Wednesday, 6 November 2013

हम बड़ो के पैर क्यों छूते हैं ?

हम बड़ो के पैर क्यों छूते हैं ?
हिन्दू संस्कृति जीवन का आंतरिक सौन्दर्य है। अपने बड़ों का सम्मान करना हमारी सांस्कृतिक परंपरा है। आशीर्वाद एक अच्छा अहसास है जिससे जीवन रूपांतरित होता है I माता-पिता के आशीर्वाद से श्रवण कुमार की कीर्ति अमर हो गई। श्रीराम रोजाना सुबह उठकर सबसे पहले मां-पिता और गुरु के चरणों में सिर-झुकाकर आशीर्वाद प्राप्त करते थे। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य का अधिकारी भी माता-पिता के आशीर्वाद ने ही बनाया
भारत में बड़े बुजुर्गों के पांव छूकर आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। ये दरअसल बुजुर्ग, सम्मानित व्यक्ति के द्वारा किए हुए उपकार के प्रतिस्वरुप अपने समर्पण की अभिव्यक्ति होती है। अच्छे भावः से किए हुए सम्मान के बदले बड़े लोग आशीर्वाद देते है जो एक सकारात्मक उर्जा होती है।
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वेस्ट इंडीज के त्रिनिदाद एंड टोबेगो स्थित हनुमान जी की विशाल मूर्ती....
यह 85 फीट ऊँची मूर्ती भारत के बाहर हनुमान जी की सबसे ऊँची मूर्ती है...
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मनुष्य शरीर स्थित कुंडलिनी शक्ति में जो चक्र स्थित होते हैं उनकी संख्या कहीं छ: तो कहीं सात बताई गई है। इन चक्रों के विषय में अत्यंत महत्वपूर्ण एवं गोपनीय जानकारी यहां दी गई है। यह जानकारी शास्त्रीय, प्रामाणिक एवं तथ्यात्मक है-

(1) मूलाधार चक्र - गुदा और लिंग के बीच चार पंखुरियों वाला 'आधार चक्र' है । आधार चक्र का ही एक दूसरा नाम मूलाधार चक्र भी है। वहाँ वीरता और आनन्द भाव का निवास है ।

(2) स्वाधिष्ठान चक्र - इसके बाद स्वाधिष्ठान चक्र लिंग मूल में है । उसकी छ: पंखुरियाँ हैं । इसके जाग्रत होने पर क्रूरता,गर्व, आलस्य, प्रमाद, अवज्ञा, अविश्वास आदि दुर्गणों का नाश होता है ।

(3) मणिपूर चक्र - नाभि में दस दल वाला मणिचूर चक्र है । यह प्रसुप्त पड़ा रहे तो तृष्णा, ईष्र्या, चुगली, लज्जा, भय, घृणा, मोह, आदि कषाय-कल्मष मन में लड़ जमाये पड़े रहते हैं ।

(4) अनाहत चक्र - हृदय स्थान में अनाहत चक्र है । यह बारह पंखरियों वाला है । यह सोता रहे तो लिप्सा, कपट, तोड़ -फोड़, कुतर्क, चिन्ता, मोह, दम्भ, अविवेक अहंकार से भरा रहेगा । जागरण होने पर यह सब दुर्गुण हट जायेंगे ।

(5) विशुद्धख्य चक्र - कण्ठ में विशुद्धख्य चक्र यह सरस्वती का स्थान है । यह सोलह पंखुरियों वाला है। यहाँ सोलह कलाएँ सोलह विभूतियाँ विद्यमान है

(6) आज्ञाचक्र - भू्रमध्य में आज्ञा चक्र है, यहाँ '?' उद्गीय, हूँ, फट, विषद, स्वधा स्वहा, सप्त स्वर आदि का निवास है । इस आज्ञा चक्र का जागरण होने से यह सभी शक्तियाँ जाग पड़ती हैं ।

(7) सहस्रार चक्र - सहस्रार की स्थिति मस्तिष्क के मध्य भाग में है । शरीर संरचना में इस स्थान पर अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथियों से सम्बन्ध रैटिकुलर एक्टिवेटिंग सिस्टम का अस्तित्व है । वहाँ से जैवीय विद्युत का स्वयंभू प्रवाह उभरता है ।

कुण्डलिनी जागरण: विधि और विज्ञान
कुंडलिनी जागरण का अर्थ है मनुष्य को प्राप्त महानशक्ति को जाग्रत करना। यह शक्ति सभी मनुष्यों में सुप्त पड़ी रहती है। कुण्डली शक्ति उस ऊर्जा का नाम है जो हर मनुष्य में जन्मजात पायी जाती है। यह शक्ति बिना किसी भेदभाव के हर मनुष्य को प्राप्त है। इसे जगाने के लिए प्रयास या साधना करनी पड़ती है। जिस प्रकार एक नन्हें से बीज में वृक्ष बनने की शक्ति या क्षमता होती है। ठीक इसी प्रकार मनुष्य में महान बनने की, सर्वसमर्थ बनने की एवं शक्तिशाली बनने की क्षमता होती है। कुंडली जागरण के लिए साधक को शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक स्तर पर साधना या प्रयास पुरुषार्थ करना पड़ता है। जप, तप, व्रत-उपवास, पूजा-पाठ, योग आदि के माध्यम से साधक अपनी शारीरिक एवं मानसिक, अशुद्धियों, कमियों और बुराइयों को दूर कर सोई पड़ी शक्तियों को जगाता है। अत: हम कह सकते हैं कि विभिन्न उपायों से अपनी अज्ञात, गुप्त एवं सोई पड़ी शक्तियों का जागरण ही कुंडली जागरण है। योग और अध्यात्म की भाषा में इस कुंडलीनी शक्ति का निवास रीढ़ की हड्डी के समानांतर स्थित छ: चक्रों में माना गया है। कुण्डलिनी की शक्ति के मूल तक पहुंचने के मार्ग में छ: फाटक है अथवा कह सकते हैं कि छ: ताले लगे हुए है। यह फाटक या ताले खोलकर ही कोई जीव उन शक्ति केंद्रों तक पहुंच सकता है। इन छ: अवरोधों को आध्यात्मिक भाषा में षट्-चक्र कहते हैं। ये चक्र क्रमश: इस प्रकार है: मूलधार चक्र, स्वाधिष्ठान चक्र, मणिपुर चक्र, अनाहत चक्र, विशुद्धाख्य चक्र, आज्ञाचक्र। साधक क्रमश: एक-एक चक्र को जाग्रत करते हुए। अंतिम आज्ञाचक्र तक पहुंचता है। मूलाधार चक्र से प्रारंभ होकर आज्ञाचक्र तक की सफलतम यात्रा ही कुण्डलिनी जागरण कहलाता है।
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सिर पर चोटी क्यो रखी जाती है?? इसका वैज्ञानिक महत्व जानिए ::

एक सुप्रीप साइंस जो इंसान के लिये सुविधाएं जुटाने का ही नहीं, बल्कि उसे शक्तिमान बनाने का कार्य करता है। ऐसा परम विज्ञान जो व्यक्ति को प्रकृति के ऊपर नियंत्रण करना सिखाता है। ऐसा विज्ञान जो प्रकृति को अपने अधीन बनाकर मनचाहा प्रयोग ले सकता है। इस अद्भुत विज्ञान की प्रयोगशाला भी बड़ी विलक्षण होती है। एक से बढ़कर एक आधुनिकतम मशीनों से सम्पंन प्रयोगशालाएं दुनिया में बहुतेरी हैं, किन्तु ऐसी सायद ही कोई हो जिसमें कोई यंत्र ही नहीं यहां तक कि खुद प्रयोगशाला भी आंखों से नजर नहीं आती। इसके अदृश्य होने का कारण है- इसका निराकार स्वरूप। असल में यह प्रयोगशाला इंसान के मन-मस्तिष्क में अंदर होती है।

सुप्रीम सांइस- विश्व की प्राचीनतम संस्कृति जो कि वैदिक संस्कृति के नाम से विश्य विख्यात है। अध्यात्म के परम विज्ञान पर टिकी यह विश्व की दुर्लभ संस्कृति है। इसी की एक महत्वपूर्ण मान्यता के तहत परम्परा है कि प्रत्येक स्त्री तथा पुरुष को अपने सिर पर चोंटी यानि कि बालों का समूह अनिवार्य रूप से रखना चाहिये।

सिर पर चोंटी रखने की परंपरा को इतना अधिक महत्वपूर्ण माना गया है कि , इस कार्य को हिन्दुत्व की पहचान तक माना लिया गया। योग और अध्यात्म को सुप्रीम सांइस मानकर जब आधुनिक प्रयोगशालाओं में रिसर्च किया गया तो, चोंटी के विषय में बड़े ही महत्वपूर्ण ओर रौचक वैज्ञानिक तथ्य सामने आए।

चमत्कारी रिसीवर- असल में जिस स्थान पर शिखा यानि कि चोंटी रखने की परंपरा है, वहा पर सिर के बीचों-बीच सुषुम्ना नाड़ी का स्थान होता है। तथा शरीर विज्ञान यह सिद्ध कर चुका है कि सुषुम्रा नाड़ी इंसान के हर तरह के विकास में बड़ी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। चोटी सुषुम्रा नाड़ी को हानिकारक प्रभावों से तो बचाती ही है, साथ में ब्रह्माण्ड से आने वाले सकारात्मक तथा आध्यात्मिक विचारों को केच यानि कि ग्रहण भी करती है

क्यों रखी जाती है सिर पर शिखा??

सिर पर शिखा ब्राह्मणों की पहचान मानी जाती है। लेकिन यह केवल कोई पहचान मात्र नहीं है। जिस जगह शिखा (चोटी) रखी जाती है, यह शरीर के अंगों, बुद्धि और मन को नियंत्रित करने का स्थान भी है। शिखा एक धार्मिक प्रतीक तो है ही साथ ही मस्तिष्क के संतुलन का भी बहुत बड़ा कारक है। आधुनिक युवा इसे रुढ़ीवाद मानते हैं लेकिन असल में यह पूर्णत: है। दरअसल, शिखा के कई रूप हैं।

आधुनकि दौर में अब लोग सिर पर प्रतीकात्मक रूप से छोटी सी चोटी रख लेते हैं लेकिन इसका वास्तविक रूप यह नहीं है। वास्तव में शिखा का आकार गाय के पैर के खुर के बराबर होना चाहिए। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि हमारे सिर में बीचोंबीच सहस्राह चक्र होता है। शरीर में पांच चक्र होते हैं, मूलाधार चक्र जो रीढ़ के नीचले हिस्से में होता है और आखिरी है सहस्राह चक्र जो सिर पर होता है। इसका आकार गाय के खुर के बराबर ही माना गया है। शिखा रखने से इस सहस्राह चक्र का जागृत करने और शरीर, बुद्धि व मन पर नियंत्रण करने में सहायता मिलती है।

शिखा का हल्का दबाव होने से रक्त प्रवाह भी तेज रहता है और मस्तिष्क को इसका लाभ मिलता है।

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Monday, 4 November 2013

1952 से 1990 के बीच भारत का एक राज्य इस्लामिक हो गया - नाम है कशमीर!...

1378 मेँ भारत से एक हिस्सा अलग हुआ, इस्लामिक
राष्ट्र बना - नाम है इरान!
1761 मेँ भारत से एक हिस्सा अलग हुआ, इस्लामिक
राष्ट्र बना - नाम है अफगानिस्तान!
1947 मेँ भारत से एक हिस्सा अलग हुआ, इस्लामिक
राष्ट्र बना - नाम है पाकिस्तान!
1971 मेँ भारत से एक हिस्सा अलग हुआ, इस्लामिक
राष्ट्र बना - नाम हैँ बांग्लादेश!
1952 से 1990 के बीच भारत का एक राज्य
इस्लामिक हो गया - नाम है कशमीर!...
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और अब उत्तरप्रदेश, आसाम और केरला इस्लामिक
राज्य बनने की कगार पर है!
और हम जब भी हिँदुओँ को जगाने की बात करते हैँ,
सच्चाई बताते हैँ तो कुछ लोग हमेँ RSS, VHP और
SHIV-SENA, BJP वाला कहकर पल्ला झाङ लेते
हैँ!

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क्या यही न्याय है ?

कोंगेसी मंत्री बाबूलाल नागर पर बलात्कार का आरोप साबित होने पर भी घर का खाना देने से कोर्ट ने मान लिया और दोष साबित नही होने के बावजूद भी संत श्री आसाराम जी बापू जी को घर का खाना देनेसे कोर्ट क्यों राजी नही ? क्या यही न्याय है ? अगर हा तो ऐसे न्याय को और न्यायाधीश को आग में फूँक देना चाहिए धिक्कार है ऐसे दोगले कानून पर."

जिस देश मे सैकड़ों निर्दोषों की जान लेने वाले आतंकवादी कसाब को बिरयानी खिलाई जाती है, उसी देश मे करोड़ों गरीबों की जिंदगी बना देने बापूजी को जेल मे गंगाजल भी नहीं ले जाने दिया तो बताओ कि क्यो हम इस अंधे कानून पे भरोसा करे ? आखिर क्यों हम आशारामजी बापू का समर्थन ना करे ??

पूरे विश्व मे हिंदुओं के एकमात्र देश भारत मे 70 % हिन्दू होने के बावजूद फर्जी सेकुलरिस्म के नाम पर हिंदुविरोधी कानून बनाए जा रहे हो, आर्थिक लाभ देने वाली गौ-माता की हत्या रोकने के लिए कानून ही नहीं है, भ्रष्टाचार के कारण 65 % जनता की आय 30 रुपया प्रतिदिन है, गरीब-किसान आत्महत्या कर रहे है, वहाँ देश की पढ़ी-लिखी जनता विदेशी मीडिया और सरकार के अत्याचार मे आवाज भी नहीं उठा रहे...... आश्चर्य है..
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 संयुक्त राष्ट्र के जेनेवा स्थित कार्यालय के समक्ष कल हजारों सिखों ने प्रदर्शन कर 1984 के सिख विरोधी दंगों की अन्तर्राष्ट्रीय जांच की मांग की। इस प्रदर्शन में भाग लेने के लिए यूरोप के विभिन्न भागों से हजारों की संख्या में सिख एकत्र हुए थे। प्रदर्शन के आयोजकों के अनुसार प्रदर्शन में भाग लेने वालों की संख्या दस हजार थी, जबकि पुलिस ने यह संख्या चार हजार बताई।

प्रदर्शनकारियों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय को एक ज्ञापन भी सौंपा। जेनेवा स्थित भारतीय राजनयिकों ने सिखों के ज्ञापन पर कुछ कहने से इन्कार किया, किन्तु कहा कि इस मामले में भारत की न्यायिक व्यवस्था के अन्तर्गत कार्रवाई चल रही है।


इंडियन मुजाहिद्दीन मोदी को मारना चाहता है....
आइएसआइ मोदी को मारना चाहती है.... 
लश्कर-ए-तय्यबा मोदी को मारना चाहते है.... 
नक्सली मोदी को मारना चाहते है.... आल क़ायदा मोदी को मारना चाहते है.... 
तथाकथित सेक्युलर दल मोदी को मारना चाहते है.... 

अगर देश के सभी "गद्दार" और "देश द्रोही" मोदी को मारना चाहते है,
तो मोदी की "देश भक्ति" का इससे बड़ा सुबूत भला और क्या हो सकता है !!
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Sunday, 3 November 2013

उधम सिंह उस वक्त 11 साल के थे

 सन 1919 को एक करूर अंग्रेज़ अधिकारी भारत मे आया था जिसका नाम था डायर ! अमृतसर मे उसकी पोस्टिंग की गई थी और उसने एक रोलेट एक्ट नाम का कानून बनाया जिसमे नागरिकों के मूल अधिकार खत्म होने वाले थे ! और नागरिकों की जो थोड़ी बहुत बची कूची आजादी थी वो भी अंग्रेज़ो के पास जाने वाली थी !

इस रोलेट एक्ट का विरोध करने के लिए 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियाँवाला बाग मे एक बड़ी सभा आयोजित की गई थी ! जिसमे 25000 लोग शामिल हुए थे ! उस बड़ी सभा मे डायर ने अंधाधुंध गोलियां चलवायी थी ! अगर आप मे से किसी ने पुलिस या सेना मे नोकरी की हो तो आप अंदाजा लगा सकते हैं ! 15 मिनट के अंदर 1650 राउंड गोलियां चलवाई थी डायर ने ! और 3000 क्रांतिकारी वहीं तड़प तड़प के मर गए थे !

आप मे से किसी ने जलियाँवाला बाग देखा हो तो वहाँ अंदर जाने और बाहर आने के लिए एक ही दरवाजा है वो भी चार दीवारी से घिरा हुआ है और दरवाजा भी मुश्किल से 4 से 5 फुट चोड़ा है ! उस दरवाजे के बाहर डायर ने तोप लगवा दी थी ताकि कोई निकल के बाहर न जा पाये ! और अंदर उसके दो कुएं है जिसको अंधा कुंआ के नाम से जाना जाता है ! 1650 राउंड गोलियां जब चलायी गई ! जो लोग गोलियों के शिकार हुये वो तो वही शहीद हो गए और जो बच गए उन्होने ने जान बचाने के लिए कुएं मे छलांग लगा दी और कुंआ लाशों से भर गया !

और 15 मिनट तक गोलियां चलाते हुए डायर वहाँ से हँसते हुए चला गया और जाते हुये अमृतसर की सड्को पर जो उसे लोग मिले उन्हे गोलियां मार कर तोप के पीछे बांध कर घसीटता गया ! इसके लिए उसे अँग्रेजी संसद से ईनाम मिला था उसका प्रमोशन कर दिया गया था और उसको भारत से लंदन भेज दिया गया था और बड़े ओहदे पर !

उधम सिंह उस वक्त 11 साल के थे और ये ह्त्याकांड उन्होने अपनी आंखो से देखा था ! और उन्होने संकल्प लिया था संकल्प ये था जिस तरह डायर ने मेरे देश वासियो को इतनी क्रूरता से मारा हैं इस डायर को मैं जिंदा नहीं छोड़ूँगा ! यही मेरी ज़िंदगी का आखिरी संकल्प हैं ! आपको एक और बात मालूम होगी उधम सिंह की वह घर से गरीब थे माता पिता का साया उनसे उठ चुका था आनाथ आश्रम मे पल कर बड़े हुये थे ! बड़े भाई थे उनकी मौत हो चुकी थी किसी बीमारी से !

अब आर्थिक हालत अच्छे नहीं थे संकल्प ले लिया था डायर को मारने का ! उसके लिए योजना बनाई लंदन जाने की ! उसके लिए पैसे नहीं थे ! तो उन्होने सोचा मैं किसी आगे हाथ फैलाऊँ इससे अच्छा खुद मेहनत-मजदूरी करूँ ! फिर उन्होने carpenter (लकड़ी का काम किया) ! और कुछ पैसे कमा अमेरिका गए अमेरिका से फिर लंदन गए ! लंदन जाकर फिर किसी होटल मे नोकरी की पानी पिलाने की ताकि कुछ पैसे इकठे हो और उससे बंदूक खरीदी जा सके !

और ये सब काम करते करते शहीदे आजम उधम सिंह को 21 साल लग गए पूरे 21 साल ! 1919 मे जलियाँवाला बाग हत्याकांड हुआ था और 1940 मे पूरे 21 साल बाद उन्होने अपना संकल्प पूरा किया 21 साल तक वो मेहनत करते रहे,इधर उधर भागते रहे ,जिंदा रहे सिर्फ अपना संकल्प पूरा करने ले लिए !

अंत 1940 मे Caxton Hall एक जगह है लंदन मे वहाँ डायर को सम्मान दिया जा रहा था मालाएँ आदि पहनाई जा रही थी उधम सिंह वहाँ पहुंचे थे और अपने साथ लाई किताब मे छिपी बंदूक निकाल एक साथ 3 गोलियां डायर के सीने मे उतार दी ! 3 गोलियां मार कर एक ही वाकय कहा था कि आज मैंने 21 साल पहले लिया अपना संकल्प पूरा कर लिया है ! और मैं अब इसके बाद एक मिनट जिंदा नहीं रहना चाहता ! तो जब उन्होने बंदूक अंग्रेज़ अधिकारी को सोंपी तो अंग्रेज़ अधिकारी के हाथ कांप रहे थे ! उसको लग रहा था कहीं मुझे भी न मार दे ! तो उधम सिंह ने कहा घबराओ मत मेरे तुमसे कोई दुश्मनी नहीं है मेरी तो डायर से दुश्मनी थी जिसने मेरे देश के 3000 बेकसूर लोगो को तड़पा -तड़पा कर मारा था !

तो मित्रो हमारे क्रांतिकारियों का इतना ऊंचा आदर्श था जो संकल्प लिया है उसी की पूर्ति के लिए जीवन लगा देना है उसके लिए बेशक 10 साल लगे 15 साल लगे ! 20 लगे 21 साल लगे ! ये प्रेरणा हम सबको शहीदे आजम उधम सिंह के जीवन से लेनी चाहिए ! माँ भारती के इस पुत्र को दिल से सलाम !

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हमारे देश मे 3000 साल पहले एक ऋषि हुए जिनका नाम था बागवट जी ! वो 135 साल तक जीवित रहे ! उन्होने अपनी पुस्तक अशटांग हिरद्यम मे स्वस्थ्य रहने के 7000 सूत्र लिखे ! उनमे से ये एक सूत्र राजीव दीक्षित जी की कलम से आप पढ़ें !
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बागवट जी कहते है, ये बहुत गहरी बात वो ये कहते है जब आप भोजन करे कभी भी तो भोजन का समय थोडा निश्चित करें । भोजन का समय निश्चित करें । ऐसा नहीं की कभी भी कुछ भी खा लिया । हमारा ये जो शरीर है वो कभी भी कुछ खाने के लिए नही है । इस शरीर मे जठर है, उससे अग्नि प्रदिप्त होती है । तो बागवटजी कहते है की, जठर मे जब अग्नी सबसे ज्यादा तीव्र हो उसी समय भोजन करे तो आपका खाया हुआ, एक एक अन्न का हिस्सा पाचन मे जाएगा और रस मे बदलेगा और इस रस में से मांस,मज्जा,रक्त,मल,मूत्रा,मेद और आपकी अस्थियाँ इनका विकास होगा ।

हम लोग कभी भी कुछ भी खाते रहते हैं । ये कभी भी कुछ भी खाने पद्ध्ती भारत की नहीं है, ये युरोप की है । युरोप में doctors वो हमेशा कहते रहते है की थोडा थोडा खाते रहो, कभीभी खाते रहो । हमारे यहाँ ये नहीं है, आपको दोनों का अंतर समझाना चाहता हूँ । बागवटजी कहते है की, खाना खाते का समय निर्धरित करें । और समय निर्धरित होगा उससे जब आप के पेट में अग्नी की प्रबलता हो । जठरग्नि की प्रबलता हो । बागवटजी ने इस पर बहुत रिसर्च किया और वो कहते है की, डेढ दो साल की रिसर्च के बाद उन्हें पता चला की जठरग्नि कौन से समय मे सबसे ज्यादा तीव्र होती है । तो वो कहते की सूर्य का उदय जब होता है, तो सूर्य के उदय होने से लगभग ढाई घंटे तक जठरग्नि सबसे ज्यादा तीव्र होती है ।

मान लो अगर आप चेन्नई मे हो तो 7 बजे से 9 बजे तक जठरग्नि सबसे ज्यादा तीव्र होगी । हो सकता है ये इसी सूत्रा अरूणाचल प्रदेश में बात करूँ तो वो चार बजे से साडे छह का समय आ जाएगा । क्यांे कि अरूणाचल प्रदेश में सूर्य 4 बजे निकल आता है । अगर सिक्कीम मे कहूँगा तो 15 मिनिट और पहले होगा, यही बात अगर मे गुजरात मे जाकर कहूँगा तो आपसे समय थोडा भिन्न हो जाएगा तो सूत्रा के साथ इसे ध्यान मे रखे । सूर्य का उदय जैसे ही हुआ उसके अगले ढाई घंटे तक जठर अग्नी सबसे ज्यादा तीव्र होती है । तो बागवटजी कहते है इस समय सबसे ज्यादा भोजन करें ।

बागवटजी ने एक और रिसर्च किया था, जैसे शरीर के कुछ और अंग है जैसे हदय है, जठर,किडनी,लिव्हर है इनके काम करने का अलग अलग समय है ! जैसे दिल सुबह के समय सबसे अधिक काम करता है ! 4 साढ़े चार बजे तक दिल सबसे ज्यादा सक्रीय होता है और सबसे ज्यादा heart attack उसी समय मे आते है । किसी भी डॉक्टर से पूछ लीजीए, क्योकि हदय सबसे ज्यादा उसी समय में तीव्र । सक्रीय होगा तो हदय घात भी उसी समय होगा इसलिए 99 % हार्ट अॅटॅक अर्ली मॉनिंग्ज मे ही होते है । इसलिए तरह हमारा लिव्हर किडनी है, एक सूची मैने बनाई है, बाहर पुस्तको मे है । संकेतरूप मे आप से कहता हूँ की शरीर के अंग का काम करने का समय है, प्रकृती ने उसे तय किया है । तो आप का जठर अग्नी सुबह 7 से 9.30 बजे तक सबसे ज्यादा तीव्र होता है तो उसी समय भरपेट खाना खाईए ।


ठीक है । फिर आप कहेगे दोपहर को भूख लगी है तो थोडा और खा लीजीए । लेकीन बागवट जी कहते है की सुबह का खाना सबसे ज्यादा । अगर आज की भाषा में अगर मे कहूँ तो आपका नाष्टा भरपेट करे । और अगर आप दोपहर का भोजन आप कर रहे है तो बागवटजी कहते है की, वो थोडा कम करिए नाश्ते से थोडा 1/3 कम कर दीजीए और रात का भोजन दोपहर के भोजन का 1/3 कर दीजीए । अब सीधे से आप को कहता हूँ । अगर आप सवेरे 6 रोटी खाते है तो दोपहर को 4 रोटी और शाम को 2 रोटी खाईए । अगर आप को आलू का पराठा खाना है आपकी जीभ स्वाद के लिए मचल रही है तो बागवटजी कहते है की सब कुछ सवेरे खाओ, जो आपको खानी है सवेरे खाओ, हाला की अगर आप जैन हो तो आलू और मूली का भी निषिध्द है आपके लिए फिर अगर जो जैन नहीं है, उनके लिए ? आपको जो चीज सबसे ज्यादा पसंद है वो सुबह आओ । रसगुल्ला , खाडी जिलेबी, आपकेा पसंद है तो सुबह खाओ । वो ये कहते हे की इसमें छोडने की जरूरत नहीं सुबह पेट भरके खाओ तो पेट की संतुष्टी हुई , मन की भी संतुष्टी हो जाती है ।


और बागवटजी कहते है की भोजन में पेट की संतुष्टी से ज्यादा मन की संतुष्टी महत्व की है।
मन हमारा जो है ना, वो खास तरह की वस्तुये जैसे , हार्मोन्स , एंझाईम्स से संचालित है । मन को आज की भाषा में डॉक्टर लोग जो कहते हैं , हाला की वो है नहीं लेकिन डाक्टर कहते हैं मन पिनियल गलॅंड हैं ,इसमे से बहुत सारा रस निकलता है । जिनको हम हार्मोन्स ,एंझाईम्स कह सकते है ये पिनियल ग्लॅंड (मन )संतुष्टी के लिए सबसे आवश्यक है , तो भोजन आपको अगर तृप्त करता है तो पिनियललॅंड आपकी सबसे ज्यादा सक्रीय है तो जो भी एंझाईम्स चाहीए शरीर को वो नियमित रूप मंे समान अंतर से निकलते रहते है । और जो भोजन से तृप्ती नहीं है तो पिनियल ग्लॅंड मे गडबड होती है । और पिनियल ग्लॅंड की गडबड पूरे शरीर मे पसर जाती है । और आपको तरह तरह के रोगो का शिकार बनाती है । अगर आप तृप्त भोजन नहीं कर पा रहे तो निश्चित 10-12 साल के बाद आपको मानसिक क्लेश होगा और रोग होंगे । मानसिक रोग बहुत खराब है । आप सिझोफ्रनिया डिप्रेशन के शिकार हो सकते है आपको कई सारी बीमारीया ,27 प्रकार की बीमारीया आ सकती है , । कभी भी भोजन करे तो, पेट भरे ही ,मन भी तृप्त हो । ओर मन के भरने और पेट के तृप्त होने का सबसे अच्छा समय सवेरे का है ।


अब मैने(राजीव भाई ने ) ये बागवटजी के सूत्रों को चारो तरफ देखना शुरू किया तो मुझे पता चला की मनुष्य को छोडकर जीव जगत का हर प्राणी इस सूत्रा का पालन कर रहा है । मनुष्य अपने को होशियार समझता है । लेकिन मनुष्य से ज्यादा होशियारी जीव जगत के प्राणीयों मे है । आप चिडीया को देखो, कितने भी तरह की चिडीये, सबेरे सुरज निकलते ही उनका खाना शुरू हो जाता है , और भरपेट खाती है । 6 बजे के आसपास राजस्थान, गुजरात में जाओ सब तरह की चिडीया अपने काम पर लग जाती है। खूब भरपेट खाती है और पेट भर गया तो चार घंटे बाद ही पानी पीती है । गाय को देखिए सुबह उठतेही खाना शुरू हो जाता है । भैंस, बकरी ,घोडा सब सुबह उठते ही खाना खाना शुरू करंगे और पेट भरके खाएँगे । फिर दोपहर को आराम करेंगे तो यह सारे जानवर ,जीवजंतू जो हमारी आँखो से दीखते है और नही भी दिखते ये सबका भोजन का समय सवेरे का हैं । सूर्योदय के साथ ही थे सब भोजन करते है । इसलिए, थे हमसे ज्यादा स्वस्थ रहते है ।

मैने आपको कई बार कहा है आप उस पर हँस देते है किसी भी चिडीया को डायबिटीस नही होता किसी भी बंदर को हार्ट अॅटॅक नहीं आता । बंदर तो आपके नजदीक है ! शरीर रचना मे बस बंदर और आप में यही फरक है की बंदर को पूछ है आपको नहीं है बाकी अब कुछ समान है । तो ये बंदर को कभी भी हार्ट अॅटॅक, डासबिटीस ,high BP ,नहीं होता ।


मेरे एक बहुत अच्छे मित्रा है, डॉ. राजेंद्रनाथ शानवाग । वो रहते है कर्नाटक में उडूपी नाम की जगह है वहाँपर रहते है । बहुत बडे ,प्रोफेसर है, मेडिकल कॉलेज में काम करते है । उन्होंने एक बडा गहरा रिसर्च किया ।की बंदर को बीमार बनाओ ! तो उन्होने तरह तरह के virus और बॅक्टेरिया बंदर के शरीर मे डालना शुरू किया, कभी इंजेक्शन के माध्यम से कभी किसी माध्यम से । वो कहते है, मैं 15 साल असफल रहाँ । बंदर को कुछ नहीं हो सकता । और मैने कहा की आप ये कैसे कह सकते है की, बंदर कुछ नहीं हो सकता , तब उन्हांने एक दिन रहस्य की बात बताई वो आपको भी ,बता देता हूँ । की बंदर का जो है न RH factor दुनिया में ,सबसे आदर्श है, और कोई डॉक्टर जब आपका RH factor नापता है ना ! तो वो बंदर से ही कंम्पेअर करता है , वो आपको बताता नहीं ये अलग बात है । कारण उसका ये है की, उसे कोई बीमारी आ ही नहीं सकती । ब्लड मे कॉलेस्टेरॉल बढता ही नहीं । ट्रायग्लेसाईड कभी बढती नहीं डासबिटीस कभी हुई नहीं । शुगर कितनी भी बाहर से उसके शरीर मे डंट्रोडयूस करो, वो टिकती नहीं । तो वो प्रोफेसर साहब कहते है की, यार ये यही चक्कर है ,की बंदर सवेरे सवेरेही भरपेट खाता है । जो आदमी नहीं खा पाता ।



तो वो प्रोफेसर रवींद्रनाथ शानवागने अपने कुछ मरींजों से कहा की देखो भया , सुबह सुबह भरपेट खाओ ।तो उनके कई मरीज है वो मरीज उन्हे बताया की सुबह सुबह भरपेट खाना खाओ तो उनके मरीज बताते है की, जबसे उन्हांने सुबह भरपेट खाना शुरू किया तो , डासबिटीस माने शुगर कम हो गयी, किसी का कॉलेस्टेरॉल कम हो गया, किसी के घटनों का दर्द कम हो गया कमर का दर्द कम हो गया गैस बनाना बंद हो गई पेट मे जलन होना, बंद हो गयी नींद अच्छी आने लगी ..... वगैरा ..वगैरा । और ये बात बागवटजी 3500 साल पहले कहते ये की सुबह की खाना सबसे अच्छा । माने जो भी स्वाद आपको पसंद लगता है वो सुबह ही खाईए ।

तो सुबह के खाने का समय तय करिये । तो समय मैने आपका बता दिया की, सुरज उगा तो ढाई घंटे तक । माने 9.30 बजे तक, ज्यादा से ज्यादा 10 बजे तक आपक भोजन हो जाना चाहिए । और ये भोजन तभी होगा जब आप नाश्ता बंद करेंगे । ये नाष्ता हिंदुस्थानी चीज नहीं है । ये अंग्रेजो की है और आप जानते है हमारे यहाँ क्या चक्कर चल गया है , नाष्टा थोडा कम, करेंगे ,लंच थोडा जादा करेंगे, और डिनर सबसे ज्यादा करेंगे । सर्वसत्यानाष । एकदम उलटा बागवटजी कहेते है की, नाष्टा सबसे ज्यादा करो लंच थोडा कम करो और डिनर सबसे कम करो । हमारा बिलकूल उलटा चक्कर चल रहा है !


ये अग्रेज और अमेरिकीयो के लिए नाष्टा सबसे कम होता है कारण पता है ??वो लोग नाष्टा हलका करे तो ही उनके लिए अच्छा है। हमारे लिए नाष्टा ज्यादा ही करना बहूत अच्छा है । कारण उसका एकही है की अंग्रेजो के देश में सूर्य जलदी नही निकलता साल में 8-8 महिने तक सूरज के दर्शन नहीं होते और ये जठरग्नी है । नं ? ये सूरज के साथ सीधी संबंध्ति है जैसे जैसे सूर्य तीव्र होगा अग्नी तीव्र होगी । तो युरोप अमेरिका में सूरज निकलता नहीं -40 तक . तापमान चला जाता है 8-8 महिने बर्फ पडता है तो सूरज नहीं तो जठरग्नी तीव्र नहीं हो सकती तो वो नाष्टा हेवियर नही कर सकते करेंगे तो उनको तकफील हो जाएँगी !

अब हमारे यहाँ सूर्य हजारो सालो से निकलता है और अगले हजारो सालों तक निकलेगा ! तो हमने बिना सोचे उनकी नकल करना शुरू कर दिया ! तो बाग्वट जी कहते है की, सुबह का खाना आप भरपेट खाईए । ? फिर आप इसमें तुर्क - कुतुर्क मत करीए ,की हम को दुनिया दारी संभालनी है , किसलिए ,पेट के लिए हीं ना? तो पेट को दूरूस्त रखईये , तो मेरा कहना है की, पेट दुरूस्त रखा तो ही ये संभाला तोही दुनिया दारी संभलती है और ये गया तो दुनिया दारी संभालकर करेंगे क्या?

मान लीजिए, पेट ठीक नहीं है , स्वास्थ ठीक नहीं है , आप ने दस करोंड कमा लिया क्या करेंगे, डॉक्टर को ही देगे ना ? तो डॉक्टर को देने से अच्छा किसी गोशाला वाले को दिजीए ;और पेट दुरूस्त कर लिजिए । तो पेट आपका है तो दुनिया आपकी है । आप बाहर निकलिए घरके तो सुबह भोजन कर के ही निकलिए । दोपहर एक बजे में जठराग्नी की तीव्रता कम होना शुरू होता है तो उस समय थोडा हलका खाए माने जितना सुबह खाना उससे कम खाए तो अच्छा है। ना खाए तो और भी अच्छा । खाली फल खायें , ज्यूस दही मठठा पिये । शाम को फिर खाये ।

अब शाम को कितने बजे खाएं ???

तो बाग्वट जी कहते हैं हमे प्रकति से बहूत सीखने की जरूरत हैं । दीपक । भरा तेल का दीपक आप जलाना शुरू किजीए । तो पहिली लौ खूप तेजी से चलेगी और अंतिम लव भी तेजी से चलेगी माने जब दीपक बूजने वाला होगा, तो बुझने से पहले ते जीसे जलेगा , यही पेट के लिए है । जठरग्नी सुबह सुबह बहूत तीव्र होगी और शमा को जब सूर्यास्त होने जा रहा है, तभी तीव्र होगी, बहुत तीव्र होगी । वो कहते है , शामका खाना सूरज रहते रहते खालो; सूरज डूबा तो अग्नी भी डूबी । तो वैसे जैन दर्शन में कहा है सभी भोजन निषेध् है बागवटजी भी यही कहते है ,तरीका अलग है ,बस । जैन दर्शन मे अहिंसा के लिए कहते है,वो स्वास्थ के लिए कहेते है । तो शाम का खाना सूरज डुबने की बाद दुनिया में ,कोई नहीं खाता । गाय ,भैंस को खिलाके देखो नहीं खाएगी ,बकरी ,गधे को खिलाके देखो, खाता नहीं । हा बिलकूल नहीं खाता । आप खाते है , तो आप अपने को कंम्पेअर कर लीजीए किस के साथ है आप ? कोई जानवर, जीवटाशी सूर्य डूबने के बाद खाती नही ंतो आप क्यू खा रहे है ?

प्रकृती का नियम बागवटजी कहते है की पालन करीए माना रात का खाना जल्दी कर दीजिए ।
सूरज डुबने के पहले 5.30 बजे - 6 बजे खायिए । अब कितना पहले ? बागवट जीने उसका कॅल्क्यूलेशन दिया है, 40 मिनिट पहले सूरज चेन्नई से शाम 7 बजे डूब रहा है । तो 6.20 मिनट तक हिंदूस्थान के किसी भी कोने में जाईए सूरज डूबने तक 40 मिनिट तक निकलेगा । तो 40 मिनिट पहले शाम का खाना खा लिजीए और सुबह को सूरज निकलने के ढाई घंटे तक कभी भी खा लीजीए । दोनो समय पेट भरके खा लिजिए । फिर कहेंगे जी रात को क्या ? तो रात के लिए बागवटजी कहेते है की, एक ही चीज हैं रात के लिए की आप कोई तरल पदार्थ ले सकते है । जिसमे सबसे अच्छा उन्होंने दूध कहा हैं । बागवटजी कहते है की, शाम को सूरज डूबने के बाद ‘हमारे पेट में जठर स्थान में कुछ हार्मोन्स और रस या एंझाईम पैदा होते है जो दूध् को पचाते है’ । इसलिए वो कहते है सूर्य डूबने के बाद जो चीज खाने लायक है वो दूध् है । तो रात को दूध् पी लीजीऐ । सुबह का खाना अगर आपने 9.30 बजे खाया तो 6.00 बजे खूब अच्छे से भूक लगेगी ।

फिर आप कहेंगे जी, हम तो दुकान पे वैठे है 6 बजे तो डब्बा मँगा लीजिए । दुकान में डिब्बा आ सकता है । हाँ दुकान में आप बैठे है, 6 बजे डब्बा आ सकता है और मैं आपको हाथ जोडकर आपसे कह रहाँ हूँ की आप मेरे से अगर कोई डायबिटीक पेशंट है, कोई भी अस्थमा पेशंट है, किसी को भी बात का गंभीर रोग है आज से ये सूत्रा चालू कर दिजीए । तीन महिने बाद आप खुद मुझे फोन करके कहंगे की, राजीव भाई, पहले से बहुत अच्छा हूँ sugar level मेरा कम हो रहा है ।
अस्थमा कम हो रहा है। ट्रायग्लिसराईड चेक करा लीजीए, और सूत्रा शुरू करे, तीन महीने बाद फिर चेक करा लीजीए, पहले से कम होगा, LDL बहुत तेजी से घटेगा ,HDL बढ़ेगा । HDL बढना चाहिए, LDL VLDL कम होना ही चाहिए । तो ये सूत्रा बागवटजी का जितना संभव हो आप ईमानदारी से पालन करिए वो आपको स्वस्थ रहने में बहुत मदद करेगा !!
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Saturday, 2 November 2013

मुन्नावती कुमारी के हौसले और जज्बे की हमारी तरफ से सलाम

मुन्नावती कुमारी के हौसले और जज्बे की हमारी तरफ से सलाम और उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामना 

मुन्नावती कुमारी मिसाल हैं, उनके लिए जो गरीबी के नाम पर शिक्षा से दूर हो जाते हैं। मुन्नावती मजदूरी यानी रेजा का काम करती हैं, लेकिन उन्होंने पीजी संस्कृत में यूनिवर्सिटी टॉप किया है। सत्र 2010-12 में उन्होंने कुल 1600 अंक में से 1046 यानी 65.35 फीसदी अंक लेकर रांची यूनिवर्सिटी में टॉप किया और गोल्ड मेडल पर कब्जा जमा लिया। करीब एक सप्ताह पहले रांची विश्वविद्यालय ने विभिन्न विभागों के टॉपरों की घोषणा की है। उन्हें नवंबर में होने वाले 28वें दीक्षांत समारोह में मेडल दिया जाएगा।मुन्नावती ने बताया कि उनका सपना एमफिल की पढ़ाई कर लेक्चरर बनने का है। इस साल राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) दूंगी और पूरा भरोसा है कि इसमें सफल भी रहूंगी।उनका अब तक का पूरा सफर चुनौतीपूर्ण रहा है। जब मैट्रिक पास किया, तब तीन भाई बेरोजगार थे। मां देव कुंवर देवी किडनी की बीमारी से ग्रस्त। उनका इलाज रांची के करमटोली चौक स्थित डॉ. अशोक कुमार वैद्य से अब भी चल रहा है। घर का गुजारा जैसे-तैसे चल रहा था। इस बीच 2010 में पिता देवी दयाल साहू की मृत्यु हो गई। लेकिन, मुन्नावती ने कभी हिम्मत नहीं हारी। और अब उनकी मेहनत रंग लाई।
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Friday, 1 November 2013

अगर मुसलमान आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देगा ...................

पत्रकार - मोदी जी गुजरात में आपने जितने भी आतंकवादी मारे या पकड़े उनमें से 90% मुसलमान
थे ,तो क्या इससे ये साबित नहीं होता कि आप मुस्लिम विरोधी हैं ??

नरेंद्र मोदी -आपके इस सवाल का जवाब देने से पहले आपसे एक बात पूछनी थी ,बताओगे ??

पत्रकार -जी जरूर ,पूछिए
नरेंद्र मोदी - क्या आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के बारे में पता है ??
पत्रकार - जी हाँ ,बिलकुल पता है ,लेकिन इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का मेरे पूछे गए सवाल से क्या सम्बन्ध है ??

नरेंद्र मोदी - सम्बन्ध ये है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के सारे देश में जितने भी छापे मारे जाते हैं उनमें से 90% अकेले हिंदुओं के घर पे मारे जाते हैं , तो क्या आप मीडिया वाले कभी ऐसा बोलते हैं कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट हिंदू विरोधी है ??

नहीं बोलते क्योंकि आप जानते हैं कि भई जो भी गलत करेगा फिर उसके खिलाफ कार्यवाही होगी चाहे वह हिंदू हो या ना हो ,लेकिन फिर यही सोच आतंकवाद जैसे इतने गम्भीर मुद्दे पर आपकी क्यों नहीं होती है ?? आप मीडियावालों को ऐसा क्यों लगता है कि अगर गुनाह करने वाला मुसलमान है तो उसे छोड़ देना चाहिए ?? अरे !! भई अगर मुसलमान आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देगा तो मुसलमाननहीं तो क्या हिंदू और सिख पकड़े जाने चाहियें ?? ये किस तरह का सेकुलरिस्म है

आपका जो आपको अपराधी का धर्म देखने के लिए मजबूर करता है बजाए के अपराध देखने के ??
इसलिए असली मुस्लिम-विरोधी मैं नहीं आपके जैसी मानसिकता वाले वे लोग और नेता हैं
जो कि एक धर्म विशेष को अपना वोट बैंक बनाए रखने के लिए उसके अंदर मौजूद कुछ देशद्रोही तत्वों को बढ़ावा देते हैं,उनकी गलत हरकतों का नए-२ तर्क देकर बचाव करते हैं और हिन्दुस्तान की सुरक्षा व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करते 
हैं
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  • इस्लामी राज्य में गैर मुस्लिमों (अल्पसंख्यकों ) के साथ जो व्यवहार किया जाता है ,वह इस प्रकार है ,


    1- सारे हिंदू उद्योगपतियों की संपत्तिया जब्त कर ली जायेंगी | मलेशिया लेबनान में ऐसा ही हुआ, हिंदू (मुशिरिक यानि मूर्तिपूजक) की संपत्ति पर मोमिन यानि ईमान लेन वाले मुस्लमान का अधिकार हैं ये अल्लाह का फरमान हैं |

    2 आपकी (सेक्युलर वर्ग की) लड़किया, बहने, माताये कभी ना कभी मुसलमानों के बिस्तर गर्म करने को मजबूर होंगी क्यों की आप कब तक बच पाएंगे | और गाँधीवादी तो तब भी होगे जो गाँधी जी के शब्द दोहराएंगे जो उन्होंने कहे थे जब एक मा ने
    उसकी लड़की का मुसलमानों द्वारा बलात्कार करने पर गाँधी ने कहा था ,कि “तो क्या हुआ, वो तुम्हारी लड़की को कुछ दे कर तो गए ले तो नहीं गए |”

    3- कोई भी हिंदू किसी भी सरकारी व्यवस्था में बड़े ओहदे पर नहीं रह पायेगा | वही मुग़ल काल का नियम लगेगा |

    4- हिंदू अपने धर्म पर जिज्या दे रहे होंगे | याने हिंदू बने रहने के ली कर भर रहे होंगे | कुरान 9:29 में साफ़ आदेश हैं पर हमें तब भी ऐसा वर्ग मिलेगा जो सिर्फ कुछ मुसलमानों को इसके ली दोषी ठहराएगा |

    5 . हिन्दुओ के 1 से अधिक बच्चे पैदा करने पर रोक भी लग सकती हैं | क्यों की आबादी सबसे बड़ा हथियार हैं |

    6 .हिन्दुओ को ज़मीन खरीदने की इज्जाजत नहीं होगी, कश्मीर में धारा 370 की वजह से हम आज भी बस नहीं सकते |

    7. हिन्दुओ के सार्वजानिक सभी धर्म स्थल तोड़ दिए जायेंगे | उनको सार्वजनिक स्थान पर पूजा करने पर कड़े से कड़ा दंड भी हो

    8 - हिन्दुवादी सभी संगठनो को खत्म कर दिया जाएगा | हिंदू संगठित ना हो सके ऐसा हर संभव प्रयास किया जाएगा | केरल और कश्मीर प्रत्यक्ष उदहारण हैं |

    9.- देश से लोकतंत्र एक दो बार के चुनाव में ही खत्म हो जाएगा | या चुनाव प्रणाली हो पर काफिरो यानी हम हिन्दुओ का मताधिकार ही खत्म कर दिया जाए |

    10.- किसी हिंदू के ली कोई मनवाधिकार नहीं रह जाएगा | हिंदू लड़की के साथ बलात्कार , हिंदू के घर चोरी डकैती या हत्या का कोई मुकदमा नहीं दर्ज होगा |

    11.- सेना पुलिस प्रशासनिक सेवाए हर महत्वपूर्ण ओहदों से हिन्दुओ को हटा दिया जाएगा | हां वैज्ञानिक पदों से नहीं हटा पाएंगे क्यों की मुस्लिम वैज्ञानिक तो पैदा कर नहीं पाएंगे

    12.- देश में सिर्फ हिन्दुओ पर ही अत्याचार नहीं हो रहे होंगे सिख इसाई (पूर्वोत्तर भारत के छोड के) कमुनिस्ट जैन बौद्ध दालित सभी का खात्मा हो होगा | यहाँ तक की इस्लामिक शाखाओ शियाओ बरेलवियो, अहमदिया इस्माइलो का भी खात्मा हो होगा .

    13.- देश में कानून व्यवस्था खत्म हो चुकी होगी और अभी का जंगल राज हमें तब स्वर्ग सा लगेगा | देश तबाह हो चुका होगा और जल्द ही किसी इस्लामिक अफ़्रीकी देश के स्तर पर पहुच जाएगा |

    14- भारत, हिंदू, पंथ-निरपेक्षता सिर्फ सपनो के शब्द रह जायेंगे | देश का अस्तित्व उसकी सांस्कृतिक पहचान खत्म हो चुकी होगी क्यों की हिंदुत्व यानी वैदिक धर्म से ही हैं |

    15-ऐसे वक्त में फिर कोई शिवा पैदा होगा, सांगा होगा, राणा प्रताप होगा, वीर हेमू, क्षत्रशाल, गोविन्द सिंह, बंद वैरागी जैसे योद्धा निकल के आयेंगे | ये लोंग तो सदैव से हैं सदैव रहेंगे ,पर नहीं रहेगा | आज जितना विशाल भारत जो थोडा बहुत देश बचा पायेंगे वो भी लाशो के ढेर पर होगा |

    ये सब रुक सकता हैं अगर हम समय रहते भारत को वैदिक राष्ट्र/आर्य राष्ट्र /हिंदू राष्ट्र बना ले |

    इतना जान लेने के बाद भी यह अक्ल के अंधे सेकुलर इन खतरों के प्रति उदासीन है , तो यह विडिओ खुद देखें ओर अपने जैसे सेकुलर रोगियों को जरुर दिखाएँ .
    जिसमे जकारिया नायक खुले आम कह रहा है कि मुस्लिम राज्य में गैर मुस्लिमों कोई अधिकार नहीं होता .याद रखिये कि गैर मुस्लिमों में सेकुलर भी शामिल है , और इस्लाम की नजर में काफिर माने जाते हैं


    http://www.youtube.com/watch?v=6jYUL7eBdHg
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    मनमोहन सिंह के बारे में कुछ अनकहे अनसुने तथ्य .........
    .!!! जिसके बारे में जान के आप के कान खड़े हो जायेंगे और दिमाग की बत्ती बुझ जाएगी ...
     कुछ दिन पहले मनमोहन सिंह ने भारतीय सैनिको की आत्महत्या पर संसद में बयान दिया था कि '' ऐसे छोटे मोटे हादसों का जिक्र संसद में ना किया करे ''. मनमोहन के उस बयान के बाद मेरे मन में सबाल उठा की आखिर देश के प्रधानमंत्री के पद पर बैठा इंसान अपने देश की सेनाओं के बारे में इतना संवेदनहीन कैसे हो सक्ता है ... इसके बाद ये विचार आया की इंसान संबेदनशील और खुश किसके प्रति होता है ... फिर ध्यान गया की इंसान कौन कौन सी गुलामी का शिकार हो सक्ता है .. तब विचार आया की गुलामी दो प्रकार की होती है ..एक . मानसिक गुलामी ... दूसरी अहसानो में दब कर की जाने बाली गुलामी ...
    ..!!! घटनाक्रम है इंदिरा गांधी द्वारा देश में लगाए गए आपातकाल (Emergency ) का ..उस समय भारत की रिजर्व बैक का पदेन निदेशक था मनमोहन सिंह नाम का एक नौकरशाह ……..बर्ष 1977 जनतापार्टी की मोरारजी देसाई सरकार में एच ऍम पटेल देश के वित्तमंत्री थे और डाक्टर इन्द्रप्रसाद गोवर्धन भाई पटेल रिजर्ब बैंक आफ इण्डिया के गवर्नर .... उसी समय बैक आफ क्रेडिट एंड कामर्स इंटरनेशनल जिसका अध्यक्ष एक पाकिस्तानी था .. ने भारत में अपनी व्यावसायिक शाखा खोलने के लिये आवेदन दिया जब रिजर्व बैक आफ इण्डिया ने उसके आवेदन की जांच की तो पता चला की ये पाकिस्तानी बैंक काले धन को विदेशी बैंको में भेजने का काम करता है जिसे मनी लांड्रिंग कहते है इसलिए इसको अनुमति नहीं दी गयी ........... इस वीच रिजर्व बैक के गवर्नर आई जी पटेल को प्रलोभन मिला की अगर बो इस बैक को अनुमति देने में सहयोग करते है तो उनके ससुर और प्रख्यात अर्थशास्त्री ए.के.दासगुप्ता के सम्मान में एक अंतराष्ट्रीय स्तर की संस्था खोली जायेगी ..पर ईमानदार गवर्नर उस प्रलोभन में नहीं फंसे .. इस वीच आई जी पटेल की सेवानिवृत्ति का समय पास आ चुका था अंतिम दिनों में उनको पाकिस्तानी बैंक BCCI के मुम्बई प्रतिनिधि कार्यालय से एक फोन आया जिसमें उनसे निवेदन किया गया की बो BCCI के अध्यक्ष आगा हसन अबेदी से एक बार मुलाक़ात कर ले RBI के गवर्नर ने इसकी अनुमति दी लेकिन मुलाक़ात से एक दिन पहले उनके पास फोन आया की अब मुलाक़ात की कोई जरुरत नहीं है क्यों की जो काम मुंबई में होना था अब दो दिल्ली में हो चुका है .. साथ ही उनको बताया गया की बो जल्दी ही सेवानिवृत्त होने बाले है ..
    ! समय 23-06-1980 के बाद का इंदिरा गाँधी के पुत्र संजीव गाँधी उर्फ संजय गांधी की म्रत्यु से खाली हुए शक्ति केंद्र पर राजीव गाँधी की पत्नी का कब्ज़ा ... उस समूह में शामिल थे बी. के नेहरु जिन्हें पाकिस्तानी बैंक BCCI ने पहले से ही सम्मानित कर रक्खा था ...!! काल खंड 15-09-1982... भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर आई जी पटेल सेवानिवृत ..एक दिन बाद मनमोहन सिंह भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर बने ..... काल खंड 14-01-1980 इंदिरा गाँधी फिर से देश की प्रधानमंत्री बनी केंद्रीय सत्ता के अज्ञात और अनाम समूह ने पाकिस्तानी बैंक BCCI के अध्यक्ष आगा हसन अबेदी को विश्वास दिलाया की मनमोहन सिंह ही भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर बनेगे शायद इसीलिये अध्यक्ष आगा हसन अबेदी ने आई जी पटेल से मुम्बई में अपनी मुलाक़ात केंसिल की थी ....! कालखंड सन 1983 .भारतीय गुप्तचर एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस बिंग के बिरोध के बाबजूद पाकिस्तानी बैंक BCCI को मुम्बई में पूर्ण व्यावसायिक शाखा खोलने की अनुमति मिली जिसका मुख्यालय लंदन में .............! पाकिस्तानी मूल के नागरिक आगा हसन अबेदी की भारत के बित्त मंत्रालय में घुसपैठ का अंदाज इस बात से लगाए की उसको पहले ही सूचना मिल गयी की मनमोहन ही भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर होगे ... इस वीच मनमोहन की बेटी की बिदेश में पढ़ाई के लिये छात्रवृत्ति की व्यवस्था .........! 15-09-1982 मनमोहन सिंह भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर बने .. इस पद पर उनको तीन साल का कार्यकाल पूरा करना था लेकिन इस वीच बोफोर्स कांड सामने आया और मनमोहन ने अज्ञात कारणों से समय से पहले रिजर्व बैंक के गवर्नर का पद छोड़ अपनी पोस्टिंग योजना आयोग में करवाई ...! काल खंड बोफोर्स दलाली कांड के खुलासे के बाद का .... लोकसभा चुनाव के बाद बी.पी. सिंह देश के प्रधानमंत्री बने .. लेकिन इससे पहले ही मनमोहन सिंह नाम के नौकरशाह ने भारत छोड़ जिनेवा की राह पकड़ी और सेक्रेटरी जनरल एंड कमिश्नर साऊथ कमीशन जिनेवा में पद ग्रहण किया ............!
     काल खंड 10-11-1990........ कांग्रेस के समर्थन/ बैशाखियों से चंद्रशेखर भारत के प्रधानमंत्री बने इसी दौर में फिर से मनमोहन सिंह ने जिनेवा की नौकरी छोड़ भारत की ओर रुख किया और राजीव गाँधी के समर्थन से बनी चंद्रशेखर सरकार में प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार का पद ग्रहण किया .इसी वीच देश में भुगतान संकट की स्थिति पैदा हुई और मनमोहन की सलाह पर भारत का कई टन सोना इंग्लैण्ड की बैंको में गिरवी रखना पड़ा ..जिसकी बदनामी आई प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के हिस्से में ...........! कालखण्ड नरसिंह राव के प्रधानमंत्री बनने के समय का .............. कांग्रेस की अल्पमत सरकार ने झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के पांच सदस्यों सहित कई सांसदों को खरीद कर अपनी सरकार बचाई .. सरकार बचाने के इस रिश्वती खेल को नाम मिला ‘’झारखण्ड मुक्ति मोर्चा रिश्बत कांड’’ जिसका केस भारत की अदालत में भी चला और कुछ सांसदों को जेल जाना पड़ा ...........इसी सरकार में मनमोहन सिंह नाम का नौकरशाह भारत का बित्त मंत्री बना....
     बाद के घटनाक्रम में कभी देश के बित्त मंत्री रहे प्रणव मुखर्जी के सचिब के रूप में प्रणब मुखर्जी के आधीन काम करने बाले इस नौकरशाह की ताकत और तिकडमो का अंदाज तो लगाईये की उन्ही प्रणब मुखर्जी को इस नौकरशाह की प्रधानमंत्रित्व के नीचे वित्त मंत्री के रूप में काम करना पड़ा ......... इनके खाते में शेयर बाजार का सबसे बड़ा घोटाला भी दर्ज है जिसे हर्षद मेहता कांड के नाम से जाना जाता है जिसमे देश की जनता को खरबो रुपये का चूना लगा था उस समय मनमोहन देश के वित्त मंत्री हुआ करते थे ... बाद के समय 2009 में इनकी सरकार बचाने के लिये एक बार फिर एक कांड हुआ जिसे देश .. कैश फार वोट नाम के घोटाले के रूप में जनता है .....इन सब बातो के बाबजूद अगर देश के जादातर नेता समाजसेवी ..बुद्धिजीवी और अन्ना जैसे अनशनकारी इनको व्यक्तिगत रूप से ईमानदार होने का सार्टिफिकेट देते है और भारत का मीडिया भी इनको मिस्टर क्लीन की उपाधि देता है ... तो इसे भारत का दुर्भाग्य कहा जाए या बिडंबना इसका निर्णय आप स्वयं करे ......
    ! साभार ... रमेश लक्ष्मण तांबे की पुस्तक .. भ्रष्ट नौकरशाह का सफर , बी सी .आई से डी सी . सी आई तक ‘’.....................! **आभार मित्र ------पवन अवस्थी **







धनतेरस की कथा

धनतेरस की कथा 

धनतेरस की शाम घर के बाहर मुख्य द्वार पर और आंगन में दीप जलाने की प्रथा भी है। इस प्रथा के पीछे एक लोक कथा है, कथा के अनुसार किसी समय में एक राजा थे जिनका नाम हेम था। दैव कृपा से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। |ज्योंतिषियों ने जब बालक की कुण्डली बनाई तो पता चला कि बालक का विवाह जिस दिन होगा उसके ठीक चार दिन के बाद वह मृत्यु को प्राप्त होगा। राजा इस बात को जानकर बहुत दुखी हुआ और राजकुमार को ऐसी जगह पर भेज दिया जहां किसी स्त्री की परछाई भी न पड़े। दैवयोग से एक दिन एक राजकुमारी उधर से गुजरी और दोनों एक दूसरे को देखकर मोहित हो गये और उन्होंने गन्धर्व विवाह कर लिया।
विवाह के पश्चात विधि का विधान सामने आया और विवाह के चार दिन बाद यमदूत उस राजकुमार के प्राण लेने आ पहुंचे। जब यमदूत राजकुमार प्राण ले जा रहे थे उस वक्त नवविवाहिता उसकी पत्नी का विलाप सुनकर उनका हृदय भी द्रवित हो उठा परंतु विधि के अनुसार उन्हें अपना कार्य करना पड़ा। यमराज को जब यमदूत यह कह रहे थे उसी वक्त उनमें से एक ने यमदेवता से विनती की हे यमराज क्या कोई ऐसा उपाय नहीं है जिससे मनुष्य अकाल मृत्यु के लेख से मुक्त हो जाए। दूत के इस प्रकार अनुरोध करने से यमदेवता बोले हे दूत अकाल मृत्यु तो कर्म की गति है इससे मुक्ति का एक आसान तरीका मैं तुम्हें बताता हूं सो सुनो। कार्तिक कृष्ण पक्ष की रात जो प्राणी मेरे नाम से पूजन करके दीप माला दक्षिण दिशा की ओर भेट करता है उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है । यही कारण है कि लोग इस दिन घर से बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीप जलाकर रखते हैं।
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17 बार मुहम्मद गोरी को कुत्ते की तरह खदेड़ने वाले महाराज पृथ्वीराज चौहान जयचंद के कारण 18वा युद्ध हार चुके थे परन्तु उनके खून में राजपुताना जोश हिलोरे मार रहा था.... युद्ध के बाद उनको बंदी बना लिया गया.... और गौरी उनको अपने साथ अफगानिस्तान (बटवारे से पहले पंजाब का अंग था) ले
गया.... दुष्ट मुसलमानों ने उनकी आँखे फोड़ दी..... ऐसे समय में कवि चन्द्रवरदाई उनके साथ थे.... 

एक दिन मोहम्मद गौरी ने कवि चन्द्र को एक गीत सुनाने के लिए कहा और महाराज पृथ्वीराज
को कहा की मैंने आपकी धनुर्विद्या के बारे में बहुत सुना है और आप बिना आँखों के भी निशाना लगा सकते है सो आज आपकी ये कला देखना चाहता हु... महराज पृथ्वीराज ने धनुष बाण लिया और कवि चन्द्र ने गाना शुरू किया.... इशारों ही इशारों में गीत द्वारा उन्होंने महाराज पृथ्वीराज को मुहम्मद गौरी की दिशा और स्तिथ्ती बता दी .... महाराज ने निशाना साधा और फिर मोहम्मद गौरी ढेर..... महाराज पृथ्वीराज चौहान को उसी समय कवि चन्द्र को आदेश दिया की वो उन्हें मार दे..... कवि चन्द्र
जो उनके बचपन के मित्र भी थे...... बहत कड़े मन से उन्होंने महाराज को मारा और फिर अपनी कटार से खुद को भी ख़तम कर लिया.....

आज भी अफ्घनिस्तान और पेशावर की सीमा पर महाराज पृथ्वीराज चौहान की समाधी है ... उनके साथ ही कवि चन्द्र की भी समाधी है....
पाकिस्तानी सीमा पर बनी हुई इन समाधियो पर न ही कभी कोई मेला लगता है और न ही कभी फूल चड़ाए जाते है..... बल्कि उनकी पवित्र समाधी पर स्थानीय लोग और वहा के मुसलमान पत्थर जरुर मारते है.... और इसे हर जुम्मे (शुक्रवार) से पहले वाले दिन गुरूवार को एक रस्म की तरह निभाते है.....

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