Monday, 1 October 2018

sochna padega


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जानिये और समझिये कि सबरीमला मंदिर क्यों सबकी आंखों में खटक रहा है।

,,,,,,,,,,,,,,box,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,ये महिला रेहाना फातिमा है जो सबरीमाला के मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के विरोध में चल रहे आंदोलन में पुलिस के वेश पहन कर पहुंची है.

क्या रेहाना फातिमा स्वामी अय्यप्पा की भक्त है?

इस को पुलिस की वर्दी कौन पहना रहा है?

केरल के मुख्यमंत्री पी.विजयन क्या चाहते हैं?



केरल में सबरीमला के मशहूर स्वामी अयप्पा मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के नाम पर चल रहे विवाद के बीच लगातार यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इस मंदिर में ऐसा क्या है कि ईसाई और इस्लाम धर्मों को मानने वाले तथाकथित एक्टिविस्ट भी कम से कम एक बार यहां घुसने को बेताब हैं।
इस बात को समझने के लिये हमें केरल के इतिहास और यहां इस्लामी और राज्य में बीते 4-5 दशक से चल रही ईसाई धर्मांतरण की कोशिशों को भी समझना होगा।
मंदिर में प्रवेश पाने के पीछे नीयत धार्मिक नहीं, बल्कि यहां के लोगों की सदियों पुरानी धार्मिक आस्था को तोड़ना है, ताकि इस पूरे इलाके में बसे लाखों हिंदुओं को ईसाई और इस्लाम जैसे अब्राहमिक धर्मों में लाया जा सके।
केरल में चल रहे धर्मांतरण अभियानों में सबरीमला मंदिर बहुत बड़ी रुकावट बनकर खड़ा है।
पिछले कुछ समय से इसकी पवित्रता और इसे लेकर स्थानीय लोगों की आस्था को चोट पहुंचाने का काम चल रहा था।
लेकिन हर कोशिश नाकाम हो रही थी।
लेकिन आखिरकार महिलाओं के मुद्दे पर ईसाई मिशनरियों ने न सिर्फ सबरीमला के अयप्पा मंदिर बल्कि पूरे केरल में हिंदू धर्म के खात्मे के लिए सबसे बड़ी चाल चल दी है।
सबरीमला के इतिहास को समझिये...
1980 से पहले तक सबरीमला के स्वामी अयप्पा मंदिर के बारे में ज्यादा लोगों को नहीं पता था। केरल और कुछ आसपास के इलाकों में बसने वाले लोग यहां के भक्त थे।
70 और 80 के दशक का यही वो समय था जब केरल में ईसाई मिशनरियों ने सबसे मजबूती के साथ पैर जमाने शुरू कर दिये थे।
उन्होंने सबसे पहला निशाना गरीबों और अनुसूचित जाति के लोगों को बनाया।
इस दौरान बड़े पैमाने पर यहां लोगों को ईसाई बनाया गया। इसके बावजूद लोगों की मंदिर में आस्था बनी रही।
इसका बड़ा कारण यह था कि मंदिर में पूजा की एक तय विधि थी जिसके तहत दीक्षा आधारित व्रत रखना जरूरी था।
सबरीमला उन मंदिरों में से है जहां पूजा पर किसी जाति का विशेषाधिकार नहीं है किसी भी जाति का हिंदू पूरे विधि-विधान के साथ व्रत का पालन करके मंदिर में प्रवेश पा सकता है।
सबरीमला में स्वामी अयप्पा को जागृत देवता माना जाता है।
यहां पूजा में जाति विहीन व्यवस्था का नतीजा है कि इलाके के दलितों और आदिवासियों के बीच मंदिर को लेकर अटूट आस्था है।
मान्यता है कि मंदिर में पूरे विधि-विधान से पूजा करने वालों को मकर संक्रांति के दिन एक विशेष चंद्रमा के दर्शन होते हैं जो लोग व्रत को ठीक ढंग से नहीं पूरा करते उन्हें यह दर्शन नहीं होते।
जिसे एक बार इस चंद्रमा के दर्शन हो गए माना जाता है कि उसके पिछले सभी पाप धुल जाते हैं।
सबरीमला से आया सामाजिक बदलाव...
सबरीमला मंदिर की पूजा विधि देश के बाकी मंदिरों से काफी अलग और कठिन है।
यहां दो मुट्ठी चावल के साथ दीक्षा दी जाती है इस दौरान रुद्राक्ष जैसी एक माला पहननी होती है।
साधक को रोज मंत्रों का जाप करना होता है।
इस दौरान वो काले कपड़े पहनता है और जमीन पर सोता है।
जिस किसी को यह दीक्षा दी जाती है उसे स्वामी कहा जाता है।
यानी अगर कोई रिक्शावाला दीक्षा ले तो उसे रिक्शेवाला बुलाना पाप होगा इसके बजाय वो स्वामी कहलायेगा।
इस परंपरा ने एक तरह से सामाजिक क्रांति का रूप ले लिया।
मेहनतकश मजदूरी करने वाले और कमजोर तबकों के लाखों-करोड़ों लोगों ने मंदिर में दीक्षा ली और वो स्वामी कहलाये।
ऐसे लोगों का समाज में बहुत ऊंचा स्थान माना जाता है।
यानी यह मंदिर एक तरह से जाति-पाति को तोड़कर भगवान के हर साधक को वो उच्च स्थान देने का काम कर रहा था जो कोई दूसरी संवैधानिक व्यवस्था कभी नहीं कर सकती है।
ईसाई मिशनरियों के लिये मुश्किल
सबरीमला मंदिर में समाज के कमजोर तबकों की एंट्री और वहां से हो रहे सामाजिक बदलाव ने ईसाई मिशनरियों के कान खड़े कर दिये उन्होंने पाया कि जिन लोगों को उन्होंने धर्मांतरित करके ईसाई बना लिया वो भी स्वामी अयप्पा में आस्था रखते हैं और कई ने ईसाई धर्म को त्यागकर वापस सबरीमला मंदिर में ‘स्वामी’ के तौर पर दीक्षा ले ली।
यही कारण है कि ये मंदिर ईसाई मिशनरियों की आंखों में लंबे समय से खटक रहा था।
अमिताभ बच्चन, येशुदास जैसे कई बड़े लोगों ने भी स्वामी अयप्पा की दीक्षा ली हझ।
इन सभी ने भी मंदिर में रहकर दो मुट्ठी चावल के साथ दीक्षा ली है इस दौरान उन्होंने चप्पल पहनना मना होता था और उन्हें भी उन्हीं रास्तों से गुजरना होता था जहां उनके साथ कोई रिक्शेवाला, कोई जूते-चप्पल बनाने वाला स्वामी चल रहा होता था।
नतीजा यह हुआ कि ईसाई संगठनों ने सबरीमला मंदिर के आसपास चर्च में भी मकर संक्रांति के दिन फर्जी तौर पर ‘चंद्र दर्शन’ कार्यक्रम आयोजित कराए जाने लगे।
ईसाई धर्म के इस फर्जीवाड़े के बावजूद सबरीमला मंदिर की लोकप्रियता दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ती रही थी।
नतीजा यह हुआ कि उन्होंने मंदिर में 10 से 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक को मुद्दा बनाकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाल दी।
यह याचिका कोर्ट में एक हिंदू नाम वाले कुछ ईसाइयों और एक मुसलमान की तरफ से डलवाई गई।
1980 में सबरीमला मंदिर के बागीचे में ईसाई मिशनरियों ने रातों रात एक क्रॉस गाड़ दिया था।
फिर उन्होंने इलाके में परचे बांट कर दावा किया कि यह 2000 साल पुराना सेंट थॉमस का क्रॉस है इसलिये यहां पर एक चर्च बनाया जाना चाहिये।
उस वक्त आरएसएस के नेता जे शिशुपालन ने इस क्रॉस को हटाने के लिए आंदोलन छेड़ा था और वो इसमें सफल भी हुये थे।
इस आंदोलन के बदले में राज्य सरकार ने उन्हें सरकारी नौकरी से निकाल दिया था।


केरल में
 हिंदुओं पर सबसे बड़ा हमला
केरल के हिंदुओं के लिए यह इतना बड़ा मसला इसलिये है क्योंकि वो समझ रहे हैं कि इस पूरे विवाद की जड़ में नीयत क्या है।
राज्य में हिंदू धर्म को बचाने का उनके लिये यह आखिरी मौका है।
केरल में गैर-हिंदू आबादी तेज़ी के साथ बढ़ते हुए 35 फीसदी से भी अधिक हो चुकी है।
अगर सबरीमला की पुरानी परंपराओं को तोड़ दिया गया तो ईसाई मिशनरियां प्रचार करेंगी कि भगवान अयप्पा में कोई शक्ति नहीं है और वो अब अशुद्ध हो चुके हैं।
ऐसे में ‘चंद्र दर्शन’ कराने वाली उनकी नकली दुकानों में भीड़ बढ़ेगी।
नतीजा धर्मांतरण के रूप में सामने आएगा।
यह समझना बहुत मुश्किल नहीं है क्योंकि जिन तथाकथित महिला एक्टिविस्टों ने अब तक मंदिर में प्रवेश की कोशिश की है वो सभी ईसाई मिशनरियों की करीबी मानी जाती हैं।
जबकि जिन हिंदू महिलाओं की बराबरी के नाम पर यह अभियान चलाया जा रहा है वो खुद ही उन्हें रोकने के लिये मंदिर के बाहर दीवार बनकर खड़ी हैं।
सबरीमाला पर वामपंथियों की नौटंकी अब सीमाएं लांग रही है,
रिहाना फातिमा नामक मुस्लिम महिला आज जबरदस्ती सबरीमाला मन्दिर में प्रवेश करने की नौटंकी करने आई है तथा केरला पुलिस के ढाई सौ कमांडो उसे सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं, और अयप्पा के भक्त उसके विरोध में खड़े हुए हैं,
यह रिहाना फातिमा एक घोर हिंदू विरोधी औरत है जो सोशल मीडिया पर हिंदू आस्था के प्रतीकों पर अश्लील पोस्ट डालने और अपनी स्वयं की अर्धनग्न फोटोज डालने के लिये बदनाम है,
इन क्रिस्लामो-कॉमियों ने हिंदुओं की आस्था को एक मजाक बनाकर रख दिया है, जिन लोगों को ना हिंदू धर्म में आस्था है, ना भगवान अयप्पा में, जो कि सदैव से हिंदू धर्म के विरोधी रहे हैं, और समय-समय पर सार्वजनिक रूप से सनातन मान्यताओं-परंपराओं पर कटाक्ष करते रहे हैं, उनका उपहास उड़ाते रहे हैं और उन पर अश्लील टिप्पणियां करते रहे हैं, आज वही सबरीमाला मंदिर में जबरदस्ती घुसने का प्रयास कर रहे हैं, यहां इनकी इच्छा दर्शन कि नहीं अपितु हिंदुओं के पवित्र स्थल को अपवित्र करने और हिंदुओं को नीचा दिखाने की है, यह नौटंकी अब उस स्तर पर पहुंच गई है जिसके दुष्परिणाम अत्यंत घातक भी हो सकते हैं, और संभवत ये क्रिस्लामो-कॉमी यही चाहते भी हैं,
कल्पना करिए कि मक्का मदीना में यदि इस प्रकार की नौटंकी होती, कोई भी गैर मुस्लिम वहां घुसने का प्रयास भी करता, तो सऊदी सरकार उसके संग क्या करती ?
उसी दिन उसका सर बीच सड़क पर धड़ से काट दिया जाता, या उसको जमीन में आधा गाड़ कर पत्थर मार-मार कर मार डाला गया होता, किंतु इन जिहादियों को भारत में जितनी आजादी मिली हुई है यह उसका दोहन कर रहे हैं
मैं तो भगवान अय्यप्पा के उन भक्तों को साधुवाद देता हूं जो केरल राज्य की पुलिस फोर्स, राज्य सरकार, और पूरे प्रशासन द्वारा सबरीमाला मंदिर की प्रतिष्ठा को आघात पहुंचाने के षड्यंत्र को विफल करने और सबरीमाला मंदिर की प्रतिष्ठा बचाने के लिए वीरता पूर्वक वहां खड़े होकर विरोध कर रहे हैं, किंतु ये भी सत्य है कि सहन करने की भी एक सीमा होती है, और यहां तो निरंतर ही न केवल उकसाया जा रहा है अपितु वामपंथी राज्य सरकार भी पूर्ण रूप से इस उकसावे के षड्यंत्र में सम्मिलित है।
(पोस्ट के संग रिहाना फातिमा द्वारा पोस्ट किए गए कुछ फोटो संलग्न कर रहा हूँ, जानता हूँ कि ये असभ्य व अश्लील फोटो हैं, पोस्ट करने योग्य भी नही हैं, किंतु यहां वास्तविकता समझाने हेतु ऐसा करना पड़ रहा है।)
🇮🇳Rohan Sharma🇮🇳
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हिन्दुस्तान और हिन्दुओ को चौतरफा खतरा
एक तरफ इस्लाम और दूसरी तरफ ईसाइयत तीसरी तरफ वामपंथी और चौथी ओर सेकुलर ।
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मैं प्रमुख मस्जिदों में जाकर गायत्री साधना और यज्ञ हवन करना चाहता हूं तथा प्रमुख ईसाई चर्च में जाकर भगवत गीता पर प्रवचन करना चाहता और भागवत कथा का भी आयोजन करना है ।
क्या माननीय सर्वोच्च न्यायालय में इसकी अनुमति मिलने की संभावना है ?
कृपा कर कोई माननीय अधिवक्ता बताएं तो मैं याचिका दायर करने की पहल करुं।
(संदर्भ:सबरीमाला प्रकरणमें भांति भांति की धर्म विरोधी परन्तु स्त्री देह धारिणी व्यक्तियों का प्रवेश)
रामेश्वर मिश्र पंकज
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केरल सरकार देश मे बड़े पैमाने पर धार्मिक दंगा करवाना चाहती हैं, मुस्लिम ऐक्टिवेस्ट महिला को सबरीमाला मन्दिर में प्रवेश कराने के लिए 200 पुलिसकर्मीओ की सुरक्षा दे रही हैं, मुस्लिम कबसे भगवान अयप्पा के भक्त हो गए?
यह हिन्दुओ को नीचा दिखाने की कोशिश हैं।
सबरीमाला जाने के लिये एक मुस्लिम महिला मरी जा रही है ,
मोहतरमा पहले मस्जिद मे तो जा के दिखा
Sanjay Dwivedy,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
कुर्सी मिले तो
देश को लूट डालो
न मिले ...
तो हिंदुओं में फूट डालो..//
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राफेल व S-400 दोनों की लागत 1लाख 2 हजार 4 सौ करोड़ कॉमनवेल्थ में छातो और कुर्सियों का किराय1लाख 76 हजार करोड़ फिर भी मोदी चोर है❓
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अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, ईरान, इराक, मिस्र, सऊदी अरब, मलेशिया, कश्मीर ......ये पुराने ज़माने के कैराना ही है ....,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
आखिर कॉंग्रेस को क्यूँ ???
1. वंदे मातरम से थी दिक्कत
2. सोमनाथ मन्दिर का विरोध
3. BHU मे हिन्दू शब्द से एतराज़
4. हज के लिए सब्सिडी शुरू की
5. 26/11 के पीछे हिन्दुओं का नाम लगाना
6. मंदिर जाने वाले छेड़खानी करते हैं
7. राम सेतु पर हलफनामा
8. सेना मे फूट डालने की कोशिशSanjay Dwivedy
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आर्य समाज के नाम पर  खोले लव जिहाद के दुकान
 देश की राजधानी में चल रहा है गोरखधंधा। मुस्लिम लड़के नाम बदलकर हिंदू होने का दिखावा करते हैं और  लड़की को प्यार जाल में फंसाकर उनका जीवन बर्बाद कर देते हैं। ट्रूकॉलर पर भी नंबर मुस्लिमों के नाम, फिर भी कई हिंदू लड़कियाँ हो रही शिकार, तुरन्त शादी करवाई जाती,वकील सांठगांठ से मैरिज रजिस्ट्रार से उसी दिन सर्टिफिकेट भी बनवाता ग़ाज़ियाबाद में राकेश मार्ग पर,भी "आर्य मेर्रिज bureau" jiska twitter id @aryamarriage है ये भी यही करवा रहा..लव जिहाद का अड्डा बन चुके हैं 
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विवेक ने UrbanNaxals को नंगा कर दिया,
नाना ने कट्टर राष्ट्रवाद का साथ दिया,
उन्हें टारगेट करने के लिए तनुश्री दत्ता को लाया गया !
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ज्यादातर प्राचीन मंदिरों को इस्लामिक शासकों द्वारा ध्वस्त/खंडित किया गया है, चाहे खिलजी हो यक चाहे बाबर, और सिर्फ मंदिरों को ही नही बल्कि पुस्तकालयों को भी..और ये जानते हुए भी माननीय कोर्ट राम मंदिर पर अपना फैसला नही सुना रहा, ये सिर्फ हिन्दू धर्म की नही सच्चाई की हार है..
सुप्रीम कोर्ट जिसे हम न्याय का मंदिर कहते हैं,उसका भी वोट बैंक के लिए राजनीति करण हो गया है, न्याय के मंदिर में बैठे कुछ लोग भी राजनीतिक तबके से आते हैं,Sanjay Dwivedy
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अमेरिका को दूसरा झटका
रूस से S-400 डील करने के बाद अब
अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भी ईरान से तेल आयात जारी रखेगा भारत ...//
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एक नये समाज और एक नई व्यवस्था का जन्म हो रहा है जिसकी प्रसव पीड़ा बहुतों को हो रही है

और कुछ को अभी होनी शेष है
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सबक
तमिलनाडु के तिरूनेलवेली में 14 सित. को ईस्लामियों ने गणेश प्रतिमा नष्ट कर दी , गांव के तमाम हिन्दुओं ने मुसलमानों की दुकानों से सामान लेना बन्द कर दिया , भूखे मरने लगे तो 30 सितंबर को हाथ जोड़ते हुए हिन्दुओं के पास आये और माफी मांगी।
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आगामी लोकसभा चुनाव भारत के इतिहास का सबसे प्रचंड और खतरनाक किस्म का लोकसभा चुनाव होगा ....इसमें देश के आतंरिक और बाह्य दुश्मन ऐसी ऐसी साजिशे और चाल चलेंगे कि...बड़े से बड़े देश चिंतंक और देश प्रेमी , प्राचीन किस्म के राष्ट्रवादी , यहाँ तक की संघ और अन्य हिन्दू संगठनो के सदस्यों का कपाल चटकने लगेगा ,
जातिवाद उतंड होने लगेगा .आर्थिक हितो पर खतरा दिखने लगेगा ...लेकिन इस महासमर में जो लोग देश के आतंरिक और बाह्य दुशमनो के चाल और चरित्र से पूरी गहराई और गंभीरता से परिचित होगे सिर्फ ऐसे ही लोग अडिग रहेगे ...आगामी लोकसभा चुनाव से पहले देश में बहुत खतरनाक माहौल होगा ...बड़े बड़े लोगो की निष्ठाए जर्जर होकर कापने लगेगी ...#पवन_अवस्थी.......................................
FAKE NEWS का अंबार है, Headline पढ़ कर तांडव करने से बचें,

किसी News को कम से कम 3 बार क्रॉस वेरीफाई अवश्य करें, स्पष्ट है Congress और Opposition ने लुट्येन इकोसिस्टम और बिकाऊ मीडिया के सहारे झूँठ, अफवाहों, अधूरी व भ्रामक खबरें चला चला कर Modi को हटाने की ठानी है, Cambridge Analytica का सहारा लिया जा रहा है ! बहोत से मोदी विरोधी, राष्ट्रवाद और हिंदुत्व का चोला ओढ़े भी बैठे हैं ! सावधान रहें, 2019 एक युद्ध है इसे याद रखियेगा, Modi के लिए हम भले ही इम्पोर्टेन्ट न हों पर हमारे लिए और देश के लिए Modi निश्चित रूप से इम्पोर्टेन्ट है !

Sanjeev Tripathi


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गजवा-ए-हिन्द..?
काफिर (मूर्तिपूजक, गैर-इस्लामी) को जीतने के लिए किये जाने वाले युद्ध को 'गजवा' कहते हैं और जो इस युद्ध में विजयी रहता है उसे 'गाजी' कहते हैं।
गजवा-ए-हिन्द का मतलब है कि भारत में सभी गैर-मुस्लिमों पर इस्लामिक शरिया लागू करना जिसके लिए या तो इनको मार कर खत्म करना या इनको इस्लाम स्वीकार कराना या उन्हें तब तक जिन्दा रखना जब तक ये अपनी कमाई का एक हिस्सा 'जजिया कर' के रूप में इस्लामिक सरकार को देते रहें।
गजवा-ए-हिन्द के 7 चरण हैं-
1. 'अल-तकिया' - यह वह अवस्था है जब मुस्लिम कमजोर या कम संख्या में होते हैं। इस स्थिति में काफिरों से झूठ बोलना और उन्हें धोखा देना जायज माना जाता है।
2. काफिरों के मन में भय पैदा करना।
3. हथियारों का जखीरा इकठ्ठा करना।
4. काफिरों की ताकत की थाह लेना।
5. ठिकाने या शिविर बनाना - इसके लिए बस्ती और मस्जिद का इस्तेमाल किया जाता है, जहाँ पर लोगों को इकट्ठा करना और हथियार रखना शामिल है। गतिविधि वाले शिविरों और क्षेत्रों में किसी न किसी बहाने से सभी काफिरों को भगाना भी इसमें शामिल है, ताकि संवेदनशील सूचनायें लीक न हो जायें।
6. सरकारी सुरक्षा-तंत्र को कमजोर करना।
7. व्यापक दंगे - 'गजवा-ए-हिन्द' का अंतिम पड़ाव जिसमें कम समय में अधिक से अधिक काफिरों या गैर-मुस्लिम मर्दो को मौत के घाट उतारना होता है। इस काम के लिए जेहादियों को मरने पर जन्नत में 72 युवा-सुन्दर हूरें मिलने का और जीतने पर जवान काफिर महिलाओं के साथ बलात्कार करने का लालच दिया जाता है।

ऐसा में नही, खुद इस मुल्क के मुसलमान कहते भी है और मदरसों में अपनी कौम वालों को पढ़ाते भी है..!
सेक्युलरों कभी मुस्लिम बहुल इलाकों में कुछ वक्त गुजारकर तो देखो..!
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नेहरु ने क्यों किया था बैन इस गीत को :
संभल के रहना अपने घर में छुपे हुए गद्दारों से

फिल्म : तलाक (1958)
गायक : मन्ना डे

54 वर्ष पूर्व (1958) महान राष्ट्रभक्त कवि प्रदीप ने खरे शब्दों में सीधी चेतावनी देते हुए इस अमर गीत की रचना की थी. तत्कालीन नेहरु सरकार को यह चेतावनी रास नहीं आयी थी. अतः गीत पर प्रतिबंध लगा दिया गया था.
1965 में पाक के नापाक हमले से आँखें खुली तो गीत से भी प्रतिबन्ध हटा था. सुनिए और सोचिये की आज भी कितना प्रासंगिक है यह गीत.
बिगुल बज रहा आजादी का, गगन गूंजता नारों से
मिला रही है आज हिंद की मिट्टी नजर सितारों से
एक बात कहनी है लेकिन, आज देश के प्यारो से
जनता से, नेताओ से, फौजों की खड़ी कतारों से
कहनी है इक बात हमें इस देश के पहरोदारों से
संभल के रहना अपने घर में छुपे हुए गद्दारों से
झांक रहे हैं अपने दुश्मन अपनी ही दीवारों से
संभल के रहना अपने घर में छुपे हुए गद्दारों से
ए भारत माता के बेटों, सुनो समय की बोली को
फैलाती जो फूट यहाँ पर, दूर करो उस टोली को
कभी न जलने देना फिर से, भेद भाव की होली को
जो गांधी को चीर गयी थी, याद करो उस गोली को
सारी बस्ती जल जाती है, मुट्ठी भर अंगारों से
संभल के रहना अपने घर में छुपे हुए गद्दारों से
जागो तुमको बापू की जागीर की रक्षा करनी है
जागो लाखों लोगों की तक़दीर की रक्षा करनी है
अभी बनी है जो उस तस्वीर की रक्षा करनी है
होशियार तुमको अपने, कश्मीर की रक्षा करनी है
आती है आवाज यही, मंदिर मस्जिद गुरुद्वारों से
संभल के रहना अपने घर में छुपे हुए गद्दारों से
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देश के हिन्दुओं ने "धर्मो रक्षति रक्षितः" का असली मतलब समझ लिया है अर्थात "तुम धर्म की रक्षा करो धर्म तुम्हारी रक्षा करेगा"...इसलिए हिन्दू अपने धर्म और संस्कृति को बचाने के लिए #केरल की सड़कों पर अपना विरोध व्यक्त कर रहें हैं



शहरी माओवादियों की  बस्तर में शांति यात्रा
 जब माओवाद की कमर टूटती जा रही है सुरक्षा बलों की मार से तो ये शहरी माओवादी शांति यात्रा निकाल रहे हैं 2 अक्टूबर से। ऐसी यात्राओं के बारे में सरकार में बैठे माओवादी लॉबी के लोग सरकार के अधिकारियों और मंत्रियों के मन में एक विभ्रम निर्माण करते हैं जिससे माओवादियों के विरुद्ध सर्च ऑपरेशन रुक जाए और उनके हथियार बंद दस्तों को पुनर्संगठित होने के लिए पर्याप्त समय मिल जाए ताकि वो दुबारा संगठित होकर पुनः पूरी ताकत से सुरक्षा बलों पर आक्रमण कर सकें।
 ऐसा ये प्रायः करते हैं अपने लड़ाकू संगठन को ऑक्सीजन देने की नीयत से। फिर ये हरिजनों और अदिवासियों के नाम पर इमोशनल कार्ड भी खेलते हैं जिससे इनकी फेस सेविंग हो सके और व्यापक सामाजिक सहयोग इनको मिल सके।
 यात्रा में आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, झारखंड छः राज्यों के लोग सम्मिलित होंगे। इस यात्रा में नंदिनी सुंदर जैसी खतरनाक शहरी माओवादी के साथ मनीष कुंजाम, अरविंद नेताम, वीबी चंद्रशेखरन, बसंता गोपालन, शांता सिन्हा और माओवादी पत्रकार रामशरण जोशी समेत 150 पदयात्री भी सम्मिलित होंगे। इन पदयात्रियों में माओवादी आदिवासी, गाँधीवादी, माओवाद के युवा शोधार्थी, माओवादी सामाजिक संगठन के संचालक और माओवादी पत्रकार सम्मिलित होंगे।
 लोगों को झांसा देने के लिए और संभावित पुलिस कार्यवाई न हो इस यात्रा पर इसके लिये इनलोगों ने विद्यार्थियों को भी सम्मिलित किया है और 80-82 वर्ष के बुजुर्ग गांधीवादियों को भी। पुलिस इन दोनों आयु वर्ग के लोगों को गिरफ्तार करने में असहजता का अनुभव करती है।
यात्रा का संयोजक माओवादी पत्रकार शुभ्रांशु चौधरी का कहना है- "बस्तर के जंगलों में शांति कायम हो, आदिवासियों को उनका हक मिले और नक्सलवाद का खात्मा हो। कई मंचों पर यह बात तो होती है। मगर कैसे? इसकी रूपरेखा क्या होगी? इस पर ठोस संवाद कम ही होते हैं।
अब प्रश्न उठता है बस्तर के जंगलों में अशांति फैलाया किसने? बस्तर को खून से लथपथ किया किसने? आदिवासियों को उनके हक से वंचित किया किसने? आदिवासियों के गांवों को विकसित होने से रोका किसने?  आदिवासियों के भले का काम कौन से राज्य में आज तक किया है माओवादियों ने? माओवादियों ने न केवल आदिवासियों को विकास की मुख्यधारा से दूर रखा है वरन अनेकानेक क्षेत्रों में आदिवासियों की व्यापक स्तर पर हत्या भी किया है।
 ये दुष्ट आतंक भी फैलाना चाहते हैं किंतु बिना पुलिसिया एक्शन के। ये अबतक सरकारों में लॉबी बनाकर उनके माध्यम से यह पुलिसिया कार्यवाई रुकवाते रहे हैं। किंतु भाजपा के शासनकाल में उनका यह तिकड़म काम नहीं आ रहा। और उनके खिलाफ लगातार सर्च ऑपरेशन और कॉम्बिंग ऑपरेशन चल रहा है। इनके एक एक किले दिन पर दिन ढहते जा रहे हैं। जंगल का नेटवर्क भी ध्वस्त हो रहा है और इनके शहरी माओवादी आका भी एक एक करके जेल जा रहे है।
जीएन साईबाबा जो माओवादियों का एशिया हेड हुआ करता था जेल गया और पांच लोगों के साथ आजीवन कारावास की सजा हुई उसको। हेम मिश्रा, प्रशांत राही, महेश तिर्की एवं पांडु नरौटे को प्रोफेसर जीएन साईं बाबा के साथ आजीवन कारावास हुआ। 
जीएन साईबाबा दिल्ली विश्वविद्यालय के रामलाल आंनद कॉलेज में अंग्रेजी का प्रोफेसर था। इनसे मिली जानकारी के आधार पर रोना विलसन, सुरेंद्र गाडलिंग, सुधीर धावले, सोमा सेन और महेश राउत की गिरफ्तारी हुई। इस गिरफ्तारी से प्रधानमंत्री मोदी की हत्या की माओवादी साजिश का भंडाफोड़ हुआ। इन पांचों की गिरफ्तारी से मिले इनपुट के आधार पर अभी गौतम नवलखा, सुधा भारद्वाज, पी बारबरा राव, अरुण फेरेरा एवं वर्नोन गोंजाल्विस की गिरफ्तारी हुई जिन्हें अभी हाउस अरेस्ट में रखा गया है। माओवाद के बड़े बड़े पुरोधा नप गए  जिनपर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है उनमें नंदिनी सुंदर भी एक हैं।
 इस यात्रा के झांसे में स्थानीय सरकार और पुलिस को नहीं पड़ना चाहिए। उल्टा इस यात्रा में सम्मिलित एक एक व्यक्ति का प्रोफ़ाइल बनाना चाहिए और उनको माओवादी आतंकी मानकर उनको जांच के राडार पर लेना चाहिए। उनके भाषणों को रिकॉर्ड करना चाहिए और उनके वक्तव्य को माओवादी साहित्य से तालमेल करके इनकी हिंसक माओवादी मनसा की व्यख्या करना चाहिये। कहीं दोषी सिद्ध हुए तो इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करना चाहिए।
 विगत 12 वर्षों में 2700 सुरक्षाबलों की हत्या की बात की गई इनके यात्रा वृतांत में। इसके साथ ही 9300 आदिवासियों की हत्या की चर्चा की गई है। इतने सुरक्षाबलों और इतने आदिवसियों की हत्या करने के बाद ये माओवादी शांति यात्रा की बात करते हैं तो यह सौ चूहे खाकर हज करने वाली बात हो गई। 
आतंकवादियों की शांति यात्रा, शांति वार्ता और शांति डायलॉग का कोई अर्थ नहीं है। या तो इनका इनकाउंटर होना चाहिए, इनकी गिरफ्तारी होनी चाहिए या फिर इनका सरेंडर। इन तीन के अतिरिक्त किसी चौथे विकल्प पर किसी संवाद का कोई अर्थ नहीं है।
~मुरारी शरण शुक्ल।
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आतंकवाद का धंधा...
-📌आतंकवाद केवल उन्ही देशो में होता है...जहा की जनता भेड़ हो...और नेता बिकाऊ...
📌आतंकी हमलो में केवल सामान्य लोग मरते हैं...लेकिन इसका bisness view देखे तो पैसो की बारिश होती है...
📌आतंकवादी आते नही, उनको वही के 2 न. के उच्चवर्गीय लोग बुलाते है...इसलिए तो VIP/VVIP/सेलिब्रिटी आतंकियों में इंटरेस्ट लेते हैं...
📌आतंकी हमले की प्लानिंग सेडुल, समय, जगह, मरने वाले लोग सब फिक्स किया जाता है...
इसीलिए कभी कोई VIP,VVIP,सेलिब्रिटी आतंकी हमलो में नही मरता...आतंकी हमले तभी हो सकते हैं...जब सरकार खुद चाहे... क्युकी पुलिस, आर्मी और इंटेलिजेंस के हाथ बाधना, काम में टांग अड़ना, सही ऑफिसर को मरवा देना...उनकी रिपोर्ट गायब करना,,अपने बिकाऊ लोग नियुक्त करना... ये सब केवल सम्वैधानिक पद पर बैठे नेता ही कर सकते हैं
नही तो कोई देश कैसा भी हो...वहा एक सामान्य नागरिक भी एक आतंकवादी को चीर देने का गुस्सा और दम दोनों रखता है...
👉🏻 मई 2014 में मोदी जी के PM बनने के बाद से भारत में आतंकवाद का धंधा बंद हो गया...और जो जो दो न. के उच्चवर्गीय भारतीय जनता को मरवाकर पैसे बनाते थे... वो बिलबिला गये हैं...
और किसी भी कीमत पर मोदी जी को हटाना/मरवाना चाहते हैं...
खुद सोचो ... क्या आप भेड़ हो.?. क्या आप चाहते हो.?आपके अपने लोग फिर से मरे,,,और कोई पैसे कमाए...
अब हाथ से भीख का कटोरा हटा दो... मनुष्य बनो...राष्ट्ररक्षा ही धर्मरक्षा है...भैरवी साध्वी
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Sunday, 30 September 2018


 कहानी 'शुभ्रक' की......
कुतुबुद्दीन घोड़े से गिर कर मरा, यह तो सब जानते हैं, लेकिन कैसे ? महाराणा प्रताप जी का 'चेतक' सबको याद है,लेकिन 'शुभ्रक' नहीं !
 कुतुबुद्दीन ऐबक ने राजपूताना में जम कर कहर बरपाया, और उदयपुर के 'राजकुंवर कर्णसिंह' को बंदी बनाकर लाहौर ले गया। कुंवर का 'शुभ्रक' नामक एक स्वामिभक्त घोड़ा था,जो कुतुबुद्दीन को पसंद आ गया और वो उसे भी साथ ले गया।
एक दिन कैद से भागने के प्रयास में कुँवर सा को सजा-ए-मौत सुनाई गई.. और सजा देने के लिए 'जन्नत बाग' में लाया गया। यह तय हुआ कि राजकुंवर का सिर काटकर उससे 'पोलो' (उस समय उस खेल का नाम और खेलने का तरीका कुछ और ही था) खेला जाएगा..कुतुबुद्दीन ख़ुद कुँवर सा के ही घोड़े 'शुभ्रक' पर सवार होकर अपनी खिलाड़ी टोली के साथ 'जन्नत बाग' में आया।
'शुभ्रक' ने जैसे ही कैदी अवस्था में राजकुंवर को देखा, उसकी आंखों से आंसू टपकने लगे। जैसे ही सिर कलम करने के लिए कुँवर सा की जंजीरों को खोला गया, तो 'शुभ्रक' से रहा नहीं गया.. उसने उछलकर कुतुबुद्दीन को घोड़े से गिरा दिया और उसकी छाती पर अपने मजबूत पैरों से कई वार किए, जिससे कुतुबुद्दीन के प्राण पखेरू उड़ गए! इस्लामिक सैनिक अचंभित होकर देखते रह गए..
. मौके का फायदा उठाकर कुंवर सा सैनिकों से छूटे और 'शुभ्रक' पर सवार हो गए। 'शुभ्रक' ने हवा से बाजी लगा दी.. लाहौर से उदयपुर बिना रुके दौडा और उदयपुर में महल के सामने आकर ही रुका!
राजकुंवर घोड़े से उतरे और अपने प्रिय अश्व को पुचकारने के लिए हाथ बढ़ाया, तो पाया कि वह तो प्रतिमा बना खडा था.. उसमें प्राण नहीं बचे थे। सिर पर हाथ रखते ही 'शुभ्रक' का निष्प्राण शरीर लुढक गया..
भारत के इतिहास में यह तथ्य कहीं नहीं पढ़ाया जाता क्योंकि वामपंथी और मुल्लापरस्त लेखक अपने नाजायज बाप की ऐसी दुर्गति वाली मौत बताने से हिचकिचाते हैं! जबकि फारसी की कई प्राचीन पुस्तकों में कुतुबुद्दीन की मौत इसी तरह लिखी बताई गई है।

नमन स्वामीभक्त 'शुभ्रक' को..
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महाराणा प्रताप से सम्बंधित ऐतिहासिक धरोहर मायरा की गुफाः
यह है मेवाड़ की विरासतों में शुमार मायरा की गुफा। प्रकृति ने इस दोहरी कंदरा को कुछ इस तरह गढ़ा है मानो शरीर में नाडिय़ां। इसमें प्रवेश के तीन रास्ते हैं, जो किसी भूल-भुलैया से कम नहीं। हर तरफ से सुरक्षित। यही तो कारण था कि महाराणा प्रताप ने इसे अपना शस्त्रागार बनाया था। मायरा की गुफा में अश्वशाला और रसोई घर भी है। अश्वशाला में चेतक को बांधा जाता था, इसलिए इसे आज भी पूजा जाता है। पास ही मां हिंगलाज का स्थान है। प्रकृति और इतिहास की यह विरासत अरसे से अनदेखी का शिकार है। ध्यान नहीं दिया तो यह वापस प्रकृति में ही विलीन हो जाएगी।.........हल्दी घाटी युद्ध से पहले और बाद में भी महाराणा प्रताप का शस्त्रागार और शरण स्थली, 1572 से 1597 के दौर में वीरवर प्रताप के साथ इस स्थल को पहचान मिली। यहां मां हिंगलाज का प्राचीन स्थान भी है।.., मोड़ी पंचायत (गोगुंदा) उदयपुर से दूरी, करीब 30 किमी.मायरा गुफा में स्थित रसोई संरक्षण के अभाव में प्रकृति में विलीन होती जा रही है।
महाराणा प्रताप से सम्बंधित इस ऐतिहासिक धरोहर की यह हालत चिंताजनक हैं।


क्या भारत कही गायब था?
हमें गलत क्यूं पढ़ाया जाता है कि भारत की खोज वास्कोडिगामा ने किया,
आज से लगभग ५०० साल पहले, वास्को डी गामा आया था हिंदुस्तान. इतिहास की चोपड़ी में, इतिहास की किताब में हमसब ने पढ़ा होगा कि सन. १४९८ में मई की २० तारीख को वास्को डी गामा हिंदुस्तान आया था. इतिहास की चोपड़ी में हमको ये बताया गया कि वास्को डी गामा ने हिंदुस्तान की खोज की, पर ऐसा लगता है कि जैसे वास्को डी गामा ने जब हिंदुस्तान की खोज की, तो शायद उसके पहले हिंदुस्तान था ही नहीं. हज़ारो साल का ये देश है, जो वास्को डी गामा के बाप दादाओं के पहले से मौजूद है इस दुनिया में. तो इतिहास कि चोपड़ी में ऐसा क्यों कहा जाता है कि वास्को डी गामा ने हिंदुस्तान की खोज की, भारत की खोज की. और मै मानता हु कि वो एकदम गलत है. वास्को डी गामा ने भारत की कोई खोज नहीं की, हिंदुस्तान की भी कोई खोज नहीं की, हिंदुस्तान पहले से था, भारत पहले से था, वास्को डी गामा यहाँ आया था भारतवर्ष को लुटने के लिए, एक बात और जो इतिहास में, मेरे अनुसार बहुत गलत बताई जाती है कि वास्को डी गामा एक बहूत बहादुर नाविक था, बहादुर सेनापति था, बहादुर सैनिक था, और हिंदुस्तान की खोज के अभियान पर निकला था, ऐसा कुछ नहीं था, सच्चाई ये है कि पुर्तगाल का वो उस ज़माने का डॉन था, माफ़िया था. जैसे आज के ज़माने में हिंदुस्तान में बहूत सारे माफ़िया किंग रहे है, उनका नाम लेने की जरुरत नहीं है, क्योकि मंदिर की पवित्रता ख़तम हो जाएगी, ऐसे ही बहूत सारे डॉन और माफ़िया किंग १५ वी सताब्दी में होते थे यूरोप में. और १५ वी. सताब्दी का जो यूरोप था, वहां दो देश बहूत ताकतवर थें उस ज़माने में, एक था स्पेन और दूसरा था पुर्तगाल. तो वास्को डी गामा जो था वो पुर्तगाल का माफ़िया किंग था. १४९० के आस पास से वास्को डी गामा पुर्तगाल में चोरी का काम, लुटेरे का काम, डकैती डालने का काम ये सब किया करता था. और अगर सच्चा इतिहास उसका आप खोजिए तो एक चोर और लुटेरे को हमारे इतिहास में गलत तरीके से हीरो बना कर पेश किया गया. और ऐसा जो डॉन और माफ़िया था उस ज़माने का पुर्तगाल का ऐसा ही एक दुसरा लुटेरा और डॉन था, माफ़िया था उसका नाम था कोलंबस, वो स्पेन का था. तो हुआ क्या था, कोलंबस गया था अमेरिका को लुटने के लिए और वास्को डी गामा आया था भारतवर्ष को लुटने के लिए. लेकिन इन दोनों के दिमाग में ऐसी बात आई कहाँ से, कोलंबस के दिमाग में ये किसने डाला की चलो अमेरिका को लुटा जाए, और वास्को डी गामा के दिमाग में किसने डाला कि चलो भारतवर्ष को लुटा जाए. तो इन दोनों को ये कहने वाले लोग कौन थे?
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वेटिकन देश के महाराज पोप फ्रांसिस ने अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन DC के आर्चबिशप डोनाल्ड वुर्ल का त्यागपत्र स्वीकार कर लिया। डोनाल्ड पर आरोप था कि वे जब पेनसिलवानिया के बिशप थे, तब उन्होंने बच्चों पर कामासक्त रहने वाले पादरियों से निपटने के लिए पर्याप्त कार्रवाई नहीं की थी।डोनाल्ड ने अपने बिशपिया कार्यकाल में यौन उत्पीड़न के ढेरों काण्ड सामने आने पर त्यागपत्र देने की इच्छा प्रकट की थी। पोपराज ने डोनाल्ड की ‘नेकनीयती’ की प्रशंसा करते हुए उनका इस्तीफा लिया। अमेरिकी जूरी की रिपोर्ट में रहस्योद्घाटन हुआ था कि पेनसिलवानिया कैथोलिक चर्च ने चर्चों में हजारों बच्चों के साथ कामुकुकर्मों को बरसों छिपाए रखा।



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न्यूटन_से_भी_पहले_गुरूत्वाकर्षण_बल_के_बारे_में_जानते_थे_आर्यभट्ट: पूर्व_इसरो_प्रमुख

देश के जानेमाने वैज्ञानिक एवं भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख जी माधवन नायर ने कहा है कि वेद के कुछ श्लोकों में चंद्रमा पर जल की मौजूदगी का जिक्र है और आर्यभट्ट जैसे खगोलविद् आइजैक न्यूटन से भी कहीं पहले गुरूत्वाकर्षण बल के बारे में जानते थे।

पद्म विभूषण से नवाजे जा चुके नायर सर ने कहा कि भारतीय वेदों और प्राचीन हस्तलेखों में भी धातुकर्म, बीजगणित, खगोल विज्ञान, गणित, वास्तुकला एवं ज्योतिष-शास्त्र के बारे में सूचना थी और यह जानकारी उस वक्त से थी जब पश्चिमी देशों को इनके बारे में पता तक नहीं था।


वेदों पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए नायर ने कहा कि वेदों में दी गई जानकारी ‘संक्षिप्त स्वरूप’ में थी जिससे आधुनिक विज्ञान के लिए उन्हें स्वीकार करना मुश्किल हो गया।

नायर ने कहा, ‘एक वेद के कुछ श्लोकों में कहा गया है कि चंद्रमा पर जल है, लेकिन किसी ने इस पर भरोसा नहीं किया। हमारे चंद्रयान मिशन के जरिए हम इसका पता लगा सके और यह पता लगाने वाला हमारा देश पहला है।’ उन्होंने कहा कि वेदों में लिखी सारी बातें नहीं समझी जा सकतीं क्योंकि वे क्लिष्ठ संस्कृत में हैं।


महिलाएं कैसे पा सकती हैं हनुमान जी की कृपा
शास्त्रों में वर्णित है कि चुंकि हनुमान जी समस्त महिलाओं में अपनी माता का रूप देखते हैं अत: वे नहीं चाहते हैं कि महिलाएं उनके समक्ष मस्तक झुकाए, वे स्वयं महिलाओं के सामने अपना मस्तक झुकाते हैं। हनुमान जी ब्रह्मचारी हैं। लेकिन हनुमान जन्मोत्सव पर और अन्य अवसरों पर महिलाएं इस तरह से हनुमान जी की सेवा कर कृपा पा सकती हैं।
हनुमान जी की पूजा में महिलाओं के लिए कुछ नियम हैं।
1 . महिलाएं दीप अर्पित कर सकती हैं।
2. महिलाएं गुगल की धूनी लगा सकती हैं।
3 . महिलाएं हनुमान चालीसा, संकट मोचन, हनुमानाष्टक, सुंदरकांड आदि का पाठ कर सकती हैं।
4. महिलाएं हनुमान जी का भोग अपने हाथों से बनाकर अर्पित कर सकती हैं।
5 . महिलाएं लंबे अनुष्ठान नहीं कर सकती।
6. महिलाएं रजस्वला होने पर हनुमान जी से संबंधित कोई भी कार्य न करें।
7. महिलाएं हनुमान जी को सिंदूर अर्पित नहीं कर सकती है ।
8. महिलाओं को हनुमान जी को चोला भी नहीं चढ़ाना चाहिए ।
9 . महिलाओं को बजरंग बाण का पाठ नहीं करना चाहिए।
10. महिलाओं को पाद्यं अर्थात चरणपादुकाएं अर्पित नहीं करनी चाहिए।
11. महिलाएं हनुमान जी को पंचामृत स्नान नहीं करा सकती।
12. महिलाएं वस्त्र अर्थात कपड़ों का जोड़ा समर्पित नहीं कर सकती।
13. महिलाएं यज्ञोपवित अर्थात जनेऊ अर्पित नहीं कर सकती।

Saturday, 29 September 2018

हर महीने १०-१२ बच्चियों को




आपकी सेक्यूलरिज्म का बोझ आपके बच्चे उठा रहे हैं?
यह रेहान कुरैशी है। अभी तक १०० से अधिक बच्चियों का रेप कर चुका है। हर महीने १०-१२ बच्चियों को अपनी हवस का शिकार बनाता था। मुंबई पुलिस ने इस सीरियल रेपिस्ट को पकड़ा है। यह 'रेप-जिहाद' का हिस्सा है।
आपको आश्चर्य होगा कि इस समय अनगिनत 'रेहानों' को शरण देने वाला समूचा यूरोप 'रेप-जिहाद' की चपेट में है। पाकिस्तानियों, सीरियाई शरणार्थियों आदि ने गोरों की छोटी-छोटी बच्चियों का रेप करने के लिए 'ग्रूमिंग-गैंग' बना रखा है। 'रेहानों' की शक्ल में यह 'रेप-जिहादी' भारत में भी बढ़ने का संकेत दे रहे हैं।
यह पूरी तरह से बीमार मानसिकता के लोग हैं! आप इनकी हैवानियत से वाकिफ नहीं है। इसलिए घर के बाहर या अंदर किसी भी 'रेहान कुरैशी' पर भरोसा न करें। अपने बच्चों और घर की महिलाओं के पास इन्हें फटकने न दें।
हमारे पूर्वजों ने तब पर्दा प्रथा, बाल विवाह, रात्रि विवाह अपना कर अपनी बेटियों को 'रेहानों' से बचाया था, आप जागरूकता फैला कर, इनकी किताबी सच्चाई बचपन से अपने बच्चों को बताकर, अपने घर को 'रेहानों' से महफूज बनाइए।
यदि सचमुच आप अपने बच्चों से प्यार करते हैं, उन्हें सुरक्षित रखना और देखना चाहते हैं, तो जगिए और जगाइए! अन्यथा रोते रहिएगा, क्योंकि यदि ऐसे 'रेहान' को जेहाद की बीमारी लगी है तो आपको कुछ न समझने वाली 'सेक्यूलरिज्म' की! याद रखिए आपके सेक्यूलरिज्म का बोझ आपके बच्चों को उठाना पड़ेगा!
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ब्लैकमेलिंग.....
 11 सूत्रीय मांगों को लेकर कथित किसानों का हज़ारों किसानों का जत्था अपनी मांगों को लेकर दिनाक 23 सितंबर से रवाना हुआ था...यह तथाकथित किसान हरिद्वार,रुड़की मुज़फ्फरनगर ,मेरठ होते हुए कल गाज़ियाबाद में इकट्ठे हो गए थे...और  दिल्ली कूंच की तैयारी थी... कुछ किसान नेता कह रहे थे कि वह चरणसिंह की समाधि पर पुष्प चढ़ाने जा रहे थे तो कुछ गांधी समाधि पर बैठकर सरकार को अपनी 11 सूत्री मांगे मानने के लिए विवश करेंगे. 1 अक्टूबर से मेरठ रोड, NH-24,साहिबाबाद हिंडौन ब्रिज इत्यादि को कथित किसानों ने घेर लिया था...रोडवेज बसें और ट्रैफिक का सत्यानाश हो गया...लाखों लोग इस अराजकता से दुखी और प्रताड़ित है !!

खबरे योगी जी तक पहुचीं,योगी जी ने गाज़ियाबाद पहुचकर आंदोलन के नेताओं को बुलाया ,बात सुनी मगर यह मांगे नहीं, 2019 को लेकर खुली ब्लैक मेलिंग हैं...
पिछले वर्ष ही 36000 करोड़ का किसानों का ऋण माफ किया गया,अब नए और शेष ऋणों की माफी भी चाहिए...प्रत्येक किसान को 100 % फ्री बिजली चाहिए...MSP, लागत से नए फार्मूले के हिसाब से ढाई गुना चाहिए... प्रत्येक किसान जो अपने खेत मे काम करेगा... वह एक मजदूर के रूप में मनरेगा के तहत मजदूरी भी सरकार से लेगा...दस साल से ज़्यादा पुराना ट्रैक्टर प्रयोग करेगा...फसल बीमा भी और फ़ायदेदार होना चाहिए...किसान को पेंशन भी मिले... इन किसानों में अधिकतर अजित सिंह समर्थक... भाजपा विरोधी और सेकुलर-मुस्लिम गठजोड़ वाले लोग सक्रिय हैं...

सुबह वही हुआ जो सेकुलर,केजरीवाल और कांगी चाहते हैं.. किसानों ने 100 से ज़्यादा ट्रैक्टरों से बैरिकेडिंग लगभग तोड़ दी...पुलिस ने बल प्रयोग न के बराबर किया,सिर्फ वाटर कैनन का प्रयोग हुआ,उससे किसानों पर कोई फर्क नहीं पड़ा...प्रत्येक किसान लाठी डंडों से लैस था..कथित किसानों ने लाठी डंडों से पुलिस की पिटाई शुरू कर दी....कुछ किसान तो वाकई अखाड़े में जैसे लाठी चलाई जाती है,वैसे लाठियां भांज रहे थे...जब पथराव शुरू हुआ तो पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी और बेहद हल्का लाठी चार्ज किया...पैरों को निशाने पर लेकर चंद रबड़ की गोलिया चलाईं....मीडिया के भेड़िए तैयार थे....चीखना शुरू कर दिया कि "अन्नदाता पर लाठीचार्ज किया जा रहा है" .....कुत्तों को हड्डी मिल गई....

 इस सरकार ने जो किया है वह अप्रतिम है...सारी योजनाएं किसानों को केंद्र में रखकर बनाई गईं हैं...ग्रामीण क्षेत्रों में कम से कम 16 घंटे की फुल वोल्टेज के साथ बिजली आपूर्ति हो रही है... उज्ज्वला योजना,प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वास्थ्य बीमा ,यूरिया की शानदार सप्लाई ,बीज और स्वाइल टेस्टिंग इत्यादि जैसी योजनाएं किसानों को केंद्र में रखकर बनाई गईं हैं...36000 करोड़ एक प्रदेश के लिए छोटी रकम नहीं होती ,उसे माफ़ किया गया....अहसान फरामोशी की हद होती है..
 आंदोलन के नेता राकेश टिकैत सरकार 7 बड़ी मांगे माने जाने से संतुष्ट दिखे.....मगर आंदोलन में घुसे हुए 'सेकुलर तत्व' हिंसा भड़काने पर आमादा

Pawan Saxena

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महाभारत से पहले कृष्ण भी गए थे दुर्योधन के दरबार में. यह प्रस्ताव लेकर, कि हम युद्ध नहीं चाहते. तुम पूरा राज्य रखो. पाँडवों को सिर्फ पाँच गाँव दे दो.. दुर्योधन कितना अनरीजनेबल, कितना अन्यायी था. वे पाँडवों को सिर्फ यह दिखाने गए थे, कि देख लो बेटा...युद्ध तो तुमको लड़ना ही होगा...हर हाल में. तुम कितना भी संतोषी हो जाओ, कितना भी चाहो कि घर में चैन से बैठूँ, दुर्योधन तुमसे हर हाल में लड़ेगा ही.
लड़ना या ना लड़ना तुम्हारा ऑप्शन नहीं है...
फिर भी बेचारे अर्जुन को आखिर तक शंका रही...
कृष्ण ने सत्रह अध्याय तक फंडा दिया... फिर भी शंका थी..
ज्यादा अक्ल वालों को ही ज्यादा शंका होती है...
दुर्योधन को कभी शंका नही थी,उसे हमेशा पता था कि उसे युद्ध करना ही है...उसने गणित लगा रखा था.
हिन्दुओं को भी समझ लेना है... conflict होगा या नहीं, यह आपका ऑप्शन नहीं है...
आपने तो पाँच गाँव का प्रोपोजल भी देकर देख लिया...
देश के टुकड़े मंजूर कर लिए, हर बात पर विशेषाधिकार देकर देख लिया. हज के लिए सबसीडी देकर देख ली, उनके लिए अलग नियम कानून बनवा कर देख लिए..
आप चाहे जो कर लीजिए, उनकी माँगें नहीं रुकने वाली. उन्हें सबसे स्वादिष्ट उसी गौमाता का माँस लगेगा जो आपके लिए पवित्र है, उसके बिना उन्हें भयानक कुपोषण हो रहा है. उन्हें सबसे प्यारी वहीं मस्जिदें हैं, जो आपके मंदिरों को तोड़ कर बनी हैं. उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी उसी आवाज से है जो मंदिरों और पूजा-पंडालों से है.
यह माँगें गाय को काटने तक नहीं रुकेंगी...
यह समस्या मंदिरों तक नहीं रहने वाली,
यह आपके घर तक आने वाली है...
आपकी बहू-बेटियों तक जाने वाली है...
आज का तर्क है, तुम्हें गाय इतनी प्यारी है तो सड़कों पर क्यों घूम रही है, हम तो काट कर खाएँगे.
कल कहेंगे, तुम्हारी बेटी की इतनी इज्जत है तो वह घर से क्यों निकलती है, हम तो उठा कर ले जाएँगे.
उन्हें समस्या गाय से नहीं है, तुम्हारे अस्तित्व से है.
तुम जब तक हो, उन्हें कुछ bना कुछ प्रॉब्लम रहेगी.
इसलिए अर्जुन, और डाउट मत पालो...
कृष्ण घंटे भर की क्लास बार-बार नहीं लगाते..देवेश कुमार त्यागी