Tuesday, 26 November 2013

गौ मां से इस पद्धति से घी निकालने में

सिर दर्द, माईग्रेन, Sinus, नाक का मांस या हड्डी का बढना, नींद न आना, यादाश्त कमजोर, खर्राटे, नाक का बहना, ज्यादा छीके आना, एलर्जी, Brain Stroke, Blood Clotting in Brain, कमजोरी, आखो की कमजोरी, isnophilia एवं मानसिक रोगों का एक अदभुत ईलाज 

बनाने की विधि::
सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद गौ मां के थन से बछडो के पीने के पश्चात दूध निकाला जाता है, फ़िर उस दूध को दही के रूप में जमाया जाता है तत्पश्चात दही को सूर्योदय से पूर्व सागोन, शीशम या अन्य किसी औषधीय पेड की लकडी से बनाए गए मथनी यंत्र से नियमित गति से मथा जाता है और उससे मक्खन प्राप्त किया जाता है फ़िर उस प्राप्त मक्खन को मद्धम मद्धम आंच पर गर्म किया जाता है फ़िर जो पदार्थ प्राप्त होता है उसे घी कहते है
इस घी में HDL (अच्छा कोलेस्ट्रोल) होता है जो (LDL,VLDL)
बुरे कोलेस्ट्राल को कम करता है और शरीर को पोषण और ताकत देता है कई बिमारिया दूर करता है

प्रयोग की विधि::
रात को सोते समय उपर लिखी विधि से बनाए हुए घी को हल्का गर्म करे और ड्रापर की सहायता से २-२ बूंदे नाक में डाले और लेटे रहे, ये घी ऐसी ऐसी जगह पर जाता है जहां कोई दवा काम नही करती

कमजोरी दूर करने और पोषण के लिए: एक चम्मच घी को एक गिलास गर्म दूध में मिलाकर पिलाए, इससे शरीर ताकतवर बनेगा और अगर गर्भवती महिलाए भी ये अजमाती है तो उनका प्रसव बहुत आराम से होगा बिना कष्ट के

जानकारी:: भारतीय नस्ल की गौ मां से इस पद्धति से घी निकालने में कम से कम 26 लीटर और अधिक से अधिक 34 लीटर दूध लगता है

सूचना:: कुछ कंपनिया या डेयरी फ़ार्म जर्सी और भैंस के दूध से मशीन द्वारा क्रीम निकालते है जिसे Butter Oil कहते है वो असल में घी नही होता और इसके काफ़ी नुकसान होते है जैसे मोटापा, कोलेस्ट्राल, बीपी आदि आजकल हम जो खा रहे है वो ये ही Butter Oil है जो क्रीम से बनता है अगर आपको पूरा फ़ायदा लेना है तो उपर लिखी सही विधि से घी बनाए और कई बीमारियो से छुटकारा पाए

-अमरूद

अमरूद है एक बेहतरीन औषधि, इन रोगों में करता है दवा का काम ----- ____________________________________________________ अमरूद एक बेहतरीन स्वादिष्ट फल है। अमरूद कई गुणों से भरपूर है। अमरूद में प्रोटीन 10.5 प्रतिशत, वसा 0. 2 कैल्शियम 1.01 प्रतिशत बी 0.2 प्रतिशत पाया जाता है।अमरूद का फलों में तीसरा स्थान है। पहले दो नम्बर पर आंवला और चेरी हैं। इन फलों का उपयोग ताजे खा फलों की तरह नहीं किया जाता, इसलिए अमरूद विटामिन सी पूर्ति के लिए सर्वोत्तम है। विटामिन सी छिलके में और उसके ठीक नीचे होता है तथा भीतरी भाग में यह मात्रा घटती जाती है। फल के पकने के साथ-साथ यह मात्रा बढती जाती है। अमरूद में प्रमुख सिट्रिक अम्ल है 6 से 12 प्रतिशत भाग में बीज होते है। इसमें नारंगी, पीला सुगंधित तेल प्राप्त होता है। अमरूद स्वादिष्ट फल होने के साथ-साथ अनेक गुणों से भरा से होता है।

-अमरूद के ताजे पत्तों का रस 10 ग्राम तथा पिसी मिश्री 10 ग्राम मिलाकर 21 दिन प्रात: खाली पेट सेवन करने से भूख खुलकर लगती है और शरीर सौंदर्य में भी वृद्धि होती है।
- अमरूद खाने या अमरूद के पत्तों का रस पिलाने से शराब का नशा कम हो जाता है। कच्चे अमरूद को पत्थर पर घिसकर उसका एक सप्ताह तक लेप करने से आधा सिर दर्द समाप्त हो जाता है। यह प्रयोग प्रात:काल करना चाहिए। गठिया के दर्द को सही करने के लिए अमरूद की 4-5 नई कोमल पत्तियों को पीसकर उसमें थोड़ा सा काला नमक मिलाकर रोजाना खाने से से जोड़ो के दर्द में काफी राहत मिलती है।
- डायबिटीज के रोगी के लिए एक पके हुये अमरूद को आग में डालकर उसे भूनकर निकाल लें और भुने हुई अमरुद को छीलकर साफ़ करके उसे अच्छे से मैश करके उसका भरता बना लें, उसमें स्वादानुसार नमक, कालीमिर्च, जीरा मिलाकर खाएं, इससे डायबिटीज में काफी लाभ होता है। ताजे अमरूद के 100 ग्राम बीजरहित टुकड़े लेकर उसे ठंडे पानी में 4 घंटे भीगने दीजिए। इसके बाद अमरूद के टुकड़े निकालकर फेंक दें। इस पानी को मधुमेह के रोगी को पिलाने से लाभ होता है।
- जब भी आप फोड़े और फुंसियों से परेशान हो तो अमरूद की 7-8 पत्तियों को लेकर थोड़े से पानी में उबालकर पीसकर पेस्ट बना लें और इस पेस्ट को फोड़े-फुंसियों पर लगाने से आराम मिल जाएगा। चार हफ्तों तक नियमित रूप से अमरूद खाने से भी पेट साफ रहता है व फुंसियों की समस्या से राहत मिलती है।

खाना पकाने में आयुर्वेदिक सिद्धांतों की पूरी तरह से अवहेलना

आयुर्वेदिक कूकिंग आज कल कूकरी शोज़ की और रेसिपीज़ की भरमार है . पर हम खाना पकाने में आयुर्वेदिक सिद्धांतों की पूरी तरह से अवहेलना कर देते हैं , जिसकी वजह से आज स्वास्थ्य सम्बन्धी कई समस्याएँ आ रही है .अगर कोई ऐसी बिमारी है जो वर्षों से ठीक नहीं हो रही तो खाने में ये आजमा कर देखे . - सूप बनाते समय उसमे दूध नहीं डाले . 
- दही खट्टा हो तो उसमे दूध नहीं डाले . 
- ओट्स पकाते समय उसमे दूध दही साथ साथ न डाले . 
- चाय कॉफ़ी में शहद ना डाले . 
- पूरी , भटूरे , मिठाइयां डालडा घी में ना बना कर शुद्ध घी में बनाए . 
- नमकीन चावलों में , सब्जी की करी में दूध न डाले . 
- खट्टे फलों के साथ , फ्रूट सलाद में क्रीम या दूध न डाले . 
- दही बड़ा विरुद्ध आहार है . 
- ४ बजे के बाद केले , दही , शरबत , आइसक्रीम आदि का सेवन ना करे . 
- आटा लगाने के लिए दूध का इस्तेमाल ना करे . 
- गर्मियों में हरी मिर्च और सर्दियों में लाल मिर्च ला सेवन करे . 
- सुबह ठंडी तासीर की और शाम के बाद गर्म तासीर के खाने का सेवन करे . 
- पकौड़ों के साथ चाय या मिल्क शेक नहीं गरम कढ़ी ले . 
- फलों को सुबह नाश्ते के पहले खाए . किसी अन्य खाने के साथ मिलाकर ना ले .कच्चा सलाद भी खाने के पहले खा ले . 
- दही वाले रायते को हिंग जीरे का तडका अवश्य लगाएं . 
- दाल में एक चम्मच घी अवश्य डाले . 
- खाली पेट पान का सेवन ना करे . 
- खाने के साथ पानी नहीं ज़्यादा पानी डाला छाछ या ज्यूस या सूप पियें . 
- अत्याधिक नमक और खट्टे पदार्थ सेहत के लिए ठीक नहीं . 
- बघार लगाने में खूब हिंग , जीरा , सौंफ , मेथीदाना , धनिया पावडर , अजवाइन आदि का प्रयोग करें .

तरल डीज़ल की जगह उसे गर्म कर डीज़ल की वाष्प

मित्रों अब मै एक ऐसे यंत्र के बारे में बताने जा रहा हूँ ..भारत में यदि यह तकनीक इस्तेमाल करे तो बाहर से तेल नहीं मांगना पड़ेगा ...१९८० में एक आविष्कार अमेरिका के पेटेंट आफिस में आया था ..उसके बाद उस व्यक्ति की हत्या कर दी गयी और उस अविष्कार को दबा दिया गया ..उसका सारांश ये है ...डीज़ल इंजन में तरल डीज़ल जलाया जाता है ..उसमे थोडा स बदलाव कर के तरल डीज़ल की जगह उसे गर्म कर डीज़ल की वाष्प (भाप) को भेज कर जलया गया ..डीज़ल को गर्म कर के भाप बनने पर उसक आयतन १५० गुण बढ़ जाता है ..और उस एक लीटर तरल डीज़ल से उत्पन्न भाप से इंजिन लगभग 150-200 की मी /लीटर चल सकता है ..इसी तकनीक क उपयोग मिटटी के तेल के चूल्हों में भी किया जाता है ...एक और तकनीक से डीज़ल को गर्म कर के कैटलिस्ट के द्वारा "PYROLYSIS" या "CRACKING" नामक प्रक्रिया से मीथेन प्रोपेन ब्यूटेन गैस में विभक्त किया जाता है इस प्रक्रिया से एक लीटर डीज़ल से ३०० किलोमीटर तक माइलेज आएगी ..इस तरह के कई यंत्रो का आविष्कार हो चुका है कई देशो में ...लेकिन एक अंतर्राष्ट्रीय चाल के तहत उन्हें दबा दिया जाता है ..यदि इस तरह के यंत्र बाजार में आगये तो विश्व में अमेरिका यूरोप आदि देशो का कच्चे तेल पर से नियंत्रण समाप्त हो जाएगा ..वे ऐसा नहीं होने देंगे ये "सारे विश्व के सरकारों और तेल कंपनियों का देशद्रोह नहीं बल्कि विश्वद्रोह और प्रुथ्विद्रोह है" ..विश्व के ऐसे अनेक पेटेंट आफिसों में ऐसे आविष्कार भरे पड़े है .. उदहारण के लिए इसे देखियेhttp://www.youtube.com/watch?v=QMQqnaWUA98&feature=related

गौ- घृत से अद्भुत लाभ-

गौ- घृत से अद्भुत लाभ-

हम अगर गोरस का बखान करते करते मर जाए तो भी कुछ अंग्रेजी सभ्यता वाले हमारी बात नहीं मानेगे क्योकि वे लोग तो हम लोगो को पिछड़ा, साम्प्रदायिक और गँवार जो समझते है|

उनके लिए तो वही सही है जो पश्चिम कहे तो हम उन्ही के वैज्ञानिक शिरोविच की गोरस पर खोज लाये हैं जो रुसी वैज्ञानिक है|

गाय का घी और चावल की आहुती डालने से महत्वपूर्ण गैसे जैसे – एथिलीन ऑक्साइड,प्रोपिलीन ऑक्साइड,फॉर्मल्डीहाइड आदि उत्पन्न होती हैं । इथिलीन ऑक्साइड गैस आजकल सबसे अधिक प्रयुक्त होनेवाली जीवाणुरोधक गैस है,जो शल्य-चिकित्सा (ऑपरेशन थियेटर) से लेकर जीवनरक्षक औषधियाँ बनाने तक में उपयोगी हैं । वैज्ञानिक प्रोपिलीन ऑक्साइड गैस को कृत्रिम वर्षो का आधार मानते है ।

आयुर्वेद विशेषज्ञो के अनुसार अनिद्रा का रोगी शाम को दोनों नथुनो में गाय के घी की दो – दो बूंद डाले और रात को नाभि और पैर के तलुओ में गौघृत लगाकर लेट जाय तो उसे प्रगाढ़ निद्रा आ जायेगी ।

गौघृत में मानव शरीर में पहुंचे रेडियोधर्मी विकिरणों का दुष्प्रभाव नष्ट करने की असीम क्षमता हैं । अग्नि में गाय का घी कि आहुति देने से उसका धुआँ जहाँ तक फैलता है,वहाँ तक का सारा वातावरण प्रदूषण और आण्विक विकरणों से मुक्त हो जाता हैं ।

सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि एक चम्मच गौघृत को अग्नि में डालने से एक टन प्राणवायु (ऑक्सीजन) बनती हैं जो अन्य किसी भी उपाय से संभव नहीं हैं |

देसी गाय के घी को रसायन कहा गया है। जो जवानी को कायम रखते हुए, बुढ़ापे को दूर रखता है। काली गाय का घी खाने से बूढ़ा व्यक्ति भी जवान जैसा हो जाता है।गाय के घी में स्वर्ण छार पाए जाते हैं जिसमे अदभुत औषधीय गुण होते है, जो की गाय के घी के इलावा अन्य घी में नहीं मिलते । गाय के घी से बेहतर कोई दूसरी चीज नहीं है।

गाय के घी में वैक्सीन एसिड, ब्यूट्रिक एसिड, बीटा-कैरोटीन जैसे माइक्रोन्यूट्रींस मौजूद होते हैं। जिस के सेवन करने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है। गाय के घी से उत्पन्न शरीर के माइक्रोन्यूट्रींस में कैंसर युक्त तत्वों से लड़ने की क्षमता होती है।

यदि आप गाय के 10 ग्राम घी से हवन अनुष्ठान (यज्ञ,) करते हैं तो इसके परिणाम स्वरूप वातावरण में लगभग 1 टन ताजा ऑक्सीजन का उत्पादन कर सकते हैं। यही कारण है कि मंदिरों में गाय के घी का दीपक जलाने कि तथा , धार्मिक समारोह में यज्ञ करने कि प्रथा प्रचलित है। इससे वातावरण में फैले परमाणु विकिरणों को हटाने की अदभुत क्षमता होती है।

गोघृत के अन्य महत्वपूर्ण उपयोग :–

1.गाय का घी नाक में डालने से पागलपन दूर होता है।
2.गाय का घी नाक में डालने से एलर्जी खत्म हो जाती है।
3.गाय का घी नाक में डालने से लकवा का रोग में भी उपचार होता है।
4--20-25 ग्राम घी व मिश्री खिलाने से शराब, भांग व गांझे का नशा कम हो जाता है।
5.गाय का घी नाक में डालने से कान का पर्दा बिना ओपरेशन के ही ठीक हो जाता है।
6.नाक में घी डालने से नाक की खुश्की दूर होती है और दिमाग तारो ताजा हो जाता है।
7.गाय का घी नाक में डालने से कोमा से बहार निकल कर चेतना वापस लोट आती है।
8.गाय का घी नाक में डालने से बाल झडना समाप्त होकर नए बाल भी आने लगते है।
9.गाय के घी को नाक में डालने से मानसिक शांति मिलती है, याददाश्त तेज होती है।
10.हाथ पाव मे जलन होने पर गाय के घी को तलवो में मालिश करें जलन ढीक होता है।
11.हिचकी के न रुकने पर खाली गाय का आधा चम्मच घी खाए, हिचकी स्वयं रुक जाएगी।
12.गाय के घी का नियमित सेवन करने से एसिडिटी व कब्ज की शिकायत कम हो जाती है।
13.गाय के घी से बल और वीर्य बढ़ता है और शारीरिक व मानसिक ताकत में भी इजाफा होता है
14.गाय के पुराने घी से बच्चों को छाती और पीठ पर मालिश करने से कफ की शिकायत दूर हो जाती है।
15.अगर अधिक कमजोरी लगे, तो एक गिलास दूध में एक चम्मच गाय का घी और मिश्री डालकर पी लें।
16.हथेली और पांव के तलवो में जलन होने पर गाय के घी की मालिश करने से जलन में आराम आयेगा।
17.गाय का घी न सिर्फ कैंसर को पैदा होने से रोकता है और इस बीमारी के फैलने को भी आश्चर्यजनक ढंग से रोकता है।
18.जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक की तकलीफ है और चिकनाइ खाने की मनाही है तो गाय का घी खाएं, हर्दय मज़बूत होता है।
19.देसी गाय के घी में कैंसर से लड़ने की अचूक क्षमता होती है। इसके सेवन से स्तन तथा आंत के खतरनाक कैंसर से बचा जा सकता है।
20.संभोग के बाद कमजोरी आने पर एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच देसी गाय का घी मिलाकर पी लें। इससे थकान बिल्कुल कम हो जाएगी।
21.फफोलो पर गाय का देसी घी लगाने से आराम मिलता है।गाय के घी की झाती पर मालिस करने से बच्चो के बलगम को बहार निकालने मे सहायक होता है।
22.सांप के काटने पर 100 -150 ग्राम घी पिलायें उपर से जितना गुनगुना पानी पिला सके पिलायें जिससे उलटी और दस्त तो लगेंगे ही लेकिन सांप का विष कम हो जायेगा।
23.दो बूंद देसी गाय का घी नाक में सुबह शाम डालने से माइग्रेन दर्द ढीक होता है। सिर दर्द होने पर शरीर में गर्मी लगती हो, तो गाय के घी की पैरों के तलवे पर मालिश करे, सर दर्द ठीक हो जायेगा।
24.यह स्मरण रहे कि गाय के घी के सेवन से कॉलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता है। वजन भी नही बढ़ता, बल्कि वजन को संतुलित करता है । यानी के कमजोर व्यक्ति का वजन बढ़ता है, मोटे व्यक्ति का मोटापा (वजन) कम होता है।
25.एक चम्मच गाय का शुद्ध घी में एक चम्मच बूरा और 1/4 चम्मच पिसी काली मिर्च इन तीनों को मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय चाट कर ऊपर से गर्म मीठा दूध पीने से आँखों की ज्योति बढ़ती है।
26.गाय के घी को ठन्डे जल में फेंट ले और फिर घी को पानी से अलग कर ले यह प्रक्रिया लगभग सौ बार करे और इसमें थोड़ा सा कपूर डालकर मिला दें। इस विधि द्वारा प्राप्त घी एक असर कारक औषधि में परिवर्तित हो जाता है जिसे जिसे त्वचा सम्बन्धी हर चर्म रोगों में चमत्कारिक मलहम कि तरह से इस्तेमाल कर सकते है। यह सौराइशिस के लिए भी कारगर है।

27.गाय का घी एक अच्छा(LDL)कोलेस्ट्रॉल है। उच्च कोलेस्ट्रॉल के रोगियों को गाय का घी ही खाना चाहिए। यह एक बहुत अच्छा टॉनिक भी है। अगर आप गाय के घी की कुछ बूँदें दिन में तीन बार,नाक में प्रयोग करेंगे तो यह त्रिदोष (वात पित्त और कफ) को संतुलित करता है।

28.घी, छिलका सहित पिसा हुआ काला चना और पिसी शक्कर (बूरा) तीनों को समान मात्रा में मिलाकर लड्डू बाँध लें। प्रातः खाली पेट एक लड्डू खूब चबा-चबाकर खाते हुए एक गिलास मीठा कुनकुना दूध घूँट-घूँट करके पीने से स्त्रियों के प्रदर रोग में आराम होता है, पुरुषों का शरीर मोटा ताजा यानी सुडौल और बलवान बनता है ।

इन्ही विशेषताओं का अनुभव करके हमारे ऋषियों ने समवेत स्वर में उद्घोष किया --" गावो विश्वस्य मातरः "-गायें सबकी मातायें हैं ।
संकलक-आचार्य सियारामदास

पेट में थ्रेड वर्म

अगर बच्चा रात को दांत किटकिटाए तो इसका कारण पेट में कीडे होना है पेट में कीड़ों के कारण बच्चे के पेट में दर्द होता है। कभी बच्चे की भूख मर जाती है तो कभी उसका पेट साफ नहीं होता। कभी-सभी सर्दी, पेट दर्द होना, बुखार और टांसिल्स की शिकायत भी हो जाती है। ये जीव अपनी संख्या में वृद्धि कर हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाते है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार ये परजीवी गोलकृमी,फीता कृमी,पिनकृमी आदि नामों से जाने जाते हैं। इनमें कुछ हेल्मिन्थवर्ग के जीव हैं। जो धीरे-धीरे अपनी संख्या को बढाते हैं। कुछ सूक्ष्म जीव अमीबा। जैसे होते हैं जो शरीर में सहजीवी के रूप में रहते हैं तथा शरीर में पाचन सहित मल निर्माण क़ी प्रक्रिया में भी भाग लेते है। ये गुदा के अन्दर और मलद्वार पर काटते हैं जिससे बच्चा रोता है। विशेष रूप से यह तकलीफ रात को होती है जिस कारण बच्चा सो नहीं पाता। यदि बच्चा सोते समय दांत पीसे या किटकिटाए या शक्कर या गुड़ जैसे मीठे पदार्थ बहुत अधिक खाये, नामक और गुदा खुजाए, पेट के बल सोए, उसका हाजमा खराब हो, उसके मुंह व सांस से दुर्गन्ध आये तो समझना चाहिए कि पेट में थ्रेड वर्म है।

आइए जानते है इनके आसान और कारगर ईलाज:

-अजवायन का चूर्ण बनाकर आधा ग्राम लेकर समभग गुड में गोली बनाकर दिन में तीन बार खिलाने से सभी प्रकार के पेट के कीडे नष्ट होते है।

- सुबह उठते ही बच्चे दस ग्राम (और बडे २५ ग्राम) गुड खाकर दस - पन्द्रह मिनट आराम करें। इससे आंतों में चिपके सब कीडे निकलकर एक जगह जमा हो जायेंगे। फिर बच्चे आधा ग्राम (और बडे एक - दो ग्राम) अजवायन का चुर्ण बासी पानी के साथ खायें। इससे आंतों में मौजूद सब प्रकार के कीडे एकदम नष्ट होकर मल के साथ शीघ्र ही बाहर निकल जाते हैं।

-अजवायन चूर्ण आधा ग्राम में चुटकी भर काला नमक मिलाकर रात्रि के समय रोजाना गर्म जल से देने से बालकों के कीडे नष्ट होते हैं। बडे अजवायन के चुर्ण चार भाग में काला नमक एक भाग मिलाकर दो ग्राम की मात्रा से गर्म पानी के साथ लें।

- अजवायन का चूर्ण आधा ग्राम, साठ ग्राम मट्ठे या छाछ के साथ और बडो को दो ग्राम १२५ ग्राम मट्ठे के साथ देने से पेट के कीडे नष्ट होकर मल के साथ बाहर निकल जाते है।

-थायमल (अजवायन का सत) रात को खाली कैपसूल में डालकर पानी के साथ लेने से भी कृमियों से छुटकारा मिलता है। पीपलमूल के चूर्ण की लगभग 3 ग्राम मात्रा रात को सोते समय गोमूत्र के साथ लेने से भी लाभ होता है। कड़वी तुंबी के बीजों के बारीक पिसे चूर्ण की दो ग्राम मात्रा सुबह छाछ के साथ देने से भी अमाशय के कृमि नष्ट हो जाते हैं।
खजूर के पत्तों को उबालकर, काढ़ा बनाकर 24 घंटे रखकर बासी करके पीने से भी लाभ होता है। कृमि नष्ट करने के लिए वायविडंग के बारीक पिसे चूर्ण की 60 ग्राम मात्रा 250 ग्राम शहद में मिलाकर रखें इस मिश्रण की 1 या 2 चम्मच मात्रा सुबह चाट लें और फिर पानी से कुल्ले करके मुंह साफ कर लें।

-सुबह आनार का रस थोडी मात्रा में दे इससे कीडे कम होते है

-प्याज का थोडा सा रस पीलाने से कीडे ठीक हो जाते है

-बच्चे को दूध और मीठा न पीलाए इससे कीडे बढते है

-कृमि चिकित्सा के लिए कृमि कुठार रस की एक−एक रत्ती वजन की एक−एक गोली सुबह−शाम शहद के साथ तीन दिन देकर चौथे दिन एक चम्मच कैस्टर आयल (अरण्डी का तेल) दूध में मिलाकर दें। इससे लाभ होता है। भोजन के बाद बच्चों को एक−एक चम्मच विडंगारिष्ट पानी में मिलाकर देने से भी लाभ होता है। वयस्कों को विडंगारिष्ट की दो−दो चम्मच मात्रा का सेवन करना चाहिए।

Monday, 25 November 2013

एक AAP कार्यकर्ता का दर्द

एक AAP कार्यकर्ता का दर्द
==================
साथियो.. अन्ना के हिसाब मांगने और मीड़िया के षड़यंत्रो के
कारण अब मामला जरा टाइट हो गया है, इसलिए अन्ना के नाम पर
चंदा ऐठने मे बड़ी रूकावट आ गई है, जिस कारण हम कार्यकर्ताओं
की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है...
अरविँद सर भी हमारी सैलरी टाइम पर देने के बजाए आजकल
सारा चंदा फर्जी सर्वे कराने और रोडी रघुराम,राजपाल यादव जैसे
नमूनो से प्रचार कराने पर लुटा रहे हैँ, हमने कितनी बार कहा कि सुधर
जाओ, लुख्खागिरि त्यागो, पर ये काहे को सुनेँ...
इधर साला कंगाली छाई हुई है, पोस्टर भी अपने पैसे से बनवाना पड़
रहा है,चिपकाने के लिए गोंद तक खुद खरीदनी पड़ती है, नुक्कड़
नौटंकी के बाद चाट पकौड़ी का खर्चा अलग....
उधर ये चरस-कोकिन खीँच रहे हैँ...इधर गुटखा खरीदने के लिए भी कर्ज
लेना पड़ रहा है, ये साला आंदोलन भी अजीब निवाला है, न
खाया जा रहा है न
उगला, समझ मे नहीँ आ रहा है करेँ तो करे क्या ?
ये कांग्रैसी अहमद पटेल भी कंजूस और खड़ूस निकला साला, कनाटप्लेस
मे एक रूपये किराये पर मकान क्या दे दिया, ऐसेअकड़ने लगा है जैसे
मौलाना बुखारी यही हो, गुस्सा आया,
हमनेभी कह दिया "साले तुम्हारे बाप के नौकर नहीँ हैँ, तुम्हारे
विपक्षियों का वोट काट रहे हैँ, इसीलिए पैसा देते हो, कोई
एहसान नहीँ करते, "
एक तो साला ये किस जन्म का पाप था कि ये घटिया सा चुनाव
चिन्ह "झाडू" मिला...
कल गर्लफ्रेन्ड के घर के सामने झाड़ू लगाना पड़ गया, इज्जत के पकौड़े
लगवा दिए हैँ साला इस क्रांति ने... जिँदगी झंड हो गई है.....
काम धंधा छोड़ के आए थे.. मंत्री बनने... साले संतरी बन गए...
जिस गंदी गली मेँ कुत्ते तक नहीँ घुसते, वहाँ वहाँ झाड़ू लिए घुस रहे हैँ
पैन्चो... साले क्रांतिकारी ना हुए जमादार हो गए,
ऊपर से इनकी फोटो अलग से लो, वो भी एकदम सही एंगल से, इसके
बाद पैन्चो फेसबुक पर अपलोड भी करो ।
कभी कभी तो मन करता है अरविँद के मुँह पर ही कह दूँ , "अबेबीटेक्स
की औलाद खुजेले, साले घंटा भी नहीँ मिलेगा तुम्हेँ इलेक्शन मेँ, खुद
की जिद के लिए हमारी जवानी की बलि ना
चढ़ाओ पैन्चो..... हमारे काम धंधे के तो पकौड़े लगवा ही दिए हैँ
तुमने....
खुद साले भर-भर डोनेशन अंटी कर लो और हम दिन भर
साला गला फाड़ फाड़ के क्रांति का झंडा बुलंद करते रहेँ और पुलिस
के डंडे खाते रहे ?
हमे सैलरी क्रांति लाने की मिलती है डंड़े खाने की नही...
अबे जब क्रांति लानी थी तो थी तो साला खुद पुलिस के डंडे
खाओ, ये आंदोलन की जिद के लिए
हमारी जवानी की बलि तो ना चढ़ाओ पैन्चो