Wednesday, 14 December 2016

vyang


भोलेनाथ उसकी तपस्या से खुश होकर प्रकट हो गए और बोले - मैं तुम्हारी तपस्या से प्रसन्न हूं बेटा। मांगो क्या मांगते हो..?.
केजरीवाल - मैं चाहता हूं कि मोदी जी इस्तीफा दे दें.....
भोलेनाथ- तथास्तु .....✋🏻..........
दूसरे दिन ललित मोदी का आईपीएल से इस्तीफा आ गया ..........😄...........
केजरीवालजी ने यह ऐलान कर दिया कि नरेंद्र मोदी और भोलेनाथ एक दूसरे से मिले हुए हैं...
अगली बार उसने भगवान विष्णु की उपासना की और कहा कि देश के प्रधानमंत्री इस्तीफा दे।
विष्णु जी ने कहा - जैसी तुम्हारी इच्छा...तथास्तु....✋🏻
केजरीवाल उछलते कूदते जब पृथ्वी पे आया तो प्रधानमन्त्री डेविड कैमरून ने इस्तीफा दे दिया।
अच्छा तो यहाँ भी setting है।
अब वह अंत मे ब्रह्मा जी के पास पहुँचा। और कठिन तपस्या के बाद ब्रह्मा जी को समझाते हुये कहा कि भारत के वर्तमान प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी इस्तीफा दे ।
ब्रह्मा जी ने कुछ सोचकर कहा - ठीक है मूर्ख....मुझे तेरी बात माननी पडेगी....तथास्तु.. ।।।
केजरीवाल फूले नही समा रहा था। वो सरपट पृथ्वी पे आया और आते ही पता चला की भारत के प्रधानमन्त्री ने अपना इस्तीफा दे दिया है।
केजरीवाल नाचने लगा। ढोल मंगाओ। मंजीरे बजाओ।
तब संजय ने पूछा कि आप इस इस्तीफे से क्यों खुश हो रहे हैं।नरेंद्र मोदी ने इस्तीफा तो गुजरात क्रिकेट संघ से दिया है।
तब से केजरीवाल धर्म बदलने की सोच रहा है।
हमे उसके साथ गहरी सहानुभूति है।
और आपको?
Jitendra Pratap Singh
"राजनीति समाज की सेवा का माध्यम है जिसे किसी भी परिस्थिति में व्यवसाय में रूपांतरित नहीं होने दिया जा सकता। ऐसा तभी संभव है जब ऐसे लोग इसे अपना कार्यक्षेत्र बनाएं जिनके 'स्व' की परिधि इतनी विस्तृत हो जिससे स्वार्थ ही सेवा बन जाए और सेवा ही स्वार्थ।


किसी भी प्रगतिशील समाज में धन का सृजन विकास की दृष्टि से एक संसाधन के रूप में महत्वपूर्ण है ; समस्या धन नहीं बल्कि धन के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण और व्यक्तिगत मनोवृति है जिसके चलते संसाधन को ही जीवन ने अपना उद्देश्य मान लिया है, तभी, सफलता प्राप्ति की दौड़ में जीवन ने अपनी सार्थकता का महत्व बहोत पीछे छोड़ दिया है।जब अज्ञानतावश स्वार्थ से शाषित व्यक्ति राजनीति जैसे समाज सेवा के क्षेत्र को भी पेशा बना दें तो व्यवस्था का भ्रष्ट और समाज के उपेक्षित वर्ग का शाशन तंत्र के दुरूपयोग द्वारा शोषण स्वाभाविक है।
भारत के सन्दर्भ में समस्या धन का आभाव नहीं बल्कि उसकी व्यर्थता, दुरूपयोग व् संचय की मनोवृति है और यही कारन है की एक राष्ट्र के रूप में हम अब तक विकसित नहीं हो पाएं है; धन का अर्जन गलत नहीं, गलत तरीके से धन का अर्जन व् संचय अपराध है और अपने महत्व व् प्रभाव के लिए धन को दोष देना मूर्खता होगी।
, राष्ट्रीय नेतृत्व का यह धर्म है की वह समाज के सभी लोगों को अपने ही परिवार का अंग समझे और राष्ट्र को अपना घर;
किसी भी परिवार के मुखिया का यह दायित्व होता है की वह न केवल परिवार के वर्त्तमान आवश्यकताओं की पूर्ती करे बल्कि अपने प्रयास से एक बेहतर भविष्य का आधार भी बनें; देश के व्यवस्था के सूत्रधारों को यह चाहिए की वो अपने प्रयास से समाज और सरकार के बीच ऐसा समन्वय व् सम्बन्ध बनाएं जिससे दोनों ही एक दुसरे की शक्ति बन सकें, पर जब शाशन तंत्र पर राजनीति हावी हो जाए तो शाशन तंत्र अपने प्रभाव के दुरूपयोग द्वारा समाज को सत्ता पर आश्रित बनाने के हर संभव प्रयास करती है। ...और तब, जिन्हें समाज का पोषण करना था वो ही समाज के शोषण के कारन बन जाते हैं।
किसी भी सन्दर्भ में परिदृश्य दृष्टिकोण द्वारा ही निर्धारित होता है, फिर विषय राजनीति ही क्यों न हो। इसलिए, जिस राजनीति को देश की व्यवस्था का संसाधन होना था आज अगर वह देश के लिए समस्या का पर्याय बन गयी है तो गलती राजनीती की नहीं बल्कि समाज द्वारा चयनित राजनेताओं का स्तर है और इसलिए, व्यवस्था परिवर्तन के किसी भी सार्थक प्रयास की शुरुआत भी यहीं से करनी पड़ेगी।
समाज को व्यवस्था में अपने लिए ऐसे प्रतिनिधियों को चुनना पड़ेगा जिनके पास समस्याओं की उचित समझ, संभावनाओं को ढूँढ पाने वाली परिपक्व सोच और प्रयास का साहस हो तभी सरकारी योजनाएं भी वास्तविकता की आवश्यकताओं पर आधारित, व्यापक रूप से प्रभावशाली और सही अर्थों में सार्थक होंगें, अन्यथा, शाशन तंत्र का प्रयोग भी राजनीति अपने प्रचार के काम के लिए ही करती रहेगी।
हमें ऐसी व्यवस्था बनानी पड़ेगी जहाँ प्रयास की निष्ठां को प्रोत्साहन द्वारा प्रेरित किया जाए न की रिश्वत के प्रलोभन द्वारा; इसके लिए सामाजिक जीवन के कई आयामों में एक साथ सुनियोजित, संतुलित व् समन्वित प्रयास की आवश्यकता होगी, अन्यथा, प्रयास ही समस्याओं को और अधिक जटिल बना देगा।
अपनी अल्प आयु में ही स्वामी विवेकानंद जी ने अपने कर्मों द्वारा इस संसार में ऐसा प्रभाव छोड़ा की उनकी शरीर के मृत्यु के लगभग एक सौ चौदह वर्षों बाद भी वो हमारे बीच प्रेरणा बनकर जीवित हैं। ऐसे तो वर्षों से हम उनके जयंती पर औपचारिकताएं निभाते आये हैं पर जिस भारत के उत्थान में उन्होनें युवाओं की भूमिका को इतना महत्वपूर्ण बनाया था आज क्या उसी भारत को अपने युवाओं पर विश्वास नहीं रहा, तभी, अनुभव की गलतियों की कीमत एक युवा देश अपने नयी संभावनाओं से चूका रहा है।
आखिर कब तक हम एक राष्ट्र के रूप में अपने आप को औपचारिकताओं से ऐसे ही मूर्ख बनाते रहेंगे, क्यों न अब हम अपनी वास्तविकता को स्वीकार करें और अपने युवा वर्ग के कन्धों को राष्ट्र के नेतृत्व के लिए विश्वास करें ; परिस्थितियां जितनी बुरी हो सकती थीं आज है, ऐसे में, खोने का क्या है; क्या पता प्रयास की यही दिशा शायद एक कृतज्ञ राष्ट्र का स्वामी विवेकानंद को सही अर्थों में श्रधांजलि हो, क्या आपको ऐसा नहीं लगता ?"
_किसी भी देश का इस्लामीकरण कैसे होता हैं ?
🇸🇦 _१. मुस्लिम आबादी दर हर गैर इस्लामिक देश में गैर मुसलमानों की तुलना में दुगनी रफ़्तार से बच्चे पैदा करते हैं | जिससे अर्थव्यवस्था गड़बड़ा जाती हैं |_
🇸🇦 _२. मुस्लिम आबादी पढाई लिखाई में कोई रूचि नहीं रखती | अंग्रेजी, गणित, विज्ञानं आये ना आये कुरान जरुर बच्चों को पढाई जाती है |_
🇸🇦 _३. मुस्लिम जो व्यवसाय करते हैं वो भी समाज हित के नहीं होते | जैसे बड़े व्यवसायी जो टेनरी चलाते हैं उसकी गंदगी नदियों में बहाते हैं जिस से पानी में आर्सेनिक जैसे जहर की मात्रा बढती जाती हैं |_
🇸🇦 _४. मुस्लिमो की गोस्त की दुकाने आसपास बिमारियां लाती हैं | जानवरों की हत्या अन्न-जल संकट का प्रमुख कारण हैं |_
🇸🇦 _५. जहाँ मुस्लिम अधिक होते हैं वह संगठित तरीके से रहते हैं और आसपास किसी गैर मुस्लिम को बसने नहीं देते | १०० हिन्दुओ के बीच एक मुस्लिम रह सकता हैं पर १०० मुसलमानों के बीच हिंदू नहीं रह सकता |_
🇸🇦 _६. मुस्लिम संगठित होने की वजह से गैर मुसलमानों से बेवजह झगडा करते हैं, अगर आस पास उनकी संपत्ति होती हैं तो उस पर कब्ज़ा कर लेते हैं जैसा की कश्मीर में हुआ |_
🇸🇦 _७. परिवार में अधिक सदस्य होने से और अशिक्षित होने से छोटे संगठित अपराध करते हैं | जैसे की अनाधिकृत कब्जे, बिजली चोरी, नशीले पदार्थो का धंधा करते हैं |_
🇸🇦 _८. ये छोटे अपराधी जल्द ही बड़े अपराधियों से जा मिलते हैं और ये बड़े अपराधी भी कभी ना कभी उन्ही मुस्लिम बस्तियों से निकल कर आये होते हैं | टाइगर मेनन और दाउद इब्राहीम कासकर और ना जाने कितने अपराधी ऊपर उठे |_
🇸🇦 _९. बड़े अपराधी देश की अर्थ व्यवस्था को बिजली चोरी या अतिक्रमण की तरह छोटा मोटा नुक्सान नहीं पहुचाते बल्कि हजारो करोडो का नुक्सान पहुचाते हैं | जैसे स्टाम्प घोटाले व हवाला कांड का प्रमुख अब्दुल करीम तेलगी १०,००० करोड़ व हसन अली ३६,००० करोड़ इत्यादि रकम कमाते हैं और इसे इस्लामिक मुल्को से गैर इस्लामिक देशो में आतंक हत्या के लिए हथियार प्रशिक्षण पर प्रयोग किया जाता हैं |_
🇸🇦 _१०. वे मुस्लिम जो काफ़िर देश में किये गए अपराध लूट पाट को धार्मिक कृत्य मानते हैं वे और भी तरीको से मुस्लिम लड़के गैर-इस्लामिक देश में जंग के लिए तैयार करते हैं | उनमे से एक सरलतम रास्ता जेहाद का हैं काफ़िर का क़त्ल हर मुस्लिम पर अनिवार्य हैं |_
🇸🇦 _११. कुरान पढ़े बेरोजगार लड़के जेहाद के लिए आसानी से तैयार हो जाते हैं बल्कि अपना सौभाग्य समझते हैं और इस्लामिक देशो में मौजूद अपने रहनुमाओ की मदद से जेहादी बनते हैं |_
🇸🇦 _१२. ये जेहादी देश में समय समय पर बम विस्फोट सामूहिक हत्याए वा दंगे करते हैं | दंगो को कुछ लोगो की शरारत कहा जाता हैं जबकि बम विस्फोट पर कहा जाता हैं की इसका इस्लाम और मुसलमानों से कोई लेना देना नहीं जबकि दोनों ही जेहाद अर्थात धर्मं युद्ध का हिस्सा हैं |_
🇸🇦 _१३. यदि गैर इस्लामी कौमे संगठित होकर धर्मं युद्ध का जवाब देती हैं तो मुस्लिम जोर जोर से हल्ला करना चालु करते हैं के हम पर जुल्म और अत्याचार हो रहा हैं, हम सुरक्षित नहीं इस मुल्क में |_
🇸🇦 _१४. मुसलमानों के संगठित होने की वजह से और हमलावर होने की वजह से नास्तिक राजनैतिक दल मुसलमानों का पक्ष लेने में ही अपनी भलाई समझते हैं जैसे की भारत में कांग्रेस, समाजवादी, कमुनिस्ट दल इत्यादि |_
🇸🇦 _१५. क्योंकि इन दलों का धर्म से, संस्कृति से कोई लेना देना नहीं होता और मुस्लिम समर्थन मिलने पर इन्हें सत्ता का और लालच आ जाता हैं ये मुस्लिम आबादी के बढने में और सहायता करते हैं उनके हर काम में चाहे वो गलत हो या सही, साथ देते हैं |_
🇸🇦 _१६. बांग्लादेश से आये ४ करोड़ मुस्लिमो को कांग्रेस ने ना केवल बसाया अपितु उनको जिस कानून (आई. ऍम. टी. डी. एक्ट) की सहायता से निकाला जा सकता था उसे भी खत्म कर दिया |_
🇸🇦 _१७. आतंकवाद के खिलाफ कानून (पोटा एक्ट) बनाना तो दूर रहा, जो कानून था उसको भी खत्म कर दिया |_
🇸🇦 _१८. मुस्लिम नाराज ना हो इस लिए जेहादियों को उच्चतम न्यायालय से दी हुयी को सजा को भी रोके रखते हैं | जैसा की कांग्रेस ने अफजल गुरु की फ़ासी रोक रखी हैं |_
🇸🇦 _१९. गैर मुस्लिमो के इस कथित सेकुलर वर्ग की इस मूर्खता से मुस्लिम खुश होते हैं और और तेजी से आबादी बढ़ाने का उपाए सोचते हैं|_
🇸🇦 _२०. इन उपायों में गैर मुस्लिम सम्प्रदाये की लड़कियों को प्यार के झूठे जाल में फसाना होता हैं और उनसे बच्चे पैदा करने होते हैं इन्हें लव जेहादी कहते हैं |_
🇸🇦 _२१. अगर ये लव जेहादी ३-४ हिंदू या ईसाई लडकियो को जिन्हें ये वर्गला-फुसला के भगा लाए थे, खिला (वहन) नहीं कर पाते हैं, तो भोग करने के बाद किसी अधेड उम्र के मुस्लिम को बेच देते हैं अधिकतर वह मुस्लिम बदसूरत ही होते हैं इसीलिए उन्हें इस उम्र तक औरते नहीं मिल पाती |_
🇸🇦 _२२. मुस्लिम आबादी बढ़ने के साथ-साथ छोटे-छोटे इस्लामिक क्षेत्रो का भी निर्माण करते हैं | जैसे हिंदू इलाके में अधिक दामों पर कोई एक इमारत खरीद कर लेते हैं और फिर वहा बड़े मुस्लिम परिवार बसा दिए जाते हैं |_
🇸🇦 _२३. ये मुस्लिम लोग आसपास लोगो से आये दिन झगडा करते हैं और धीरे धीरे पडोसियो को अपने घर सस्ते दामों पर किसी मुस्लिम को ही बेचने को मजबूर कर देते हैं इस प्रकार इनकी एक मकान पर खर्च की गयी अतिरिक्त रकम से कही अधिक मुनाफा निकल आता हैं |_
🇸🇦 _२४. मुसलमानों की मस्जिद अक्सर शहर के बीचों-बीच होती हैं ताकि किसी तरह की व्यवस्था बिगडने पर मीनारो की आड़ से पुलिस को देख सके | और जरुरत पड़ने पर खुद पुलिस व्यवस्था पर हमला कर सके |_
🇸🇦 _२५. छोटी मुस्लिम बस्तियाँ ना केवल संगठित होती हैं अपितु हमलावर लोगो से भरी होती हैं | हर घर में देसी तमंचे मिलना सामान्य बात होती हैं |_
🇸🇦 _२६. भारत में नव-निर्मित मुस्लिम बस्तियाँ अक्सर या तो राजमार्गो के किनारे होती हैं या ट्रेन लाइनों के किनारे | राजमार्गो के किनारे बनी मजारो में जिनमे से अधिकतार कुत्ते बिल्लियो की या खाली ही होती हैं हथियार छुपाये रहने की संभावनाओ से इंकार नहीं किया जाता |_
🇸🇦 _२७. यदि गैर-इस्लामिक देश के अगल-बगल में इस्लामिक देश हैं तो समय-समय पर इस्लामिक देश हमला करते रहेंगे जैसा की भारत का पडोसी पाकिस्तान करता रहता है |_
🇸🇦 _२८. ऐसे पडोसी इस्लामिक मुल्क प्रत्यक्ष जीत ना पाने की स्थिति में छदम युद्ध प्रारंभ करते हैं | गैर इस्लामिक मुल्क में मौजूद मुस्लिमो की मदद लेते हैं इस्लामिक एकता के नाम पर |_
🇸🇦 _२९. आबादी में ३० प्रतिशत तक पहुचने पर समय आ जाता मुस्लिमो के लिए के वो काफ़िर देश पर कब्ज़ा कर ले क्यों की संगठित ३०% मत किसी भी लोकतान्त्रिक देश में काफी है सरकार बनाने के लिए या ग्रह युद्ध के माध्यम से कब्ज़ा करने के लिए |_
🇸🇦 _३०. इस सम्भावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता के मुस्लिम पडोसी देश के साथ मिल जाये और बाहर से हमले के समय अंदर से भी हमला कर दे | युद्ध के समय रेल लाइन उखाड दे, तेल पाइपलाइन तोड़ दे राज मार्ग जाम कर दें इत्यादि ताकि सेना को समय पर रसद ना मिले और वो हार जाये |_
🇸🇦 _३१. सेना के हारते ही विदेशी मुस्लिम गैर-इस्लामिक देश में आ जायेंगे और योगदान के अनुसार देसी मुस्लिमो को सत्ता में हिस्सेदारी दे देंगे क्यों की उनकी जीत में उनका भी बड़ा योगदान होगा |_
🇸🇦 _३२. देश को दारुल हरब से दारुल इस्लाम घोषित कर दिया जायेगा | यानि गैर इस्लामिक देश इस्लामिक देशो में से एक हो जायेगा | गैर इस्लामिक देश में क्या क्या होता हैं ये हमें लिखने की जरुरत नहीं फिर भी हम आगे के लेख में बताएँगे |
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🇸🇦 _लेख समीक्षा : आप उपरोक्त लेख पढ़ कर समझ ही चुके होंगे की भारत इस्लामिक देश बनने की कगार पर हैं | सबसे मूल करण मुस्लिम आबादी का हिन्दुओ ईसाइयों और अन्य सभी से दोगुनी रफ़्तार से बढ़ना हैं | इसका दूसरा प्रमुख कारण है भारत का फर्जी सेकुलरवाद जो भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की ओर अग्रसर हैं |आप ये कहे सकते हैं के घोटाले अपराध भ्रष्टाचार में तो हिंदू भी आंगे हैं तो मुस्लिमो को दोष क्यों देना |_
🇸🇦 _हमारा उत्तर हैं के हिंदू भ्रष्टाचार कर के हथियार नहीं खरीदते, ना ही उन हथियारों से वो पाकिस्तान में बम विस्फोट करते हैं ना ही राष्ट्र का ख्याल ना कर के आबादी बढ़ाते हैं |_
🇸🇦 _मुस्लिम हर कदम अपनी कौम को ध्यान में रख के उठाते हैं और उनका अंतिम लक्ष्य होता हैं देश का इस्लामीकरण जबकि भ्रष्ट हिंदू को हिंदू राष्ट्र से कोई लेन देना नहीं
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विश्व की सबसे बड़ी 5 अफवाहें , जो भारत में सबसे ज्यादा फैलाई गई हैं....
1- हिन्दू मुस्लिम भाई भाई होते हैं
2- भारतीय मुस्लिम देशभक्त होते हैं
3- कांग्रेस ही देशभक्त पार्टी है
4- कानून सबके लिए एक है
5- मिडिया भारतीय लोकतंत्र का चौथा स्तम्ब है , और सही न्यूज़ दिखाती 






कालेधन को सफेद करते कैमरे में कैद हुए 425 बैंकों के 200 बैंक अधिकारी !

कालाधन को जुगाड़बाजी के जरिए सफेद में बदलने के खेल में शामिल 425 बैंकों के 200 से भी अधिक अधिकारी स्टिंग के फंदे में उलझ गए हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर खुद आईबी ने बीते करीब 20 दिन के दौरान 625 बैंकों का स्टिंग किया। बताते हैं कि इस स्टिंग ऑपरेशन में 425 बैंकों में कालाधन केसफेद बनाने की प्रक्रिया कैमरे में कैद हुई। इसमें 200 से अधिक बैंक अधिकारी, हवाला कारोबारी, नेता और व्यापारी शामिल हैं।
बीते रविवार को पीएमओ ने स्टिंग से जुड़ी सीडी और इससे संबंधित आईबी की रिपोर्ट के अध्ययन के बाद इसे भावी कार्रवाई के लिए वित्त मंत्रालय को भेज दिया है। नोटबंदी के कारण पहले से जारी अफरातफरी और न बढ़ जाए, इसके लिए इनके खिलाफ कार्रवाई फरवरी महीने के बाद शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
माना जा रहा है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस खुलासे को सार्वजनिक करेंगे। सूत्रों ने बताया कि 8 नवंबर को नोट बंदी के फैसले के बाद व्यापक मात्रा पर पकड़ी जा रही नकदी से सतर्क पीएमओ, गृह मंत्रालय ने आईबी को नवंबर के तीसरे हफ्ते की शुरआत में बैंकों की स्टिंग के मिशन पर लगाया। इस क्रम में आईबी की कई टीमों ने देश भर के करीब 600 बैंकों का स्टिंग किया। इस ऑपरेशन में 425 बैंकों में काला धन को सफेद बनाने की हेराफेरी सामने

सरकार ने जारी किया अलर्ट: तुरंत अपने स्मार्टफोन से हटाएं ये चार एप्स, ‘दुश्मन’ देश कर रहा है जासूसी!

केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से अलर्ट जारी कर कहा गया है कि अगर ये चार एप्स आपके फोन में हैं तो तुरंत इन्हें हटा दिजिए। सरकार ने कहा है कि पाकिस्तानी एजेंसियां भारत में मोबाइल एप में मालवेयर वायरस भेजकर जासूसी कर रही हैं। 
 मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि टॉप गन (गेम एप), एमपीजुंक (म्यूजिक एप), बीडीजुंकी (वीडियो एप) और टॉकिंग फ्रॉग (एंटरटेनमेंट एप) को सभी भारतीय तुरंत अपने स्मार्टफोन से हटा दें। क्योंकि पाक एजेंसियां भारत में इन मोबाईल एप्लिकेशन के जरिए जासूसी कर रही हैं।
गृह मंत्रालय को इस जानकारी की पुख्ता रिपोर्ट मिलते ही देश के सभी सुरक्षा बलों और राज्यों की खुफिया एजेसियों को पत्र लिखकर कुछ विशेष मोबाइल एप डाउनलोड नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा पूर्व सैनिकों को नौकरी के नाम या वित्तीय सहायता की आड़ में जासूसी के प्रयास में फंसाने के मामले में देशभर से सात मामले सामने आने के बाद इसे लेकर भी अलर्ट रहने के निर्देश हैं।
देश में कोई भी मोबाइल बैंकिंग ऐप सुरक्षित नहीं  –
एक तरफ केंद्र सरकार देश में मोबाइल फोन के जरिए डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है, वहीं चिपसेट मेकर कंपनी क्वालकॉम के वरिष्ठ निदेशक उत्पाद प्रबंधन एसवाई चौधरी ने कहा है कि, ‘आपको यह जानकर हैरानी होगी कि दुनिया में बैंकिंग या वॉलेट एप द्वारा हार्डवेयर सुरक्षा का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में सबसे अधिक लोकप्रिय डिजिटल भुगतान एप द्वारा भी हार्डवेयर स्तर की सुरक्षा का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। कंपनी का कहना है कि भारत में कोई भी ई-वॉलेट और मोबाइल बैंकिंग ऐप्लिकेशन हार्डवेयर लेवल सिक्योरिटी का इस्तेमाल नहीं करता है।

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क्या कहेंगे ? 

जयललिता अंतिमसंस्कार में जहाँ PM मोदी स्वजनों को सांत्वना दे रहे है, ठीक उसी समय कोंग्रेसी नेताओ (राहुल गन्दी व् गुलाम नबी) वहां दुखी स्वजनों पर कुटिलता से हँस रहे है :
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गौर से देखों .. 

बाबासाहेब आंबेडकर को tribute देने पहुंचे दो नेता : 

A. एक नेता बाबा साहेब का सिर्फ इस्तेमाल करती है !
B. दूसरे नेता सही मायने में बाबासाहेब को रिस्पेक्ट देते है !

आपके मुताबिक क्या सही है - A या B ?

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5 दिन में 1000 गैरकानूनी इमारतों को गिरवा दिया .. !
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ठाणे म्युनिसिपल कमिश्नर "संजीव जयसवाल" ने शहर की "सफाई अभियान" के तहत पिछले 5 दिनों में करीब 1000 गैरकानूनी इमारतों को गिरवा दिया। इनमें शराब की दुकानें, हुक्का पार्लर और कई बहुमंजिला की जगह शामिल है जिसे सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर बनाया गया था। 

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2002 में भोपाल के एक थिएटर में राष्ट्रगान शुरू हुआ । 
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दर्शकों में से एक "श्याम नारायण चौकसी" खड़े हो गए, बाकी लोग उसकी मजाक उड़ाने लगे,जोर जोर से हंसने लगे, किसीने तो कागज के टुकड़े भी इसके सर पर मारे ! लेकिन वो खडे रहे ।
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वहां से निकलकर वो सुप्रीम कोर्ट गए, 14 साल तक राष्ट्रगान के सम्मान की लड़ाई लड़ी ! और आज वो जीत गए । आज सुप्रीमकोर्ट ने पूरे देश में यह फैसला अनिवार्य किया :
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"राष्ट्रगान बजेगा, राष्ट्रध्वज दिखेगा, खड़ा होना पड़ेगा"
कालेधन के अंबार के बीच राजनीति उन्होंने देश की कमान संभाली और देश की अर्थव्यवस्था की सच्चाई से वे सन्न रह गए :- 

देश के बैंक डूबने जा रहे थे,
 कांग्रेस के समय जो 14 लाख करोड़ का ऋण बड़े औधोगिक घरानों को बांटा गया था वो डूब चूका था और बैंक दिवालिया होने की कगार पर थे। देश में निर्यात और आयात के सभी आंकड़े फर्जी थे। निर्यात के नाम पर कालाधन सफ़ेद हो रहा था या देश के खनिज सस्ते दामो या चोर रास्ते से बेचे जा रहे थे और आयात घोषित आंकडो से दुगना था। 

देश में रिजर्व बैंक द्वारा जारी वैध मुद्रा से दो गुने जाली अथवा एक नंबर के दो या तीन नोटों का जाल फेला हुआ था। नोटों को डॉलर में बदल देशद्रोहियों ने रूपये का अन्तर्राष्ट्रीय मूल्य गिरा दिया था और पूरा देश विभिन्न नशे, घटिया और मिलावटी सामन के साथ ही सट्टे, लॉटरी, जुए, पॉर्न जीवन शैली की और धकेल दिया गया था। कोंग्रेस पुरे देश को घोर अंधकार में धकेल चूका था। 

.कांटे को निकालने के लिए कांटे की जरूरत होती है, इसलिए मोदी ने पिछले दो सालो में पूरी तैयारी कर नोटबंदी का दांव खेला। देश में मोजुदा असली नकली करेंसी के कारण कालाधन 25 से 30% तक है और नकदी के खेल से और 25 % कालाधन पैदा हो रहा है। एक वार में पूरे देश को सड़को पर खड़ा कर दिया और जनता को हर कदम पर अपने साथ रखा है ताकि ब्लैकमनी सिंडीकेट उन्हें दबाब में न ले पाए। 
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मोदी जानते थे कि कालेधन के घाघ खिलाडी बेंको में नयी मुद्रा आते ही अपने खेल शुरू कर देंगे इसीलिए पहले एक माह में नई करेंसी की धीमी आपूर्ति की गयी और यह 30 दिसंबर तक तेज भी नहीं होने वाली। -hardik sawani
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100 करोड़ रूपये की नोट्स जब्त की गई ..बॉक्स पर बॉक्स... पूरी ट्रक भर के नोटों जब्त हुई !! @चेन्नाई

कुछ करप्ट बैंक मैनेजरों और नेताओं ने लूंट मचा रखी है :
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नई नॉट में ऐसा क्या जादू है .. कि जहाँ जहाँ थोकबंद नॉट होती है वहाँ वहाँ रेड पड जाती है !!


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ये देखिए .. 

अब इस देश को कौन बचा सकता है ? प्रधानमंत्री अकेला क्या करेगा ?


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इस देश में ईमानदार वही है जिसके टेबल पर पैसा नहीं है । जिनके टेबल पर पैसा नहीं वो सही टाइम पर ऑफिस छोड़ देते हैं, और वही जब टेबल पर माल आने लगता है तो 8 बजे शाम तक जनसेवा करते हैं।
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इस देश में लोगों को पुलिस भ्रष्ट तभी तक लगती है जब तक अपना बेटा दारोगा में भर्ती नही हुअा। इस देश में टीचर तभी तक निट्ठले लगते हैं जब तक अपनी बेटी टीचर नही बनी है।
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बुरा न माने जैसे जर्मन जन्म से ही योद्धा, जापानी जन्म से नियम मानने वाले, वैसे ही हम जन्म से भ्रष्ट होते है। भ्रष्टता हमारे ब्लड और संस्कार में ही है, ये मात्र कानून बनाने से नहीं जाने वाला।
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ज्वेलर्स को 8 तारीख को मौका मिला उन्होंने खूब बनाया...
अब बैंक मैनेजर की बारी है।
शायद- कल किसी इन्कम टैक्स वाले की बारी हो।
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हम भारत माता की जय, आज़ादी... आज़ादी.. जय-भीम, समाजवाद, लोहिया वाद की जय बोलकर अपने अपने हिस्से का देश लुट रहे हैं। कल तक महँगी प्याज होने पर लोग कहते थे की देश की करोडों जनता नमक-प्याज खाकर जीवन जीती है, और आज वही गरीब-जनता ना जाने कौन सा धन जमा कर रही है.?
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नोट बंदी अपने उद्देश्य में सफल हो या असफल... इस बात पर तो मुहर लग गयी की 100 में 90 बेईमान, फिर भी मेरा भारत महान। नहीं , नहीं मुझे कुछ अपवाद मत दिखाएँ।
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मैंने घर-घर में देखा है औरत जब 4 बच्चों को दूध देती है, तो- अपने बेटे की गिलास में थोड़ी ही सही, पर मलाई अधिक डालती है। भाई अपने सगे भाई को पुश्तैनी जमीन एक हाथ टुकड़ा भी अधिक देने को राजी नही होता। कितना भी कमाओं पर नज़र बाप के पेंशन पर जरुर रहेगी कि- कहीं बेटी को कुछ दे तो नहीं रहे..?
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बुरा ना मानें...
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इस देश में बेईमानी की पहली पाठशाला ही परिवार ही है।
हम चाहते की लंगोट पहनने वाला गाँधी पड़ोस में पैदा हो...
और- अपने घर गुलाब लगाने वाला नेहरु। 11 लाख का कोट देखने वालों को अपने जन्मदिन पर करोड़ों देकर सिने तरिकाअों का अपने पैतृक-गाँव में ठुमके लगवाना नहीं दिखाई देगा..।
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इस देश में ही 42,000 ₹ का मोबाइल और 5,000 ₹ के स्वेटर पहनने वाले मुख्यमंत्री के पैर में चप्पल देखकर... आठ आठ आँसू रोकर ईमानदारी की दुहाई देने वाले पाखण्डी भी हैं। पर- सौ टके का सवाल ये पाखंडी-मुर्दे इतिहास नहीं मानते, JNU कैंपस में बनाते हैं। फ्री सेक्स वाली सोसाइटी जहाँ वातानुकूलित कमरे में बैठ कर ट्विटर पर मजदूर दिवस की बधाई दी जाती है।
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वास्तव में जब मैं कहता हूँ कि- आज़ादी हम पर थोपी गयी थी हम आजाद होने लायक नहीं थे..! तो आपको बुरा लगता है....??

पर- उस हावड़ा-पुल को बुरा नहीं लगता है जो बना तो था अंग्रेजों के समय और आज भी चल रहा है। ये देखकर की सादी साड़ी में सादगी का ढोंग रचने वाली दीदी के शहर का पुल कैसे अल्पायु में भरभरा कर गिर जाता है....??
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भरभरा रहा मनुष्य ऐसे ही इस देश में सदियों से । वैसे किताबें तो खूब लिखी गयी पर किताबें जीवन में उतरी हैं क्या...??
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अपनी बहनों को सात तालों में छुपा कर.. दूसरों की बेटी बहनों को घूरने (X-Ray करने) वाला देश है। इस देश के रग रग में भ्रष्टता है, चाहे वो नोट बंदी में चीखे या न चीखे...
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बस-

ऐसे में एक ईमानदार दिखाई दे रहा है... और- इस कुरुक्षेत्र में वो है बर्बरीक...
जिसने.... अपने ही हाथों अपनी गर्दन काटकर (भ्रष्टाचार मुक्त करने का संकल्प लेकर) खूब तमाशा देख रहा है...🤔
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उस बर्बरीक ने सबको नंगा करके रख दिया है....
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गैरों को....
अपनों को....
मुझको, आपको....
सबको...
वंदेमातरम्..!

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सेना के जूते की दास्तां : 
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जयपुर की कंपनी सेना के लिए जूते बनाती है, फिर वह जूते इस्राइल को बेचते थे, फिर इजराइल वहीँ जूते भारत को बेचते थे, और फिर वे जूते भारतीय सैनिकों को नसीब होते थे ! भारत एक नंग जूते के Rs. 25,000/- देते थे और यह सिलसिला कोंग्रेस द्वारा कई सालो से चल रहा था ।
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जैसे ही मनोहर पर्रिकर को यह पता चला, आग बबूला हो गए .. जयपुर कंपनी के CEO को मिले, कारण पूछा, तो जवाब मिला : "भारत को डायरेक्ट जूते बेचने पर, भारत का सरकारी तंत्र सालो तक पेमेंट नहीं देती थी, इसलिए हम दूसरे देशों में एक्सपोर्ट करने लगे"
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मनोहर पर्रिकर ने कहा : "एक दिन, सिर्फ एक दिन भी पेमेंट लेट होता है तो आप मुझे तुरंत कॉल कीजिए, बस, आपको हमे डायरेक्ट जूते बेचना है, आप प्राइस बताएं"
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और इस तरह आखिर पर्रिकर ने वहीँ जूते सिर्फ 2200/- में फाइनल किया !! सोचिए ... जूते के 25,000/- देकर कोंग्रेस ने सालों तक कितनी लूंट मचा रखी थी !!
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Via Hardik Savani 

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