Wednesday, 14 December 2016

sanskar


5 वीं क्लास की स्टूडेन्ट "हरिका" रोज अपने फ्री टाइम में मार्केट जाकर व्यापारियों को "कैशलेस" डिजिटल ट्रांसेक्शन सिखाती है !! @ बैंगलोर
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इस बच्ची को Hatts off !
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ब्रेकिंग : RBI अफसर "माइकल" गिरफ्तार !!
करोडो रु के मनी लॉन्ड्रिंग करने पर RBI के स्पेश्यल अफसर "माइकल" को CBI ने बैंगलोर से उठा लिया 
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भारत में सिर्फ 1.62 करोड़ लोग ही इनकम टैक्स देते है। इसका मतलब है कि बाकि 124 करोड़ लोगो की इनकम 2.5 लाख ( टैक्स फ्री स्लैब) की रेंज में है।
*अब ये समझ में नहीं आ रहा है कि इन सभी 124 करोड़ लोगो को जिनकी कर योग्य आय सालाना 2.5 लाख ( या 4800 प्रति सप्ताह) है उनको 24000 रुपये से ज्यादा रूपये एक सप्ताह में क्यों चाहिए???*
क्या हमारे देश के बड़े बड़े ज्ञानी लोग इस पर प्रकाश डाल पाएंगे.


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आठ नवंबर को नोटबंदी के एलान के बाद से देशभर के एयरपोर्ट से 245 किलो सोना और 60 करोड़ रुपये की नकदी जब्‍त की गई है।
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल(सीआईएसएफ) की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार सोने व नकदी की जब्‍ती देश के 10 बड़े हवाई अड्डों पर हुई हैं। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, सीआईएसएफ ने इनकम टैक्‍स विभाग की इंटेलीजेंस टीम की मदद से दिल्‍ली, मुंबई, कोलकाता, गुवाहाटी, पटना, नागपुर, दिमापुर, चेन्‍नई, अहमदाबाद और पुणे एयरपोर्ट पर 10 नवंबर से यह कार्रवाई शुरू की थी। इसके तहत आठ दिसंबर तक 60 करोड़ रुपये की नकदी जब्‍त की गई। यह पूरी रकम 500 और 1000 रुपये के नोटों में थी। वहीं 245 किलो सोना भी बरामद किया गया। चेन्‍नई एयरपोर्ट पर सबसे ज्‍यादा सोना और मुंबई एयरपोर्ट सबसे ज्‍यादा नकदी बरामद हुई।
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्‍ली हवाई अड्डे पर 6.23 करोड़ रुपये कैश, 19.409 किलो सोना, मुंबई में 18.32 करोड़ रुपये और 90.40 किलो सोना बरामद किया गया। वहीं कोलकाता में 5.65 करोड़ रुपये व 25.463 किलो सोना, चेन्‍नई में 6.05 करोड़ रुपये और 109 किलो सोना, गुवाहाटी से 69.14 लाख रुपये, पटना से 1.33 करोड़ रुपये, अहमदाबाद से 3.14 करोड़ रुपये और 800 ग्राम सोना, नागपुर से 11 करोड़ रुपये, दिमापुर से साढ़े तीन करोड़ रुपये और पुणे से चार करोड़ रुपये और 11 किलो सोना बरामद किया गया। गौरतलब है कि नोटबंदी के आदेश के बाद से देश में कर्इ जगहों से नकदी बरामद की गई है।
इससे पहले चेन्नई में पुलिस ने एक व्यवसायी के पास से 106 करोड़ रुपये कैश और 127 किलो सोना बरामद किए थे। मुंबई में पुलिस ने एक व्‍यक्ति के पास से 2000 रुपये के नोटों में 85 लाख रुपये जब्‍त किए। गुजरात के सूरत में भी पुलिस ने 2000 रुपये के नए करेंसी नोट वाले कुल 76 लाख रुपये के साथ चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गुड़गांव से पुलिस ने 10 लाख रुपये कैश बरामद किए हैं। इनमें भी सभी नोट नई करेंसी के थे। इससे पहले 8 दिसंबर को कर्नाटक से पुलिस ने छह लोगों को 15 लाख रुपये मूल्‍य 50, 100 और 2000 के नोटों के साथ गिरफ्तार किया था। छत्‍तीसगढ़ में एक शख्‍स को 1.10 लाख रुपये के 1000 के नोटों के साथ पकड़ा गया।

Monday, 5 December 2016

इन 5 जगहों के बारे में जान कर आप भी करेंगे महाभारत पर भरोसा....

कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध लड़ा गया था। माना जाता है कि हरियाणा के इस जिले में ही कौरव और पांडव सेना के बीच 18 दिनों तक युद्ध हुआ था। अदृश्य सरस्वती भी यहां से होकर बहती थी। यहां अभी भी ऐसी कई जगहें हैं जिनके आधार पर ये दावा किया जाता रहा है यहीं धर्मयुद्ध हुआ था। सिन्धु घाटी सभ्यता के वक्त से ही कुरुक्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण रहा है। कहते हैं कि महाभारत में इतना खून बहा था कि आज तक कुरुक्षेत्र की मिट्टी काली-लाल रंग की है।
हस्तिनापुर मेरठ में है। यहां एक मोहल्ले का नाम है कौरवान और दूसरे का पांडवान। एक टीला भी है जिसकी खुदाई पर प्रतिबंध है। पानी का एक कुंड है जिसे द्रौपदी कुंड कहा जाता है। थोड़ी ही दूर है बरनावा। माना जाता है कि यहीं लाक्षागृह था। हस्तिनापुर समेत पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ऐसी कई जगहें हैं जिनके आधार पर कहा जाता है कि महाभारत कोई कल्पना नहीं बल्कि हकीकत थी।
इंद्रप्रस्थ, दिल्ली का पुराना नाम है। धृतराष्ट्र के कहने पर जब पांडव खांडव वन पहुंचे तो उसे ही अपनी राजधानी बनाने का फैसला किया। उन्होंने मय दानव की मदद से खांडवप्रस्थ को इंद्रप्रस्थ बनाया। कहते हैं कि ये जगह बेहद खूबसूरत थी और कौरवों को भी इसे देख कर पांडवों से ईर्ष्या हो गई थी। दिल्ली में ऐसे कुछ मंदिर और जगहें अब भी शेष हैं जिनके आधार ये माना जाता है कि दिल्ली ही पुराने वक्त में इंद्रपस्थ थी।
दनकौर यानि ग्रेटर नौएडा स्थित वो जगह जहां गुरु द्रोण का मंदिर है। यहीं पास में एक गांव है जिसका नाम है मुंहफाड़। कहते है कि एक कुत्ता द्रोण पर लगातार भौंक रहा था और तब एकलव्य ने बाणों से कुत्ते का मुंह भर दिया लेकिन कुत्ते को खरोंच तक नहीं आई। इसी कारण गांव का नाम मुंहफाड़ पड़ा। माना जाता है कि यहीं पर द्रोण ने एकलव्य का अंगूठा मांग लिया था। एकलव्य ने जहां द्रोण की मूर्ति बना कर अभ्यास किया था वहीं पर वर्तमान में एक मंदिर है।
कर्णवास, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में गंगा नदी के किनारे स्थित है। माना जाता है कि राजा कर्ण यहीं स्नान के बाद एक शिला पर बैठ कर सवा मन सोने का दान करते थे। वह शिला अभी भी यहां मौजूद है। यहां ऐसे कई मंदिर और स्थान हैं जिनसे साफ है कि राजा कर्ण का इस जगह से गहरा नाता रहा है। कर्ण मंदिर में राजा कर्ण की मूर्ति स्थापित है और दूर-दूर से लोग इसे देखने के लिए पहुंचते हैं।

Thursday, 1 December 2016

अफगानिस्तान

अफगानिस्तान की पहचान इन दिनों आतंकवाद और तालिबान से होती है लेकिन एक वक्त था जब अफगानिस्तान की पहचान एक हिन्दू राष्ट्र के तौर पर होती थी। अफ़्गान शब्द, संस्कृत भाषा के अवगान से निकला हुआ माना जाता है। यह देश 7वीं सदी तक अखंड भारत का हिस्सा था। एक वक्त यहां बौद्ध धर्म फला फूला और अब इसकी पहचान एक इस्लामिक राष्ट्र के रूप में है। 17वीं सदी की शुरुआत तक तो अफगानिस्तान का नाम भी नहीं था। महाभारत काल में इसके उत्तरी इलाके में गांधार महाजनपद था जिसके कारण इसकी राजधानी कांधार कहलाई। इसके अतिरिक्त आर्याना, कम्बोज आदि इलाके इसमें सम्मिलित थे।

गांधारी और पाणिनी यहीं के रहने वाले थे। अभी भी अफगानिस्तान में बच्चों के नाम कनिष्क, आर्यन और वेद आदि रखे जाते हैं। यहां पहले आर्य रहा करते थे जो वैदिक धर्म को मानते थे। अफगानिस्तान, यूनानी और मौर्य साम्राज्य का भी हिस्सा रहा। बौद्ध धर्म जब यहां पहु्चा तो यह स्थान उनका गढ़ बन गया। आपको ध्यान होगा कि बमियान घाटी में 2001 में तालिबान ने बुद्ध की जो प्रतिमा तोड़ी थी वह दुनिया की सबसे बड़ी बुद्ध प्रतिमा थी। अभी भी वहां स्तूपों, मंदिरों और मूर्तियों के अवशेष मिल जाते हैं। महमूद गजनी ने अफगानिस्तान की सभ्यता को बर्बाद किया और तलवार के बल पर धर्म परिवर्तन कराया।

इन दिनों वहां रहने वाले सिख और हिन्दू बेहद परेशान हैं। रायटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक 1992 में यहां हिन्दुओं और सिखों के दो लाख 20 बजार परिवार थे, लेकिन इन दिनों यह संख्या 220 रह गई है। वहां हिन्दुओं को शव जलाने नहीं दिए जाते। वहां के स्थानीय हिन्दू और सिख अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

जानिये । कैसे अंग्रेज़ो ने हमारे धार्मिक ग्रंथो,शास्त्रों से छेड़खानी की है

मित्रो बहुत कम लोग जानते है की हमारी बहुत सी धार्मिक किताबें,शास्त्र और इतिहास के साथ अंग्रेज़ो ने बहुत छेड़खानी करी है ! आपको सुन कर हैरानी होगी भारत मे एक मूल प्रति है मनुसमृति की जो हजारो वर्षो से आई है और एक मनुस्मृति अंग्रेज़ो ने लिखवाई है ! और अंग्रेज़ो ने इसको लिखवाने मे मैक्स मुलर की मदद ली थी मैक्स मुलर एक जर्मन विद्वान था जिसको संस्कृति बहुत अच्छे से आती थी उसको कहा गया की तुम भारत के शास्त्रो को पढ़ो और पढ़ कर हमको बताओ की उनमे क्या है फिर जरूरत पढ़ने पर इसमे फेरबदल करेंगे !
तब मैक्स मुलर ने मनुस्मृति का अनुवाद किया पहले जर्मन मे किया फिर अँग्रेजी मे किया तब अंग्रेज़ो को समझ आया की मनुस्मृति तो भारत की न्यायव्यवस्था की सबसे बड़ी पुस्तक है और भारत की न्याय व्यवस्था का आधार है ! तो उन्होने मनुसमृति मे ऐसे विक्षेप डलवा दिये ताकि भारत वासियो को भ्रमाया जा सके और उनको गलत रास्ते पर चलाया जा सके ! उनको मनुस्मृति के प्रति बहुत ज्यादा नीचाई की भावना पैदा हो इस तरह के विक्षेप डलवा दिये !
ये विक्षेप केवल मनु स्मृति मे नहीं डाले गए बल्कि बहुत सारे अन्य ग्रंथो मे डाले गए और अंग्रेज़ो की बहुत बड़ी टीम थी जो इस कार्य मे लगी हुई थी कोई साधारण अंग्रेज़ो ने ये काम नहीं किया था! विलियम हंटर नाम का अंग्रेज़ हुआ करता था जिसने सबसे ज्यादा भारत के इतिहास मे विकृति डाली सबसे ज्यादा भारत के शास्त्रो के विकृत किया ! जिसने सबसे ज्यादा भारत के पुराने ऋषि ,मुनियो के आत्म वचनो को बिलकुल उल्टा करके बताया !
और ये सब वो कैसे कर पाया ? वो ये कि विलियम हंटर अंग्रेज़ो बहुत अच्छी जानता था और उसके साथ साथ उसको संस्कृत भी आती थी ! क्योंकि भारतीय मूल ग्रंथ संस्कृत मे है तो वो उनको पढ़ लेता था और फिर अंग्रेजी मे कहाँ कहाँ उसको विकृति कर बनाना है वो कर लेता था ! विलियम हंटर की पूरी टीम थी जो इस कार्य मे लगी थी जिसको कहा गया विलियम हंटर कमीशन !
विलियम हंटर कमीशन की रिपोर्ट के बारे मे बात की जाए तो घंटो घंटो उसी मे निकल जाए हजारो पन्नो मे उन्होने ने रिपोर्ट बनाकर उन्होने ने ये बताया है कि हमने भारत के किस किस विष्य मे किस किस शस्त्र मे क्या क्या परिवर्तन कर दिये है ये उसने अँग्रेजी संसद को भेंट किया था और फिर उस पर बहस हुई थी तो अंग्रेज़ो ने अपने देश मे ऐसे बहुत सारे विद्वानो को तैयार करके भारत के शास्त्रो मे विक्षेपन करवाया बहुत कुछ ऐसी बातें भर दी उसमे जो की विश्वास करने लायक नहीं है तर्क पर कहीं ठहरती नहीं है और सूचना के आधार पर बिलकुल गलत हैं !!
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आर्य बाहर से आए उन्होने भारतीय संस्कृति को खत्म कर दिया हमारे पूर्वज गौ मांस खाते थे !ना जाने ऐसी हजारो हजारों बातें और संस्कृत के शब्दो का गलत अर्थ निकाल कर हमारे शास्त्रो मे इन अंग्रेज़ो द्वारा भर दिया गया जो आज भी हमको जानबूझ कर पढ़ाया जा रहा है ताकि हम गुमराह होते रहे हम हिन्दू अपनी अपनी जातियो मे ऊंच -नीच करते ! और हमारे मन हमारी ,संस्कृति ,सभ्यता के प्रति गलत भावना पैदा हो !!
तो मित्रो अंत आपसे निवेदन है को भी भारतीय ग्रंथ ,धार्मिक पुस्तक ,शास्त्र पढ़ें तो ध्यान रहे वो इन अंग्रेज़ो द्वारा छेड़खानी किया हुआ ना हो क्योंकि ज़्यादातर बाजार मे बिक रही किताबें वहीं है जिनमे अंग्रेज़ो ने छेड़खानी करी है !!

आरी की कीमत दस रुपये ही वाजिब है
एक बार की बात है एक बढ़ई था। वह दूर किसी शहर में एक सेठ के यहाँ काम करने गया। एक दिन काम करते-करते उसकी आरी टूट गयी।बिना आरी के वह काम नहीं कर सकता था, और वापस अपने गाँव लौटना भी मुश्किल था, इसलिए वह शहर से सटे एक गाँव पहुंचा। इधर-उधर पूछने पर उसे लोहार का पता चल गया।
वह लोहार के पास गया और बोला-
भाई मेरी आरी टूट गयी है, तुम मेरे लिए एक अच्छी सी आरी बना दो।
लोहार बोला, “बना दूंगा, पर इसमें समय लगेगा, तुम कल इसी वक़्त आकर मुझसे आरी ले सकते हो।”
बढ़ई को तो जल्दी थी सो उसने कहा, ” भाई कुछ पैसे अधिक ले लो पर मुझे अभी आरी बना कर दे दो!”
“बात पैसे की नहीं है भाई…अगर मैं इतनी जल्दबाजी में औजार बनाऊंगा तो मुझे खुद उससे संतुष्टि नहीं होगी, मैं औजार बनाने में कभी भी अपनी तरफ से कोई कमी नहीं रखता!”, लोहार ने समझाया।
बढ़ई तैयार हो गया, और अगले दिन आकर अपनी आरी ले गया।
आरी बहुत अच्छी बनी थी। बढ़ई पहले की अपेक्षा आसानी से और पहले से बेहतर काम कर पा रहा था।
बढ़ई ने ख़ुशी से ये बात अपने सेठ को भी बताई और लोहार की खूब प्रसंशा की।
सेठ ने भी आरी को करीब से देखा!
“इसके कितने पैसे लिए उस लोहार ने?”, सेठ ने बढ़ई से पूछा।
“दस रुपये!”
सेठ ने मन ही मन सोचा कि शहर में इतनी अच्छी आरी के तो कोई भी तीस रुपये देने को तैयार हो जाएगा। क्यों न उस लोहार से ऐसी दर्जनों आरियाँ बनवा कर शहर में बेचा जाये!
अगले दिन सेठ लोहार के पास पहुंचा और बोला, “मैं तुमसे ढेर सारी आरियाँ बनवाऊंगा और हर आरी के दस रुपये दूंगा, लेकिन मेरी एक शर्त है… आज के बाद तुम सिर्फ मेरे लिए काम करोगे। किसी और को आरी बनाकर नहीं बेचोगे।”
“मैं आपकी शर्त नहीं मान सकता!” लोहार बोला।
सेठ ने सोचा कि लोहार को और अधिक पैसे चाहिए। वह बोला, “ठीक है मैं तुम्हे हर आरी के पन्द्रह रूपए दूंगा….अब तो मेरी शर्त मंजूर है।”
लोहार ने कहा, “नहीं मैं अभी भी आपकी शर्त नहीं मान सकता। मैं अपनी मेहनत का मूल्य खुद निर्धारित करूँगा। मैं आपके लिए काम नहीं कर सकता। मैं इस दाम से संतुष्ट हूँ इससे ज्यादा दाम मुझे नहीं चाहिए।”
“बड़े अजीब आदमी हो…भला कोई आती हुई लक्ष्मी को मना करता है?”, व्यापारी ने आश्चर्य से बोला।
लोहार बोला, “आप मुझसे आरी लेंगे फिर उसे दुगने दाम में गरीब खरीदारों को बेचेंगे। लेकिन मैं किसी गरीब के शोषण का माध्यम नहीं बन सकता। अगर मैं लालच करूँगा तो उसका भुगतान कई लोगों को करना पड़ेगा, इसलिए आपका ये प्रस्ताव मैं स्वीकार नहीं कर सकता।”
सेठ समझ गया कि एक सच्चे और ईमानदार व्यक्ति को दुनिया की कोई दौलत नहीं खरीद सकती। वह अपने सिद्धांतों पर अडिग रहता है।
अपने हित से ऊपर उठ कर और लोगों के बारे में सोचना एक महान गुण है। लोहार चाहता तो आसानी से अच्छे पैसे कमा सकता था पर वह जानता था कि उसका जरा सा लालच बहुत से ज़रूरतमंद लोगों के लिए नुक्सानदायक साबित होगा और वह सेठ के लालच में नहीं पड़ता।
_*पेड़ों की समस्या*_

एक राजा बहुत दिनों बाद अपने बागीचे में सैर करने गया , पर वहां पहुँच उसने देखा कि सारे पेड़- पौधे मुरझाए हुए हैं । राजा बहुत चिंतित हुआ, उसने इसकी वजह जानने के सभी पेड़-पौधों से एक-एक करके सवाल पूछने लगा।

ओक वृक्ष ने कहा, वह मर रहा है क्योंकि वह देवदार जितना लंबा नहीं है। राजा ने देवदार की और देखा तो उसके भी कंधे झुके हुए थे क्योंकि वह अंगूर लता की भांति फल पैदा नहीं कर सकता था। अंगूर लता इसलिए मरी जा रही थी की वह गुलाब की तरह खिल नहीं पाती थी।

राजा थोडा आगे गया तो उसे एक पेड़ नजर आया जो निश्चिंत था, खिला हुआ था और ताजगी में नहाया हुआ था।

राजा ने उससे पूछा , ” बड़ी अजीब बात है , मैं पूरे बाग़ में घूम चुका लेकिन एक से बढ़कर एक ताकतवर और बड़े पेड़ दुखी हुई बैठे हैं लेकिन तुम इतने प्रसन्न नज़र आ रहे हो…. ऐसा कैसे संभव है ?”

पेड़ बोला , ” महाराज , बाकी पेड़ अपनी विशेषता देखने की बजाये स्वयं की दूसरों से तुलना कर दुखी हैं , जबकि मैंने यह मान लिया है कि जब आपने मुझे रोपित कराया होगा तो आप यही चाहते थे कि मैं अपने गुणों से इस बागीचे को सुन्दर बनाऊं , यदि आप इस स्थान पर ओक , अंगूर या गुलाब चाहते तो उन्हें लगवाते !! इसीलिए मैं किसी और की तरह बनने की बजाय अपनी क्षमता केअनुसार श्रेष्ठतम बनने का प्रयास करता हूँ और प्रसन्न रहता हूँ । “

Friends, इस छोटी सी कहानी में बहुत बड़ा संदेश छिपा है। हम अकसर दुसरो से अपनी तुलना कर स्वयं को कम आंकने की गलती कर बैठते हैं । दूसरो की विशेषताओ से प्रेरित होने की बजाए हम अफ़सोस करने लगते हैं कि हम उन जैसे क्यों नहीं हैं ।

न तो हम Sachin Tendulkar की तरह बैटिंग कर सकते हैं , न Amitabh Bachchan की तरह acting कर सकते है और न ही हम Usain Boltकी तरह दौड़ सकते हैं या Roger Federer की तरह Tennis खेल सकते है। हमें यह याद रखना चाहिए की सभी व्यक्ति अलग हैं और सभी की विशेषताए अलग हैं । हम जैसे है वैसे ही अस्तित्व हमें चाहता है।

हम सभी में कुछ ऐसी Qualities है, जो अन्य लोगो में नहीं है। जरुरत है तो सिर्फ उसे पहचानने की और उस quality को और विकसित कर अपने क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने की। अगर हम यकीन कर ले की हम सफल हो सकते है, तो इससे दूसरे भी हम पर विश्वास करने लगते है। इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी खुद का मूल्यांकन कम करने की होती है। हमें अपनी कमिया पता होना अच्छी बात है। इनसे हमें यह पता चलता है की हमें किस क्षेत्र में सुधार करना है।

हमेशा अपने गुणों, अपनी योग्यताओ पर ध्यान केन्द्रित करे। यह जान ले, आप जितना समझते है, आप उससे कही बेहतर है। बड़ी सफलता उन्ही लोगो का दरवाजा खटखटाती है जो लगातार खुद के सामने उचे लक्ष्य रखते है, जो अपनी कार्यक्षमता सुधारना चाहते है।