Thursday, 23 October 2014

लश्कर ने कहा, हिंदुओं को मारना जिहाद का हिस्सा

पाकिस्तान स्थित लश्करे तैयबा के मुखिया हाफिज़ सईद ने कहा है कि हिंदुओं को मारना भारत के खिलाफ उनके जिहाद का हिस्सा है ।

एक पाकिस्तानी साप्ताहिक ‘द फ्राइडे टाइम्स’ में छपे उनके इंटरव्यू में सईद से पूछा गया था कि वह हथियार छोड़कर बातचीत की मेज पर क्यों नहीं आना चाहते । इस पर सईद का जवाब था कि भारत के सामने झुकना और बातचीत करने का अनुरोध करना समस्या का हल नहीं है । उन्होंने कहा कि कश्मीर में उनकी नीति बहुत सोची-समझी हुई है । सईद ने कहा कि भारत सिर्फ जिहाद की भाषा समझता है, इसलिए हिंदुओं को मारने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है ।

उल्लेखनीय है कि सईद का यह बयान, जम्मू और कश्मीर के पुलिस महानिदेशक ए.के. सूरी के इस दावे के बाद आया है कि 25 मार्च को दक्षिण कश्मीर में नदीमर्ग गांव में 24 कश्मीरी पंडितों के कत्ले-आम में लश्कर का हाथ है ।

यह पूछे जाने पर कि दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा क्या है, सईद ने कहा कि हमें अमेरिका, इस्राइल और भारत के खिलाफ लड़ना है और भारत के खिलाफ जिहाद की जरूरत सबसे ज्यादा है । उन्होंने आत्मघाती हमलों को सही ठहराते हुए कहा कि ये हमले इस्लाम में जायज़ हैं । उन्होंने कहा कि जिहाद का सबसे अच्छा तरीका आत्मघाती हमले करना है ।

सईद ने दावा किया कि पाकिस्तान के सारे संसद सदस्य जिहाद का समर्थन करते हैं, लेकिन पाकिस्तानी शासकों का मज़ाक उड़ाते हुए उन्होंने कहा कि वे विदेशी ताकतों से आदेश लेते हैं और देश की संप्रभुता का उन्होंने मज़ाक बना कर रख दिया है ।

यह पूछे जाने पर कि इराक के मामले में मुसलमान देशों ने कोई भी कदम क्यों नहीं उठाया, सईद ने कहा कि पाकिस्तान सरकार को अपनी सेनाओं को वहां हमलावरों से लड़ने के लिए भेजना चाहिए था । उन्होंने कहा कि पाकिस्तान चाहता, तो वह सद्दाम हुसैन को मिसाइलें और परमाणु बम भी भेज सकता था, ताकि उनका इस्तेमाल करके वे इराक को बचा लेते

Wednesday, 22 October 2014

२० अक्टूबर को हजारों की संख्या में एकत्रित मुस्लिमों ने जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के बैनर तले, बर्दवान शहर के कर्जन गेट पर लगभग तीन घंटे तक चक्काजाम रखा. सिद्दीकुल्लाह चौधरी के नेतृत्व में इन मुस्लिमों ने बर्दवान धमाकों की जाँच कर रही NIA पर दबाव बनाने की कोशिश की है. सिद्दीक ने अपने भाषणों में कहा कि "जब भी पुलिस मदरसों की जाँच करने आए तो इकठ्ठा हो जाओ और पुलिस को मदरसे में मत घुसने दो, पुलिस जहाँ भी जाँच करने जाए, उसके साथ रहो... मदरसे पवित्र हैं, उन्हें पुलिस से बचाओ...".

उल्लेखनीय है कि NIA की जाँच में खाग्रागढ़ में हुए उस बम धमाके के तार अब बर्दवान, मुर्शिदाबाद, चौबीस परगना जिलों तक जा पहुँचे हैं. जाँच में पाया गया कि मदरसे के भीतर ही भीतर चार मकान आपस में जुड़े हुए थे, जहाँ IED के निर्माण का सामान पाया गया. जाँच में यह भी पता चला कि बम धमाके में मृतक आतंकवादी इस मकान में कम से कम चार बार आया था.

सिद्दीकुल्लाह चौधरी के साथ मंच पर वामपंथी नेता, अशीम चटर्जी और समीर पतुन्दा भी थे. मंच से ही दोनों गिरफ्तार महिला जेहादियों रजिया बी तथा अमीना बी के समर्थन में नारे लगाए गए और उनका पूरा साथ देने का आव्हान भी किया गया. सभा खत्म होने के बाद, मुस्लिमों ने रास्ते से आते-जाते सभी हिंदुओं को पीटा और ऐसे सभी वाहनों में तोड़फोड़ की जिन पर कोई हिन्दू निशान बना था...| औरंगाबाद में ओवैसी की पार्टी MIM के विधायक की जीत के जुलूस में भी यही पैटर्न देखने में आया था... वहाँ भी "ऊपर छतरी, नीचे छाया, भाग हिन्दू ओवैसी आया" के नारे लगे तथा विजय जुलूस के बाद महिलाओं-बूढों सहित सभी राहगीरों को जबरन "हरे रंग" का गुलाल पोता गया और हिन्दूओं को गालियाँ दी गईं...ओवैसी सहित सभी मियाँपरस्त पार्टियाँ 
भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाने की राह पर चलती रहेंगी

और एक दिन हर गाँव हर नगर के अनेकों विकास की लाशें 
इनके जेहादी लड़ाके उन्हीं सडकों पर बिछा देंगे
जिनको आज मोदी जी विकास के नाम पर बनवा रहे हैं

हिन्दू लोग, जितनी जल्दी सेकुलरिज़्म, वामपंथ, इस्लाम और "अराजकता" को समझ लें, उतना ही उनके हित में होगा... अभी भी देर नहीं हुई है. 

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ब‌र्द्धमान जिले के खागरागढ़ में हुए विस्फोट की जांच के दौरान खुफिया विभाग को पता चला है कि पश्चिम बंगाल में एक-दो नहीं करीब 58 आतंकी प्रशिक्षण शिविर व आइईडी निर्माण केंद्र हो सकते हैं। अभी तक की जांच में यह भी सुराग मिले हैं कि आतंकी प्रशिक्षण केंद्र के रूप में कई स्थानों पर मदरसों का इस्तेमाल कर रहे हैं। क्षमता विस्तार में उनकी मदद ले रहे हैं। 
एनआइए को जांच में अभी और कई चौंकाने वाली बातें सामने आई है। जांच इस ओर भी इशारा करती है कि बंगाल के कई हिस्सों में आतंकी संगठन की शाखाएं वर्षो से मौजूद हैं। ये शाखाएं सन 2010 से चालू होने के संकेत मिले हैं। इन शाखाओं का क्षेत्रीय मुख्यालय मुर्शिदाबाद होने के भी संकेत हैं।







Tuesday, 21 October 2014

जिस पवित्र सरस्वती नदी के तट पे हमारे वेद रचे गये, आज उसे फिर खोजने की कोशिश कर रही है मोदी सरकार

नरेंद्र मोदी को केंद्र की सत्ता में आए महज कुछ महीने हुए हैं, लेकिन संघ परिवार की एक पसंदीदा परियोजना में फिर से जान फूंकने की कवायद शुरू हो गई है. यह सपना है काफी समय पहले लुप्त हो चुकी उस सरस्वती नदी की तलाश, जिसे वेदों में पावन बताया गया है.

अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार और तत्कालीन पर्यटन और संस्कृति मंत्री जगमोहन मल्होत्रा ने सरस्वती की तलाश करने के लिए वैज्ञानिक और पुरातात्विक संसाधनों को लगाने के निर्देश दिए थे, लेकिन यूपीए सरकार ने आते ही इस परियोजना को 2004 में समेट डाला. इसके बारे में जयपाल रेड्डी ने संसद में कहा था कि कोई भी अनुसंधान इस ‘मिथकीय’ नदी का पता लगाने में कामयाब नहीं हो सका है.

अब बीजेपी सरकार के दोबारा आने से यह परियोजना फिर जिंदा हो गई है. जल संसाधन, नदी विकास और गंगा को नया जीवन देने के लिए बने विभाग की केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने अगस्त में लोकसभा को बताया कि उनकी सरकार पूरी गंभीरता से नदी को खोजने की मंशा रखती है.

उनके मंत्रालय ने केंद्रीय भूजल बोर्ड को इलाहाबाद के एक किले के भीतर मौजूद कुएं का पानी जांचने के आदेश दिए हैं ताकि लुप्त हो चुकी नदी का स्रोत और उसका रास्ता तलाशा जा सके. ऐसा लगता है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) और संस्कृति मंत्रालय ने इस परियोजना में नए सिरे से जगी दिलचस्पी पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है.

Monday, 20 October 2014

सनातन हिन्दू धर्म में कितने देवता हैं ? कुछ लोग 33 करोड़ तो कुछ 33 प्रकार के बतलाते हैं . इस विषय में हम वेदों का शिरोभाग जिसे उपनिषद् कहते हैं उससे इस विषय को प्रस्तुत करते हैं ------बृहदारण्यक उपनिषद् में शाकल्य ऋषि ने याज्ञवल्क्य महर्षि से पूछा --देवता कितने हैं ---कति देवाः ? याज्ञवल्क्य जी ने अन्तम उत्तर देते हुए कहा -------33 ही देवता हैं ----- त्रयस्त्रिंशत्त्वेव देवाः। अब प्रश्न हुआ --वे 33 देवता कौन कौन हैं ? इसका उत्तर दिया गया ------
8 वसु- धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष और प्रभाष
11 रुद्र-हर, बहुरुप, त्रयँबक, अपराजिता, बृषाकापि, शँभू, कपार्दी, रेवात, मृगव्याध, शर्वा, और कपाली।
12 आदित्य- धाता, मित, आर्यमा, शक्रा, वरुण, अँश, भाग, विवास्वान, पूष, सविता, तवास्था, और विष्णु..
1 इन्द्र
1प्रजापति
कुल योग = 33
यही 33 देवता हैं । -----. बृहदारण्यकोपनिषद् 9/3/1-2
इस प्रकार वेद में 33 ही देवता कहे गये हैं । यहां कहीं भी --33 कोटि देवता --ऐसे शब्द का प्रयोग ही नहीं है। जिससे हमें कोटि शब्द के अर्थ को बतलाने के लिए बाध्य होना पड़े ।
ये 33 देवता भी एक ही देवता = परमात्मा =ब्रह्म =भगवान् के विभिन्न रूप हैं । वस्तुतः एक ही देव है जो भिन्न भिन्न प्रकार से अनेक नामों से कहा गया है---एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति --ऋग्वेद,वही एक देव सर्वत्र व्याप्त (समाया) हुआ है.
एको देवः सर्वभूतेषु गूढः ----श्वेताश्वतरोपनिषद्-6/11.
हमारा सनातन हिन्दू धर्म मुस्लिम या इशायियों की भांति छुद्र विचारधारा वाला नहीं है । यहां तो यह उस समय ही विनिर्णीत हो चुका कि जो कुछ दिखायी या सुनायी देता है वह सब वही एक देव है --- सर्वं खल्विदं ब्रह्म---3/14/1.
अतः हमारे सनातन धर्म में मूलतः एक ही देव हैं जिन्हे हम इन 33 देवताओं की बात क्या , सम्पूर्ण विश्व को उन्ही का रूप देखते हैं.
ब्रह्मसूत्र के "देवताधिकरण" -अध्याय 1/पाद 3/अधिकरण 8/सूत्र 27. का शांकर भाष्य एवं उसकी भामती टीका में भी विवरण मिलता है.
TP Shukla
सावजी काका सत्तर के दशक में सूरत आये थे. खाली हाथ. काम की तलाश में. उधार लेकर हीरा कारोबार शुरू किया और आज 45 साल के कारोबारी संघर्ष के बाद 6000 करोड़ के श्रीकृष्णा इंटरप्राइज के मालिक हैं. कारोबार का यह कोई इतना बड़ा कारू का खजाना नहीं है कि उनका विशेष तौर पर जिक्र किया जाए लेकिन कल से वे इसलिए चर्चा में हैं कि उन्होंने अपने यहां काम करनेवाले 1200 कर्मचारियों को 50 करोड़ खर्च करके कार, घर और ज्वैलरी का दीपावली तोहफा दिया है. हालांकि कारोबार के ऐवज में बोनस की रकम भी इतनी बड़ी नहीं है कि सावजी काका को सिरमाथे पर बिठा लिया जाए.
लेकिन सावजी काका की तारीफ होनी चाहिए. जमकर होनी चाहिए. क्योंकि पूंजीवादी शोषण के ऐसे दौर में जब कर्मचारियों का शोषण लाभांश बढ़ाने का सबसे बड़ा हथियार हो गया हो तब सावजी काका या नारायणमूर्ति जैसे लोग समझाते हैं दौलत अपनों के बीच बांटने से भी बढ़ती है. वे अपने कारीगरों को औसत एक लाख से ऊपर महीने का मेहनताना देते हैं. वे मानते हैं कि उनका पूरा कारोबार उन्हीं कारीगरों की बदौलत चलता है जिन्हें वे बोनस बांटकर नाम कमा रहे हैं. सूरत वाले सावजी काका की यही समझ शायद उन्हें यहां तक लाई है. कर्मचारियों का पेट काटकर, हक छीनकर अमीर होनेवाले कारोबारियों के लिए सावजी काका इस दीवाली पर सबसे बढ़िया तोहफा है.

हज़रत मोहम्मद के चाचा काबा (शिव मंदिर) के पुजारी थे !!
http://hindurashtra.in/?p=357

हज़रत मोहम्मद के चाचा, उमर बिन-ए-हश्शाम (जिन्हें अबू हाकम अर्थात ज्ञान का पिता के नाम से भी जाना जाता है) एक प्रसिद्ध अरबी कवि थे। इन्होंने भगवान शिव की स्तुती में एक अरबी कविता लिखी है, जिसे सायर-अल-ओकुल में भी शामिल किया गया है।

इस अरबी कविता को नई दिल्ली के लक्ष्मीनारायण मन्दिर के पीछे स्थित बगीचे में अग्नि मण्डप के एक शिलालेख पर देखा जा सकता है…

इस अरबी कविता का हिन्दी अनुवाद इस प्रकार है --

1) वह मनुष्य जिसने अपना जीवन काम, क्रोध, पाप और अधर्म में बिताया हो, अपने जीवन को नष्ट किया हो…
2) यदि अन्त में उसे पश्चाताप हो और वह भलाई की ओर लौटना चाहे तो क्या उसका कल्याण हो सकता है?…
3) एक बार भी वह सच्चे हृदय से महादेव की पूजा करे तो धर्म के मार्ग में उच्च स्तर को पा सकता है…
4) हे प्रभु, मेरा समस्त जीवन लेकर मुझे सिर्फ़ एक दिन के लिए भारत में निवास दे दो, क्योंकि उस भूमि पर पहुँचकर व्यक्ति जीवन-मुक्त हो जाता है…
5) भारत की यात्रा से सारे शुभ कर्मों की प्राप्ति होती है और आदर्श गुरुजनों का सत्संग मिलता है…
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(स्रोत : - प्रसिद्ध अरबी काव्य ग्रन्थ, "साईर-अल-ओकुल", पृष्ठ 235)
हरे पर्दों का रहस्य

आर्य समाज के प्रचारक उषबोधन जी प्रचार करने राजस्थान के एक आर्यसमाज में गये। उन्होंने देखा कि आर्यसमाज के परदे से लेकर बिछाने कि चादरे तक हरे रंग के थे। उनके मन में कुछ उत्सुकता हुई पर वे चुप रहे। दोपहर को आर्यसमाज के प्रधान श्री चौहान जी के घर पर भोजन करने गये तो उनके घर पर भी हरे रंग के परदे और चादरे देखी। उन्होंने प्रधान जी से इसका कारण पूछा।
प्रधान जी ने कहा कि इसका उत्तर आपको कल प्रात: चार बजे मिलेगा। प्रात: काल में आप सैर करने उनके साथ गये। चौहान जी उन्हें पीरों कि कब्र पर ले गये और उन पर बिछी हुई चादरों को उतारने लगे और जोर से कहने लगे उठों कब्रों में सोने वालो भोर हो गई हैं।
चौहान जी बोले कि मैं हर कब्र से उसकी चादर उतार लाता हूँ। उसे या तो किसी गरीब को ओढ़ने के लिए दे देता हूँ अथवा उसका सदुपयोग कर लेता हूँ।
मुस्लिम समाज तो मुर्दों पर चादरे चढ़ाकर मूर्खता कर ही रहा हैं उसके मुर्ख हिन्दू बिना सत्य को जाने उनका अनुसरण कर रहा हैं। इससे अधिक और क्या मूर्खता हो सकती हैं।

उषबोधन जी चौहान जी कि धर्म भावना और अन्धविश्वास के विरूद्ध भावना को सुनकर चकित रह गये।