि जल संरक्षण के नारे लगाते हुए लोग नदी पर पहुँचे ।