Tuesday, 10 April 2012

कर्पूर का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व...

कर्पूर जलाने से देवदोष व पितृदोष का शमन होता है। कर्पूर अति सुगंधित पदार्थ होता है। इसके दहन से वातावरण सुगंधित हो जाता है।

वैज्ञानिक शोधों से यह भी ज्ञात हुआ है कि इसकी सुगंध से जीवाणु, विषाणु आदि बीमारी फैलाने वाले जीव नष्ट हो जाते हैं जिससे वातावरण शुद्ध हो जाता है तथा बीमारी होने का भय भी नहीं रहता।यही कारण है कि पूजन, आरती आदि धार्मिक कर्मकांडों में कर्पूर का विशेष महत्व बताया गया है। 

भगवान् शिव के गौर-वर्ण की तुलना भी कर्पूर से की गयी है... 

कर्पूरगौरम करुणावतारम संसारसारं भुजगेंद्रहारम |
सदावसंतम हृदयारविन्दे भवम भवानी सहितं नमामि ||

कर्पूर के समान चमकीले गौर वर्णवाले ,करुणा के साक्षात् अवतार, इस असार संसार के एकमात्र सार, गले में भुजंग की माला डाले, भगवान शंकर जो माता भवानी के साथ भक्तों के हृदय कमलों में सदा सर्वदा बसे रहते हैं... हम उन देवाधिदेव की वंदना करते हैं...

Friday, 6 April 2012

प्राणियों पर हिंसा से प्राकृतिक आपदाएं ...

कतलखानों में जब जानवरों को कतल किया जाता है तोह बहुत बेरहमी के साथ क्या जाता है बहुत हिंसा होती है बहुत अत्याचार होता है | जानवरों का कतल होते समय उनकी जो चीत्कार निकलती है, उनके शरीर से जो स्ट्रेस होरमोन निकलते है और उनसे शोक वेबस (तरंगें ) निकलती है वो बहुत ज्यादा पावर  फुल होती हैं .ये तरंगें  पूरी दुनिया को तरंगित कर देती है, कम्पायमान कर देती है |
 जानवरों को  जब काटा जाता है तो बहुत दिनों तक उनको भूखा रखा जाता है और कमजोर किया जाता है फिर इनके ऊपर ७० डिग्री सेंटीग्रेड  ताप के  गरम पानी की बौछार डाली जाती है  उससे उनका शरीर  फूलना शुरू  हो जाता  है   तब गाय भैंस तड़पना और चिल्लाना शुरू  कर देते है  तब जीवित  स्थिति में उनकी खाल को उतारा जाता है और खून को भी इकठ्ठा किया जाता है | फिर धीरे धीरे गर्दन काटी जाती है , पांव  अलग से काटे जाते है शरीर  का एक एक अंग अलग से निकला जाता है |
आज का आधुनिक विज्ञानं ने ये सिद्ध किया है के मरते समय जानवर हो या ब्यक्ति हो अगर उसको क्रूरता से मारा जाता है तोह उसके शरीर  से निकलने वाली जो चीख पुकार है उनको व्हाइब्रेश्न्स  की थेओरी में जब समझाया जाता है  इस प्रक्रिया में जो नेगेटिव वेब्स निकलती हैं  है वो पुरे बातावरण को बुरी तरह से प्रभाबित करती  है और उसका आस पास के सम्पूर्ण वातावरण एवं  सभी मनुष्यों पर प्रभाब पड़ता है..  उससे नकारात्मक भाब जादा से जादा आते है | इससे मनुष्य में हिंसा करने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है .  इसी से अत्याचार  और पाप पूरी दुनिया में बढ़ रहे हैं  |
दिल्ली विश्यविद्यालय के दो प्रोफेसर है एक मदनमोहन जी और एक उनके सहयोगी जिन्होंने २० साल इनपर रिसर्च किया है और उनकी फिजिक्स  की रिसर्च ये कहती है के जानवरों को जितना जादा कतल किया जायेगा जितना जादा हिंसा से मारा जायेगा उतना ही अधिक दुनिया में भूकंप आएंगे, जलजले आएंगे, प्राकृतिक आपदा आयेगी उतनेही दुनिया में संतुलन बिगड़ेगा ...

Monday, 2 April 2012

संस्कृत और संस्कृति से विश्व को नया रूप मिलेगा ..

संस्कृत के बारे में आश्चर्यजनक तथ्य ----- 

1. कंप्यूटर में इस्तेमाल के लिए सबसे अच्छी भाषा। संदर्भ: - फोर्ब्स पत्रिका 1987.

2. सबसे अच्छे प्रकार का कैलेंडर जो इस्तेमाल किया जा रहा है, हिंदू कैलेंडर है (जिसमें नया साल सौर प्रणाली के भूवैज्ञानिक परिवर्तन के साथ शुरू होता है) संदर्भ: जर्मन स्टेट यूनिवर्सिटी.

3. दवा के लिए सबसे उपयोगी भाषा अर्थात संस्कृत में बात करने से व्यक्ति... स्वस्थ और बीपी, मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल आदि जैसे रोग से मुक्त हो जाएगा। संस्कृत में बात करने से मानव शरीर का तंत्रिका तंत्र सक्रिय रहता है जिससे कि व्यक्ति का शरीर सकारात्मक आवेश(Positive Charges) के साथ सक्रिय हो जाता है।संदर्भ: अमेरीकन हिन्दू यूनिवर्सिटी (शोध के बाद).

4. संस्कृत वह भाषा है जो अपनी पुस्तकों वेद, उपनिषदों, श्रुति, स्मृति, पुराणों, महाभारत, रामायण आदि में सबसे उन्नत प्रौद्योगिकी (Technology) रखती है।संदर्भ: रशियन स्टेट यूनिवर्सिटी.

नासा के पास 60,000 ताड़ के पत्ते की पांडुलिपियों है जो वे अध्ययन का उपयोग कर रहे हैं. असत्यापित रिपोर्ट का कहना है कि रूसी, जर्मन, जापानी, अमेरिकी सक्रिय रूप से हमारी पवित्र पुस्तकों से नई चीजों पर शोध कर रहे हैं और उन्हें वापस दुनिया के सामने अपने नाम से रख रहे हैं.

दुनिया के 17 देशों में एक या अधिक संस्कृत विश्वविद्यालय संस्कृत के बारे में अध्ययन और नई प्रौद्योगिकी प्राप्त करने के लिए है, लेकिन संस्कृत को समर्पित उसके वास्तविक अध्ययन के लिए एक भी संस्कृत विश्वविद्यालय इंडिया (भारत) में नहीं है।

5. दुनिया की सभी भाषाओं की माँ संस्कृत है। सभी भाषाएँ (97%) प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इस भाषा से प्रभावित है। संदर्भ: - यूएनओ

6. नासा वैज्ञानिक द्वारा एक रिपोर्ट है कि अमेरिका 6 और 7 वीं पीढ़ी के सुपर कंप्यूटर संस्कृत भाषा पर आधारित बना रहा है जिससे सुपर कंप्यूटर अपनी अधिकतम सीमा तक उपयोग किया जा सके। परियोजना की समय सीमा 2025 (6 पीढ़ी के लिए) और 2034 (7 वीं पीढ़ी के लिए) है, इसके बाद दुनिया भर में संस्कृत सीखने के लिए एक भाषा क्रांति होगी।

7. दुनिया में अनुवाद के उद्देश्य के लिए उपलब्ध सबसे अच्छी भाषा संस्कृत है। संदर्भ: फोर्ब्स पत्रिका 1985.

8. संस्कृत भाषा वर्तमान में "उन्नत किर्लियन फोटोग्राफी" तकनीक में इस्तेमाल की जा रही है। (वर्तमान में, उन्नत किर्लियन फोटोग्राफी तकनीक सिर्फ रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका में ही मौजूद हैं। भारत के पास आज "सरल किर्लियन फोटोग्राफी" भी नहीं है )

9. अमेरिका, रूस, स्वीडन, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान और ऑस्ट्रिया वर्तमान में भरत नाट्यम और नटराज के महत्व के बारे में शोध कर रहे हैं। (नटराज शिव जी का कॉस्मिक नृत्य है। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के सामने शिव या नटराज की एक मूर्ति है ).

10. ब्रिटेन वर्तमान में हमारे श्री चक्र पर आधारित एक रक्षा प्रणाली पर शोध कर रहा है

Wednesday, 7 March 2012

भारत के 70 करोड़ किसानो के भविष्य को बर्बाद करने का षड़यंत्र


बिल गेट्स ने 5000 करोड़ दान में देकर भारत के 70 करोड़ किसानो के भविष्य को बर्बाद करने का षड़यंत्र रचा है

इस इमेज को देखकर आप समजेंगे की यह सही बात नहीं है लेकिन ये हकीकत है .ये आदमी ने पिछले 10 सालो में भारत में दान के नाम पर 5000 करोड़ खर्च किया है .उस दान के नाम पर असल में भारत की सरकार ने इसके साथ किसानो को बेच देने का समझोता किया है .जिनकी संख्या भारत में 70 करोड़ है .ये असल . में मोनसेंटो कम्पनी का हिस्सेदार और G.M. FOOD का सबसे बड़ा पैरोकार है ,
मोनसेंटो वाही कम्पनी है जिसकी वजह से भारत के किसान आत्महत्या कर रहे ,लाखो हेक्टारे की जमीन बंजर हो चुकी .करोडो लोग बीमार हो चुके हैं .अब ये अमीरजादा और मोनसेंटो मिलकर भारत में एक ऐसा अभियान चलाने जा रहे जिसके भोजन उगाने के लिए ये कंपनियां लगायेंगे और किसानो से खेती छुडवाई जायेगी और इन्ही कंपनियों में किसान मजूदरी करेगा . सरकार ने चंद कंपनियों के फायेदे के लिए70 करोड़ गरीब किसानो को इनके हाथो बेच दिया है .
ध्यान रहे ये वही व्यक्ती जो भारत में दान देने के बहाने आता रहा है और सरकार और मीडिया ने जमकर इसकी तारीफे की हैं लेकिन अब इसकी हकीकत खुलने लगी है
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Monday, 5 March 2012

राष्ट्रवादी आन्दोलन"भारत स्वाभिमान" से जुड़े


पतंजलि प्रकल्प में 7000 लोग नौकरी कर रहे और पुरे भारत में करीब 35000 लोग पतंजलि योगपीठ से परोक्ष रूप से राजगार पा रहे है जबकी यह तो सिर्फ अभी शुरुआत है. बाबा जी का यह तमाचा अंग्रेजो के यहाँ पढ़े अर्थशास्त्रियो को महसूस नहीं होता है क्या....100 लोगो को मेल करे...
1-बाबा रामदेव जी ने आचार्य बाल कृष्ण जी के समर्पण से पतंजलि योग पीठ में राष्ट्र करते हुए भी 7000 लोगो को सीधा स्थाई रोजगार दियाहुआ है.
2-भारत में 628 जिलो में 20 आदमी हर जिले के हिसाब से करीब 12000 हजार लोग सीधे पतंजलि उत्पादों के वितरण / विक्री से बढ़िया रोजगार पा रहे है.
3- हर जिले में करीब औसत 25 आदमी पतंजलि के कच्चे माल की सप्लाई और ग्रामीण वितरण से लगभग 15000 पूर्णकालिक रोजगार पा रहे है.
4-इन 35000 रोजगारो में कांग्रेस की केंद्रसरकार की सिर्फ बाधा डालने की भूमिका रही है,हां, उत्तराखंड सरकार को हमें बधाई देना होगा की उन्होंने योगपीठ को मदद किया है.
5-आप सोचिये जब 1100 करोड़ के स्वदेशी कृषि आधारित व्यवस्था से 35000 लोगो को रोजगार दिया ज़ा सकता है तो यदि भारत की अर्थव्यवस्था में 100 लाख करोड़ कालाधन लगाया जाये और इसे इमानदारी से नियंत्रित किया जाये तो भारत में काम करने वाले कम पड़ जायेंगे, भारत की बेरोजगारी 100 % समाप्त हो जाएगी. बाबा सही कहते है की आरक्षण की आवश्यकता ही नहीं रहेगी. १
6-बाबा जी तो सिर्फ गाय के मूत्र से दवा बनाकर और उसे असवीत करने से बेचने में ही 01 करोड़ गुने 70 रुपये लीटर गुने 12 महीना = 840 करोड़ का व्यापार बनाकर 30000 लोगो को स्थाई रोजगार दे देंगे और भारत की हजारो गायो को कटने से बचा देंगे. साथ ही साथ विदेशी कंपनियों की 8000 करोड़ की ह्रदय रोग की अंगेजी दवाओ की लूट से भी रोकेंगे.
बाबा जी सही कहते है की वह 10 साल में 30 करोड़ रोजगार पैदा करवा सकते है यदि विदेशी कंपनियों की लूट बंद हो जाये तो.
राष्ट्र निर्माण की चेतना फ़ैलाने वाले बाबा रामदेव जी के राष्ट्रवादी आन्दोलन"भारत स्वाभिमान" से जुड़े और इसका समर्थन करे...

Monday, 27 February 2012

संघ को बाहर से समझ पाना बेहद मुश्किल



अयोध्या। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा बाहर से देखकर संघ को समझ पाना बहुत मुश्किल है। यह संगठन स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुष को आदर्श मानकर परिस्थितियों का डटकर सामना करने में विश्वास करता है। उन्होंने स्वयंसेवकों को भारत माता को देवी और उनके हर पुत्र को भाई मानते हुए राष्ट्र सेवा करने की नसीहत दी।
वह रविवार को यहां अवध प्रांत से जुड़े 22 जिलों के स्वयंसेवकों की सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि संघ स्वयंसेवकों के बूते चलता है। उनकी संख्या ही हमारा प्राण है। इसी संख्या बल से हमारा आत्मबल बढ़ता है और हमारी वाणी का प्रभाव पड़ता है।
भागवत ने कहा कि संघ के लिए शाखा ही सब कुछ है। शाखा में एक भी सदस्य की अनुपस्थिति का पूरे संघ पर प्रभाव पड़ता है। भागवत ने कहा कि जब परिवेश ठीक रहेगा तभी देश का विकास होगा। हमारे संतों-महापुरुषों ने परिवेश को ठीक करने के लिए ही जीवन समर्पित कर दिया। इसी कारण वे हमारे आदर्श बने हैं।
उन्होंने स्वामी विवेकानंद की अयोध्या यात्रा जिक्र करते हुए बंदरों से उनके संघर्ष व डटकर खड़े होने पर बंदरों के भागने के प्रसंग का उल्लेख किया। कहा कि डटकर खड़े होने अथवा परिस्थितियों का सामने करने से ही विजयश्री मिलती है। भारत माता को देवी व उनके प्रत्येक पुत्र को अपना भाई मानकर कर्म करने की आवश्यकता है। इस कार्य में यदि तरुणाई भी जुट जाय तो देश की तकदीर बदल जाएगी।
सर संघचालक ने कहा कि हमें हिंदू होने का अभिमान करना चाहिए। देश में स्वार्थ के आधार पर राजनीति हो रही है और जातिवाद का जहर घोला जा रहा है। इन परिस्थितियों से उबरते हुए हमें योग्य भारत का निर्माण करना होगा। उन्होंने कहा कि संकट के समय आपकी सुसुप्त शक्तियां जाग्रत हो जाती हैं। यदि हम इसी को हमेशा जाग्रत रखें तो हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत को अपने इतिहास-संस्कृति से सबक लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
इस अवसर पर विहिप के संरक्षक अशोक सिंघल, सह संघचालक देवेंद्र प्रताप, प्रांत संघ चालक धीरज अग्रवाल भी मौजूद रहे। संचालन अनिल मिश्र ने किया।

Tuesday, 21 February 2012

अब इनका कुछ तो करना पड़ेगा ...


नेताओं ने जीवन के हर छेत्र में अपने-अपने लोग पाल रखे हैं ,ताकि उनकी लूट निर्बाध रूप से जारी रह सके .इसी लिये सारे नाटकों के बाद भी देश में लूट तन्त्र जारी है .प्रचार किया जाता है क़ी यदि जनता शत प्रतिशत वोट देगी तो लोकतंत्र बच जाएगा .सारी गडबड इसलिए है क्योंकि जनता वोट नही देती ..हाँ जनता सब ठीक कर दे पर उसे सच पता तो चले क़ी गडबड है कहाँ ...?
ये सरकार अपने कर्तव्य निष्ठ सेनाध्यक्ष को महीनों से बदनाम किये जा रही है ,सिर्फ इसीलिए क़ी लिपिकीय त्रुटी क़ी वजह से उनकी जन्म तारिख दो जगह अलग -अलग लिखी दिख रही है .इसी प्रकार देश के सर्वाधिक सम्मानित वैज्ञानिक ,इसरो प्रमुख तथा भारतीय चन्द्रयान मिशन के प्रमुख करता धर्ता कोभी भ्रष्टाचार के आरोंप लगा कर ब्लेक लिस्टेड कर दिया गया है ..उनके चरित्र को सरेआम बट्टा लगाने से भी ये नेता नही चूक रहे .जिस रक्षा डील को भ्रष्ट कहा जा रहा है उसे इनके अलावा केंद्र के पांच-पांच मंत्री और मंत्रालयों ने अपनी स्वीकृति दी है तब यह डील फाइनल हुई है.. फिर भी इन वैज्ञानिकों को ही बदनाम किया जा रहा है ..
सच तो यही है क़ी सत्ता पर बैठे लोगों नेही सारी व्यवस्था को भ्रष्ट कर रखा है.. आज इन्हों ने ही भ्रष्ट व्यक्तियों के निर्माण का पूरा तन्त्र विकसित कर रखा है.. समाज का ब्राह्मण ( विद्वान )वर्ग एवं छत्रीय ( रक्षक ) वर्गभी पूरी तरह से  इसी भ्रष्ट व्यवस्था में काम करता दिख रहा है.. श्रेष्ठ मनुष्यों के निर्माण कर सकने में समर्थ हमारी संस्कृति (हिन्दू संस्कृति )पर भी लगातार गलत आरोंप लगाकर उसके कार्यकर्ताओं को जेलों में सडाया जा रहा है .सिर्फ मुस्लिम और ईसाई, थोक में मिलने वाले  वोटरों को हथिया कर दुबारा तिबारा सत्ता पर काबिज होने केलिए ...भगवान राम, गाय और महात्मा गाँधी का प्रभाव तो देश से मिटाया ही जा चुका है.. हालत तो यह बन गये हैं क़ी देश के अनेक बड़े बड़े सांस्कृतिक सन्गठन भी अब खुद को हिन्दू सन्गठन कहने से कतराते हैं ..
आज कानून बना बना कर देश को लूटा जा रहा है .ईस्ट इण्डिया कम्पनी के और हमारे आज के शासन  में कोई फर्क नही रह गया है . .देश का सेनापति झूठा ,देश के वैज्ञानिक झूठे ,राम कृष्ण ,गीता सब काल्पनिक ,भरतीय हिन्दू संस्कृति साम्प्रदायिक ,प्रतिबन्ध के योग्य ...और तो और इनका कहना है क़ी हमें कृषि और व्यापार करना भी नही आता ...बस हर जगह सिर्फ विदेशी ज्ञान विदेशी तकनीक ,विदेशी विशेषज्ञ  ही इन्हें चाहिए,विदेशी धन और विदेशी सहभागिता ही इन्हें चाहिए यह सब हम भारतीयों के मुख पर कालिख पोतना ही तो है .क्या इस व्यवस्था का समाधान सिर्फ यही है क़ी लोग १०० प्रतिशत वोट दें .ये लोग पूरे समाज को मक्कार ,आलसी ,अकर्मण्य और कायर बना रहे हैं ताकि इनकी सत्ता चलती रहे बस ..
यह अब नही हो सकेगा... अब इनका कुछ तो करना पड़ेगा ...