Thursday, 26 June 2014

जानिए राहु काल क्या है
हमारे हिंदू धर्म में शुभ कार्य से पहले शुभ मुहूर्त देखने की परंपरा है। शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य शुभ फल प्रदान करते हैं।
यदि भूलवश कोई शुभ कार्य अशुभ मुहूर्त में हो जाए तो इसका विपरीत परिणाम होता है।
वैसे ही राहुकाल को किसी भी शुभ कार्य के लिए अच्छा नहीं माना जाता। इसलिए किसी शुभ कार्य को करने से पहले राहुकाल पर एक नजर जरूर डाले ।
ज्योतिष शास्त्र में राहु को अशुभ ग्रह के साथ छाया ग्रह माना गया है। सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक के समय में से आठवे भाग का स्वामी राहु होता है। इसे ही राहुकाल कहते हैं।
यह प्रत्येक दिन 90 मिनट का एक निश्चित समय होता है, जो राहुकाल कहलाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस समय शुरू किया गया कोई भी शुभ कार्य या खरीदी-बिक्री को शुभ नही माना जाता।
आइये जानते है साप्ताहिक राहु काल का समय --
* रविवार को शाम 4.30 से 6.00 बजे तक राहुकाल होता है।
* सोमवार को दिन का दूसरा भाग यानी सुबह 7.30 से 9 बजे तक राहुकाल होता है।
* मंगलवार को दोपहर 3.00 से 4.30 बजे तक राहुकाल होता है।
* बुधवार को दोपहर 12.00 से 1.30 बजे तक राहुकाल माना गया है।
* गुरुवार को दोपहर 1.30 से 3.00 बजे तक का समय राहुकाल होता है।
* शुक्रवार को सुबह 10.30 बजे से 12 बजे तक का समय राहुकाल है।
* शनिवार को सुबह 9 बजे से 10.30 बजे तक के समय को राहुकाल माना गया है।
इस समय किया गया कोई भी शुभ कार्य या यात्रा अनेक परेशानियों को पैदा करता है इसलिए इस समय में कोई शुभ कार्य या यात्रा न करे -धन्यवाद
हिंदुत्व (HINDUISM)
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H = Humanity = मानवता
I = Integrity = सत्यनिष्ठा
N = Nobleness = उदारता
D = Divinity = देवत्व
U = Universal Brotherhood = विश्वबंधुत्व
I = Intelligence = ज्ञान
S = Service = सेवा
M = Meditation = ध्यान
मानवता, सत्यनिष्ठा और उदारता की प्रतिष्ठा के साथ, ज्ञान सेवा और ध्यान के माध्यम से विश्वबंधुत्व और देवत्व की प्राप्ति ही हिंदुत्व है .

Tuesday, 24 June 2014

आज पुरे विश्व को आतंक में झोकने वाले कट्टरपंथी वहाबी सुन्नी मुस्लिम कौन है ???
सऊदी अरब में नज्द नामक शहर इनका प्रमुख केन्द्र है। नज्द के बानू तमीम जनजाति के अब्दुल वहाब नज्दी ने ही वहाबी पंथ की बुनियादी डाली थी। भारत में सर्वप्रथम 1927 में हरियाणा के मेवात क्षेत्र में लोग वहाबी विचारधारा से जुड़े थे। इसके बाद उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबंद में इसका मुख्यालय स्थापित किया गया, जिसके कारण भारत में वहाबी विचारधारा के लोग देवबंदी कहलाए। भारत में देवबंदियों या वहाबियों की जमात को तब्लीगी नाम से भी जाना जाता है। वहाबी कट्टरता और जिहाद में विश्वास करते हैं, इसलिए इनके मदरसों में भी इसी प्रकार की शिक्षा दी जाती है। वहाबियों की एक जमात जिहाद बिन नफ्स (अंतरात्मा से जिहाद) और दूसरी जमात जिहाद बिन सैफ (तलवार के बल पर जिहाद) में यकीन रखती है।
अब्दुल्ला इब्ने-उमर की हदीस के अनुसार नज्द के संबंध में इस्लाम के संस्थापक पैगम्बर हजरत मुहम्मद साहब ने कहा था कि शैतान के सींग यहीं से उगेंगे। एक हदीस में यह भी कहा गया है कि वहाबी शैतान की सलाह मानेंगे। कुरान शरीफ में बताया गया है कि इब्लीस (शैतान) ने अल्लाह के आदेश को मानने से इंकार करते हुए हजरत आदम को सज्दा नहीं किया था। उल्लेखनीय है कि वहाबी भी नबियों (पैगम्बरों) और सूफियों को नहीं मानते। उनके मुताबिक दरगाहों पर जाना, चादर और प्रसाद चढ़ाना इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ है, जबकि भारत में दरगाहों की बड़ी मान्यता है। मुसलमान ही नहीं अन्य मत-पंथों के लोग भी अपनी मन्नतें लेकर दरगाहों पर बड़ी संख्या में जाते हैं। यह कहना भी गलत न होगा कि आतंकवाद के लिए वहाबी विचारधारा ही जिम्मेदार है। जैश-ए-मोहम्मद, लश्करे- तोएबा, हरकत-उल-अंसार (मुजाहिद्दीन), अल बद्र, अल जिहाद, स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट आफ इंडिया (सिमी) और महिला आतंकवादी संगठन दुख्तराने-मिल्लत जैसे दुनिया के सौ से ज्यादा आतंकवादी संगठनों के सरगना वहाबी समुदाय के ही हैं। इसके अलावा पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ, पाकिस्तानी की गुप्तचर संस्था आईएसआई के प्रमुख, बंगलादेश की पूर्व राष्ट्रपति खालिदा जिया, कंधार अपहरण कांड का मुख्य आरोपी अजहर मसूद और सलाहुद्दीन, चर्चित मुंबई बम कांड का मुख्य आरोपी दाऊद इब्राहिम सहित भारत में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अनेक अध्यक्ष और अन्य जिम्मेदार पदों पर आसीन लोग वहाबी विचारधारा को मानने वाले हैं। देवबंद विश्वविद्यालय के कुलपति मौलाना अबुल हसन अल नदवी भी कट्टरवादी विचारधारा के समर्थक थे। उनका मानना था कि मजहब के आदेश तब तक लागू नहीं होंगे जब तक इस्लामी आधार और व्यवस्था का नियंत्रण स्थापित नहीं हो जाता। इसके लिए वे वहाबी विचारधारा के प्रचार-प्रसार को जरूरी मानते थे।
लव जेहाद कैसे होता है?
(हिन्दू लड़किया सावधान)पोस्ट लंम्बी है पर जिन्दगी इससे जरूरी है इसलिए पढें. 

1. मुस्लिम लडको को मौलवियो व अन्य इस्लामिक संगठन द्वारा हिंदू लडकियो को फ़साने को ना केवल प्रोत्साहित किया जाता हैं अपितु इनाम के तौर पर या कहे घर बसाने के नाम पर बड़ी रकम भी रखी जाती हैं | ये रकम जेहाद के नाम पर, जकात के नाम पर, जिज्या के नाम या आपके द्वारा पेट्रोल पर दी हुई रकम से ली जाती हैं | 

2. कम से कम 4-5 लड़के (ज्यादा भी हो सकते हैं ) आपस में मिल के हिंदू लडकियो को चुनते हैं फ़साने के लिए | मुस्लमान हमेशा समूह में रहते हैं अपने कायर स्वाभाव की वजह से इसलिए उन हिंदू लडकियो को बचाना इतना सरल नहीं होता |

3. ये लड़के गर्ल्स कालेज के बाहर, कंप्यूटर संसथान के बाहर या अंदर, या कोचिंग संस्थानों के आसपास रहते हैं | कभी-2 लेडिस टेलर की दुकान पर 4-5 लड़के लगे ही रहते हैं | इन्टरनेट पर सोशल नेटवर्क से लेकर याहू चैट रूम तक हर वो जगह जहा इन्हें हिंदू लड़किया मिल सकती हैं वहा ये लगे रहते हैं घात में |( इसलिए हिन्दू लड़किया. किसी अनजान लड़के भले ही हिन्दू हो उसे फेसबुक पर add न करें).

4. ज्यादातर मौको पर ये लड़के खुद को हिंदू ही दिखाने का प्रयास करते हैं | अच्छा मोबाइल सेट, कपडे, वा मोटर साइकिल आकर्षण के तौर पर इनका हथियार होते हैं | जिम में घंटो कसरत भी ये लोंग इसी लिए करते हैं ताकि अधिक से अधिक हिंदू लड़किया फसा सके |

5. दक्षिण भारत में तो मुल्ला मौलवी इन लडको के लिए पर्सोनालिटी डेवेलोप्मेंट कोर्से चलवा देते हैं | किस तरह बात की जाए लडकियो से , उन्हें कैसे तोहफे दिए जाए | और किस प्रकार सेक्युलर बन कर उनसे सिर्फ प्यार मोहब्बत की बात कर के खूबसूरत सपने दिखाए जाए |

6. फिल्म उद्योग में बढते खान मेनिया से ये अब और भी सरल हो गया हैं | ज्यादातर हीरो खान होते हैं ऐसी मानसिकता लड़कियों में तेजी से बढ़ रही हैं जो की समाज के लिए बहुत की घातक हैं |

7. अगर हिंदू लड़की निश्चित समय में नहीं फसती तो लव जेहादी अपने किसी दूसरे मित्र को उसके पीछे लगा देता हैं और खुद किसी और के पीछे लग जाता हैं | इसे लड़की फॉरवर्ड करना कहते हैं |

8. जल्द ही ये लड़के भोली भाली हिंदू लडकियो को अपने प्यार के जाल में फसा लेते हैं | उनमे से कई तो शारीरिक सम्बन्ध भी स्थापित कर लेते हैं | ज्यादातर घटनाओ में मुस्लिम लड़के वाईग्रा का इस्तेमाल करते हैं ताकि लड़किया संतुष्ट रहे और उनके खानपान से आई नापुसकता छुपी रहे |

9. एक बार लड़की से सम्बन्ध स्थापित हो गए तो लड़की को घर से भागने के लिए मनाने में इन्हें देर नहीं लगती | कही बार ये पहले भी मना लेते हैं पर ऐसा कम ही होता हैं |

10. भगा के लड़का लड़की को शादी से पहले इस्लाम कुबूल करने पर मजबूर करा लेता हैं इस्लामी तरीके से शादी के नाम पर और लड़की फस जाती हैं जाल में क्यों की लड़की को वापस जाने की बात तो दिमाग में आती ही नहीं |

11. लड़की को भगा के इस्लामिक शादी कर ले जाने के बाद लड़की के साथ निम्न में से एक घटना होती हैं

क ) लड़का लड़की का पूरी तरह भोग कर के उसके शहर से चार पाच सौ किलोमीटर दूर बेच देता हैं किसी अधेड उम्र के मुस्लमान आदमी को जिसको उसकी बदसूरती की वजह से औरत नहीं मिली होती या उसे बस औरतो का शौक होता हैं | यानि लड़की को वैश्या व्रती के दल दल में डाल देता हैं |

ख ) लड़की को पता चलता हैं के लड़का पहले से ही 2-3 शादिया करे बैठा हैं | और उसे भी नकाब में बंद एक कमरा मिल जाता हैं |

घ ) लड़की की किस्मत अच्छी होती हैं और वो उसकी पहली बीवी ही निकलती हैं | इस पारिस्थि में लड़की नकाब में तो कैद होती हैं पर उसे अपने 2-3 सौतनो का इन्तेज़ार करना पड़ता है | और लड़के की गुलाम बन कर रह जाती हैं क्यों की वो इस्लाम कुबूल कर चुकी होती हैं और इस्लाम में औरत को तलाक का कोई अधिकार नहीं होता |
नाम :- भाई मती दास..
तारीख :- 24 नवम्बर 1675 ई.
जगह :- ,चादनी चौक,, डेल्ही,,लाल किला..
प्रशासन की कूररता देखने के लिए भीड़ सुबह से एक्कठी होने लगी थी..
कश्मीर के हिन्दुयो के ढाल बने गुरु तेग बहदुर..जी के साथ 5 सिक्खों को मुसलमान बनाना था...भाई मती जी इन्ही में से एक थे..
सिसगन्ज गुरुद्वारे के बगल में मौजूद सुनहरी मस्जिद के गाजी ने एक बार फिर से अपनी बात रक्खी..इस्लाम - या तलवार-
भाई मती दास जी मुस्कुरा दिए -
आरा उनके सर पर रख दिया गया - गाजी ने फिर पूछा इस्लाम के फायदे गिनाये -
भाई मती दास जी ने बोला हे औंरगजेब तू अपना समय नस्ट कर रहा है-
मेरा मुह मेरे गुरु तेग बहादुर जी के समुक्ख रक्ख मेरा रिश्ता मेरे रूह साथ है- आरी चल पड़ी- खून का फौवारा निकल पड़ा-
भाई मती दास जी तिलक जनेऊ की रक्च्छा के लिए परलोक गमन कर गये-
आज इनकी तस्वीर को सरकार पर सरकार ने प्रतिबन्ध लगा रक्खा है -
और औरंगजेब के नाम की रोड बना रक्खी है--
( भाई मती दास जी संग्रहालय सीस गंज गुरुद्वरा के सौजन्य से)

एक दिन एक थिएटर में मुझे एक परिचित की लड़की मिली, उसके साथ एक लड़का भी था, मैंने उनको देखा तो नमस्ते की, मैं नजदीक चला गया, कुछ देर बात हुईं तो पता चला की लड़का उसका बॉय फ्रेंड है, और दोनों शादी करना चाहते हैं, बातों बातों में मैंने लड़के का एड्रेस पता किया, लड़का बड़ी सी गाड़ी में आया था, लगता था किसी बड़े कारोबारी का बेटा है, मैंने लड़के की फोटो ले ली, उसने अपना नाम बिट्टू बताया, मुझे कुछ शक हुआ, तो बाद में लड़के का घर ढूंढा, लड़के के नाम से नहीं पर फोटो से उस एड्रेस के पास ही उसका घर मिल गया, घर के बाहर टाट के कई पैबंद लगा पर्दा था, लड़का मुस्लिम था, घर के बाहर ही उसकी माँ मुगफली बेच रही थी, घर में पाच शादीशुदा भाई और भी रहते हैं, जो घर में कम जगह होने के कारण शिफ्टों में सोने आते हैं, लड़के के काम करने की जगह पता करने पर वहाँ जाकर मैंने देखा की लड़का कार के एक छोटे गेराज में मिस्त्री का काम करता है, और गाडी की ट्राई के बहाने उनमे घूमता भी है,....मैंने लड़की को जाकर सारी बात बताई, उसके पैरों तले की ज़मीन खिसक गई, एक बैंक मेनेजर की बेटी का क्या हाल होने वाला था अगर उसको मैं नहीं मिलता, ऐसा चांस सभी को नहीं मिलता, अतः जरुरत जागरूकता फ़ैलाने की है ....
नीरज कौशिक
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साधारण धनुष नहीं था वह शिवजी का धनुष, उस ज़माने का आधुनिक परिष्कृत नियुक्लियर वेपन था, भारतवर्ष की गौरवशाली गाथा संसार में अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिये शेयर करें, हमारे ऋषि मुनियों को तब चिंता हुई जब उन्होंने देखा की शिवजी के धनुष पर रावण जैसे लोगों की कुद्रष्टि लग गई है, जब इसपर विचार हुआ की इसका क्या किया जाये? अंत में निर्णय हुआ की आगे भी गलत हाथ में जाने के कारण इसका दुरूपयोग होने से भयंकर विनाश हो सकता है अतः इसको नष्ट करना ही सर्वथा उचित होगा, हमारे ऋषियों(तत्कालीन विज्ञानिक) ने खोजा तो पाया की कुछ पॉइंट्स ऐसे हैं जिनको विभिन्न एंगिल से अलग अलग दवाव देकर इसको नष्ट किया जा सकता है, और यह भी निर्णय हुआ की इसको सर्वसमाज के सन्मुख नष्ट किया जाये, अब इसके लिए आयोजन और नष्ट करने हेतू सही व्यक्ति चुनने का निर्णय देवरिषि विश्वामित्र को दिया गया, तब सीता स्वम्वर का आयोजन हुआ और प्रभु श्रीराम जी द्वारा वह नष्ट किया गया,