Tuesday, 1 July 2014

एक लड़का अपने पिता को कागज पर कुछ लिखते हुए देखकर पूछा, -' क्या आप मेरे लिए कहानी लिख रहे है ?
पिता ने कहा,- 'कहानी तो लिख रहा हूँ पर उससे महत्वपूर्ण यह पेंसिल है जिससे मैं लिख रहा हूँ और उम्मीद करता हूँ तुम भी बड़े होकर पेंसिल कि तरह ही बनोगे . '
लड़के ने कहा -'इसमें क्या बात है ये तो बाकी पेन्सिल जैसा ही तो है.'
पिता ने बोला -'ये तो तुम्हारे नजरिये पर निर्भर करता है ,तुम्हे पेंसिल में कुछ नजर नहीं आ रहा है पर मुझे इसके पांच खास गुण नजर आ रहे है जिसे अपना लो तो तुम महान बन जाओगे.'
पहला : आप महान कामों को अंजाम दे सकते है लेकिन पेंसिल की तरह यह न भूले कि आपके भी पीछे एक हाथ होता है जो आपको मार्गदर्शन देता और उस हाथ को हम ईश्वर कहते है.
दूसरा: शार्पनर पेंसिल को थोड़ी देर के लिए बहुत तकलीफ पहुचाता है पर इसके बाद वो नुकीली होकर और भी ज्यादा अच्छा लिखती है. इसलिए तुम्हे भी दुःख और तकलीफों को सहना सीखना चाहिए क्योकि वो तुम्हे अच्छा व्यक्तित्व प्रदान करती है .
तीसरा: पेंसिल इरेजर द्वारा गलतियों को मिटाने का मौका देती है यानी गलतिया हो तो उसको सुधारना भी जरुरी है यह हमें न्याय और सज्जनता के रास्ते पर चलने में मदद करती है .
चौथा: पेंसिल में उसकी लकड़ी से ज्यादा उसके अन्दर कि ग्रेफिट महत्वपूर्ण है,जिसके कारण उसका वजूद है. इसलिए तुम हमेशा धयान दो कि तुम्हारे अन्दर क्या भरा है?
पांचवां: पेंसिल हमेशा निशान छोड़ जाती है,तुम भी जीवन में जो कुछ करते हो वह निशान छोड़ जाती है इसलिए कोई भी काम चाहे वो कितना भी छोटा क्यों न हो बुद्धिमानी और एकाग्रता से करो.
समाचार चैनेलो ने एक छोटी सी खबर नीचे की पट्टी में चलायी थी की मोदी ने आईएनएस मैसूर को ईराक में फसे लोगो के लिए रवाना किया।। चूकी दलाल मिडिया ने इस पर कोई डिबेट नहीं की अतः हमने इसे छोटी सी खबर मान लिया। मगर क्या आप ने सोचा है सिर्फ चंद भारतियों के लिए नेवी का वारशिप भेजने की क्या आवश्यकता थी??ये सिर्फ इराक में फसे भारतियों को निकालने के लिए नहीं है।। ख़ुफ़िया स्तर पर इसके क्या मायने हैं ये तो खबर बाहर नहीं आ पायेगी मगर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ये एक बड़ा सामरिक सन्देश है अमरीका समेत विश्व के अन्य देशो को भी।। इससे पहले जब कोई अंतर्राष्ट्रीय संकट आता था तो सिर्फ अमरीका,रूस या एक दो अन्य देश अपने वारशिप भेजते थे।अमरीका इस मुद्दे को लटका रहा था क्युकी ISIS के आतंकियों को ट्रेनिंग अमरीका ने ही दिया है।। मगर अमरीका से अलग जाते हुए अबकी बार मोदी ने तुरंत निर्णय लेते हुए इस वारशिप को रवाना कर दिया।। दूसरी और रूस के विमान ISIS की कमर तोड़ रहे हैं। अन्तरराष्ट्री बिरादरी में ये सन्देश गया की भारतीयों की जान अब कांग्रेस के जमाने की तरह सस्ती नहीं ।भारत अपने नागरिको की रक्षा हेतु कभी भी कहीं भी आपरेशन कर सकता है एवं भारत में भी मजबूत निर्णय लेने वाला एक नेतृत्त्व है। आतंकियों में भी ये सन्देश गया की एक तरफ रुसी विमान है तो दूसरी और जरुरत पड़ने पर भारत भी आपरेशन शुरू कर सकता है।।
इस प्रकार भारत सरकार और नरेन्द्र मोदी ने अपने एक निर्णय से सेनाओ का मनोबल बढाते हुए अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी को भी भारत में एक रीढ़ वाले राजनितिक नेतृत्त्व का संकेत दे दिया है जो जरुरत पड़ने पर अमरीका जैसी महाशक्ति से इतर भी निर्णय ले सकता है।।
व्यक्ति संस्थाएं
- अरविंद केजरीवाल ल्ल ग्रीनपीस 
- सी. उदय कुमार ल्ल एक्शन एड
- तीस्ता सीतलवाड़ ल्ल कबीर
- स्वामी अग्निवेश ल्ल सबरंग ट्रस्ट
- अरुणा रोड्रिग्ज ल्ल सिटीजन मनीष सिसौदिया फॅार जस्टिस
- सुमन सहाय एण्ड पीस

आंदोलन से प्रभावित योजनाएं/कार्य
- न्यूक्लियर पावर प्लांट्स 
- यूरेनियम खनन 
- कोयले से चलने वाले ऊर्जा संयंत्र (सीएफपीपीएस)
- मेगा इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स (पॉस्को व वेदान्ता) 
- नर्मदा सागर बांध
- अरुणाचल प्रदेश में लघुविद्युत परियोजनाएं 
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मेधा पाटकर 80 के दशक से ही सरदार सरोवर बांध का विरोध क्‍यों कर रही है? 
इसके पीछे की सच्‍चाई यह है कि ऊर्जा की बड़ी जरूरत को पूरा करने वाली इस पूरे परियोजना को रोकने में अमेरिका और वर्ल्‍ड बैंक की जबरदस्‍त भूमिका है।
इंटरनेशनल इन्‍वॉरमेंटर कम्‍युनिटी ने 1987 व 1989 में मेधा पाटकर के दो अमेरिकी यात्रा को फंड किया था।
इनवॉरमेंटर डिफेंस फंड (EDF) के लोरी उडाल ने मेधा पाटकर और वर्ल्‍ड बैंक अधिकारियों के बीच बैठक का आयोजन किया था।
उडाल ने ही भारत के गुजरात में निर्मित होने वाली इस बांध को रोकने के लिए उत्‍तरी अमेरिका, यूरोप, जापान और आस्‍ट्रेलिया में नर्मदा एक्‍शन कमेटी का निर्माण व विस्‍तार किया था, जिसका कुल मकसद पर्यावरण व पुनर्वास के नाम पर इस पूरे परियोजना को बंद कराने का था ताकि भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्‍मनिर्भर न बन सके।


अगर आपके पास थोडा भी समय हो तो पाकिस्तान से आये हुये इस पत्र जो की भारत की 3.5 लाख वहाबी मस्जिदों मे हर जुम्मे को पढ़ा जाता है ...अवश्य पढ़ें ...और आप ना भी पढ़े तो कम से कम अपने मासूम बच्चों को अवश्य पढ़ायें ... ताकि वो अपनी जिंदगी..एक मासूम बनकर ना जियें !
'' उर्दू फारसी पत्र की सत्यप्रति
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पैगाम इस्लाम
आप सबको गुजारिश है कि हमने हिन्दुस्तान पर 800 साल हुकूमत की है। अब भी हमारी हुकूमत चलती है पर सीधी तरह से नहीं। सब पार्टियां और इनके काफिर नेता हमारे इशारे पर नाचते हैं।
हमको आज मदरसों, मस्जिदों और हज के लिये पैसा मिलता है।
2004 और 2009 के चुनाव में हिन्दुओं की पार्टी भाजपा को मुंह की खानी पड़ी मगर हमारी पूरी हुकूमत तो तब मानी जायेगी जब पूरा हिन्दुस्तान इस्लाम के झण्डे के नीचे होगा। जल्दी ही हमारे मुजाहिद्दीन लड़ाके सफ़ेद दाड़ी वाले गुजराती को मार देंगे फिर हिन्दुओं का अंतिम रहनुमा भी हमारे रास्ते से हट जायेगा !
इसलिये हर मुसलमान का फर्ज है कि खाना जंगी के लिये तैयार रहें। इसके लिये हथियारों के अलावा बम्ब बनाना सीखें और कुरान की 24 आयातें रोज पढ़ें और उसी के मुताबिक काफिरों के मारने, जलाने और धोखे से पकड़ने का काम सरंजाम दें और उनको लूट और उनकी औरतों को भगा कर शादी करें। वैसे तो ये सिलसिला 70 साल से चल रहा है। पर अब पूरा जोर तब लगायें जब खाना जंगी के लिये आईएसआई और इंडियन मुजाहिद्दीन के लिये हुकुम देंगे।
हर मुसलमान को दूसरा कलमा रोज पढ़ना चाहिये। वो यह है- हंस के लिये लिया है पाकिस्तान और लड़के लेंगे हिन्दुस्तान।
अगरचे मदरसा जैल बातों पर आप लोग चल रहे हो फिर भी तबज्जो दें।
1-बिजनौर यू0पी0 फार्मूलाः- यहां पर मुसलमान जवान लड़के हिन्दुओं से दोस्ती करके अपने घर बुलाकर मछली, मुर्गा खिलाते हैं और फिर काफिरों के घर उनकी औरतों से यारी करके फंसाते हैं। ये औरतें मुसलमानों को माल भी खिलाती हैं और पैसा भी देती हैं। बहुत सी काफिर लड़कियों ने मुसलमानों से शादी कर ली है। वाह अल्ला तेरा शुक्र है।
2-बोतल फार्मूला- गरीब बस्तियों में काफिरों को ज्यादा शराब पिला कर नामर्द बनाओ और उनकी औरतों से ऐश करो। 9 करोड़ हिंदु तो मुसलमानों से मिल चुके हैं और उनकी औरतें तो आराम से मुसलमानों के बगल में आ जाती हैं।
3-चोरी डकैती- काफिरों के घरों में धोखा देकर चोरियां करो उनके खेतों की फसल काटो और उनके जानवरों की भी चोरी करो।
4-शहरी फार्मूला-(1) मुसलमान अकल से काम लें, अपने छोटे लड़कों को काफिरों के घर नौकर रखो और 25/25 बच्चे कैसे पालोगे, 8/10 साल के बाद आपके बच्चे जवान होकर घर की हिन्दू औरतों से दोस्ती करेंगे और ऐश के साथ-साथ पैसा भी खूब मारेंगे।
शहरी फार्मूला-(2) मुसलमान जवान नौकर, ड्राइवर, खानसामा, रोटी पकाने वाला, माली, चैकीदार बन हिन्दू नामों से रहो और मौका मिलते ही उपर वाली बातों पर अमल करें। इसके अलावा उनकी गाड़ियों, स्कूटरों वगैरा भी चोरी कर सकते हैं। ये शहर के इमाम से हर तरह के उस्तादों का पता लग जायेगा। काफिरों को जब पता लगा अपनी औरतों के बारे में पता लगा तो उन्होंने नौकरी से निकालने की कोशिश की तो औरतें ही कहने लगी-अच्छा भला ईमानदारी से काम करता है इसे नौकरी से क्यों निकालते हो। कई बार औरतें मुसलमानों के साथ भाग गईं। कई मुसलमान निकाले जाने के बाद दिन में जब काफिर घर पर नहीं होते आकर ऐश, ईशरत करते हैं। माल खाते हैं और पैसे भी ले जाते हैं। या अल्ला तेरा शुकर है तूने किसलिये हिन्दू को अंधा बनाकर रखा है, जिसको पैसा कमाने के अलावा कुछ भी नजर नहीं आता। ये इस्लाम की जीत है।
जेहाद- खाना जंगी के जेहाद में यदि मुसलमान शहीद होगा तो उसे जन्नत मिलेगी, अगर जिन्दा बचता है तो हिन्दुस्तान के काफिरों की सारी जायदादें मुसलमानों को मिलेंगी और सारी हिन्दू औरतें भी मिलेंगी तो यह भी जन्नत होगी। जैसे पाकिस्तान, कश्मीर और बांग्लादेश की सब कोठियां बंगले मुसलमानों को मिले थे। जेहाद के लिये 2 लाख सीमी के जवान 1 लाख अलकायदा के लिये मुसलमान तैयार हैं। अब हम 20 करोड़ हो गये हैं इसके अलावा 5 करोड़ बंग्लादेशी जिसमें 1 लाख मुजाहिद्दीन लड़ाके हैं। इसलिये घबराने की जरूरत नही है। हिन्दुस्तान की मिलिट्री में भी काफी मुसलमान हैं और बहुत से तो हिन्दू नामों से भर्ती हैं। पुलिस में भी काफी मुसलमान हैं और वक्त आने पर काफिरों को दोजख पहुचायेंगे।
आम हिन्दू लोगों में मुसलमानों के लिय नरम रूख है जिसकी वजह ऊपर बतायी वजह हिन्दू औरतों से दोस्ती है। केरल, मद्रास और हैदराबाद में काफी असलाह पाकिस्तान और अरब मुल्कों से आ चुका है। बिहार में चीन और बांग्लादेश से 60 हजार एके-47 आ चुकी हैं। इसलिये लाल किला पर झण्डा जल्दी झूलेगा।
अरब मुल्कों में हिन्दू औरतों को नर्स, आया, खाना बनाने वाली बनाकर ज्यादा से ज्यादा भेजें। अच्छी तनख्वाह के लालच में गरीब व दरम्यान घर की लड़कियां खुशी से जाती हैं और वहां जाकर रात को सारी की सारी अरबों के पास सो जाती हैं और मुसलमानों की आबादी बढ़ाने में काफी मददगार हैं।
हिन्दू लड़की से शादी, हिन्दू लड़की जो भगाकर लायी जाये उसे 2 दिन भूखा रखें फिर अच्छा-अच्छा खाना दें। उनकी सतत या खतना जरूर करायें। अगर उसके रिश्तेदार कोर्ट केस करें तो कोर्ट में ले जाने से पहले 50/60 बंदूकों के हथियार दिखायें और खबरदार करें। अगर हमारे खिलाफ बयान दिये तो तेरे भाई और खानदान को भून देंगे। ऐसी लड़की को वश में करने वाले ताबीज पहनाना न भूलें। ये भी कमाल का काम करता है।
हरियाणा के मुसलमानों का कमाल- गांधी की मेहरबानी से मेवात के मुसलमान पाकिस्तान नही गये थे। पिछले 15 सालों से40 लाख मुसलमान बिहार, यूपी, राजस्थान में आकर बस गये हैं। 70 फीसदी तो हिन्दू नामों से रह रहे हैं और ऊपर लिखी बाते अच्छी तरह सरंजाम दे रहे हैं।
पंजाब में भी लाखों मुसलमान पहुंच चुका है। वक्त आने पर ये सब जेहाद के लिये कुरान के मुताबिक काफिरों को दोजख पहुचाने के लिये तैयार हैं। अल्ला हमारे साथ है।
काफिरों का बंटवारा- वैसे तो हिन्दू जांत-पांत में बंटा है आप लोग इनके चमारों के दिमाग में हिन्दुओं के लिये खूब नफरत भरें कि हिन्दुओं ने इनके ऊपर सैकड़ों साल जुल्म ढाये।
मुसलमानों शाबास।
आसाम और कश्मीर- आसाम और कश्मीर पर तो मुसलमानों का कब्जा हो चुका है। सारे बुतखाने तोड़ दिये गये हैं। महलों व सड़कों का नाम बदलकर जिन्हा रोड व अली रोड कर दिये हैं। आसाम पर भी काफी हद तक मुसलमानों का कब्जा है। काफिरों का कत्ल करके दहशत फैला कर भगाया जा रहा है। इस तरह कश्मीर की तरह हिन्दुओं की जायदाद व औरतें अल्ला की फजल से हम मुसलमानों को मिल रही हैं। इन्शाह अल्लाह जल्दी ही सारे हिन्दुस्तान को इस्लाम के झंडे के नीचे आयेगा।
सन् 1947 में हमारे जवानों ने काफिरों के छोटे-छोटे बच्चे आसमान में उछालकर नैजे व भाले पर लिये थे। इनकी औरतों के साथ 10/10 मुसलमानों ने जिन्हा किया था और अल्हादानी लोहे की नोहर गर्म करके लाल-लाल उनके थनों पर चिपकाई गई थी। कई औरतों के थन काट दिये थे। उनके बच्चों को मारकर पकाकर खिलाया भी था।
राजीव गांधी के राज में फार्मूला काश्मीर में आजमाया गया। नतीजा यह निकला कि साढ़े तीन लाख पण्डितों से कश्मीर 3 दिन में खाली हो गया और करोड़ों बल्कि अरबों रूपये की काफिरों की जायदाद पर मुसलमानों का कब्जा हो गया।
जेहाद में औरतों के लिये खास दस्ता- मुसलमान जवान का यह दस्ता स्कूटर कार छोटे ट्रक वगैरा पर हिन्दू देवताओं की फोटों चिपकाकर रखें। ड्राइवर व कंडक्टर हिन्दू वेश में हो। जब अफरा-तफरी फैले तो काफिरों को जिनमें औरतें ज्यादा हों मुसलमान मोहल्लों में भगाकर ले जायें। औरतें को वहां पहुंचा दी जायें। काफिर मर्द और बच्चे मारकर दोजख भेज दें। ये नुस्खा 40 साल पहले अहमदाबाद में आजमाया गया था, उस समय वाई वी चैहान होम मिनिस्टर थे। इसी दस्ते के लिये जयपुर फार्मूला कई साल पहले हमारे मुसलमाना जवानों ने जयपुर में फसाद शुरू किये थे और हिन्दू घरों से व लड़कियों के स्कूलों से उठा ली थी। 6 माह बाद जब 2/3 लड़कियों ने अपने घर खबर भेजी तो खानदान के उन लोगों ने उन लड़कियों को वापस लेने से इन्कार कर दिया। 1948 में जब हिन्दू मिलिट्री, हिन्दू औरतों को निकालकर हिन्दुस्तान लाई तो उनके खानदान वालों ने लेने से इंकार कर दिया। इस वास्ते कुछ ने तो खुदकुशी कर ली। ये सब मुसलमानों के लिये अच्छा हुआ। इसके लिये हिन्दुओं की दाद देनी चाहिये।
मुसलमानों और हिन्दुओं के मरने की निस्बतः- जब पाकिस्तान बना तो एक मुसलमान शहीद हुआ था और 100 काफिर मारे गये थे अब तो बम्बों और एके 47 का जमाना है, अल्ला ने चाहा तो एक मुसलमान के मारे जाने पर 1000 हिन्दू मरेंगे अल्ला हमारे साथ है।
मुसलमानों को अल्ला का शुक्रगुजार होना चाहिये कि वो सब भूल गयें अल्ला ने उसका दिमाग बड़ा कमजोर दिया है। इसलिये हमने 800 साल हुकूमत की और इन्शाह अल्ला फिर करेंगे। इस बात से साबित होता है कि अल्ला भी चाहता है कि मुसलमानों को हिन्दुस्तान की हुकूमत मिले और हिन्दुओं की औरतों के साथ मौज मस्ती मिले ।
चीन, पाकिस्तान और बंग्लादेश से हथियार व नकली नोट हम मुसलमानों की मदद के लिये अल्ला भिजवा रहा है। हिन्दू अफसर और पुलिस वाले इसी पैसे से अंधे बना दिये जाते हैं।
यह खत मस्जिदों में जुमे के रोज सब मुसलमानों को सुनाया जाये। खाना जंगी के वक्त पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश भी हमारी मदद के लिये हिन्दुस्तान पर हमला बोल देंगे। नेपाल में काफी मंदिर तोड़ दिये गये हैं और आईएसआई की मदद से काफी लोग मुसलमान हो गये हैं।
कलावा मोटर साईकिल-मुसलमान जवानों को चाहिये अपने हाथ में कलावा बांध कर अपना नाम बदलकर हिन्दू नाम अपना लें। मोटर साईकिल पर सवार होकर हिन्दू मोहल्ले में कालेजों और स्कूलों के पास खड़े होकर हिन्दू लड़कियों से इश्क लड़ायें। होटलों में भी खुद भी ऐश करें और उनसे काल गर्ल्स का काम लें। इस कमाई से कुछ हिस्सा हथियारों पर खर्च करें। कारों वाले भाई जान भी करें। अरब मुल्कों में इसके लिये काफी पैसा हम तक पहुंच रहा है ! जिसे हमने तुम्हारे मौलानाओं से तुम्हे काफिरों की लौडियों को फंसाने के बाद तुम्हे देने को कह दिया है !
भाजपा का डर था कि वो कुरान की 24 आयतें कहीं छापकर नहीं बांटे मगर अल्ला की मेहरबानी से वो अंधे हो गये और नहीं बांट सके। अल्ला तेरा शुक्र है !
भूल कर भी सिखों को न छेड़ें। ये जालिम होते हैं बल्कि चक्कर चलाकर उनको हिन्दुओं से दूर रखें। हिन्दुओं के बाद इनसे भी निबट लेंगे !
ये खत किसी हिन्दू को ना दिखायें।
आपका खादिम
(हाफिज सईद)
नारे तदबीर अल्लाह हो अकबर ''is. SMS ko itana felado..

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............अनामिका जोशी के हौसले को नमन ..जन्म से दोनों हाथ नही होने के बाद भी अनामिका सेसना बीचक्राफ्ट प्लेन उड़ाती है ।आप वडोदरा एरोड्रम पर इन्हें प्लेन उड़ाते देख सकते है । बीचक्राफ्ट प्लेन में रडर नीचे नही होता इसलिए अनामिका सिर्फ बीचक्राफ्ट ही उड़ाती है.............................................................................................

''भारी सूखा'' या ''भारी बरसात'' भी अरबो डॉलर का व्यपार है आज ''अंतर-रास्ट्रीय'' मार्केट में !

अमेरिका केवल ''मोदी जी सरकार'' की जासूसी नहीं कर रहा है अपितु तकनिकी के गलत इस्तिमाल पर भी उत्तर आया है !
इस साल भारी सुखा पड़ेगा , बरसात तब होगी जब किसानो को नुकसान पहुचे ! नासा और U.S. military की नयी एलेक्ट्रोमेग्नेटिक तकनीकी ( HARRP) की मिलीभगत है ''अल नीनो'' में छेड़छाड़ !अमेरिकन वैज्ञानिक भी मानते हैं अमेरका की सेना सारे पर्यावरण मैं छेड़छाड़ की पीछे हैं , और मार काट फैला रही है
''अल नेनो'' प्राकृतिक नहीं है !
यह हार्प तकनीकी है , HARRP एलेक्ट्रोमैग्नेटि वेव्स है ! इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स ऊर्जा तरंगे है , यह हज़ारो साल पुराने ग्लेशियर को भी पिघला सकते हैं ! ''अल नेनो'' की सारी भविष्वाणी केवल अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया करता है ! इनको ४-५ महीने पहले ही पता लग जाता है इस साल सुखा पड़ेगा , कहा बाढ़ आएगी !
अमेरिकी मौसम विज्ञानी महीनो पहले यह कैसे बता पाते हैं की ''भारत'' में इस साल सबसे बड़ा सूखा पड़ने वाला है जबकि अपने यहा यह मौसम में आराम से परिवर्तन कर के भारी बारिश या तापमान में परिवर्तन भी कर लेते हैं !
''नासा'' और ''C.I.A'' इस दिशा में बहुत आगे निकल चुका है !
सूखे की दशा में भारत के कमोडिटीज और स्टॉक मार्केट का पस्त होना अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के हित में है !
''भारी सूखा'' या ''भारी बरसात'' भी अरबो डॉलर का व्यपार है आज ''अंतर-रास्ट्रीय'' मार्केट में !
साइकिल की मरम्मत करने वाला बना आईएएस..पिता का सपना किया पूरा...

मुश्किल नहीं है कुछ भी, गर ठान लीजिए। इसी कहावत को सच साबित किया है इस प्रतिभावान ने। 

पुणे: 23 साल के वरुण कुमार बरनवाल के लिए गुरुवार का दिन अपने पिता के सपनों को पूरा करने वाला रहा। वरुण ने पहली बार में यूपीएससी की परीक्षा में सफलता हासिल करते हुए आल इंडिया मेरिट लिस्ट में 32वां रैंक हासिल किया है। वरुण को यह मुकाम कड़ी मेहनत के बाद मिला है। साल 2006 में वरुण जब सिर्फ 15 साल के थे उस दौरान उनके सर से पिता का साया उठ गया।

पिता की मौत के दौरान वरुण 10वीं कक्षा में पढ़ रहे थे। पिता के बाद वरुण के ऊपर जिम्मेदारियों का बोझ आ गया। परिवार चलाने के लिए वरुण ने कई महीनों तक साइकिल मरम्मत की दुकान में काम किया। इस कठिन माहौल में भी वरुण ने हिम्मत नहीं हारी और दसवीं की परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया। बारहवीं पास करने के बाद वरुण ने पुणे में एमआईटी से इंजीनियरिंग की डिग्री फर्स्ट डिवीजन में हासिल की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही वरुण ने यूपीएससी की तैयारी शुरू की और यह मुकाम हासिल किया।