Tuesday, 4 November 2014

वरिष्ठजनों [ बुजर्गों ] के चरण [पैर ] क्यों दबाने चाहिए ?
वृद्धावस्था में शरीर में वायु तत्व प्रधान हो जाता है | हमारे शरीर में वायु का स्थान घुटने से नीचे पैरों तक होता है अतः टाँग व पैर दबाने तथा तेल मलने से कुपित वायु निकल जाती है तथा वायु जन्य रोगों में आराम मिलता है | अतः वरिष्ठजनों सेवा करना सभी का परम कर्तव्य है | 
ज्यादा दौड़ने -भागने के कारण भी शरीर में वायु बढ़ जाती है तब वज्रासन में बैठने से तथा पैरों को दबाने से व तेल मालिश से बहुत लाभ होता है | कई बार मौसम बदलने से भी शरीर में वायु का प्रकोप बढ़ जाता है तब कई बार शरीर में सूजन महसूस होती है या अचानक वजन बढ़ जाता है या अन्य वात-जन्य व्याधियाँ घेर लेती हैं तब पैरों को दबाने से तथा गुनगुने तेल की मालिश करने से लाभ होता है | मालिश के लिए कोई भी अनुकूल तेल प्रयोग किया जा सकता है |

अल्सर [ Ulcer ]
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आजकल की व्यस्त जीवनशैली में खान-पान में गड़बड़ी होना स्वाभाविक -सी बात है | लेकिन इस कारण से अल्सर जैसे रोग पाँव पसारते जा रहे हैं | इसमें पेट में जख़्म बन जाते हैं जिसे अल्सर कहते हैं | चाय , कॉफी ,शराब , अधिक खट्टे ,मसालेदार तथा गर्म वस्तुओं के सेवन से अल्सर होने की सम्भावना अधिक होती है | अल्सर रोग में अक्सर पेट में जलन होती है , खट्टी डकारें आती हैं , सर चकराता है , उलटी होती , दस्त के साथ खून आता है , शरीर में कमजोरी तथा मन बैचैन रहता है |

विभिन्न औषधियोँ द्वारा अल्सर का उपचार ----
१- चार मुनक्के तथा दो छोटी हरड़ पीसकर सुबह खाने से पेट की जलन तथा उल्टी समाप्त होती है |
२- पान के हरे पत्तों का १/२ [आधा ] चम्मच रस प्रतिदिन पीने से पेट के घाव व दर्द में लाभ होता है |
३- एक चम्मच आँवले के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन पीने से अल्सर ठीक होता है |
४- अल्सर के रोगी को अनार के रस तथा आँवला मुरब्बा सेवन से लाभ होता है |
५- अल्सर में दूध , पका केला , चीकू , शरीफ़ा तथा सेब का सेवन करना चाहिए |

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बढ़ते समुद्र धीरे-धीरे धरती को निगल रहे हैं, असमय गर्मी, अधिक बरसात, लगातार आफतों में घिरती धरती हमें चेता रही है, समय रहते हमें प्राकृतिक सम्पदा का अंधाधुंध दोहन रोकना होगा। 
औद्योगिकरण की होड़ ने धरती को पसीने-पसीने कर दिया है, लगातार बढ़ते तापमान का दबाव झेल रही धरती और बढ़ती प्राकृतिक आपदायें एक दिन धरती और मानव सभ्यता के विनाश का कारण बन जाएंगी, विनाशक समय आने से पहले हमें संभल कर पर्यावरण संरक्षण के विषय में गंभीरता से सोचना होगा

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हकलाना [Stammering ]
हकलाकर या अटक -अटक कर बोलना , दोनों का मतलब एक ही है - वाक् शक्ति में गड़बड़ी , जिसमे बोलनेवाला , बोलते-बोलते रुक जाता है , बोले हुए शब्दों को दोहराता है या लम्बा कर के बोलता है | 
हकलाहट के आयुर्वेदिक उपचार -
१-हकलाहट दूर करने के लिए १० बादाम तथा १० काली मिर्च थोड़ी सी मिश्री के साथ पीसकर प्रातःकाल एक गिलास गर्म दूध के साथ लें ,यह प्रयोग कम से कम दस दिन करें | 
२- गाय का घी हकलाहट दूर करने का एक उत्तम उपचार मन जाता है | ३-६ ग्राम घी में प्रतिदिन मिश्री मिलकर सुबह-शाम चाटें और ऊपर से गाय का दूध पियें | लगातार कुछ महीनों तक इसका सेवन करने से हकलाना बंद हो जाता है |
३- बच्चों को एक ताज़ा आंवला प्रतिदिन चबाने के लिए दें | इससे उनकी जीभ पतली और आवाज़ साफ होती है तथा उनका हकलाना और तुतलाना दूर हो जाता है |
४- रात को १० बादाम पानी में भिगो दें | सुबह उनके छिलके उतार कर पीस लें , और उन्हें ३० ग्राम मक्खन के साथ सेवन करने से भी हकलाहट में लाभ होता है |

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एक्ज़िमा (ECZIMA) -
एक्ज़िमा एक प्रकार का चर्म रोग है जिसमें रोगी की स्थिति अति कष्टपूर्ण होती है| इस रोग की शुरुआत में रोगी को तेज़ खुजली होती है तथा बार-बार खुजाने पर उसके शरीर में छोटी-छोटी फुंसियां निकल आती हैं | इन फुंसियों में भी खुजली और जलन होती है तथा पकने पर उनमें से मवाद बहता रहता है और फिर यह जख्म का रूप ले लेता है |

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बेल का वृक्ष बहुत प्राचीन है |यह लगभग २०-३० फुट ऊंचा होता है | इसके पत्ते जुड़े हुए त्रिफाक और गंधयुक्त होते हैं | इसका फल ३-४ इंच व्यास का गोलाकार और पीले रंग का होता है | बीज कड़े और छोटे होते हैं | बेल के फल का गूदा और बीज एक उत्तम विरेचक (पेट साफ़ करने वाले ) माने जाते हैं | बेल शर्करा को कम करने वाला,कफ व वात को शांत करने वाला,अतिसार, मधुमेह,रक्तार्श,श्वेत प्रदर व अति रज : स्राव को नष्ट करने वाला होता है | आइए जानते हैं बेल के औषधीय गुण -
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मेंहदी (Henna) -
मेंहदी की पत्तियों का प्रयोग रंजक द्रव्य के रूप में किया जाता है तथा इसकी सदाबहार झाड़ियाँ बाड़ के रूप में लगाई जाती हैं | यह समस्त भारत में मुख्यतः पंजाब,गुजरात,मध्य प्रदेश तथा राजस्थान के शुष्क पर्णपाती वनों में पायी जाती है | स्त्रिओं के श्रृंगार प्रसाधनों में विशिष्ट स्थान प्राप्त होने के कारण,मेंहदी बहुत लोकप्रिय है | मेंहदी की पत्तियों को सुखाकर बनाया हुआ महीन पाउडर बाजारों में पंसारियों के यहां तथा अन्य विक्रेताओं के यहाँ आकर्षक पैक में बिकता है | इसके पत्ते मलने से चिकने तथा लुआबदार हो जाते हैं | इसके कोमल पत्तों को सुखाकर,पीस्सकर मेंहदी के नाम से बेचा जा सकता है | इसका पुष्पकाल एवं फलकाल जुलाई से दिसंबर तक होता है |
मेंहदी का विभिन्न रोगों में उपयोग -

१- लगभग ४.५ ग्राम मेंहदी के फूलों को पानी में पीसकर कपड़े से छान लें,इसमें ७ ग्राम शहद मिलाकर कुछ दिन पीने से गर्मी से उत्पन्न सिरदर्द शीघ्र ही ठीक हो जाता है |

२- मेंहदी में दही और आंवला चूर्ण मिलाकर २- ३ घंटे बालों में लगाने से बल घने,मुलायम,काले और लम्बे होते हैं |

३- दस ग्राम मेंहदी के पत्तों को २०० मिली पानी में भिगोकर रख दें,थोड़ी देर बाद छानकर इस पानी से गरारे करने से मुँह के छाले शीघ्र शांत हो जाते हैं |

४- मेंहदी के बीजों को बारीक पीसकर,घी मिलाकर ५०० मिग्रा की गोलियां बना लें | इन गोलियों को सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करने से खुनी दस्तों में लाभ होता है |

५- लगभग ५ ग्राम मेंहदी के पत्ते लेकर रात को मिटटी के बर्तन में भिगो दें और प्रातःकाल इन पत्तियों को मसलकर तथा छानकर रोगी को पिला दें | एक सप्ताह के सेवन से पुराने पीलिया रोग में अत्यंत लाभ होता है |

६- मेंहदी और एरंड के पत्तों को समभाग पीसकर थोड़ा गर्म करे घुटनों पर लेप करने से घुटनों की पीड़ा में लाभ होता है |

७- अग्नि से जले हुए स्थान पर मेंहदी की छाल या पत्तों को पीसकर गाढ़ा लेप करने से लाभ होता है |
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दमा (श्वास रोग ) Asthma 
आज के समय में दमा तेज़ी से स्त्री - पुरुष व बच्चों को अपना शिकार बना रहा है | साँस लेने में दिक्कत या कठिनाई महसूस होने को श्वास रोग कहते हैं | फेफड़ों की नलियों की छोटी-छोटी पेशियों में जब अकड़न युक्त संकुचन उत्पन्न होता है तो फेफड़ा, साँस को पूरी तरह अंदर अवशोषित नहीं कर पाता है जिससे रोगी पूरा श्वास खींचे बिना ही श्वास छोड़ने को विवश हो जाता है | इसी स्थिति को दमा या श्वास रोग कहते हैं |
दमा को पूर्ण रूप से ठीक करने हेतु प्राणायाम का अभ्यास सर्वोत्तम है |
विभिन्न औषधियों से दमे का उपचार :----
१- अदरक के रस में शहद मिलाकर चाटने से श्वास , खांसी व जुक़ाम में लाभ होता है ।
२- प्याज़ का रस , अदरक का रस , तुलसी के पत्तों का रस व शहद ३-३ ग्राम की मात्रा में लेकर सुबह-शाम सेवन करने से अस्थमा रोग नष्ट होता है |
३- काली मिर्च - २० ग्राम , बादाम की गिरी - १०० ग्राम और खाण्ड - ५० ग्राम लें | तीनों को अलग - अलग बारीक़ पीस कर चूर्ण बना लें , फिर तीनों को अच्छी तरह से मिला लें | इस मिश्रण की एक चम्मच लें और रात को सोते समय गर्म दूध से लें , लाभ होगा |
विशेष :-- जिनको मधुमेह हो वे खाण्ड का प्रयोग न करें तथा जिनको अम्लपित्त [acidity ] हो वे काली मिर्च १० ग्राम की मात्र में प्रयोग करें |
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अर्श रोग [बवासीर ] Piles
बवासीर गुदा मार्ग की बीमारी है | यह मुख्यतः दो प्रकार की होती है -- खूनी बवासीर और बादी बवासीर | इस रोग के होने का मुख्य कारण '' कोष्ठबद्धता '' या ''कब्ज़ '' है | कब्ज़ के कारण मल अधिक शुष्क व कठोर हो जाता है और मल निस्तारण हेतु अधिक जोर लगाने के कारण बवासीर रोग हो जाता है | यदि मल के साथ बूंद -बूंद कर खून आए तो उसे खूनी तथा यदि मलद्वार पर अथवा मलद्वार में सूजन मटर या अंगूर के दाने के समान हो और मल के साथ खून न आए तो उसे बादी बवासीर कहते हैं | अर्श रोग में मस्सों में सूजन तथा जलन होने पर रोगी को अधिक पीड़ा होती है |
बवासीर का विभिन्न औषधियों द्वारा उपचार -------

१- जीरा - एक ग्राम तथा पिप्पली का चूर्ण आधा ग्राम को सेंधा नमक मिलाकर छाछ के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से बवासीर ठीक होती है |
२- जामुन की गुठली और आम की गुठली के अंदर का भाग सुखाकर इसको मिलाकर चूर्ण बना लें | इस चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में हल्के गर्म पानी या छाछ के साथ सेवन से खूनी बवासीर में लाभ होता है |
३- पके अमरुद खाने से पेट की कब्ज़ दूर होती है और बवासीर रोग ठीक होता है |
४- बेल की गिरी के चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर , ४ ग्राम की मात्रा में पानी के साथ सेवन करने से खूनी बवासीर में लाभ मिलता है |
५- खूनी बवासीर में देसी गुलाब के तीन ताज़ा फूलों को मिश्री मिलाकर सेवन करने से आराम आता है |
६ - जीरा और मिश्री मिलकर पीस लें | इसे पानी के साथ खाने से बवासीर [अर्श ] के दर्द में आराम रहता है |
७- चौथाई चम्मच दालचीनी चूर्ण एक चम्मच शहद में मिलाकर प्रतिदिन एक बार लेना चाहिए | इससे बवासीर नष्ट हो जाती है |
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पिपरमिंट (Peppermint) -
यह विश्व में यूरोप,एशिया,उत्तरी अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है | समस्त भारत में यह बाग़-बगीचों में विशेषतः उत्तर भारत तथा कश्मीर में लगाया जाता है | यह अत्यंत सुगन्धित क्षुप होता है | इसके तेल,सत तथा स्वरस आदि का चिकित्सा में उपयोग किया जाता है | इसके पुष्प बैंगनी,श्वेत अथवा गुलाबी वर्ण के तथा पुष्पदण्ड के अग्र भाग पर लगे होते हैं | इसके फल चिकने अथवा खुरदुरे तथा बीज छोटे होते हैं | इसका पुष्पकाल एवं फलकाल सितम्बर से अप्रैल तक होता है |
पिपरमिंट का औषधीय प्रयोग -

१- पिपरमिंट के क्रिस्टल को दांतों के बीच में रखकर दबाने से दांत दर्द में लाभ होता है |

२- पिपरमिंट को छाती पर लगाने से श्वसन संस्थान गत सूजन में लाभ होता है |

३- पिपरमिंट क्रिस्टल का सेवन करने से उलटी,अतिसार,आध्मान तथा अजीर्ण में लाभ होता है |

४- २५ ग्राम पिपरमिंट सत में शक्कर मिलाकर सेवन करने से पेटदर्द तथा पेट के विकार ठीक होते हैं |

५- पिपरमिंट के पत्तों को पीसकर लगाने से चींटी आदि कीटों के काटने से होने वाली वेदना का शमन होता है |
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चीड़ (Long-leaved pine) -
चीड़ का बहुत ऊँचा वृक्ष होता है | इसकी छाल में किसी औज़ार से क्षत करने पर एक प्रकार का चिकना गोंद निकलता है जिसे श्रीवास या गंधविरोजा कहते हैं | इसके वृक्ष से तारपीन का तेल भी निकाला जाता है | प्राचीन आयुर्वेदीय संहिताओं व निघण्टुओं में सरल नाम से चीड़ का वर्णन प्राप्त होता है | इसके फल देवदारु के फल जैसे किन्तु आकार में कुछ बड़े ,पिरामिड आकार के नुकीले होते हैं | इसका पुष्पकाल एवं फलकाल मार्च से नवम्बर तक होता है |
चीड़ के औषधीय प्रयोग -

१- चीड़ के गोंद (गंधविरोजा) का क्वाथ बनाकर कुल्ला करने से मुँह के छाले ठीक होते हैं |

२- चीड़ के तेल की छाती पर मालिश करने से सांस की नली की सूजन,श्वास तथा खांसी में लाभ होता है |

३- गंधविरोजा (चीड़ का गोंद ) को घाव पर लगाने से घाव जल्दी भर जाता है तथा घावों में पस भी नहीं होती है |

४- गर्मी के कारण यदि शरीर में छोटी-छोटी फुंसियां निकल आई हों तो चीड़ के तेल को लगाकर पांच मिनट बाद धो देने से लाभ होता है |

५- बच्चों की पसली चलने पर चीड़ तेल में बराबर की मात्रा में सरसों का तेल मिलाकर धीरे-धीरे मालिश करने से लाभ होता है |
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चीकू (Sapodilla) -
चीकू मूलतः दक्षिण अमेरिका में एवं अन्य उष्णकटिबंधीय भागों में प्राप्त होता है तथा भारत में भी इसकी खेती की जाती है | यह वृक्ष समुद्र के किनारों के प्रदेशों में विशेषतया उत्पन्न होते हैं | इसका पुष्पकाल एवं फलकाल वर्ष में अत्यधिक समय तक होता है | इसके फल में शर्करा,पेक्टिन,थ्रिओनिन तथा विटामिन C पाया जाता है |
चीकू के औषधीय प्रयोग -

१- पके चीकू के फलों के सेवन से दस्तों में लाभ होता है |

२- कच्चे फलों को पीसकर फोड़ों पर लगाने से फोड़े पककर फूट जाते हैं तथा पस बाहर निकल जाती है |

३-चीकू के १-२ फलों का नियमित सेवन करने से शरीर पुष्ट होता है तथा दुर्बलता दूर होती है |

४-चीकू के फल पित्तशामक होते हैं,अतः इसका सेवन करने से पित्तज विकारों तथा पित्तज्वर का शमन होता है |

५- इसके फल को कूट कर गर्म कर सूजन युक्त स्थान पर लगाने से सूजन दूर हो जाती है |
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जामुन [ Jambul Tree ]

जामुन के सदाहरित वृक्ष जंगलों और सड़कों के किनारे सर्वत्र पाए जाते हैं | इसका पेड़ आम के पेड़ की तरह ही काफी बड़ा होता है | जामुन के पेड़ की छाल का रंग सफ़ेद-भूरा होता है | इसके पत्ते आम और मौलसिरी के पत्तों जैसे होते हैं | जामुन के फूल अप्रैल के महीने में लगते हैं और जुलाई से अगस्त तक जामुन पक जाते हैं | जामुन में लौह [ iron ] और phosphorus काफी मात्रा में होता है |
जामुन मधुमेह , पथरी , लिवर ,तिल्ली और खून की गंदगी को दूर करता है | यह मूत्राशय में जमी पथरी को निकलता है | जामुन और उसके बीज पाचक और स्तम्भक होते हैं |
जामुन का विभिन्न रोगों में प्रयोग :-----
१- ३००- ५०० मिली ग्राम जामुन के सूखे बीज के चूर्ण को दिन में तीन बार लेने से मधुमेह में लाभ होता है |
२- जामुन के १० मि.ली. रस में २५० मिली ग्राम सेंधा नमक मिलाकर दिन में २-३ बार कुछ दिनों तक निरंतर पीने से मूत्राशयगत पथरी नष्ट होती है |
३- जामुन के १०-१५ मि.ली. रस में २ चम्मच मधु मिलाकर सेवन करने से पीलिया , खून की कमी तथा रक्त विकार में लाभ होता है |
४- जामुन के पत्तों की राख को दांतों और मसूढ़ों पर मलने से दाँत और मसूढ़े मजबूत होते हैं |
५- जामुन के ५-६ पत्तों को पीसकर लगाने से घाव में से पस बाहर निकल जाती है तथा घाव स्वच्छ हो जाते हैं ।
६- तंग जूतों से पाँव में जख्म हो गए हों तो जामुन की गुठली को पानी में पीसकर लगाने से लाभ होता है |
नोट :- जामुन का पका हुआ फल अधिक मात्र में सेवन करना हानिकारक हो सकता है , इसको नमक मिलाकर ही खाना चाहिए |
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थकावट
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थकान शब्द से सभी परिचित हैं प्रायः थकावट से सभी का आमना - सामना होता है | सभी सोचते हैं थकावट कैसे दूर की जाए , आइये आज इस पर थोड़ा विचार किया जाए |
१- अधिक थकान होने पर, सोते समय गर्म दूध का सेवन करें , दूध हमेशा घूँट -घूँट करके पियें , चाहें तो दूध में एक चम्मच पिसी हुई हल्दी मिला सकते हैं | दूध को भली - भांति फेंट कर [ झाग बनाकर ] ही पियें यह अधिक लाभप्रद होता है |
२- अधिक दौड़ने - भागने , चढ़ाई चढ़ने - उतरने या अधिक पैदल चलने के कारण हुई थकान दूर करने के लिए आधा बाल्टी गर्म - पानी लें , उसमें दो चम्मच नमक डालें और बाल्टी में पैर डालकर बैठ जाएँ | थोड़ी देर में जब पानी कुछ ठंडा हो जाए तो और गर्म पानी डाल लें | आधे घंटे में फर्क महसूस करें |
३- थकावट दूर करने के लिए घर में किसी शांत स्थान पर , ढीले वस्त्र पहन कर शवासन में विश्राम करें , अर्थात कसे हुए वस्त्र बदलकर आरामदायक वस्त्र पहने और लेटकर शरीर के सभी अंगों को ढीला छोड़ दें और विश्राम करें |
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बेल -
बेल का वृक्ष बहुत प्राचीन है |यह लगभग २०-३० फुट ऊंचा होता है | इसके पत्ते जुड़े हुए त्रिफाक और गंधयुक्त होते हैं | इसका फल ३-४ इंच व्यास का गोलाकार और पीले रंग का होता है | बीज कड़े और छोटे होते हैं | बेल के फल का गूदा और बीज एक उत्तम विरेचक (पेट साफ़ करने वाले ) माने जाते हैं | बेल शर्करा को कम करने वाला,कफ व वात को शांत करने वाला,अतिसार, मधुमेह,रक्तार्श,श्वेत प्रदर व अति रज : स्राव को नष्ट करने वाला होता है | आइए जानते हैं बेल के औषधीय गुण -

१- पके हुए बेल का शर्बत पुराने आंव की महाऔषधि है | इसके सेवन से संग्रहणी रोग बहुत जल्दी ही दूर हो जाता है |

२- बेल का मुरब्बा खाने से पित्त व अतिसार में लाभ होता है | पेट के सभी रोगों में बेल का मुरब्बा खाने से लाभ मिलता है |

३- दस ग्राम बेल के पत्तों को ४-५ कालीमिर्च के साथ पीसकर उसमे १० ग्राम मिश्री मिलकर शरबत बना लें | इसका दिन में तीन बार सेवन करने से पेट दर्द ठीक हो जाता है |

४- बेल के गूदे को गुड़ मिलाकर सेवन करने से रक्तातिसार (खूनी दस्त ) के रोगी का रोग दूर हो जाता है |

५- मिश्री मिले हुए दूध के साथ बेल की गिरी के चूर्ण का सेवन करने से, खून की कमी व शारीरिक दुर्बलता दूर होती है |

६- बेल के पत्तों को पीसकर छान लें, इस १० मिलीलीटर रस के प्रतिदिन सेवन से मधुमेह में शर्करा आना कम हो जाती हैं |

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हरड़ -
हरड़ के नाम से तो हम सब बचपन से ही परिचित हैं | इसके पेड़ पूरे भारत में पाये जाते हैं | इसका रंग काला व पीला होता है तथा इसका स्वाद खट्टा,मीठा और कसैला होता है | आयुर्वेदिक मतानुसार हरड़ में पाँचों रस -मधुर ,तीखा ,कड़ुवा,कसैला और अम्ल पाये जाते हैं | वैज्ञानिक मतानुसार हरड़ की रासायनिक संरचना का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है कि इसके फल में चेब्यूलिनिक एसिड ३०%,टैनिन एसिड ३०-४५%,गैलिक एसिड,ग्लाइकोसाइड्स,राल और रंजक पदार्थ पाये जाते हैं | ग्लाइकोसाइड्स कब्ज़ दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं| ये तत्व शरीर के सभी अंगों से अनावश्यक पदार्थों को निकालकर प्राकृतिक दशा में नियमित करते हैं | यह अति उपयोगी है | आज हम हरड़ के कुछ लाभ जानेंगे -

१- हरड़ के टुकड़ों को चबाकर खाने से भूख बढ़ती है |

२- छोटी हरड़ को पानी में घिसकर छालों पर प्रतिदिन ०३ बार लगाने से मुहं के छाले नष्ट हो जाते हैं | इसको आप रात को भोजन के बाद भी चूंस सकते हैं |

३- छोटी हरड़ को पानी में भिगो दें | रात को खाना खाने के बाद चबा चबा कर खाने से पेट साफ़ हो जाता है और गैस कम हो जाती है |

४- कच्चे हरड़ के फलों को पीसकर चटनी बना लें | एक -एक चम्मच की मात्रा में तीन बार इस चटनी के सेवन से पतले दस्त बंद हो जाते हैं |

५- हरड़ का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में दो किशमिश के साथ लेने से अम्लपित्त (एसिडिटी ) ठीक हो जाती है |

६- हरीतकी चूर्ण सुबह शाम काले नमक के साथ खाने से कफ ख़त्म हो जाता है |

७- हरड़ को पीसकर उसमे शहद मिलाकर चाटने से उल्टी आनी बंद हो जाती है|

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खुशहाली का कारण

जापान के टोक्यो शहर के निकट एक कस्बा अपनी खुशहाली के लिए प्रसिद्ध था | एक बार एक व्यक्ति उस कसबे की खुशहाली का कारण जानने के लिए सुबह -सुबह वहाँ पहुंचा | कस्बे में घुसते ही उसे एक कॉफ़ी -शॉप दिखायी दी।उसने मन ही मन सोचा कि मैं यहाँ बैठ कर चुप -चाप लोगों को देखता हूँ , और वह धीरे - धीरे आगे बढ़ते हुए शॉप के अंदर लगी एक कुर्सी पर जा कर बैठ गया |
कॉफ़ी-शॉप शहर के रेस्टोरेंटस की तरह ही थी ,पर वहाँ उसे लोगों का व्यवहार कुछ अजीब लगा |
एक आदमी शॉप में आया और उसने दो कॉफ़ी के पैसे देते हुए कहा , “ दो कप कॉफ़ी , एक मेरे लिए और एक उस दीवार पर। ”
व्यक्ति दीवार की तरफ देखनेलगा लेकिन उसे वहाँ कोई नज़र नहीं आया ,पर फिर भी उस आदमी को कॉफ़ी देने के बाद वेटर दीवार के पास गया और उस पर कागज़ का एक टुकड़ा चिपका दिया , जिसपर “एक कप कॉफ़ी ” लिखा था |
व्यक्ति समझ नहीं पाया कि आखिर माजरा क्या है . उसने सोचा कि कुछ देर और बैठता हूँ ,और समझने की कोशिश करता हूँ |
थोड़ी देर बाद एक गरीब मजदूर वहाँ आया , उसके कपड़े फटे -पुराने थे पर फिर भी वह पुरे आत्म -विश्वास के साथ शॉप में घुसा और आराम से एक कुर्सी पर बैठ गया |
व्यक्ति सोच रहा था कि एक मजदूर के लिए कॉफ़ी पर इतने पैसे बर्वाद करना कोई समझदारी नहीं है …
तभी वेटर मजदूर के पास आर्डर लेने पंहुचा .“ सर , आपका आर्डर प्लीज !”, वेटर बोला |
“ दीवार से एक कप कॉफ़ी .” , मजदूर ने जवाब दिया |
वेटर ने मजदूर से बिना पैसे लिए एक कप कॉफ़ी दी और दीवार पर लगी ढेर सारे कागज के टुकड़ों में से “एक कप कॉफ़ी ” लिखा एक टुकड़ा निकाल कर डस्टबिन में पफेंक दिया |
व्यक्ति को अब सारी बात समझ आ गयी थी |कसबे के लोगों का ज़रूरतमंदों के प्रति यह रवैया देखकर वह भाव- विभोर हो गया … उसे लगा , सचमुच लोगों ने मदद का कितना अच्छा तरीका निकाला है जहां एक गरीब मजदूर भी बिना अपना आत्मसम्मान कम किये एक अच्छी सी कॉफ़ी -शॉप में खाने -पीने का आनंद ले सकता है | अब वह कसबे की खुशहाली का कारण जान चुका था और इन्ही विचारों के साथ वापस अपने शहर लौट गया |

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दालचीनी (Cinnamon bark)-
दालचीनी का प्रयोग सर्वत्र मसालों के रूप में किया जाता है | भारत में मुख्यतः तमिलनाडु,कर्नाटक एवं केरल में इसकी खेती की जाती है | दालचीनी की छाल तेजपात की छाल से अधिक पतली,पीली व अधिक सुगन्धित तथा स्वादयुक्त होती है | इसका पुष्पकाल एवं फलकाल जुलाई से दिसंबर तक होता है |
आइये जानते हैं दालचीनी के कुछ औषधीय गुणों के विषय में -

१- दालचीनी के तेल को मस्तक पर मलने से सर्दी की वजह से होने वाला सिरदर्द मिट जाता है |

२- दालचीनी का तेल आँखों के ऊपर (पलकों पर) लगाने से आँख का फड़कना बंद हो जाता है और नेत्रों की ज्योति बढ़ती है |

३- आधा चम्मच दालचीनी चूर्ण को दो चम्मच मधु के साथ सुबह शाम सेवन करने से खांसी में आराम मिलता है |

४-दालचीनी का तेल पेट पर मलने से आंतों का खिंचाव दूर हो जाता है |

५- शहद और दालचीनी मिलाकर रोग ग्रसित भाग पर लगाने से थोड़े-ही-दिनों में खाज-खुजली तथा फोड़े-फुंसी जैसे चर्म रोग नष्ट हो जाते हैं |

हानि - इसकी अधिक मात्रा उष्ण प्रकृति वालों को सिरदर्द पैदा करती है | दालचीनी गर्भवती स्त्रियों को नहीं देनी चाहिए |
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जायफल -
जायफल का उल्लेख आयुर्वेदीय तथा निघण्टुओं में प्राचीनकाल से प्राप्त होता है | जायफल और जावित्री का प्रयोग मसाले के रूप में होता है | जायफल के तेल का उपयोग साबुन बनाने तथा सुगन्धित द्रव्य के रूप में किया जाता है | जायफल को चारों ओर से घेरे हुए रक्तवर्ण का कठिन आवरणयुक्त मांसल कवच होता है जिसे 'जावित्री' कहते हैं | यह सूखने पर अलग हो जाता है | इस जावित्री के अंदर जायफल होता है,जो अंडाकार,गोल तथा १ इंच व्यास का बाहर से धूसर वर्ण का सिकुड़ा हुआ दिखाई देता है | जायफल की तासीर गर्म होती है अतः गर्म प्रकृति वाले लोगों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए |
विभिन्न रोगों में जायफल से उपचार -

१- जायफल को पानी में घिसकर मस्तक पर लगाने से सर का दर्द ठीक होता है |

२- जायफल को पीसकर कान के पीछे लेप करने से कान की सूजन में आराम मिलता है |

३- जायफल के तेल में भिगोई हुई रुई के फाहे को दांतों में रखकर दबाने से दांत के दर्द में लाभ होता है |

४- ५०० मिलीग्राम जायफल चूर्ण में मधु मिलकर सेवन करने से खांसी,सांस फूलना ,भूख न लगना,क्षय रोग एवं सर्दी से होने वाले जुकाम में लाभ होता है |

५- जायफल तथा सौंठ बराबर मात्रा में लेकर जल में घिसकर सेवन करने से शीघ्र ही दस्त बंद हो जाते हैं |

६- जायफल को पानी में घिसकर पिलाने से जी मिचलाना ठीक हो जाता है |

७- एक से दो बूँद जायफल तेल को बताशे में डालकर खिलाने से पेट दर्द में लाभ होता है |

८- जायफल तथा जावित्री के बारीक चूर्ण को जल में घोलकर लेप करने से झाइयाँ दूर होती हैं |
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मौसमी -
मौसमी अधिकतर दक्षिण-पूर्व एशिया में पाया जाने वाला फल है | भारत में यह फल जुलाई, अगस्त तथा नवम्बर- मार्च तक उपलब्ध रहता है | यह देखने में कुछ -कुछ नींबू की तरह होती है परन्तु स्वाद में यह मीठी होती है | मौसमी का फल नारंगी के बराबर आकार का होता है| मौसमी खाने में शीतल होती है तथा इसका सेवन सभी प्रकृति वालों के लिए तथा सभी अवस्थाओं में लाभदायक है | 
मौसमी रुचिकारक, धातुवर्धक और खून को साफ़ करने वाली है | इसके सेवन से पाचन में लाभ मिलता है | आइये जानते हैं मौसमी के कुछ लाभ -

१- मौसमी का रस पीने से रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है तथा जीवनी शक्ति की वृद्धि होती है |

२- मौसमी खाने से दांत मज़बूत होते हैं और इसका रेशा कब्ज़ दूर करने में मदद करता है |

३-मौसमी के रस में क्षार तत्व अधिक होता है अत: यह खून की अम्लता (एसिडिटी) को दूर करता है|

४- मौसमी के रस को हल्का सा गर्म करके इसमें ५ - ६ बूँद अदरक का रस डालकर पीने से जुकाम में आराम मिलता है |

५- मौसमी या इसके रस के सेवन से रक्तवाहिनियों में कोलेस्ट्रोल जमा नहीं हो पाता और ह्रदय रोग होने की संभावना नहीं रहती | अतः इसका सेवन ह्रदय को स्वस्थ रखता है |

६- मौसमी का रस पीने से आंव या पेचिश का रोग दूर हो जाता है |

७- मौसमी के रस के सेवन से बुखार में काफी लाभ होता है |

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करेला -
करेला के गुणों से सब परिचित हैं |
मधुमेह के रोगी विशेषतः इसके रस और सब्जी का सेवन करते हैं | समस्त भारत में इसकी खेती की जाती है | इसके पुष्प चमकीले पीले रंग के होते हैं | इसके फल ५-२५ सेमी लम्बे,५ सेमी व्यास के,हरे रंग के,बीच में मोटे,सिरों पर नुकीले,कच्ची अवस्था में हरे तथा पक्वावस्था में पीले वर्ण के होते हैं | इसके बीज ८-१३ मिमी लम्बे,चपटे तथा दोनों पृष्ठों पर खुरदुरे होते हैं जो पकने पर लाल हो जाते हैं | इसका पुष्पकाल एवं फलकाल जून से अक्टूबर तक होता है | आज हम आपको करेले के कुछ औषधीय प्रयोगों से अवगत कराएंगे -

१- करेले के ताजे फलों अथवा पत्तों को कूटकर रस निकालकर गुनगुना करके १-२ बूँद कान में डालने से कान-दर्द लाभ होता है |

२- करेले के रस में सुहागा की खील मिलाकर लगाने से मुँह के छाले मिटते हैं |

३-सूखे करेले को सिरके में पीसकर गर्म करके लेप करने से कंठ की सूजन मिटती है ।

४- १०-१२ मिली करेला पत्र स्वरस पिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं |

५- करेला के फलों को छाया शुष्क कर महीन चूर्ण बनाकर रखें | ३-६ ग्राम की मात्रा में जल या शहद के साथ सेवन करना चाहिए | मधुमेह में यह उत्तम कार्य करता है | यह अग्नाशय को उत्तेजित कर इन्सुलिन के स्राव को बढ़ाता है |

६- १०-१५ मिली करेला फल स्वरस या पत्र स्वरस में राई और नमक बुरक कर पिलाने से गठिया में लाभ होता है |

७- करेला पत्र स्वरस को दाद पर लगाने से लाभ होता है | इसे पैरों के तलवों पर लेप करने से दाह का शमन होता है|

८- करेले के १०-१५ मिली रस में जीरे का चूर्ण मिलाकर दिन में तीन बार पिलाने से शीत-ज्वर में लाभ होता है |
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टिंडा (डिण्डिश )-
समस्त भारत में पंजाब,उत्तर प्रदेश ,राजस्थान एवं महाराष्ट्र में सब्जी के रूप में इसकी खेती की जाती है | आयुर्वेदीय प्राचीन ग्रंथों में इसका उल्लेख प्राप्त नहीं होता | इसके फलों में प्रोटीन,वासा,खनिज द्रव्य तथा कार्बोहायड्रेट पाया जाता है | आईये जानते हैं टिंडे के कुछ औषधीय गुणों के बारे में -

१- टिंडे के डण्ठल की सब्जी बनाकर खाने से कब्ज में लाभ होता है | 

२- टिंडे की सब्जी बनाकर सेवन करने से मूत्रदाह तथा मूत्राशय शोथ का शमन होता है |

३- टिंडे का रस निकालकर मिश्री मिलाकर पीने से प्रदर तथा प्रमेह में लाभ होता है |

४- टिंडे को पीसकर लगाने से आमवात में लाभ होता है |

५- टिंडे के बीज तथा पत्तों को पीसकर सूजन पर लगाने से सूजन मिटती है |

६- पके हुए टिंडे के बीजों को निकालकर मेवे के रूप में सेवन करने से यह पौष्टिक तथा बलकारक होता है |

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रक्ताल्पता या खून की कमी (ANAEMIA ) -
हमारे खून में दो तरह की कोशिका होती हैं -लाल व सफ़ेद | लाल रक्त कोशिका की कमी से शरीर में खून की कमी हो जाती है जिसे रक्ताल्पता या अनीमिया कहा जाता है | लाल रक्त कोशिका के लिए लौहतत्व (iron) आवश्यक है अतः हमारे हीमोग्लोबिन में लौह तत्व की कमी के कारण भी रक्ताल्पता होती है | 
रक्ताल्पता या खून की कमी होने से शरीर में कमज़ोरी उत्पन्न होना,काम में मन नहीं लगना,भूख न लगना,चेहरे की चमक ख़त्म होना,शरीर थका-थका लगना आदि इस रोग के मुख्य लक्षण हैं | स्त्रियों में खून की कमी के कारण 'मासिक धर्म' समय से नहीं होता है | खून की कमी बच्चों में हो जाने से बच्चे शारीरिक रूप से कमज़ोर हो जाते हैं जिसके कारण उनका विकास नहीं हो पाता तथा दिमाग कमज़ोर होने के कारण याद्दाश्त पर भी असर पढता है | इस वजह से बच्चे पढाई में पिछड़ने लगते हैं |
आइये जानते हैं रक्ताल्पता के कुछ उपचार -

१- खून की कमी को दूर करने के लिए,अनार के रस में थोड़ी सी काली मिर्च और सेंधा नमक मिलाकर पीने से लाभ होता है |

२- मेथी,पालक और बथुआ आदि का प्रतिदिन सेवन करने से खून की कमी दूर हो जाती है | मेथी की सब्ज़ी खाने से भी बहुत लाभ होता है क्यूंकि मेथी में आयरन प्रचुर मात्रा में होता है |

३- गिलोय का रस सेवन करने से खून की कमी दूर हो जाती है | आप यह अपने निकटवर्ती पतंजलि चिकित्सालय से प्राप्त कर सकते हैं |

४- रक्ताल्पता से पीड़ित रोगियों को २०० मिली गाजर के रस में १०० मिली पालक का रस मिलाकर पीने से बहुत लाभ होता है |

५- प्रतिदिन लगभग २००-२५० ग्राम पपीते के सेवन से खून की कमी दूर होती है | यह प्रयोग लगभग बीस दिन तक लगातार करना चाहिए |

६- दो टमाटर काट कर उस पर काली मिर्च और सेंधा नमक डालकर सेवन करना रक्ताल्पता में बहुत लाभकारी होता है |

७- उबले हुए काले चनों के प्रतिदिन सेवन से भी बहुत लाभ होता है |

८- गुड़ में भी लौह तत्व प्रचुर मात्रा में होता है अतः भोजन के बाद एक डली गुड़ अवश्य खाएं लाभ होगा |

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तेजपात (Indian Bay Leaf)-
भारत में उष्णकटिबंधीय एवं इसके अतिरिक्त उपउष्णकटिबन्धीय हिमालय से भूटान तक ९००-१५०० मी तक की ऊंचाई पर सिक्किम में २४०० मी तथा सिल्हट एवं खसिया के पहाड़ी क्षेत्रों में ९००-१२०० मी की ऊंचाई तक तेजपात के जंगली वृक्ष पाये जाते हैं | इसके पत्तों को धूप में सुखाकर प्रयोग में लिया जाता है | पत्तियों का रंग जैतूनी हरा तथा ३ स्पष्ट शिराओं युक्त तथा इसमें लौंग एवं दालचीनी की सम्मिलित मनोरम गंध पायी जाती है | यह सदा हरा रहने वाला वृक्ष है | आज हम तेजपात के औषधीय गुणों की चर्चा करेंगे -

१- तेजपात के ५-६ पत्तों को एक गिलास पानी में इतने उबालें की पानी आधा रह जाए | इस पानी से प्रतिदिन सिर की मालिश करने के बाद नहाएं | इससे सिर में जुएं नहीं होती हैं |

२- चाय-पत्ती की जगह तेजपात के चूर्ण की चाय पीने से सर्दी-जुकाम,छींकें आना ,नाक बहना,जलन ,सिरदर्द आदि में शीघ्र लाभ मिलता है |

३- तेजपात के पत्तों का बारीक चूर्ण सुबह-शाम दांतों पर मलने से दांतों पर चमक आ जाती है |

४- तेजपात के पत्रों को नियमित रूप से चूंसते रहने से हकलाहट में लाभ होता है |

५- एक चम्मच तेजपात चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर सेवन करने से खांसी में आराम मिलता है |

६- तेजपात के पत्तों का क्वाथ (काढ़ा) बनाकर पीने से पेट का फूलना व अतिसार आदि में लाभ होता है |

७- इसके २-४ ग्राम चूर्ण का सेवन करने से उबकाई मिटती है |
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कान का दर्द -
गर्मियों में कान के अंदरूनी या बाहरी हिस्से में संक्रमण होना आम बात है| अधिकतर तैराकों को ख़ास-तौर पर इस परेशानी का सामना करना पड़ता है | कान में फुंसी निकलने,पानी भरने या किसी प्रकार की चोट लगने की वजह से दर्द होने लगता है | कान में दर्द होने के कारण रोगी हर समय तड़पता रहता है तथा ठीक से सो भी नहीं पाता| बच्चों के लिए कान का दर्द अधिक पीड़ा भरा होता है | लगातार जुक़ाम रहने से भी कान का दर्द हो जाता है |
आज हम आपको कान के दर्द के लिए कुछ घरेलू उपचार बताएंगे -

१- तुलसी के पत्तों का रस निकाल लें| कान में दर्द या मवाद होने पर रस को गर्म करके कुछ दिन तक लगातार डालने से आराम मिलता है |

२- लगभग १० मिली सरसों के तेल में ३ ग्राम हींग डाल कर गर्म कर लें | इस तेल की १-१ बूँद कान में डालने से कफ के कारण पैदा हुआ कान का दर्द ठीक हो जाता है |

३- कान में दर्द होने पर गेंदे के फूल की पंखुड़ियों का रस निकालकर कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है |

४- तिल के तेल में लहसुन की काली डालकर गर्म करें,जब लहसुन जल जाए तो यह तेल छानकर शीशी में भर लें | इस तेल की कुछ बूँदें कान में डालने से कान का दर्द समाप्त हो जाता है |

५- अलसी के तेल को गुनगुना करके कान में १-२ बूँद डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है |

६- बीस ग्राम शुध्द घी में बीस ग्राम कपूर डालकर गर्म कर लें | अच्छी तरह पकने के बाद ,ठंडा करके शीशी में भरकर रख लें | इसकी कुछ बूँद कान में डालने से दर्द में आराम मिलता है |


Monday, 3 November 2014

december14-srijan-

Students pay fine for observing Diwali in Hostel
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this ought to be investigated. Is this true ?
-A Medical College in Kerala has fined its students for lighting a couple of candles to observe Diwali (and not even crackers to mark the celebration).As per the college circular, this was against the "good order and discipline of the college and the hostel" 
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सच होती बर्दवान साजिश तो ग्रेटर बांग्‍लादेश का हिस्‍सा होता पश्चिम बंगाल !

As pe 
कार्तिक शुक्ल पक्ष अष्टमी, कलियुग वर्ष ५११६
भारत ने बर्दवान ब्‍लास्‍ट के बाद जो डॉजियर तैयार किया है वह बांग्‍लादेश के साथ भी साझा होगा। भारत ने इस डॉजियर में साफ कर दिया है कि जो भी आतंकी संगठन बर्दवान ब्‍लास्‍ट से जुड़े हैं, वह अलग-अलग नामों के साथ एक खतरनाक प्‍लान पर काम कर रहे थे। यह डॉजियर सोमवार को बांग्‍लादेश को सौंपा जाएगा।तैयार था पूरा खाका
डॉजियर के मुताबिक यह सभी संगठन एक बड़े बांग्‍लादेश की स्‍थापना की योजना को सफल करने पर आगे बढ़ रहे थे और जिसमें बांग्‍लादेश को पश्चिम बंगाल के साथ मिलाने की योजना का खाका तैयार किया गया था।
इस पहले कदम के तहत उन्‍होंने पश्चिम बंगाल, मेघालय और असम में अपने मॉड्यूल्‍स का सेटअप किया। इन सभी मॉड्यूल्‍य का मकसद कई छोटे-छोटे बांग्‍लादेश का निर्माण करना था। फिर इस योजना को और आगे ले जाने के मकसद से यह संगठन दिन रात काम कर रहे थे।
चिंटगांव में जेएमबी का आतंकी कैंप
इस डॉजियर में भारत ने चिंटगांव और बंदारबान में जेएमबी की ओर से चलाए जा रहे आतंकी कैंपों के बारे में भी जानकारी बांग्‍लादेश को दी है। इन आतंकी कैंपों का प्रयोग भारत खासतौर पर पश्चिम बंगाल में मॉड्यूल्‍स के लांच पैड के तौर पर किया जा रहा है। कैंपों में शामिल कैडर्स पहले मध्‍यान ग्राम आते हैं और फिर यहां से वह राज्‍य के अलग-अलग हिस्‍सों में पहुंच जाते है।
जांच के हर पहलू को किया शामिल
अपने इस डॉजियर में जहां भारत ने एनआईए की जांच से जुड़ी स्‍टेटस रिपोर्ट के बारे में जानकारियों को शामिल किया है तो साथ ही साथ बांग्‍लादेश में मौजूद शरारती आतंकी संगठनों की मौजूदगी पर भी रोशनी डाली है। इन संगठनों का लक्ष्‍य भारत में मॉड्यूल्‍स के लिए मौजूद जमीन की संभावनाओं को तलाशना है।
भारत ने कई ऐसे संगठनों की लिस्‍ट को भी इस डॉजियर में शामिल किया है जो जमात-ए-इस्‍लामी की आतंकी शाखा जमात-उल-मुजाहिद्दीन के लिए काम कर रहे हैं।
अंसारुल्‍ला बांग्‍ला, जमायतुल मुसलिमीन, हेपाजत इस्‍लाम और तंजीम तामीरुद्दीन ऐसे शरारती तत्‍व हैं जो जमात का समर्थन करते हैं। डॉजियर में भारत ने साफ कर दिया है कि इन पर बांग्‍लादेश सरकार को खासतौर पर लगाम लगाने की जरूरत है।
डॉजियर में मौजूद खास बिंदु
 • आतंकी संगठन बांग्‍लादेश के राजनीतिक हालातों का फायदा उठाने की कोशिश में हैं। ऐसे में समस्‍या और बढ़ेगी।
 • राजनीतिक हालातों ने बांग्‍लादेश में मौजूद आतंकी संगठनों को और मजबूत बना दिया है। 
 • इस क्षेत्र में अल कायदा के बारे में भी बांग्‍लादेश को बताया जाएगा।
 • अल कायदा बांग्‍लादेश के आतंकियों की मदद से एक अलग खलीफा देश की स्‍थापना करना चाहता है।
 • रोहिंग्‍या मुसलमान अपना नेटवर्क मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
 • बांग्‍लादेश में मौजूद आतंकी कैंपों की जानकारी भारत डॉजियर के जरिए देगा।
 • चिंटगांव में मौजूद कैंपों में लोगों को ट्रेनिंग दी जाती है।
 • कैंपों से उन्‍हें भारत के पश्चिम बंगाल, मेघालय और असम में भेज दिया जाता है।
 • सीमा पर भारत के साथ बांग्‍लादेश को मजबूती से सहयोग देना होगा ताकि घुसपैठ पर लगाई जा सके।
 • आर्थिक सामाजिक और राजनीतिक स्थितियों का आतंकी पूरी फायदा उठा रहे हैं।
 • भारत और बांग्‍लादेश के बीच इन आतंकियों पर लगाम लगाने के लिए साझा प्रयासों की जरूरत।
 • साथ ही सीमा पर मौजूद सुरक्षा बल आज के समय की जरूरत है और यह किसी भी दुर्घटना को रोक सकते हैं।
 • आतंकियों से हुई पूछताक्ष में पता चला है कि वह एक आतंकी स्‍टेट की दिशा में काफी तेजी से काम कर रहे हैं।
पाक में होगा हेडक्‍वार्टर
इस डॉजियर पर अगर यकीन करें तो जेएमबी के कुछ ऑपरेटिव्‍स अल कायदा के सदस्‍यों के साथ संपर्क में हैं। जेएमबी और अलकायदा के इन सदस्‍यों के बीच पाकिस्‍तान में इस उप महाद्वीप में अपनी शाखा का हेडक्‍वार्टर स्‍थापित करने की कोशिशों में लगे हुए हैं।
डॉजियर के मुताबिक इस हिस्‍से में अल कायदा का एक बेहतरीन नेटवर्क है और ऐसे में जेएमबी ने फैसला किया है कि वह ग्रेटर बांग्‍लादेश की अपनी मंशा को पूरा करने के लिए अल कायदा का समर्थन करेगा।
स्त्रोत : वन इंडिया
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देश हित की मानसिकता रखने वाला हर व्यक्ति युवा:
 श्री मोहन भागवत
राष्ट्रीय स्यवंसेवक संघ के  सरसंघचालक श्री मोहन भागवत ने कहा कि देश व समाज के हित में कार्य करने की मानसिकता रखने वाला हर उम्र का व्यक्ति युवा है। अस्सी वर्ष की आयु मे स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेकर बाबू कुवर सिंह जी ने यही साबित किया। किनारों को तोड कर उफनती नदी विनाश करती है जब कि तटों के बीच में बहने वाली नदी उपयोगी होती है । अनुशासित चरित्रवान एवं राष्ट्रहित की मानसिकता रखने वाले युवा राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभा सकते है ।
 भारत राष्ट्र अति प्राचीन है लेकिन राष्ट्रभाव विलुप्त होने से हम गुलाम बने । फिर से ऐसी स्थिति न आये इसके लिये राष्ट्रभाव व देशप्रेम की आवश्यकता है । हम उपदेश देने के स्थान पर स्वंय अनुकरण कर उदाहरण बने ।
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भारत जैसी विष्फोटक आवादी बाले देश में लोकतंत्र में बहुत कुछ ऐसा होता है जो क्रिकेट मनोरंजन फन तथा समाचारों की प्रिंट तथा इलेक्ट्रानिक दुनिया के स्तर ( खास तौर पर हिंदी मीडिया ) के माहौल से बहुत दूर के विषय होते है ..हम अक्सर अपनी भावुकता आदि के कारण अपनी अपनी राय बना लेते है लेकिन उससे नीव की ईंट जैसी छिपी हकीकते कभी नहीं बदला करती .... कभी कभी हम विचार गोष्ठियो ...भाषण या सिर्फ वह सब ही सुन कर अपनी राय बना लेते है जो हमे सुनना या पढ़ना पसंद होता है .लेकिन हकीकत इससे भी पता नहीं चल पाती ................. किसी भी विषय के सिर्फ एक पहलु की जानकारी हमे स्थायी समाधान नहीं देती .ऐसा करके हम भले ही घमंड में जी ले .लेकिन वेहतर तब होता है जब हम किसी भी विषय को सम्पूर्णता के साथ समझे ..या फिर थोड़ा ही समझे ..लेकिन एक नहीं दोनों पहलु के साथ ..............!!!



















Saturday, 1 November 2014

srijan-dec14

ये न्यूयार्क मेँ आयोजित एक डाग परेड का चित्र हैँ जहाँ
एक कुत्ते को ईसाइयोँ के सर्वोच्च धर्मगुरू पोप की
ड्रेस मेँ सजाया गया है। अब सोचिये अगर यही किसी 
और ने किया होता तो ये भारत के पादरी और सिकुलर
तथा वामपथीँ अबतक मिट्टी मेँ लोटने लगे हो होते।
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एक संत की कथा में एक बालिका खड़ी हो गई।
उसके चेहरे पर आक्रोश साफ दिखाई दे रहा था।
उसके साथ आए उसके परिजनों ने उसको बिठाने की कोशिश की, लेकिन बालिका नहीं मानी।
संत ने पूछा...... बोलो बालिका क्या बात है? 
बालिका ने कहा, महाराज घर में लड़के को हर प्रकार की आजादी होती है। वह कुछ भी करे, कहीं भी जाए उस पर कोई खास टोका टाकी नहीं होती।
इसके विपरीत लड़कियों को बात बात पर टोका जाता है। यह मत करो, यहाँ मत जाओ, घर जल्दी आ जाओ। आदि आदि।
संत ने उसकी बात सुनी और मुस्कुराने लगे।
उसके बाद उन्होंने कहा, बालिका तुमने कभी लोहे की दुकान के बाहर पड़े लोहे के गार्डर देखे हैं?
ये गार्डर सर्दी, गर्मी, बरसात, रात दिन इसी प्रकार पड़े रहतें हैं।
इसके बावजूद इनकी कीमत पर कोई अन्तर नहीं पड़ता। लड़कों की फितरत कुछ इसी प्रकार की है समाज में।
अब तुम चलो एक जोहरी की दुकान में। एक बड़ी तिजोरी, उसमे एक छोटी तिजोरी। उसके अन्दर कोई छोटा सा चोर खाना। उसमे से छोटी सी डिब्बी निकालेगा। डिब्बी में रेशम बिछा होगा। उस पर होगा हीरा।
क्योंकि वह जानता है कि अगर हीरे में जरा भी खरोंच आ गई तो उसकी कोई कीमत नहीं रहेगी।
समाज में लड़कियों की अहमियत कुछ इसी प्रकार की है। हीरे की तरह।
जरा सी खरोंच से उसका और उसके परिवार के पास कुछ नहीं रहता। बस यही अन्तर है लडकियों और लड़कों में।
इस से साफ है कि परिवार लड़कियों की परवाह अधिक करता है।
बालिका को समझ में आ गया क्यों बच्चियों की फिक्र ज्यादा होती है...
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ठंड में खाने के बाद गुड़ जरूर खाएंगे, जब जान जाएंगे ये लाजवाब फायदे!
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गुड़ का सेवन अधिकांश लोग ठंड में ही करते हैं वह भी थोड़ी मात्रा में इस सोच के साथ की ज्यादा गुड़ खाने से नुकसान होता है। इसकी प्रवृति गर्म होती है, लेकिन ये एक गलतफहमी है गुड़ हर मौसम में खाया जा सकता है और पुराना गुड़ हमेशा औषधि के रूप में काम करता है।आयुर्वेद संहिता के अनुसार यह शीघ्र पचने वाला, खून बढ़ाने वाला व भूख बढ़ाने वाला होता है। इसके अतिरिक्त गुड़ से बनी चीजों के खाने से बीमारियों में राहत मिलती है।
- गुड़ में सुक्रोज 59.7 प्रतिशत, ग्लूकोज 21.8 प्रतिशत, खनिज तरल 26प्रतिशत तथा जल अंश 8.86 प्रतिशत मौजूद होते हैं।इसके अलावा गुड़ में कैल्शियम, फास्फोरस, लोहा और ताम्र तत्व भी अच्छी मात्रा में मिलते हैं। इसलिए चाहे हर मौसम में आप गुड़ खाना न पसन्द करें लेकिन ठंड में गुड़ जरूर खाएं।
- यह सेलेनियम के साथ एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है। गुड़ में मध्यम मात्रा में कैल्शियम, फॉस्फोरस व जस्ता पाया जाता है यही कारण है कि इसका रोजाना सेवन करने वालों का इम्युनिटी पॉवर बढ़ता है। गुड़ में मैग्नेशियम अधिक मात्रा में पाया जाता है इसलिए ये बॉडी को रिचार्ज करता है साथ ही इसे खाने से थकान भी दूर होती है।
- गुड़ और काले तिल के लड्डू खाने से सर्दी में अस्थमा परेशान नहीं करता है। रोजाना गुड़ का सेवन हाइब्लडप्रेशर को कंट्रोल करता है। जिन लोगों को खून की कमी हो उन्हें रोज थोड़ी मात्रा में गुड़ जरूर खाना चाहिए। इससे शरीर में हिमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता है।
- गुड़ का हलवा खाने से स्मरण शक्ति बढ़ती है। शरीर से जहरीले तत्वों को बाहर निकालता है व सर्दियों में, यह शरीर के तापमान को विनियमित करने में मदद करता है। यह लड़कियों के मासिक धर्म को नियमित करने यह मददगार होता है।
- अगर आप गैस या एसिडिटी से परेशान हैं तो खाने के बाद थोड़ा गुड़ जरूर खाएं ऐसा करने से ये दोनों ही समस्याएं नहीं होती हैं। गुड़, सेंधा नमक, काला नमक मिलाकर चाटने से खट्टी डकारें आना बंद हो जाती हैं।
- ठंड में कई लोगों को कान के दर्द की समस्या होने लगती है। ऐसे में कान में सरसो का तेल डालने से व गुड़ और घी मिलाकर खाने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।
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नीचे बैठा हुआ युवा जो पहली नजर में एक कुकर्मी लगता है यही अब जामा मस्जिद का पेशे इमाम बनने जा रहा है
बुखारी का ये बेटा जो औरतो का रसिया है अब मुसलमानों को धार्मिक रास्ते पर चलने का उपदेश देगा

srijan-jan-15

क्रिकेटर को 6 छक्कों पर 6 करोड़, फौजी को 6 गोली पर 6 हजार भी नहीं.

कारगिल युद्ध में पाक अधिकृत तोलोलिंग पहाड़ी की चोटी पर पहला तिरंगा फहराने वाले महावीर चक्र विजेता कमांडो दीगेंद्र कुमार उर्फ ‘कोबरा’ ने देश के लिए पाकिस्तानियो से लड़ते हुवे ६ गोलिया खाई लेकिन इस ज़बाज़ को नेताओ ने हरा दिया. देश का दुर्भाग्य है कि क्रिकेट में 6 छक्के मारो तो 6 करोड़ रुपए का इनाम मिलता है, लेकिन जान हथेली पर रखकर देश की रक्षा करने वाले फौजी को 6 गोलियां भी लग जाए तो सरकार 6 हजार रुपए तक नहीं देती है। महावीर चक्र विजेता को सरकार प्रतिमाह केवल 5 हजार रु.देती है, जबकि आतंकी अफजल और कसाब पर 20-20 हजार रु. खर्च कर रही है। देश के लिए गोलिया खाने वाले फौजी केवल कमांडर की शाबासी पाकर खुश हो लेता है। महावीर चक्रनायक दीगेंद्र ऐसे दूसरे कमांडो हैं जिन्हें कारगिल युद्ध में जीवित महावीर चक्र मिला है। यह परमवीर चक्र के बाद दूसरा सर्वोच्च सम्मान है। कारगिल युद्ध में असाधारण पराक्रम दिखाने पर 10 जांबाजों को 15 अगस्त,1999 को महावीर चक्र से नवाजा गया था।
एक हाथ व सीने में 5 गोली खाने के बावजूद जांबाज कमांडो दीगेंद्र सिंह उर्फ कोबरा की टीम ने 11 बंकर बर्बाद कर दिए। 13 जून को सुबह 4 बजे उन्होंने पाक मेजर अनवर खान को मौत के घाट उतार कर तोलो-लिंग की चोटी पर तिरंगा लहरा दिया। उनके पिता शिवदान सिंह पर सारी भी 1948 में 5 गोली खाकर शहीद हुए थे। 1993 में कुपवाड़ा में उग्रवादियों के एरिया कमांडर मजीद खान को ढेर करने पर दीगेंद्र को सेना मैडल दिया गया।

क्या आप को सरदार पटेल , हैदराबाद निजाम
और MIMका किस्सा पता है ?
जिसकी खबर सुन के नेहरु ने फ़ोन तोड़दिया था |
तथ्य जो कभी बतायेनहीं गए ........
1- हैदराबाद विलय के वक्त नेहरु भारतमें
नहीं थे |
2- हैदराबाद के निजाम और नेहरु नेसमझौता
किया था अगर उससमझौते पे ही रहा जाता
तो आज देशके बीच में एक दूसरा पकिस्तान
होता |
3 – मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन(MIM)
के पास उस वक़्त २०००००रजाकार थे जो
निजाम के लिएकाम करते थे और हैदराबाद
का विलयपकिस्तान में करवाना चाहते थेया
स्वतंत्र रहना |बात तब की है जब १९४७ में भारतआजाद हो गया उसके बाद हैदराबादकी
जनता भी भारत में विलयचाहती थी |
पर उनके आन्दोलनको निजाम नेअपनी निजी
सेना रजाकार केद्वारा दबाना शुरू कर दिया |
रजाकार एकनिजी सेना (मिलिशिया)थी जो
निजाम ओसमान अली खानकेशासन को बनाए रखनेतथा हैदराबादको नव स्वतंत्र भारत में
विलयका विरोध करने के लिए बनाई थी।
यह सेना कासिमरिजवी द्वारा निर्मित की गई थी।
रजाकारों ने यह भी कोशिशकी कि निजाम
अपनी रियासतको भारत के बजाय पाकिस्तान
मेंमिला दे। रजाकारों का सम्बन्ध‘मजलिस-ए-
इत्तेहादुल मुसलमीन(MIM ) नामकराजनितिक
दल से था।नोट -ओवैसी इसी MIMकी
विचारधारा को आगे बढ़ा रहे हैं औरकांग्रेस की
मुस्लिम परस्ती और देशविरोधी नीतियों की
वजह से औरपकिस्तान परस्त मुल्लो की वजह
सेये आज तक हिन्दुस्तान में काम कररही है |
चारो ओर भारतीय क्षेत्र से घिरेहैदराबाद राज्य
की जनसंख्या लगभग1 करोड 60 लाख थी
जिसमें से 85%हिंदु आबादी थी।
29 नवंबर1947 को निजाम-नेहरू में
एकवर्षीय समझौता हुआ कि हैदराबादकी
यथा स्थिति वैसी ही रहेगी जैसी आजादी के
पहले थी।नोट – यहाँ आप देखते हैंकी नेहरु
कितने मुस्लिम परस्त थे की वो देशद्रोही से
समझौता कर लेते हैं|पर निजाम नें समझौते का उलंघन करतेहुए राज्य में एकरजाकारी
आतंकवादी संगठनको जुल्म और दमन के
आदेश दे दिए औरपाकिस्तान को 2 करोड़
रूपयेका कर्जभी दे दिया|राज्य में हिंदु औरतों
पर बलात्कारहोने लगे उनकी आंखें नोच
करनिकाली जाने लगी औरनक्सली तैय्यार
किए जाने लगे|सरदार पटेल निजाम के साथ
लंबी लंबी झुठी चर्चाओं से उकता चुकेथे अतः
उन्होने नेहरू के सामनेसीधा विकल्प रखे कि
युद्ध केअलावा दुरा कोई चारा नही है।
परनेहरु इस पे चुप रहे |कुछ समय बीता और नेहरु देश से बाहरगए सरदार पटेल गृह मंत्री तथा उपप्रधान मंत्री भी थे इसलिए उस उसवक़्त
सरदार पटेल सेना केजनरलों को तैयार रहने का आदेश देतेहुए विलय के कागजों के साथ
हैदराबाद केनिजाम के पास पहुचे और विलय
पेहस्ताक्षर करने को कहा |निजाम ने मना किया
और नेहरु से हुएसमझौते का जिक्र किया
उन्होंनेकहा की नेहरु देश में नहीं हैतो वो ही
प्रधान हैं |उसी वक्त नेहरु भी वापस आ रहे थेअगरवो वापस भारत की जमीन पे पहोच
जाते तो विलय न हो पाता इसको ध्यान में
रखते हुए पटेल नेनेहरु के विमान को उतरने
न देने का हुक्मदिया तब तक भारतीय वायु सेना
के विमाननिजाम के महल पे मंडरा रहे थे |
बसआदेश की देरी को देखते हुए निजाम नेउसी
वक़्त विलय पे हस्ताक्षर करदिए | और रातो
रात हैदराबादका भारत में विलय हो गया |
उसके बाद नेहरु केविमान को उतरने दिया गया लौहपुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल नेनेहरु
को फ़ोन किया और बसइतना ही कहा
” हैदराबादका भारत में विलय” ये सूनते ही
नेहरु ने वो फ़ोनवही AIRPORT पे पटक
दिया ” उसकेबाद रजाकारो (MIM) ने
सशस्त्रसंघर्ष शुरू कर दिया जो 13 सितम्बर
1947 से 17 सितम्बर 1948 तकचला |
भारत के तत्कालीन गृहमंत्री एवं‘लौह पुरूष’
सरदार वल्लभभाई पटेलद्वारा पुलिस कार्रवाई
करने हेतुलिए गए साहसिक निर्णय ने निजाम
को 17 सितम्बर, 1948 को आत्म-समर्पण
करने और भारत संघ मेंसम्मिलित होने पर
मजबूर करदिया। इस कार्यवाई को
‘आपरेशनपोलो’ नाम दिया गया था।
इसलिए शेष भारतको अंग्रेजी शासन से
स्वतंत्रता मिलने के बाद हैदराबादकी जनता
को अपनी आजादी केलिए13 महीने और
2 दिन संघर्ष करना पड़ा था।यदि निजाम को
उसके षड़यंत्र में सफल होने दिया जाता तो
भारतका नक्शा वह नहीं होता जो आज है।
वो फ़ोन आज भी संग्रहालय की शोभा बढ़ा रहा है।

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मित्रो, हिन्दुस्तान दुनिया मेँ एकमात्र ऐसा देश हैँ, जहाँ विश्व के सभी मतो और मजहबो के लोग रहते हैँ क्योँकि सहनशीलता भारतीय जनता का मूल स्वभाव है। हिन्दुस्तान ही एकमात्र ऐसा देश है जहां 'इस्लाम' के सभी 72 फिरके मौजूद है। हम लोग कभी विचारधारा के आधार पर व्यक्ति का मुल्यांकन नही करते है परन्तु बदले मेँ हमेँ क्या मिला है?

पारसी लोग 1200 वर्ष पूर्व गुजरात आये, वहाँ उन्होनेँ शरण प्राप्त की। उन्होने अपना मूल धर्म(सूर्य-पूजा एवं अग्नि पूजा) जीवित रखा, पर न पारसियोँ ने कभी किसी को धर्म मेँ मिलाने, अपनी संख्या बढ़ाने का अपक्रम किया, न स्वयं किसी धर्म मेँ मिले। पारसी लोग संख्या मेँ सबसे कम हैँ लेकिन उन्हेँ अपनी धर्म कभी खतरे मेँ नजर नहीँ आया, उन्होनेँ दूसरोँ के मन्दिर-मूर्त्तियाँ कभी ध्वस्त नहीँ की। कभी आतंकवादी गतिविधियोँ मेँ, हत्याओँ, बलात्कार, लूटपाट मेँ भाग नहीँ लिया। पारसियोँ ने देश को बड़े-2 देशभक्त दिये जैसे मैडम कामा, दादाभाई नौरोजी, होमी जहाँगीर भाभा, जमशेद जी टाटा, जनरल मानेकशा, गोदरेज आदि। हमेँ पारसियोँ पर गर्व है। वे अलग रह कर भी मिलकर रहे।

लेकिन मुसलमान एक हजार वर्ष के इतिहास मेँ भारतीय समाज के साथ कभी एकाकार नहीँ हो सके। इनको अपना 'मजहब' सदैव खतरे मेँ दिखायी दिया। छोटी-छोटी बातोँ को लेकर वे तकरार मचाते रहे। बलवे करते रहे। हत्याएँ, उत्पात मचाते रहे। हो सकता है कि मुसलमानोँ मेँ मात्र कुछ प्रतिशत लोग बहुत भले होँ लेकिन अधिकांश धर्मान्ध हैँ, जो मजहब के नाम पर अत्यन्त असहनसील हैँ। इनमेँ भी 30% से अधिक लोग ऐसे हैँ, जो इस बात का अवसर ढूँढ़ते रहते हैँ कि किस बात का बहाना बनाकर, बलवा खड़ा किया जाये, सरकारी और निजी सम्पत्ति को नुकसान पहुँचाया जाये। लोगो पे हमला किया जाये तथा मन्दिरोँ और मुर्तियोँ को खण्डित किया जाये। मन्दिरोँ की मूर्त्तियोँ को मुहम्मद बिन कासिम, महमूम गजनवी से लेकर औरंगजेब तक सबने नष्ट कर, मस्जिद की सीढ़ियोँ मेँ चुनवा दिया, ताकि मुसलमान उनको कुचलता हुआ जाये और हिन्दू अपमानित महसूस करेँ। मुसलमानोँ नेँ इस दुष्कृत्य के लिए कभी माफी नहीँ माँगी, हालाँकि वो नरेन्द्र मोदी से माफी की उन्मीद रोज करते है जबकि वो दगेँ भी मुसलमानोँ की ही देन थे।

वे जैसे ऐसे मौको की ताक मेँ ही रहते हैँ, मानो वे लोग इस देश के नागरिक न होकर पाकिस्तान या किसी अरब देश के नागरिक हो। यह प्रवृति दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। अकबरूद्दीन ओवैसी देवी-देवताओँ का आम अपमान करता हैँ, सारे हिन्दुओँ को समाप्त करने की बात करता है, रजाकारी-इस्लामी राज्य स्थापित करने की बात करता है, और ये तब है जब उन्होनेँ इस्लाम के नाम पर इस देश को बंटवा भी लिया है। हम तो यही कहेगेँ कि मुसलमानोँ को इस देश मेँ रहना है, तो उन्हेँ देश की मुख्यधारा मेँ शामिल होना होगा क्योँकि हम देशभक्तोँ का हार्दिक सम्मान करते हैँ, देशद्रोहियोँ का नहीँ।

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edhar-udhar

आस्ट्रेलिया के नए कानून के अनुसार यदि किसी शांतिदूत जोड़े ने अपनी बच्चिओं को पब्लिक पैलेस में 'बुर्का' पहनने पर मजबूर किया तो उसको एक साल की जेल के साथ- साथ जुर्म के रूप में 68,000 डॉलर (करीब 41 लाख रुपए) का भुगतान सरकार को करना होगा, एक वो देश है जहाँ पर आंतकवाद पर रोक लगाने के लिए बुर्के पर पूरी तरह से बैन लगा दिया गया है और एक हमारा देश है जिसमें आये दिन मदरसों में आंतक की ट्रेनिंग लेती औरतें पकड़ी जा रही हैं मगर वोट बैंक की खातिर इस 'आंतकी पोशाक' पर कुछ नहीं बोला जाता,
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जब एक टीवी चैनल के पत्रकार ने ''रन फॉर यूनिटी'' कार्यक्रम में भाग ले रहे युवाओं से पूछा की क्या आप सरदार पटेल को जानते है .
.तो एक युवा ने बताया की पटेल ने देश के लिए अपने सर में गोली मार ली थी .इसलिए उनको आईरन मैन कहा जाता है ....
दूसरे ने हकलाते हुए कहा I don't Know ..........किसी और ने कहा की उसने कभी भी सरदार पटेल का नाम नहीं सूना ......
ये समाज की बो हकीकत है जिसको पिछले साठ से जादा वर्षों में  कांग्रेस तथा उसके वैचारिक खाने में पत्तल चाटने बाले  इतिहासकारों ने भारत की जनता को शिक्षा व्यबस्था के जरिये दिमाग में घुसाया है !
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 गुजरात से कांग्रेस की वजह से   खत्म हो गयी 

 आपने एक तश्वीर देखी होगी जिसमे गाँधी के बगल में नेहरु बड़ी आत्मीयता से बैठे है जबकि उस तश्वीर में सरदार पटेल भी थे ।
1980 में कांग्रेस के महाधिवेशन में राजीव गाँधी ने इस फोटो को क्रोप करके मंच पर लगाया था । फोटो को इस तरह से क्रोप किया गया ताकि सरदार पटेल फोटो से निकल जाये । और बाद में उसी क्रोप्ड फोटो के आधार पर संसद के बाहर गाँधी और नेहरु की मूर्ति भी लगी ।
लेकिन इस फोटो को खीचने वाली महिला फोटोग्राफर ने असली फोटो की एक कापी गुजरात के एक बड़े अख़बार को दी । उस अख़बार ने असली फोटो को छापते हुए लिखा की आखिर कांग्रेस ने सरदार पटेल का अपमान क्यों किया । फिर उसके बाद से ही कांग्रेस गुजरातियों के मन से गिर 
गयी 
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काश किसी भारतीय मीडिया ने रेहाना जब्बार केस पर ईरान की सर्वोच्च अदालत की टिप्पड़ी दिखाई होती
रेहाना जब्बार ने एक पुरुष को मार डाला क्योकि वो उसका बलात्कार करने पर आमादा था अपनी इज्जत बचाने के लिए उसने उसका कतल कर दिया । लेकिन ईरान ने इस्लामिक कानूनों के तहत रेहाना को फांसी पर लटका दिया ।
ईरान में हर फैसले शरियत के तहत होते है और जज ने कहा की चूँकि अभी बलात्कार हुआ नही था भले ही मृतक ने अपने और रेहाना के कपड़े फाड़ दिए थे और रेहाना को कई जगहों पर काटा था लेकिन उसने अभी रेप नही किया था इसलिए इस्लामिक अदालत की नजर में वो बेकसूर है और रेहाना एक मुस्लिम दीनी की कातिल है इसलिए इसे फांसी दी जाती है ताकि फिर कोई लडकी ऐसी गुस्ताखी न करे ।
इन शांतिदूतो ने तो नीचता की हद कर दी है
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क्या देश में सब नागरिको के लिये ''एक समान'' कानून नहीं होना चाहिए ?
 आप ट्रेन में शराब नहीं पी सकते क्योंकि ये एक सामाजिक बुराई है, पर आप हवाई जहाज में पीकर जा सकते है ! यहाँ आर्डर पर शराब एवं बीयर उपलब्ध हो जायेगी ये एक ''प्रोफेशनल स्टेटस'' है यहाँ एअरपोर्ट में 'वाइन बार' भी है !
आप बस स्टैंड,रेलवे स्टेशन में धूम्रपान नहीं कर सकते इसके लिए जुर्माना है पर यदि कोई एअरपोर्ट में पीना चाहे तो वहा आपके लिए 'स्मोकिंग' जोन है ! आप स्टेडियम जैसे public place पर पुलिस सुरक्षा में बीयर एवं शराब पीते हुए मैच का 'लुत्फ़' उठा सकते है ! लेकिन यदि आप किसी बरात में, ढ़ाबे पर सड़क किनारे, खेत पर दारु पीऐ तो ''पुलिस'' आपको दौड़ा-दौड़ा कर पीटेगी ! आप कसिनो में लाखो का जुआ लाटरी खेल सकते है पर यदि आप दीपावली पे भी 100-50 का जुआ खेले,पुलिस कुत्ते की तरहा सूंघती हुई पहुँच जायेगी वो कौन है जो ''गरीबो'' और ''अमीरों'' के लिए अलग अलग क़ानून बनाता है ! …। दोस्तों,क़ानून की गाज़ सिर्फ गरीब पर ही गिरती है ! अमीर को खुली छूट ।
मैं शराब का कत्तई हिमायती नहीं हूँ, लेकिन क्या ये अमीरों और गरीबों के प्रति भेदभाव नहीं है?
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दिल्ली जैसी राजधानी के बीचोंबीच सैकड़ों एकड़ जमीन घेरकर बनी हुई जे एन यू
और इसके हॉस्टल में छात्र छात्राओं को ...
क्या सडकों पर किस ऑफ़ लव करने के लिए रखा गया है..?
कैम्पस में बीफ फेस्टिवकल के लिए इनका एडमिशन हुआ है 
या पढ़ने लिखने के लिए ..?
इनको कैम्पस से बाहर जाने की अनुमति कैसे मिल जाती है ..?
और शहर में अश्लील नाच करके वापस हॉस्टल में सोने की परमिशन कौन दे देता है ..?
यह यूनिवर्सिटी है या टेरर कैम्प ..?
जे एन यू के छात्रों के एक गुट द्वारा प्रायोजित दिल्ली की सडकों पर किस ऑफ़ लव के नाम पर नंगा नाच हुआ
पर जे एन यू के वाईस चान्सलर पर कार्रवाई अब तक क्यों नहीं हुई..?
विश्वविद्यालय और इसके हॉस्टल पढ़ने लिखने के लिए हैं या
राष्ट्रविरोधी देशद्रोही समाज विरोधी गतिविधियों के लिए... ?
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एक सामान्य व्यक्ति एक अदद पत्नी और दो बच्चों ... इन 3 लोगों .. सिर्फ 3 लोगों के भरण पोषण और सेवा सुश्रुषा में पूरा जीवन बिता देता है । सिर्फ इन 3 लोगों के लिए , उनकी इच्छाओं की पूर्ति के लिए .. उनके नाजो नखरे उठाता उनकी बातें सुनता , उनकी झिडकियां खाता है .. लात जूता भी खाता है ... बेइमानियाँ करता है .. अपना ज़मीर बेचता है ,अपना स्वाभिमान अपनी अंतरात्मा को गिरवी रख देता है . सिर्फ इन 3 लोगों की सेवा में ?
 क्या मनुष्य का जीवन जो मिला वो इसीलिए मिला था ? इतनी बड़ी दुनिया में जहां इतने सारे लोग हैं  6 अरब लोग . और एक भरा पूरा समाज ..एक राष्ट्र ..और धर्म ... और इन सबसे ऊपर आपकी अपनी आत्मा ... क्या इनके प्रति कोई कर्त्तव्य नहीं .. ?
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