Sunday, 9 December 2018

mediya



चोर विदेश भाग जाए तो मोदी जी जिम्मेदार,
पकड़ लाया जाए तो बचाने को पूरी कांग्रेस तैयार
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हज़ारो रुपये का क्रिसमस ट्री और जोकरों वाला कपड़ा खरीदने से अच्छा है
किसी गरीब के लिए सर्दी में कम्बल और जैकेट खरीद कर दिया जाए।- Manish Tripathi‎ 
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सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहने वाले और राष्ट्र स्वाभिमान दल के संस्थापक दीपक शर्मा ने हिन्दुओं के आपसी बंटवारे को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है, दीपक शर्मा ने कहा – छोटी छोटी बातो पे बंट जाते है, इसलिये हिन्दू 100 करोड़ होकर भी कट जाते है.,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
EVM में गड़बड़ नहीं है, ये नतीजों से साबित हुआ। राफेल में घोटाला नहीं था, ये अदालत ने साबित किया।तो अब अगले चुनाव मे मुददा क्या ..?
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मैं रोज इसलिए हिन्दुओं को जगाता हूँ क्यूकी मेरी नई पीढ़ी मुझसे ये ना पूछे जब देश बर्बाद हो रहा था तब आप झक मार रहे थे क्या..?
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राफेल डील में कोई गड़बड़ी नही : SC
काश ये फैसला 1महीने पहले दिया होतादेर से दिया गया न्याय... सबसे बड़ा अन्याय है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
बुलंदशहर में गौ हत्या का नैरेटिव सेट करके मीडिया इतनी बड़ी घटना को छुपाना चाहती है
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21 साल मीलॉर्ड बनके कितने केस निपटाए होंगे
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घृणा होती है ऐसे लोगों से जो वोट कांग्रेस,SP,BSP,
AAP को देते हैं ..
और राममंदिर निर्माण क्यों नहीं हुआ ये #BJP से पूछते हैं.
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राहुल गांधी सिर्फ हिन्दुओ को मूर्ख बना पाया..
तेलंगाना के मुस्लिमों और मिजोरम के ईसाइयों को नही.
-Pradeep Tamhankar
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नटवरलाल भी पानी मांग गया होगा नेशनल हेरॉल्ड घोटाले की थीम के आगे....बगैर चवन्नी खर्च किये, 5000 करोड़ की प्रॉपर्टी....गज़ब है रे-- अरून शुक्ला
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Kailashkumar Agarwal
18 घंटे
रायता देखो जिस जेफ कुरियन ने किरचन मिशेल का वकील होने का दावा किया था वो भूतपूर्व जज जोसफ कुरियन का बेटा ही है
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मोदी और योगी शुद्ध घी के समान हैं, जिसे हजम हुआ वो भक्त बन गए, नहीं हुआ वो कुत्ते बनकर भौं भौं कर रहे हैं
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जब अमितशाह को जेल भेजा गया तब बदले की राजनीति नहीं थी लेकिन जब रॉबर्ट वाड्रा के दफ़्तर पर ईडी के रेड हुई तो बदले की राजनीति हो गयी

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फारुख अब्दुल्ला का विवादित बयान, भगवान राम आकर बेरोजगारी नहीं दूर करेंगे,

साले सुअर की तरह बच्चे पैदा करोगे तो रोजगार कहाँ मिलेगाBanty Jha

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हिजड़ा वो नई जो लिपस्टिक लगा कर ताली ठोकता है
हिजड़ा वो है जिसके सामने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे और वो ताली ठोकता है-- ‎Sanjay Singhaniya‎
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एक लड़की केदारनाथ दर्शन करने जाती है""
वहां मुस्लिम कुली से उसको प्यार हो जाता है""

लड़की का बाप कहता है 'ये रिश्ता हुआ तो प्रलय आ जायेगा ""
लड़की कहती है फिर तो मैं प्रार्थना करती हूं कि प्रलय आये बादल फट जाता है""

पूरा केदारनाथ डूब जाता है और वो मुस्लिम कुली दूसरे किसी मदद करने की बजाय सिर्फ हीरोइन को बचाता है ""

और लड़की के बाप को दिव्य ज्ञान प्राप्त होता है
कि प्रेम में जाती धर्म नहीं होता और हमारा देश गंगा जमुनी तहजीब वाला देश है जैसे दिल्ली के अंकित सक्सेना को ज्ञान प्राप्त हुआ था""

वो अपनी लड़की का निकाह उस कुली से करवा देता है ""

ये कहानी है फ़िल्म केदारनाथ की ""

फ़िल्म से एक सीख और मिलती है कि
हिन्दुओ ने अपनी लड़की का निकाह मुसलमानो से नहीं कराया तो प्रलय आएगा""

बॉलीवुड वाले भांड क्या गुल खिला सकते हैं समझ से बाहर है""

केदारनाथ त्रासदी में करीब एक लाख लोग मारे गए कइयों के तो शव भी नहीं मिले आज तक
पूरा देश खून के आंसू रोया था, जैसे अपना कोई सगा वाला मरा हो ""

इतनी भयानक घटना पर फ़िल्म भी बनाई
तो उसमें भी लव जिहाद का जहर घोल दिया""

केदारनाथ पर फ़िल्म ही बनानी थी तो सेना ने अपनी जान पर खेलकर कैसे लोगों की जान बचाई ये बताते ""

सेना का पराक्रम बताने की बजाय एक मुस्लिम कुली को महान बता दिया""

ये वो फिल्मकार हैं जो पैसों की खातिर अपनी बहन बीवी बेटी भी सुला देंगे किसी के भी साथ।""

क्या फिल्म का नाम केदारनाथ रखकर भी ऐसी घटिया फिल्म बनायीं जा सकती है"

ऐसी फिल्में बना रहे हैं सिर्फ हिन्दूओं को ठेस पहुंचाने के लिए कुछ भी करना पड़ा कर रहे हैं और हम हींदू अपने ही देश में अपनी मझाक उडते फील्म मै बडी शान से जाते हैं देखने" "
अगर असली हिन्दू हो और अपने संस्कारों को बचा बाचाना चाहते हो तो बहिष्कार करो ऐसी बाहियात फिल्म का..
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जिस कौम को अपने असली शुभचिंतक की जानकारी ना हो और जिसे अपने दुश्मनों की पहचान ना हो उसका सर्व विनाश स्वयं ईश्वर भी नही रोक सकता ......ऐसी कौम अपने दुश्मनों के हाथो भीषण रूप से उत्पीडित होकर या तो गुलाम बनती है या उसका सर्व विनाश ही होता है ...पवन अवस्थी
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जिन्हे BJP पसंद नही उन्हे कांग्रेस की जीत का जश्न मनाने का हक है, पर पाक किस बात की खुशी मना रहा है यह पूछना हर भारतीय का हक है..? - ‎सुरेश परमार‎ 
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3 राज्यो में मुख्यमंत्री सिर्फ पंप्पू चुने
पर उसके अनुसार...तानाशाह मोदी है...Manish Soni
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जहां भी गलत हो रहा हो वहां ताकत के साथ आवाज उठाएं बीजेपी
आप तीन राज्यों में बीजेपी की हार को चाहे जिस भी तरह से देखते हो ....हो सकता है आपको लगे कि इन 3 राज्यों में हिंदुत्व खतरे में आ गया है इन  तीन राज्यों में अब इस्लामिक ताकतें मजबूत होंगी ईसाई मिशनरियों भी सोनिया गांधी के इशारे पर धर्म परिवर्तन में जुड़ेंगे
इन सब को रोकने के लिए इन तीनों राज्यों के बीजेपी कार्यकर्ताओं और जीते हुए विधायकों को सड़क और विधानसभा में अपनी आवाज उठानी चाहिए.. क्योंकि इन तीनों राज्यों में बीजेपी की भी अच्छी खासी सीटें आई हैं इसलिए बीजेपी जहां भी गलत हो रहा हो वहां ताकत के साथ आवाज उठाएं
 एक शुभ संकेत यह भी मिल रहा है कि केंद्र सरकार अब अपनी योजनाओं में बदलाव करने जा रही है और बदलाव की शुरुआत भी हो चुकी है -Jitendra Pratap Singh
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वाजपेई जी  भारत के सबसे सफल प्रधानमंत्री थे, जनता ने उनके शासन की कद्र नहीं की...//
2004 में जब वाजपेयी ने मनमोहन सिंह को सत्ता सौंपी तब अर्थव्यवस्था बहुत मजबूत थी। जीडीपी ग्रोथ रेट 8 फीसदी से अधिक था, महंगाई दर 4 फीसदी से कम थी और विदेशी मुद्रा भंडार अपने उच्चतम स्तर पर था, लेकिन कमबख्त जनता को विकास से क्या लेना था, वाजपेई को सत्ता से हटा दिया।
 बाद के १० साल में 
तथाकथित बड़े अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह के शासन में महंगाई दर ११% पहुंच गयी, जीडीपी हांफने लगी और विदेशी मुद्रा भंडार का क्षरण हुआ, देश से १२ लाख करोड़ लूटा गया और अमीरों को ३२ लाख करोड़ का ऐसा लोन दिया गया, जो बाद में NPA हो गया। देश की अर्थव्यवस्था बदहाल हो गयी,..... कांग्रेसी लूट-तंत्र के कारण...
२०१४ में नरेंद्र मोदी आए
 महंगाई दर ३% पर ले आए, विदेशी मुद्रा भंडार में भारत आजतक की सबसे मजबूत स्थिति में है, जीडीपी दर ७ के पार है। भारत दुनिया की पांचवीं अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है, लेकिन तब भी गारंटी नहीं कि २०१४ में मोदी जीत ही जाएं।
आप अभी ही देखिए
 कांग्रेस के शासन में मप्र बिमारू राज्य था, शिवराज के १३ साल के शासन ने इसे देश का सबसे बड़ा कृषि ग्रोथ राज्य बना दिया। लेकिन फिर से मुफ्तखोरों ने कांग्रेस को मौका दे दिया। कृषि लोन माफी के झूठ का परिणाम देखिए, इस विसंगति के कारण कांग्रेस आने के बाद दो किसान आत्महत्या कर चुके हैं। इसके बावजूद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी यही लोन माफी वाला झुनझुना और झूठ २०१४ में बेचकर सत्ता प्राप्ति की कोशिश में जुटे हैं।
यदि अभी भी आंख नहीं खुली तो आप सब तय मानिए, आप पिछड़ने के लिए ही पैदा हुए हैं। देश को केंद्र में रखकर सोचिए। भाजपा की हर सरकार के केंद्र में देश होता है, और कांग्रेस के केंद्र में व्यक्ति। देश रहेगा, तभी व्यक्ति बचेगा। कुछ लोगों का व्यक्तिगत हित इस सरकार में नहीं सधा है, इसलिए वो इसे हटाने के लिए फेक न्यूज के व्यापार में उतरे हुए हैं, जिसमें कांग्रेस के साथ काफी बड़ी संख्या में तथाकथित राष्ट्रवादी और हिंदूवादी भी कदमताल कर रहे हैं। आंखें खोलिए। देश बचाना है।
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 योगी आदित्यनाथ ने ऐलान किया है कि प्रयागराज में अकबर के किले के अंदर स्थित सरस्वती कूप लोगों के दर्शन के लिए खोला जाएगा...//
वहाँ पर एक सरस्वती प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उनकी प्रतिमा के साथ भारद्वाज ऋषि की प्रतिमा भी लगेगी। सरस्वती कूप 435 वर्षों से अकबर किले में बंद है और अब यह चार शताब्दी के बाद खोला जाएगा.
■1932 में उठी थी अक्षयवट खोलने की माँग -
 अकबर के किले में सरस्वती कूप के साथ ही अक्षयवट भी है। इसे खोले जाने की माँग 1932 में पहली बार महामना मदन मोहन मालवीय ने उठाई थी। उसके बाद से लगातार कई बार यह माँग उठती रही।
प्रयागराज में 15 जनवरी से कुंभ का आरंभ हो रहा है। कुंभ की तैयारियों के बीच सीएम योगी ने यह बड़ा ऐलान लखनऊ में आयोजित युवा कुंभ में किया है। युवा कुंभ के दौरान उन्होंने कहा कि कुंभ के पहले यहाँ सरस्वती की मूर्ति स्थापित हो जाएगी और कुंभ में आने वाले लोग यहाँ आकर दर्शन कर सकेंगे.
मुख्यमंत्री ने पूछा कि मुगल शासक अकबर ने वहाँ किला बनवाया था .तो क्या इसलिए लोग वहाँ पूजा अर्चना नहीं कर सकते हैं?
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जनसंख्या विस्फोट से देश गृहयुद्ध की ओर
कम क्षेत्र होने के बावजूद इतनी बड़ी आबादी का ही परिणाम है कि हम वास्तव में कीड़े मकोडों की जिन्दगी जी रहे हैं। अशिक्षा, बेरोजगारी, गरीबी, बीमारी, अपराध इस सबके पीछे भयंकर बढती आबादी ही है जबकि हम हिन्दू (सिख, जैन, बौद्ध) तो स्वंय ही एक बच्चे पर आकर टिक रहे हैं फिर भी देश जनसंख्या विस्फोट के मुहाने पर बैठा है। इसका कारण क्या है ?
इसका साफ कारण है इस्लाम की विस्तारवादी नीति, भारत पर फिर से कब्जा करने की नीयत से विशेष रणनीति के तहत अपनी आबादी बढाना ! जनसंख्या नियंत्रण कानून ही एकमात्र उपाय है
अभी मुस्लिम संख्या में हमसे कम हैं परन्तु वो सारा मंजर बड़ी पैनी दृष्टि से देख रहे हैं और अभी पूरी तरह खूंखार नहीं है, मारकाट पर उतने उतारू नहीं है कि कब्जा करने की नीयत से सम्पूर्ण भारत पर हमला कर दें।उन्हें पता है कि हम लोगों की जनसंख्या वृद्धि दर धीरे धीरे नीचे आती जा रही है और तमाम नसीहतों/कोशिशों के बावजूद अब बढनी संभव ही नहीं हो पा रही है
जबकि 5 वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों मे मुस्लिम बच्चों का प्रतिशत लगभग 40% हो चुका है। जिस दिन वो संख्या में हमारे बराबर हो गये उस दिन या तो हम सबका धर्म परिवर्तन होगा और जो नही मानेंगे वो कत्ल कर दिये जायेंगे!
1947 में आजादी के समय वह केवल 24% थे, जब उन्होंने जबरन हमारे हलक में हाथ डालकर हमसे पाकिस्तान ले लिया था, आज का बॅगलादेश ले लिया था और आधा कश्मीर ले लिया था और बचे खुचे कश्मीर से 1990 में सभी हिन्दूओं को भगा दिया था और जो न भागे उनकी बहन बेटियों के साथ दुराचार करके मार दिया गया...!
हम  विकास, भ्रष्टाचार, ग्लोबल वार्मिंग,पर्यावरण को मुख्य समस्या मान बैठे हैं वो  एक सूत्री योजना पर काम कर रहे हैं  संख्याबल में हमारे नजदीक आना।
 सख्त जनसंख्या नियंत्रण कानून ही एकमात्र उपाय है।और कोई रास्ता है ही नहीं उनको या उनकी संख्या को नियंत्रित करने का
मिथिलेश नाथ त्रिपाठी द्वारा भारत रक्षा मंच
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मोदी ने हिंद महासागर में बसाए
भारत के दो ‘सीक्रेट आइलैंड’
ये एक ऐसी खबर है जिसके बारे में हमारे देश में ज्यादातर लोगों को पता नहीं है। दरअसल यह भारत का एक सीक्रेट मिशन है, जिसने चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मन देशों की नींद उड़ा रखी है।
भारत की समुद्री सीमा से दूर हिंद महासागर में 2 फौजी अड्डे स्थापित किए जा चुके हैं। मतलब यह कि भारतीय सेना ने इन आइलैंड पर अपना मिलिट्री बेस बनाया है। दुनिया के नक्शे में इन दोनों द्वीपों की लोकेशन इतनी जबर्दस्त है कि चीन और पाकिस्तान परेशान हैं।
इनके नाम हैं- अगालेगा और अजंप्शन आइलैंड। इन द्वीपों पर भारतीय सेना आधुनिक हथियारों और साजो-सामान के साथ मौजूद है। बेहद खुफिया तरीके से यहां भारतीय सेना खुद को मजबूत बनाने में जुटी है।
अगालेगा आइलैंड पर तो भारत ने बाकायदा एयरपोर्ट भी बनाया है। जबकि अज़ंप्शन आइलैंड पर आने जाने के लिए हवाई पट्टी बनाई गई है। इन दोनों आइलैंड्स को भारत को सौंपे जाने पर चीन और यहां तक कि भारत के वामपंथी पत्रकारों ने बहुत अड़ंगेबाजी की।
इस सैनिक समझौते के खिलाफ कई झूठी खबरें उड़वाई गईं। आज इन दोनों द्वीपों पर क्या चल रहा है इसका बाकी दुनिया सिर्फ अंदाजा लगा सकती है। क्योंकि यहां भारतीय सेना के अलावा किसी को जाने की छूट नहीं है।
नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद संभालने के फौरन बाद जिन देशों की यात्रा की थी, उनमें मॉरीशस और सेशेल्स भी थे। सरकार ने औपचारिक तौर पर बताया कि ये दौरा दोनों देशों के आपसी रिश्ते सुधारने और काले धन पर बातचीत के लिए है। लेकिन असली मकसद कुछ और ही था।
इस यात्रा में मोदी ने सेशल्स और मॉरीशस को इस बात के लिए मना लिया कि वो अपने 1-1 द्वीप भारत को लीज़ पर देंगे। इसी दौरे में शुरुआती समझौते पर दस्तखत भी कर लिए गए।
अगालेगा आइलैंड मॉरीशस में पड़ता है, जबकि अजंप्शन द्वीप सेशेल्स देश का हिस्सा है। हिंद महासागर में ये वो लोकेशन थी जिसके महत्व की चीन को भी कल्पना नहीं थी। डील पर दस्तखत होने के कुछ दिन बाद जब मामला मीडिया में आया तो भारत में चीन के लिए प्रोपेगेंडा करने वाले पत्रकार बौखला गए...
यही वो समय था जब मीडिया ने पीएम मोदी की विदेश यात्राओं की खिल्ली उड़ानी शुरू कर दी। क्योंकि उन्हें लग गया था कि पीएम मोदी इन यात्राओं के जरिए कुछ ऐसा कर रहे हैं जो वो नहीं चाहते कि मीडिया को पता चले।
इन दोनों द्वीपों के लिए की गई संधियों को रद्द कराने के लिए वहां के विपक्षी दलों के जरिए भी दबाव बनाए गए। इन्हीं का नतीजा था कि अज़ंप्शन आइलैंड के लिए आखिरी समझौते पर दस्तखत जनवरी 2018 में हो सका।
= अगालेगा आइलैंड मॉरीशस के मुख्य द्वीप से 1100 किलोमीटर दूर उत्तर यानी भारत की तरफ है। ये सिर्फ 70 वर्ग किलोमीटर दायरे में है....
= सेशल्स का अज़ंप्शन आइलैंड वहां के 115 द्वीपों में से एक है। ये सिर्फ 11 वर्ग किमी की जमीन है, जो कि मेडागास्कर के उत्तर में हिंद महासागर में है।
भारत अरब देशों से कच्चा तेल खरीदता है। ये तेल हिंद महासागर के रास्ते ही आता है। कच्चा तेल जिस रूट से आता है वो उन जगहों से काफी करीब है जहां पर चीन बीते कुछ साल में अपना दबदबा बना चुका है। वो इन जगहों पर बैठे-बैठे जब चाहे भारत की तेल की सप्लाई लाइन काट सकता है।
भारत को समंदर में एक ऐसी लोकेशन की जरूरत थी...
जहां से वो न सिर्फ अपने जहाजों को सुरक्षा दे सके, बल्कि जरूरत पड़ने पर चीन की सप्लाई लाइन पर भी वार कर सके। ये वो रणनीति थी जिसकी कल्पना चीन भी नहीं कर सका था। उसे भरोसा था कि भारत की सरकारें हिंद महासागर पर कब्जे की चीन की रणनीति को कभी समझ नहीं पाएंगी।
चीन के रणनीतिकार अपने इस प्लान को ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ (मोतियों की माला) कहते हैं। ये वो रणनीति है जिससे उसने एक तरफ भारत को दबोच लिया था साथ ही अमेरिका के लिए भी मुश्किल हालात पैदा कर दिए थे।
पीएम मोदी ने इस खतरे को भांपते हुए चीन के जवाब में ‘स्ट्रिंग ऑफ फ्लावर्स’ (फूलों की माला) नाम से रणनीति बनाई। इसी के तहत सबसे पहले अज़म्प्शन और अगलेगा आइलैंड को लीज़ पर लिया गया।
ये दोनों द्वीप आज चीन की आंखों में किरकिरी बने हुए हैं। क्योंकि वहां से भारत ने पूरे हिंद महासागर पर घेरा बना लिया है। फिलहाल इन द्वीपों पर बुनियादी ढांचा विकसित करने का काम तेजी से चल रहा है। दोनों द्वीपों पर कुछ लोग रहते भी थे, जिन्हें भारतीय सेना ने ही दूसरी जगहों पर घर बनाकर बसा दिया है। अब इन दोनों द्वीपों पर भारतीयों के अलावा किसी को जाने की इजाज़त नहीं है।
इस पूरे रीजन के समुद्र पर निगरानी
पिछले दिनों अमेरिका ने भारत को 22 गार्जियन ड्रोन देने पर रजामंदी जताई है, इन ड्रोन से इस पूरे रीजन के समुद्र पर निगरानी की जाएगी। अमेरिका भी चाहता है कि हिंद महासागर के इस इलाके में चीन को बहुत ताकतवर न होने दिया जाए। लिहाजा वो भारत के साथ सहयोग कर रहा है
भारत से दूर दुनिया भर में मिलिट्री बेस बनाने का आइडिया पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का था। उनकी सरकार के वक्त इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू भी किया गया था। लेकिन इसी दौरान 2004 में वो चुनाव हार गए। इसके बाद आई मनमोहन सरकार ने इस पूरे प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
10 साल तक इस पर एक भी काम आगे नहीं बढ़ा। 2014 में जब नरेंद्र मोदी की सरकार बनी तो उन्होंने सबसे पहले जो फाइलें क्लियर कीं, उनमें से एक इसके बारे में भी थी। वाजपेयी की सोच थी कि दुनिया में ताकतवर मुल्क बनना है तो कुछ ऐसा करना होगा जिससे कोई दुश्मन आंख उठाकर देखने की भी हिम्मत न करे।
अमेरिका, रूस, ब्रिटेन जैसे देशों ने पूरी दुनिया में ऐसे द्वीपों पर मिलिट्री बेस बना रखे हैं। वाजपेयी के वक्त ही ताजिकिस्तान के फारखोर में भारत ने अपना पहला एयरफोर्स बेस स्थापित किया था। लेकिन हिंद महासागर पर दबदबे का उनका सपना अधूरा रह गया।



अगालेगा और अज़ंप्शन आइलैंड पर फिलहाल सिर्फ भारतीय सेना को जाने की छूट है। दोनों जगहों पर जा चुके नौसेना के एक जवान ने बताया था कि ये दोनों द्वीप बेहद खूबसूरत हैं। चारों तरफ नीले समुद्र से घिरे इन द्वीपों पर अब तक बहुत कम आबादी रही है। सेना की कोशिश है कि यहां की कुदरती खूबसूरती को बनाए रखते हुए यहां के बुनियादी ढांचे का विकास किया जाए।

मिलिट्री सैटेलाइट GSAT-7A का लॉन्च.अंतरिक्ष से बढ़ाएगी वायु सेना की ताक़त और मारक क्षमता
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कांग्रेसी यह मानते हैं कि जब तक सेना सरकार के साथ है,
वे सत्ता नही पा सकते अतः सदा सेना को ही गाली देते रहते हैं


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बथुआ अमृततुल्य ओषधि हैं और इसकी सहज उपलब्धता हमारे लिए किसी वरदान से कम नही हैं....साथ ही आदरणीय Praveen Sharmaजी भी बथुआ को बड़ा पसंद करते है, उनके आदेश पर यह पोस्ट पुनः प्रस्तुत कर रहा हूँ.....।
बथुआ को बाथरो,क्षारपत्र,यवशाक, चिल्लीशाक, वेतोशाक आदि नामों से जाना जाता हैं... इसका वैज्ञानिक नाम Chenopodium album हैं... बथुआ एक अति गुणकारी साग है,,सर्दियों में इसकी सब्जी हर घर मे बनती हैं, सब्जी में यदि थोड़ी से छाछ या दही मिला ले तो फिर स्वाद का आनंद ही कुछ और होता हैं,इसके पराठे भी बड़े स्वादिष्ट लगते है.....।
बथुआ रबी की फसल का पौधा है. अक्सर ये गेहूं,चना,आलू की फसल के साथ खर-पतवार के रूप में उगता है...इसे गरीबो का साग भी कहा जाता है.…प्राचीनकाल से इसे सब्ज़ी के रूप में प्रयोग किया जा रहा है.....इसकी पत्तियों को दाल के साथ,या अकेला ही,या फिर आलू के साथ मिलाकर सब्ज़ी के रूप में प्रयोग किया जाता है....
बथुआ का स्वाभाव गर्म है, ये सर्दियों में शरीर को गर्म रखता है. नज़ला ज़ुकाम और खांसी से बचता है.....दाल के साथ सब्ज़ी बनाने पर ये दालों की खुश्की काम कर देता है. ....इससे दाल ज़्यादा पाचक बन जाती है और नुकसान नहीं करती......।
इसमें रेचक गुण है, ये पेट को ढीला करता है.....बथुए में पाए जाने वाले आवश्यक मिनरल विशेषकर लोहा नया खून बनाने में मदद करता है.....बथुए की सब्ज़ी एक सम्पूर्ण भोजन है....इसके रेशे आंतो की सफाई कर देते हैं. जिन लोगों को पुराने कब्ज़ की समस्या है वह अगर बथुए का नियमित इस्तेमाल करें तो कब्ज़ की समस्या से छुटकारा मिल सकता है.....।
बथुआ का सेवन पथरी से निजात दिलाता हैं इसमें क्षार की मात्रा अधिक होती हैं....।
इसके काले बीज प्रोटीन,फास्फोरस,कैल्शियम और पोटेशियम से प्रचुर होते है... ।
बथुआ साग ब्लड सर्कुलेशन को बढाता है. जिनका ब्लड प्रेशर कम रहता है उनके लिए अच्छी दवा है....सर्दियों में इसका नियमित इस्तेमाल हार्ट-अटैक के खतरे से बचाता है....
जो लोग ल्यूकोडर्मा या सफ़ेद दाग की समस्या से परेशान हैं उनके लिए बथुआ एक गुणकारी ओषधि है.
आयुर्वेद में इसे त्रिदोषनाशक बताया गया है ...बालों के प्राकृतिक रंग के लिए यह आंवले की तरह गुणकारी है ....इसे खाने से दाँतों की समस्या भी दूर होती है और पायरिया में आराम मिलता है तथा मुंह की बदबू कम होती है.....
बथुआ का साग चर्म रोग नाशक और कृमिनाशक होता है...नीम की पत्तियों के साथ इसकी पत्तियाँ खाने से रक्त शुद्ध होता है तथा पीलिया में गिलोय के साथ इसका रस सम मात्रा में लाभ पहुंचाता है. मासिक अनियमितता में इसके बीज और सोंठ का चूर्ण गर्म पानी के साथ लाभ देता है... प्रसव के उपरांत संक्रमण में 15 दिनों तक बथुआ,अजवायन ,गुड़ और दसमूल का सेवन लाभकारी होता है ...एनीमिया में इसके जूस के आश्चर्यजनक लाभ है ,किन्तु गर्भावस्था में इसके बीजों का सेवन हानिकारक हो सकता है...
बथुआ की एक और प्रजाति Chenopodium giganteuam जिसके डंठल लाल गुलाबी होते है,जिसे बड़ा बथुआ कहा जाता हैं ..हिमालय के क्षेत्रों में यह अधिक पाया जाता है और इसका पौधा 8 फिट तक लंबा होने से इसे ट्री स्पिनाच भी कहते है...।
#बथुआ का प्रोटीन चार्ट देखे तो इसके शाक में दैनिक आवश्यकता का 96%विटामिन सी, 73%विटामिन ए,37%B2,37%मैगनीज,31%कैल्शियम,21%B6,14%B1,10%फास्फोरस ,मैग्नीशियम और पोटेशियम,9%आयरन और 8% B3 और B9 और् 5%जिंक होता है तथा प्रति 100 ग्राम 4.2ग्राम प्रोटीन और 4 ग्राम डाइटरी फाइबर होता है ।पोषक तत्वों की ऐसी संतुलित मात्रा बहुत ही कम शब्जियों में होती है .... यह सेहत की दृष्टि से बहुत ही पौष्टिक है... ।
तो मित्रो इस सर्दी में आप भी अधिक से अधिक बथुआ साग का उपयोग कीजिये...वैसे आपके क्षेत्र में इसे किस नाम से जाना जाता हैं..!!!!
बथुआ के बारे में यह बहुत कम है इससे जुड़ी ओर भी कोई जानकारी हो तो अवश्य साझा करें.. ।।
नंदकिशोर प्रजापति कानवन9893777768

चित्र में ये शामिल हो सकता है: पौधा और प्रकृति

चित्र में ये शामिल हो सकता है: पौधा, फूल, प्रकृति, बाहर और पाठ

चित्र में ये शामिल हो सकता है: पौधा, प्रकृति और बाहर
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न्यूयार्क के डा. कल्यू ने एक विचित्र तथ्य का उद्घाटन किया है कि पौधे मात्र विचारों को ग्रहण करने में ही नहीं मनुष्य के कृत्यों की गवाही देने में भी समर्थ हैं। एक प्रयोग में उन्होंने दो पौधों को पोलीग्राफ से जोड़ा। छह व्यक्तियों को कमरे में बुलाकर छह मिली हुई कागज की पर्चियाँ रखीं तथा उनमें से प्रत्येक को कहा कि एक पर्ची उठा लें तथा जैसा निर्देश पर्ची पर लिखा है उसका बिना बताये पालन करें। उन पर्चियों में से एक पर लिखा था कि अवसर देखकर चुपके से कमरे में रखे पौधों में से एक को नष्ट कर दें। यह जानकारी किसी को नहीं थी कि उक्त निर्देशों वाली पर्ची किसके पास है। जिस व्यक्ति को वह पर्ची मिली उसने चुपके से एक पौधे को नष्ट कर डाला।
एक सप्ताह बाद डा. ने उन छह व्यक्तियों को पुनः बुलाया तथा शेष एक पौधे के सामने से गुजारा। पाँच व्यक्ति पौधे के सामने से होकर निकल गये पर गैल्वेनोमीटर में कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। छठे व्यक्ति के आते ही यंत्र की सुई तेजी से घूमने लगी तथा पोलीग्राफ पर तरंगें अंकित होने लगीं। डा. क्ल्यू ने उस व्यक्ति से पूछताछ की तो मालूम हुआ कि उसने ही एक पौधे को नष्ट कर डाला था। गैल्वेनोमीटर की सुई घूमने का यही कारण था।
एक दूसरे प्रयोग में उन्होंने ड्रेकेनामे सेंजियाना नामक पौधे की एक शाखा को पोलीग्राफ लाइटिरेक्टर के तार से जोड़ दिया। पौधे की जड़ में थोड़ा पानी डाला तथा गल्वेनोमीटर में हल्की विद्युत तरंगें छोड़ दी। गैल्वेनोमीटर की सुई में गति आरम्भ हो गयी। यह जानने के लिए पौधे के ऊपर सुखद प्रतिक्रिया हुई या यह मात्र एक संयोग था। उन्होंने पौधे की एक शाखा को जलाने का विचार किया। एकाएक उनकी दृष्टि पौधे से जुड़े गैल्वेनोमीटर पर पड़ी। वेक्स्टर यह देखकर विस्मित रह गये कि पौधे को जलाने का विचार आते ही गैल्वेनोमीटर की सुई विपरीत दिशा में नीचे ग्राफ पर ऊर्ध्ववक्र रेखा में तेजी से गति करने लगी। यह प्रतिक्रिया विचारों से हुई अथवा किन्हीं और कारणों से। यह परखने के लिए वेकस्टर ने माचिस की एक तीली जलायी तथा पौधे की ओर इस प्रकार बढ़ाया जैसे जलाने जा रहे हों, पर उनके मन में पौधे को जलाने का कोई विचार न था। जो पौधा पहले जलाये जाने के भय की प्रतिक्रिया गैल्वेनोमीटर में तेजी से दे रहा था विचार के उलटते ही शान्त पड़ गया। वेक्स्टर ने निष्कर्ष निकाला कि मन में चलने वाले विचारों को पौधा पकड़ने में पूर्णतया सक्षम है।
अतः सब पेड़ लगाओ,पेड़ बचाओ।,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
नौकरी छोड़खोल दी कंपनी, आज 100 करोड़ है टर्नओवर
झारखंड की ऑसम डेयरी का नाम न केवल देश में फैला हुआ है बल्कि अब वह विदेश में भी अपनी पहचान बनाने के लिए पूरी तरह से प्रयास कर रहा है। देश की बढ़ती हुई कारोबारी कंपनियों में इसका नाम शुमार है।
कम समय में इसने मेहनत कर जो मुकाम हासिल किया है वह काबिले तारीफ है लेकिन इसके पीछे की कहानी और भी ज्यादा दिलचस्प है। इससे निर्माण की कहानी सभी को कुछ नया करने की प्रेरणा देती है। सबका हौसला बढ़ाती है। आइए आपको बताते हैं इसकी कहानी के बारे में।
अभिषेक राज, अभिनव शाह, हर्ष ठक्कर और राकेश शर्मा नामक 4 दोस्तों ने मिलकर साल 2012 में इसकी शुरुआत की थी। चारों दोस्तों ने अपनी शानदार कॉरपोरेट जॉब्स छोड़कर इसे बनाने का फैसला किया था। सभी ने मिलकर अपनी आय एक जगह लगा दी और गायें खरीदी। शुरुआत में 40 गायें खरीदी गईं लेकिन परेशानी ने उनका पीछा नहीं छोड़ा।उनकी 26 गायें संक्रमण के कारण मर गईं और यह कारोबार के लिए एक बड़ा नुकसान था। हालांकि इसके बाद भी चारों ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने एक बार फिर से कारोबार में निवेश किया और धीरे-धीरे गाड़ी पटरी पर लौटने लगी।मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ऑसम डेयरी का टर्नओवर 5 साल के अंदर 100 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
झारखंड में ऑसम डेयरी आज 19 जिलों में चलती है और 140 डिस्ट्रिब्यूटर्स के साथ काम कर रही है। इसके अलावा 3000 से ज्यादा रीटेलर्स भी कंपनी के साथ जुड़े हैं। चार दोस्तों द्वारा शुरू की गई इस कंपनी में आज लगभग 270 लोग काम करते हैं और कंपनी की सक्सेस देखने लायक है।अभिषेक ने सबसे पहले डेयरी के बिजनेस के बारे में अपने दोस्तों से बात की थी। डेयरी शुरू करने से पहले वह लोग एक मल्टी नेशनल कंपनी में काम करते थे। उनका सालाना पैकेज लगभग 40 लाख रुपये के आसपास था लेकिन बढ़िया पैसे मिलने के बावजूद वह लोग अपनी नौकरी छोड़कर कारोबार में लग गए।कारोबार शुरू करने के लिए चारों दोस्तों ने अलग अलग 1 करोड़ रुपये लगाए।
शुरुआत में 1 एकड़ जमीन खरीदी गई। वहीं करीब 30 लाख रुपये डेयरी फार्म बनाने में खर्च हुए। कारोबार के लिए न सिर्फ पैसा खर्च किया गया बल्कि सही ट्रेनिंग भी हासिल की। अभिनव शाह एक महीने का डेयरी फार्मिंग कोर्स करने के लिए कानपुर गए। इससे उन्हें जानवरों की स्वच्छता और स्वास्थ्य के बारे में अच्छी जानकारी हासिल हुई। साल 2022 तक कंपनी ने 500 करोड़ का कारोबार करने टारगेट रखा है।
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रामसेतु श्रीराम सेना का ही बनाया हुआ है। नासा ने इसे माना है कि यह पुल लगभग 1750000 वर्ष पुराना है। अध्ययन से यह भी पता चला कि उस समय श्रीलंका में इंसान रहते थे। 300 साल पहले तक इस पुल का प्रयोग होता रहा था। भारत और श्रीलंका के लोग इसी पुल के जरिए एक दूसरे के यहां जाते थेराम जी का पृथ्वी पर अवतार और उनके कठोर वनवास को संभवत: उत्तर और दक्षिण भारत को एकजुट करने के ऋषि अगस्त्य द्वारा शुरू किए गए महत्वाकांक्षी अभियान में अहम् भूमिका निभाने के तौर पर देखा जा सकता है। राम जी अयोध्या के सूर्यवंशीय इक्ष्वाकु राजघराने के उत्तराधिकारी थे, जो उस समय का सबसे महत्वपूर्ण शहर था। वे ऋषि विश्वामित्र के साथ उन राक्षसों का वध करने निकलते हैं, जो ऋषियों के यज्ञ में हमेशा विघ्न डालते और उन्हें अपवित्र कर देते। उसके बाद वे मिथिला (सुदूर बिहार/नेपाल में स्थित) पहुंचते हैं, जहां सीता का स्वयंवर हो रहा है। सीता, जिसका शाब्दिक अर्थ हल-रेखा है, खेत में हल से बनी क्यारी में पाई गई थी। इस कारण उन्हें भूमिजा यानी भूदेवी का अवतार माना गया है।
राम और सीता महल के सुख-वैभव का त्याग करके वनवास के लिए प्रस्थान करते हैं। गंगा को पार करके प्रयाग, चित्रकूट, दंडकारण्य, पंचवटी, लेपाक्षी, किष्किंधा, रामेश्वरम् पहुंचते हैं, जहां से राम और उनके नए अनुयायी श्रीलंका तक लंबा पुल बनाते हैं। इसी के जरिए वे रावण तक पहुंचकर सीता को छुड़ाने के लिए युद्ध करते हैं। इस परिप्रेक्ष्य से अध्ययन करने पर राम की कर्मभूमि आम मान्यता से अलग भारत के दक्षिणी क्षेत्र में विकसित होती दिखाई देती है। उनकी कहानी यहीं आगे बढ़ती है और यहीं वे पहली बार हनुमान से मिलते हैं। दिव्य युगल का आकर्षण जल्दी ही पूरे भारतवर्ष पर छा जाता है और उनके साथ हनुमान के अलौकिक व्यक्तित्व का प्रभाव भी समग्र भारत पर छा जाता है।
राम की यात्रा वास्तव में भारत के सांस्कृतिक मानचित्र का प्रतीक है। मिथिला, जहां गौतम ऋषि (जिनकी पत्नी अहिल्या को वे शाप-मुक्त करते हैं) और राजा जनक (ऋषिराज) से उनकी मुलाकात और संवाद होता है। निर्वासन काल के दौरान अत्रि ऋषि और उनकी पत्नी अनुसूया, भारद्वाज और मातंग ऋषियों से उनकी मुलाकात; अयोध्या लौटने पर राजा दशरथ की सेवा करने वाले महान ऋषि वशिष्ठ का राम के प्रधानमंत्री के तौर पर उन्हें दिशा-निर्देश देना। राम की जीवनयात्रा में संपूर्ण भारत के विद्वानों की अद्भुत भागीदारी दिखाई देती है।राम के नए भक्तों की आस्था तले तैयार रामसेतु उत्तर से आए अपरिचित के प्रति नए अनुयायियों की गहरी भक्ति का प्रतीक है जो अपनी पत्नी के वियोग में व्यथित अपने भाई के साथ उनके बीच पहुंचे हैं। राम अपने वनवास के दौरान रास्ते में आने वाली किसी भी बस्ती में अपने मत का प्रचार करते नहीं दिखाई देते; लेकिन उनसे मिलने वाले लोग उनके दिव्य स्वरूप का साक्षात्कार कर भावविभोर होकर स्वयं उनका अनुसरण करने लगते हैं। इसलिए रामसेतु पर उठाए जा रहे सवाल राम के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगाने जैसा है। यही कारण है कि कांग्रेस की अगुआई वाली संप्रग सरकार ने तब दावा किया था कि रामचरित एक साहित्यिक कथा थी और भारत-श्रीलंका के बीच कोई मानव निर्मित पुल नहीं। यह शर्मनाक है।
13वीं से16वीं सदी के दौरान राज करने वाले जाफना के तमिल राजा खुद को सेतु कवलर - रामेश्वरम् और आसपास के समुद्रों का संरक्षक कहते थे। दक्षिण भारत में राम को मुख्य रूप से कोदंड-राम, धनुषधारी राम, जिन्होंने युद्ध में अपने शत्रुओं का विनाश किया था, के रूप में पूजा जाता है।
राम सेतु ने इन क्षेत्रों में आने वाले विदेशियों को बहुत आकर्षित किया। 11वीं शताब्दी में अल-बरूनी ने उल्लेख किया है, ''सेतुबंध का अर्थ है महासागर पर बना पुल है। यह दशरथ के पुत्र राम का पुल है, जिसे उन्होंने महाद्वीप से लंका के महल तक तैयार किया था। वर्तमान में इस जगह पर अलग-अलग पहाड़ों की श्रृंखलाए हैं, जिनके बीच समुद्र लहरा रहा है।'' 13वीं सदी में वेनिस से आए व्यापारी मार्कों पोलो ने राम से संबंधित एक पुल 'सेतुबंध रामेश्वर' का भी उल्लेख किया है।
कुछ सौ साल पहले तक यूरोप से आने वाले शुरुआती यात्रियों ने समुद्र में ज्वार के उतरने पर रामसेतु को श्रीलंका तक एक भूमि पुल के रूप में काम करते देखा था। 1893 के मद्रास प्रेसीडेंसी गजट में दर्ज मंदिर के अभिलेखों और यात्रा-वृतांतों में बताया गया है, ''1799 तक रामसेतु प्रयोग में था, लेकिन उसके बाद समुद्र की धाराओं और ज्वारों के स्वरूप में आए बदलाव से उस पुल का प्रयोग मुश्किल हो गया।''
18वीं शताब्दी में सर विलियम जोन्स ने अध्ययन किया था कि देवनागरी लिपि का प्रभाव काश्गर और खुतन (चीन) की सीमा से लेकर रामसेतु और सिंधु से स्याम (थाईलैंड) की नदी तक था। राम द्वारा सीता जी को रावण के चंगुल से बचाने के अभियान के बारे में जोन्स कहते हैं, ''उन्होंने जल्द ही समुद्र पर चट्टानों के एक पुल का निर्माण किया, जिसके बारे में हिंदुओं का कहना है कि वह अब भी मौजूद है, और शायद यह उन्हीं चट्टानों की श्रृंखला है, जिसे मुगलों या पुर्तगालियों ने एक बेतुका नाम एडम्स ब्रिज (इसकी पहचान राम के नाम से जुड़ी रहनी चाहिए) दे दिया है।''
दिलचस्प बात यह है कि सिंहली लोग मानते हैं कि मगध राजा अशोक के पुत्र महेन्द्र और बेटी संघमित्रा पुल से ही श्रीलंका आए थे।
नासा उपग्रह से ली गई तस्वीरें सागर तल पर अलग तरह की गोलाकार संरचना वाला करीब 17,50,000 वर्ष पुराना टूटा हुआ पुल दिखाती हैं। यह ऐसी चीजों से बना है, जो इसे प्राकृतिक नहीं, किसी के द्वारा बनाए जाने का संकेत देती हैं। पुरातात्विक अध्ययनों ने पुष्टि की है कि श्रीलंका में लगभग 17,50,000 साल पहले इंसानी बसावट के पहले संकेत मिलते हैं और पुल की आयु भी करीब उतनी ही है। मार्च, 2012 में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने सुझाव दिया कि सेतु को उसके अतुल्य ऐतिहासिक, पुरातात्विक और विरासत मूल्य के कारण राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाए।
रामायण के युद्धकाण्ड के 85 श्लोकों में सेतुबंध के निर्माण का वर्णन है। इसके अलावा, महाभारत में भी श्रीराम के आदेश पर नल सेतु (विश्वकर्मा के पुत्र नल द्वारा निर्मित सेतु) को हमेशा सुरक्षित रखने का उल्लेख है। इस प्रकार, पुल के नष्ट होने का कोई ऐतिहासिक संदर्भ नहीं है, हालांकि नौवहन और परिवहन मंत्री के तौर पर द्रमुक नेता टी़ आऱ बालू ने संप्रग सरकार के कहने पर सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष एक हलफनामा प्रस्तुत किया। कालिदास के रघुवंश में पहाड़ों के सेतु का उल्लेख है। स्कंद पुराण, विष्णु पुराण, अग्नि पुराण और ब्रह्म पुराण भी राम सेतु के निर्माण का उल्लेख करते हैं।
मन्नार की खाड़ी से एक व्यापक सांस्कृतिक मूल्य जुड़ा है, जहां हजारों तमिल हिंदू अपने पूर्वजों का तर्पण (वार्षिक श्राद्ध अनुष्ठान) करने जाते हैं, साथ ही एक अविभाज्य जलराशि के तौर पर यह भारत और श्रीलंका के तटों के लिए भी बहुत अहम् है। भूगर्भीय संरचनाओं के साथ की गई कोई भी छेड़छाड़ सागरीय धाराओं में उथल-पुथल मचा सकती है और उष्ण-धाराओं के प्रवाह क्षेत्रों को प्रभावित कर तटीय और जलीय संसाधनों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
मन्नार की खाड़ी और पाक जलडमरूमध्य में लगभग 3,600 दुर्लभ प्रजातियों का समृद्ध और लुप्तप्राय समुद्री जीवन वास करता है, जिनमें स्पर्म व्हेल, डॉल्फिन, डुगोंग, समुद्री कछुओं और समुद्री घोड़ों समेत असंख्य वनस्पतियां और जीव मौजूद है। साथ ही कोरल की 117 प्रजातियां (सिर्फ भारतीय जल क्षेत्र में), मछली और कड़े खेल वाले जीवों की कई प्रजातियां भी वास करती हैं।

1989 में भारत सरकार ने यूनेस्को के मनुष्य एवं जैव विविधता कार्यक्रम के अंतर्गत 10,500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को समुद्री जैव विविधता संरक्षित क्षेत्र के रूप में अधिसूचित किया। इसमें मूंगे की चट्टानों के बहुतायत वाले 21 द्वीप हैं। हमारे पांच तटीय जिले इसी समुद्री संसाधन पर निर्भर हैं, और इस नाजुक पारिस्थितिकी को अगर कोई भी नुकसान पहुंचा तो वन्यजीवों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण से संबद्ध संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन होगा। 12 मई, 2007 को चेन्नै में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में सेतु समुद्रम् परियोजना के वैज्ञानिक और भारतीय भूगर्भीय सर्वेक्षण के पूर्व निदेशक एस़ बद्रीनारायणन ने कहा, ''यह एक स्थापित तथ्य है कि मूंगे की चट्टान केवल स्वच्छ और अप्रदूषित पानी में ही बन सकती है और इन समुद्री जीवों को छोटे-छोटे ठोस आधार की जरूरत होती है। मूंगे केवल ठोस चट्टानों में ही उगते हैं। इन संरचनाओं के नीचे भुरभुरी समुद्री रेत की उपस्थिति स्पष्ट रूप से यह बताती है कि ये प्राकृतिक नहीं हैं और उन्हें कहीं और से लाया गया है। साफ है यह इंसानी गतिविधि का ही संकेत देती है, जिन्होंने सामूहिक रूप से काम करके रेत वहां पहुंचाई होगी। यह एक प्राचीन सेतु है और इंजीनियरिंग की दृष्टि से एक चमत्कार।'' (ओडिशा रिव्यू, जून -2012)
राम का कालखंड ऐतिहासिक युग का हो या प्राक्-ऐतिहासिक का, रामसेतु इस बात का जीता-जागता ठोस प्रमाण है कि ईश्वर पृथ्वी पर अपने राम अवतार में अयोध्या से रामेश्वरम् और इसके आगे वर्तमान श्रीलंका तक चलकर गए, जहां मंदोदरी और विभीषण ने उनके दिव्य स्वरूप को पहचाना और सीता की ससम्मान वापसी की बात रावण से की। इस पुल के अवशेष दुनिया के प्राचीनतम सेतु और हिंदू विरासत को संजोए हुए हैं और इन्हें हमेशा संरक्षित रखना हमारा कर्तव्य है। दोनों देशों की सरकारों को चाहिए कि वे समुद्री क्षरण के कारण हुए नुकसान की मरम्मत के लिए एक संयुक्त परियोजना चलाएं, ताकि कम ज्वार के इस पुल को पार करना संभव हो सके, जैसा करीब 300 साल पहले तक होता था।
(लेखिका वरिष्ठ स्तंभकार हैं। यह आलेख मीनाक्षी जैन द्वारा लिखी पुस्तक 'राम और अयोध्या' (प्रकाशक : आर्यन बुक्स इंटरनेशनल, 2013) पर आधारित है)

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1962 की लड़ाई का सुपरमैन, जिसने अकेले चीन की आर्मी को रोक कर अरुणाचल प्रदेश को बचाया था
भारत माँ के गर्भ से पैदा होने वाले वैसे तो लाखों जवान हैं, लेकिन कुछ जवान ऐसे भी होते हैं, जो हमेशा के लिए लोगों के दिलों में बस कर रह जाते हैं. उन्ही में से उत्तराखंड की धरती पर जन्मे वीर शहीद जसवंत सिंह रावत का नाम भी एक है. 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध में जसवंत सिंह अकेले ऐसे जवान थे जो लगातार 72 घंटों तक बॉर्डर पर तैनात थे और देश के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे थे. अकेले ही 300 चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतारने वाले और फिर शहादत प्राप्त करने वाले जसवंत सिंह रावत आज भी अमर हैं.
आज भी आत्मा है जीवित
कहा जाता है कि आज भी उनकी आत्मा देश के पूर्वी सीमा बल पर मौजूद रहती है. ऐसे में जब कोई सैनिक ड्यूटी करते वक़्त सो जाता है तो उसको जसवंत सिंह रावत के थप्पड़ का अनुभव महसूस होता है और वह तुरंत उठ जाता है. जसवंत सिंह की सेवा में 24 घंटे सेना के पांच जवान खड़े रहते हैं. यही नहीं बल्कि हर सुबह और शाम खाने की थाली जसवंत सिंह की प्रतिमा के पास रखी जाती है और हर रोज़ उनकी यूनिफार्म को प्रेस करके रखा जाता है. सैनिकों का यह दावा है कि जब भी वह यूनिफार्म प्रेस करके रखते हैं तो बाद में उस यूनिफार्म पर अपने आप सिलवटें पड़ी नजर आती हैं. मानो जैसे कि खुद जसवंत सिंह ने उस यूनिफार्म को पहन लिया हो.
सुबह होते ही दी जाती है बेड टी
मिली जानकारी के अनुसार जसवंत सिंह रावत को हर सुबह सूरज की पहली किरण निकलते ही बेड टी दी जाती है और फिर नौ बजे उन्हें नाश्ता पहुंचाया जाता है. जसवंत सिंह के बूट पालिश करके रखे जाते हैं जैसे कि वह आम आफरों की तरह ही सेना का हिस्सा हो. शहादत के बाद भी जसवंत सिंह को एक जिन्दा सैनिक सम्मान देने के पीछे की वजह उनकी भटकती हुई आत्मा को माना जाता है. आज उनकी मृत्यु को भले ही 50 वर्ष बीत चुके हैं लेकिन उनकी आत्मा चीन बॉर्डर पर सदैव फर देती है. बता दें कि जसवंत सिंह को उनकी बहादुरी के लिए मरने के बाद महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था.
चीनी सैनिकों ने काट दिया था जसवंत सिंह का सिर
1962 में चीन और भारत के बीच हुए यद्ध में शहीद हुए जसवंत सिंह के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. उन्होंने 72 घंटे तक लगातार चीनी फ़ौज का अकेले सामना किया था और लगभग 300 सैनिकों को वहीँ मारा गिराया था. यह वाक्य 17 नवंबर है जब चीनी सेना तवांग से आगे निकलते समय नूरानांग पहुँच गई थी. चीनी सेना इस अकेले भारतीय सैनिक की बहादुरी से काफी सहम चुकी थी क्यूंकि जसवंत सिंह ने लगातार तीन दिनों तक उनकी नाक में दम कर रखा था.
इसलिए चीनी सेना ने साजिश रची और जसवंत सिंह को बंधक बना लिया. जब उन्हें जसवंत सिंह से कुछ ना मिला तो उन्होंने इस वीर सपूत को टेलीफ़ोन की तार से फंदा बना कर मार दिया था और उनका सिर काट कर अपने साथ ले गए थे. आज उनकी शहादत को कईं साल हो गए हैं लेकिन उनके नाम के आगे शहीद या स्वर्गीय शब्द नहीं लगाया जाता बल्कि उन्हें आज भी एक आम सैनिक की तरह देखा जाता है.
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अब CBI में हुये ड्रामे को इस घटना से जोड़ लीजिये विशेषकर वो जो मोदी को गरिया रहे थे कि CBI जैसी संस्था की विश्वसनीयता खत्म हो रही है और मोदी कुछ नहीं कर रहे। आलोक वर्मा जो CBI निदेशक थे उन पर सबसे बड़ा आरोप क्या था ??? यही ना कि पद का दुरुपयोग करते हुये वो रॉ जैसी एजेंसी को खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं।

बड़ी ख़ूबसूरती से पर्दे के पीछे रहते हुए आलोक वर्मा को पैदल कर दिया गया और उनके आकाओं को CBI की सूचनाएं और रॉ का मूवमेंट मिलना बंद हो गया। वो चाल समझे ही नहीं, उलझे रहे कोर्ट कचहरी में और इधर चुपचाप खेल हो गया किसी को कानों कान खबर नहीं हुई। एक बात आप जान लीजिए सऊदी अरब ने खुशी से नहीं, मजबूरी वश, बड़ा रोते गाते दिया है मिशेल को भारत की सरकार को क्योंकि उसकी शहजादी की जिंदगी रॉ के हाथ मे थी और दूसरी ये कि आलोक वर्मा के रहते मिशेल को भारत लाना असम्भव था। हालांकि इस पूरे खेल में मोदी को भी

अपना एक मोहरा पिटवाना पड़ा लेकिन राजनीति में ये सब चलता रहता है। वो प्यादे पर खुश होते रहे इधर मोदी ने उनका वजीर काट दिया। आगे की भी सुन लीजिये कि कांग्रेस अब किसी भी हालत में राव को CBI निदेशक के
पद से हटवाना चाहेगी, सीधे तो हटा नहीं पायेगी इसलिये सहारा कोर्ट का लिया जायेगा। देख लीजियेगा बाकी है बहुत कुछ लेकिन उसे सार्वजनिक करना ठीक नहीं

अब कौन है मिशेल ये समझे ...

#मिशेल_क्रिश्चियन 1

नाम तो आप सबने सुना ही होगा ! मशहूर और अरबपति आर्म्स डीलर , ग्रेट ब्रिटेन का नागरिक उस ग्रेट ब्रिटेन का जो अपने नागरिकों की तो छोड़ो अपने यहाँ छुपे दूसरे देशों के भगोड़े आर्थिक अपराधियो को भी किसी देश को , विशेषकर अगर वो भारत जैसा तीसरी दुनिया का मुल्क है प्रत्यापित नही करता ,बहुत से उदहारण है जिनमे कैसेट किंग गुलशन कुमार के कातिल संगीतकार नदीम से लेकर विन चड्डा और हिन्दुजा बंधुओं से लेकर हाल के विजय माल्या ललित मोदी, नीरव मोदी ,माहुल चौकसी शामिल हैं

जरा सोचो फिर उसने UAE से अपने नागरिक मिशेल क्रिश्चियन को क्या आराम से प्रत्यापित हो जाने दिया होगा ? बिल्कुल भी नही उसने अपने सारे घोड़े खोल दिये थे और दुबई या UAE की सरकार भी बाकी अरबी मुल्कों की तरह पश्चिम की बात टालने का मादा नही रखती पर फिर ऐसा क्या हुआ कि उसे मिशेल क्रिश्चियन को अनमने मन से भारत को सौपना पड़ा !

दरअसल ये भारत की मौजूदा सरकार की जबरदस्त कूटनीतिक जीत है बिल्कुल नाटकीय अंदाज में क्रियान्वित की गई योजना के तहत
संयुक्त अरब अमीरात के अमीर जो वहाँ के प्रधानमंत्री भी है, शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकदूम की बहुत सारी बेगमो में से जो अलग अलग देशों की है में से एक बेगम अल्जीरिया से है
क्रमशः जारी

#मिशेल_क्रिश्चियन 2
तो भाई लोगो अमीरात के राजा या पिरधान (प्रधान) मंत्री की जो कई बेगमो में से एक अल्जीरियाई बेगम साहिबा थी उनसे एक 33 /34 वर्षीय शहजादी है जिसका नाम शेख लतीफा बिन अल मकदूत है शादी हुई नही या करी नही अल्लाह जाने , शौक सारे नवाबी थे जो अरबी राजघराने के बच्चो के होते हैं

माने उड़ने उड़ाने डूबने उतरने सब मे माहिर इन्ही सब शोको के चलते ये राजकुमारी साहिब फ़्रेंच खुफिया एजेंसी के हनी ट्रैप में फंसी और फ्रेंच खुफिया एजेंसी के एक जासूस हेर्व ज्युबेर्ट ने शहजादी साहिबा को अच्छे से हैंडल किया गहरे समुन्दर में गोताखोरी सिखाने के नाम पर साथ साथ शहजादी साहिबा को नवाबी शौक भी था तो उनकी एक गर्ल फ्रेंड भी थी और वो थी फिनलैंड की सीक्रेट एजेंट टीना जहलेलियन जो उसकी मार्शल आर्ट ट्रेनर बन कर आयी थी

उड़ते उड़ाते शहजादी साहिबा को अब राज महल में घुटन महसूस होने लगी अब उसे इस्लामी कानून वाहियात और जाहिल लगने लगा अब वो उड़ जाना चाहती थी इस बद्दू और जाहिल धर्म ( ये उसकी सोच थी मैं तो सब धर्मों का आदर करता हूँ 👏) कि बेड़ियां तोड़ कर बॉय फ्रेंड और गर्ल फ्रेंड दोनो की नेमत अब उसके पास थी
उसकी इन हरकतों का पता जब शाही परिवार को चला तो शहजादी पर कुछ पाबंदियां लगा दी गयी पर जिसको एक बार उड़ान भरने का चस्का लग गया हो वो कहा काबू आने वाला है

तो जो हाथ लगा वो मालमत्ता समेट शहजादी साहिबा एक दिन अमीरात सल्तनत से रफूचक्कर हो गयी पहले सड़क के रास्ते ओमान और फिर वहाँ से एक आलीशान याच में सवार हो मौज मस्ती करती कराती हिन्दमहासागर में बढ़ चली अपनी मंजिलें मकसूद की और.
पर यहाँ भारत यानी इंडिया में इस बार पूरे आंख कान वाली सरकार और बहुत सालो बाद अपनी पुरानी रंगत जिसके लिए वो पूरी दुनिया मे जानी जाती थी , में लौट आयी गुप्तचर एजेंसीया थी

हमारी एजेंसीया भी इस शाहजादी पर नजरें रखे हुए थी और टीना मैडम को अपने पाले में कर चुकी थी
टीना ने ही उन्हें भारत के स्वर्ग गोवा चलने और वही राजनीतिक शरण लेने की सलाह दी
गोवा आते ही टीना फुर्र और शाहजादी अपने फ्रेंच जासूस बॉय फ्रेंड के साथ भारतीय एजेंसी के हत्थे चढ़ गई

फिर शुरू हुआ इस सारे खेल के रचयिता माननीय अजित डोभाल सर का खेल

ब्रिटेन के लाख विरोध के बाद भी अमीरात ने मिशेल क्रिश्चयन को भारत को सौप दिया बिना किसी हील हुज्जत के क्योकि उसे अपने घर की इज्जत यानी शाहजादी चाहिए थी किसी भी कीमत पर
भारत को मिशेल क्रिश्चन मिला मेरे कुछ दोस्त कल हंस रहे थे कि इसे कुछ नही होना हां ये सच्च है इसे कुछ नही होगा ये बाइज्जत ब्रिटेन भेजा जाएगा पर इस हाथ दे और उस हाथ ले वाले फॉर्मूले के तहत , अब समझे कुछ क्यो विजय माल्या थर थर कांप रहा है ?

इसे कहते हैं एक तीर से कई शिकार कॉन्ग्रेस के कई हैवीवेट नॉक आउट होने तय है और मिशेल के बदले माल्या या नीरव मोदी या माहुल चौकसी या ललित मोदी या फिर सारे ??

#पटवारी

Sunday, 2 December 2018

patr-vishshesh




पांच राज्यों के असेम्बली चुनावो के परिणाम के बाद, न्यू यॉर्क टाइम्स ने एक आलेख लिखा, जिसका यथासम्भव हिंदी अनुवाद किया है
भारतीयों द्वारा वोट देने का पैटर्न एक दम साफ है उससे वर्तमान सरकार को सबक सीखना चाहिये...
- भारतीय मतदाता, फिस्कल डेफिसिट नही समझता और उसे, कोई मतलब नही कि ये 2.4% रहे चाहे 3.4%. उन्हें सब्सिडी और फ्री-बी (मुफ्त देने की योजना) की भी समझ नही। उन्हें तो ये भी नही पता कि सब्सिडी और फ्री-बी एक उधार है जिसे एक दिन कोई न कोई चुकायेगा।
भारतीय जनता को GDP रेट से कोई मतलब नही, भले ही पिछले चार सालों में 3.8 से बढ़कर 7.4 हो गया, जो कि अमरीका, ब्रिटेन जापान आदि देशों से आगे है
- भारतीय लोग हमेशा शिकायत करेंगे, सिर्फ प्याज और दाल पर ही नही, डीजल पेट्रोल पर भी। उन्हें चीजे सस्ती भी मिलनी चाहिये और किसानों को भी अच्छी कीमत मिलनी चाहिये।
- भारतीयों के पुरानी आदते सुधारने को मत कहिये, उनकी नजर में ये सरकार का काम है कि हर चीज वही बदले
- भारतीयों को लॉन्ग टर्म मुद्दों से कोई लेना देना नही, उन्हें हर चीज आज ही चाहिये, और आज ही नही, अभी के अभी चाहिये
- भारतीयों की यादाश्त कमजोर और उनका दृष्टिकोण बहुत ही संकीर्ण होता है। वो पिछला भूल जाते है और नेताओं के पिछले कुकर्मो को माफ कर देते है
- वो ढीठई से जातिवाद पर वोट करते है और जातिवाद एक मुख्य शत्रु है जो युवाओं का उत्थान नही करता बल्कि लोगों को बांटकर रख देता है... और चीन और पाक जैसे देश, भारतीयों को ही जातिवाद फैलाने का हथियार बनाते हैं क्योंकि, दोनों ही अपने GDP के लिये भारतीय बाजार पर निर्भर हैं
इंडियन रक्षा तंत्र पिछले पांच सालों में बहुत मजबूत हुआ है पाकिस्तान और गल्फ देशों के बनिस्बत, और ये देश, खुल्लम खुल्ला हिंदुस्तान को शासन का निर्देश नही दे सकते, इसलिये वो विध्वंसकारी संगठनों को अरबो खरबो की फंडिंग करते है कि हिंदुस्तान को बर्बाद करो.....
और मोदी ही, इसे कूटनीतिक युद्ध से जीत सकते हैं और
दुख की बात है कि ये बात, भारतीय ही नही समझते
अगर मि. मोदी, अगले 5 महीनों तक लॉन्ग टर्म प्लान फिक्स करने मे रह जाते हैं तो, वो 2019 खो बैठेंगे फिर एक मृत और गिरा सिपाही देश के लिये कुछ नही कर सकता। उन्हें, अगले 5 साल की सरकार बनाने के लिये हर हाल में कठोर बनकर जिंदा रहना होगा। अब उन्हें बचे 5 महीनों में राजनीतिज्ञ बनना पड़ेगा
अगर पब्लिक सस्ता पेट्रोल डीजल चाहती है, तो दीजिये उसे।
अगर किसान कर्जमाफी चाहते है, तो निराश मत कीजिये उन्हें ...
वे 'सबका साथ सबका विकास नही जानते, वे सिर्फ अपने पॉकेट में आये गांधी को जानते हैं
हम, मोदी को सलाह देंगे कि अगले 5 महीने स्टेट्समैनशिप छोड़िये और पॉलिटिशियन बनिये । 2019 की जीत के बाद ही स्टेट्समैन बनिये, क्योंकि भारत का विकास स्टेट्समैन मोदी के अंदर ही हो सकता है, पॉलिटिशियन मोदी के अंदर नही।
Shripad Kulkarni Bangar 
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राजपूतों में भी केवल मोदी विरोधी ही नहीं बल्कि योगी विरोधी भी बड़ी संख्या में हैं। कुछ तो कट्टर पप्पू समर्थक हैं और कुछ सैकुलर टाइप भी हैं। यह सारे के सारे कांग्रेस पेड वर्कर है ।।
एक आईडी है ठाकुर भारत सिंह चौहान के नाम से। नाम इतना बड़ा और दिमाग बिल्कुल छोटा सा। यह साहब कह रहे थे कि यदि योगी जी जैसों को मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बनाएंगे तब तो लोग पकोड़े तलेंगे। इन भाई साहब के अनुसार रघुराम राजन देश का प्रधानमंत्री होना चाहिए क्योंकि वह सबसे ज्यादा पढ़ा लिखा है। उसके हिसाब से योगी और मोदी गवार है। मैंने अपने कुछ प्रश्नों के जवाब मांगे तो वह मुझे ब्लॉक करके भाग गया। हो सकता है वह आपकी फ्रेंड लिस्ट में शामिल बहुत से लोगों की लिस्ट में हो।
कुछ लोग तो बुद्धि से इतने पैदल हैं कि धारा 370, एससी एसटी एक्ट, आरक्षण आदि के लिए भाजपा को जिम्मेदार मानते हैं।
कांग्रेस हिंदू विरोधी और देश विरोधी पार्टी है। देश के आजादी से पहले ही इसने हिंदुओं के विरुद्ध षड्यंत्र शुरू कर दिए थे। नेहरू क्योंकि मुसलमान था इसीलिए उसने मुसलमानों को भारत से नहीं जाने दिया आज मुसलमान ही भारत में सबसे बड़ी मुसीबत हैं और यह जनसंख्या विस्फोट करके भारत पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं।
राजपूतों ने खुशी से अपनी रियासतें भारत में मिला दी लेकिन कांग्रेस ने गद्दारी करके राजाओं के सारे अधिकार छीन लिए।
संविधान में सेकुलर शब्द नहीं था जिसे इमरजेंसी के बाद इंदिरा गांधी ने संविधान में जुड़वाया।
इन कांग्रेस प्रेमियों को इस बात से भी कोई दिक्कत नहीं है कि यदि लक्षित हिंसा निवारण बिल पास हो जाता तो भारत में हिंदुओं की वही हालत होती जो आज हिंदुओं की हालत पाकिस्तान और बांग्लादेश में है। कांग्रेस ने ही हिंदू आतंकवादी शब्द गढ़ा था। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के साथ हुए अन्याय को कौन भूल सकता है? 40-40 पुरूष पुलिसवाले मिलकर निर्दोष साध्वी प्रज्ञा को कोड़ो से तब तक मारते, जब तक वह बेहोंश नही हो जाती, फिर जगाते, फिर मारते, एक क्षत्राणी के साथ ऐसा व्यवहार करने वाली कांग्रेस आज इनकी अपनी हो गयी ।
एससी एसटी एक्ट की आड़ में दंगा करवाने वाली भी कांग्रेस थी वरना भाजपा का सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदलने का कोई विचार नहीं था।
राहुल गांधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, रणदीप सुरजेवाला, कमलनाथ, जैसे नेताओं ने जगह-जगह मीटिंग करके दलितों को भड़काया। कांग्रेस का इरादा यह था कि दलितों से दंगे करवा कर हिंदुओं को पूरी दुनिया में बदनाम किया जाए।
मायावती एक बड़ी रैली करके दलितों को हिंदू धर्म से हटाकर बौद्ध धर्म में लाने वाली थी। इसीलिए भाजपा सरकार को एससी एसटी एक्ट मूल रूप में लाना पड़ा।
कांग्रेस के इतने पाप हैं की गिनते गिनते पूरे नहीं होंगे।
साभार - Bijender Singh
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गुजरात सरकार की अनौखी पहल पुरानी बसों में बनाया बेघरों के लिए नाईट शेल्टर
शहर में रहने वाले अनाथ और बेधर लोगों को आश्रय की सुविधा देने के लिए नाईट शेल्टर ऑन व्हील की गुजरात में प्रथम बार योजना शुरू की है. जिसमें बिना काम में लाई जा रही पुरानी बसों को रिनोवेट किया गया है.
बारिश का मौसम हो या ठंडी का मौसम साल के बारह महीने सड़क के बीच या सड़क के दोनों तरफ फुटपाथ पर निराश्रित सोते हुए दिख जाते होंगे और ऐसे लोगो के लिए भरुच नगर पालिका ने एक अनोखा बीड़ा उठाया है. इन निराश्रित -निराधार लोगों के लिए नगर पालिका ने आश्रय स्थान बनाने का प्रयास शुरू किया है.सुरभि तमाकुवाला ने मीडिया को बताया कि गरीब और निराश्रित लोगों को रात के समय सोने और आराम करने के लिए यह सुविधा प्राप्त हो सके, ऐसा यह राज्य सरकार का पहला प्रोजेक्ट है. इन बसों का दुरुपयोग न हो इसके लिए इन नाइट शेल्टर बसों में सीसीटीवी भी लगाए गए है.
नगर पालिका द्वारा शुरू की गयी इस तरह की अनोखी पहल को शहर के लोगों ने काफी सराहा है. बिना आशियाने के फुटपाथ पर अपना जीवन बिताने वाले निराश्रितों के लिए भंगार में पड़ी बसे पालिका के सराहनीय कदम की वजह से आज आशीर्वाद के समान साबित हुयी है.
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चीन ने पाकिस्तान को बाध्य किया कि अब भविष्य में पाकिस्तान का व्यापार चीन से चीनी मुद्रा यूयान में ही होगा. इस प्रकार अब पाकिस्तान भविष्य में चिनकीस्तान बन जायेगा.
अब समय है कि भारत चीन से कहे कि भारतीय व्यापारी जितना भी चीनी माल खरीदेंगे/आयात करंगे उसका भुगतान वे $डालर में न करके भारतीय ₹रुपये में करेंगे. इस प्रकार चीन को जितना भी भारतीय माल निर्यात हो उसका कीमत का भुगतान चीन भारतीय ₹रुपये में करे. इससे हमारा $डालर का भंडार बढेगा और भुगतान संतूलन अपनाने से चीन ज्यादा से ज्यादा भारतीय माल आयात करने को बाध्य होगा.
Uma Shanker Singh
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चोंकिये मत ये कोई मक्का मदीना का दृश्य नहीं है ये दारूमऊलूम और मसूद अजहर द्वारा अयोध्या को दी गयी धमकी से प्रेरित ईस्लामी जेहादीयों की भीड है जो किसी इस्लामी इस्तमां के बहाने यूपी के बुलंदशहर में अपना शक्ति प्रदर्शन करने इक्कठा हुई है.!
अब हल्के में लेने के दिन चले गए इन लोगों के एक एक कदम को सीरियसली लेना होगा
ये अपनी 21 करोड आबादी को बयां कर रहे हैं क्योंकि वास्तविकता में अब ये अल्पसंख्यक नहीं हैं...वैसे भी हिन्दू अब हैं ही कितने? हिन्दुओं से ज्यादा तो यहां पंडित राजपूत जाट गुर्जर यादव सैनी त्यागी होंगे
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Saturday, 1 December 2018

vichar

22 साल से पीएम मोदी सत्ता में हैं और राहुल गांधी भी राजनीति में है।
दोनों की संपत्ति सार्वजनिक करा दो पता चल जायेगा चोर कौन...?
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राम मंदिर का फैसला सिर्फ कोर्ट करेगा संसद नहीं लेकिन राफेल पर फैसला संसद करेगा कोर्ट का फैसला मंजूर नहीं गजब का दोगलापन है...?
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दुनिया में 6 प्रकार की कुरान है सभी कुरान एक दूसरे
से अलग अलग है और उनकी आयतो की संख्या भी अलग अलग है और सभी कुरान को मानने वाले एक दूसरे की कुरान को ग़लत कहते है......कोई बता सकता है कि इन निम्लिखित 6 कुरान में से असली कुरान कौनसी है...जो अल्लाह ने आसमान से भेजी है...
1. कूफी कुरान...आयत 6236
2. बशरी कुरान...आयात 6216
3. शयामि कुरान...आयत 6250
4. मक्की कुरान...आयत 6212
5. ईराकी कुरान...आयत 6214
6. साधारण कुरान (आम कुरान)...आयत 6666
जब कुरान 6 प्रकार की है तो अल्हा भी 6 प्रकार का ही होगा....?- अरून शुक्ला
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एक समझदार देशभक्त जागरूक हिन्दू अपने देश और समाज के खुले और छिपे दुश्मनों के प्रति वर्तमान में उच्च स्तर की सतर्कता के साथ दुश्मन की हर भावी चाल और साजिश का सटीक आकलन करके उसी के अनुरूप अपना आचरण निर्धारित करता है ऐसे माहौल में सिर्फ स्वयंभू किस्म के स्वघोषित ज्ञानी उतावली प्रजाति के हिन्दू ही दुश्मनों की साजिशों और कुटिल नीतियों का बहुत आसानी से शिकार बनते है ।- 
पवन अवस्थी
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BBC के द्वारा facebook और ट्वीटर पर भारत की मोदी सरकार, यूपी के योगी सरकार और देश भर की भाजपा सरकार के विरूद्ध नफरत फैलाई जा रही है.दो 2 ताजा उदाहरण:1. एक fake वृत चित्र के जरिये बता रहा है कि राजस्थान के लोग रोजगार की तलाश में राजस्थान से बाहर जा रहे है. यानी वसुंन्धरा राजे सरकार ने कुछ नही किया.
2. बुलन्दशहर की घटना के बारे में fake news का वर्णन कर रहा है- .
Uma Shanker Singh
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कांग्रेस ने पंद्रह साल पहले ही देख लिया था कि उसे "जड़ से उखाड़ने" की ताकत और हिम्मत कौन रखता है, इसीलिए मनमोहन सिंह के कार्यकाल में सरकार लगातार मोदी को फसाने और जेल भेजने के लिए जाल बुनने में लगी रही। राजसत्ता का यह खतरनाक रुख नमो को और ज्यादा सतर्क, होशियार, जुझारू और ताकतवर बनाता चला गया। वही ताकत अब चीन, अमेरिका और रूस जैसे शक्तिशाली देशों के राष्ट्राध्यक्षों से दो-दो हाथ करने और उन्हें पटखनी देने के काम आ रही है।
डोकलाम में मोदी ने जहां धोबियापाट से अपने असली दुश्मन को चित किया तो ईरान से तेल सौदे के मसले पर ट्रंप जैसे सनकी को "फ्रीस्टाइल" में नाकआउट किया। S-400 वाली सुरक्षा रूस से लेकर एक ही तीर से अमेरिका और चीन जैसे दो अति शक्तिशाली प्रतिद्वंदियों पर निशाना साधा, तो फ्रांस से रफाल का सौदा करके एक तरफ रूस को संदेश दिया कि सिर्फ तुम्हारे भरोसे नहीं हैं और दूसरी तरफ पूरे विपक्ष को उसमें उलझाकर खुद अपने कपड़े उतार फेकने को मजबूर कर दिया। ये है नमो अजेय होने की कूटनीतिक ताकत का असली राज...
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कौड़ी पर बिके हुए लोग,
घुटनों पर टिके हुए लोग।
बरगद को देते हैं चुनौती,
गमले में उगे हुए लोग।
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धर्म बदला जाती बदली , और बदल गया गौत्र ।
दादा दबे कब्रिस्तान में , और पंडित हो गए पौत्र ।।
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कोई कांग्रेसी नही बताता ! भारत के दुश्मन देशों से कांग्रेसी गुप्त मीटिंग क्यूं करते हैं ?,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
,सीरिया,इराकी घुसपैठियो के बोझ से दबा फ्रांस ग्रहयुद्ध की कगार पर,सडको पर दिख रहे नकाबपोश हमलावर!ये दृश्य भारत मे भी दिखाई देगा .?
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कांग्रेस 2002 में कहती थी कि: "मोदी कट्टर हिन्दू हैं"।
वहीं कांग्रेस 2018 में कह रही है कि:"असली हिन्दू नही हैं"..//
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जो कौम इतिहास भुला देती है, वह खुद भी जल्दी ही इतिहास बन जाती है.
करतारपुर गलियारे को लेकर पाकिस्तानी रुख पर उछलने-कूदने-लहालोट होने वाले "कथित सेकुलर प्रगतिशीलों" को ना तो वहाँ के बर्बाद गुरूद्वारे दिखाई देते हैं, न टूटे-फूटे-गायब हो चुके मंदिर...
बलात्कार करने के बाद जबरन इस्लाम स्वीकार करवाई गईं सिख बहनों का दर्द तो शायद इन बुद्धिपिशाचों ने कहीं गहरे ही दफन कर दिया है...
कुछ मूर्ख-भोले-धूर्त बुद्धिजीवी तो इस घटना को बर्लिन की दीवार... जर्मनी-फ्रांस तथा उत्तर-दक्षिण कोरिया सुलह-समझौते से भी जोड़ रहे हैं... इन गधों को कौन समझाए, कि उपरोक्त मामलों में "इस्लाम" कहीं नहीं था... इसलिए वह संभव हुआ.बहरहाल... जो कौम इतिहास भुला देती है, वह खुद भी जल्दी ही इतिहास बन जाती है... :- सुरेश चिपलूनकर

Wednesday, 28 November 2018

GOOD NEWS

‘प्रयागराज के कुंभ मेले को संयुक्तराष्ट्र संघ ने दिया विश्वधरोहर का दर्जा
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2 साल पहले तक विश्व के सौर ऊर्जा उत्पादन देशो में भारत की गिनती दूर-दूर तक नही होती थी । अब भारत की गिनती 6ठे देश के रूप में हो गई । ये है सौर ऊर्जा के चैंपियन देशो की सूची। टाप पर जर्मनी का नम्बर है।

बताते चले की भारत सौर ऊर्जा के मामले में बेहद अच्छा प्रदर्शन कर रहा है. देश अब टॉप-10 सोलर एनर्जी उत्पादकों में शामिल हो चुका है. देखिए किसका कितना सालाना उत्पादन है. शीघ्र ही अमेरिका को पछाड़ 5 वे स्थान पर आ जायेगा.
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अभिनव प्रयोग,नवीकरण ऊर्जा
भारत के लिए 150 MW की क्षमता वाला तैरता हुआ सोलर प्लांट मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की सीमा पर स्थित रिहन्द डैम पर Shapoorji Pallonji Group (SPG) द्वारा स्थापित किया जा रहा है. इसमे उत्पादित ग्रीन ऊर्जा की बिजली ₹3.32/ किलोवाट पर राज्य सरकारें लेंगी.,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मोदीराज में समृद्ध हो रहा इंडिया: विश्व में सबसे तेजी से विकास करने वाले टॉप 10 शहरों में सभी भारत के...
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश का रुतबा लगातार बढ़ रहा है और भारत एक विश्व शक्ति बनकर उभर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने एक और उपलब्धि हासिल की है। अब आर्थिक विकास के मामले में विश्व के शीर्ष 10 शहरों की बात आने पर भारत अगले दो दशकों तक हावी रहने वाला है। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में सबसे तेजी से विकास करने वाले शीर्ष दस शहरों में सभी शहर भारत के हैं। ऑक्सफोर्ड के वैश्विक शहरों के शोध के प्रमुख रिचर्ड होल्ट के मुताबिक गुजरात की हीरा नगरी और व्यापार केंद्र सूरत में 2035 तक 9 प्रतिशत से अधिक की औसत के साथ सबसे तेजी से विस्तार देखेने को मिलेगा। शीर्ष के 10 शहरों में- सूरत, आगरा, बेंगलुरु, हैदराबाद, नागपुर, तिरुपुर, राजकोट, तिरुचिरापल्ली चेन्नई और विजयवाड़ा शामिल है।
ब्लूमबर्ग की खबर के अनुसार हालांकि सूची में शामिल कई भारतीय शहरों का इकोनॉमिक आउटपुट दुनिया के बड़े मेट्रोपॉलिटन शहरों से कम रहेगा, लेकिन एशिया के सभी शहरों का कुल जीडीपी 2027 तक उत्तरी अमेरिका और यूरोप के प्रमुख शहरों से कई गुना आगे निकल जाएगा। 2035 तक यह उत्तर अमेरिका और यूरोप महाद्वीपों से 17 प्रतिशत अधिक हो जाएगा। इसमें सबसे ज्यादा योगदान चीनी शहरों का होगा।
यह कोई पहली बार नहीं है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत इस तरह के कई मुकाम हासिल कर चुका है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश ना सिर्फ पूरी रफ्तार बल्कि सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। नजर डालते हैं पिछले चार वर्षों में भारत की कुछ अहम उपलब्धियों पर-
एशिया पैसिफिक में सबसे तेज प्रगति करने वाला देश बना भारत
एशिया प्रशांत देशों में भारत सबसे तेजी से तरक्की करने वाला देश बन गया है। अंतरराष्ट्रीय थिंक-टैंक लेगाटम इंस्टीट्यूट के 12वें सालाना वैश्विक समृद्धि सूचकांक में भारत 19 पायदान की लंबी छलांग लगाते हुए 94 स्थान पर पहुंच गया है। दुनिया सबसे समृद्ध देश की पहचान के लिए सौ से ज्यादा मानदंडों पर सभी देशों के परखा गया था। 2013 में भारत इस सूची में 113वें नंबर था और पांच वर्षों के दौरान भारत अभूतपूर्व प्रगति के साथ 94 नंबर पर पहुंच गया है।
मानव विकास सूचकांक में भारत की रैंकिंग में सुधार
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा हाल में जारी ताजा मानव विकास सूचकांक में भारत 189 देशों में एक स्थान ऊपर चढ़कर 130वें स्थान पर पहुंच गया है। दक्षिण एशिया में भारत का मानव विकास सूचकांक मूल्य 0.640 है। यह दक्षिण एशिया के औसत 0.638 से अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में 1990 से 2017 के बीच सकल राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति आय में 266.6 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। भारत की क्रय क्षमता के आधार पर प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय करीब 4.55 लाख रुपये पहुंच गई है। जो पिछले साल से 23,470 रुपये अधिक है। इसके साथ ही जीवन प्रत्याशा के मामले में भारत की स्थिति बेहतर हुई है। भारत में जीवन प्रत्याशा 68.8 साल है जबकि 1990 में 57.9 साल थी।
ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की रैंकिंग में सुधार
हाल ही में दुनियाभर में इनोवेशन के मामले में भारत की रैंकिंग में 3 स्थान का सुधार हुआ है। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (जीआईआई) की सूची में भारत 57वें नंबर पर है, पिछले साल भारत 60वें नंबर पर था। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की स्थिति में लगातार सुधार हुआ है। 2015 में भारत 81वें स्थान पर था। कॉर्नेल यूनिवसिटी और वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइजेशन ने मिलकर इस इंडेक्स को तैयार किया है। जीआईआई इंडेक्स के अनुसार मध्य और दक्षिण एशिया क्षेत्र में भारत सबसे इनोवेटिव देश है।
ग्लोबल पीस इंडेक्स में 4 पायदान सुधार के साथ 137वें नंबर पर भारत
इसके साथ ही ग्लोबल पीस इंडेक्स-2017 में भारत चार पायदान ऊपर चढ़कर 137 वें स्थान पर पहुंच गया है। भारत अब 163 देशों में पिछले साल की रैंकिंग 141 की तुलना में चार पायदान सुधार के साथ 137वें नंबर पर है। ऑस्ट्रेलिया स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पीस (आईईपी) की ओर से जारी सर्वे रिपोर्ट में भारत की रैंकिंग सुधरने का कारण हिंसक घटनाओं में आई कमी को बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में कानून-व्यवस्था सुधरी है। रिपोर्ट के अनुसार आइसलैंड दुनिया का सबसे शांतिपूर्ण देश है, जबकि सीरिया दुनिया का सबसे कम शांति वाला देश है।
भारत बना दुनिया का छठा सबसे धनी देश
भारत 8,230 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ विश्व का छठा सबसे धनी देश है। अफ्रएशिया बैंक की वैश्विक संपत्ति पलायन समीक्षा (AfrAsia Bank Global Wealth Migration Review) रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका 62,584 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ शीर्ष पर है। रिपोर्ट के अनुसार 2027 तक भारत, ब्रिटेन और जर्मनी को पछाड़ दुनिया का चौथा सबसे धनी देश बन जाएगा।बैंक की समीक्षा में किसी देश के हर व्यक्ति की कुल निजी संपत्ति को आधार माना गया है। 24,803 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ चीन दूसरे और 19,522 अरब डॉलर के साथ जापान तीसरे स्थान पर है। शीर्ष 10 में शामिल अन्य देशों में ब्रिटेन की कुल संपत्ति 9,919 अरब डॉलर, जर्मनी की कुल संपत्ति 9,660 अरब डॉलर, ऑस्ट्रेलिया की कुल 6,142 अरब डॉलर, कनाडा की कुल संपत्ति 6,393 अरब डॉलर, फ्रांस की कुल संपत्ति 6,649 अरब डॉलर और इटली की कुल संपत्ति 4,276 अरब डॉलर है।
भारत में संपत्ति सृजन के कारणों में उद्यमियों की काफी संख्या, अच्छी शिक्षा प्रणाली, सूचना प्रौद्योगिकी का शानदार परिदृश्य, कारोबारी प्रक्रिया की आउटसोर्सिंग, रियल एस्टेट, हेलथकेयर और मीडिया क्षेत्र शामिल है। पिछले 10 वर्ष में इनकी संपत्ति में 200 गुना तेजी दर्ज की गयी है। रिपोर्ट के अनुसार विश्व में अभी 1.52 करोड़ ऐसे लोग हैं जिनकी संपत्ति 10 लाख डॉलर से अधिक है। एक करोड़ डॉलर से अधिक की संपत्ति वाले लोगों की संख्या 5.84 लाख और एक अरब डॉलर से अधिक की संपत्ति वाले लोगों की संख्या 2,252 है।
मार्केट कैपिटलाइजेशन में बना 8वां बड़ा बाजार बना भारत
मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से भारत, टॉप 10 की सूची में दुनिया का 8वां बड़ा बाजार बन गया है। दरअसल भारतीय शेयर बाजार में आई जबरदस्त तेजी का दौर मार्केट कैपिटलाइजेशन की रैंकिंग में लगातार बड़े बदलाव कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय शेयर बाजार ने अपने मार्केट कैपिटलाइजेशन में आई 49 % की तेजी के चलते कनाडा को पीछे छोड़कर यह स्थान बनाया है। पिछले महीने 13 दिसंबर को भारत का मार्केट कैपिटलाइजेशन कनाडा के 2.21 लाख करोड़ डॉलर के मुकाबले 2.28 लाख करोड़ डॉलर रहा। इस बढ़ोत्तरी की तीन मुख्य वजहें बताई जा रही हैं। बेंचमार्क इंडेक्स यानी सेंसेक्स का 24% बढ़ना, रुपये में डॉलर की तुलना में 12% की मजबूती और आईपीओ मार्केट की बढ़ी हुई गतिविधि। पिछले साल 82 भारतीय कंपनियों में आईपीओ के माध्यम से लगभग 71,687 करोड़ रुपये जुटाए गए।
समृद्धि के मामले में चीन के करीब पहुंचा भारत
प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों की वजह से देश में खुशहाली आई है, और लोगों का जीवनस्तर भी सुधरा है। लंदन स्थित एक संस्थान की हाल की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत समृद्धि के मामले में चीन के नजदीक पहुंच गया है। लंदन स्थित लेगातुम इंस्टिट्यूट के लेगातुम प्रॉस्पेरिटी इंडेक्स के मुताबिक समृद्धि के लिहाज से भारत 2016 के मुकाबले 2017 में चार स्थान ऊपर पहुंचकर रैंकिंग में 100वें स्थान पर पहुंच गया है। इस सूची में चीन 90वें नंबर पर है।
मोदी सरकार दुनिया की तीन सबसे भरोसेमंद सरकारों में
हाल में प्रामाणिक विदेशी संस्थानों की ओर से ऐसे कम से कम तीन सर्वे के नतीजे सामने आए जो मोदी सरकार के आर्थिक सुधार के कार्यक्रमों पर मुहर लगाते हैं। हाल ही में विश्व आर्थिक मंच (WEF) के एक सर्वे में प्रधानमंत्री मोदी की अगुआई वाली केंद्र सरकार को दुनिया की तीसरी सबसे भरोसेमंद सरकार बताया गया है। WEF के सर्वे के अनुसार करीब तीन चौथाई भारतीयों ने मोदी सरकार में अपना भरोसा जताया। यह सर्वे अर्थव्यवस्था की स्थिति, राजनीतिक बदलाव और भ्रष्टाचार मामलों को लेकर किये गए थे। सर्वे के नतीजों में बताया गया है कि देश में भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम और टैक्स सुधारों के कारण मौजूदा सरकार में भरोसा बढ़ा है।,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
भारत ने की इंटरनेट स्पीड में ज़बरदस्त क्रांति ...//
मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक आज भारत ने अब तक का सबसे भारी सैटेलाइट GSAT-11 को लॉन्च किया है. इस उपग्रह को दक्षिण अमेरिका के फ्रेंच गुयाना स्पेस सेंटर से फ्रांस के एरियन-5 रॉकेट कीमदद से लॉन्च किया गया.
इसरो का यह अब तक का सबसे ज्यादा वजनी सैटेलाइट है जिसका वजन 5,845 किलोग्राम है. भारतीय समयानुसार देर रात 2.07 AM और 3.23 AM के बीच इस सैटेलाइट को लॉन्च किया गया.
इसे इसरो की एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है. इससे भारत में इंटरनेट की गति बढ़ाने में मदद मिलेगी. कहा जा रहा है कि ये कामयाबी टेलिकॉम सेक्टर के लिए वरदान साबित हो सकता है, क्योंकि इसकी मदद से इंटरनेट की गति 14 GBPS तक हो सकती है.
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नौसेना 56 जंगी जहाज और पनडुब्बियां शामिल करने की तैयारी.
नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने प्रेस कांफ्रेंस करके बताया कि नौसेना अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए 56 जंगी जहाजों और पनडुब्बियों को शामिल करने की योजना बना रही है और एक तीसरा विमानवाहक पोत लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. उन्होंने देश को यकीन दिलाया कि नौसेना भारत के समुद्री इलाकों में दिन-रात निगरानी कर रही है. इससे भारत की ताकत अधिक बढ़ जाएगी और पाकिस्‍तान व चीन समुद्र के रास्‍ते भारत पर नजर डालने से पहले सोचने पर मजबूर हो जाएंगे.
एडमिरल लांबा ने अपनी सालाना प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ‘‘नौसेना अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए 56 जंगी जहाजों और पनडुब्बियों को शामिल करने की योजना बना रही है. यह निर्माणाधीन 32 जंगी जहाजों के अतिरिक्त होंगे.’’
उन्होंने कहा कि तटीय सुरक्षा बढ़ाने के प्रयासों के तहत मछली पकड़ने वाली तकरीबन ढाई लाख नौकाओं पर स्वत: पहचान करने वाले ट्रांसपोर्डर लगाने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है. लांबा ने कहा कि तीसरे विमानवाहक पोत को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है
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विजय माल्‍या ने 100% कर्ज लौटाने की बात कही, बोले- 'प्‍लीज ले लीजिए'

विजय माल्‍या ने कहा, ''तीन दशकों से भारत की सबसे बड़ी एल्‍कोहल ब्रीवरेज ग्रुप का संचालन कर रहे हैं. इससे टैक्‍स के रूप में सरकारी खजाने को सैकड़ों करोड़ रुपये का योगदान दिया है. किंगफिशर एयरलाइंस भी इस मद में अच्‍छा योगदान कर रही थी. उसका नुकसान में जाना दुखद रहा...'' इसके बाद एक अन्‍य ट्वीट में उन्‍होंने कहा, ''अपने प्रत्‍यर्पण के मसले पर मीडिया पर चल रही बहस को मैंने देखा है. यह अलग मसला है और कानून अपने हिसाब से काम करेगा. सबसे अहम बात जनता के पैसे की है और मैं इसे 100 प्रतिशत वापस करने को तैयार हूं. मैं विनम्रतापूर्वक बैंकों और सरकार से इसे स्‍वीकार करने का आग्रह करता हूं. लेकिन यदि इसे अस्‍वीकार किया जाता है तो बताइए, क्‍यों?''गौरतलब है कि विजय माल्या पर ईडी ने 9,000 करोड़ रुपये का ऋण नहीं चुकाने का आरोप लगाया है. इसके अलावा उन पर कुछ कर्ज को इधर-उधर करने का भी आरोप है. विजय माल्या 2 मार्च 2016 को जर्मनी होते हुए लंदन गए. जांच एजेंसियों का दावा है कि माल्या संदिग्ध परिस्थितियों में देश छोड़कर गए हैं.,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
128 साल पुराने KANPUR KE नाले की गंदगी से गंगा को आखिरकार मुक्ति मिल गई मुक्तिअंग्रेजों द्वारा 1892 में बनी और एशिया की सबसे पुरानी नाले की गंदगी से आखिरकार गंगा को मुक्ति मिल गई। सीसामऊ नाला 128 साल से लगातार गंगा को प्रदूषित कर रही थी। मंगलवार को भैरो घाट से डायवर्ट किया गया सीवेज जाजमऊ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंच गया। इसके साथ ही नमामि गंगे का सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट भी सफल हो गया है। कानपुर में 16 नाले है जो गंगा में सीधे गिरते है,जिसमें से 8 नाले को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में सफाई करने के बाद छोड़ा जाएगा।नाले के पानी को रोकने के लिए नमामि गंगे के इंजीनियरों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा क्योंकि नाले के पानी की तीव्रता नहर के समान ही था। पहले सीसामऊ नाले से 14 करोड़ लीटर सीवेज गंगा में गिराता था मगर इसमें से 8 करोड़ लीटर सीवेज कुछ दूर पहले ही मोड़कर एसटीपी तक भेज दिया गया था, लेकिन 6 करोड़ लीटर करोड़ लीटर गंदगी गंगा में जाने से रोकने में इंजीनियरों को काफी दिक्कत हुई।

सफलता के पीछे नितिन गडकरी

सीसामऊ नाले को मोड़ने की योजना 1985 में बनी थी। काफी पैसे खर्च होने के बाद भी इस गंदे नाली को गंगा में गिरने से नहीं रोका जा सका। अपने काम लिए मशहूर नितिन गडकरी ने आखिरकार इसे कर के दिखा दिया। उन्होंने गंगा में बचे काम को भी तय सीमा में पूरा करने का भरोसा दिया है।
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चीन ने PoK को बताया भारत का हिस्सा !

पाकिस्तान को लेकर चीन के रूख में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। PoK को पाकिस्तान का हिस्सा बताने वाले चीन ने उसे बड़ा झटका दिया है। चीनी ने अपने नक्शे में पाक अधिकृत कश्मीर को भारत के हिस्से में बताया है। दरअसल चीन सरकारी टीवी चैनल CGTN ने PoK को भारत के नक्शे में दिखाया है। चीनी सरकारी टेलीविजन चैनल CGTN पिछले शुक्रवार को पाकिस्तान में चीन के वाणिज्य दूतावास पर आतंकी हमले की रिपोर्ट दिखा रहा था। उसी दौरान उसने यह नक्शा दिखाया था। इस नक्शे में पूरे कश्मीर को भारत के हिस्से के तौर पर दिखाया गया।फिलहाल अभी यह साफ नहीं है कि यह चिनपिंग सराकार का सोच-समझकर उठाया गया कदम था या अनजाने में यह नक्शा दिखाया गया था। हालांकि, इस बात की संभावना नहीं के बराबर है कि चीन का सरकारी टीवी चैनल सत्ता के खिलाफ जाकर कोई काम करे। अभी तक यह भी साफ नहीं है कि इस घटनाक्रम के तार भारत और चीन सरकार की हालिया उच्च स्तरीय बातचीत से जुड़े हैं या नहीं। आपको बता दें कि भारत काफी लंबे समय से चीन से इस बात की मांग कर रहा है कि वो पाक अधिकृत कश्मीर को भारत का हिस्सा बताए। चीन के सरकारी टीवी चैनल CGTN को आमतौर पर CCTV-9 और CCTV न्यूज के तौर पर जाना जाता है। यह चीन इंटरनेशनल इंग्लिश न्यूज चैनल है, जिसपर चाइना ग्लोबल टेलीविजन नेटवर्क ग्रुप का मालिकाना हक है। यह पेइचिंग स्थित चाइना सेंट्रल टेलीविजन का हिस्सा है। यह चैनल 2000 में लॉन्च हुआ था।
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78 करोड़ में बेचा टॉयलेट का पानी, अब उससे निकलने वाली गैस से चलती हैं 50 बसें
नागपुर में सरकारी एजेंसी ने टॉयलेट के पानी को 78 करोड़ रुपए में बेच दिया है। अब उससे नागपुर शहर में 50 एसी बसें चलाई जा रही है। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि नागपुर में वैकल्पिक फ्यूल को लेकर कई प्रयोग किए जा रहे हैं। इनमें से एक टॉयलेट के पानी से बायो सीएनजी निकालकर उससे बस चलाने की योजना है। अभी ऐसी 50 बसें चल रही हैं।
गंगा की गंदगी से निकाली जाएगी गैस, 26 शहरों में चलेंगी बसें
गडकरी ने बताया कि पेट्रोलियम मंत्रालय के अधीन काम करने वाली तेल व गैस कंपनियों के साथ एक करार किया गया है, जिसके तहत गंगा किनारे बसे 26 शहरों को लाभ होगा। उन्होंने बताया कि पानी की गंदगी से निकलने वाली मीथेन गैस से बायो सीएनजी तैयार की जाएगी, जिससे इन 26 शहरों में सिटी बसें चलेंगी। इस काम से 50 लाख युवाओं को रोजगार मिलेंगे। इससे गंगा की सफाई भी होगी।
कोयला आधारित मीथेन से मुंबई, पुणे व गुवाहाटी में सिटी बस चलाने की तैयारी
गडकरी ने बताया कि हमारे देश में कोयले की कोई कमी नहीं है। इससे मीथेन निकालकर फिलहाल मुंबई, पुणे व गुवाहाटी में सिटी बस चलाने की तैयारी चल रही है। उन्होंने बताया कि 62 रुपए प्रति लीटर के डीजल की कीमत के बराबर काम करने वाली मीथेन की कीमत 16 रुपए पड़ती है। उन्होंने बताया कि देश में वैकल्पिक फ्यूल को लेकर कई प्रकार के प्रयोग किए जा रहे हैं।
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मोदी जैसा नेता हजारों वर्षो बाद जन्म लेता है।
सौभाग्य है कि मैं मोदी युग में जन्मा- केनेडी रिचर्ड्स
Times magazine of america
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भारत को 2019 में 13 हजार करोड़ के हथियारों का आर्डर मिला,
2014 से पहले देश केवल हथियार खरीदता था .
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मोदी सरकार की उज्ज्वला योजना का कमाल, रेकॉर्ड उछाल के साथ 89% घरों में पहुंचा एलपीजी कनेक्शन
= उज्ज्वला योजना की वजह से सरकारी तेल कंपनियों के एलपीजी ग्राहकों की संख्या दो-तिहाई बढ़ चुकी है
= अक्टूबर 2018 के आखिर तक देशभर के 89 प्रतिशत घरों में एलपीजी गैस पहुंच गया
= 1 अप्रैल 2015 तक महज 56.2 प्रतिशत घरों में एलपीजी कनेक्शन था
= झारखंड, बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों में सबसे कमजोर कवरेज रेशियो है
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Tuesday, 27 November 2018

vyang


जब भी लूटा मेरे देश को किसी ने ,
लुटेरा सदा विदेशी निकला.......
और लूट में साथ देने वाला 'जयचन्द' सदा अपना घर का निकला ।
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मुफ्त शौचालय बनाने की बजाय एक एक लोटा बांट दिया होता तो बीजेपी कभी न हारती खुले में शौच करेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया..
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एक अमेरिकी महिला पॉप स्टार ने बोला था कि "भारत गरीब देश है" ।
मुकेश अंबानी जी ने अपनी बेटी की शादी में उसे रातभर नचवाया...//
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मंदिरों की संपत्ति की वामपंथी दल द्वारा हो रही खुली लूट को देखते हुए केरल के हिंदुओं ने तय किया है कि अब वे मंदिरों की दानपेटी में पैसे न डालते हुए प्रसाद के लिए मुरमुरे डालेंगे। नतीजा देखिए,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
अब्दुल पूछ रिया है कि
10000 रुपिया महीना बेरोजगारी भत्ता कब से मिलना शुरू होगा
मध्यप्रदेश
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जो आदमी 48 साल की उम्र में लुगाई नही चुन सका वो सीएम चुन रहा है....?
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वाह क्या कमेडी है
सीएम के पद के लिए सचिन, सिंधिया में अनुभव की कमी
पर पीएम के उम्मीदवार राहुल अनुभव से परिपूर्ण है जी
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एक आयुर्वेदिक शेर अर्ज है ...
अदरक की गांठों सा रहा बचपन अपना..
बस उतना ही सुधरे, जितना कूटे गए...
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ये इंडिया है साहब... यहाँ फ़ूलन देवी जीत सकती हैं लेकिन... किरन बेदी नहीं.. ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
-नारा बदल गया-
चौकीदार प्योर है
मां-बेटे चोर हैं ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
प्रियंका संसार की इकलौती ऐसी महिला है जो "जीन्स" पहनकर वाड्रा और "साड़ी" पहनकर गांधी कहलाती हैं
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बहुत लम्बा (4 साल से ज़्यादा) समय हो गया किसी घोटाले की खबर सुने ....तीन राज्यों के रिजल्ट के बाद अब जाकर उम्मीद की किरण जगी हैं !!,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
राफेल पर SC का फैसला गलत है !-अशांत भूषण
अपने बाप के बेटे हो,अपने घर में ही Court क्यों नही खोल देते ?
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  दोषी तो नरेंद्र मोदी है
एक पेड़ का डंठल अचानक टूट कर गिरता है। जिसके कारण पेड़ के नीचे सोया हुआ एक बूढ़े व्यक्ति की मौत हो जाती है।
आस-पास के चतुर लोग इस घटना का विश्लेषण करते हुए बूढ़े व्यक्ति के मौत के लिए पेड़ को दोषी ठहरा देते है। इस पर दूसरा चतुर आदमी बोलता है की पेड़ का क्या दोष, दोषी तो वो है, जो इस कमजोर मिटटी में पेड़ लगाया था।
अब पेड़ लगाने वाले को बुलाकर उससे बूढ़े का मौत का जिम्मेदार ठहराया जाता है।
पेड़ लगाने वाला भी चतुर था वो बोला- इसमें मेरा क्या दोष, इस पेड़ की डाली में बगुलों का झुण्ड आकर बैठ गया, जिसके वजन से डाली टूट गई और बूढ़े के ऊपर गिर गई।इसलिए दोषी बगुले है।
दूसरा चतुर आदमी बोला- इन बेजुबान बगुलों का कोई दोष नहीं, ये बगुले पहले स्टेट बैंक के पास वाले पेड़ पर बैठते थे। लेकिन आज-कल वहाँ लम्बी-लम्बी लाइन लगी है और बहुत शोर होता है, जिसके कारण बगुले वहा से यहाँ शिप्ट हो गए। दोषी तो स्टेट बैंक है।
इस पर एक और चतुर आदमी बोलता है- स्टेट बैंक का क्या दोष, *दोषी तो नरेंद्र मोदी है*, जिसने नोट बंदी लगा दिया और उसी के कारण इस बूढ़े की मौत हो गई।
अंत में सभी चतुर लोग एक मत से फैसला करते है की स्टेट बैंक से कोसो दूर एक पेड़ की डाली के नीचे सोये हुए बूढ़े की मौत नरेंद्र मोदी के कारण हुआ है।
विश्वास न हो तो संसद में सुन लेना..।