Wednesday, 22 August 2012
कांग्रेसियों के मुह पर थूकता हुआ मुंबई पोलिस का जवान।
राज ठाकरे को मंच पर फूल देने वाले सिपाही ने खुद को कहा जिंदा लाश
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महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के मुखिया राज ठाकरे को मंच पर फूल भेंट करने वाले पुलिसकर्मी प्रमोद तावड़े ने कहा कि उसके इस कदम से उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। उनसे अपनी हत्या की आशंका भी जताई लेकिन साथ ही कहा कि उसे इसका डर नहीं है। सिपाही ने कहा, 'मेरा डर खत्म हो गया है, मैं
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महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के मुखिया राज ठाकरे को मंच पर फूल भेंट करने वाले पुलिसकर्मी प्रमोद तावड़े ने कहा कि उसके इस कदम से उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। उनसे अपनी हत्या की आशंका भी जताई लेकिन साथ ही कहा कि उसे इसका डर नहीं है। सिपाही ने कहा, 'मेरा डर खत्म हो गया है, मैं
एक जिंदा लाश हूं।' पुलिसकर्मी ने आरोप लगाया कि आजाद मैदान हिेंसा के मामले में दोषियों के खिलाफ केवल कागजी कार्रवाई हुई है।
11 अगस्त को मुंबई में हुई हिंसा के विरोध और गृह मंत्री आरआर पाटील के इस्तीफे की मांग के समर्थन में गिरगांव चौपाटी से आजाद मैदान तक मोर्चा निकालने के बाद राज ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र विदेशियों और मुंबई बांग्लादेशियों का अड्डा बन गया है। ठाकरे ने आरोप लगाया कि मुंबई के पुलिस कमिश्नर अरुप पटनायक ने आजाद मैदान में हिंसा करने वाले अपराधियों को छुड़वाया। महिला पुलिसकर्मियों पर अत्याचार हुआ, उन्हें पीटा गया। मोर्चा निकालने वाले हथियारों के साथ आए थे और पुलिस कमिश्नर को सब पहले से पता था।
गृह मंत्री पाटिल पुलिसवालों को मार खाने पर मजबूर करते हैं। उन्होंने कहा, 'बाबरी मस्जिद यूपी में गिरती है और मुंबई में दंगे होते हैं। लेकिन यूपी में जब बुद्ध की मूर्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है तो महाराष्ट्र के दलित नेता कुछ क्यों नहीं बोलते। मुझे यहां आने से रोका जा रहा था। बाकी नेता भड़काऊ भाषण देते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं होती।'
11 अगस्त को मुंबई में हुई हिंसा के विरोध और गृह मंत्री आरआर पाटील के इस्तीफे की मांग के समर्थन में गिरगांव चौपाटी से आजाद मैदान तक मोर्चा निकालने के बाद राज ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र विदेशियों और मुंबई बांग्लादेशियों का अड्डा बन गया है। ठाकरे ने आरोप लगाया कि मुंबई के पुलिस कमिश्नर अरुप पटनायक ने आजाद मैदान में हिंसा करने वाले अपराधियों को छुड़वाया। महिला पुलिसकर्मियों पर अत्याचार हुआ, उन्हें पीटा गया। मोर्चा निकालने वाले हथियारों के साथ आए थे और पुलिस कमिश्नर को सब पहले से पता था।
गृह मंत्री पाटिल पुलिसवालों को मार खाने पर मजबूर करते हैं। उन्होंने कहा, 'बाबरी मस्जिद यूपी में गिरती है और मुंबई में दंगे होते हैं। लेकिन यूपी में जब बुद्ध की मूर्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है तो महाराष्ट्र के दलित नेता कुछ क्यों नहीं बोलते। मुझे यहां आने से रोका जा रहा था। बाकी नेता भड़काऊ भाषण देते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं होती।'
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2) हजारों की भीड़ वाला बाबा रामदेव का प्रदर्शन हो या राज ठाकरे का हो… शांतिपूर्ण प्रदर्शन करके "भगवा" वालों ने दर्शा दिया है कि "हममें" और "उनमें" बहुत फ़र्क है… (हालांकि सेकुलर कीड़े फ़िर भी नहीं मानेंगे…)
कांग्रेसियों के मुह पर थूकता हुआ मुंबई पोलिस का जवान।
मुंबई के भायखाल मे तैनात कांस्टेबल प्रमोद तावड़े ने आज राज ठाकरे के मंच से मुंबई पोलिस से त्यागपत्र दिया॥ प्रमोद तावड़े के अनुसार कांग्रेस सरकार और मुंबई पुलिस कमिश्नर ,मुंबई पोलिस मे नौकरी करने की शर्त मे बंगलादेशी मुल्लों की लात खाने को अनिवार्य कर रहे है ऐसी हिंदुविरोधी नौकरी तावड़े नहीं करेगा॥ज्ञातव्य रहे की प्रमोद तावड़े को भटके हुए कांग्रेसी मुल्लों ने आजाद मैदान मे मारा था और मुंबई पुलिस ने आत्म रक्षा मे उसे लाठी तक उठाने से मना किया॥उसी जगह पर एक गर्भवती महिला कांस्टेबल को मुल्लों ने मार डाला था॥
मुंबई के भायखाल मे तैनात कांस्टेबल प्रमोद तावड़े ने आज राज ठाकरे के मंच से मुंबई पोलिस से त्यागपत्र दिया॥ प्रमोद तावड़े के अनुसार कांग्रेस सरकार और मुंबई पुलिस कमिश्नर ,मुंबई पोलिस मे नौकरी करने की शर्त मे बंगलादेशी मुल्लों की लात खाने को अनिवार्य कर रहे है ऐसी हिंदुविरोधी नौकरी तावड़े नहीं करेगा॥ज्ञातव्य रहे की प्रमोद तावड़े को भटके हुए कांग्रेसी मुल्लों ने आजाद मैदान मे मारा था और मुंबई पुलिस ने आत्म रक्षा मे उसे लाठी तक उठाने से मना किया॥उसी जगह पर एक गर्भवती महिला कांस्टेबल को मुल्लों ने मार डाला था॥
Tuesday, 21 August 2012
गोवा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर पारिकर (बीजेपी )
गोवा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर पारिकर (बीजेपी ) ,आईआईटी मुंबई..
आइये आपको आज बताते है गोवा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर पारिकर के बारे में
जहा तक मेरी जानकारी वे भारत के पहले मुख्यमंत्री है जिन्होंने आईआईटी उतीर्ण
आइये आपको आज बताते है गोवा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर पारिकर के बारे में
जहा तक मेरी जानकारी वे भारत के पहले मुख्यमंत्री है जिन्होंने आईआईटी उतीर्ण
है
इन्होने गोवा में पेट्रोल में उत्पादन शुल्क हटा दिया है जिसके कारण वहा
पेट्रोल पुरे भारत में सबसे सस्ता उपलब्ध है मात्र 55 रुपैये प्रति लीटर ||
वे हमेशा गो एयर नमक विमान की सेवा के दौरान औसत श्रेणी (सामान्य श्रेणी ) में
सफ़र करते है पर किसी का ध्यान नहीं जाता इनपर.......वे एक आम नागरिक की ही
तरह बस में सफ़र करते है और बाकियों की तरह क़तर में खड़े होते है ......मनोहर
जी कभी भी विमान में उच्च श्रेणी में यात्रा नहीं करते |
वे विमान में बड़े ही आराम से बाकि अन्य यात्रियों के साथ ही बैठते है |
मुझे लगता है उनकी इसी सादगी के कारण ही बहुत से विमान के कार्यकर्ता और
यात्रिगन उन्हें पहचान नहीं पते की वो एक मुख्यमंत्री के साथ बैठे है |
जब ये बात मैंने अपने एक सहयोगी को बताया जो मेरे साथ यात्रा कर रहा था तो
उसने कहा की ऐसा हो सकता है पर उनके ऑफिस वालो ने उनके बगल की दोनों सीट भी
रिजर्व की होगी ताकि वो आरामपूर्वक यात्रा करे लेकिन जब हमने पीछे देखा तो ऐसा
कही नहीं था मुख्यमंत्री जी बीच वाली सीट पर बैठे थे और उनके दाय और बाए दो आम
नागरिक और वो ज़रा सा भी असहज महसूस नहीं कर रहे थे
जब विमान दिल्ली पंहुचा वो उतरने वालो में सबसे पहले भी नहीं थे ...वो आम
यात्रियों की तरह कतार में ही उतरे ....
आम तौर पर आपने देखा होगा की कोई नेता के आने पर उसके लिए एक बड़ी सी गाडी आती
है साथ में 10 -12 चमचे.....पर यहाँ ऐसा बिलकुल भी नहीं था .....उन्होंने किसी
को भी आने से मन किया था .....और न उनके लिए कोई कार आई थी.......उन्होंने
अपना सामान खुद ही उठाया (एक बैग और एक अटैची ) और खुद ही पैदल आगे चल पड़े और
एक आम नागरिक की ही तरह बस में बैठ गए
बस में एक शादीशुदा जोड़े ने उन्हें पहचान लिया और उनसे बात शुरू की....जब
मैंने उनकी वार्तालाप सुनी तब ही मैं समझ गया की वो न सिर्फ एक महान सज्जन
पुरुष है बल्कि मानवता के कर्मठ योगी भी है ......उन्होंने एक फोर्मल
कमीज़.....काली पैंट और पैरो में साधारण सी चमड़े की चप्पल पहन रखी थी
...........
उनकी बातो में कभी भी ये नहीं झलका की वो एक नेता है वो एक आम इंसान की तरह ही
बात कर रहे थे ..........
तब ही मुझे पता चला वो भारत के पहले मुख्यमंत्री है जिन्होंने आइआइटी -आईएएन
की डिग्री प्राप्त की है
मैंने यह भी जानाकि वे गोवा राजनीति को सुनहरे मुकाम पर लेजाने का प्रयास कर
रहे है
मैं ना ही गोवा का निवासी हूँ ना उनको वोट कर सकता हूँ गोवा में पर उनकी
कर्मठता देखकर यही कहूँगा जिन्हें भी इंसान पहचानने की समझ है वो मनोहर जी को
जरुर वोट करेगा ........
इन्होने गोवा में पेट्रोल में उत्पादन शुल्क हटा दिया है जिसके कारण वहा
पेट्रोल पुरे भारत में सबसे सस्ता उपलब्ध है मात्र 55 रुपैये प्रति लीटर ||
वे हमेशा गो एयर नमक विमान की सेवा के दौरान औसत श्रेणी (सामान्य श्रेणी ) में
सफ़र करते है पर किसी का ध्यान नहीं जाता इनपर.......वे एक आम नागरिक की ही
तरह बस में सफ़र करते है और बाकियों की तरह क़तर में खड़े होते है ......मनोहर
जी कभी भी विमान में उच्च श्रेणी में यात्रा नहीं करते |
वे विमान में बड़े ही आराम से बाकि अन्य यात्रियों के साथ ही बैठते है |
मुझे लगता है उनकी इसी सादगी के कारण ही बहुत से विमान के कार्यकर्ता और
यात्रिगन उन्हें पहचान नहीं पते की वो एक मुख्यमंत्री के साथ बैठे है |
जब ये बात मैंने अपने एक सहयोगी को बताया जो मेरे साथ यात्रा कर रहा था तो
उसने कहा की ऐसा हो सकता है पर उनके ऑफिस वालो ने उनके बगल की दोनों सीट भी
रिजर्व की होगी ताकि वो आरामपूर्वक यात्रा करे लेकिन जब हमने पीछे देखा तो ऐसा
कही नहीं था मुख्यमंत्री जी बीच वाली सीट पर बैठे थे और उनके दाय और बाए दो आम
नागरिक और वो ज़रा सा भी असहज महसूस नहीं कर रहे थे
जब विमान दिल्ली पंहुचा वो उतरने वालो में सबसे पहले भी नहीं थे ...वो आम
यात्रियों की तरह कतार में ही उतरे ....
आम तौर पर आपने देखा होगा की कोई नेता के आने पर उसके लिए एक बड़ी सी गाडी आती
है साथ में 10 -12 चमचे.....पर यहाँ ऐसा बिलकुल भी नहीं था .....उन्होंने किसी
को भी आने से मन किया था .....और न उनके लिए कोई कार आई थी.......उन्होंने
अपना सामान खुद ही उठाया (एक बैग और एक अटैची ) और खुद ही पैदल आगे चल पड़े और
एक आम नागरिक की ही तरह बस में बैठ गए
बस में एक शादीशुदा जोड़े ने उन्हें पहचान लिया और उनसे बात शुरू की....जब
मैंने उनकी वार्तालाप सुनी तब ही मैं समझ गया की वो न सिर्फ एक महान सज्जन
पुरुष है बल्कि मानवता के कर्मठ योगी भी है ......उन्होंने एक फोर्मल
कमीज़.....काली पैंट और पैरो में साधारण सी चमड़े की चप्पल पहन रखी थी
...........
उनकी बातो में कभी भी ये नहीं झलका की वो एक नेता है वो एक आम इंसान की तरह ही
बात कर रहे थे ..........
तब ही मुझे पता चला वो भारत के पहले मुख्यमंत्री है जिन्होंने आइआइटी -आईएएन
की डिग्री प्राप्त की है
मैंने यह भी जानाकि वे गोवा राजनीति को सुनहरे मुकाम पर लेजाने का प्रयास कर
रहे है
मैं ना ही गोवा का निवासी हूँ ना उनको वोट कर सकता हूँ गोवा में पर उनकी
कर्मठता देखकर यही कहूँगा जिन्हें भी इंसान पहचानने की समझ है वो मनोहर जी को
जरुर वोट करेगा ........
सोलर एनर्जी में से अकेले गुजरात का हिस्सा 70% से अधिक है।
गुजरात में नर्मदा नदी पर बनी 19,000 किमी की नहरों का जाल विश्व का सबसे बड़ा नहर नेटवर्क है। इन्हीं नहरों पर सौर ऊर्जा के पैनल लगाकर बिजली उत्पादन की महत्त्वाकांक्षी योजना पर द्रुत गति से कार्य जारी है… वर्तमान में देश के कुल 1000 MW सोलर एनर्जी में से अकेले गुजरात का हिस्सा 70% से अधिक है।
अनुमान है कि यदि नहरों के ऊपर स्थित इस खाली स्थान का 10% भी उपयोग कर लिया जाए तो लगभग 3000 MW का उत्पादन किया
अनुमान है कि यदि नहरों के ऊपर स्थित इस खाली स्थान का 10% भी उपयोग कर लिया जाए तो लगभग 3000 MW का उत्पादन किया
जा सकता है। नहरों के ऊपर सोलर पैनल लगाने का दोहरा फ़ायदा है, पहला तो यह कि गर्मी के दिनों में पानी बचता है, क्योंकि वह धूप से उड़ेगा नहीं और दूसरा यह कि सोलर पैनलों के नीचे ठण्डा पानी रहने से, जमीनी सोलर पैनलों के मुकाबले 60% अधिक विद्युत उत्पादन होता है…
Wednesday, 15 August 2012
वास्तव में स्वतंत्रता नहीं आई
14 अगस्त 1947 की रात्रि को जो कुछ हुआ था वो वास्तव में स्वतंत्रता नहीं आई थी अपितु ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर का एग्रीमेंट हुआ था पंडित नेहरु और लोर्ड माउन्ट बेटन के बीच में.Transfer of Power और Independence ये दो अलग विषय हैं.स्वतंत्रता और सत्ता का हस्तांतरण ये दो अलग विषय हैं एवं सत्ता का हस्तांतरण कैसे होता है ? आप देखते होंगे क़ि एक पार्टी की सरकार है, वो चुनाव में पराजित जाये, दूसरी पार्टी की सरकार आ
ती है तो दूसरी पार्टी का प्रधानमन्त्री जब शपथ ग्रहण करता है, तो वो शपथ ग्रहण करने के तुरंत पश्चात एक रजिस्टर पर हस्ताक्षर करता है, आप लोगों में से बहुतों ने देखा होगा, तो जिस रजिस्टर पर आने वाला प्रधानमन्त्री हस्ताक्षर करता है, उसी रजिस्टर को 'ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर' की बुक कहते हैं तथा उस पर हस्ताक्षर के पश्चात पुराना प्रधानमन्त्री नए प्रधानमन्त्री को सत्ता सौंप देता है एवं पुराना प्रधानमंत्री निकल कर बाहर चला जाता है.यही नाटक हुआ था 14 अगस्त 1947 की रात्रि को 12 बजे.लार्ड माउन्ट बेटन ने अपनी सत्ता पंडित नेहरु के हाथ में सौंपी थी, और हमने कह दिया कि स्वराज्य आ गया | कैसा स्वराज्य और काहे का स्वराज्य ? अंग्रेजो के लिए स्वराज्य का अर्थ क्या था ? और हमारे लिए स्वराज्य का आशय क्या था ? ये भी समझ लीजिये | अंग्रेज कहते थे क़ि हमने स्वराज्य दिया, अर्थात अंग्रेजों ने अपना राज आपको सौंपा है जिससे कि आप लोग कुछ दिन इसे चला लो जब आवश्यकता पड़ेगी तो हम पुनः आ जायेंगे | ये अंग्रेजो की व्याख्या (interpretation) थी एवं भारतीय लोगों की व्याख्या क्या थी कि हमने स्वराज्य ले लिया तथा इस संधि के अनुसार ही भारत के दो टुकड़े किये गए एवं भारत और पाकिस्तान नामक दो Dominion States बनाये गए हैं | ये Dominion State का अर्थ हिंदी में होता है एक बड़े राज्य के अधीन एक छोटा राज्य, ये शाब्दिक अर्थ है और भारत के सन्दर्भ में इसका वास्तविक अर्थ भी यही है. अंग्रेजी में इसका एक अर्थ है "One of the self-governing nations in the British Commonwealth" तथा दूसरा "Dominance or power through legal authority "| Dominion State और Independent Nation में जमीन आसमान का अंतर होता है | मतलब सीधा है क़ि हम (भारत और पाकिस्तान) आज भी अंग्रेजों के अधीन ही हैं. दुःख तो ये होता है कि उस समय के सत्ता के लालची लोगों ने बिना सोचे समझे अथवा आप कह सकते हैं क़ि पूरी मानसिक जागृत अवस्था में इस संधि को मान लिया अथवा कहें सब कुछ समझ कर ये सब स्वीकार कर लिया एवं ये जो तथाकथित स्वतंत्रता प्राप्त हुई इसका कानून अंग्रेजों के संसद में बनाया गया और इसका नाम रखा गया Indian Independence Act अर्थात भारत के स्वतंत्रता का कानून तथा ऐसे कपट पूर्ण और धूर्तता से यदि इस देश को स्वतंत्रता मिली हो तो वो स्वतंत्रता, स्वतंत्रता है कहाँ ? और इसीलिए गाँधी जी (महात्मा गाँधी) 14 अगस्त 1947 की रात को दिल्ली में नहीं आये थे. वो नोआखाली में थे और कोंग्रेस के बड़े नेता गाँधी जी को बुलाने के लिए गए थेकि बापू चलिए आप.गाँधी जी ने मना कर दिया था. क्यों ? गाँधी जी कहते थे कि मै मानता नहीं कि कोई स्वतंत्रता मिल रही है एवं गाँधी जी ने स्पष्ट कह दिया था कि ये स्वतंत्रता नहीं आ रही है सत्ता के हस्तांतरण का समझौता हो रहा है और गाँधी जी ने नोआखाली से प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी | उस प्रेस स्टेटमेंट के पहले ही वाक्य में गाँधी जी ने ये कहाकि मैं भारत के उन करोड़ों लोगों को ये सन्देश देना चाहता हूँ कि ये जो तथाकथित स्वतंत्रता (So Called Freedom) आ रही है ये मै नहीं लाया | ये सत्ता के लालची लोग सत्ता के हस्तांतरण के चक्कर में फंस कर लाये है | मै मानता नहीं कि इस देश में कोई आजादी आई है | और 14 अगस्त 1947 की रात को गाँधी जी दिल्ली में नहीं थे नोआखाली में थे | माने भारत की राजनीति का सबसे बड़ा पुरोधा जिसने हिन्दुस्तान की आज़ादी की लड़ाई की नीव रखी हो वो आदमी 14 अगस्त 1947 की रात को दिल्ली में मौजूद नहीं था | क्यों ? इसका अर्थ है कि गाँधी जी इससे सहमत नहीं थे | (नोआखाली के दंगे तो एक बहाना था वास्तव में बात तो ये सत्ता का हस्तांतरण ही थी) और 14 अगस्त 1947 की रात्रि को जो कुछ हुआ है वो स्वतंत्रता नहीं आई .... ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर का एग्रीमेंट लागू हुआ था !!
ती है तो दूसरी पार्टी का प्रधानमन्त्री जब शपथ ग्रहण करता है, तो वो शपथ ग्रहण करने के तुरंत पश्चात एक रजिस्टर पर हस्ताक्षर करता है, आप लोगों में से बहुतों ने देखा होगा, तो जिस रजिस्टर पर आने वाला प्रधानमन्त्री हस्ताक्षर करता है, उसी रजिस्टर को 'ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर' की बुक कहते हैं तथा उस पर हस्ताक्षर के पश्चात पुराना प्रधानमन्त्री नए प्रधानमन्त्री को सत्ता सौंप देता है एवं पुराना प्रधानमंत्री निकल कर बाहर चला जाता है.यही नाटक हुआ था 14 अगस्त 1947 की रात्रि को 12 बजे.लार्ड माउन्ट बेटन ने अपनी सत्ता पंडित नेहरु के हाथ में सौंपी थी, और हमने कह दिया कि स्वराज्य आ गया | कैसा स्वराज्य और काहे का स्वराज्य ? अंग्रेजो के लिए स्वराज्य का अर्थ क्या था ? और हमारे लिए स्वराज्य का आशय क्या था ? ये भी समझ लीजिये | अंग्रेज कहते थे क़ि हमने स्वराज्य दिया, अर्थात अंग्रेजों ने अपना राज आपको सौंपा है जिससे कि आप लोग कुछ दिन इसे चला लो जब आवश्यकता पड़ेगी तो हम पुनः आ जायेंगे | ये अंग्रेजो की व्याख्या (interpretation) थी एवं भारतीय लोगों की व्याख्या क्या थी कि हमने स्वराज्य ले लिया तथा इस संधि के अनुसार ही भारत के दो टुकड़े किये गए एवं भारत और पाकिस्तान नामक दो Dominion States बनाये गए हैं | ये Dominion State का अर्थ हिंदी में होता है एक बड़े राज्य के अधीन एक छोटा राज्य, ये शाब्दिक अर्थ है और भारत के सन्दर्भ में इसका वास्तविक अर्थ भी यही है. अंग्रेजी में इसका एक अर्थ है "One of the self-governing nations in the British Commonwealth" तथा दूसरा "Dominance or power through legal authority "| Dominion State और Independent Nation में जमीन आसमान का अंतर होता है | मतलब सीधा है क़ि हम (भारत और पाकिस्तान) आज भी अंग्रेजों के अधीन ही हैं. दुःख तो ये होता है कि उस समय के सत्ता के लालची लोगों ने बिना सोचे समझे अथवा आप कह सकते हैं क़ि पूरी मानसिक जागृत अवस्था में इस संधि को मान लिया अथवा कहें सब कुछ समझ कर ये सब स्वीकार कर लिया एवं ये जो तथाकथित स्वतंत्रता प्राप्त हुई इसका कानून अंग्रेजों के संसद में बनाया गया और इसका नाम रखा गया Indian Independence Act अर्थात भारत के स्वतंत्रता का कानून तथा ऐसे कपट पूर्ण और धूर्तता से यदि इस देश को स्वतंत्रता मिली हो तो वो स्वतंत्रता, स्वतंत्रता है कहाँ ? और इसीलिए गाँधी जी (महात्मा गाँधी) 14 अगस्त 1947 की रात को दिल्ली में नहीं आये थे. वो नोआखाली में थे और कोंग्रेस के बड़े नेता गाँधी जी को बुलाने के लिए गए थेकि बापू चलिए आप.गाँधी जी ने मना कर दिया था. क्यों ? गाँधी जी कहते थे कि मै मानता नहीं कि कोई स्वतंत्रता मिल रही है एवं गाँधी जी ने स्पष्ट कह दिया था कि ये स्वतंत्रता नहीं आ रही है सत्ता के हस्तांतरण का समझौता हो रहा है और गाँधी जी ने नोआखाली से प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी | उस प्रेस स्टेटमेंट के पहले ही वाक्य में गाँधी जी ने ये कहाकि मैं भारत के उन करोड़ों लोगों को ये सन्देश देना चाहता हूँ कि ये जो तथाकथित स्वतंत्रता (So Called Freedom) आ रही है ये मै नहीं लाया | ये सत्ता के लालची लोग सत्ता के हस्तांतरण के चक्कर में फंस कर लाये है | मै मानता नहीं कि इस देश में कोई आजादी आई है | और 14 अगस्त 1947 की रात को गाँधी जी दिल्ली में नहीं थे नोआखाली में थे | माने भारत की राजनीति का सबसे बड़ा पुरोधा जिसने हिन्दुस्तान की आज़ादी की लड़ाई की नीव रखी हो वो आदमी 14 अगस्त 1947 की रात को दिल्ली में मौजूद नहीं था | क्यों ? इसका अर्थ है कि गाँधी जी इससे सहमत नहीं थे | (नोआखाली के दंगे तो एक बहाना था वास्तव में बात तो ये सत्ता का हस्तांतरण ही थी) और 14 अगस्त 1947 की रात्रि को जो कुछ हुआ है वो स्वतंत्रता नहीं आई .... ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर का एग्रीमेंट लागू हुआ था !!
— withभारतीय समाचार, जय भारत, भारत माँ की बेटी and 46 others.
Friday, 3 August 2012
उमना के उन्मान का शिकार हुआ आसाम
उमना के उन्मान का शिकार हुआ आसाम
आसाम की जिस जातीय हिंसा में सैकड़ों लोगों की जान चली गई और लाखों लोग बेघर हो गये उसके मूल में कौन है इसकी जांच पड़ताल से जो नतीजे सामने आ रहे हैं वह खतरनाक संकेत कर रहे हैं. खुफिया एजंसियों आईबी की शुरूआती जांच रिपोर्ट बता रही है कि आसाम उमना के उन्मान का शिकार हो गया. असम हिंसा के पीछे यूनाइटेड मुस्लिम नेशनलिस्ट आर्मी (उमना) का हाथ हो सकता है जो कि विदेशी मदद से आसाम में सक्रिय है।
भारतीय खुफिया एजंसी आईबी के हवाले से न्यूज वेबसाइट रिडिफ ने दावा किया है कि खुफिया अधिकारियों को जो नई जानकारी मिल रही है उसके बाद अब लग रहा है कि असम में हिंसा के पीछे इसी उमना नामक मुस्लिम संगठन का हाथ है जिसने बोडो जनजातियों के घरों पर हमला किया और उनको हिंसक होने के लिए उकसाया. उमना के बारे में जो तथ्य सामने आ रहे हैं उससे इस बात को बल मिल रहा है कि हो सकता है विदेशी पैसों और हथियारों की मदद से उमना ने ही असम की ताजा हिंसा को अंजाम दिया जिसके कारण दो लाख से अधिक लोग बेघर हो गये और सैकड़ों लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा.
क्यों नहीं आयेगे एनजीओ जनलोकपाल के दायरे में ?
अन्ना "द सुपारी अनशनकारी" के अंधे भक्तो क्या सिर्फ इन दस सवालों का जबाब दे सकते हो ?
सिर्फ 10 सवाल का जबाब दे दो अगर तुम सब अन्ना अंध भक्तों में से कोई वो भ जबाब दे दे तर्कों के साथ ...
1 - अन्ना के आन्दोलन से माँ भारती के चित्र को क्यों उतारा गया |
2- अन्ना के आन्दोलन में भारत माता के लिए दिन रात एक करने वाले राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ को बार बार अपमानित किया गया जबकि बुखारी जो खुद को आई एस आई का एजेंट बताता है और वन्दे मातरम् भारत माता की जय को इस्लाम के खिलाफ बता कर फतवा जारी करता है उस बुखारी के तलुए क्यों चाटे गए ?
3-बाबा रामदेव का अपमान स्वयं अन्ना हजारे ने क्यों किया और कई बार किया , क्या देश भक्त ऐसे ही होते है ,, यही काम अन्ना के साथ मैंने किया तो आप सब निंदा कर रहे हो ,, ये अच्छा है मैं करू तो ..... कोई बात नहीं मैं नहीं रुकुंगा ,, और बाबा भी अन्ना की असलियत समझ चुके है लेकिन बाबा संत है और संत सहज होता है मैं संत नहीं हूँ बाबा का अपमान नहीं भूल सकता ||
4- पहले अग्निवेश ने भगवान् शिव का अपमान किया फिर कुमार विश्वाश ने बाबा रामदेव जी और ब्रह्मा विष्णु महेश का उपहास उड़ाया फिर भी वो टीम में बने रहे मगर जब अन्ना के खिलाफ अग्निवेश गया तो उसको निकाल दिया गया , क्या अन्ना भगवान् शिव से बड़ा है ? जो अन्ना गैंग को करोडो हिन्दुओं की आस्था से खिलवाड़ करने वाले अग्निवेश से आपत्ति नहीं हुयी लेकिन अन्ना के खिलाफ जाते ही बाहर का रास्ता दिखा दिया ? कुमार विश्वाश बाबा और त्रिदेव का अपमान करके आज भी बना हुआ है यानी अन्ना ही धर्म और देश से बड़ा है अन्ना अंध भक्तों के लिए ?
5- अन्ना गैंग में शामिल संदीप पांडे , मेधा पाटकर , अखिल गोगोई ,हर्ष मंदर , तीस्ता जावेद शितालवाद , सोनिया गाँधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद् के सदस्य और जस्टिस फॉर अफज़ल गुरु के सदस्य , सेना के विशेषाधिकार हटाने की मांग करने वाले संगठन बैन अफसपा के सद्श्य भी है यानी सारी गतिविधियाँ राष्ट्रद्रोही है तो अन्ना टीम में ये सब क्या कर रहे है ?
6- जनलोकपाल में लोकायुक्त की नियुक्ति कौन करेगा और लोकायुक्त कौन कौन होंगे ? अन्ना गैंग में शामिल मैगैसे पुरुष्कार विजेता , विधि विशेषज्ञ , रिटायर जज ,, और वो कौन है ?? स्वयम अन्ना , किरण बेदी , अरविन्द केजरीवाल , आतंकियों के लिए जस्टिस मांगने वाले मेधा पाटकर,संदीप पांडे , अरुंधती राय , अखिल गोगोई , स्टाम्प चोर शांति भूषण , सलमान खान को हिट एंड रन मामले में सलमान खान को मदद करने वाला संतोष हेगड़े , कश्मीर को तौड़ने की बात करने वाला शांति भूषण ,, अगर ये लोकायुक्त बनेगे तो अफज़ल और कसाब में से एक को जनलोकपाल नियुक्त करने की सिफारिस मैं कर देता हूँ इन हरामियों को ...
7- क्यों नहीं आयेगे एनजीओ जनलोकपाल के दायरे में ?
8- सोनिया गाँधी देश के ऐसे कौन से सवैधानिक पद पर है जो अन्ना बार बार उसको पत्र लिखते है ? कैसे पुरे करेगी सोनिया अन्ना की मांगो को जब वो चुड़ैल किसी सवैधानिक पद पर नहीं है ?
9- अन्ना 5 राज्यों के चुनाव में बीमार रहे लेकिन कांग्रेसी सांसद नवीन जिंदल के खानदानी अवार्ड समारोह में इनाम लेने चले गए और चुनाव खत्म होते ही फिर से अनशन का ड्रामा क्यों किया जा रहा है जबकि शिवराज सिंह चौहान सीबीआई जांच की मांग मान चूका है ?
10- जब शांति भूषण पर न्यायालय ने लखनऊ में खरीदी गयी कोठी में स्टाम्प चोरी के मामले में दोषी मान लिया तो वो अन्ना गैंग का हिस्सा क्यों है ? क्या अन्ना को न्यायालय के आदेश का सम्मान नहीं करना चाहिए था ? क्या ऐसी देश द्रोहियों और धर्म द्रोहियों के गैंग से हम इन्साफ की उम्मीद करते है ?
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