Wednesday, 2 December 2015

खुशखबरी-----
थाईलैंड में हुई बॉडीबिल्डिंग की मिस्टर वर्ल्ड प्रतियोगिता में ठाकुर अनूप सिंह ने गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है।ठाकुर अनूप सिंह ने राजपूत समाज और पूरे भारतवर्ष का नाम रोशन किया है।अनूप सिंह पहले पायलट थे।
उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए उनको ढेरो शुभकामनाएं।

https://m.facebook.com/thakuranoopsinghofficial/

कभी भी अपने स्वार्थ के लिए करीबियों का दिल ना तोड़ें...!

एक राजमहल में कामवाली और उसका बेटा काम करते थे. एक दिन राजमहल में कामवाली के बेटे को हीरा मिलता है. वो माँ को बताता है.
कामवाली होशियारी से वो हीरा बाहर फेककर कहती है ये कांच है हीरा नहीं.कामवाली घर जाते वक्त चुपके से वो हीरा उठाके ले जाती है.
वह सुनार के पास जाती है...
सुनार समझ जाता है इसको कही मिला होगा, ये असली या नकली पता नही इसलिए पुछने आ गई.
सुनार भी होशियारी सें वो हीरा बाहर फेंक कर कहता है
ये कांच है हीरा नहीं.
कामवाली लौट जाती है.
सुनार वो हीरा चुपके सेे उठाकर जौहरी के पास ले जाता है, जौहरी हीरा पहचान लेता है. अनमोल हीरा देखकर उसकी नियत बदल जाती है. वो भी हीरा बाहर फेंक कर कहता है ये कांच है हीरा नहीं.
जैसे ही जौहरी हीरा बाहर फेंकता है...
उसके टुकडे टुकडे हो जाते है.
यह सब एक राहगीर निहार रहा था...
वह हीरे के पास जाकर पूछता है... कामवाली और सुनार ने दो बार तुम्हे फेंका... तब तो तूम नही टूटे... फिर अब कैसे टूटे?
हीरा बोला....
कामवाली और सुनार ने दो बार मुझे फेंका
क्योंकि...
वो मेरी असलियत से अनजान थे.
लेकिन....
जौहरी तो मेरी असलियत जानता था... तब भी उसने मुझे बाहर फेंक दिया... यह दुःख मै सहन न कर सका... इसलिए मै टूट गया .....
ऐसा ही...
हम मनुष्यों के साथ भी होता है !!!
जो लोग आपको जानते है, उसके बाबजूद भी आपका दिल दुःखाते है तब यह बात आप सहन नही कर पाते....!
इसलिए....
कभी भी अपने स्वार्थ के लिए करीबियों का दिल ना तोड़ें...!!!
हमारे आसपास भी... बहुत से लोग... हीरे जैसे होते है !
उनकी दिल और भावनाओं को .. कभी भी मत दुखाएं...
और ना ही...
उनके अच्छे गुणों के टुकडे करिये...!!!
हवा से पीने का पानी निकाल सकती है इजरायली मशीन
इजरायल की कंपनी “ वॉटर-जेन ” ने एक ऐसी नई और सस्ती तकनीकि का विकास किया है, जो हवा से पीने का पानी निकाल सकती है। इससे भारत जैसे विकासशील देशों की पेयजल की समस्या को दूर किया जा सकता है।
 कंपनी का दावा है कि 15 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बोतल में मिलने वाले पानी की तुलना में इस तकनीकि की मदद से महज 1.5 रुपये में एक लीटर पीने का पानी तैयार किया जा सकता है। वॉटर-जेन की ऐटमस्फेरिक वॉटर-जेनरेशन यूनिट्स “जेनिअस” हीट एक्सचेंजर का इस्तेमाल कर हवा को ठंडा करती है और भाप घना होकर द्रव्य यानी पानी में बदल जाता है।
इस हीट एक्सचेंजर सिस्टम से साफ हवा को पास किया जाता है, जहां उसमें से नमी अलग होती है। उसके बाद हवा से पानी निकालकर उसे एक टैंक में जमा किया जाता है। उसके बाद पानी को शुद्धिकरण की प्रक्रिया से गुजारा जाता है।
यहां पानी से रसायन और अन्य दूषित तत्व अलग किए जाते हैं और शुद्ध पानी तैयार होता है। कंपनी का दावा है कि इस तकनीकि की मदद से रोजाना 250 से 800 लीटर पेयजल निकाला जा सकता है। हालांकि, पानी की मात्रा तापमान और नमी पर भी निर्भर करती है।
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Tuesday, 1 December 2015

वैज्ञानिक कारण..!

एक गोत्र में शादी क्यूँ नहीं..
एक दिन डिस्कवरी पर
जेनेटिक बीमारियों से
सम्बन्धित एक ज्ञानवर्धक कार्यक्रम था
उस प्रोग्राम में
एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने कहा की
जेनेटिक बीमारी न हो

इसका एक ही इलाज है

और वो है
"सेपरेशन ऑफ़ जींस"

मतलब अपने नजदीकी रिश्तेदारो में
विवाह नही करना चाहिए
क्योकि
नजदीकी रिश्तेदारों में
जींस सेपरेट (विभाजन) नही हो पाता
और
जींस लिंकेज्ड बीमारियाँ जैसे
हिमोफिलिया, कलर ब्लाईंडनेस, और
एल्बोनिज्म होने की
100% चांस होती है ..
फिर बहुत ख़ुशी हुई
जब उसी कार्यक्रम में
ये दिखाया गया की
आखिर
"हिन्दूधर्म" में

हजारों-हजारों सालों पहले

जींस और डीएनए के बारे में

कैसे लिखा गया है ?

हिंदुत्व में गोत्र होते है

और
एक गोत्र के लोग
आपस में शादी नही कर सकते
ताकि
जींस सेपरेट (विभाजित) रहे.
उस वैज्ञानिक ने कहा की

आज पूरे विश्व को मानना पड़ेगा की

"हिन्दूधर्म ही"

विश्व का एकमात्र ऐसा धर्म है जो

"विज्ञान पर आधारित" है !
हिंदू परम्पराओं से जुड़े

ये वैज्ञानिक तर्क:

1-
कान छिदवाने की परम्परा:

भारत में लगभग सभी धर्मों में
कान छिदवाने की
परम्परा है।
वैज्ञानिक तर्क-

दर्शनशास्त्री मानते हैं कि
इससे सोचने की शक्त‍ि बढ़ती है।
जबकि
डॉक्टरों का मानना है कि इससे बोली
अच्छी होती है और
कानों से होकर दिमाग तक जाने वाली नस का
रक्त संचार नियंत्रित रहता है।
2-
माथे पर कुमकुम/तिलक

महिलाएं एवं पुरुष माथे पर
कुमकुम या तिलक लगाते हैं
वैज्ञानिक तर्क-

आंखों के बीच में
माथे तक एक नस जाती है।
कुमकुम या तिलक लगाने से
उस जगह की ऊर्जा बनी रहती है।
माथे पर तिलक लगाते वक्त जब अंगूठे या उंगली से प्रेशर पड़ता है,
तब चेहरे की त्वचा को रक्त सप्लाई करने वाली मांसपेशी सक्रिय हो जाती है।
इससे चेहरे की कोश‍िकाओं तक अच्छी तरह रक्त पहुंचता
3-
जमीन पर बैठकर भोजन

भारतीय संस्कृति के अनुसार
जमीन पर बैठकर भोजन करना अच्छी बात होती है
वैज्ञानिक तर्क-

पलती मारकर बैठना

एक प्रकार का योग आसन है।

इस पोजीशन में बैठने से

मस्त‍िष्क शांत रहता है और
भोजन करते वक्त
अगर दिमाग शांत हो तो
पाचन क्रिया अच्छी रहती है। इस पोजीशन में बैठते ही
खुद-ब-खुद दिमाग से 1 सिगनल
पेट तक जाता है, कि
वह भोजन के लिये तैयार हो जाये
4-
हाथ जोड़कर नमस्ते करना
जब किसी से मिलते हैं तो
हाथ जोड़कर नमस्ते अथवा नमस्कार करते हैं।
वैज्ञानिक तर्क-

जब सभी उंगलियों के शीर्ष
एक दूसरे के संपर्क में आते हैं
और उन पर दबाव पड़ता है।
एक्यूप्रेशर के कारण उसका
सीधा असर
हमारी आंखों, कानों और दिमाग पर होता है,
ताकि सामने वाले व्यक्त‍ि को हम लंबे समय तक याद रख सकें।
दूसरा तर्क यह कि हाथ मिलाने (पश्च‍िमी सभ्यता) के बजाये अगर आप नमस्ते करते हैं
तो सामने वाले के शरीर के कीटाणु आप तक नहीं पहुंच सकते।
अगर सामने वाले को स्वाइन फ्लू भी है तो भी वह वायरस आप तक नहीं पहुंचेगा।
5-
भोजन की शुरुआत तीखे से और

अंत मीठे से

जब भी कोई धार्मिक या
पारिवारिक अनुष्ठान होता है तो
भोजन की शुरुआत तीखे से और
अंत मीठे से होता है।
वैज्ञानिक तर्क-

तीखा खाने से
हमारे पेट के अंदर
पाचन तत्व एवं अम्ल सक्रिय हो जाते हैं
इससे
पाचन तंत्र ठीक से संचालित होता है
अंत में
मीठा खाने से
अम्ल की तीव्रता कम हो जाती है
इससे पेट में जलन नहीं होती है
6-
पीपल की पूजा
तमाम लोग सोचते हैं कि पीपल की पूजा करने से भूत-प्रेत दूर भागते हैं।
वैज्ञानिक तर्क-
इसकी पूजा इसलिये की जाती है, ताकि इस पेड़ के प्रति लोगों का सम्मान बढ़े और उसे काटें नहीं पीपल एक मात्र ऐसा पेड़ है, जो रात में भी ऑक्सीजन प्रवाहित करता है
7-  दक्ष‍िण की तरफ सिर करके सोना
दक्ष‍िण की तरफ कोई पैर करके सोता है तो लोग कहते हैं कि बुरे सपने आयेंगे भूत प्रेत का साया आयेगा,poorvajon ka esthaan,आदि इसलिये उत्तर की ओर पैर करके सोयें
वैज्ञानिक तर्क-
जब हम उत्तर की ओर सिर करके सोते हैं, तब हमारा शरीर पृथ्वी की चुंबकीय तरंगों की सीध में आ जाता है। शरीर में मौजूद आयरन यानी लोहा दिमाग की ओर संचारित होने लगता है इससे अलजाइमर, परकिंसन, या दिमाग संबंधी बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है यही नहीं रक्तचाप भी बढ़ जाता है
8-  सूर्य नमस्कार
हिंदुओं में सुबह उठकर सूर्य को जल चढ़ाते नमस्कार करने की परम्परा है।
वैज्ञानिक तर्क-
पानी के बीच से आने वाली सूर्य की किरणें जब आंखों में पहुंचती हैं तब  हमारी आंखों की रौशनी अच्छी होती है
9-  सिर पर चोटी
हिंदू धर्म में ऋषि मुनी सिर पर चुटिया रखते थे आज भी लोग रखते हैं
वैज्ञानिक तर्क-
जिस जगह पर चुटिया रखी जाती है उस जगह पर दिमाग की सारी नसें आकर मिलती हैं इससे दिमाग स्थ‍िर रहता है और इंसान को क्रोध नहीं आता सोचने की क्षमता बढ़ती है।
10-  व्रत रखना
कोई भी पूजा-पाठ, त्योहार होता है तो लोग व्रत रखते हैं।
वैज्ञानिक तर्क-
आयुर्वेद के अनुसार व्रत करने से पाचन क्रिया अच्छी होती है और फलाहार लेने से शरीर का डीटॉक्सीफिकेशन होता है यानी उसमें से खराब तत्व बाहर निकलते हैं शोधकर्ताओं के अनुसार व्रत करने से कैंसर का खतरा कम होता है हृदय संबंधी रोगों,मधुमेह,आदि रोग भी जल्दी नहीं लगते
11-  चरण स्पर्श करना
हिंदू मान्यता के अनुसार जब भी आप किसी बड़े से मिलें तो उसके चरण स्पर्श करें यह हम बच्चों को भी सिखाते हैं ताकि वे बड़ों का आदर करें
वैज्ञानिक तर्क-
मस्त‍िष्क से निकलने वाली ऊर्जा हाथों और सामने वाले पैरों से होते हुए एक चक्र पूरा करती है इसे कॉसमिक एनर्जी का प्रवाह कहते हैं इसमें दो प्रकार से ऊर्जा का प्रवाह होता है या तो बड़े के पैरों से होते हुए छोटे के हाथों तक या फिर छोटे के हाथों से बड़ों के पैरों तक
12-  क्यों लगाया जाता है सिंदूर शादीशुदा हिंदू महिलाएं सिंदूर लगाती हैं
वैज्ञानिक तर्क-

सिंदूर में हल्दी,चूना और मरकरी होता है यह मिश्रण शरीर के रक्तचाप को नियंत्रित करता है चूंकि इससे यौन उत्तेजनाएं भी बढ़ती हैं इसीलिये विधवा औरतों के लिये सिंदूर लगाना वर्जित है इससे स्ट्रेस कम होता है।
13-  तुलसी के पेड़ की पूजा

तुलसी की पूजा करने से घर में समृद्ध‍ि आती है सुख शांति बनी रहती है।
वैज्ञानिक तर्क-
तुलसी इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है लिहाजा अगर घर में पेड़ होगा तो
इसकी पत्त‍ियों का इस्तेमाल भी होगा और उससे बीमारियां दूर होती हैं।
       मोदी सरकार  देश के सर्वांगीण विकास के लिए कार्यरत है | इसका ताजा उदाहरण है,  30 नवम्बर को बिहार के मधेपुरा और मढौरा में लोकोमोटिव मेन्यूफेक्चरिंग फैक्ट्रियों की स्थापना के लिए दुनिया की दिग्गज कंपनियों अलस्टम और जीई ट्रांसपोर्ट के साथ रेलवे मंत्रालय द्वारा किया गया चालीस हजार करोड़ का करार |
एक दशक पहले जब लालू यादव रेल मंत्री थे,   कई बार फेक्टरियों का टेंडर जारी किया गया और केंसिल किया गया | यह मेक इन इंडिया के लिए मील का पत्थर है, क्योंकि दुनिया की दिग्गज कंपनियों ने देश के अन्दर इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए कदम बढाया है | 
 रेल मंत्री सुरेश प्रभू ने कहा कि अलस्टम और जीई ट्रांसपोर्ट के साथ आने से देश में अन्य सामानों और सहायक सामग्रियों की मेन्यूफेक्चरिंग के लिए अनुकूल माहौल बनेगा |जीई ट्रांसपोर्ट रेलवे के साथ जॉइंट वेंचर के रूप में 1000 विशिष्ट डीजल लोकोमोटिव्स तथा अलस्टम 800 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव्स का उत्पादन करेगा | दोनों कम्पनियां उत्पादन और रखरखाव पर लगभग चालीस हजार करोड़ रूपया इन्वेस्ट करेंगी |
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स्वच्छ पर्यावरण स्वस्थ मानव..
      भारत सरकार की इंटरनैशनल सोलर अलायंस बनाने की पहल की तर्ज पर बिल गेट्स, मुकेश अंबानी, रतन टाटा और जैक मा समेत दुनिया के टॉप उद्योगपतियों ने सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए आपस में हाथ मिलाया है।     
   ब्रेकथ्रू एनर्जी कोऐलिशन  28 निवेशकों का इंटरनैशनल ग्रुप है। इस ग्रुप का मकसद वैसी कंपनियों को लाना है जिसमें रिसर्च लैब से मार्केट तक सस्ती, विश्वसनीय और कार्बन फ्री एनर्जी डिलिवर करने की क्षमता है। पीएम मोदी ने भी 'मन की बात' कार्यक्रम के दौरान सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने पर जोर दिया था। इन उद्योगपतियों का यह कदम सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के मोदी सरकार के प्रयास में सहायक साबित होगा।
ऐसी उम्मीद है कि दुनिया के इंडस्ट्री लीडर्स अपने रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट को डबल कर देंगे जिससे इनोवेशन के चक्र को रफ्तार देकर नाटकीय तौर पर ऊर्जा के क्षेत्र में बदलाव को तेजी दी जा सकती है।
इन से दुनिया भर की सरकारों को विशिष्ट इनोवेशन की मदद से क्लीन एनर्जी की ग्रोथ के रास्ते पर आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी। यूके वर्जिन ग्रुप के रिचार्ड ब्रैंसन, फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग और हेवलेट पैकार्ड के मेग वाइटमैन उन इंडस्ट्री लीडर्स में शामिल हैं जो इस कोऐलिशन के हिस्सा होंगे।
 इसमें ऐसे 100 से ज्यादा देश शामिल होंगे जहां सुर्य का प्रकाश प्रचुरता से उपलब्ध होता है। इन सभी का मकसद स्वच्छ, सस्ती और नवीकरणीय सौर ऊर्ज के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। 
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 मेक इन इंडिया लाया 1.2 लाख करोड़ का निवेश !
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में करीब 1.2 लाख करोड़ रुपये का विदेशी निवेश आया है, PM Modi का आह्रवाहन और मेक इन इंडिया की रुप रेखा कुछ इस तरह की बनाई गई है जिसकी वजह से मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के लोगों का रुझान इंडिया की तरफ बढ़ा है.: 
 पीएम मोदी ने देश की सत्ता संभालने के बाद से कई देशों का भ्रमण किया. हर जगह आह्वाहन किया कि वो आए और हमारे देश में मेक इन इंडिया को सफल बनाए और अब इस आह्वाहन ने असर दिखाना शुरू कर दिया, जब से मेक इन इंडिया प्रोग्राम को लॉन्च किया है तब से लेकर अब तक ऐसा देखने में आया है कि विदेशी निवेश के लिए लोग भारत की ओर रुख कर रहे है. खासकर के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में निवेश तेजी से देखा जा रहा है.

 (NPE) का इरादा इंपोर्ट पर डिपेंडेंसी को खत्म करना और 2020 तक इस सेक्टर में 100 अरब डॉलर का इन्वेस्टमेंट करवाना है ताकि और 2.8 करोड़ लोगों के लिए रोजगार के मौके पैदा किए जा सकें.
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vande mataram

                   बेंगलूर से पिता सुमेरमल जैन (58) को लेकर राजस्थान के मेड़तारोड़ के लिए यशवंतपुर-बीकानेर एक्सप्रेस में बैठे पंकज जैन सफर की शुरूआत के साथ ही चिंता में थे। रविवार सुबह चार बजे ट्रेन मेड़तारोड़ पहुंची और पांच मिनट ठहरने के बाद रवाना हो जाती।   इतनी देर में पंकज को अपने लकवाग्रस्त पिता और सामान को नीचे उतारना था। इस उधेड़बुन में ट्रेन की गति के साथ ही पंकज ही नहीं साथ चल रहीं मां और बहन की परेशानी भी बढ़ती जा रही थी।    इस बीच किसी रिश्तेदार को फोन लगाया तो उन्होंने सुझाव दिया कि  रेलमंत्री सुरेश प्रभु को ट्वीट कर अपनी परेशानी बताओ।
                पंकज ने शनिवार शाम साढ़े छह बजे अपनी बात ट्वीट के जरिये रेलमंत्री तक पहुंचाई। तुरंत रेलमंत्री का जवाब आया, आपको परेशानी नहीं होगी। रात साढ़े आठ बजे आबूरोड़ में टीटी उनकी बर्थ तक आए और कहा कि मेड़तारोड़ में पूरे इंतजाम मिलेंगे, आप जरा भी चिंतित नहीं हों। ट्रेन निर्धारित समय से करीब एक घंटे देर से मेड़तारोड़ के तीन नंबर प्लेटफार्म पर पहुंची। पंकज ने जैसे ही लपककर कोच का गेट खोला तो सामने स्टेशन मास्टर, एक कुली और व्हीलचेयर के साथ मददगार तैयार खड़े थे।
             सभी ने मिलकर लकवाग्रस्त सुमेरमल जैन को नीचे उतारा। इस दौरान ट्रेन दस मिनट तक रुकी रही। मुख्य गेट तक पहुंचने के लिए लंबा रास्ता तय करना होता है। स्टेशन मास्टर और उनकी टीम उनके साथ रही।

ईंट का जवाब पत्त्थर से ...

             स्टील सिटी, टाटा नगर, जमशेदपुर के जन्मदाता को एक बार रंगभेद के चलते "Watson's Hotel " , में नहीं ठहरने दिया गया क्योंकी उस होटल में केवल गोरे ही ठहर सकते थे !
             स्वाभिमानी एवं कर्मठ उद्योगपति श्री जमशेदजी नसरवान टाटा ने भारत आकर ताज होटल का निर्माण करवाया ! ! हौसला बुलंद हो तो इंसान क्या नहीं कर सकता ! अपने साथ साथ पूरे देश को गौरवान्वित करता है !

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 प्रकृति की अति दुर्लभ रचना ..
       पेड़ पर लगे रुद्राक्ष पर त्रिशूल व् शंख दोनों की आकृति एक साथ उभरी है ।
       शिव और विष्णु दोनों के प्रतिक एक साथ और वो भी कुदरती तौर पर ।.
        जय हो...प्रभू...