Wednesday, 14 November 2018


भारतीय मूल की पहली हिंदू सांसद तुलसी जिन्होंने गीता हाथ में लेकर ली थी शपथ,
लड़ सकती हैं अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव
तुलसी 2013 से अमेरिका के हवाई राज्य से हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेट सांसद हैं। वे अमेरिकी संसद में जगह बनाने वाली पहली हिंदू भी हैं। मोदी से प्रभावित भारतवंशी अमेरिकी सांसद तुलसी गबार्ड 2020 में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने की योजना बना रही हैं। उनके करीबी सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया है।माना जा रहा है कि उनकी दावेदारी पर क्रिसमस के बाद फैसला लिया जा सकता है।
लॉस एंजिलिस में  एक कार्यक्रम के दौरान भारतीय मूल के अमेरिकी डॉक्टर संपत शिवांगी ने तुलसी का परिचय बताते हुए उन्हें 2020 में राष्ट्रपति पद का दावेदार बताया। इस पर दर्शकों ने काफी देर तक तालियां बजाईं। , खुद तुलसी ने उम्मीदवारी पर कोई बयान नहीं दिया।
- तुलसी गबार्ड पहले ही भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों के बीच लोकप्रिय हैं। भारतीय-अमेरिकियों का समूह यहूदी अमेरिकियों के बाद देश का सबसे प्रभावशाली और अमीर ग्रुप माना जाता है। इसी वजह से वे अमेरिका के 50वें राज्य हवाई से लगातार जीत दर्ज करती आ रही हैं।
- चार बार की सांसद तुलसी भारत अमेरिका के संबंधों की बड़ी समर्थक हैं। मोदी पीएम बनने के बाद जब यूएस गए थे तब तुलसी ने उनसे मुलाकात की थी। वो पीएम मोदी के विचारों से काफी प्रभावित भी हैं। सांसद बनने के बाद तुलसी पहली सांसद थीं, जिन्होंने भगवत गीता के नाम पर शपथ ली थी।
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भारत के शक्तिशाली प्रधानमंत्री का
पूरी दुनिया सम्मान कर रही है और
भारत की अदालत उससे राफेल का हिसाब मांग रही हैं..?
यह शर्मनाक है
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों ने अब देश की जनता में जजों की नीयतों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इतने वर्षों की सुनवाई के बाद भी कोर्ट ने राममंदिर का फैसला 2019 पर टाल दिया. तो वहीँ  वहां महिलाओं को समानता की बात करते हुए सबरीमाला मंदिर पर फैसला तुरंत सुना दिया. लेकिन जब मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश की बात आयी तो याचिका को ठुकरा दिया.
 कश्मीरी पंडितों के इंसाफ पर कोर्ट ने कहा ‘अब तो दसियों साल बीत गए अब सबूत नहीं मिलेंगे, और याचिका ठुकरा दी’ लेकिन पीएम मोदी के खिलाफ जिन्हे 2002 में क्लीन चिट मिल चुकी थी उसकी दुबारा जाँच की याचिका को तुरंत मंज़ूर कर लिया
 .इससे पहले कोर्ट ने कहा था उनके पास अभी बिलकुल भी वक़्त नहीं है.अब गुजरात दंगों पर नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट आखिर मिल कैसे गयी, इस पर मी लार्ड सुनवाई करेंगे ?
 5 अक्टूबर 2017 को हाई कोर्ट ने कहा था की गुजरात दंगों की दोबारा कोई जांच नहीं होगी. याचिका में साल 2002 में हुए गोधरा काण्ड के दंगों के सम्बन्ध में राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी व अन्यों के खिलाफ विशेष जांच दल द्वारा दी गई क्लीन चिट को बरकरार रखने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी.
गोधरा काण्ड के आरोपियों मोदी व अन्यों के खिलाफ यह याचिका दिवंगत पूर्व सांसद अहसान जाफरी की पत्नी जाकिया और सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने मोदी व अन्यों को दी गई क्लीन चिट को बरकरार रखने के मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ आपराधिक पुनर्विचार याचिका दायर की थी.जिसे ठुकरा दिया गया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अब मंज़ूर कर दिया है.
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विवेक अग्निहोत्री 250 करोड़ की लागत से
दिखाएंगे हिन्दुओं का सच्चा इतिहास!
 ‘अर्बन नक्सल्स’ किताब लिखकर वामियों की नाक में दम करने वाले ख्यात लेखक विवेक अग्निहोत्री ने देश को नए इतिहास से रूबरू करवाने का बीड़ा उठाया है। वे 250 करोड़ की लागत से तीन फिल्मों की सीरीज बनाने जा रहे हैं।
  विवेक तीन भागों में बनने जा रही फिल्म बनाने से पहले एक रिसर्च पैनल बनाने जा रहे हैं। इस पैनल में बड़ी संख्या में स्कालर्स, इतिहासकार, पुरातत्ववेत्ता, खगोल शास्त्री और मानव विज्ञानी शामिल किये जाएंगे। विवेक का कहना है कि ये प्रोजेक्ट उनके जीवन का उद्देश्य बन गया है। वे बहुत जल्द ये प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहे हैं।
 यदि ये प्रोजेक्ट सटीक ढंग से आगे बढ़ा तो उनकी कहानियों में भोजशाला सरस्वती मंदिर अवश्य शामिल किया जाएगा।फिल्म की कहानी का आधार में वेदों, रामायण, महाभारत, सिंधु घाटी की सभ्यता से मिली जानकारियां होंगी।  ये एक ऐसा प्रोजेक्ट होगा जिस पर अब तक ऐसी शैली में काम नहीं किया गया है। यदि इसे आज शुरू किया जाए तो सन 2023 तक ये पूरा हो सकता है।
 पहले भाग में ब्रम्हा से बुद्ध के अध्याय , इसके बाद वाले भाग में कहानी बुद्ध से ब्रिटिश राज तक जाएगी। इसके बाद आखिर हिस्से में कहानी ब्रिटिश राज से आज के बुलेट ट्रेन के युग तक आएगी। स्पष्ट है कि पौराणिक काल और मध्य युगीन इतिहास अलग भागों में दिखाए जाएंगे।

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 देशभर की अदालतों में भ्रष्टाचार ने जड़ें जमाई
हैदराबाद हाई कोर्ट के एक अतिरिक्त जिला जज के घर पर ACB की टीम ने बड़ी छापेमारी की है. हैदराबाद में चार स्थानों पर, तेलंगाना के सिरीसिल्ला जिले में तीन स्थानों पर और महाराष्ट्र में दो स्थानों पर छापेमारी की। जज साहब के घर पर अकूत दौलत देख जांच अधिकारियों की भी आँखें फटी रह गयी.जिसमें जज की करीब तीन करोड़ रुपये की संपत्ति सामने आई है।
एसीबी ने रंगा रेड्डी जिले के 14वें अतिरिक्त जिला जज वैद्य वारा प्रसाद के खिलाफ हैदराबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था ,एसीबी के बयान के अनुसार, जज और उनके पारिवारिक सदस्यों के कई बार विदेशी दौरे करते हुए वहां पर भारी भरकम खर्च करने के भी सबूत मिले हैं।
 ये कोई इकलौता मामला नहीं है, बल्कि कुछ महीनों पहले दिल्ली हाई कोर्ट के जज को भी घूस लेते हुए गिरफ्तार किया गया था. यही नहीं देशभर की अदालतों में इसी तरह से भ्रष्टाचार ने जड़ें जमाई हुई है और न्यायपालिका में बैठे ऐसे जजों के खिलाफ एक्शन लेने की सख्त जरूरत है
. जिस तरह से न्यायपालिका तानाशाही पर उतर आयी है, उससे ये भी लगने लगा है कि बिना राष्ट्रपति के दखल के शायद अदालतों से भ्रष्टाचार की सफाई नहीं हो पाएगी.
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गांधी परिवार और दूसरी पार्टियों के अन्य नेताओं में एक अंतर देखा गया है, वह यह कि सारी स्वायत्तशासी संस्थाओं से हारने के बाद भी गांधी-नेहरू परिवार को कोर्ट से राहत मिल जाती है। जबकि दूसरे नेता सारी संस्थाओं से बरी होने के बाद भी कोर्ट में आकर दोषी ठहरा दिए जाते हैं। हेराल्ड हाउस मामले में भी एक बार यही देखने को मिला है। दिल्ली हाईकोर्ट ने हेराल्ड हाउस को सील करने से मना कर, सोनिया और राहुल गांधी को बहुत बड़ी राहत दे दी है।
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रेलवे के AC कोचों से 21 लाख तौलिये, बेडशीट और कंबल चुरा ले गए यात्री
पिछले वित्त वर्ष में देशभर में ट्रेनों के एसी कोचों से करीब 21,72,246 बेडरॉल आइटम गायब हो गए हैं, जिनमें 12,83,415 तौलिए, 4,71,077 चादर और 3,14,952 तकिए का गिलाफ चुरा लिए गए। "गायब हुए इन सामान की कुल कीमत 14 करोड़ रुपये है।" यही नहीं, शौचालयों से मग, फ्लश पाइप और दर्पणों की चोरी की रिपोर्ट भी नियमित तौर पर आती है। चोरी की इन घटनाओं ने उच्च श्रेणी के यात्रियों के लिए बेहतर सुविधा प्रदान करने की कोशिश में जुटी रेलवे के लिए नई समस्या पैदा कर दी है।
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केंद्र सरकार  75 रुपये का विशेष स‍िक्का जारी करेगी. सरकार ने पोर्ट ब्लेयर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की ओर से पहली बार तिरंगा फहराने की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर यह सिक्का जारी करने का ऐलान किया.  वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में नोटिफ‍िकेशन जारी किया है.
 75 रुपये के इस सिक्के का वजन 35 ग्राम होगा. यह सिक्का 50 फीसदी चांदी से बना होगा. 40 फीसदी इस पर तांबा लगा होगा और 5-5 फीसदी जिंक और निकल धातु होगी. सिक्के पर सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर भी अंक‍ित होगी. , बोस ने पोर्ट ब्लेयर में 30 दिसंबर, 1943 को पहली बार तिरंगा फहराया था
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प्रयागराज-हल्दिया वॉटर हाईवे के मल्टी मॉडल टर्मिनल का शुभारंभ
जलमार्ग की कुल दूरी 1620 किमी है. यह देश का सबसे लंबा जलमार्ग होगा.  आजादी के पहले इस रूट पर कारोबार होता था. 1986 में इसे सरकार ने दोबारा शुरू करने की योजना बनाई थी, जो पूरी नहीं हो सकी.
 इसके बाद मोदी सरकार इसे साकार कर रही है. यह देश के चार राज्यों को जोड़ेगा. इनमें पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश हैं. इन चार राज्यों में 20 टर्मिनल हैं, जिनमें से 18 फ्लोटिंग हैं. इस जलमार्ग की क्षमता 12 लाख टन है.
 सरकार ने वॉटर-वे एक्ट 2016 के तहत देश में 111 जलमार्गों को नेशनल वॉटर वे घोषित किया गया है. इनकी कुल दूरी 14500 किमी है.इस पूरे जलमार्ग के साकार होने पर एक लाख 60 हजार लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है. यही नहीं, अब गंगा के रास्ते व्यापारिक गतिविधियां जुड़ने से उत्तर भारत और पूर्वोत्तर भारत, बांग्लादेश, चीन, नेपाल, भूटान, म्यांमार, थाईलैंड और अन्य दक्षिण एशियाई देशों से जुड़ जाएगा.
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 बहुप्रतीक्षित सिग्नेचर ब्रिज का उद्घाटन 
. नॉर्थ इस्ट दिल्ली में यह यमुना नदी पर बना है इस ब्रिज पर 154 मीटर ऊंचा ग्लास बॉक्स तैयार करने की भी योजना है जो पर्यटक स्थल के रूप में लोगों को शहर का ‘बर्ड्स-आई व्यू’ देगा. 
ग्लास बॉक्स से लोग इस ब्रिज के ऊपर से शहर के विस्तृत मनोरम दृश्य का आनंद भी ले सकेंगे. इसके लिए चार लिफ्ट लगाई गई हैं. चार लिफ्ट की कुल क्षमता करीब 50 लोगों को ले जाने की है.  लिफ्ट का दो महीने में परिचालन शुरू हो जायेगा
.सिग्नेचर ब्रिज का प्रस्ताव 2004 में प्रस्तुत किया गया था जिसे 2007 में दिल्ली मंत्रिपरिषद की मंजूरी मिली थी. कई डेडलाइन मिस होने के बाद मोदी सरकार ने इस पुल का निर्माण कार्य पूरा किया
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क्रिस्टोफर वुड ने आरबीआई के साथ जारी खींचतान में सरकार का समर्थन किया 
हॉन्गकॉन्ग की वित्तीय सेवा कंपनी सीएलएसए के एमडी एवं इक्विटी स्ट्रैटिजिस्ट क्रिस्टोफर वुड ने आरबीआई के साथ जारी खींचतान में सरकार का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक की कठोर मौद्रिक नीति को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार की शिकायतें बिल्कुल वाजिब हैं।
मार्केट गुरु क्रिस वुड ने कहा कि वह सरकार के साथ 'सहानुभूति' इसलिए रख रहे हैं क्योंकि उनको लगता है कि महंगाई के प्रमुख मानक संतोषजनक स्तर पर हैं, जिससे नीतियों में ढील की गुंजाइश बनती है। वह मोदी सरकार को 10 में से 8 नंबर देते हैं  वुड ने ये सारी बातें CLSA की तरफ से आयोजित इंडिया इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस में कहीं। 
उन्होंने आगे कहा, 'नोटबंदी बेहद साहसिक कदम था, बेहद बहादुरी भरा। बैंकरप्ट्सी कोड भी बड़ी बात है, यह बहुत बड़ा सुधार है।' उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की जीत की भविष्यवाणी भी कर दी, हालांकि उन्होंने माना कि पार्टी को थोड़ा कम बहुमत हासिल होगा। 
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जातिवाद में बटा ईसाईसमाज
ईसाई Religion में .एक मसीह.एक बाइबल और एक मात्र Religion है... ! पर अजीब बात है कि ...
लैटिन कैथोलिक, सीरियाई कैथोलिक चर्च में प्रवेश करना शाक्त प्रतिबन्ध है यैसा कहें कि प्रवेश नहीं कर सकते।
- दोनों मर्थोमा चर्च में प्रवेश नहीं कर सकते।
- ये तीनों के लिए , Pentecost के चर्च में प्रवेश निशेध है अर्थात प्रवेश नहीं कर सकते और ये चरों को साल्वेशन आर्मी चर्च में भी प्रवेश करने की अनुमति नहीं है|
इतना हीं नहीं, ये पांचों ,सातों दिन Adventist चर्च में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है।
- ये ६ का ६ओं को, रूढ़िवादी चर्च में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है।
- अब ये सातों को जैकोबाइट चर्च में प्रवेश करने की अधिकार नहीं है और इसी तरह. ईसाई Religion के 146 जाति मात्र भारत के केरल में हीं है|
मृत्यु पश्चात ..मृत शरीर के साथ भी भेदभाव .//
मृत्यु पश्चात भी मृत शरीर के साथ भी भेदभाव पूर्ण व्यवहार किया जाता है। बड़े जात के लोगों की मृत शरीर को अच्छी तरह से दफनाते है तो वहीँ छोटे जात की लोगों की मृत शरीर को कहीं भी दफना देते है। और चिल्लाते रहते है की.. एक मसीह, एक बाइबिल, एक Religion (धर्म??)

इसाईयों की कुछ जातीय .....जिन्हें ये वर्ग या फोलोअर कहा कर अपनी जातिवाद को छुपाते है ...
...जैसे ...
1. क्याथोलिक : (जनसंख्या ६ करोड) बाइबल, क्राइस्ट, मेरी और पोप में विश्वास करते है
2. रोमन क्याथोलिक :(जनसंख्या १८ करोड) बाइबल, क्राइस्ट, मेरी और पोप में विश्वास करते है
3. म्याथोडिस्ट : (जनसंख्या २ करोड) बाइबल, क्राइस्ट, मेरी गोड विश्वास करते है
4. इस्टर्न ओर्थोदक्स : (जनसंख्या ५ करोड) बाइबल, क्राइस्ट, विश्वास करते है
5. ओरियन्टल अर्थोडक्स : (जनसंख्या ५ करोड) बाइबल, क्राइस्ट, मेरी में विश्वास करते है
6. एग्लिकन : (१ करोड) बाइबल, क्राइस्ट, मेरी में विश्वास करते है
7. प्रोस्टेस्ट्यान्ट : (१० करोड) बाइबल, क्राइस्ट, मेरी में विश्वास करते है
8. प्रेसबेटीजम : (१ करोड) बाइबल, क्राइस्ट, मेरी में विश्वास करते है
9. कोग्रेगाशनालिज्म : (२ करोड) बाइबल, क्राइस्ट, मेरी में विश्वास करते है
10. अनाबेपिस्ट : (१ करोड) बाइबल, क्राइस्ट, मेरी में विश्वास करते है
11. ब्रेथरन : (५० लाख ) बाइबल, क्राइस्ट, मेरी में विश्वास करते है
12. होलीनेस चर्च : (५ करोड) बाइबल, क्राइस्ट, मेरी में विश्वास करते है
13. ब्यप्तिस्ट : (१ करोड) बाइबल, क्राइस्ट, मेरी में विश्वास करते है
14. स्प्रिच्युअल : बाइबल, क्राइस्ट, मेरी में विश्वास करते है
15. एपोस्टोलिक : बाइबल, क्राइस्ट, मेरी में विश्वास करते है
16. पेन्टाकोस्टा : बाइबल, क्राइस्ट, मेरी में विश्वास करते है
17. चेरीमेस्तिक : बाइबल, क्राइस्ट, मेरी में विश्वास करते है
18. ज्युयिस क्रिस्चियन : बाइबल, क्राइस्ट, मेरी में विश्वास करते है
19. एडवानटिस्ट : (२करोड) बाइबल, क्राइस्ट, मेरी में विश्वास करते है
20. जहोवाका साक्षीहरू : (५ करोड) बाइबल, क्राइस्ट, मेरी में विश्वास करते है
ये ईसाईयों की कुछ जातीय हे ............
समय के हिसाब से आगे ये भी बताएँगे की इनका क्या महत्त्व हे इस्लाम मजहब के बारेमे तो कहने की आवश्यकता हीं नहीं|





Wednesday, 31 October 2018

idhar--udhar

असम के कोंग्रेसी नेता अमजात अली सेब की पेटी में हथियार और गोलियां के साथ मस्जिद से हिरासत में। हिंदुओं को मारने का कर रहा था प्लान। पुलिस ने दबोचाचित्र में ये शामिल हो सकता है: भोजनचित्र में ये शामिल हो सकता है: 4 लोग, लोग खड़े हैं

Tuesday, 30 October 2018

vichar

अब तो ऐसा लग रहा है कि कल को सुप्रीम कोर्ट मोदी सरकार से यह सूचना भी मांग देगा कि:
1.. भारत के पास कितने एटम और कितने हाड्रोजन बम है?
2. इनको कँहा-कँहा रखा गया है?
3. अलग-अलग कुल कितनी मिसाइले है, उन्हें कँहा छिपाकर रखा गया है?
4.. किस किस मिसाइल पर कौन कौन से एटम बम फिट किये जायेंगे और उनका निशाना कँहा-, कँहा होगा?
5. वार प्लान की जानकारी दी जाय.
छि छि अपने को तो शर्म महसूस हो रही है कि देश का सुप्रीम कोर्ट इतना अतार्किक तरीका अपनाएगा जिसके कारण देश की प्रतिष्ठा गिरेगी. आखिर वह समझे कि वह सुप्रीम कोर्ट है कठपुतली नही.

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''सीख हम बीते युगो से नए युग का करे स्वागत''
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"ठग्स ऑफ हिंदुस्तान"
इतना लंबा नामरखने की क्या जरूरत थी
सीधे "कांग्रेस" ही रख देते..?
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कांग्रेस की पुरी कोशिश यह है कि अयोध्या में भगवान श्री राम के मंदिर बनने से कैसे रोका जाए। सूत्रों के अनुसार से खबर आ रही है कि मंदिर निर्माण को रोकने के लिए दो प्रकार की रणनीति तैयार की हैं।पहला षड्यंत्र की यदि मंदिर निर्माण पर संसद के शीतकालीन अधिवेशन में प्राइवेट बिल लाया जाएगा तो कांग्रेस ने तैयारी कर रखी है कि इस अधिवेशन को भी पिछले बार की तरह राफेल के मुद्दे पर हंगामेदार बना संसद को ठप किया जाए ताकि राम मंदिर प्राइवेट बिल पास न हो सके।
 कांग्रेस का दुसरा षड्यंत्र यह है कि सुप्रीम कोर्ट टाईटील सुट के मामले में यदि श्री रामलला मंदिर के पक्ष में फैंसला देता है तो ठिक दो दिन बाद फिर से एक याचिका डाली जाएगी -कि सुप्रीम कोर्ट यह साबित करें कि अयोध्या में भगवान राम का जन्म हुआ था या नही ? किसी को यह लगता है कि मनगढंत बातें है तो फिर मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के एक वकील जो कांग्रेस का वरिष्ठ नेता भी रह चुका है उसके दो दिन पहले आजतक चैनल पर किए गये खुलासे से रूबरू हो लें।-- Sanjeet Singh

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हिन्दू मूर्खो की जमात है ?
एक सवाल आया .कि अगर नरेन्द्र दामोदरदास मोदी लोकसभा चुनाव से पहले राजनीति से संन्यास ले ले .तो भाजपा कितनी लोकसभा सीट जीत पाएगी .और भाजपा के सहयोगी संगठन अपनी पार्टी को कितने राज्यों में चुनावी सफलता दिला पायेगे .. बीजेपी शासन में इनको राम मन्दिर अभी चाहिए --

 अरे - ५०० साल हो गए वहाँ मंदिर के ऊपर मस्जिद बने -- ये लड़ाई तबसे चल रही है -- ७० साल कांग्रेसियों की चप्पल चाटी इन हिन्दुओ ने -इंद्रा हमारी अम्मा बोलकर छाती पीटी -- मगर बीजेपी शासन में इनको राम मन्दिर अभी चाहिए ? यही समझ में नहीं आ रहा है कि मोदी हर वो काम क्र रहा है जिससे आपन वाले वक्त में इसका मार्ग प्रशस्त होगा -- 
जिस काम को करना सबसे बड़ी जरूरत होती है --उस काम को समझदार अपनी जबान पर कभी नहीं लाते --जबकि हमारे मुर्ख हिन्दू ही मोदी से सवाल पूछते हैं मोदी अयोध्या क्यों नहीं गए? हिन्दू ऐसे रो कलप रहा है जैसे मंदिर बनते ही सब मसले हल हो जायेंगे ?-  वो फिर तोड़ दिया जाएगा -आज अभी जो स्थिति है -- किसी देश के युग परिवर्तन की घटनाये इतनी आसानी से और इतनी जल्दी नहीं होती।
अभी मोदी सरकार ने मूर्खो की बातों से चेष्टा की तो जो स्थिति भारतवर्ष में होगी उसका दोष मोदी सरकार पर मढ़ कर -- बीजेपी को सत्ता चुय्त कर दिया जाएगा --फिर राम मंदिर तो भूल ही जाना --तुम्हारे घरों में व्यक्तिगत मंदिर भी तोड़ दिए जाएंगे -- और मुर्ख हिन्दू ऐसी स्थिति जब तक उसके सामने नहीं आ जायेगी तब तक समझेगा नहीं।  ३७० और कॉमन सिविल कोड पर ध्यान दो वो ज्यादा जरुरी है हमारे लिए।
मन्दिर में मत उलझो--  sidhantsehgal

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प्रधानमंत्री मोदी भारत की औपनिवेशिक संरचना को बदल रहे हैं. ब्रिटिश औपनिवेशिक व्यवस्था ने दोहन करने वाली संस्थाओं का निर्माण किया, चाहे वह अफ़्रीकी देश हो या भारत. स्वतंत्रता मिलने के बाद अफ्रीकी राजनेता ब्रिटेन की शोषण या दोहन करने वाली नीतियों को जारी रखा, क्योकि इनसे सत्ता पे उनका वर्चस्व बना रहेगा. यह पैटर्न स्वतंत्रता के बाद के अफ़्रीकी देशो जैसे कि घाना, केन्या, जाम्बिया, ज़िम्बाब्वे, सिएरा लेओने इत्यादि में दिखाई देता है.
परिणाम क्या हुआ? ज़िम्बाब्वे को 1980 में स्वतंत्रता मिली. वर्ष 2008 में इस देश के नागरिको की आय 1980 की तुलना में आधी रह गयी है, इससे भी बदतर हालात सिएरा लेओने में हुआ.
कई थिंक टैंक (प्रबुद्ध मंडल) और शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष निकाला कि अफ्रीका के अनेक देशों में अभिजात वर्ग ने स्वतंत्रता के बाद सत्ता पर कब्जा कर लिया और तानाशाही स्थापित कर दी. लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दबाव में उन्होंने लोकतंत्र स्थापित करना स्वीकार कर लिया. लेकिन चुनाव करवाने के लिए कुछ वर्षो - 5 से 10 साल - का समय मांग लिया. क्योकि वे चुनाव आयोग, अदालत, ब्यूरोक्रेसी और मीडिया में अपने प्यादो को बैठा कर सत्ता "लोकतान्त्रिक" तरीके से बनाये रखना चाहते थे.
कहने के लिए चुनाव आयोग ने चुनाव करवा दिया, लोगों ने वोट डाल दिए, और जब विपक्ष वोटर लिस्ट और चुनाव में धांधली की शिकायत करता था, तो चुनाव आयोग शिकायतों को खारिज कर देता था. हालत यहां तक हो जाती थी कि निर्वाचन-क्षेत्र से परिणाम कुछ होते थे, चुनाव आयोग घोषणा कुछ और करता था. जब विपक्ष अदालत में चुनौती देता था तो जज किसी तकनीकी कारणों का सहारा लेकर उनकी याचिका को खारिज कर देते थे. अगर विपक्ष न्यायालय और चुनाव आयोग के विरुद्ध प्रदर्शन करते थे, तो सेना और पुलिस नृशंस तरीके से मारपीट और हत्या करके उनके प्रदर्शन को दबा देती थी. सुरक्षाबलों के द्वारा विपक्ष के दमन के समाचार को मीडिया छुपा देता था, विपक्ष के आरोपों को प्रकाशित नहीं करता था तथा केवल अभिजात वर्ग के समर्थन में खबरें छापता था.
थिंक टैंक (प्रबुद्ध मंडल) और शोधकर्ताओं ने इसे "बनावटी लोकतंत्र" का नाम दिया.
अगर हम भारत के सन्दर्भ में देखे, तो पाएंगे कि स्वतंत्रता के बाद सत्ता पे एक अभिजात वर्ग ने कब्ज़ा जमा लिया, एक ही परिवार के लोग या उनके प्रोक्सी शासन करने लगे. यह स्पष्ट होने लगा है कि सोनिया सरकार ने अपने गुर्गों को धीरे-धीरे ब्यूरोक्रेसी, न्यायालय तथा मीडिया में बैठा रखा है.
उदाहरण के लिए कुछ मित्रों ने बताया कि एक वरिष्ठ मी लार्ड जिनके पिता कांग्रेस के नेता थे, कैसे उन्हें वर्ष 2010 में जज नियुक्त किया गया; कैसे वे कुछ ही महीनों में राज्य अदालत के मुख्य पंच हो गए, और फिर वह उससे बड़े न्यायालय में आ गए और प्रगति करते ही गए. सब कुछ सोनिया सरकार के समय में हुआ. मैं सोचकर हैरान हो जाता हूं कि कैसे सोनिया सरकार ने शातिर सोच से 2010 में ही इन महोदय की गोटी फिट कर दी थी जिससे वह एक ऐसी स्थिति में पहुंच जाएं जहां वे सोनिया, उनके परिवार और सपोर्टरों का समर्थन कर सके. यही हाल मीडिया और ब्यूरोक्रेसी में भी मिलता है जहां कोंग्रेसी गुर्गे फिट हैं.
इस अभिजात वर्ग के शोषण का परिणाम यह हुआ कि अधिकांश भारतीय भीषण गरीबी से जूझते रहे; घर में बिजली नहीं, शौचालय नहीं, पानी नहीं, और डिजिटल युग में इंटरनेट नहीं. ना ही शिक्षा के साधन, ना ही स्वास्थ्य उपलब्ध, ना ही रोजगार, ना ही उनके क्षेत्र में कोई उद्यम, ना ही सड़क, ना ही रेल, ना ही बैंक. जरा सा पेट भरने के लिए उन्हें "माई-बाप" सरकार की तरफ दीन भाव से देखना पड़ता था जो चुनाव के समय एक सूती धोती, ₹500 का नोट और एक पव्वा चढ़ा के उन्हें कृतार्थ कर देता था.
अगर किसी के मन में गलती से भी यह विचार आ जाए कि यह कांग्रेसी और कम्युनिस्ट विलासिता में कैसे रहते हैं जबकि उनकी स्वयं की स्थिति दरिद्रता वाली है, तो उसके लिए इस अभिजात वर्ग ने संप्रदायवाद तथा समाजवाद का नारा ढूंढ रखा था. सेकुलरिज्म का एक जयकारा लगाया, बहुसंख्यको को गरियाया और जनता भाव-विव्हल होकर अपने सारे कष्ट भूल जाती थी.
प्रधानमंत्री मोदी भारत की औपनिवेशिक संरचना को बदल रहे हैं. उस औपनिवेशिक संरचना को जिसे अंग्रेजो ने उस समय के अभिजात वर्ग को सौंप दिया; जिसे अभिजात वर्ग ने अपना लिया और उसी से अपने परिवार और खानदान को राजनैतिक और आर्थिक सत्ता के शीर्ष पर बनाए रखा.
भारत की मिटटी पर पले-बढ़े, शिक्षित, और उसी धरती पर संघर्ष करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा इस अभिजात वर्ग के रचनात्मक विनाश को समझिये और उन्हें समर्थन दीजिए.
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ये जो मीलौड साहब होते है ना ..इनकी पत्तले चाटने की लत पड चुकी होती है ......
रिटायरमेंट के बाद भी , सिस्टम मे घुसे रहना , अगडम -बगडम कमीशनो , आयोगो, और ट्रिब्यूनल का हिस्सा बने ही रहते है, और आकंठ भ्रष्टाचार मे डूबी रहने वाली नौकरी के बाद भी विलासिता पूर्ण जिदंगी का लालच छोडना इन्हे गवारा नही होता .....
सन् 2010 मे National Green Tribunal बनाया गया था , जिसके वर्तमान चेयरपर्सन है , सुप्रीम कोर्ट मे न्यायमूर्ति रह चुके स्वतंत्र_कुमार .बाकी सदस्यो मे दो किस्म के सदस्य होते है ,
1- Judicial members
2- Expert members .
ये सारे ज्यूडिशियल_मेंबर्स भी मी-लौड साहिब ही होते है . और इनके फैसले सुभान_अल्लाह ..
अब अचानक से इन मी-लौड साहिब की अलौकिक दिव्य दृष्टि कुंडलिनी की मानिंद जाग्रत हो उठी है , बगैर हकीकत को जाने , बगैर मौका मुआएना किये ही , इनको झट से पता चल गया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चीनी मिले प्रदूषण फैला रही है . और हुजुर_ए_आला ने चीनी मिलो को बंद करने का तुगलकी फरमान सुना डाला
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चीनी_बैल्ट मे कुल 23 मिले Delhi_NCR मे आती है , जिनको बंद करने की तलवार जून-2017 से ही लटक रही है.सिभांवली चीनी मिल पर तो माननीय मीलौड सहाब पहले ही पाँच करोड का जुर्माना ठोक चुके है .
मगर मी-लौड जी , शायद आप भूल रहे है कि , Sugar bowl कहे जाने वाला ये ऐरिया और इसकी समृद्धि के लिए यहाँ की चीनी मिले मुख्य रूप से जिम्मेदार है .क्योकि गन्ना ही यहाँ की मुख्य Cash crop माना जाता है . ये गन्ने की फसल ,और चीनी उद्योग यहाँ कि Life_Line है .
करोडो हेक्टेयर की तैयार खडी फसल को किसान जलायेगा ? या फिर ट्राॅलिया सीधी आपके बंगले पर भिजवाई जायें ?  फसल तैयार करने मे किसान का खून पसीना , धन , और वक्त लगता है , खेती लाखो लोगो के लिए रोजगार का सृजन करती है . सीधे  और परोक्ष रूप से लगभग सभी लोग कृषि कार्य से जुडे है . अब इस तैयार फसल का क्या करें ? किसी को बच्चो के उज्जवल भविष्य हेतु स्कूलो की फीस  भरनी है , किसी की बेटी की शादी होनी है , किसी को बीमार माँ-बाप का ईलाज कराना है.
मिलो को बंद कर दो , मगर तैयार खडी फसल की कीमत कौन  देगा ? आज मिल बंद करोगे, कल रिफाइनरियाँ , परसो स्टील फैक्ट्रिया , और फिर एक एक करके सारे उद्योग धंधे. खुद को खुदा समझना बंद करो
By Rajeev Kumar


Monday, 29 October 2018

mediya


सोचिए ....आंध्र प्रदेश की चंद्रबाबू नायडू सरकार और बंगाल की ममता बनर्जी सरकार लिखित आदेश जारी करके सीबीआई को दिया हुआ कंसर्न रद्द कर दिया है और यह आजादी के बाद पहली बार हुआ है इन दोनों सरकारों ने आदेश दिया है कि अब उनके राज में सीबीआई कहीं कोई जांच या छापा नहीं मार सकते
मैं यह सोच रहा हूं कि जब केंद्र में मनमोहन सरकार थी तब किसी भी बीजेपी की राज्य सरकार ने ऐसा करने की हिम्मत क्यों नहीं दिखाई ?-Jitendra Pratap Singh
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कांग्रेस और .लाल सलाम बामपंथी , नक्सली , शेखुलर , क्रिप्टो क्रिस्चियन ये सभी एक ही सिक्के के दो पहलू है .इनका एक ही मकसद .. हिन्दुओ में आपसी फूट डाल के सत्ता को कब्जे में रखना और हिन्दू शक्तियों को विभाजित करके उनको कमजोर बनाये रखना ....
मोदी के दौर से पहले की राजनीति में कांग्रेस के सत्ता में रहने के दौरान जो मतदाता कांग्रेस से नाराज रहते थे वह इसी गिरोह के दुसरे पहलु के द्वारा मैनेज किये जाते थे .और चुनाव के बाद ये दोनों पहलू सत्ता के लिए एक हो जाया करते थे ...!!!पवन अवस्थी
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दास्सो के प्रमुख एरिक त्रापिए ने ANI को दिए इंटरव्यू में बताया कि सोनिया सरकार की तुलना में उन्होंने मोदी सरकार को बेंचे जाने वाली राफेल के दाम 9% कम करना पड़ा क्योकि इसकी खरीद का समझता दो सरकारों के बीच था. दूसरा, त्रापिए ने कहा कि "कांग्रेस पार्टी के साथ हमारा लंबा अनुभव है. हमारा पहला सौदा भारत के साथ था, 1953 में नेहरू और अन्य प्रधानमंत्रियों के साथ था.
एक तरह से त्रापिए कह रहे है कि पहले के सौदे में 9% कमीशन था. कौन मांग रहा था यह कमीशन, स्वयं अनुमान लगा लीजिये. वह यह भी कह रहे है कि उन्हें नेहरू के समय से ही कोंग्रेसियों डील करने का "लम्बा अनुभव" है.--अमित सिंघल
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CJI गोगोइ पूर्व कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री का बेटा है,उससे हिन्दू हित की उम्मीद करना नादानी होगी,उसने स्वभाव के अनुसार औकात दिखा दी।
कांग्रेसी नेता और सुप्रीम कोर्ट में बाबर के वकील कपिल सिब्बल की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर पर सुनवाई टाली जनवरी तक ..सुप्रीम कोर्ट सिर्फ रोहिंग्यों, बांग्लादेशियों, पादरियों, आतंकियों, अर्बन नक्सलियों के लिए ही खुला है, हिन्दुओ से जुड़े मामलों के लिए सुप्रीम कोर्ट के पास टाइम नहीं है -Sanjay Dwivedy
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देखो कोलेजियम सिस्टम की ताकत...अब पता लगा चिदंबरम को बार बार हर बार ज़मानत क्यों मिल जाती है...मी लार्ड साहब की हिम्मत FIR दर्ज कराने तक कि नही होती...पता नही सिंघवी बाबू ने मी लार्ड साहब को भी कमरे की टेबल के ऊपर बुलाया था या नही !?
आज मन में पैदा होने वाले छोभ का मुख्य कारण देश का सड़ा हुआ भ्रष्ट हिंदू विरोधी जुडिशरी सिस्टम है,
वास्तव में कांग्रेस न्यायपालिका के जरिए आज भी राज कर रही है। --Kavita Upadhyay
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कट्टर हिन्दू की परिभाषा !!
कपाल पर प्रचंड तिलक , साफा , पगड़ी तथा भगवा वस्त्र पहन लेने और हाँथ पुराने जमाने की तलवार और फरसा धारण कर लेने से ही कोई सच्चा कट्टर हिन्दू बन जाएगा .ये बिलकुल भी जरुरी नही .उपरी आवरण की बजाय आतंरिक आवरण और चरित्र तथा आचरण ही विश्वास योग्य माना जाता है ..सच्चा कट्टर हिन्दू कभी समाज के सामने यह नही चिल्लाएगा की वह कट्टर वाला हिन्दू है ..कट्टर वाले हिन्दू शोर नही करते वल्कि अपने आचरण से साबित करते है .असली कट्टर हिन्दू ...कट्टर शब्द से हमेशा परहेज करेगा ...असली कट्टर हिन्दू वह होता है जो सम्बंधित विषयो में पल पल अपडेट रहे , अपने दुश्मनों की हर शातिर चाल, दुश्मनों की संख्या , आकार प्रकार से वाकिफ हो.अपने गुप्त दुश्मनों को पहचानने की छमता रखता हो...जातिवादी , छेत्रवाद को पसंद ना करता हो , दुश्मन अगर आपस में फूट डालने का कोई भी कैसा भी प्रयास करे तो उस प्रयास को कष्ट उठा कर भी असफल करने वाला हो ..निजी तथा जातीय हित से ऊपर उठ राष्ट्र और समाज के हित में आचरण करने वाला हो .....पवन_अवस्थी
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svasthy



*नाभी कुदरत की एक अद्भुत देन है*
एक 62 वर्ष के बुजुर्ग को अचानक बांई आँख से कम दिखना शुरू हो गया। खासकर रात को नजर न के बराबर होने लगी।जाँच करने से यह निष्कर्ष निकला कि उनकी आँखे ठीक है परंतु बांई आँख की रक्त नलीयाँ सूख रही પરંતુ है। रिपोर्ट में यह सामने आया कि अब वो जीवन भर देख नहीं पायेंगे।.... मित्रो यह सम्भव नहीं है..
मित्रों हमारा शरीर परमात्मा की अद्भुत देन है...गर्भ की उत्पत्ति नाभी के पीछे होती है और उसको माता के साथ जुडी हुई नाडी से पोषण मिलता है અને और इसलिए मृत्यु के तीन घंटे तक नाभी गर्म रहती है।
गर्भधारण के नौ महीनों अर्थात 270 दिन बाद एक सम्पूर्ण बाल स्वरूप बनता है। नाभी के द्वारा सभी नसों का जुडाव गर्भ के साथ होता है। इसलिए नाभी एक अद्भुत भाग है।
नाभी के पीछे की ओर पेचूटी या navel button होता है।जिसमें 72000 से भी अधिक रक्त धमनियां स्थित होती है।अगर सारी धमनियों को जोड़ा जाए तो उनकी लम्बाई इतनी हो जायेगी कि पृथ्वी के गोलाई पर दो बार लपेटा जा सके।
नाभी में गाय का शुध्द घी या तेल लगाने से बहुत सारी शारीरिक दुर्बलता का उपाय हो सकता है।
1. आँखों का शुष्क हो जाना, नजर कमजोर हो जाना, चमकदार त्वचा और बालों के लिये उपाय...
सोने से पहले 3 से 7 बूँदें शुध्द घी और नारियल के तेल नाभी में डालें और नाभी के आसपास डेढ ईंच गोलाई में फैला देवें।
2. घुटने के दर्द में उपाय
सोने से पहले तीन से सात बूंद इरंडी का तेल नाभी में डालें और उसके आसपास डेढ ईंच में फैला देवें।
3. शरीर में कमपन्न तथा जोड़ोँ में दर्द और शुष्क त्वचा के लिए उपाय :-
रात को सोने से पहले तीन से सात बूंद राई या सरसों कि तेल नाभी में डालें और उसके
चारों ओर डेढ ईंच में फैला देवें।
4. मुँह और गाल पर होने वाले पिम्पल के लिए उपाय:-
नीम का तेल तीन से सात बूंद नाभी में उपरोक्त तरीके से डालें।
*नाभी में तेल डालने का कारण*
हमारी नाभी को मालूम रहता है कि हमारी कौनसी रक्तवाहिनी सूख रही है,इसलिए वो उसी धमनी में तेल का प्रवाह कर देती है।
जब बालक छोटा होता है और उसका पेट दुखता है तब हम हिंग और पानी या तैल का मिश्रण उसके पेट और नाभी के आसपास लगाते थे और उसका दर्द तुरंत गायब हो जाता था।बस यही काम है तेल का।
*घी और तेल नाभी में डालते समय ड्रापर का प्रयोग करें, ताकि उसे डालने में आसानी रहे।*
अपने स्नेहीजनों, मित्रों और परिजनों में इस नाभी में तेल और घी डालने के उपयोग और फायदों को शेयर करिये। - हरिश भाई वैद*बडौदा*

Sunday, 28 October 2018

good news



लगभग 100 वर्ष बाद मोदी जी ने भगीरथ प्रयास कर वाराणसी को बन्दरगाह जैसी सुविधा प्रदान की.

उत्तरप्रदेश को लैंड लाक प्रदेश बोला जाता रहा है लेकिन आज वाराणसी को सीधे जल मार्ग के रास्ते बंगाल की खाड़ी के हल्दिया बन्दरगाह से आये कंटेनर वेसल का स्वागत कर पीएम मोदी ने जोड़ दिया. इस नाते आज का दिन उत्तरप्रदेश, खासकर पूर्वांचल और वाराणसी के लिए ऐतिहासिक है.
हल्दिया से वाराणसी के बीच मे गाजीपुर इत्यादी जितने भी माँ गंगा के किनारे के शहर/कस्बे है उनका विकास तो होगा ही अब उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड तथा पश्चिम बंगाल में उत्पन्न/ उत्पादित वस्तुवे कलकत्ता के रास्ते निर्यात भी होगी. इस जल मार्ग के बन जाने से वाराणसी अब सीधे-सीधे समुद्र के रास्ते म्यांमार, थाईलैंड, कम्बोडिया, वियतनाम तथा जापान से सीधे जुडेगा जिससे पर्यटन को बहुत बढ़ावा मिलेगा.,
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"अंडमान निकोबार की यात्रा पर जाने वाले यात्रियों के लिए खुशखबरी"
📌 अंडमान और निकोबार द्वीप समूह जाने की योजना बनाने वाले पर्यटकों के लिए आने वाले वर्षों में यात्रा अधिक सुविधाजनक हो सकती है.
📌 रेल मंत्रालय ने 2017 में 'अंडमान और निकोबार' द्वीप पर राजधानी "पोर्टब्लेयर" और "डिगलीपुर" के बीच 240 किलोमीटर की ब्रॉड गेज रेलवे ट्रैक के निर्माण को मंजूरी दे दी थी.
📌 यह रेलवे लाइन कई पुलों के माध्यम से तट के समानांतर बनाए जाने की उम्मीद है, जैसे ही यह रेल लाइन चालू हो जाती है, अनुमान के मुताबिक पर्यटन सालाना मौजूदा 4.5 लाख पर्यटकों से बढ़कर सालाना 6 लाख पर्यटकों तक पहुंच जाएगा.
📌 यह लाइन डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बढ़ावा देगी.
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भारत ने पहली बार अपने दम पे विकसित की परमाणु मिसाइल ट्रैकिंग शिप Make In India का बब्बर शेर दहाड़ रहा अब !जल्द अब सर्विलांस जहाज भारतीय आर्मी को मिलने जा रहा है
यह प्रोजेक्ट कितना सीक्रेट है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे सीधे प्रधानमंत्री मोदी और अजीत डोभाल मॉनिटर कर रहे हैं। यह एडवांस इलेक्ट्रॉनिक एंड ट्रैकिंग सर्विलांस जहाज है, जो बैलिस्टिक व क्रूज मिसाइल के लॉन्च होते ही उसे ट्रैक करेगा।
इस तरह का सर्विलांस शिप अभी तक अमेरिका, रूस, चीन व फ्रांस के पास ही है।

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dec-srijan




सीएम मोदी को फंसाने में फेल हुए तो अब पीएम मोदी को फंसाने की साजिश!

पीएम मोदी को एक बार फिर फंसाने का चौसर तैयार किया गया है। 2002 गुजरात दंगे में मारे गए कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की विधवा जाकिया जाफरी ने एक बार फिर मोदी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की है। उन्होंने एसआईटी द्वारा मोदी को दी गई क्लिन चिट को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अर्जी को मंजूर करते हुए इस मामले की सुनवाई 19 नवंबर को करने की तारीख भी तय कर दी है। इस मामले को देखते हुए वरिष्ठ पत्रकार कंचन गुप्ता ने सही लिखा है कि 2014 के आम चुनाव की पूर्व संध्या से लेकर 2019 के चुनाव की पूर्व संध्या तक चुनावी खेल की किताब में कुछ भी नहीं बदला है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए संयोग कहें या दुर्योग यह बात बाद में लेकिन जिस प्रकार देश में कुछ लोग उनके पीछे पड़े हैं वह कम से कम देश के लिए कतई अच्छा नहीं कहा जा सकता है। नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से लेकर देश के प्रधानमंत्री बनने तक देश का एक खास तबका उन्हें किसी प्रकार फंसाने के पीछे पड़ा हुआ है। मैथिली में एक कहावत है कि लोक लागे भगवंता के और दैव लागे अभगला के। यह कहावत मोदी पर बिल्कुल सटीक बैठती है। इन लोगों ने जब से मोदी के पीछे पड़े है उनका यश और शौर्य देश से लेकर विदेश तक में फैलता चला गया। इसके बाद भी इन लोगों को अक्ल नहीं आ रहा है।मालूम हो कि जाकिया जाफरी 2002 गुजरात दंगा मामले में गठित विशेष जांच दल द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर वरिष्ठ राजनेताओं तथा नौकरशाहों को मिली क्लिन चिट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए अर्जी दायर की है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, 2014 में हुए आम चुनाव से पहले भी नरेंद्र मोदी को फंसाने का यह गंदा खेल चला था। उस समय मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। लेकिन उन्होंने इसका डटकर मुकाबला किया और बाइज्जत बरी होकर बाहर आए। इतना ही नहीं साजिशकर्ताओं के पीछे पड़ने के बाद भी वे देश के प्रधानमंत्री बने।
लेकिन अब जब 2019 का चुनाव होने ही वाला है तो एक बार फिर साजिशकर्ताओं ने मोदी को फंसाने का खेल शुरू कर दिया है। वही मामला वही केस मगर इस बार लड़ाई का मैदान अहमदाबाद से बदलकर दिल्ली कर दिया गया है। इस घिसे-पिटे मामले पर सुप्रीम कोर्ट भी सुनवाई करने को तैयार हो गया है। इससे सुप्रीम कोर्ट की मंशा पर संदेह होना लाजिमी है। सुप्रीम कोर्ट को समझना चाहिए या फिर पूछना चाहिए कि जो मामला 2014 में खत्म हो चुका है, साल 2017 में गुजरात हाईकोर्ट ने भी एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट को सही मान चुका है, तो फिर उस मामले को 2018 में उठाने का क्या औचित्य है?
जहां तक जाकिया जाफरी को न्याय दिलाने की बात है तो आज तक इच्छा के अनुरूप नहीं हुए फैसले से कोई संतुष्ट हो पाया है। दूसरी बात यह कि आखिर बीते साढ़े चार साल तक वह क्या कर रही थीं? इतने दिनों पहले उन्होंने एसआईटी के फैसले को चुनौती क्यों नहीं दी? ये वही सवाल हैं जिससे सुप्रीम कोर्ट की मंशा भी जाहिर हो जाती है और साजिशकर्ताओं की साजिश भी।
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नरेंद्र मोदी को सीबीआई द्वारा जान से मारने की 6 बड़ी साज़िशों का हुआ पर्दाफाश !
1. अलोक वर्मा पीएमओ ऑफिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को झूठे केस में फ़साना चाहते थे।
2. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का फ़ोन टेप कराया था।
3. पी चिताम्बरम पूरे गिरोह का मुखिया।
4. अजित डोवाल ने किया कांग्रेस की इस गहरी साज़िश का पर्दाफाश।
कहते है अगर बहुत दिनों बाद राजपाठ चला जाय तो नयी ज़िन्दगी बहुत मुश्किल से बीतता है क्यूंकि हमें पुरानी ज़िन्दगी की आदत हो जाती है और हम नए ज़िन्दगी को मान नहीं पाते है ! और उस पुराने ऐश ओ आराम की ज़िन्दगी को वापस पाने के लिए हम कभी कभी सारे हदें पार कर देते है ! राजनितिक पार्टी कांग्रेस का भी अब यही हाल हो चूका है ! इतने सालों की गद्दी में बैठने की ज़िन्दगी अब न सिर्फ खतम बल्कि उनका अस्तित्व ही संकट में पड़ चूका है और इसलिए उनके दिमाग में सिर्फ एक ही बात आये दिन चलते रहती है मोदी हटाओ !
सूत्रों के खबर मुताविक कांग्रेस के इशारे पर अलोक वर्मा सीबीआई की छापा मारना चाहते थे ! और उनका असली मकसद था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को झूठे केस में फ़साना ! जी हां एक और कांग्रेस की बड़ी साज़िश का पर्दाफाश हुआ है जिससे भारतीय राजनीती में महा भूकंप आ गया है ! दरअसल कांग्रेस पिछले चुनाव में 30 में सिमट गयी थी लेकिन 5 साल बाद सारे साम वेद दंड सब कुछ अपनाने के बाद भी जब उनकी संख्या 100 भी छू नहीं पा रही है सारे एग्जिट पोल के अनुसार तो कांग्रेस को अब ये समझ में आ गया है की वो सत्ता में वापस आना तो दूर उनका राजनितिक सिंबल ही अब अस्तित्व में है ! और इन सबके लिए ज़िम्मेदार सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी है ! तो क्यों न उनको ही रस्ते से हटा दिया जाय !
नरेंद्र मोदी के खिलाफ साज़िश
1. अलोक वर्मा पीएमओ ऑफिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को झूठे केस में फ़साना चाहते थे
दरअसल अलोक वर्मा सीबीआई के लिए नहीं बल्कि सोनिया गाँधी के पार्टी ऑफिस के लिए काम करता था ! उनका मकसद था किसी भी तरह से 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किसी झूठे केस में फसाकर उसकी छवि को खतम कर दिया जाय ! ताकि मोदी सरकार संकट में आ जाये और देश में एक अराजकता का वातावरण फ़ैल जाए !
2. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का फ़ोन टेप कराया था
सूत्रों के मुताबिक अलोक वर्मा कांग्रेस के दलाली का काम करते थे ! ये अपने पद का दुरूपयोग करके सोनिया गाँधी समेत सारे कांग्रेस दिग्गजों के केस को जानबूझकर लटकाना चाहते थे ताकि कांग्रेस की छवि क्लीन और क्लियर रहे ! ये राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी के लिए दानवीर कर्ण के कवज और कुण्डल का काम कर रहे थे ! इतना ही नहीं इन्होने सोनिया गाँधी के इशारे पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल के बेटे शर्या डोवाल का फ़ोन भी टेप करना चाहते थे ! यहाँ आपको बता दे की राकेश अस्थाना भी अलोक वर्मा के साथ कांग्रेस से मिला हुआ था !
3. पी चिताम्बरम पूरे गिरोह का मुखिया
इस पूरी गैंग का मुखिया एक ऐसा शख्स है जिसे आप सब जानते है ! जी हां ये और कोई नहीं कांग्रेस के दिग्गज बागड़बिल्ले पी चिताम्बरम ! अलोक वर्मा चिताम्बरम के गिरोह के सदस्य थे जबकि राकेश अस्थाना अहमद पटेल के ग्रुप के सदस्य है ! वैसे आपके जानकारी के लिए बता दे की कांग्रेस का इस गिरोह का बहुत दूर तक पहुंच है और ये एक लम्बी शाखा है जहा पर पुलिस से लेकर वकील तक, सीबीआई से लेकर सरकारी अमला से लेकर न्यायपालिका से जज तक शामिल है !
4. अजित डोवाल ने किया कांग्रेस की इस गहरी साज़िश का पर्दाफाश
इसी गिरोह को ज़र से ख़तम करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक द्वारा अलोक वर्मा और राकेश अस्थाना को बाहर का रास्ता दिखा दिया जो एक प्रकार से कांग्रेस के खेमे पर मायूसी ला दी है ! इसलिए अजित डोवाल आये है जिसने इस कांग्रेस की भयानक साज़िश को किया नाकाम !
5. अलोक वर्मा सीबीआई की सारी गोपनीयं फाइल कोर्ट के बदले राहुल गाँधी को पहुँचता था
आपको जानकर हैरानी होगी की सीबीआई के समस्त गोपनीय फाइल और जानकारियां कोर्ट से पहुंचने के पहले चिताम्बरम के हाथ में होता था ! यहाँ तक की राहुल गाँधी को सीबीआई के हर बात की खबर आराम से पहुंचाई जाती थी ! इसका सबसे बड़ा उदहारण आपको राफेल के घटना से मिलेगी ! राफेल के सारे कागजात राहुल गाँधी को पहले से मिल जाती थी ! और तो और अलोक वर्मा राफेल के कागजात से नरेंद्र मोदी को फ़साना चाहते थे और इसीलिए राहुल गाँधी बार बार राफेल की ज़िक्र करते है ! गौर से देखिये राहुल बाबा के इस ट्वीट को –
Rahul Gandhi ✔@RahulGandhi
CBI चीफ आलोक वर्मा राफेल घोटाले के कागजात इकट्ठा कर रहे थे। उन्हें जबरदस्ती छुट्टी पर भेज दिया गया।
प्रधानमंत्री का मैसेज एकदम साफ है जो भी राफेल के इर्द गिर्द आएगा- हटा दिया जाएगा, मिटा दिया जाएगा।
देश और संविधान खतरे में हैं।
41.1K  1:45 PM - Oct 24, 2018
सोचिये कैसे राहुल गाँधी को ये पता चल गया की सीबीआई अधिकारी क्या काम कर रहा है ? इस ट्वीट से ये साफ़ हो गया की अलोक वर्मा एक बहुत ही भ्रष्ट सीबीआई अफसर है जो सिर्फ राहुल गाँधी और कांग्रेस की कठपुतली बन चूका था और उनके इशारे पे काम करता था !
6. अलोक वर्मा और उनके कुकर्म
वैसे अलोक वर्मा का पास्ट रिकॉर्ड भी कीचड़ से चमकीले है ! ऐसे प्रमुख केस जो कोर्ट में जान बूझकर लटकाया गया है जैसे की अगुस्ता वेस्टलैंड मामला जहा पर चार्जशीट अभी तक फाइल नहीं हुयी ! दुबई में गिरफ्तार आरोपी मिशेल की मामला को लटकाना हो, चिताम्बरम के खिलाफ एयरसेल मैक्सिस घोटाला मामला में चार्ज शीट जमा न देना ! या फिर लालू प्रसाद के रेलवे घोटाले में राकेश अस्थाना को रोकना या फिर वीकानेर ज़मीन घोटाला मामले में रबार्ट बदरा के मामले को रफा दफा करना ! ये सब मामले को लटकाने के पीछे अलोक वर्मा का बड़ा हाथ है !
इतने बड़े बड़े घोटाले और अभी तक सब लटका हुआ है ! आप भी ये सोचते है की आखिर इस देश में नेताओं की सज़ा क्यों नहीं होती ? अब आपको पता चल गया होगा की कैसे नेताओं अपना रास्ता आसनी से बना लेते है ! लेकिन इस बार उनका पाला नरेंद्र मोदी से पड़ा है जो सीधे तौर पर सिर्फ अपना राजधर्म पालन करते है ! और इस बार उसने असली ज़र अलोक वर्मा को ही छुट्टी में भेज दिया ! कांग्रेस ने बहुत अच्छी तरीका से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ साज़िश रची थी लेकिन वो एक कहावत है जिसके सर के ऊपर भगवान का हाथ हो ऊपर से जनता का आशीर्वाद फिर भला उसे कौन क्या हानि पंहुचा सकता है ! नरेंद्र मोदी के एक और सर्जिकल स्ट्राइक ने कांग्रेस के इस खतरनाक साज़िश को पर्दाफाश कर दिया !
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अदालत की चौखट पर बार-बार पटखनी –
सत्ता में रहते हुए कांग्रेस ने बार-बार संघ के कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित किया| दो-दो बार प्रतिबंध लगाकर हजारों स्वयंसेवकों को जेलों में यातनाएं दीं| पर हर बार प्रतिबंध हटाना पड़ा। फिर उसने संघ में काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों पर निशाना साधा, लेकिन न्यायालय ने हर बार उसे बैरंग लौटाया| इसके कुछ उदाहरण देखें -
1. इंदौर स्थित मध्य भारत उच्च न्यायालय (1955): ‘कृष्ण लाल बनाम मध्य भारत राज्य ’ –
फैसला - “किसी भी अस्थायी सरकारी कर्मचारी को यह कह कर सेवा से हटाया नहीं जा सकता की वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सदस्य है।”
2. पटना उच्च न्यायालय (1961): ‘मा. स. गोलवलकर बनाम बिहार राज्य ’ –
फैसला - “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समारोह पर दिया गया भाषण भारतीय दंड संहिता की धारा 153क के अधीन अपराध नहीं है।”
3. बम्बई उच्च न्यायालय नागपुर न्यायपीठ (1962): ‘चिंतामणि नुरगांवकर बनाम पोस्ट मास्टर जनरल कें.म. , नागपुर ’ –
फैसला - “किसी सरकारी कर्मचारी का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों में भाग लेना ‘विध्वंसक कार्य’ नहीं है तथा उसे इस आधार पर सरकारी सेवा से हटाया नहीं जा सकता। ”
4. उत्तरप्रदेश उच्च न्यायालय (1963): ‘जयकिशन महरोत्रा बनाम महालेखाकार, उत्तर प्रदेश’ –
फैसला - “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मात्र सदस्य होने के कारण किसी सरकारी कर्मचारी को अनिवार्य रूप से सेवा-निवृत्त नहीं किया जा सकता।”
5. जोधपुर स्थित राजस्थान उच्च न्यायालय (1964): ‘केदारलाल अग्रवाल बनाम राजस्थान राज्य तथा अन्य ’ – फैसला - “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भाग लेने के आधार पर सरकारी कर्मचारी की बर्खास्तगी न टिक सकने वाली है।”
6. दिल्ली स्थित पंजाब उच्च न्यायालय (1965): ‘मनोहर अम्बोकर बनाम भारत संघ तथा अन्य ’ –
फैसला - “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकलाप में भाग लेना न तो ‘विध्वंसक कार्य’ ही कहा जा सकता है और न ही गैर कानूनी है | सरकारी कर्मचारी को इस आधार पर दण्डित नहीं किया जा सकता ।”
7. बेंगलूर स्थित मैसूर उच्च न्यायालय (1966): ‘रंगनाथाचार अग्निहोत्री बनाम मैसूर राज्य तथा अन्य ’ –
फैसला - “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सदस्य होना न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति से वंचित रखने के लिए वैध कारण नहीं है।”
8. चंडीगढ़ स्थित पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय (1967): ‘रामफल बनाम पंजाब राज्य तथा अन्य ’ –
फैसला - “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शिविर में भाग लेने के आधार पर किसी सरकारी कर्मचारी को बर्खास्त नहीं किया जा सकता ।”
9. जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय (1973): ‘भारत प्रसाद त्रिपाठी बनाम मध्यप्रदेश सरकार तथा अन्य ’ –
फैसला - “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के किसी कार्यक्रम में भाग लेने के आधार पर किसी कर्मचारी की सेवा समाप्त नहीं की जा सकती | किसी अन्तरस्थ हेतु से जारी किया गया (इस आशय का) कोई आदेश वैध नहीं ठहराया जा सकता।”
10. उत्तरप्रदेश उच्च न्यायालय (1971) : ‘शिक्षा निदेशक, उत्तर प्रदेश तथा अन्य बनाम रेवत प्रकाश पांडे’ –
फैसला - “सरकारी सेवा के दौरान किसी नागरिक का ‘संगम का अधिकार’ निलंबित नहीं हो जाता ।”
11. गुजरात उच्च न्यायालय, अहमदाबाद (1970) : ‘डी. बी. गोहल बनाम जिला न्यायाधीश, भावनगर तथा अन्य ’ –
फैसला - “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सम्बन्ध में यह सिद्ध नहीं है की वह एक राजनैतिक आन्दोलन है, अतः (इस आधार पर) सरकारी कर्मचारी को सेवा से हटाया नहीं जा सकता | ”
12.अर्नाकुलम स्थित केरल उच्च न्यायालय (1981): ‘टी. बी. आनंदन तथा अन्य बनाम केरल राज्य तथा अन्य ’ – फैसला - “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को किसी सरकारी विद्यालय के भवन का उपयोग अपने कार्यक्रमों के लिए करने की विशेष सुविधा से वंचित नहीं किया जा सकता। ”
13. अर्नाकुलम स्थित केरल उच्च न्यायालय (1982) : ‘श्रीमती थाट्टुम्कर बनाम महाप्रबंधक, टेलिकम्युनिकेशंस, केरल मंडल ’ –
फैसला - “किसी व्यक्ति को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सदस्य होने के आधार पर सरकारी नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। ”
14.भारतीय उच्च न्यायालय (1983) : ‘मध्यप्रदेश राज्य बनाम राम शंकर रघुवंशी तथा अन्य ’ –
फैसला - “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों में भाग लेने के आधार पर किसी कर्मचारी की सेवा समाप्त नहीं की जा सकती। ”
15. अवैध गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (1993) : ‘केंद्रीय सरकार बनाम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ’ –
फैसला - “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को गैर-कानूनी घोषित करने के लिए कारण पर्याप्त नहीं हैं। ”
कांग्रेस के नेता  अतीत से सबक सीखना नहीं चाहते और न ही जनभावनाओं का आदर करना जानते हैं। कभी विदेशियों के सामने तथाकथित ‘हिन्दू आतंकवाद” का हौआ खडा कर चुके उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष अब खुद को आस्थावान हिन्दू साबित करने में एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं, और दूसरी तरफ हिंदू संगठनों के प्रति अपनी नफरत को छिपा भी नहीं पा रहे हैं।




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भारत विश्व का तीसरा सबसे धनी देश बनने की राह पर
 देश के सबसे अमीर मुकेश अंबानी ने  कहा कि भारत विश्व का तीसरा सबसे धनी देश बनने की राह पर है।  पहली तीन औद्योगिक क्रांतियों से चूक जाने के बाद भारत प्रौद्योगिकी पसंद युवा आबादी के दम पर अब चौथी औद्योगिक क्रांति की अगुवाई करने की स्थिति में है।
अंबानी ने 24वें मोबीकैम सम्मेलन में कहा कि भारत का डिजिटल बदलाव अतुल्य  है।  देश ने वायरलेस ब्राडबैंड के मामले में महज 24 महीने में 155वें स्थान से शीर्ष तक का सफर तय किया है। 1990 के दशक में जब रिलायंस तेल परिशोधन  परियोजनाएं बना रही थी, भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) करीब 350 अरब डॉलर था और  आज हमारी जीडीपी करीब तीन हजार अरब डॉलर की हो गई है और हम विश्व के तीसरे सबसे अमीर देश बनने की राह पर हैं।
अंबानी ने कहा कि मोबाइल कंप्यूटिंग वृहद स्तर पर डेटा की खपत के लिए उत्प्रेरक है और इसने युवा भारतीयों को व्यापक बदलाव वाली सोच के लिये उर्वर जमीन दी है। 'मैं पूरे यकीन के साथ कह सकता हूं कि अगले दो दशक में भारत विश्व की अगुवाई करेगा ।' पहली व दूसरी औद्योगिक क्रांतियों में भारत हाशिये पर रहा। कंप्यूटर केंद्रित तीसरी क्रांति में भारत ने दौड़ में भाग लेना शुरू किया।
 'चौथी औद्योगिक क्रांति अब हमारे ऊपर है। जिसने भौतिक, डिजिटल और जीववैज्ञानिक विश्व को दोफाड़ कर दिया है। मैं पूरे यकीन के साथ कह सकता हूं कि भारत के पास न सिर्फ चौथी क्रांति में भाग लेने का मौका है बल्कि देश इसकी अगुवाई कर सकता है।'
 'ऐसा इस कारण संभव है, क्योंकि आज का भारत पहले के भारत से बिल्कुल अलग है। भारत की बड़ी प्रौद्योगिकी केंद्रित आबादी इसकी मुख्य ताकत है। यह उद्यमिता के लिए समृद्ध एवं उर्वर जमीन है और देश, दुनिया भर में स्टार्टअप के सबसे तेज विकास की जमीन बनकर उभरा है। 
'आज देश में प्रौद्योगिकी आधारित स्टार्टअप की तीसरी सबसे बड़ी संख्या है। इससे पहले भारत ने कभी भी इस कदर उद्यमिता का उभार नहीं देखा था।'
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मोदी जी क्या कर रहे हैं ?
भारत - रूस और ईरान के बीच एक मीटिंग हो रहा है .. इस मीटिंग में India - Pacific Connectivity को अंतिम रूप दिया जा रहा है .. इस मीटिंग के बाद कभी भी ईरान चाबहार पोर्ट भारत को सौंप देगा .. इस मीटिंग के बाद मुम्बई से St. Petersberg तक का रास्ता खुल जाएगा ... इस माह ये पूरा होने की उम्मीद है ..
जब से चाबहार की ओपनिंग हुई है तबसे भारत 110 मीट्रिक टन गेहूँ और लगभग 2000 टन चना, मटर, मूँग, उड़द, अरहर आदि अफगानिस्तान को भेज चुका है ... चावल की खेप ईरान में भी उतारी जा चुकी है ..
एक मीटिंग भारत और अमेरिका की भी चल रही है .. इस मीटिंग के बाद ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबन्ध के दायरे से चाबहार पोर्ट और ईरान से भारत को तेल सप्लाई पर प्रभावी नहीं होंगे ऐसी पूरी उम्मीद है ... चाबहार को अमेरिका ने पहले ही प्रतिबन्ध के दायरे मुक्त कर दिया है .. तेल सप्लाई पर बात चल रही है .. IOCL और मंगलौर रिफाइनरी ने पहले ही ईरान को क्रूड आयल का आर्डर दे दिया है ...
अभी भारत ने पहली रेल भारत से नेपाल में चला कर ट्रायल कर लिया ... उधर भारत से म्यांमार - थाईलैंड - कम्बोडिया - वियतनाम - मलेशिया - इंडोनेशिया का सड़क रूट फाइनल हो चुका है ... जापान भारत के पूर्वोत्तर में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए हर सहायता देने को तैयार जिससे ये रूट जल्द से जल्द शुरू हो सके ... ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
क्या  भारत के सुप्रीम कोर्ट में भी महत्वाकांक्षा पनप रही है ?
क्या होगा जब किसी देश के सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश अपनी महत्वाकांक्षा को पूर्ण करने के लिए सरकारी मामलों में दखल देकर अपनी स्वंय की देख रेख में सरकारी कार्य का मुखिया बन जायेगा?
इसका सीधा सपाट उत्तर है पाकीस्तान के मुख्य न्यायाधीश जैसा जिन्होंने मुख्य न्यायाधीश के पद के नाम का बैंक में खाता खुलवाकर गिलगित बाल्टिस्तान में सिंधू नदी पर भाशा डैम के लिए विदेश में काम कर रहे पैकिस्तानियो और देश के पाकिस्तानियो से चंदा जमा करवाने का आदेश दिया है. इसका नयीजा यह निकला कि विदेश में बसे किसी भी पाकीस्तानी ने एक भी $डालर नही भेजा जबकि पाकिस्तान के अंदर रहने वाले कुछ एक पाकिस्तानी ₹10-10 का चंदा जरूर जमा कर रहे है.

क्या कुछ ऐसी ही महत्वाकांक्षा भारत के सुप्रीम कोर्ट में भी पनप रही है? यह तो आने वाला समय बताएगा लेकिन जैसा कि राफेल डील मामले में दाखिल की गई अनेको PIL पर जिस प्रकार से सुप्रीम कोर्ट ने अपनी ही कही गई बातों के विरूद्ध जाकर देश की सुरक्षा को ताक में रखते हुए भारत एंव फ्रांस सरकार के मध्य हुए समझौते को नकारते हुए मोदी सरकार से जानकारी प्राप्त करने का आदेश दिया है एंव टिप्पणी कर रहा है उससे तो इसी की प्रतिध्वनि निकलती है.

राफेल डील का मामला हर रूप में देश की सुरक्षा से सीधा जुड़ा मामला है. फ्रांस सरकार और भारत सरकार के मध्य समझौता हुआ था कि इस डील की जानकारी सरकार से बाहर नही जानी चाहिए क्योंकि इससे दोनों देशों की सुरक्षा एंव आक्रामक क्षमता प्रभावित होगी. राहुल गांधी, उसकी पार्टी एंव सम्पूर्ण विपक्ष को यह मालूम है कि इसकी जानकारी लोक सभा को भी जब लीक नही हुई तो किसी को भी नही बताई जा सकती . इसीलिए राहुल गांधी ने ढफली बजाना शुरू किया कि इस डील में मोदी ने चोरी की है.
राहुल की ढफली की आवाज पर मनोहर लाल शर्मा नाम के एक एडवोकेट जो दिल्ली गैंग रेप मामले में 5 बलात्कारियों की ओर से वकील थे और जिन्होंने महिलाओ के विरूद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी भी की थी, के द्वारा एक PIL डाली गई जिसकी सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पहली टीप्पणी थी की कोर्ट न तो कीमत की जानकारी मांगेगा न राफेल के तकनीक की, कोर्ट को सिर्फ यह बता दिया जाय कि खरीद की प्रक्रिया क्या थी?

सुविज्ञ है कि किसी भी सरकारी खरीद में 2 पहलू देखे जाते है:
1. खरीद में यदि किसी अधिकारी या जन प्रतिनिधि ने घुस खाये है तो इस पर जांच या कार्यवाही CVC करता है.
2. यदि सरकारी खरीद में फंड के व्यय में अनियमितता बरती गई है तो इसका आडिट CAG करके लोक सभा के PAC को सौपेगा जो उसका परीक्षण कर लोक सभा के पटल पर तखेगा.

ज्ञातब्य है कि राफेल डील मामले में CVC या CAG में से किसी की कोई निगेटिव रिपोर्ट नही है. राहुल गांधी भी हवाई फ़ायर करते रहे. वह भी किसी प्रकार का भष्ट्राचार को कोई साक्ष्य नही बता पाए है लेकिन जब 5 बलात्कारियों की तरफ वाले वकील मनोहर लाल शर्मा ने PIL से मिलती जुलती रीट यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी ने दाखिल की तो सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील की कीमत बताने को कहा. जबकि सुप्रीम कोर्ट को यह विदित है कि रक्षा मंत्री ने लोक सभा मे फोटो स्टेट पेपर दिखाते हुए बताया था कि फ्रांस सरकार और भारत सरकार के मध्य समझौता हुआ है कि इस डील की जानकारी सरकार से बाहर नही जानी चाहिए. इससे दोनों देशों की सुरक्षा एंव आक्रामक क्षमता प्रभावित होगी.

इन उपरोक्त वर्णित परिस्थितियो में 3 बातो का निष्कर्ष निकलता है कि देश का सुप्रीम कोर्ट:
1., CVC और CAG की रिपोर्ट के बिना भी किसी सरकारी खरीद में मात्र PIL के आधार पर सरकार से वह गोपनीय जानकारी भी उजागर करना चाहता है जिसकी गोपनीयता बनाये रखने के लिए भारत सरकार का फ्रांस सरकार के साथ समझौता हुआ है.
2. सुप्रीम कोर्ट 2 देशो के समझौते से बड़ा है.
3. चूंकि राफेल डील की जानकारी खुलने से चीन और पाकिस्तान को ही लाभ मिलेगा फिर भी देश की सुरक्षा से भी बड़ा सुप्रीम कोर्ट है.

@इतना तो निश्चित है कि सारी जानकारी खुलने के बाद निकलेगा ढाँक का तीन पात. क्योंकि राफेल डील में जो खरीद 2 सरकारों के बीच हुए समझौते के अंतर्गत हुई है उसमें एक धेले का भी भष्ट्राचार नही मिलेगा.



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Uma Shanker Singh











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रूपे कार्ड
मास्टरकार्ड और वीज़ा का नाम हम में से अधिकतर ने सुन रखा है असल में ये एक पेमेंट प्रोसेसिंग तकनीक है जो कि हमारे ट्रान्जेक्शन के लिए बैंकों से कुछ पैसे लेती है.
 2012 में मनमोहन सिंह सरकार और आरबीआई ने "रूपे कार्ड" लॉन्च किया था जो कि मास्टरकार्ड और वीसा कार्ड का देसी वर्जन था... लेकिन, विदेशी दबाब के कारण इसका प्रमोशन रोक दिया गया...! बाद में मोदी सरकार ने बैंकिंग सेक्टर में इसे प्रमोट करना शुरु किया और जन-धन वाले अकाउंट्स के कारण इसके उपयोग और संख्या में अचानक से वृद्धि आई.और, 2018 आते-आते इस कार्ड के प्रयोग का (संख्या का नहीं) ये आलम है कि पिछले चार सालों में भारत के एक अरब कार्डधारकों में से आधे रूपे कार्ड का प्रयोग करते हैं.
सिर्फ पिछले दो सालों में ही इसके प्रयोग की गति ऐसी तेज हुई है कि मास्टरकार्ड वालों को रुलाई आ रही है.
इसका मुख्य कारण यह है कि पहले इन दो विदेशी कम्पनियों की इस क्षेत्र में डूओपॉली थी और हर ट्रान्जेक्शन पर लगने वाली फीस भारत से बाहर जाती थी.लेकिन, मोदी ने लोगों के बीच "रुपे कार्ड" को लोकप्रिय बनाया और फिर ये कार्ड मात्र चार सालों में मास्टरकार्ड वालों की हालत पतली कर रही है.
फिर हालात ये हो गई कि मास्टरकार्ड के मालिक ट्रम्प के पास ये बताने के लिए पहुंच गए कि मोदी ने भारत में उनके बिजनेस को बर्बाद कर दिया है...और, वो लोगों को 'देशभक्ति' और 'देश सेवा' के नाम पर 'रूपे कार्ड' को इस्तेमाल करने कह रहा है.

आप ऐसी कम्पनियों की दुस्साहस देख कर दंग रह जाएंगे कि इन्हें "अमेरिका फ़र्स्ट" कहने वाले राष्ट्रपति के पास "इंडिया फ़र्स्ट" कहने वाले प्रधानमंत्री की शिकायत करनी पड़ रही है कि "भारत का पैसा" अमेरिका में "क्यों नहीं आ" रहा है.

मतलब ये उम्मीद लेकर शिकायत की जा रही है कि ट्रम्प इंडिया की बाँह मरोड़ेगा और कहेगा कि भारत के लोग भारतीय पेमेंट प्रोसेसर का प्रयोग न करें....बल्कि, अपना पैसा अमेरिका को दें..मोदी ने 'भीम' और 'रूपे' कार्ड को प्रमोट किया है...और, कहा कि "हाँ, ये देश सेवा है क्योंकि आप जब रूपे इस्तेमाल करते हैं तो उस पैसे से सड़कें बनती हैं".और, मास्टरकार्ड के मालिक ने मोदी के इसी बयान का ज़िक्र करके अपनी सरकार से मोदी की शिकायत की है कि वो तो "देश सेवा" का नाम लेकर लोगों को उकसा रहा है.

कहने का मतलब है कि वे चाहते हैं कि भारत के लोग ज़िंदगी भर किसी न किसी उनकी ग़ुलामी करते रहें...और, यहाँ का पैसा वहाँ भेजते रहें. आश्चर्य होता है कि एक विदेशी कम्पनी ऐसा सोच भी कैसे लेती है कि भारतीय लोग अपने देश में बनाई सेवाओं का प्रयोग न करें क्योंकि इससे उनका बिजनेस खराब होगा...???

मोदी से आप खूब असहमति रखिए, लेकिन इस तरह की ख़बरों को सुनकर अच्छा लगता है कि विदेशियों को जहाँ तक संभव है, "बाँस" करते रहना चाहिए.कई जगह आप बारगेनिंग कैपेसिटी में नहीं होते हैं और, आपको उनके सामने झुकना पड़ता है.लेकिन, इसका मतलब ये तो नहीं कि आदमी खड़ा होना ही छोड़ दे.






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अथ सीबीआई कथा --अजित डोभाल के आने से कोंग्रेसी साजिशें नाकाम..!
मोदी सरकार को गिराने के लिए एक साजिश का पर्दाफ़ाश हुआ है,कांग्रेस के इशारे पर आलोक वर्मा प्रधानमंत्री कार्यालय पर CBI का छापा मार कर नरेंद्र मोदी को बदनाम करने की साजिश में जुटे थे।आलोक वर्मा लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार को संकट में फंसाने की साजिश कर रहे थे.
भ्रष्टाचार के केसों को जानबूझ कर लटकाया जा रहा था..
आलोक वर्मा व राकेश अस्थाना दोनों कांग्रेस के लिए काम कर रहे थे. आलोक वर्मा चिदंबरम गिरोह द्वारा संचालित थे, तो अस्थाना अहमद पटेल के संदेसरा ग्रुप से लाभ प्राप्त करने वालों में शामिल थे. यही कारण है कि पीएम मोदी ने आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना, दोनों पर एक साथ सर्जिकल स्ट्राइक कर कांग्रेस के दोनों खेमे पर प्रहार किया है.
राकेश अस्थाना कभी भी सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा को पसंद नहीं थे क्योंकि वो उससे कहीं अधिक प्रसिद्ध हैं, इसलिए आलोक वर्मा को राकेश अस्थाना से निजी समस्या थी, राकेश अस्थाना वाड्रा-संजय भंडारी-अभिषेक वर्मा केस पर काम कर रहे थे
हुआ यह कि राकेश अस्थाना द्वारा एकत्र की गई जानकारी जो संजय भंडारी और वाड्रा के आपसी सम्बंध, भंडारी-वाड्रा की अवैध बिज़नस डील के अंतर्गत धन का आदान प्रदान, और कांग्रेस द्वारा संजय भंडारी को डसाल्ट से रफाल का ऑफसेट कॉन्ट्रेक्ट दिलवाने का दबाव बनाने की जानकारी किसी प्रकार मीडिया को लीक हो गई थी, जिससे ,राहुल गांधी, रॉबर्ट वाड्रा के कुकर्म देश की जनता के सामने उजागर हो गए थे,
इसके बाद आलोक वर्मा को राकेश अस्थाना कि जांच से भय लगने लगा और उसने प्रधानमंत्री कार्यालय से राकेश अस्थाना को हटाने की गुहार लगाई, जिसे मोदी ने नकार दिया,
हाल ही में मोइन कुरेशी मामले में भी अस्थाना को कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुई थी जिसमे मोइन कुरेशी व् सोनिया गांधी के विरुद्ध कुछ जानकारियां थी मोइन कुरेशी सोनिया गांधी और रॉबर्ट वाड्रा का अति करीबी है,अब आप समझ सकते हैं कि राकेश अस्थाना किसके लिए समस्या थे, और कौन उन्हें हटाना चाहता था,
आलोक वर्मा पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल के बेटे शौर्य डोवाल का फोन टेप करने का आरोप भी है यूपीए-2 में प्रणव मुखर्जी की जासूसी कराने में पहले ही उनका नाम सामने आ चुका है. उनका पूरा गिरोह है, जिसमे वकीलों से लेकर पुलिस व् सीबीआई अधिकारी, सरकारी अम्लों में बैठे बड़े आला अफसर से लेकर न्यायपालिका में बैठे कई जज तक शामिल बताये जा रहे हैं.
आलोक वर्मा मोदी को फंसाने के लिए राफेल के कागजात का जुगाड़ कर रहे थे और ये बात राहुल गाँधी को पहले से ही पता थी.मगर राहुल गाँधी खुद ही ट्वीट करके फंस गए. राहुल ने ट्वीट करके कहा कि, “सीबीआई चीफ आलोक वर्मा राफेल घोटाले के कागजात इकट्ठा कर रहे थे. उन्हें जबरदस्ती छुट्टी पर भेज दिया गया.
प्रधानमंत्री का मैसेज एकदम साफ है जो भी राफेल के इर्द गिर्द आएगा- हटा दिया जाएगा, मिटा दिया जाएगा”.
अगस्ता वेस्टलैंड मामले में अभी तक चार्जशीट न दाखिल की गई हो या फिर उसी मामले में दुबई में गिरफ्तार मुख्य आरोपी मिशेल के प्रत्यर्पण के मामले को लटकाना रहा हो. पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के खिलाफ एयरसेल-मैक्सिस घोटाला मामले में चार्जशीट न दाखिल करने की बात हो या उनके बेटे कार्ति चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवाई को सुस्त करना हो.,लालू यादव के घोटाला मामले में विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को जांच करने से रोकना हो या फिर बिकानेर जमीन घोटाले में राबर्ट वाड्रा की जांच रोकने का मामला हो. इन सारे मामलों में आलोक वर्मा पर सोनिया गांधी से लेकर उनके संबंधियों या उनके नजदीकी सहयोगियों को बचाने का आरोप है.
अगस्ता वेस्टलैंड में चार्जशीट दाखिल नहीं क्यों?
अगस्टा वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर घोटाला मामले में भ्रष्टाचार साबित होने के बाद भी आजतक चार्जशीट दाखिल नहीं की गई. आरोप है कि इसके पीछे आलोक वर्मा का ही हाथ बताया जा रहा है.इस घोटाले के मुख्य आरोपी (बिचौलिया) क्रिश्चियन मिशेल दुबई में गिरफ्तार किया गया. मिशेल ने भारतीय अधिकारियों के सामने स्पष्ट रूप से सोनिया गांधी का नाम लिया था दुबई की अदालत ने उसके प्रत्यर्पण की भी मंजूरी दे दी थी. लेकिन अंत में उसका प्रत्यर्पण नहीं हो पाया. . लेकिन आलोक वर्मा ने उनका प्रत्यर्पण नहीं होने दिया.
चिदंबरम के खिलाफ चार्जशीट नहीं
आरोप है कि आलोक वर्मा पी चिदंबरम के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर कांग्रेस आलाकमान को नाराज नहीं करना चाहते थे.जबकि ईडी और सीबीआई जांच के बाद यह करीब-करीब साबित हो चुका है कि पी चिदंबरम ने अपने बेटे को आर्थिक फायदा पहुंचाने के एबज में एयरसेल मैक्सिस को अवैध तरीके 3,500 करोड़ रुपये के लिए एफआईपीबी की मंजूरी दी थी, जबकि यह काम आर्थिक मामले की कैबिनेट कमेटी का है.
ईडी के प्रयास से उसकी गिरफ्तारी भी हो चुकी है, लेकिन सीबीआई ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है. कार्रवाई नहीं होने के लिए आलोक वर्मा को ही जिम्मेदारा माना जाता है.
यथावत के संपादक राम बहादुर राय ने अपने आलेख में एक जगह है लिखा है कि अगर लालू प्रसाद यादव रेलवे मंत्री नहीं बनाए गए होते तो उन्होंने अपने परिवार के लिए जो संपत्ति अर्जित की ही है वह नहीं कर पाते,ऐसे भ्रष्टाचारी को बचाने का आरोप आलोक वर्मा पर है. आरोप है कि जब विशेष निदेशक राकेश अस्थाना आईआरटीसी घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव की जांच कर रहे थे तो आलोक वर्मा ने उन्हें लालू प्रसाद यादव की जांच करने से रोक दिया था.
बलात छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा पर आरोप है कि बिकानेर में एक जमीन घोटाले में रॉबर्ट वाड्रा का नाम आया था. इस मामले की जांच सीबीआई को करनी थी, लेकिन आलोक वर्मा ने उस जांच को आगे ही नहीं बढ़ने दिया. आलोक वर्मा ने ही आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ जांच को रोक दिया था.
वामपंथी वकील प्रशांत भूषण की सहायता!
आरोप तो यह भी है कि आलोक वर्मा के कहने पर ही प्रशांत भूषण ने राकेश अस्थाना के खिलाफ जनहित याचिका दायर कर उनकी सीबीआई के विशेष निदेशक के पद पर हुई नियुक्ति को लेकर सवाल उठाया था.
आलोक वर्मा द्वारा लीक किये गए दस्तावेजों के आधार पर ही प्रशांत भूषण ने अस्थाना के खिलाफ स्टर्लिंग बायोटेक मामले से लेकर मोईन कुरैशी से संबंध के मामले को उछाला था.
पीएम मोदी के खिलाफ बीजेपी के मौकापरस्त नेताओं अरुण शौरी तथा यशवंत सिन्हा व् वामपंथी वकील प्रशांत भूषन के साथ मिलकर ये धूर्त आलोक वर्मा रफाल डील मामले में साजिश रच रहा था.
इस तिकड़ी ने सीबीआई को लिखी 132 पेज की चिट्ठी के आधार पर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील मामले में इनलोगों की मंशा पर पानी फेर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील की प्रक्रिया पर सुनवाई की बात करते हुए इन लोगों की साजिश का बेड़ा गर्क कर दिया.सुप्रीम कोर्ट से लात पड़ने के बाद ही इन लोगों ने आलोक वर्मा के माध्यम से सीबीआई के बहाने इस मसले को उठाने की योजना बनाई.
पूरे सीबीआई डिपार्टमेंट में कोई भी आलोक वर्मा से खुश नहीं है, और वह सभी जानते हैं कि आलोक वर्मा किसे बचाने का प्रयास कर रहे हैं, अस्थाना स्वयं आलोक वर्मा के इस आचरण, व्यवहार के बारे में खुलकर बोल चुके हैं और अपनी आपत्तियां दर्ज करवा चुके हैं।
अब बात राहुल गांधी के आरोप की तो प्रश्न उठता है कि यदि आलोक वर्मा रफाल की जांच कर रहे थे, तो किस संस्था, किस हायर अथॉरिटी, किस व्यक्ति के निर्देश पर कर रहे थे ? सीबीआई, सीवीसी(सेंट्रल विजिलेंस कमेटी) के अंतर्गत आती है, सीबीआई के पास सुप्रीम कोर्ट की तरह अपनी मर्जी से कोई केस उठाने अर्थार्थ सुओ-मोटो एक्शन लेने का कोई अधिकार नही हैं
वैसे रफाल मामले पर सुप्रीम कोर्ट में भी कांग्रेस ने पिटीशन दायर करवाई थी, उस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस को साक्ष्य और सबूत प्रस्तुत करने को कहा किंतु कांग्रेस वह नही प्रस्तुत कर सकी और सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस की पिटीशन ही खारिश कर दी थी यदि कोई सबूत नहीं है तो उसका अर्थ हुआ कि राहुल गांधी झूठ बोल रहे हैं,
कुल मिलाकर पीएम मोदी के खिलाफ षड्यंत्र किये जा रहे हैं. किसी तरह से उन्हें बदनाम कर दिया जाए या फिर उनकी ह्त्या करवा दी जाए ताकि कांग्रेस सत्ता में वापसी कर सके क्योकि कांग्रेस राज में भ्रष्टाचार व् लूट करना ऐसे अधिकारियों के लिए भी आसान रहता है.

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बान्द्रा स्टेशन की झोपडपट्टी में प्रतिवर्ष आग का रहस्य


मुम्बई में स्थित बांद्रा स्टेशन के आसपास चारों तरफ गहरी-घनी और गंदगी से लबरेज कई झोपडपट्टी मौजूद हैं, जिनमें से अधिकाँश का नाम “नवाज़ नगर”, “गरीब नगर”, “संजय गांधी नगर”, “इंदिरा गांधी नगर” वगैरह है. आप सोचेंगे इसमें ऐसी क्या ख़ास बात है, ऐसा तो भारत के कई रेलवे स्टेशनों के आसपास होता होगा... बान्द्रा की इन झोपडपट्टी (Biggest Slum Area of Asia) की ख़ास बात यह है कि इसमें प्रतिवर्ष बिना किसी खण्ड के, बड़ी जोरदार आग लगती है. ऐसे अग्निकाण्ड देश की किसी भी झोपडपट्टी में “नियमित” रूप से नहीं होते. आखिर इस आगज़नी का रहस्य क्या है?

बांद्रा झोपडपट्टी में लगने वाली यह आग हमेशा देर शाम को अथवा देर रात में ही लगती है, दिन में नहीं. ऐसी भीषण आग लगने के बाद बांद्रा स्टेशन पहुँचने वाले, वहाँ इंतज़ार करने वाले रेलवे यात्री घबराकर इधर-उधर भागने लगते हैं, डर के मारे काँपने लगते हैं (अभी कुछ सप्ताह पहले लगी आग के दौरान एक-दो यात्रियों की मौत आपाधापी में रेलवे ट्रैक पर आने से हो गयी. परन्तु सर्वाधिक आश्चर्य इस बात का है कि जब भी इन झोपडपट्टी में आग लगती है, तो यहाँ के निवासी बड़ी शान्ति के साथ चुपचाप खाली स्थानों, रेलवे स्टेशन के आसपास एकत्रित हो जाते हैं. उन्हें कतई भय नहीं होता, आग बुझाने की जल्दबाजी भी नहीं होती.


स्वाभाविक रूप से इन झोपडपट्टी की गलियाँ बेहद सँकरी होने के कारण अग्निशमन (फायर ब्रिगेड) और पुलिस की गाड़ियाँ अथवा एम्बुलेंस अन्दर तक नहीं पहुँच पातीं... कुल मिलाकर बात यह कि झोपडपट्टी पूरी जल जाने तक यहाँ के “निवासी” शान्ति बनाए रखते हैं. इसके बाद एंट्री होती है टीवी कैमरों, चैनलों के संवाददाता और पत्रकारों की, जो गलियों में पैदल घुसकर तमाम फोटो खींचते हैं, चिल्ला-चिल्लाकर बताते हैं कि “देखो, देखो... गरीबों का कितना नुक्सान हो गया है...”. कुछ ही समय में (या अगले दिन कुछ महिलाएँ कैमरे के सामने अपनी छाती कूटते हुए पधारती हैं, रोना-धोना मचाकर सरकार से मुआवज़े की माँग करती हैं. ज़ाहिर है कि अगले दिन की ख़बरों में, समाचार पत्रों, चैनलों इत्यादि पर झोपडपट्टी के इन “गरीबों”(??) के प्रति सहानुभूति जगाते हुए लेख और चर्चाएँ शुरू हो जाती हैं. आगज़नी के कारण जिन गरीबों का नुक्सान हुआ है, जिनकी झोंपड़ियाँ जल गयी हैं, उनका पुनर्वास हो ऐसी मांगें “नेताओं” द्वारा रखी जाती हैं.

कथित बुद्धिजीवी और कथित संवेदनशील लोग आँसू बहाते हुए बांद्रा की झोपडपट्टी वाले इन गरीबों के लिए सरकार से पक्के मकान की माँग भी कर डालते हैं.

ज़ाहिर है कि इतना हंगामा मचने और छातीकूट प्रतिस्पर्धा होने के कारण सरकार भी दबाव में होती है, जबकि कुछ सरकारें तो इसी आगज़नी का इंतज़ार कर रही होती हैं. इन कथित गरीबों को सरकारी योजनाओं के तहत कुछ मकान मिल जाते हैं, कुछ लोगों को कई हजार रूपए का मुआवज़ा मिल जाता है... इस झोपडपट्टी से कई परिवार नए मकानों या सरकार द्वारा मुआवज़े के रूप में दी गयी “नई जमीन” पर शिफ्ट हो जाते हैं...


इसके बाद शुरू होता है असली खेल. मात्र एक सप्ताह के अन्दर ही अधिकाँश “गरीबों”(??) को आधार कार्ड, PAN कार्ड, मतदाता परिचय पत्र वगैरह मिलने शुरू हो जाते हैं. मात्र पंद्रह दिनों के भीतर उसी जले हुए स्थान पर नई दोमंजिला झोपडपट्टी भी तैयार हो जाती है, जिसमे टीन और प्लास्टिक की नई-नकोर चद्दरें दिखाई देती हैं. कहने की जरूरत नहीं कि ऐसी झोपडपट्टी में पानी मुफ्त में ही दिया जाता है, बिजली चोरी करना भी उनका “अधिकार” होता है. झोपडपट्टी में थोड़ा गहरे अन्दर तक जाने पर पत्रकारों को केबल टीवी, हीटर, इलेक्ट्रिक सिलाई मशीनें वगैरह आराम से दिख जाता है (केवल सरकारों को नहीं दिखता).

प्रतिवर्ष नियमानुसार एक त्यौहार की तरह होने वाली इस आगज़नी के बाद रहस्यमयी तरीके से 1500 से 2000 नए-नवेले बेघर की अगली बैच न जाने कहाँ से प्रगट हो जाती है. जली हुई झोपडपट्टी के स्थान पर नई झोपड़ियाँ खड़ी करने वाले ये “नए प्रगट हुए गरीब और बेघर” वास्तव में गरीब होते हैं. इन्हें नई झोंपड़ियाँ बनाने, उन झोपड़ियों को किराए पर उठाने और ब्याज पर पैसा चलाने के लिए एक “संगठित माफिया” पहले से ही इन झोपडपट्टी में मौजूद होता है. न तो सरकार, न तो पत्रकार, न तो जनता... कोई भी ये सवाल नहीं पूछता कि जब जली हुई झोपडपट्टी में रहने वाले पूर्ववर्ती लोगों को नई जगह मिल गयी, कुछ को सरकारी सस्ते मकान मिल गए, तो फिर ये “नए गरीब” कहाँ से पैदा हो गए जो वापस उसी सरकारी जमीन पर नई झोपडपट्टी बनाकर रहने लगे?? कोई नहीं पूछता... नई बन रही झोपडपट्टी में ये नए आए हुए “गरीब मेहमान” हिन्दी बोलना नहीं जानते, उनकी भाषा में बंगाली उच्चारण स्पष्ट नज़र आता है...


ये “गरीब”(??) हमेशा दिन भर मुँह में गुटका-पान दबाए होते हैं (एक पान दस रूपए का या एक तम्बाकू गुटका भी शायद दस रूपए का मिलता होगा). इस झोपडपट्टी में आने वाले प्रत्येक “गरीब” के पास चारखाने की नई लुंगी और कुरता जरूर होता है... उनका पहनावा साफ़-साफ़ बांग्लादेशी होने की चुगली करता है. नवनिर्मित झोपडपट्टी में महाराष्ट्र के अकाल-सूखा ग्रस्त क्षेत्रों का किसान कभी नहीं दिखाई देता. इन झोपडपट्टी में मराठी या हिन्दुस्तानी पहनावे वाले साधारण गरीब क्यों नहीं दिखाई देते, इसकी परवाह कोई नहीं करता. दो-चार पीढियों से कर्ज में डूबे विदर्भ का एक भी किसान बांद्रा की इन झोपडपट्टी में नहीं दिखता?? ऐसा क्यों है कि बान्द्रा स्टेशन के आसपास एक विशिष्ट पह्नावेम विशिष्ट बोलचाल वाले बांग्लाभाषी और “बड़े भाई का कुर्ता, तथा छोटे भाई का पाजामा” पहने हुए लोग ही दिखाई देते हैं?? बांद्रा स्टेशन के आसपास चाय-नाश्ते की दुकानों, ऑटो व्यवसाय, अवैध कुली इत्यादि धंधों में एक “वर्ग विशेष” (ये धर्मनिरपेक्ष शब्द है) के लोग ही दिखाई देते हैं??

अब अगले साल फिर से बांद्रा की इस झोपडपट्टी में आग लगेगी... फिर से सरकार मुआवज़ा और नया स्थान देगी... फिर से कहीं से अचानक प्रगट हुए “नए गरीब” पैदा हो जाएँगे... झोपडपट्टी वहीं रहेगी... अतिक्रमण वैसा ही बना रहेगा... गुंडागर्दी और लूटपाट के किस्से वैसे ही चलते रहेंगे... लेकिन ख़बरदार जो आपने इसके खिलाफ आवाज़ उठाई... आप तो चुपचाप अपना टैक्स भरिये.... वोटबैंक राजनीति की तरफ आँख मूँद लीजिए. और हाँ!!!

यदि आप ये सोच रहे हैं कि यह “गरीबी और आगज़नी का यह खेल” केवल बांद्रा स्टेशन के पास ही चल रहा है, तो आप वास्तव में बहुत नादान हैं... यह खेल बंगाल के कई जिलों में चल रहा है, देश के कई महानगरों में बड़े आराम से चल रहा है, एक दिन यह झोपडपट्टी खिसकते-खिसकते आपके फ़्लैट के आसपास भी आएगी, तब तक आप चादर तानकर सो सकते हैं .Written by desiCNN

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