Saturday, 2 June 2018
सुभाषचन्द्र बोस की आज़ाद हिन्द फ़ौज के 60000 में से 24000 सैनिक शहीद हो गए। उनको गायब करा दिया गया
❓मंगल पांडे को फाँसी
❓तात्या टोपे को फाँसी
❓रानी लक्ष्मीबाई को अंग्रेज सेना ने घेर कर मारा
❓भगत सिंह को फाँसी
❓सुखदेव को फाँसी
❓राजगुरु को फाँसी
❓चंद्रशेखर आजाद का एनकाउंटर अंग्रेज पुलिस द्वारा
❓भगवती चरण वोहरा बम विस्फोट में मृत्यु
❓रामप्रसाद बिस्मिल को फाँसी
❓अशफाकउल्लाह खान को फाँसी
❓रोशन सिंह को फाँसी
❓लाला लाजपत राय की लाठीचार्ज में मृत्यु
❓वीर सावरकर को कालापानी की सजा
❓चाफेकर बंधू (३ भाई) को फाँसी
❓मास्टर सूर्यसेन को फाँसी
❓ये तो कुछ ही नाम है जिन्होंने स्वतन्त्रता संग्राम और इस देश की आजादी में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया
❓कई वीर ऐसे है हम और आप जिनका नाम तक नहीं जानते
❓
एक बात समझ में आज तक नही आई ....
भगवान ने गांधी और नेहरु को ऐसे कौन से कवच-कुण्डंल दिये थे
❓जिसकी वजह से अग्रेंजो ने इन दोनो को फाँसी तो दूर, कभी एक लाठी तक नही मारी...
❓उपर से यह दोनों भारत के बापू और चाचा बन गए और इनकी पीढ़ियाँ आज भी पूरे देश के उपर अपना पेंटेंट समझती है
❓
एक बात समझ में आज तक नही आई ....
भगवान ने गांधी और नेहरु को ऐसे कौन से कवच-कुण्डंल दिये थे
Friday, 1 June 2018
*पिता के मनोभावों से ज्यादा माता के मनोभावों का सन्तान पर प्रभाव पड़ता है। इसलिए माता का शिक्षित और आध्यात्मिक होना जरूरी है।*
एक पादरी ने माता के मनोभावों और शिक्षा का प्रभाव रिसर्च करने के लिए दो शादियां की। एक आध्यात्मिक और पढ़ी लिखी, दूसरी अनपढ़ और किसान की पुत्री।
दोनों स्त्रियां गर्भवती हुईं, दोनों को वो चर्च बुलाता प्रेयर करवाता, लेकिन पहली वाली तो रुचि लेती और दूसरी वाली को कोई रुचि न थी। पादरी ने दोनों को एक जैसी व्यवस्था दी।
लेकिन जब वो ज्ञान चर्चा करता तो केवल पहली वाली न सिर्फ ध्यान से सुनती, उन्हें नोट करती साथ ही दोहराती रहती। जबकि दूसरी वाली केवल बेमन से बैठती और कोई न कोई बहाने बनाकर अन्य कार्यो में लग जाती।
दोनों ने जब सन्तान को जन्म दिया तो रिज़ल्ट आश्चर्यजनक तरीके से भिन्न थे। एक ही पिता की सन्तान होते हुए भी दोनों पूर्णतः भिन्न मनोभाव के थे। IQ , EQ और SQ पहली वाली की सन्तान का कई गुना दूसरी वाली पत्नी के सन्तान से था।
माता यदि होगी अज्ञान तो बालक कैसे बनेगा महान?
महान बालक चाहिए तो महान माताएं चाहिए।
श्वेता चक्रवर्ती
अकबर के नवरत्नों का सच
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• अकबर के चाटुकारों ने राजा विक्रमादित्य के दरबार की कहानियों के आधार पर उसके दरबार और नौ रत्नों की कहानी घड़ी है. असलियत यह है कि अकबर अपने सब दरबारियों को मूर्ख समझता था. उसने कहा था कि वह अल्लाह का शुक्रगुजार है कि इसको योग्य दरबारी नहीं मिले वरना लोग सोचते कि अकबर का राज उसके दरबारी चलाते हैं वह खुद नहीं.
• प्रसिद्ध नवरत्न टोडरमल अकबर की लूट का हिसाब करता था. इसका काम था जजिया न देने वालों की औरतों को हरम का रास्ता दिखाना.
• एक और नवरत्न अबुल फजल अकबर का अव्वल दर्जे का चाटुकार था. बाद में जहाँगीर ने इसे मार डाला.
• बुद्धिमान बीरबल शर्मनाक तरीके से एक लड़ाई में मारा गया. बीरबल अकबर के किस्से असल में मन बहलाव की बातें हैं जिनका वास्तविकता से कोई सम्बन्ध नहीं. ध्यान रहे कि ऐसी कहानियाँ दक्षिण भारत में तेनालीराम के नाम से भी प्रचलित हैं.
• अगले रत्न शाह मंसूर दूसरे रत्न अबुल फजल के हाथों सबसे बड़े रत्न अकबर के आदेश पर मार डाले गए!
• रत्न टोडरमल अकबर का वफादार था तो भी उसकी पूजा की मूर्तियां अकबर ने तुडवा दीं. इससे टोडरमल को दुःख हुआ और इसने इस्तीफ़ा दे दिया और वाराणसी चला गया.
• इन नवरत्नों को अपनी बीवियां, लडकियां, बहनें तो अकबर की खिदमत में भेजनी पड़ती ही थीं ताकि बादशाह सलामत उनको भी सलामत रखें. और साथ ही अकबर महान के पैरों पर डाला गया पानी भी इनको पीना पड़ता था जैसा कि ऊपर बताया गया है.
• मान सिंह जो देश में पैदा हुआ सबसे नीच गद्दार था, ने अपनी बहन जहांगीर को दी. और बाद में इसी जहांगीर ने मान सिंह की पोती को भी अपने हरम में खींच लिया. यही मानसिंह अकबर के आदेश पर जहर देकर मार डाला गया और इसके पिता भगवान दास ने आत्महत्या कर ली.
• फैजी नामक रत्न असल में एक साधारण सा कवि था जिसकी कलम अपने शहंशाह को प्रसन्न करने के लिए ही चलती थी. कुछ इतिहासकार कहते हैं कि वह अपने समय का भारत का सबसे बड़ा कवि था. आश्चर्य इस बात का है कि यह सर्वश्रेष्ठ कवि एक अनपढ़ और जाहिल शहंशाह की प्रशंसा का पात्र था! यह ऐसी ही बात है जैसे कोई अरब का मनुष्य किसी संस्कृत के कवि के भाषा सौंदर्य का गुणगान करता हो!
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• अकबर के चाटुकारों ने राजा विक्रमादित्य के दरबार की कहानियों के आधार पर उसके दरबार और नौ रत्नों की कहानी घड़ी है. असलियत यह है कि अकबर अपने सब दरबारियों को मूर्ख समझता था. उसने कहा था कि वह अल्लाह का शुक्रगुजार है कि इसको योग्य दरबारी नहीं मिले वरना लोग सोचते कि अकबर का राज उसके दरबारी चलाते हैं वह खुद नहीं.
• प्रसिद्ध नवरत्न टोडरमल अकबर की लूट का हिसाब करता था. इसका काम था जजिया न देने वालों की औरतों को हरम का रास्ता दिखाना.
• एक और नवरत्न अबुल फजल अकबर का अव्वल दर्जे का चाटुकार था. बाद में जहाँगीर ने इसे मार डाला.
• बुद्धिमान बीरबल शर्मनाक तरीके से एक लड़ाई में मारा गया. बीरबल अकबर के किस्से असल में मन बहलाव की बातें हैं जिनका वास्तविकता से कोई सम्बन्ध नहीं. ध्यान रहे कि ऐसी कहानियाँ दक्षिण भारत में तेनालीराम के नाम से भी प्रचलित हैं.
• अगले रत्न शाह मंसूर दूसरे रत्न अबुल फजल के हाथों सबसे बड़े रत्न अकबर के आदेश पर मार डाले गए!
• रत्न टोडरमल अकबर का वफादार था तो भी उसकी पूजा की मूर्तियां अकबर ने तुडवा दीं. इससे टोडरमल को दुःख हुआ और इसने इस्तीफ़ा दे दिया और वाराणसी चला गया.
• इन नवरत्नों को अपनी बीवियां, लडकियां, बहनें तो अकबर की खिदमत में भेजनी पड़ती ही थीं ताकि बादशाह सलामत उनको भी सलामत रखें. और साथ ही अकबर महान के पैरों पर डाला गया पानी भी इनको पीना पड़ता था जैसा कि ऊपर बताया गया है.
• मान सिंह जो देश में पैदा हुआ सबसे नीच गद्दार था, ने अपनी बहन जहांगीर को दी. और बाद में इसी जहांगीर ने मान सिंह की पोती को भी अपने हरम में खींच लिया. यही मानसिंह अकबर के आदेश पर जहर देकर मार डाला गया और इसके पिता भगवान दास ने आत्महत्या कर ली.
• फैजी नामक रत्न असल में एक साधारण सा कवि था जिसकी कलम अपने शहंशाह को प्रसन्न करने के लिए ही चलती थी. कुछ इतिहासकार कहते हैं कि वह अपने समय का भारत का सबसे बड़ा कवि था. आश्चर्य इस बात का है कि यह सर्वश्रेष्ठ कवि एक अनपढ़ और जाहिल शहंशाह की प्रशंसा का पात्र था! यह ऐसी ही बात है जैसे कोई अरब का मनुष्य किसी संस्कृत के कवि के भाषा सौंदर्य का गुणगान करता हो!
vicharniy
भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर का असली नाम नसीमुद्दीन है
मिडिया मुस्लिम अपराधियो के नाम छिपाती क्यों है ?
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2009 में गन्ने का MSP ₹108 था और चीनी थी ₹42 से ₹45 प्रति किलो। 2018 में गन्ने का MSP है ₹255 और चीनी है ₹30 से ₹32 प्रति किलो।
उस समय कृषि मंत्री थे हमारे टेढ़े मुँह वाले कामरेडी #शरद_पंवार जिनकी कि सबसे ज्यादा चीनी मिलें थी भारत में और महाराष्ट्र में जिन्हें कांग्रेस सरकार का संरक्षण प्राप्त था।
मतलब जिनकी चीनी की मिल थी वो खुद कृषि मंत्री बनाये गए थे और वो सस्ता गन्ना खरीद कर महंगी चीनी बेच रहे थे तो फायदा किसको हो रहा था किसानों ...?
होश में आओ अभी भी समय है।
मिडिया मुस्लिम अपराधियो के नाम छिपाती क्यों है ?
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सीरिया मे १५० साल पहले १०० % यहूदी धर्म के लोग रहते थे...धीरे धीरे वहाँ की सेक्युलर सरकारेँ विदेशी मुस्लिमों को बसाने लगी...मुसलमानोंने भी अपना वोट बैँक बनाया और सरकारों को ब्लॅकमेल करने लगी...जब उनका वोट बैँक कुल जनसंख्या के ४८ % पहुँच गया तो यहूदियों पर हमला करके उनकी संपत्ति और महिलाओं को कब्जा करने लगे..और यहूदी कम होते गये...और गृह युद्ध छिड़ गया...डर के मारे लाखों यहूदी ने इस्लाम काबुल कर लिया...और सीरिया मे १०० % मुसलमान हो गये।
अब एक आखिरी काम बचा था...इस्लाम मेँ कनवर्ट हुए यहूदियों का ख़ात्मा....अब यही हो रहा है सीरिया मे ... इस तकनीक से मुसलमानो ने पिछले ८०० साल मेँ ५५ देशों पर कब्जा जमा लिया...अब भारत की बारी है...इस काम मे कॉंग्रेस जदयू राकाँपा सपा बसपा वामदल आदि पार्टियाँ इनका साथ दे रही है...इसके लिए खरबों का इस्लामिक और इल्लुमीनती फंड इन पार्टियों और भारतीय मीडिया को दिया जा रहा है...और हिँदुओँ को एकजुट रखने वाले सँतोँ और नेताओँ के खिलाफ लगातार साजिशेँ रचकर मीडिया को हथियार बनाकर ऐसे लोगोँ का चरित्र हनन किया जा रहा है। मूर्ख हिँदु आज भी सो रहा है।
अरून शुक्ला
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2009 में गन्ने का MSP ₹108 था और चीनी थी ₹42 से ₹45 प्रति किलो। 2018 में गन्ने का MSP है ₹255 और चीनी है ₹30 से ₹32 प्रति किलो।
उस समय कृषि मंत्री थे हमारे टेढ़े मुँह वाले कामरेडी #शरद_पंवार जिनकी कि सबसे ज्यादा चीनी मिलें थी भारत में और महाराष्ट्र में जिन्हें कांग्रेस सरकार का संरक्षण प्राप्त था।
मतलब जिनकी चीनी की मिल थी वो खुद कृषि मंत्री बनाये गए थे और वो सस्ता गन्ना खरीद कर महंगी चीनी बेच रहे थे तो फायदा किसको हो रहा था किसानों ...?
होश में आओ अभी भी समय है।
Gautam Gokulesh
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नारियल की ये प्राचीन बातें जानेंगे तो आप भी मानेंगे ये है चमत्कारी
हम सभी जानते हैं पूजन कर्म में नारियल का महत्वपूर्ण स्थान है। किसी भी देवी-देवता की पूजा नारियल के बिना अधूरी ही मानी जाती है। क्या आप जानते हैं नारियल खाने से शारीरिक दुर्बलता एवं भगवान को नारियल चढ़ाने से धन संबंधी समस्याएं दूर हो जाती हैं।
स्त्रियां नहीं फोड़तीं नारियल
यह भी एक तथ्य है कि महिलाएं नारियल नहीं फोड़तीं। नारियल बीज रूप है, इसलिए इसे उत्पादन (प्रजनन) क्षमता से जोड़ा गया है। स्त्रियों बीज रूप से ही शिशु को जन्म देती है और इसलिए नारी के लिए बीज रूपी नारियल को फोड़ना अशुभ माना गया है। देवी-देवताओं को श्रीफल चढ़ाने के बाद पुरुष ही इसे फोड़ते हैं। नारियल से निकले जल से भगवान की प्रतिमाओं का अभिषेक भी किया जाता है।
सौभाग्य का प्रतीक है नारियल
नारियल को श्रीफल भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है, जब भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर अवतार लिया तो वे अपने साथ तीन चीजें- लक्ष्मी, नारियल का वृक्ष तथा कामधेनु लाए। इसलिए नारियल के वृक्ष को कल्पवृक्ष भी कहते है। नारियल में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों ही देवताओं का वास माना गया है। श्रीफल भगवान शिव का परम प्रिय फल है। नारियल में बनी तीन आंखों को त्रिनेत्र के रूप में देखा जाता है।
कैलोरी से भरपूर है नारियल
- नारियल की तासीर ठंडी होती है।
- ताजा नारियल कैलोरी से भरपूर होता है। इसमें अनेक पोषक तत्व होते हैं।
- नारियल के कोमल तनों से जो रस निकलता है उसे माड़ी (नीरा) कहते हैं उसे लज्जतदार पेय माना जाता है।
- सोते समय नारियल पानी पीने से नाड़ी संस्थान को बल मिलता है तथा नींद अच्छी आती है।
- जिन शिशुओं को दूध नहीं पचता उन्हें दूध के साथ नारियल पानी मिलाकर पिलाना चाहिए।
- शिशु को डि-हाइड्रेशन होने पर नारियल पानी में नीबू का रस मिलाकर पिलाएं। नरियल का पानी हैजे में रामबाण औषधि है।
- नारियल की गिरी (खोपरा) खाने से कामशक्ति बढ़ती है।
- मिश्री के साथ खाने से गर्भवती स्त्री की शारीरिक दुर्बलता दूर होती है तथा बच्चा सुंदर होता है।
- सूखी गिरी खाने से आंख की रोशनी तथा गुर्दों के शक्ति मिलती है।
- पौष, माघ और फाल्गुन माह में नियमित सुबह गिरी के साथ गुड़ खाने से वक्षस्थल में वृद्धि होती है, शारीरिक दुर्बलता दूर होती है।
- इसके पानी में पोटेशियम और क्लोरीन होता है जो मां के दूध के समान होता है।
- नारियल कठिनता से पचने वाला, वातशोधक, विष्टïम्भी, पुष्टिïकारक, बलवर्धक और वात-पित्त व रक्तविकार नाशक होता है।
सम्मान का सूचक है नारियल
श्रीफल शुभ, समृद्धि, सम्मान, उन्नति और सौभाग्य का सूचक है। सम्मान करने के लिए शॉल के साथ श्रीफल भी दिया जाता है। सामाजिक रीति-रिवाजों में भी नारियल भेंट करने की परंपरा है। जैसे बिदाई के समय तिलक कर नारियल और धनराशि भेंट की जाती है। रक्षाबंधन पर बहनें भाइयों को राखी बांध कर नारियल भेंट करती हैं और रक्षा का वचन लेती हैं।
हम सभी जानते हैं पूजन कर्म में नारियल का महत्वपूर्ण स्थान है। किसी भी देवी-देवता की पूजा नारियल के बिना अधूरी ही मानी जाती है। क्या आप जानते हैं नारियल खाने से शारीरिक दुर्बलता एवं भगवान को नारियल चढ़ाने से धन संबंधी समस्याएं दूर हो जाती हैं।
स्त्रियां नहीं फोड़तीं नारियल
यह भी एक तथ्य है कि महिलाएं नारियल नहीं फोड़तीं। नारियल बीज रूप है, इसलिए इसे उत्पादन (प्रजनन) क्षमता से जोड़ा गया है। स्त्रियों बीज रूप से ही शिशु को जन्म देती है और इसलिए नारी के लिए बीज रूपी नारियल को फोड़ना अशुभ माना गया है। देवी-देवताओं को श्रीफल चढ़ाने के बाद पुरुष ही इसे फोड़ते हैं। नारियल से निकले जल से भगवान की प्रतिमाओं का अभिषेक भी किया जाता है।
सौभाग्य का प्रतीक है नारियल
नारियल को श्रीफल भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है, जब भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर अवतार लिया तो वे अपने साथ तीन चीजें- लक्ष्मी, नारियल का वृक्ष तथा कामधेनु लाए। इसलिए नारियल के वृक्ष को कल्पवृक्ष भी कहते है। नारियल में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों ही देवताओं का वास माना गया है। श्रीफल भगवान शिव का परम प्रिय फल है। नारियल में बनी तीन आंखों को त्रिनेत्र के रूप में देखा जाता है।
कैलोरी से भरपूर है नारियल
- नारियल की तासीर ठंडी होती है।
- ताजा नारियल कैलोरी से भरपूर होता है। इसमें अनेक पोषक तत्व होते हैं।
- नारियल के कोमल तनों से जो रस निकलता है उसे माड़ी (नीरा) कहते हैं उसे लज्जतदार पेय माना जाता है।
- सोते समय नारियल पानी पीने से नाड़ी संस्थान को बल मिलता है तथा नींद अच्छी आती है।
- जिन शिशुओं को दूध नहीं पचता उन्हें दूध के साथ नारियल पानी मिलाकर पिलाना चाहिए।
- शिशु को डि-हाइड्रेशन होने पर नारियल पानी में नीबू का रस मिलाकर पिलाएं। नरियल का पानी हैजे में रामबाण औषधि है।
- नारियल की गिरी (खोपरा) खाने से कामशक्ति बढ़ती है।
- मिश्री के साथ खाने से गर्भवती स्त्री की शारीरिक दुर्बलता दूर होती है तथा बच्चा सुंदर होता है।
- सूखी गिरी खाने से आंख की रोशनी तथा गुर्दों के शक्ति मिलती है।
- पौष, माघ और फाल्गुन माह में नियमित सुबह गिरी के साथ गुड़ खाने से वक्षस्थल में वृद्धि होती है, शारीरिक दुर्बलता दूर होती है।
- इसके पानी में पोटेशियम और क्लोरीन होता है जो मां के दूध के समान होता है।
- नारियल कठिनता से पचने वाला, वातशोधक, विष्टïम्भी, पुष्टिïकारक, बलवर्धक और वात-पित्त व रक्तविकार नाशक होता है।
सम्मान का सूचक है नारियल
श्रीफल शुभ, समृद्धि, सम्मान, उन्नति और सौभाग्य का सूचक है। सम्मान करने के लिए शॉल के साथ श्रीफल भी दिया जाता है। सामाजिक रीति-रिवाजों में भी नारियल भेंट करने की परंपरा है। जैसे बिदाई के समय तिलक कर नारियल और धनराशि भेंट की जाती है। रक्षाबंधन पर बहनें भाइयों को राखी बांध कर नारियल भेंट करती हैं और रक्षा का वचन लेती हैं।
भोटे कुकुर लड़ाई में बाघ पर भी भारी ....
उत्तराखन्ड में जिन्हें भोटिया कुकुर और नेपाल में भोटे कुकुर कहा जाता है, येही भेड़ पालको/ भेड़ चरवाहों की भेड़ो के झुंड के रखवाले होते है। ये आमने-सामने की लड़ाई में बाघ पर भी भारी होते है..
इनका जन्म भी भेड़ो के झुंड के बीच होता है और ये अपना पूरा जीवन उनकी रक्षा में लगा देते है-
1.भेड़ चरवाहे या भेड़ पालक इनके गले मे घण्टी बांधते है जिसके 2 प्रत्यक्ष फायदे है:
अ.. भेड़ो की घण्टी की आवाज सुनकर उन्हें उनकी सुरक्षा का एहसास होता है.
ब..घण्टी के कारण तेंदुए, बाघ या चिता इनकी गर्दनों को नही पकड़ पाते..
2..चूंकि ये झुंड को घेरे में लेकर उनकी रखवाली करते है इसलिए घण्टी की आवाज से चरवाहे इनकी लोकेशन ज्ञात करते है।
इनका जन्म भी भेड़ो के झुंड के बीच होता है और ये अपना पूरा जीवन उनकी रक्षा में लगा देते है-
1.भेड़ चरवाहे या भेड़ पालक इनके गले मे घण्टी बांधते है जिसके 2 प्रत्यक्ष फायदे है:
अ.. भेड़ो की घण्टी की आवाज सुनकर उन्हें उनकी सुरक्षा का एहसास होता है.
ब..घण्टी के कारण तेंदुए, बाघ या चिता इनकी गर्दनों को नही पकड़ पाते..
2..चूंकि ये झुंड को घेरे में लेकर उनकी रखवाली करते है इसलिए घण्टी की आवाज से चरवाहे इनकी लोकेशन ज्ञात करते है।
ये भोटिया कुकुर दिन में भी भेड़ो को घेरे में लेकर उनके चारो ओर रहते है..जैसा चित्र में है..
ये एक साथ खाना खाएँगे और खांना खाकर तुरन्त अपनी-अपनी जगह सभाल लेंगे..
ये भेड़ो की भी रक्षा करते है और चरवाहों की भी..
ये एक साथ खाना खाएँगे और खांना खाकर तुरन्त अपनी-अपनी जगह सभाल लेंगे..
ये भेड़ो की भी रक्षा करते है और चरवाहों की भी..
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