Tuesday, 29 December 2015

झूठे इतिहास को पढ़ाकर हिन्दुओं को नपुंशक बनाने का षड्यंत्र।
 हिँदुओँ सच्चे इतिहास से परिचित हो। वीरों - महावीरो को इतिहास के पन्नो में सिमटने नहीं देंगे हम...पहचानिए अपने गौरव को ... सत्य ना कभी झुका हैं ना कभी झुकेगा। झूटे इतिहास को पढ़ाकर हिन्दुओं को नपुंशक बनाने का षड्यंत्र :- हम लोगों को जो झुठा इतिहास पढाया जाता हैं इसलिए की ताकि हमे गुलामी की आदत पड़ जाय। ये ही पढ़ते हैं हम हमेशा की मुगलों ने ४०० साल राज किया, गौरी गजनवी आये, और हमारे मंदिर लूट कर चले गये, तुर्क अफगान आये, और हम पर सैंकड़ो सालो तक राज करके चले गए, आदि आदि हमको डराने वाली बातें जिससे हमारे अंदर हीन भावना आ जाये॥
 कब तक नेहरु गाँधी का झूठा इतिहास पढ़ते रहोगे, कब तक ये कहते रहोगे, की मुसलमानों ने हम पर ८०० साल राज किया। अरे जला डालो ऐसी किताबो को जहा ये लिखा है की अकबर महान था, फाड़ दो उन पृष्ठों को जो कहते है की बाबर बहुत शक्तिशाली था, फेंक दो उन दस्तावेजो को जो कहते है की औरंगजेब ने लाखो कश्मीरी पंडितो के जनेऊ उतरवाए पर किसी हिन्दू ने प्रतिकार नहीं किया।
 १.) अफगानिस्तान के अटक से लेके कटक तक और दक्षिण से दिल्ली तक मुस्लीम सत्ता को हिंदू वीरो ने महावीरो ने परास्त कर चूर चूर कर दिया। ये इतिहास गांधी-नेहरू जैसे राक्षस तुमको कभी नही बतायेंगे...
 २.) अफगानिस्तान पर आक्रमण करके मराठा सेना ने ४५००० पठानो को काट फेका और ८०० वर्षो बाद गांधार पर भगवा झंडा लहराया।
 ३.) सोमनाथ मंदिर तोड़ने वाला भी कुत्ते की तरह टुकड़े टुकड़े कर के चील गिद्धों को खिला दिया गया इसी देश मैं यह कोई नहीं बताएगा।
४.) शिवाजी महाराज के सेनापति हम्बिराव ने ३ घंटे मैं ६०० मुल्लो को काट डाला था यह कोई नहीं बताएगा।
 ५.) दिल्ली का गौरी शंकर मंदिर आज भी उस वीर हिदू गाथा का गवाह है जब वीर हिन्दू नायक बाजी राव पेशवा प्रथम ने मुगलों की ईंट से ईंट बजा कर दिल्ली पर भगवा झंडा फहराया था और ८०० वर्ष पुराने गौरी शंकर मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया था।
६.) ये वो हिन्दू शुरमे थे जिनके नाम मात्र से मुग़ल सेना काँप जाती थी। क्यूँ ? कही हिन्दू फिर से तलवार लेकर खड़ा हो गया तो सारे गद्दार कट कट कर मारे जायेंगे और बचने को कोई जगह नहीं मिलेगा।
भोजन

ऐसा कोइ भी पदार्थ जो शर्करा (कार्बोहाइड्रेट), वसा, जल तथा/अथवा प्रोटीन से बना हो और जीव जगत द्वारा ग्रहण किया जा सके, उसे भोजन कहते हैं। जीव न केवल जीवित रहने के लिए बल्कि स्वस्थ और सक्रिय जीवन बिताने के लिए भोजन करते हैं। भोजन में अनेक पोषक तत्व होते हैं जो शरीर का विकास करते हैं, उसे स्वस्थ रखते हैं और शक्ति प्रदान करते हैं।
भोजन के विविध अवयव/texture संपादित करें
भोजन में पाए जाने वाले आवश्यक तत्व हैं - कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा और तेल, विटामिन और खनिज। इसके अतिरिक्त भोजन में सभी पोषक तत्व होने चाहिए ; अर्थत् मांसपेशियों और उत्त्कों को सबल बनाने के लिए प्रोटीन, ऊर्जा या शक्ति प्रदान करने के लिए कार्बोहाइड्रेट और वसा, मजबूत हडि्डयों और रक्त के विकास के लिए खनिज लवण और स्वस्थ जीवन एवं शारीरिक विकास के लिए विटामिन।
शरीर में विभिन्न पोषक तत्वों- कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन और खनिज की आवश्यकता मनुष्य की आयु, लिंग, शारीरिक श्रम और शरीर की दशा पर निर्भर करती है। शारीरिक श्रम करने वाले एक मजदूर को दफ्तर में काम करने वाले व्यक्ति की अपेक्षा शक्ति प्रदान करने वाले भोजन की कहीं अधिक आवश्यकता होती है। गर्भवती औरतों और स्तनपान करने वाले बच्चों की माताओं को शारीरिक परिवर्तनों के कारण अधिक प्रोटीन और खनिजों की आवश्यकता होती है।
इसलिए यह जरूरी है कि हर व्यक्ति अपनी आयु, लिंग, काम की दशा आदि के अनुसार अपने भोजन में सभी आवश्यक पोषक तत्व शामिल करे। मनुष्य की इन आवश्यकताओं को पूरा करने वाले भोजन को संतुलित भोजन (बैलेंस्ड फुड) कहते हैं।
निम्नलिखित खाद्य वर्ग की वस्तुओं को सूझबूझ के साथ मिलाकर संतुलित भोजन तैयार किया जा सकता है।
शक्तिदायक भोजन : संपादित करें
कार्बोहाइड्रेट तथा वसा युक्त भोजन को शक्तिदायक भोजन कहते हैं। दालें, कन्दमूल, सूखे मेवे, चीनी, तेल और वसा इस वर्ग में आते हैं।
शरीर-निर्माण करने वाले भोजन: संपादित करें
अधिक प्रोटीन वाला भोजन शरीर निर्माण करने वाला भोजन कहलाता है। दूध, मांस, मछली, अंडे, दालें, तिलहन, गिरी और कम वसा वाले तिलहनों के उत्पाद इस वर्ग में आते हैं। प्र्रोईन हमरे शरिर क अत्यन्त आवाशयक तत्व है
संरक्षण देने वाले भोजन : संपादित करें
जिस भोजन में प्रोटीन, विटामिन और खनिज अधिक पाये जाते हैं उसे संरक्षण देने वाला भोजन कहते हैं। दूध और दूध के उत्पाद, अंडे, कलेजी, हरी पत्तेदार सब्जियाँ और फल इस वर्ग में आते हैं।
भारत में अधिकांश लोग अधिक अनाज खाते हैं और उनके भोजन में दूसरे शक्तिवर्द्धक तत्वों की कमी होती है। मोटे तौर पर भोजन में बदलाव लाकर उसमें सुधार किया जा सकता है, अर्थात् जहां कहीं भोजन में अन्न की अधिकता हो, अन्न की मात्रा कम की जाए और उसके बजाए भोजन में शरीर की प्रोटीन, विटामिन और खनिजों की आवश्यकता पूरी करने वाले तत्व बढ़ाए जाएं। जहां कहीं इस प्रकार के खाद्य पदार्थ उपलब्ध हों उनसे और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रयोग से, परिरक्षित भोजन की सहायता से, पौष्टिक आहार में सुधार लाया जा सकता है। भोजन तैयार करने की सुधरी विधियों का प्रयोग करके भोजन पकाने के दौरान पोषक तत्वों को होने वाली हानि को रोका जा सकता है। भोजन को अधिक उबालने या तलने से बहुत से पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। इसलिए इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि खाना सही तरीके से पकाया जाए।
पोषकों के कार्य और उनके स्रोत : संपादित करें
प्रोटीन : संपादित करें
शरीर में उत्तकों, मांसपेशियों और रक्त जैसे महत्वपूर्ण द्रव्यों का निर्माण, संक्रमण का सामना करने के लिए इन्जाइम और रोग प्रतिकारक तत्वों के विकास में सहायता।
स्रोत :- ताजा या सुखाया हुआ दूध, पनीर, दही, तिलहन और गिरी, सोयाबीन, खमीर, दालें, मांस, कलेजी, मछली, अण्डे और अनाज।
वसा : संपादित करें
शक्ति के संकेिन्द्रत स्रोत का काम करना और घुलनशील विटामिनों की पूर्ति करना।
स्रोत : मक्खन, घी, वनस्पति तेल और वसा, तिलहन और गिरी, मछली का तेल और अण्डे की जर्दी।
कार्बोहाइड्रेट : संपादित करें
शरीर को शक्ति प्रदान करना।
स्रोत : अनाज, बाजरा, कन्दमूल जैसे कि आलू, चुकन्दर, अरबी, टेपिओका आदि और चीनी तथा गुड़।
विटामिन संपादित करें
विटामिन ए : संपादित करें
शरीर की चमड़ी और श्लेष्म झिल्ली को स्वस्थ रखना और रात्रि अन्धता से बचाव।
स्रोत : मछली का तेल, कलेजी, दूध के उत्पाद दही, मक्खन, घी गाजर, फल और पत्तेदार सिब्जयां।
विटामिन बी 1 (थायामिन) संपादित करें
सामान्य भूख, पाचन शक्ति तथा स्वस्थ स्नायु प्रणाली और भोजन की शर्करा को शक्ति में बदलना।
स्रोत : कलेजी, अण्डे, फलियां, दालें, गिरी, तिलहन, खमीर, अनाज, सेला चावल।
विटामिन बी-2 (रिबोफ्लेविन) : संपादित करें
कोशिकाओं को आक्सीजन के उपयोग में सहायता देना, आंखों को स्वस्थ और साफ रखना तथा नाम मुंह के आसपास पपड़ी न जमने देना तथा मुंह के कोरों को फटने से बचाना।
स्रोत : दूध, सपरेटा, दही, पनीर, अण्डे, कलेजी और पत्तेदार सिब्जयां।
नियांसिन संपादित करें
चमड़ी, पेट, अंतिड़यों और स्नायु तंत्र को स्वस्थ रखना।
स्रोत : दालें, साबुत अनाज, मांस, कलेजी, खमीर, तिलहन, गिरी और फलियां।
विटामिन सी : संपादित करें
कोशिकाओं को मजबूत बनाना, रक्त वाहिक की भित्तियों को शक्तिशाली बनाना, संक्रमण की रोकथाम और रोग से जल्दी मुक्ति पाने की शक्ति प्रदान करना।
स्रोत : आंवला, अमरूद, नींबू की जाति के फल, ताजी सिब्जयं और अंकुरित दालें।
विटामिन डी : संपादित करें
शरीर को काफी मात्रा में कैिल्शयम ग्रहण करने और हड्डी मजबूत बनाने में सहायता देता है।
स्रोत : दूध, मक्खन, अंडे की जदीZ, दूध, पनीर, मछली, तेल और घी।
कैल्शियम और फास्फोरस : संपादित करें
हडि्डयां और दांत बनाने, रक्त बढ़ाने तथा पेशियों और नािड़यों को ठीक रूप् से काम करने में सहायक होता है।
स्रोत : दूध और इसके उत्पाद, पत्तेदार सिब्जयां, छोटी मछली और अनाज आदि।
लौहतत्व : संपादित करें
प्रोटीन के साथ मिलकर हीमोग्लोबीन (रक्त में एक लाल पदार्थ जो कोषिकाओं में आक्सीजन ले जाता है) बनाना।
स्रोत : कलेजी, गुर्दा, सिब्जयां, तिलहन-गिरी, फलियां, दालें, गुड़, सूखे मेवे और पत्तेदार सिब्जयां।
डायबिटीक में अत्यंत लाभकारी जीरा: (Like/Share this information)
खून में शुगर स्तर को कम करने में मदद करता है जीरा..
जीरा न सिर्फ भोजन के स्वाद को बेजोड़ बनाता है बल्कि कई बीमारियों में भी बहुत लाभदायक होता है। डायबिटीक लोगों के लिए जीरा अत्यंत लाभकारी है। यह खून में शुगर स्तर को कम करने में मदद करता है। जीरे में आयरन भरपूर मात्रा में होता है जिससे यह खून की कमी यानी एनीमिया को दुरुस्त करता है और रक्त में हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाता है।
यह शरीर में ऑक्सीजन का सभी हिस्सों में पहुंचना सुचारु करता है। दमे के मरीजों को इसके भरपूर लाभ मिलते हैं। इसमें थायमोक़्यीनॉन नामक एक खास तत्व होता है जो दमे को रोकने बहुत कारगर है।
भारतीय पाक कला में मसालों के इस्तेमाल का अलग ही महत्व है। मसाले न सिर्फ स्वाद बढ़ाने का काम करते हैं बल्कि ये स्वास्थ्य के लिए भी बेजोड़ होते हैं। हमारे खाने में कई पकवान तो इन मसालों के नाम पर ही जाने जाते हैं जैसे ज्यादातर पसंद किया जाने वाला जीरा राइस। सही समझे आप, जीरे में कई तरह के गुण छुपे हुए हैं जिनसे आपकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दूर हो सकती हैं। जीरा काला, सफेद और मटमैले रंग में उपलब्ध होता है।
जीरे के स्वास्थ्य संबंधी अनुपम गुण इसे न केवल भारतीय खाने का अहम हिस्सा बनाते हैं बल्कि पुराने समय में यह रोमन, ग्रीक और मिस्र संस्कृति का भी खास हिस्सा था। इतना खास कि यह करंसी के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। जीरा शरीर के सभी अंगों के लिए बहुत फायदेमंद है क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है और इसके उपयोग से विभिन्न प्रकार के लाभ होते हैं।
हमारे शरीर में विभिन्न कारणों से गंदगी आ जाते हैं जिन्हें शरीर पसीने और फुंसियों के रूप में बाहर निकालता है। जीरे का नियमित इस्तेमाल शरीर की शोधन करने की प्रक्रिया को तेज करता है और गंदगी मुंहासों और फुंसियों के तौर पर बाहर नहीं आती। आपकी त्वचा साफ और सुंदर बनी रहती है।
जीरे में विटामिन ई भरपूर मात्रा में होता है जिससे यह त्वचा को स्वस्थ रखने में बहुत कारगर होता है। इसमें प्राकृतिक तेल होने के साथ साथ एंटी फंगल गुण होते हैं जिनसे त्वचा इंफेक्शन से बची रहती है। इसमें त्वचा संबंधी बीमारियों जैसे एग्ज़िमा और सोराइसिस को ठीक करने के गुण होते हैं। जीरा पाउडर को आप अपने फेसपैक में भी मिला सकते हैं। इसमें पाया जाने वाला विटामिन ई त्वचा पर होने वाले उम्र के असर को कम करता है।
अगर आपको हथलियों में कुछ गर्मी महसूस हो रही हो तो जीरे को पानी में उबालकर ठंडा करके प्यास लगने पर पी लीजिए। अगर आप हर बार गुनगुना जीरा पानी पी सकें तो फायदा दुगुनी तेजी से होगा। जीरे के उपयोग से बना फेसपैक बहुत फायदेमंद होता है। इसे हल्दी के साथ मिक्स करके बनाया जाता है। जीरा पावडर और हल्दी को शहद के साथ इस्तेमाल करना चाहिए।
इस पेस्ट को चेहरे पर लगाकर सूखने तक रखना होता है। इससे त्वचा नर्म और उजली बनती है। जीरे के उपयोग से रूसी से भी छुटकारा पाया जा सकता है। इसे आप अपने तेल में थोड़ा गर्म करके इस गुनगुने तेल से सिर पर मसाज कीजिए और रूसी से छुटकारा पा लीजिए।
बच्चों के विभिन्न रोगों की पहचान...
1. सिर का दर्द : अगर बच्चे के सिर में दर्दहोता है तो बच्चा बार-बार अपनी आंखेंबंद कर लेता है। इसके अलावा वह अपने सिर को एक जगह टिकाकर नहीं रखता, उसकी गर्दन नीचे की तरफ ही झुकी रहती है। वह सिर को धुनता रहता है और जगह-जगह टक्करें मारता रहता है। सिर में दर्द होने से सिर की चमड़ी बिल्कुल सिकुड़ सी जाती है। बच्चे का हाथ बार-बार सिर में ही जाता रहता है और वह अपने कान भी खींचता रहता है।
2. मूत्राशय की परेशानी : अगर बच्चे के मूत्राशय में दर्द होता है तो बच्चा पेशाब रुकने से बहुत दुखी रहता है और इसी कारण कुछ खाता-पीता भी नहीं है।
3. दर्द: बच्चे के कम या ज्यादा रोने से उसके तकलीफ (दर्द) समझा जा सकती है। अगर बच्चा कम रोता है तो समझ लेना चाहिए कि बच्चे को तकलीफ (दर्द) कम है और अगर बच्चा रोता ही रहे और जोर-जोर से चिल्लाए तो समझ जाना चाहिए कि बच्चे को तकलीफ (दर्द) ज्यादा है।
4. दिल का रोग : अगर बच्चा अपने होंठ और जीभ को दांतों से काटे और मुटि्ठयों को भींचे तो समझ जाना चाहिए कि बच्चे के हृदय (दिल) में दर्द है।
5. पेडू का दर्द: अगर बच्चे का पाखाना-पेशाब (टट्टी-पेशाब) बंद हो तथा वह उल्टी दिशाओं को देखें तो उसकी वस्ति, पेडू और गुदा में दर्द समझ लेना चाहिए। अगर बच्चे को पेशाब न आ रहा हो और बार-बार प्यास लगे और बच्चे को बेहोशी छा रही हो तो बच्चे के पेड़ू में दर्द समझ लेना चाहिए। पेट का दर्द : अगर अच्छा स्वस्थ बालक रह-रहकर बार-बार रो उठे, तो समझो उसके पेट में दर्दहो रहा है।
6. प्यास का रोग: दूध पीने वाले बच्चे को जब प्यास लगती है, तब वह अपनी जीभ बाहर निकलता है।
7. जुकाम: जब बच्चे को जुकाम होता है और उसकी नाक बंद हो जाती है, तो वह मुंह से सांस लेने के लिए, दूध पीते-पीते बार-बार स्तन को छोड़ देता है और सांस लेकर फिर दूध पीने लगता है।
8. सांस की परेशानी: अगर सांस लेते समय बच्चे की नाक का छेद बड़ा हो जायें और नाक हिले, तो समझना चाहिए कि बच्चे को सांस लेने में बड़ी परेशानी हो रही है औरउसकोखांसीसे बड़ी तकलीफ है।
9. बुखार: अगर पता करना है कि बच्चे को कितना बुखार है तो बच्चे के मुंह में थर्मामीटर लगाना चाहिए। बालक की नाड़ी(नब्ज) स्वभाव से ही बहुत तेज चला करती है, इसलिए नाड़ी की चाल (नब्ज चलने की रफ्तार) से धोखा होने का डर रहता है जो जानने वाले अनुभवी वैद्य होते हैं, वह तो धोखा नहीं खाते, पर जो नौसिखिये (न जानने वाले) होते हैं वे धोखा खा जाते हैं। थर्मामीटर से किसी तरह का धोखा नहीं हो सकता है।
10. जिगर का रोग : बच्चों का पेट स्वभाव से ही कुछ बड़ा होता है। अगर पेट कुछ ज्यादा ही बड़ा हो तो समझ लेना चाहिए कि बच्चे को यकृत(जिगर) या प्लीहा का रोग है अथवा अजीर्ण है। कुछ भी रोग हो पहले अच्छी तरह पता करके कि बच्चे को रोग क्या है फिर दवा देनी चाहिए।
महिलाओं में थाइरोइड / Thyroid की समस्या अधिक पायी जाती हैं। हाइपोथायरायडिज्म / Hypothyroidism के कारण महिलाओं में कब्ज, थकावट, मोटापा, बाल झड़ना और तनाव जैसी कई समस्या निर्माण हो जाती हैं। Hypothyroidism को नियंत्रण में रखने के लिए दवा और योग के साथ-साथ आहार में बदलाव लाना बेहद जरुरी होता हैं।
आज इस लेख में हम Hypothyroidism से पीड़ित व्यक्तिओं ने कौन से आहार पदार्थ ज्यादा लेना चाहिए और कौन से आहार पदार्थ कम लेना चाहिए इसकी चर्चा करने जा रहे है।

Hypothyroidism के रोगियों ने कौन सा आहार लेना चाहिए ?
Foods to eat if you have Hypothyroidism
Hypothyroidism के रोगियों ने निचे दिए हुए आहार पदार्थों का अपने आहार में ज्यादा समावेश करना चाहिए :
साबुत अनाज / Whole Grains : Hypothyroidism से पीड़ित व्यक्तिओं में कब्ज / Constipation की समस्या रहती हैं। कब्ज से बचने के लिए अधिक Fiber युक्त साबुत अनाज जैसे की भूरे चावल, गेहूं, ब्रेड और पास्ता जैसे साबुत अनाज ज्यादा लेना चाहिए। Hypothyroidism की दवा खाली पेट लेने के 2 घंटे बाद ही साबुत अनाज खाना चाहिए।
दूध / Milk : Hypothyroidism से पीड़ित व्यक्तिओं में Calcium की कमी अधिक रहती हैं। सुबह-शाम एक गिलास फोर्टिफाइड दूध पीकर आप Calcium की कमी को दूर कर सकते हैं।
फलियां / Beans : फलियां में प्रचुर मात्रा में Fiber, Vitamin और Anti Oxidants होता हैं। मूंग, उड़द, मसूर, चना, राजमा जैसे Beans को अपने आहार में अवश्य लेना चाहिए।
आयोडीन / Iodine : Hypothyroidism के रोगियों ने अपने आहार में आयोडीन युक्त आहार का समावेश करना चाहिए। शरीर में पर्याप्त मात्रा में आयोडीन रहने पर थाइरोइड ग्रंथि सुचारू रूप से कार्य करती हैं।
मछली / Fish : मांसाहार खाने वालो ने अपने आहार में समुद्र मछली जैसे की सेल्फिश, सामन और झींगा खाना चाहिए। इनमे आयोडीन और Omega-3-Fatty acid अधिक मात्रा में होता हैं।
आयरन / Iron : आहार में Copper और Iron युक्त आहार का अधिक समावेश करे जैसे की काजू, बादाम, सूरजमुखी बीज इत्यादि। Copper और Iron से थाइरोइड ग्रंथि में हॉर्मोन की निर्मिति ठीक होती हैं।
सेलेनियम / Selenium : थाइरोइड ग्रंथि में सेलेनियम अधिक मात्रा में होता हैं। आहार में सेलेनियम युक्त आहार जैसे की भूरे चावल, अलसी के बीज, सूर्यफुल के बीज, तिल, गाजर, प्याज, लहसुन इत्यादि का समावेश करना चाहिए।
फल और सब्जी / Fruits & Vegetables : आहार में फल और हरी सब्जियों का समावेश कर समतोल आहार लेना चाहिए। इनमे मौजूद Vitamins और Anti Oxidants थाइरोइड ग्रंथि के सेहत के लिए जरुरी होता हैं।
आयुर्वेदिक जडीबुटी / Herbs : आयुर्वेद के अनुसार अश्वगंधा, कांचनार, ब्राम्ही, गुग्गुल, शिलाजीत, गोक्षुर और पुनर्नवा जैसी जडीबुटी से थाइरोइड रोग में लाभ होता हैं। आप आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह अनुसार इन्हे उचित मात्रा में रोजाना ले सकते हैं।
Hypothyroidism के रोगियों ने कौनसा आहार मर्यादित मात्रा में लेना चाहिए ?
Foods to avoid if you have Hypothyroidism
Hypothyroidism के रोगियों ने निचे दिए हुए आहार पदार्थ मर्यादित मात्रा में लेने चाहिए या बिलकुल नहीं लेने चाहिए :
सोया / Soy : आहार विशेषज्ञों के अनुसार सोया में Phytoestrogen नामक तत्व अधिक रहता है जिसके अधिक सेवन करने से Hypothyroidism होने का खतरा रहता हैं। Hypothyroidism से पीड़ित व्यक्तिओं ने इसका सेवन मर्यादित मात्रा में करना चाहिए।
सलीबधारी सब्जी / Cruciferous Vegetables : सलीबधारी सब्जी जैसे की गोभी / Cabbage, ब्रोकोली / Broccoli, फूल गोभी / Cauliflower, शलजम / Turnip, पालक / Spinach जैसे सब्जियों का आहार में समावेश कम करना चाहिए। रक्त में आयोडीन की कमी होने पर यह सब्जी थाइरोइड की निर्मिति में बाधा डालती हैं। पकाने पर इन सब्जियों का असर कम हो जाता हैं।
लस / Gluten : Gluten युक्त आहार लेने पर आंत में थाइरोइड की गोली का अवशोषण ठीक से नहीं होता है इसलिए इसका आहार में मर्यादित प्रमाण में ही समावेश करना चाहिए। थाइरोइड की दवा लेने के 3 घंटे तक कोई Gluten युक्त आहार नहीं लेना चाहिए।
फैट्स / Fats : अधिक Fat युक्त आहार लेने से शरीर में थाइरोइड हॉर्मोन की निर्मिति पर बुरा असर पड़ता हैं। आहार में अधिक तला हुआ और फैट युक्त आहार नहीं लेना चाहिए।
मीठा / Sugary : Hypothyroidism के कारण शरीर की चयापचय की गति धीमी पड़ जाती है और इस कारण मीठा आहार लेने पर रोगी का वजन आसानी से बढ़ जाता हैं। अपने वजन को नियंत्रित करने के लिए और मोटापे से बचने के लिए पौष्टिक गुणों से रहित मीठे आहार लेने से बचना चाहिए।
प्रसंस्कृत आहार / Processed Foods : बाजार में आजकल कई तरह के तैयार सब्जी और खाद्य पदार्थ मिलते हैं जिनमे अधिक मात्रा में नमक का इस्तेमाल होता हैं। Hypothyroidism में रोगी के रक्तचाप बढ़ने की संभावना अधिक होती हैं और ऐसे में अधिक नमक / सोडियम वाला आहार नहीं लेना चाहिए। एक दिन में 1500 mg से ज्यादा सोडियम नहीं लेना चाहिए।
कॉफ़ी / Coffee : एक अध्ययन से पता चला है की जो रोगी सुबह अपनी Hypothyroidism की दवा के साथ कॉफ़ी लेते है ऐसे रोगियों में थाइरोइड हॉर्मोन नियंत्रण बड़ी मुश्किल से होता हैं। कॉफ़ी के कारण Thyroxine दवा का अवशोषण / absorption ठीक से नहीं होता हैं। Hypothyroidism के रोगी ने सुबह खाली पेट केवल पानी के साथ ही अपनी दवा लेना चाहिए और आधे घंटे के बाद ही 1 गिलास दूध पीना चाहिए।
शराब / Alcohol : शराब पिने से थाइरोइड ग्रंथि पर बुरा असर पड़ता है और साथ ही थाइरोइड दवा भी बेअसर साबित हो जाती हैं। Hypothyroidism के रोगियों से शराब का सेवन बिलकुल नहीं करना चाहिए।
गण्डमालाकारक आहार / Goitrogenic Food : कुछ आहार पदार्थ ऐसे है जिनका अधिक सेवन करने से गले में सूजन होकर गण्डमाला / Goiter खतरा रहता हैं। ऐसे आहार में शामिल हैं बाम्बू शाखा / Bamboo shoots, श्वेत सरसों का तेल / Canola oil, सोयाबीन / Soyabean, शक़्क़र कंद / Sweet potato, एक ऐसा कांड जिसका सॉस बनता हैं / Horse Radish इत्यादि।
Hypothyroidism को नियंत्रण में रखने के लिए और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए दवा, योग, व्यायाम के साथ आहार में परिवर्तन करना भी जरुरी होता हैं। आहार में योग्य बदलाव कर आप इस बीमारी को आसानी से control कर सकते है।
इराक के यजीदी समुदाय के लोग जिन्हें जबरन मुस्लमान बनाया जा रहा है
..जिनकी माँ बहनो की सरे आम नीलामी हो रही है ...यकीन मानिए 100 साल बाद
इनकी पीढ़िया कहेंगी हमारे पूर्वजो ने इस्लाम को शांति और खूबसूरती के
मजहब के नाते अपनाया ...!!
यकीन ना आये तो एकबार भारतीय मुसलमानो से पूछ के देख लो ...
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दोज़ख का कब्रस्तान
(राबिया की कविताओं का सीधा फारसी से अनुवाद)
By Farhana Taj
किसने बनाया है नफरत को
सांसारिकता का अपराग,
किसने जलाई है निर्ममता से
दोजख में अबुझ आग।
कौन बना रहा स्वर्ग में
शीतल जल की नहरें,
जिसने हटाए हूर तन से
नारी सुलभ लज्जा के पहरें।
क्या नर के लिए स्वर्ग है
केवल हूरों का जमघट
क्या रति में ही देखी है
खुदा की खुदाई की आहट।
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अक्षम्य अपमान
क्या ऐसी कल्पित जन्नत में
अल्लाह का वास है?
क्या रति क्रीड़ाओं में ही
स्वर्ग का आभास है?
नहरों में किसने डुबो दिया है
मुहम्मद के नूर को,
किसने बना दिया अध्यात्म
जन्नत की हूर को।
नारी खुदा की रचना है
अतः पाक है और महान,
लेकिन जन्नती हूर के रूप में
नारी का है अक्षम्य अपमान।
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एक हाथ में जल का पात्र
दूसरे में जलती हुई मशाल,
मैं जन्नत में आग लगाकर
कर दूंगी अजब कमाल।
और दोजख की बुझा अग्नि
मैं अजाब से मुक्ति पा लूंगी,
उठकर जन्नत दोजख से ऊपर
मैं असली अल्लाह को पा लूंगी।

राबिया बसरी पुस्तक से साभार, लेखिका फरहाना ताज, कीमत 100 रुपए