Thursday, 26 May 2016

आखरी हिन्दू सम्राट की गौरव गाथा ...


आखरी हिन्दू सम्राट हेमचन्द्र विक्रमादित्य को जब आप पढ़ना शुरू करते हैं तो आपका सीना 56 इंच का हो जाता है…लेकिन  इस महान योधा का इतिहास ही जला दिया गया है ...
हिन्दू लोग मारे-काटे जा रहे थे और किसी की भी हिम्मत नहीं हो रही थी कि वह इस कत्लेआम को रोक सके. तभी दिल्ली की राजनीति में हेमचन्द्र विक्रमादित्य का आगमन होता है और यह वीर हिन्दू योद्धा दिल्ली को आजादी दिला देता है.
आप अगर हेमचन्द्र विक्रमादित्य का इतिहास पढेंगे तो आपको यहाँ नजर आएगा कि यह योद्धा कितनी चालाकी से लड़ा और सबसे बड़ी बात कि इसने अकबर जैसे राजा की सेनाओं को मात दी थी. मौत का कफ़न सर पर बांधकर जब इसकी सेना लड़ती थी तो अच्छे-अच्छों की बहादुरी पानी भरने चली जाती थी.
तो आज हम आपको हेमचन्द्र विक्रमादित्य का पूरा शासनकाल बताने वाले हैं. आप आज जान जायेंगे कि कैसे इस योद्धा ने जीरो से हीरो तक का सफ़र तय किया था.
हेमचन्द्र विक्रमादित्य का बचपन
इतिहास में ऐसा वर्णन है कि शेरशाह के उत्तराधिकारी इस्लामशाह की नजर एक बार रिवाड़ी में हाथी की सवारी करते हुए हेमचंद्र पर पड़ी थी. इस्लामशाह हेमचंद्र को अपने साथ ले गए और इनको शानाये मण्डी,  दरोगा ए डाक चौकी तथा प्रमुख सेनापति ही नहीं बल्कि अपना निकटतम सलाहाकार बना दिया था. ऐसा इस्लामशाह ने सिर्फ और सिर्फ इनकी प्रतिभा को देखते हुए किया था.
सन 1552 ई. में इस्लामशाह की मत्यु पर इसके 12 वर्षीय पुत्र फिरोज खां को राजा घोषित किया गया था परन्तु तीन दिन के बाद आदित्यशाह सूरी ने उसकी हत्या कर दी थी.
आदित्यशाह कैसा राजा था?
आदित्यशाह अपनी अमीरी में रहने वाला और शराबी किस्म का राजा था. आदित्यशाह को हेमचन्द्र विक्रमादित्य  की काबिलियत पर पूरा भरोसा था और इसने हेमचन्द्र को अपनी सारी बागडौर दे दी थी. हेमचन्द्र ने इस विश्वास का आदर किया और आदित्यशाह के लिए इरान तक लड़ाई लड़ी थी.
एक बार ऐसा भी बोला गया है कि आदित्यशाह के खिलाफ चारों तरफ विद्रोह भड़क गया था तब हेमचन्द्र ने सबके मुंह को बंद कर दिया था. इसने एक-एक करके आदित्यशाह के सभी शत्रुओं को पराजित कर दिया.
सन 1556 में जब हुमायूँ आया
सन 1556 में जब बाबर का बेटा हुमायुं आया तो उसने आदित्यशाह पर हमला कर दिया.
इससे घबराकर यह राजा तो चुनार भाग गया लेकिन हेमचन्द्र को पता था कि अगर हुमायूँ को हराया तब अपना साम्राज्य खड़ा करने का वक़्त आ जायेगा. कुछ ऐसा ही हुआ और हुमायूँ खुद ही मारा गया था. तब हेमचन्द्र विक्रमादित्य ने अपनी सारी सेना को जोड़कर पूरे दम से आसपास के राजाओं पर हमला कर दिया. अकबर की सेनायें भी आसपास थीं और उनको भी हेमचन्द्र विक्रमादित्य की सेना ने मौत के घाट उतार दिया.
ऐसा कई जगह लिखा हुआ है कि हेमचन्द्र ने आगरा पर भी कब्जा कर लिया था और तब वह दिल्ली की ओर बढ़ा था.
वह दिन क्या बताया है जब दिल्ली को मिली थी आजादी?
6 अक्तूबर, 1556 को तुगलकाबाद में एक युद्ध हुआ था. इसमें लगभग 3000 मुगल सैनिक मारे गए थे. यह दिन दिल्ली की आजादी का भी दिन था. कई वर्षों बाद दिल्ली पर किसी हिन्दू राजा का राज कायम हो पाया था.
तो इस तरह से हेमचन्द्र विक्रमादित्य ने दिल्ली पर भगवा झंडा फिर से लहराया था.
इस महान राजा के आगे के सफ़र को हम अपने अगले लेख में लेकर आयेंगे. लेकिन तब तक आपको इस महान राजा के बारें में सभी जानकारी अपने बच्चों और बड़े सभी को बताने की आवश्यकता है ताकि सभी जान सकें कि हेमचन्द्र विक्रमादित्य नाम के हिन्दू योद्धा ने दिल्ली को मुगलों से आजाद कराया था.

 दैनिक जागरण में छपा ये लेख तुफैल अहमद द्वारा लिखा गया है जो मिडिल ईस्ट मीडिया रिसर्च इंस्टीट्यूट, वाशिंगटन से संबद्ध हैं.. जिसकी चर्चा सोशल मीडिया पर काफी जोरों से है अपने पाठकों के लिए उस इस लेख को हम अपने वेब स्थल पर प्रकाशित कर रहे है..

       गत 23 जून को पाकिस्तानी पुलिस ने एक लड़के की तब हत्या कर दी जब वह फैसलाबाद में खिलौने वाली एक बंदूक के साथ सेल्फी ले रहा था, लेकिन पाकिस्तानी जनता ने इसका विरोध नहीं किया।
         अगर इजरायली पुलिस की गोली से एक फलस्तीनी बच्चा घायल हो जाए तो दुनिया भर के वामपंथी प्रदर्शन करेंगे और पत्रकार रिपोर्ट करेंगे। जब अमेरिका ने इराक में हमला किया तो युद्ध विरोधी कार्यकर्ताओं ने दुनिया भर में प्रदर्शन किया। हाल में जब सऊदी अरब ने यमन पर हवाई हमले किए तो युद्ध विरोधी कार्यकर्ता सोने चले गए। पाकिस्तानी सेना बलूचिस्तान में नियमित रूप से लोगों की हत्या करती है, लेकिन पाकिस्तानी इसके खिलाफ खड़े नहीं होते। भारत में मानवाधिकारों की चिंता का दावा करने वाले सेक्युलर पत्रकारों को तब गुस्सा नहीं आता जब पीडि़त हिंदू होते हैं।
        भारतीय सेक्युलरवाद की आंखों पर एक खास किस्म का चश्मा चढ़ा हुआ है। इखलाक की हत्या से गुस्साए सेक्युलर पत्रकारों ने कई हत्याओं पर चुप्पी साध ली। पिछले अगस्त में सेना के जवान वेदमित्र चौधरी की मेरठ के पास हरदेवनगर में भीड़ ने पीटकर हत्या कर दी। मार्च में एक मुस्लिम लड़की के साथ शादी करने पर बिहार के हाजीपुर में एक हिंदू की हत्या कर दी गई। पिछले जून में आंध्र में इलुरू के पास एक व्यक्ति को भीड़ ने मार डाला। जून में ही मुंबई के पश्चिम भांडुप इलाके में भीड़ ने एक व्यक्ति की हत्या कर दी। सेक्युलर पत्रकारों के चश्मे इन हत्याओं को देखने से रोकते हैं। भारतीय सेक्युलरवाद को मुस्लिम खून का स्वाद लग गया है।
        भारतीय सेक्युलरवाद पर एक खास रंग का चश्मा ही नहीं चढ़ा, वह आधा पाकिस्तानी भी है। सेक्युलर अखिलेश यादव ने लखनऊ में गुलाम अली की आवभगत की। अरविंद केजरीवाल ने भी गुलाम अली से बात कर दिल्ली में उनका कार्यक्रम तय किया, लेकिन केजरीवाल और अखिलेश ने ऑस्कर पुरस्कार विजेता संगीतकार एआर रहमान को तब आमंत्रित नहीं किया जब बरेलवी संगठन रजा अकादमी के फतवे के कारण 13 सितंबर को दिल्ली में उनका संगीत कार्यक्रम रद कर दिया गया। सेक्युलरवाद भारतीय मुस्लिम गायकों को पसंद नहीं करता। यह सलमान रश्दी जैसे भारतीय लेखकों को भी पसंद नहीं करता। 
      एक अन्य सेक्युलर नेता ममता बनर्जी ने भी गुलाम अली का यह कहते हुए समर्थन किया कि संगीत की कोई अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं होती, लेकिन वे बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन का समर्थन नहीं करेंगी।
         भारतीय सेक्युलरवाद सचमुच पाकिस्तानी है, एक चौथाई बांग्लादेशी भी नहीं। भारतीय सेक्युलरवाद राष्ट्रवाद के प्रतिकूल भी है। सेक्युलर वकील आतंकी याकूब मेमन का जीवन बचाने आधी रात को उच्चतम न्यायालय पहुंच गए, लेकिन आम भारतीयों के मृत्युदंड पर वे चुप बैठे रहते हैं।
        निखिल वागले ने लिखा: ‘सेक्युलरवाद के बिना भारत हिंदू पाकिस्तान है।’ भारतीय सेक्युलरवाद भारतीय तक नहीं है। यह गोमांस खाए बिना अधूरा है। यह गोमांस खाना पसंद करता है, क्योंकि पाकिस्तानी गोमांस खाते हैं। यह मूलत: पाकिस्तानी है। 1947 में हमारे लोगों ने सोचा कि वे भारतीय इलाके का एक टुकड़ा छोड़कर स्थायी शांति पा सकते हैं। मनमोहन की सेक्युलर सरकार कारगिल में आधुनिक समय का सबसे बड़ा जिहाद खड़ा करने वाले मुशर्रफ के साथ बातचीत में कश्मीर के एक हिस्से को पाकिस्तान को सौंपने के काफी करीब पहुंच गई थी।
अपनी ऐतिहासिक किताब ‘ऑन वार’ में जर्मन सैन्य रणनीतिकार कार्ल नॉव क्लॉसविज ने लिखा है: 
     ‘युद्ध दूसरे तरीकों से राजनीति को जारी रखना है।’ भारतीय पाकिस्तानी गायकों को यहां नहीं चाहते, क्योंकि पाकिस्तान भारत के खिलाफ एक तरह से युद्ध ही लड़ रहा है। टीवी और सोशल मीडिया के जरिये भारतीय दूसरे तरीकों से जारी पाकिस्तान के युद्ध को समझते हैं। पाकिस्तान ने औपचारिक तरीके से युद्ध की घोषणा नहीं की है, लेकिन भारतीय इस तथ्य से परिचित हैं कि वे युद्ध की स्थिति में हैं।
       आमिर खान की फिल्म सरफरोश ने हमें दिखाया कि पाकिस्तान गजल गायकों के वेश में हथियार तस्करों को भेजता है। भारतीय सेक्युलरवाद इस्लामी भी है। 2012 में सेक्युलर कांग्रेस सरकार ने जयपुर में सलमान रश्दी को बोलने की अनुमति नहीं दी, क्योंकि सेक्युलरवाद का इस्लामियों के साथ निकट का रिश्ता है। ममता बनर्जी तसलीमा नसरीन का समर्थन नहीं करती हैं, क्योंकि वे अपने राज्य में इस्लामियों के साथ खुले गठबंधन में हैं।
      2013 में केजरीवाल ने मुस्लिम मतों के लिए इस्लामी धार्मिक नेता तौकीर रजा खान से भेंट करने के लिए बरेली की यात्रा की। 
    1986 में शाहबानो मुकदमे में राजीव गांधी के सेक्युलरवाद ने इस्लामी धार्मिक नेताओं के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। भारतीय सेक्युलरवाद इस्लामियों के समर्थन के बिना अधूरा है। एक अक्टूबर को सेक्युलर लेखिका शोभा डे ने ट्वीट किया: ‘मैंने गोमांस खाया। आओ और मुझे मार डालो।’ सवाल है कि क्या वे गेट वे ऑफ इंडिया पर मुहम्मद साहब का कार्टून भी बनाएंगी? 
     चार अक्टूबर को एक सेक्युलर पत्रकार ने भारतीयों से ट्विटर पर इस हैशटैग के साथ ट्वीट करने का अनुरोध किया कि ‘मैं गोमांस खाता हूं।’ सवाल है कि क्या सेक्युलर पत्रकार जामा मस्जिद के सामने कार्टून बनाएंगे? गुस्सा गोमांस या कार्टून को लेकर नहीं है। 
       भारतीय युवक सेक्युलरवाद के दोहरे मापदंड को लेकर चिंतित हैं। अगर आप अपने किचेन से कार्टून बनाने को इच्छुक हैं तो वे आपके गोमांस खाने के अधिकार का समर्थन करेंगे। एक दूरसंचार कंपनी के साथ मिलकर एक सेक्युलर टीवी चैनल ने बाघ बचाओ अभियान शुरू किया। आखिर गाय बचाओ अभियान क्यों नहीं?
भारत की वास्तविकता यह है:
 आमिर खान ने पीके फिल्म बनाई जिसमें बाथरूम में बंद भगवान शिव धमकाए जाते हैं, लेकिन वे मुहम्मद साहब पर फिल्म नहीं बना सकते। हमारे राष्ट्रीय विमर्श में यही असंतुलन है।
 इसे पत्रकार भी प्रोत्साहित कर रहे हैं। भारत तमाम समाचार कक्षों से फासीवादी उभार को झेल रहा है। भारतीय पत्रकार अपने दोहरे रवैये के कारण कभी न्यूयार्क या दादरी में भारतीयों द्वारा ही पीटे जाते हैं। सोशल मीडिया पर उन्हें दलाल, प्रेस्टिच्यूट या बाजारू मीडिया कहा जाता है, क्योंकि वे एक बंगले या अन्य किसी लाभ के लिए अपनी आत्माएं बेच रहे हैं। 
यह सेक्युलर फासीवादी प्रवृत्ति हमें बांटकर जीतती है। इस सबके बीच यह ज्यादा जरूरी है कि पुलिस कानून अपने हाथ में लेने वालों से सख्ती से निबटना सीखे।


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आज से दो वर्ष पहले नरेन्द्र दामोदरदास मोदी प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद जब पहली वार देश में लोकतंत्र के मंदिर संसद के दरवाजे पर पहुंचे थे तब उन्होंने संसद की चौखट को साष्टांग दंडवत करके अपना सम्मान दिया था 
..क्या आपने किसी और प्रधानमंत्री को कभी ऐसा करते देखा था !
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अभी दो साल पहले तक, वरिष्ठ पत्रकार, एक्सपर्ट और न जाने कौन-२ ये कहते नहीं थकते थे की इस देश में केवल गठबंधन वाली सरकार ही बन सकती है! ये कहा जाता था की इस देश में, किसी एक पार्टी को अथवा एक व्यक्ति को पूर्णतया अपने दम पर सरकार बनाने के लिए कभी समर्थन नहीं मिलेगा! लेकिन, मोदी लहर ऐसी चली की कांग्रेस जैसों का सूपड़ा तो साफ़ हुआ ही, देश को कई दशकों में पहली बार एक शक्तिशाली और स्थिर सरकार मिली!
     आज करोड़ों की तताद में भारतीय, मोदी जी का इतना सम्मान करते हैं! ऐसा क्यों है की एक दशक से अधिक समय तक, मोदी के खिलाफ, सोनिया-प्रोयोजित मीडिया कैंपेन चलने के बाद भी, इतने सारे लोग, मोदी के साथ चुनाव से पहले भी खड़े थे, और आज भी खड़े हैं? ऐसा क्या है नरेन्द्र मोदी में? जवाब एक नहीं, अनेकों हैं,

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मोदी सरकार के 2 साल मे किए हुए कुछ काम ..!
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1. जम्मू कटरा प्रोजेक्ट पिछले 10 सालो से बंद था उसे 1 साल में पूरा किया और आप जम्मू से मात वैष्णव देवी 20 रु में जा सकते हो। वर्ना टैक्सी वाले 2500 रु लेते है।
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2. आज तक भारत अरुणाचल में हाईवे नहीं बना सका, पर मोदी सरकार ने 1 साल में रोड बनाके पूर्ण किया (China के काफी विरोध के बाद भी).. और अरुणाचल प्रदेश को पूर्ण रूपसे भारत को जोड़ दिया।
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3. आज भारत की अपनी navigation सिस्टम (IRNSS) है। ये मोदी की अबतक की सबसे बड़ी उपलब्धि है.. क्योंकी करगिल वॉर में अमेरिका ने भारत को GPS डाटा नहीं दिया था। आज भारत का अपना GPS लॉन्च हुआ है जिसका नाम है IRNSS
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4. अब तक 10,00,00,000 LED बल्ब वितरित किये गए, 21% बिजली बचत हो गयी है। 5. अब तक 7500+ गांव में बिजली पहुंचाई गयी। 6. इलेक्ट्रिसिटी निर्माण में 38% की बढ़ोतरी हुई 
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7. रेलवे ट्रैक बनाने का काम कांग्रेस में 0.6 km/day होता था। मोदी सरकार का 3.4 km/day है। (8) रोड कंस्ट्रक्शन कांग्रेस में 3.7 km/day थी। मोदी सरकार 10.3 km/day है। सिर्फ 2 साल में 7063 km रोड बन चुकी है।
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9. संजय गांधी निराधार योजना में केंद्र सरकार निराधार लोगो को 100 रु महीना देती थी ओ आज 600 रु महीना हो गया। 2014 तक वो पैसा केंद्र से राज्य सरकार को आता था और राज्य सरकार 3 महीने का गैप रखके वो पोस्ट के द्वारा निराधार व्यक्ति तक पहुँचाता था। (3 महीने वो पैसा हजारो करोड़ कौन और कंहा यूज़ होता था नहीं पता)
मोदीजी ने 24 करोड़ बैंक अकाउंट खोले (गिनिस बुक वर्ल्ड रिकार्ड) और गरीब का पैसा सीधा बैंक अकाउंट में।... 0 भ्रस्टाचार ..!
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10. मुस्लिम बुनकर बनारस, कोल्कता, लखनऊ से एक यूनियन बनाई गई उनके माल का एक ब्रांड बनाया गया और वह ब्रांड अभी अमेरिका या यूरोपियन देशो में काफी महंगे भाव में बिकता है। फायदा बुनकरों को हुआ और देश को भी
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11. कैलास मानसरोवर का रास्ता 1962 से बंद था। मोदीजी के डिप्लोमेटिक वे से China ने वह रास्ता खोल दिया, अब यात्रा 24 घंटे में होती है पहले 93 घंटे लगते थे।
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12. कोयला घोटाला कांग्रेस ने 230 कोयला खदाने 1,80,000 करोड़ में बेचीं थी। सारे कॉन्ट्रैक्ट सुप्रीम कोर्ट ने cancel किये... मोदी सरकार ने सिर्फ 24 खदाने 2,20,000 करोड़ में बेचीं...!
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13. ये ऐसा पहला PM है जिसने पुरे देश के अंदर एक भावना जागृत की, की महिलाएं हमारी इज़्ज़त है और हम उन्हें खुले में शौच के लिए भेजते है. जिसे बीमारिया भी फैलती है. सिर्फ 2 साल में 7,00,00,000 टॉयलेट्स बन चुके है पुरे देश में । 14. मोदीजी ने स्कूल में बच्चियों के लिए टॉयलेट कम्पलसरी किये।
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15. ये ऐसा पहला प्रधान मंत्री है जो जी तोड़ कोशिश कर रहा है की भारत को UN में स्थाई सदस्यता मिले। 
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16. अब तक ये सरकार पे कोई भ्रस्टाचार का दाग नहीं लगा।
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17. congress के 65 सालो तक हमें भगतसिंह अशपक उल्लाह खान राजगुरु सुखदेव "आतंकवादी" करके पढ़ाया गया। पहली बार इतिहास सच्चा लिखकर इन्हे "शहीद" बताया
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18. महात्मा गांधी के बाद कोई पहला व्यक्ति आया जिसने बोला की स्वच्छ भारत होना चहिये। स्वछता अभियान की शुरूआत की। 
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19. आज तक ट्रांसपोर्ट देश के अंतर्गत मामले में रोड से या ट्रैन से या एयर से होता था पहली बार पब्लिक ट्रांसपोर्ट और गुड्स ट्रांसपोर्ट पानी के द्वारा हो रहा है। 
जिसमे टाइम पैसा और अंतर कम हो गया है।
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20. आज तक सिलेंडर की सब्सिडी अम्बानी को और हमको सामान थी, पहला PM जिसने बोला की आपको सब्सिडी की जरूरत नहीं है तो उसे वापस करिये।
लोगो में एक चेतना जगी और देखते देखते 1,32,00,000 लोगो ने सब्सिडी छोड़ दी।
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21. इंडिया पाक बॉर्डर पर Laser Wall बैठाए गए।
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22. स्वच्छ गंगा :- केमिकल इंडस्ट्रीज का पोलुटेड पानी अब गंगा में नहीं समाता है। जिससे 9 करोड़ लोगो को पिने का और खेती के लिए पानी उपलभ्ध हो गया
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23. दलितों के ऊपर होनेवाले अत्याचारों का फैसला 60 दिनोके अंदर हो ऐसा पहली बार कानून बना।
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24. भारत बांग्लादेश सीमा समजौता
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25. इंडिया पहले पेट्रोल इंटरनेशनल मार्किट से खरीदता था जिसमे दलाली देनी पड़ती थी.., अब इंडिया 35 % से ज्यादा सऊदी से डायरेक्ट खरीदता है। 
और 19 देशो के साथ क्रूड आयल इम्पोर्ट का इंडिया का कॉन्ट्रैक्ट सुषमा स्वराज ने किया है।
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26.... 6 IIT और 3 IIM 2 साल में शुरू हो जायेंगे बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन काम शुरू है.
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27. मेक इन इंडिया के माध्यम से अब तक भारत में 9,00,000 करोड़ का इन्वेस्टमेंट आ चूका है। जिसमे UAE का 4,00,000 करोड़ का है।
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28. कांग्रेस सरकार में BSNL 10 साल में 8000 करोड़ Loss में था। मोदी सरकार में BSNL 2 साल में 672 करोड़ "प्रॉफिट" में है.
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29. Congress एविएशन मंत्रालय 600 करोड़ प्रतिु माह Loss में था.., अभी नो लोस्स नो प्रॉफिट में है
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30. देश की 17 रेलवे स्टेशन्स Wi Fi फ्री हुए है।
31. पहली बुलेट ट्रैन ट्रैक बनने का काम शुरू 
32. वाराणसी 80 घाट एकदम स्वछ हो गया है।
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33. जम्मू से कश्मीर अब सिर्फ 2 घंटे में सफर तय होगा हिमालय को सुरंग बनके ट्रैन हिमालय के निचे से जाएगी। सुरंग बनने का काम IRB कर रही है।
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34. गरिब का और किसानो का बीमा २ लाख तक सिर्फ 20 रु में !
35... 3.5 करोड़ LPG बोगस कस्टमर को ढूंढ के निकल गया और उनके कनेक्शन्स कैंसल किये गए।
36... 6 करोड़ लीटर पानी पहुंचाया गया सुरेश प्रभु द्वारा महाराष्ट्र में !
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37. स्किल इंडिया में 50000 तक लोन बिना किसी गारंटी के। 37,00,000 लोगो को अब तक लाभ मिल चूका है।
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38. प्रोविडेण्ट फण्ड का अकाउंट परमानेंट कर दिया। अब आप कितनी भी कंपनी बदलो आपका PF अकाउंट एक ही रहेगा, बदलेगा नहीं।
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39. डिजिटल इंडिया के तहत स्कूल में डिजिटल क्लास रूम का निर्माण.. अब तक 81,00,000 क्लास रूम डिजिटल हो चुकी है
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40. सरकार किसानो को यूरिया सब्सिडी देती थी, लेकिन वह यूरिया किसानो तक पहुंचने के बजाय केमिकल फैक्ट्रीज में जाता था.. मोदीजी ने उस का नीम कोटिंग करके उसे किसी काम का नहीं रखा वह सिर्फ खात ही उपयोग हो सकता है। भ्रस्टाचार की सम्भावनाएं ख़त्म कर दी. भ्रष्टाचार का सालाना 10,000 करोड रु बच गया..!
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(ये तो टोटल काम का सिर्फ 2 - 3 % ही लिखा है, और आप भी दुसरे काम लिख के कमेन्ट में दे सकते हो, पोस्ट edit करके शामिल कर लेंगे)
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Wednesday, 25 May 2016

 यह लेख "The Hindu "इस अंग्रेजी पेपर में पेज नं 1 पर "A train journey and two names to remember " इस नाम से दिनांक 1 जुन 2014 को प्रकाशित हुआ है...
1990 की घटना..
आसाम से दो सहेलियाँ रेल्वे में भर्ती हेतु गुजरात रवाना हुवे. रस्ते में एक स्टेशनपर गाडी बदलकर आगे का सफ़र उन्हें तय करना था ।जिस प्रकार से ठहराया उसी प्रकार से सफ़र शुरू हुआ लेकिन पहली गाड़ी में कुछ लड़को ने उनसे छेड़-छाड़ की इस वजह से अगली गाड़ी में तो कम से कम सफ़र सुखद हो यह आशा मन में रखकर भगवान से प्रार्थना करते हुए दोनों सहेलियाँ स्टेशन पर उतार गयी और भागते हुए रिझरवेशन चार्ट तक वे पहुची और चार्ट देखने लगी.चार्ट देख दोनों परेशान और भयभीत हो गयी क्यों की उनका रिजर्वेशन कन्फर्म नहीं हो पाया.
मायूस और न चाहते उन्होंने नज़दीक खड़े TC से गाड़ी में जगह देने के लिए विनती की TC ने भी गाड़ी आने पर कोशिश करने का आश्वासन दिया....एक दूसरे को शाश्वती देते दोनों गाड़ी का इंतज़ार करने लगीआख़िरकार गाड़ी आ ही गयी और दोनों जैसे तैसे कर गाड़ी में एक जगह बैठ गए...अब सामने देखा तो क्या!
सामने दो पुरूष बैठे थे. पिछले सफ़र में हुई बदसलूकी कैसे भूल जाती लेकिन अब वहा बैठने के अलावा कोई चारा भी नहीं था क्यों की उस डिब्बे में कोई और जगह ख़ाली भी नहीं थी।गाडी निकल चुकी थी और दोनों की निगाहें TC को ढूंढ रही थी शायद कोई दूसरी जगह मिल जाये......कुछ समय बाद गर्दी को काटते हुए TC वहा पहुँच गया और कहने लगा कही जगह नहीं और इस सिट का भी रिजर्वेशन अगले स्टेशन से हो चूका है कृपया आप अगले स्टेशन पर दूसरी जगह देख लीजिये.यह सुनते ही दोनों के पैरो तले जैसे जमीन ही खिसक गयी क्यों की रात का सफ़र जो था.गाड़ी तेज़ी से आगे बढ़ने लगी . जैसे जैसे अगला स्टेशन पास आने लगा दोनों परेशान होने लगी लेकिन सामने बैठे पुरूष उनके परेशानी के साथ भय की अवस्था बड़े बारीकी से देख रहे थे जैसे अगला स्टेशन आया दोनो पुरूष उठ खड़े हो गए और चल दिये....अब दोनों लड़कियो ने उनकी जगह पकड़ ली और गाड़ी निकल पड़ी कुछ क्षणों बाद वो नौजवान वापस आये और कुछ कहे बिना निचे सो गए ।दोनों सहेलियाँ यह देख अचम्भित हो गयी और डर भी रही थी जिस प्रकार सुबह के सफ़र में हुआ उसे याद कर खुद की समेटे सहमते सो गयी....सुबह चाय वाले की आवाज़ सुन नींद खुली दोनों ने उन पुरूषों को धन्यवाद कहा तो उनमे से एक पुरूष ने कहा " बेहेन जी गुजरात में कुछ मदद लगी तो जरुर बताना " ...अब दोनों सहेलियों का उनके बारे में मत बदल चूका था खुद को बिना रोके एक लड़की ने अपनी बुक निकाली और उनसे अपना नाम और संपर्क लिखने को कहा...दोनों ने अपना नाम और पता बुक में लिखा और "हमारा स्टेशन आ गया है"
ऐसा कह उतर गए और गर्दी में कही गुम हो गए !
दोनों सहेलियों ने उस बुक में लिखे नाम पढ़े वो नाम थे नरेंद्र मोदी और शंकरसिंगवाघेला......
यह अनुभव आया वह लेखिका फ़िलहाल General Manager of the centre for railwayinformation system Indian railway New Delhi में कार्यरत है
तो क्या आप अब भी ये सोचते है की हमने गलत प्रधानमन्त्री चुना है?

नरेंद्र मोदी नीत सरकार की 2 वर्ष के कामकाज से देश के लगभग दो-तिहाई लोग खुश हैं। इस बात का खुलासा सिटीजन एंगेजमैंट प्लेटफार्म द्वारा करवाए गए एक सर्वेक्षण में हुआ है। सर्वेक्षण में 15 हजार लोगों से प्रश्न पूछे गए थे। सर्वेक्षण के अनुसार 64 प्रतिशत लोगों का कहना है कि सरकार की कारगुजारी आशाओं के अनुरूप है जबकि 36 प्रतिशत लोगों ने कहा कि यह आशा से कम है। 76 प्रतिशत लोग भारत में अपने और अपने परिवार के भविष्य के बारे में आशावादी हैं।
लोगों ने प्रत्यक्ष लाभ स्थानांतरण के अलावा स्वच्छ भारत और मेक इन इंडिया की सराहना की। सर्वेक्षण में कहा गया है कि अधिकांश लोग चाहते हैं कि सरकार अगले 3 वर्षों में रोजगार के अवसर बढ़ाए और निवेश को बढ़ावा दे। सर्वेक्षण में कहा गया है कि लगभग 61 प्रतिशत लोगों का विश्वास है कि सरकार ने जी.एस.टी. विधेयक को पारित करवाने के लिए अपनी हर सम्भव कोशिश की, मगर 30 प्रतिशत लोग ऐसा नहीं मानते।
लगभग 72 प्रतिशत लोगों का विश्वास है कि आधारभूत ढांचे में विकास हुआ है और 20 प्रतिशत लोग इससे सहमत नहीं। इस सर्वेक्षण में भारत के विभिन्न हिस्सों के लोगों के अलावा एन.आर.आइज ने हिस्सा लिया।  
भारतीय हो तो यह स्वीकारना जरूरी है कि हम भी भारत के इतिहास के हिस्से हैं। हमारे पूर्वज ब्रह्मा, मनु, ययाति, राम और कृष्ण ही थे। इतिहास में उन लोगों के इतिहास का उल्लेख हो जिन्होंने इस देश को बनाया, कुछ खोजा, अविष्कार किए या जिन्होंने देश और दुनिया को कुछ दिया। जिन्होंने इस देश की एकता और अखंडता को कायम रखा। यहां प्रस्तुत है अखंड भारत के बारे में संक्षिप्त बातें।
”सुदर्शनं प्रवक्ष्यामि द्वीपं तु कुरुनन्दन।
परिमण्डलो महाराज द्वीपोऽसौ चक्रसंस्थितः॥
 यथा हि पुरुषः पश्येदादर्शे मुखमात्मनः। 
एवं सुदर्शनद्वीपो दृश्यते चन्द्रमण्डले॥
 द्विरंशे पिप्पलस्तत्र द्विरंशे च शशो महान्।।
- (वेदव्यास, भीष्म पर्व, महाभारत)
हिन्दी अर्थ :
 हे कुरुनन्दन! सुदर्शन नामक यह द्वीप चक्र की भांति गोलाकार स्थित है, जैसे पुरुष दर्पण में अपना मुख देखता है, उसी प्रकार यह द्वीप चन्द्रमण्डल में दिखाई देता है। इसके दो अंशों में पिप्पल और दो अंशों में महान शश (खरगोश) दिखाई देता है।
अर्थात : दो अंशों में पिप्पल का अर्थ पीपल के दो पत्तों और दो अंशों में शश अर्थात खरगोश की आकृति के समान दिखाई देता है।
आप कागज पर पीपल के दो पत्तों और दो खरगोश की आकृति बनाइए और फिर उसे उल्टा करके देखिए, आपको धरती का मानचित्र दिखाई देखा। यह श्लोक 5 हजार वर्ष पूर्व लिखा गया था। इसका मतलब लोगों ने चंद्रमा पर जाकर इस धरती को देखा होगा तभी वह बताने में सक्षम हुआ होगा कि ऊपर से समुद्र को छोड़कर धरती कहां-कहां नजर आती है और किस तरह की।
पहले संपूर्ण हिन्दू धर्म जम्बू द्वीप पर शासन करता था। फिर उसका शासन घटकर भारतवर्ष तक सीमित हो गया। फिर कुरुओं और पुरुओं की लड़ाई के बाद आर्यावर्त नामक एक नए क्षेत्र का जन्म हुआ जिसमें आज के हिन्दुस्थान के कुछ हिस्से, संपूर्ण पाकिस्तान और संपूर्ण अफगानिस्तान का क्षेत्र था। लेकिन मध्यकाल में लगातार आक्रमण, धर्मांतरण और युद्ध के चलते अब घटते-घटते सिर्फ हिन्दुस्तान बचा है।

यह कहना सही नहीं होगा कि पहले हिन्दुस्थान का नाम भारतवर्ष था और उसके भी पूर्व जम्बू द्वीप था। कहना यह चाहिए कि आज जिसका नाम हिन्दुस्तान है वह भारतवर्ष का एक टुकड़ा मात्र है। जिसे आर्यावर्त कहते हैं वह भी भारतवर्ष का एक हिस्साभर है और जिसे भारतवर्ष कहते हैं वह तो जम्बू द्वीप का एक हिस्सा है मात्र है। जम्बू द्वीप में पहले देव-असुर और फिर बहुत बाद में कुरुवंश और पुरुवंश की लड़ाई और विचारधाराओं के टकराव के चलते यह जम्बू द्वीप कई भागों में बंटता चला गया।