Friday, 18 October 2013

पीडिता के अंतर्वस्त्रो पर बालुलाल के डीएनए मिला

देखो कैसे डरा धमका कर केस दबाने कि कोशिश कि कर रहे हैं ये कांग्रेसी नेता ,,,राजस्थान के पूर्व मंत्री बाबूलाल नागर बलात्कारी साबित हुए .. पीडिता के अंतर्वस्त्रो पर बालुलाल के डीएनए मिला#PaidMedia चुप, क्योंकि पैसा केवल आशाराम जी #बापू पर भोंकने और बदनाम करने के लिए मिला था ...बिना पैसे के ये कभी नहीं भोंकते,,,,पूज्य बापू जी को आरोप सिद्द हुये बिना ही अंदर कर दिया गया और वही यह वेहशी आज भी आरोप सिद्धि के बाद 
भी बाहर है ,,,,,
कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी की सेक्स विडियो जो एक सर्वोच्च न्यायलय की अधिवक्ता अनुसूया सांगवान के साथ आज भी यौतुबे वेबसाइट पर है। उस मुद्दे पर पूरा सबूत इन्टरनेट पर होने के बाद भी मीडिया ने एक दिन भी चर्चा नहीं की। कांग्रेस सरकार ने उससे जेल नहीं भेज बल्कि जेल भेजना तो दूर आज भी वो पार्टी का प्रबक्ता और राज्य सभा का सदस्य बना हुआ है। आज भी वो अभिषेक मनु सिंग्वी टेलीविजन चैनलो पर बड़े बड़े देश के अहम् मुद्दों पर चर्चा करते हुए दीखता है।
 एक देश एक कानून फिर यह दोहरा मापदंड क्यों..?.
.......................................................
 उत्तर प्रदेश राज्य के चंदौली जिले में धर्मांतरण का कार्य जोर-शोर से चल रहा पर न तो खुद को धर्मनिरपेक्ष बताने वाली राज्य सरकार इसको गंभीरता से ले रही न तो खुद को सेक्युलर और निष्पक्ष कहने वाली मीडिया ही इस् पे कोई ट्रायल चला रहा ? दरसल उत्तर-प्रदेश के चंदौली जिले में 16Oct.-2013 को बड़े स्तर पर धर्मांतरण का कार्यक्रम हो रहा था जिसमे लगभग 5000 की संख्या में कार्यक्रम में शामिल हिन्दुओं को धर्मान्तरित किया जाना था पर कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही आसपास के लोगों को इसकी भनक लग गयी और RSS से जुड़े स्वयंसेवकों को जैसे ही स्थानीय लोगों ने इसकी जानकारी दी RSS,VHP और BJP से जुड़े कार्यकर्ता तत्काल उस स्थान पे पहुँच गए और उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया ,जिसके बाद पुलिस की भी नींद टूटी और उसने भी आनन्-फानन में त्वरित कार्यवाही करते हुए 6 लोगों को गिरफ्तार किया |
 गिरफ्तार किये गए सभी 6 लोग सभी ईसाई समुदाय के हैं | स्थानीय लोगों का ये भी कहना है गिरफ्तार किये गए लोग जिले में चल रहे कान्वेंट स्कूल से जुड़े हुए हैं |... आपको हम बता दें की चंदौली जिले में St. Thomas School और St. Jhons जैसे स्कूलों में पहले भी छात्रों को हिन्दू देवी देवताओं के लाकेट पहन के आने पे रोके जाने की बात सामने आती रही है और ईसाई धर्म से सम्बंधित लाकेट,पुस्तकें और नोटबुक कई बार बाटें जा चुके हैं | स्थानीय लोगों द्वारा ये भी कहा जा रहा की इस कार्यक्रम के आयोजन में इन कान्वेंट विद्यालयों का भी हाँथ है | पर सोचने वाली बात ये भी है कि...आखिर क्यूँ धर्मांतरण के इस घिनौनी कृत्य के खिलाफ मीडिया मुहीम नहीं चला रहा ?...हैरानी की बात ये है की इस घटनाक्रम की जानकारी प्रिंट के साथ-साथ इलेक्ट्रानिक मीडिया को भी है पर फिर भी मीडिया चैनल्स इससे अनजान बन रहे ?..... स्थानीय प्रिंट मीडिया ने तो खबर को उछाला मगर इलेक्ट्रानिक मीडिया अभी तक इस पे खामोश है ?...
 एक तरफ हिन्दू संतों पे एक के बाद एक आरोप लगते जा रहे और मीडिया उनपे ट्रायल भी चला रहा पर दूसरी तरफ बड़े पैमाने पे धर्मांतरण की घटनाएं सामने आने पे भी मीडिया खामोश बनी हुई है फिर ये हिन्दुओं के खिलाफ षड्यंत्र नही तो क्या है ?...
............................................................................



क्या बकवास सेकुलरगर्दी है ये?
वंदे मातरम इस्लाम के खिलाफ,
सूर्य नमस्कार इस्लाम के खिलाफ,
मंदिरो की घंटिया इस्लाम के खिलाफ,
मूर्ति पूजा इस्लाम के खिलाफ,
कुछ कहो तो उनकी भावना आहत ,,
कुछ करो तो उनकी भावना आहत,,
कार्टून से फिल्म से उनकी भावना को ठेस,,,
ये हिंदूस्तान है या सऊदी अरब??????
अपने ही देश मे हिंदूओ को गुलामो की तरह जीना पड राहा है और फिर भी सेकुलर भडवो को उनके तलवे चाटने से फुर्सत नही, इन हालात मे फिर वही औरंगजेब वाले दिन लौट आयें तो कोई आश्चर्य नही,अब हर हिंदू को शिवाजी बनना होगा तभी हिंदूराष्ट्र
का स्वप्न फलिभूत होगा... !
.................................................................................................................
हिन्दू को अब अपने धर्म,रीती रिवाज,देवी देवताओं व धर्म प्रचारक महापुरुषो के प्रति कट्टर होना ही होगा,अपने बच्चो में संस्कार हिन्दू धर्म के डालने ही होंगे नहीं तो इसका खामियाजा आपको और आपकी आने वाली पीड़ी को चुकाना पड़ सकता है ....हो क्या रहा है हिन्दू मंदिर नहीं जाता रोज़ न अपने बच्चो में यह संस्कार डालता,अपने ही धर्म का खुद मजाक बनाता sms facebook या चालू वेवहार में देवी देवतों का सरे आम मजाक बनता फिल्म बनती जोक्स बनती हैं हम लोग भेजने वाले को गाली तक नहीं निकालते उल्टा हम लोग ही share व forward करते हैं अब बताओ धर्म का प्रचार कोन आ कर करेगा दूसरे धर्म के आ कर तो नहीं करेंगे इस लिए अभी से अपने धर्म में आ जाओ और ईमानदारी से इस का प्रचार प्रचार व पालन करे इस में ही आप और आपकी आने वाली पीडी का जीवन सुरक्षित है !...इसे पड़ कर इन तथ्यों पर विचार - मंथन जरुर करे ..
...........................................................
ये फोटो गोधरा ट्रेन के आरोपियों का हे जिन्होंने ट्रेन को जलाया था... इनमे से 6 को आजीवन कारावास और 5 को फांसी की सज़ा सुनायी गयी है, लेकिन आपने इनके बारे में समाचार पत्र में कुछ सुना हे क्या....?पता हे क्यों ....?

क्युकी इस देश की कांग्रेस सरकार मुस्लिम वोट चाहती हे... और इस लिए वो इन सब लोगो को छुपा कर देश के टुकड़े करके जितना चाहती हे... और आपके समाने साबुत हे अफजल और कसाब का जिन्हें फांसी नहीं दी जा रही हे.. ये सब केवेल मुस्लिम वोट के लिए किया जा रहा हे... 

.....................................................
मीडिया को बलात्कार और यौन शोषण से नही , #हिंदू #धर्मगुरुओ और सनातन धर्म का प्रचार प्रसार करने वालो से दिक्कत है | अब तो जागो |जयपुर की इसाई संस्था "ग्रेस होम" से 15 मणिपुरी लडकियाँ छुड़ाई गई हैं ।इन सबके साथ यौन शोषण हुआ है। लड़कियों की उम्र सिर्फ 7 से 15 के बीच है ।
जब लड़कियों का मेडिकल करवाया गया तो पता चला कि 15 में से 13 का कौमार्य भंग किया जा चुका है और 13 में से 9 लड़कियों को ल्यूकोरिया नामक रोग से ग्रसित पाया गया जो कि सेक्स की अधिकता या सेक्स वर्करोँ में होता है ।
एक डॉक्टर ने जो इनकी देखभाल कर रही है उसने बताया
इन लड़कियों को अँधेरे कमरे में रखा गया था जिससे इनमें विटामिन डी की कमी हो गई है जब इन्हे बाहर निकाला गया तो हाथ पैर कांप रहे थे । अभी इनको विटामिन डी की गोलियाँ दी जा रही हैं ।
पुलिस की गिरफ्त में संस्था का मालिक पॉस्टर जैकब जॉन आया है जो कि एक पादरी है ।
यह खबर केवल इंडियन एक्सप्रेस में छपी है और इसे किसी मीडिया चैनल ने एक मिनट के लिए भी नहीं दिखाया क्योंकि मामला #ईसाई संस्था का था

.............................................................

Thursday, 17 October 2013

स्वदेशी अपनाओ देश बचाओ




अंग्रेजो ने एक ऐसा इंडिया का निर्माण किया जो भारत से घृणा करता है - जिसके लिए भारत की हर बात अंधविश्वास, अवैज्ञानिकता, दकियानूसी सोच और पिछड़ेपन का प्रतिक है, जो इतनी अधिक हिन भावना से ग्रस्त है की उसके लिए अमेरिका, यूरोप स्वर्ग है, वहाँ की हर सोच प्रगति की निशानी वहाँ के औरतों के नंगेपन में उसे नारी स्वतंत्रता का दर्शन होता है, वहाँ की अवैज्ञानिक भाषा उसे विश्वभाषा दिखाई देती है, वहाँ का अज्ञान उसकी दृष्टि में विज्ञान है, उनकी क्रूरता में उसके साहस और उसकी कायरता में अहिंसा का दर्शन होता है, लूट से एकत्रित संपत्ति की और न देख वह उसे एक विकसित राष्ट्र कहता है।

अंग्रेज जाते जाते एक संधि के अनुसार यहाँ के गाँधी-नेहरु को सत्ता सौंप गए लेकिन विभाजन से पीड़ित हमलोगोंको का ध्यान इस ओंर नही गया अंग्रेजो के जाने को ही हमने आजादी मान ली। 15 अगस्त 1947 से पहले भारत अंग्रेजो का गुलाम था और आज इंडिया का गुलाम है। व्यक्ति हो या देश जब अपनि प्रकृति का विरोध करने लगता है, बीमार हो जाता है और जबतक वह अपनी प्रकृति को नहीं समझता स्वस्थ नही हो सकता।

भारत ऋषि प्रधान राष्ट्र था; ऋषि अर्थात जिन्होंने जड़ से ऊपर एक चेतन तत्त्व का साक्षातकार किया था उनका उद्देश्य शरीर की सीमा में अपने आपको बांधने की प्रबृत्ति से मनुष्य को मुक्त करना रहा। भोग में डूबा व्यक्ति शरीर की सीमा से मुक्त नही हो सकता, इसलिए ऋषियों ने त्याग को महत्व दिया और भोग की निःसारता को समझ उसे त्यागना ही उचित समझा। भौगोलिक दृष्टि से भारत का सम्बंध जितने भी देश से रहा हो लेकिन भारत की संस्कृति का प्रभाव पूरी दुनिया पर था। भारत पर अंग्रेजों, मुघलों का आक्रमण केबल एक देश का दुसरे देश पर आक्रमण ही नही था अपितु यह असुरों का ऋषि संस्कृति पर आक्रमण था। असुर अर्थात शरीर को ही सब कुछ मानने वाले।

शरीर को ही सबकुछ मानने से शरीर को भोगों से तृप्त करने के लिए अधिक से अधिक भोग जुटाना ही एक मात्र उद्देश्य रह जाता है, इसके लिए अधिक से अधिक लोगों के अधिकार छीनना अधिकाधिक को अपने वश में करना बहुत बड़ा गुण मन जाता है यह अत्यन्त स्वाभाविक है की जहाँ त्याग की प्रबृत्ति वाले अधिक हो वहाँ भोग की सामग्री प्रचुर मात्रा में ही होगी इसलिए भारत पर हमेशा से असुरों का आक्रमण होता रहा और कई बार असुरों का राज्य स्थापित हो गया। इंडिया असुरों को आदर्श मानने वालों का देश हैं। रामायण का युद्ध सरल था क्योंकि उसमे एक पक्ष में धर्म था और एक पक्ष में अधर्म था जबकि महाभारत का युद्ध जटिल था उसमे दोनों पक्ष में अपने ही प्रियजन थे। आज भी यही स्थिति हमारी है, आज भारत का युद्ध इंडिया से है इसलिए यह युद्ध बहुत ही जटिल है। ब्रेनवाश होने और मेकौले की शिक्षा गले में उतरने से बहुत से युवा उस अंग्रेजो के बनाये इंडिया के खेमे में है।
राजीव दीक्षित

...........................................................................

1 - The Complete Truth of Sant #Asharam ji Bapu (संत आशारामजी बापू की पूरी सच्चाई) - http://wp.me/p3W8mM-84

2 - संस्कृति पर कुठाराघात http://wp.me/p3W8mM-8c

3 - Why every time Saints are being targeted -http://wp.me/p3W8mM-8l

4 - आखिर क्यों है सबसे ज्यादा निशाने पर #बापूजी ? -http://wp.me/p3W8mM-8s

5 - साजिश को सच का रूप देने की मनोवैज्ञानिक रणनीति -http://wp.me/p3W8mM-8z

6 - आखिर क्या है सच ! - http://wp.me/p3W8mM-8F

7 - यह षडयंत्र नही तो और क्या है ? -http://wp.me/p3W8mM-8L

8 - जानिये झूठी और सच्ची खबरों में अंतर -http://wp.me/p3W8mM-8S

9 - Breaking India by Media (बापूजी फरार है ऐसी झूठी खबरें मीडिया द्वारा फैलाई गई ) - http://wp.me/p3W8mM-8Y

10- 'अश्लील विडियो बरामद हुआ है' ऐसी झूठी खबरें फैलाई -http://wp.me/p3W8mM-97

11- पंचेड बूटी (अफीम) का सच - http://wp.me/p3W8mM-9d

12 - कौन-सी पत्रकारिता है यह ? - http://wp.me/p3W8mM-9j

13 - भारत देश की शान है बापूजी - http://wp.me/p3W8mM-9o

14 - Channel Lock Campaign - http://wp.me/p3W8mM-9u

15 - षडयंत्र का पर्दाफाश - http://wp.me/p3W8mM-9B

16 - उनके हथकंडो को सीधे व भोले-भले हिन्दू नहीं देख पा रहे है - http://wp.me/p3W8mM-9J

17 - Bright Life - Descriptions of His Holiness Sant Shri Asharamji Bapu - http://wp.me/p3W8mM-9R

18 - Social Services - http://wp.me/p3W8mM-9X

19 - मीडिया ने ये कभी दिखाया ? - http://wp.me/p3W8mM-a4

20 - Pujya Bapuji Supporters Protest at Shastri Bhawan , Delhi - http://wp.me/p3W8mM-ah

21 - Kansa Ke Vadh ki Pratiksha (कंस के वध की प्रतीक्षा) -http://wp.me/p3W8mM-ao

...............................................................






72 सालों से भूखा प्यासा

अहमदाबाद। पिछले 72 सालों से भूखा प्यासा रहने का दावा करने वाले प्रहलाद जानी पर डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की स्टडी पूरी हो गई है। 15 दिन की इस स्टडी में डीआरडीओ के वैज्ञानिक और डॉक्टरों को आखिर मानना पड़ा की प्रहलाद जानी ने 15 दिनों तक कुछ नहीं खाया-पिया। स्टडी के 15 दिन पहले और 15 दिन बाद की जांच ने सबको हैरत में डाल दिया है। 
72 साल से भूखा-प्यासा रहने का दावा करने वाले प्रहलाद जानी विज्ञान के लिए अजब पहेली हैं। प्रहलाद जानी के दावों में कितनी सच्चाई है ये जानने के लिए रक्षा विभाग के डीआरडीओ के वैज्ञानिकों और डॉक्टरों की एक टीम ने शुरू किया 15 दिन का ऑपरेशन भूख। सीसीटीवी की नजरें 24 घंटे प्रहलाद जानी पर लगी रहीं। यहां तक कि नहाने और ब्रश करने के लिए भी पानी पहले से ही नापतौल कर दिया जाता। हर आधे से एक घंटे में प्रहलाद जानी को फिजीशियन, कार्डियोलॉजिस्ट, गेस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट,एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, डायबिटोलॉजिस्ट, यूरो सर्जन, आंख के डॉक्टर और जेनेटिक के जानकार डॉक्टरों की टीम के जरिये चेक किया जाता रहा और उनकी रिपोर्ट तैयार की जाती रही। 15 दिन लगातार मॉनिटिरिंग के बाद वैज्ञानिक हैरान हैं। प्रहलाद अपने दावे में अभी तक खरे उतरे हैं।
वैज्ञानिक इसे करिश्मा कहने से फिलहाल बच रहे हैं पर इतना जरूर मानते हैं कि प्रहलाद जानी आम इंसान से अलग हैं।
72 सालों से बिना कुछ खाए-पिए प्रहलाद जानी के जिंदा रहने का राज खुलता है तो चिकित्सा विज्ञान में चमत्कार हो जायेगा। प्रहलाद जानी ने अपने ऊपर किए गए इस परीक्षण के लिये एक शर्त ये रखी थी कि डॉक्टर, उनके शरीर में किसी भी तरह की चीज इंजेक्ट नहीं करेंगे। हालांकि प्रहलाद जानी का कहना है कि जब वो 12 साल के थे तब तीन बच्चों ने उनके मुंह में उंगली रख दी थी जिसके बाद से ही उन्होंने खाना-पीना छोड़ दिया और कई सालों तक हिमालय के जंगलों में तप किया।
प्रहलाद जानी पर रिसर्च के दौरान डॉक्टरों को ये बात माननी पड़ी कि इनके शरीर में कुछ तो ऐसा होता है, जो कि बिना खाए-पिए इन्हें ताकत देता है। रक्षा विभाग के डॉक्टर और वैज्ञानिकों ने जो रिर्सच किया है उसका नतीजा 3 महीने के अंदर आ जाएगा। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि बिना कुछ खाए-पिए जिंदा रहने की वजह रिसर्ज के नतीजों से साफ हो जाएगी।

72 साल से प्रह्लाद जानी ने हवा के अलावा कुछ नहीं लिया। सबसे पहले इस सच्चाई की पड़ताल के लिए गुजरात के डॉक्टर सामने आए। इन डॉक्टरों ने प्रहलाद भाई की पोल खोलने के लिए उन पर रिसर्च करने की ठानी। कई दिनों के लिए उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया गया। उन पर सीसीटीवी कैमरे से नजर रखी गई। क्या निकला था डॉक्टरों की पहली रिसर्च का नतीजा बताते हैं।
75 साल से ज्यादा के प्रह्लादभाई को कमरे में बंद कर दिया गया। तीन सौ डॉक्टरों की टीम बाहर से टीवी पर सब कुछ देखती रही। भूख पर ही नहीं इस शख्स ने जैसे उम्र पर भी जीत हासिल कर ली है। वक्त बीतता रहा, दिन गुजरते रहे। प्रह्लादभाई अब भी पूरी तरह ठीक हैं न कोई दिक्कत, न परेशानी। बाहर से डॉक्टर देखते रहे लेकिन प्रह्लादभाई पर कोई फर्क नहीं पड़ा। ऑपरेशन भूख सिर्फ सात दिन का था लेकिन इसे और बढ़ा दिया गया। डॉक्टरों की आशंका बढ़ती रही आखिरकार दसवां दिन आया। प्रह्लादभाई वैसे ही मजबूत बंद कमरे में आराम करते रहे। भूख का कोई असर नहीं। डॉक्टरों ने खुद मान ली हार। ये चमत्कार था...डॉक्टरों को चुनौती थी और आखिरकार विज्ञान ने ही मानी हार।
प्रह्लादभाई को ऑपरेशन भूख के पहले दिन भी अस्पताल ले जाकर पूरी जांच की गई थी। पहले दिन भी वो पूरी तरह से स्वस्थ थे। जब 10 दिन बाद ऑपरेशन भूख खत्म हुआ तब भी उन्हें कोई परेशानी नहीं थी।
सीसीटीवी कैमरे के जरिए तीन सौ डॉक्टरों की टीम 10 दिन तक प्रह्लादभाई पर नजर रख चुकी थी। इस दौरान उन्होंने न कुछ खाया,न पिया। भूख का कोई नामो-निशान नहीं। डॉक्टरों को समझ नहीं आया कि ऐसा कैसे हो सकता है। मेडिकल साइंस इसकी इजाजत नहीं देती लेकिन ऑपरेशन भूख के नतीजे उनके सामने थे। दुनिया में अब तक की ये पहली घटना थी। भारती की एक चलती-फिरती पहेली ने डॉक्टरों को भी हैरत में डाल दिया था।

आईबीएन 7 के पास है रिपोर्ट
मालूम हो कि आईबीएन 7 के पास डॉक्टरों की वो रिपोर्ट है जिससे साफ होता है कि प्रह्लादभाई की सेहत पर भूख से कोई असर नहीं पड़ा। 10 दिन की पड़ताल के बाद तीन सौ डॉक्टरों की टीम ने रिपोर्ट दी कि-
1. 10 दिन तक प्रह्लादभाई ने कुछ नहीं खाया, यहां तक की पानी भी नहीं पीया
2. 10 दिन बाद भी उनके शरीर के सभी अंग पहले की तरह काम कर रहे हैं
3. दिल की धड़कनों में कोई खास बदलाव नहीं आया
4. पेट की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में भी कुछ गड़बड़ी नहीं
5. दिमाग के एमआरआई में भी कुछ खास नहीं निकला
6. सीने का एक्स-रे भी सामान्य रहा
7. 10 दिन भूखे रहने पर कोई असर नहीं
डॉक्टरों की जांच पड़ताल में प्रह्लादभाई के खून में मौजूद हीमोग्लोबीन पर खास ध्यान दिया गया। हम आपको बता दें कि शरीर को तमाम हिस्सों को ऑक्सीजन पहुंचाने का काम खून में मौजूद हीमोग्लोबीन के ही जिम्मे होता है। डॉक्टरों की इस खास टीम ने जो रिपोर्ट दी है उसके मुताबिक
ऑपरेशन भूख शुरू करने के पहले दिन प्रह्लादभाई की हीमोग्लोबीन था-10.8
तीसरे दिन--11.3
पांचवे दिन--11.5
सातवें दिन--12.3
और
नवें दिन--12.9
यानि डॉक्टरों ने एक दिन छोड़कर प्रह्लादभाई के खून में हीमोग्लोबीन का स्तर जांचा। साफ है कि 10 दिन की भूख के बावजूद हीमोग्लोबीन के स्तर में कोई खास फर्क नहीं पड़ा। प्रह्लादभाई पर माथापच्ची कर रहे तीन सौ डॉक्टरों ने उनके आगे हार मान ली। डॉक्टरों ने इस केस की जांच किसी और बड़ी रिसर्च टीम से भी कराने का समर्थन किया। वहीं उन्होंने राय दी कि अगर वाकई में प्रह्लादभाई के शरीर में कुछ ऐसा खास है जिससे उन्हें भूख नहीं लगती और उनके शरीर को खाने की जरूरत नहीं महसूस होती तो वो उसे खोजना बेहद जरूरी होगा। अगर इसके पीछे प्रह्लादभाई के शरीर में मौजूद कोई खास जीन काम कर रहा है तो उसे जेनेटिक इंजीनियरिंग की मदद से खोजना होगा। अगर ऐसा हो गया तो-
1.दुनियाभर में भुखमरी की समस्या से निपटा जा सकता है
2. इंसान के बीमार शरीर को स्वस्थ किया जा सकता है
3. बुढ़ापे को रोकने में मदद मिल सकती है
4. बर्फीले पहाड़ों पर रह रहे सैनिकों को मदद मिलेगी
5. अंतरिक्ष यात्रा पर गए लोगों को खाने का सामान साथ नहीं ले जाना पड़ेगा
कुल मिलाकर विज्ञान और आध्यात्म के बीच फंसी ये पहेली सुलझने के बजाय और उलझती जा रही है। प्रह्लादभाई के मुताबिक दूसरे देशों के कई डॉक्टर भी उन्हें अपने यहां बुलाकर रिसर्च करना चाहते हैं लेकिन वो अपना देश छोड़कर बाहर नहीं जाना चाहते।
...................................................................................

तुम्हारे भगवान और हमारे खुदा में बहुत फर्क है।

क बार अकबर ने बीरबल से पूछाः " तुम्हारे भगवान और हमारे खुदा में बहुत फर्क है।
हमारा खुदा तो अपना पैगम्बर भेजता है जबकि तुम्हारा भगवान बारबार आता है।
यह क्या बात है ?"

बीरबलः "जहाँपनाह ! इस बात का कभी व्यवहारिक तौर पर अनुभव करवा दूँगा।
आप जरा थोड़े दिनों की मोहलत दीजिए। "

चार - पाँच दिन बीत गये।

बीरबल ने एक आयोजन किया।
अकबर को यमुनाजी में नौकाविहार कराने ले गये।
कुछ नावों की व्यवस्था पहले से ही करवा दी थी।
उस समय यमुनाजी छिछली न थीं।
उनमें अथाह जल था।

बीरबल ने एक युक्ति की कि जिस नाव में अकबर बैठा था उसी नाव में एक दासी को अकबर के नवजात शिशु के साथ बैठा दिया गया।

सचमुच में वह नवजात शिशु नहीं था।
मोम का बालक पुतला बनाकर उसे राजसी वस्त्र पहनाये गये थे ताकि वह अकबर का बेटा लगे।

दासी को सब कुछ सिखा दिया गया था।

नाव जब बीच मझधार में पहुँची और हिलने लगी तब ' अरे .... रे ... रे .... ओ.... ओ.... .' कहकर दासी ने स्त्री चरित्र करके बच्चे को पानी में गिरा दिया और रोने बिलखने लगी।

अपने बालक को बचाने - खोजने के लिए अकबर धड़ाम से यमुना में कूद पड़ा।

खूब इधर - उधर गोते मारकर, बड़ी मुश्किल से उसने बच्चे को पानी में से निकाला।

वह बच्चा तो क्या था मोम का पुतला था।
अकबर कहने लगाः "बीरबल ! यह सारी शरारत तुम्हारी है।
तुमने मेरी बेइज्जती करवाने के लिए ही ऐसा किया।"

बीरबलः " जहाँ पनाह ! आपकी बेइज्जती के लिए नहीं , बल्कि आपके प्रश्न का उत्तर देने के लिए ऐसा किया गया था।

आप इसे अपना शिशु समझकर नदी में कूद पड़े।
उस समय आपको पता तो था ही इन सब नावों में कई तैराक बैठे थे , नाविक भी बैठे थे और हम भी तो थे!
आपने हमको आदेश क्यों नहीं दिया ?
हम कूदकर आपके बेटे की रक्षा करते!"

अकबरः " बीरबल ! यदि अपना बेटा डूबता हो तो अपने मंत्रियों को या तैराकों को कहने की फुरसत कहाँ रहती है ?
खुद ही कूदा जाता है।

बीरबलः "जैसे अपने बेटे की रक्षा के लिए आप खुद कूद पड़े , ऐसे ही हमारे भगवान जब अपने बालकों को संसार एवं संसार की मुसीबतों में डूबता हुआ देखते हैं तो वे पैगम्बर - वैगम्बर को नहीं भेजते , वह खुद ही प्रगट होते हैं।

वे अपने बेटों की रक्षा के लिए आप ही अवतार ग्रहण करते है और संसार को आनंद तथा प्रेम के प्रसाद से धन्य करते हैं।

आपके उस दिन के सवाल का यही जवाब है

......................................................................................

सीआईए (CIA) की गुप्त हत्या का हथियार “हार्ट अटैक गन”, 1975 मे सार्वजनिक किया गया था |

गुप्त हत्या के लिए उपयोग किया जाने वाला सीआईए का हथियार एक छोटा सा जहरिला भाला जैसा गोली मारता है जिससे दिल का दौरा पड़ता है, नीचे दिए छोटे वीडियो में काँग्रेशनल गवाही में यह विस्तार से बताया गया है | अपने आप को और इस तरह के महत्वपूर्ण मामलों पर दूसरों को शिक्षित करके, हम सब के लिए एक उज्जवल भविष्य का निर्माण कर सकते हैं |

इस गुप्त सीआईए हथियार से भाला कपड़ों की परत मे भी घुसता है और त्वचा पर कुछ भी नहीं लेकिन एक छोटे लाल डॉट छोड़ता हैं | घातक खुद्र भाला के प्रवेश पर, हत्या के लिए लक्षित व्यक्ति अत्यधिक एक मच्छर काटने जैसा महसूस कर सकते हैं, या वे कुछ भी महसूस नहीं कर सकता | जहरीला भाला लक्ष्य में प्रवेश करने पर पूरी तरह से विखंडित हो जाता है |

घातक जहर तब तेजी से खून में प्रवेश करती है और दिल का दौरा पड़ने का कारण बनती है | काम हो जाने पर विष जल्दी विकृत हो जाता है, जिससे शव परीक्षा के समय दिल का दौरा प्राकृतिक कारणों के अलावा और कुछ से हुई कि नही पता लगाने के लिए बहुत संभावना नहीं होता |
................................................................................







जापान में 'पर्सनल ला' जैसा कोई शगूफा नहीं है।




जापान में किराए पर किसी मुस्लिम को घर मिलेगा, इसकी तो कल्पना भी नहीं की जा सकती है।
यदि किसी जापानी को उसके पड़ोस के मकान में अमुक मुस्लिम के किराये पर रहने की खबर मिले तो सारा मोहल्ला सतर्क हो जाता है।•
जापान में कोई इस्लामी या अरबी मदरसा नहीं खोल सकता है।
मतांतरण पर रोक•
जापान में मतान्तरण पर सख्त पाबंदी है।•
किसी जापानी ने अपना पंथ किसी कारणवश बदल लिया है तो उसे और साथ ही मतान्तरण कराने वाले को सख्त सजा दी जाती है।•
यदि किसी विदेशी ने यह हरकत की होती है उसे सरकार कुछ ही घंटों में जापान छोड़कर चले जाने का सख्त आदेश देती है।•
यहां तक कि जिन ईसाई मिशनरियों का हर जगह असर है, वे जापान में दिखाई नहीं देतीं।
वेटिकन के पोप को दो बातों का बड़ा अफसोस होता है। एक तो यह कि वे 20वीं शताब्दी समाप्त होने के बावजूद भारत को यूनान की तरह ईसाई देश नहीं बना सके। दूसरा यह कि जापान में ईसाइयों की संख्या में वृध्दि नहीं हो सकी।
•जापानी चंद सिक्कों के लालच में अपने पंथ का सौदा नहीं करते। बड़ी से बड़ी सुविधा का लालच दिया जाए तब भी वे अपने पंथ के साथ धोखा नहीं करते हैं।•
जापान में 'पर्सनल ला' जैसा कोई शगूफा नहीं है। यदि कोई जापानी महिला किसी मुस्लिम से विवाह कर लेती है तो उसका सामाजिक बहिष्कार कर दिया जाता है। जापानियों को इसकी तनिक भी चिंता नहीं है कि कोई उनके बारे में क्या सोचता है। तोकियो विश्वविद्यालय के विदेशी अध्ययन विभाग के अध्यक्ष कोमिको यागी के अनुसार, इस्लाम के प्रति जापान में हमेशा यही मान्यता रही है कि वह एक संकीर्ण सोच का मजहब है। उसमें समन्वय की गुंजाइश नहीं है।
स्वतंत्र पत्रकार मोहम्मद जुबेर ने 9/11 की घटना के पश्चात अनेक देशों की यात्रा की थी। वह जापान भी गए, लेकिन वहां जाकर उन्होंने देखा कि जापानियों को इस बात पर पूरा भरोसा है कि कोई आतंकवादी उनके यहां पर भी नहीं मार सकता।

........................................................................................
Kritika Vyas PaGe (Kritika)
‘ये कश्मीर नहीं गुजरात है ,
मारना हो तो मार डालो,
कसाइयो को नहीं छोड़ेंगे’
वडोदरा। बकरीद पर गौ-हत्या रोकने
के लिए गुरुवार को पुलिस
की दो टीमों ने करजण तहसील के
सांसरोद गांव में
छापेमारी की कार्रवाई की। पुलिस
जब कसाईयों को पकड़कर ले जाने लगी,
तभी ग्रामीणों ने पुलिस टीम पर
हमला बोल दिया।
इस हमले में पीएसआई सहित 6
पुलिसकर्मी घायल हो गए। गुस्साए
लोगों ने पुलिस की कार (टाटा सूमो)
को भी आग लगा दी। सूचना मिलते
ही कुछ देर बाद भारी पुलिस बल मौके
पर पहुंचा और लाठीचार्ज व आंसू गैस के
गोलें छोड़कर लोगों को नियंत्रित
किया। इस बीच ग्रामीणों ने चार
पुलिसकर्मियों को बंधक
बना लिया था।
पुलिस ने एक कसाई सहित 4
व्यक्तियों को गिरफ्तार किया। इन
पर हत्या का प्रयास और लूट का आरोप
दर्ज किया गया है। जब पुलिस
चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर ले
गई तो कुछ देर बाद गांव के कुछ लोग
पुलिस थाने पहुंचे और पुलिस से
कहा कि वे उनके
चारों व्यक्तियों को छोड़ दें तो वे
भी उनके चार पुलिसकर्मियों को छोड़
देंगे।
यह बात सुनते ही डीएसपी ने कड़े
शब्दों में लोगों से कहा.. ‘
कसाइयो को नहीं छोड़ा जाएगा, ये
कश्मीर नहीं गुजरात है , अगर ग्रामीण
पुलिसकर्मियों को मारन चाहें तो मार
दें।’
पुलिस का यह जवाब सुनने के कुछ देर
बाद ही ग्रामीणों ने तीन
पुलिसकर्मियों को रिहा कर दिया,
जबकि एक पुलिसकर्मी जान बचाकर खुद
ही मौके से भागकर पुलिस थाने आ
पहुंचा था।
गोरतलब है की गुजरात में गो हत्या के
लिए कानून में कड़े प्रावधान है।
Admin By > #उमा_शँकर_आर्य

तब से अंग्रेशुद्रो की दशा बिगङ

1- रिगवेद लिखने वालो मे 13 पैदाईशी शुद्र पर कर्म के
लिहाज से ब्राह्मण थे.
2- रामायण के रचयिता महर्षि बाल्मिकी जन्म से शुद्र कर्म
से ब्राह्मण थे.
3- महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास , अक अवैध सन्तान
और मछुआरिन पुत्र थे.
4- महाराजा हरिश्चन्द्र जन्म से च्छत्रिय थे पर बाद मे चांडाल
बने.
5- भगवान श्रीकृष्ण यादव थे, और पांडवो की माता मछुवारीन
थीं.
6- भगवान राम ने जामवन्त हनुमान आदि वनवासी मित्रो के
साथ ब्राह्मङ से युद्ध किया.
7- शबरी के जुठे बेर खाये और वह बेर लच्छमङ की रच्छा मे
काम आये और उनका घमंड खत्म हुआ.
8- मौर्य वंश जो की शुद्र था भारत पर बहुत समय राज्य किया.
9- गुप्त वंश वैश्य था भारत पर राज्य किया.
10- पासीयो के राजा महाराज सुहेल देव बहराईच के राजा रहे
11- छत्रपति शाहुजी महाराज ने आरच्छङ शुरु किया था शुद्रो के
लिये , वो च्छत्रिय थे.
12- डा भीमराव को बचपन मे जिस शिच्छक ने न पढने के
सामाजिक बंधनो से बचाये रखा वो ब्राह्मङ थे.
13- वीर सावरकर और नाथुराम गोडसे ने बाबा साहेब के समय
काल मे ही जातिविरोधी आन्दोलन शुरु किया वो ब्राह्मङ थे
14- जिस स्वामी श्रद्धानन्द को बाबा साहेब ने अपने जीवन
का सबसे सम्मानित व्यक्ति कहा वो ब्राह्मङ थे.
15- मीराबाई जैसे कृष्णभक्त के गुरु शुद्र थे.
16- आदि शंकराचार्य के गुरु चांडाल थे.
17- जिसे इस देश का संविधान लिखने को मिला वो शुद्र थे.
18- जिस वीपी सिंह ने ओबीसी आरच्छङ लागु
किया वो च्छत्रिय थे. जिस पार्टी ने उन्हे समर्थन
दिया वो कट्टर हिन्दूवादी थे.

अभी बहुत कुछ है पर इतना रटो , इसे पढोगे तो पता चलेगा की जबसे
भारत मे इस्लामिक आक्रमणकारी और
अंग्र ज आये तब से अंग्रेशुद्रो की दशा बिगङ
गयी , जब वे गये थो फिर ठीक होने लगी.. इसलिये जिन
इस्लामिक आक्रमणकारीयों व् अंग्रेजो ने हमे बाटा, हमारे कुछ लोगो को स्वार्थी बनाकर हमपर ही अत्याचार करवाया उन निकृष्ट
लोगों को पश्चिमी सभ्यता केदिवानो को मूह तोड़ जवाब दो..

Tuesday, 15 October 2013

रामसेतु को तोडने का फ़ैसला

रामसेतु को तोडने का फ़ैसला किया गया है इस कांग्रेस सरकार द्वारा

http://indiatoday.intoday.in/story/¬setusamudram-project-will-be-made-says-centre/1/251414.html

ये इसे तोड़ने मे एक बार असफल हो चुके हैं ये दुबारा नया प्लान बना है

खबर आ रही है कि रामसेतु को तोडने का फ़ैसला किया गया है इस कांग्रेस सरकार द्वारा, हिन्दुओ की आस्था और भगवान रामचन्द्र जी निशानी को कांग्रेस सरकार अपने फ़ायदे के लिए तोडना चाहती है केंद्र सरकार ने सेतुसमुद्रम परियोजना पर आरके पचौरी समिति को खारिज करने का फैसला किया है। यानी अब यह परियोजना रामसेतु को तोड़कर ही पूरा किया जाएगा।

हिंदुओ का 17 लाख पुराना(राम सेतू) ये मनमोहन सिहं खुद तोड़्वाना चाहता हैं। क्यों कि ऐसा करने के लिये उसको अमेरिका ने आदेश दिया हैं।

मनमोहन सिंह अमेरिकन एजेंट है जिसने करुणानिधि और T.R.Balu के साथ मिलकर ये प्लान बनाया है

भगवान श्री राम की सबसे बड़ी निशानी श्री राम सेतु को तोड़ा जाए और कचरा अमेरिका को बेचा जाये ….

ये कचरा नही है भारतीय साइंटिस्ट का कहना है | की इस सेतु ( धनुस कोटि ) के तली मे 7 तरह के रेडियो एक्टिव एलीमेंट है | जो सिर्फ़ भारत में ही मिले है


जिससे निकाल कर 150 साल तक बिजली और परमाणु बम्ब बनाये जा सकते हैं । और ये
बात भारत के सबसे बड़े वैज्ञानिक डॉ ऐ . पी . जे अबदुल कलाम जी ने कही थी ।

ये रहा कलाम साहब की बात का लिंक …

http://www.newmediacomm.com/NuclearEzine/30Sept-6Oct08/05facetoface.html


मित्रो अमेरिका की नजर इस रेडियो एक्टिव मैटिरियल पर लगी ।ये लोग इसे अमेरिका
को बेचना चाहते हैं ,

ये इसे तोड़ने मे एक बार असफल हो चुके हैं ये दुबारा नया प्लान बना रहे
है..उसे युनेस्को जैसी बाहरी संस्था के हवाले न किया जाए…

जिन लोगो ऊपर लिखे पर विशवास न हो वो सिर्फ़ एक बार ये video देखें ।
must click

विडियो लिंक :-http://www.youtube.com/watch?v=6vL2imvw4FA&sns=fb



थोरियम एक “रेडियोएक्टिव” पदार्थ है जिसका उपयोग परमाणु ऊर्जा बनाने के लिए होता हैl भारत में इसके भण्डार प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, जिसका मूल्य 48 लाख करोड़ रुपयों से भी ज्यादा हैl

इसकी शुरुआत तब होती है, जब पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति जोर्ज बुश भारत आये थे और एक सिविल न्यूक्लीयर डील पर हस्ताक्षर किये गए जिसके अनुसार अमरीका भारत को युरेनियम-235 देने की बात कही l उस समय पूरी मीडिया ने मनमोहन सिंह की तारीफों के पुल बांधे और इस डील को भारत के लिए बड़ी उपलब्धि बताया, पर पीछे की कहानी छुपा ली गयी l

आप ही बताइए जो अमरीका 1998 के परमाणु परीक्षणों के बाद भारत पर कड़े प्रतिबंध लगाता है वो भारत पर इतना उदार कैसे हो गया की सबसे कीमती रेडियोएक्टिव पदार्थ भारत को मुफ्त में देने की डील करने लगा ?
दरअसल इसके पीछे की कहानी यह है की इस युरेनियम-235 के बदले मनमोहन सिंह ने यह पूरा थोरियम भण्डार अमरीका को बेच दिया जिसका मूल्य अमरीका द्वारा दिए गए युरेनियम से लाखो गुना ज्यादा है l आपको याद होगा की इस डील के लिए मनमोहन सिंह ने UPA-1 सरकार को दांव पर लगा दिया था, फिर संसद में वोटिंग के समय सांसदों को खरीद कर अपनी सरकार बचायी थी l यह उसी कड़ी का एक हिस्सा है l

थोरियम का भण्डार भारत में उसी जगह पर है जिसे हम ‘रामसेतु’ कहते हैं, यह रामसेतु भगवान राम ने लाखों वर्ष पूर्व बनाया था, क्योंकि यह मामला हिन्दुओं की धार्मिक आस्था से जुड़ा था इसलिए मनमोहन सरकार ने इसे तोड़ने के बड़े बहाने बनाये …….जिसमें से एक बहाना यह था की रामसेतु तोड़ने से भारत की समय और धन की बचत होगी, जबकि यह नहीं बताया गया की इससे भारत को लाखों करोड़ की चपत लगेगी क्योंकि उसमें मनमोहन सिंह, कांग्रेस और उसके सहयोगी पार्टी डीएमके का निजी स्वार्थ था l

भारत अमरीका के बीच डील ये हुई थी की रामसेतु तोड़कर उसमें से थोरियम निकालकर अमरीका भिजवाना था तथा जिस कंपनी को यह थोरियम निकालने का ठेका दिया जाना था वो डीएमके के सदस्य
टी आर बालू की थी………अभी यह मामला सुप्रीमकोर्ट में लंबित है l
इस डील को अंजाम देने के लिए मनमोहन (कांग्रेस) सरकार भगवान राम का अस्तित्व नकारने का पूरा प्रयास कर रही है, ओने शपथपत्रों में रामायण को काल्पनिक और भगवान राम को मात्र एक ‘पात्र’ बताती है और सरकार की कोशिश है की ये जल्द से जल्द टूट जाये, जबकि अमरीकी अन्तरिक्ष एजेंसी नासा ने रामसेतु की पुष्टि अपनी रिपोर्ट में की है l
...................................................
महान आयुर्वैदाचार्य वागभट्ट जी कहते है कि पिसा गेंहू का हुआ आटा 15 दिन से पुराना नही खाना चाहिए, जवार बाजरा चने का आटा 7 दिन पुराना न खाए क्यो कि इसके बाद इसमें पोष्ण कम होने लगता है, इसलिए भारत में चक्की है जो आपको ताजा आटा और स्वास्थय देती है, आप जो बाजार से आटा पिसवाते है या बाजार का लाते है वो बिजली की चक्की पर पिसता है जो बहुत तेजी से पिसता है जिस्से गर्मी की वजह से काफ़ी पोषक तत्व नष्ट हो जाते है, राजीव भाई ने एक रिसर्च किया चक्की पर अपने एक आयुर्वैदिक वैध मित्र के साथ मिलकर, उन्होने देखा जो माताए बहने चक्की चलाती है उन्हे कभी भी आप्रेशन से डिलवरी की जरूरत नही पडी और उन्हे कभी घुटनो का दर्द नही हुआ, पैरो का दर्द नही, मोटापा नही है

इसका कारण ये है कि जब हम चक्की चलाते है तो सारा दबाव आपके पेट पर पडता है जिससे महिलाओ के गर्भाश्य का व्यायाम होता रहता है जिस्से इसकी मुलायमियत (flexibility) बढ जाती है जिस्से डिलवरी आसानी से होती है बिना आप्रेशन बिना दर्द के, आपने सुना ही होगा कि कई साल पहले आपकी दादी नानी के जमाने में 8-10 बच्चे होते थे और गांव की दाई के द्वारा बिना आप्रेशन के

*मासिक धर्म बंद होने के समय जो मुश्किले महिलाओ को आती है उसका उपचार चक्की चलाने से अपने आप हो जाता है
*आयुर्वैद के अनुसार गर्भवती महिला 7वें महिने तक चक्की चला सकती है पर उसके बाद नही

आपको शायद ये भी पता होगा जो बच्चे आप्रेशन से हो रहे है वो ज्यादा बीमार रह रहे है सामान्य बच्चो से,
इसलिए आप अगर ताजा आटा खाकर स्वस्थ रहना चाहते है तो अपने घर चक्की ले आए जिस्से आपको स्वस्थय लाभ होगा, घर में माताओ बहनो को लाभ होगा, बीमारिया दूर होगी


हाथ की चक्की का महत्त्व एव लाभ ::
- आज मशीनीकरण ने महिलाओं के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाला है।
- सुबह सुबह योग करते हुए हम आटा चक्की चलाने की सिर्फ एक्टिंग करते है और पेट , कमर की चर्बी कम होती है. दिल स्वस्थ रहता है.
- क्या ही अच्छा हो अगर ये एक्टिंग ना हो कर असली चक्की हो तो उस कसरत से हमें ताज़ा आटा भी मिल जाएगा !
- पहले गांवों में विवाह-शादी के दौरान भी आस-पास के घरों में एक-एक मण गेहूं पीसने के लिए दे दिया जाता था.
- कभी पूरे परिवार का आटा पीसने वाली चक्की अब कुछेक घर में महज शो पीस व सिर्फ मसाला आदि पीसने के काम आ रही है.
- इससे महिलाओ के गर्भाश्य का व्यायाम होता रहता है डिलवरी आसानी से होती है बिना आप्रेशन बिना दर्द के
- कई घरों में तो हाथ की चक्की है ही नहीं.तो आज ही ले आइये.खादी ग्रामोद्योग में यह मिल सकती है . इससे चक्की बनाने वालों को रोज़गार मिलेगा.
- चक्की लेते वक़्त ज़्यादा मोल भाव ना करे. गरीब व्यक्ति को दान योग्य दान है जिसका लाभ मिलेगा.
- महिलाओं द्वारा आटा पीसने से शारीरिक कसरत भी जबरदस्त होती थी, जिससे पुराने जमाने की महिलाओं का स्वास्थ्य बनिस्बत आधुनिक महिलाओं की तुलना में बेहरत है. आज विशेष तौर से नई पीढ़ी की अधिकांश महिलाएं कुंठा, तनाव सहित पेट की विभिन्न बीमारियों से पीड़ित है.इसका मुख्य कारण उनकी दिनचर्या अव्यवस्थित होना व शारीरिक श्रम नहीं होना है.
- पुरुष भी अगर बढे हुए पेट को कम करना चाहते है तो हाथ की चक्की पर रोज़ थोड़ा आटा पिसे. आप अगर रोजाना 15-20 मिण्ट चक्की चला लेते है तो 3 महीने में आपका वजन कम हो जाएगा, पेट अन्दर चला जाएगा
- ताजे पिसे हुए आटे में स्वास्थ्य से जुड़े फायदे तो मिलते ही हैं, इसका स्वाद व सुंगध भी बरकरार रहते हैं.
- शुद्धता के मामले में घरेलू आटा चक्की का आटा शत प्रतिशत खरा होता है।
- इसके बने आटे में शरीर के लिए पोषण संबंधी सभी आवश्यक तत्व मौजूद रहते हैं। वैसे शरीर को अपना काम करने के लिए 49 पोषक तत्वों की रोजाना आवश्यकता होती है।
सबसे बड़ी बात यह कि जब जरूरत हो तब आटा पीस लें।
- सबसे बड़ा फायदा यह कि फसल के मौसम में पूरे साल के लिए अनाज खरीद लें, जो सस्ता भी पड़ेगा और पूरे साल शुद्ध ताजे आटे की रोटियां का मजा लेंगे।
- हाथ कि चक्की से हाथ से पिसे गए अनाज में चोकर ज्यादा रहता था लेकिन आजकल बिजली की चक्की से पिसे अनाज का आटा उपयोग में लिया जाता है, जो बहुत बारीक़ पिसा जाता है.
- ताजा आटा विटामिन बी और विटामिन ई से भरपूर होता है।
- घर पर पिसे आटे की रोटियों का आनंद ही कुछ और होता है। इससे परिवार की सेहत के साथ-साथ आत्मसंतुष्टि भी प्राप्त हो रही है.
- मशीन चक्की से अनाज का हीर हट जाता है अर्थात उसकी शक्ति क्षीण हो जाती है।, जिससे आज की तमाम युवा पीढ़ी कमजोर होती जा रही है.
-वैसे भी चक्की को घर में रखना शुभ माना जाता है, इससे घर के वास्तुदोष भी कम होते है
 ...............................................................................................