Monday, 23 October 2017

m,ediya

Abhishek Mishra की कमेंट-
बच्चों :- "पाकिस्तान कि राजधानी" कहा है ?
एक बच्चा :---दिल्ली .....
टिचर :--- कैसे ?
बच्चा :---- जब आप,"भारत की राजधानी दिल्ली"में,अगर कभी," घूमने" आएँ.......
तब,आपको पता चलेगा कि,आप "शाहजहां" रोड़ से निकलकर, "अकबर" रोड़ पर पहुँच जायेंगे |
आगे जाकर, "बाबर" रोड़ पर मुड़ जायेंगे । फिर "हुमायूं" रोड़ पर सीधे चले जाइयेगा ।
गोल चक्कर मिलेगा,जहाँ से आप, "तुगलक" लेन में घुस जायेंगे!!!
"औरंगजेब" रोड़ पर आगे बढिये ....."सफदरजंग" रोड़ आ जाएगी ।!!
इसके बाद,"तुगलकाबाद" एवं "जामिया नगर"होते हुए,"कुतुबमीनार" तक जाइए......
और जब इस"सूफियाने माहौल'में,"दम घुटने लगे" तो....."...
"सराय कालेखाँ" होते हुए...
"निजामुद्दीन" रेलवे स्टेशन से,अपने शहर की,"रेलगाड़ी"में बैठिए,और घर वापस आ जाइये !!!!
और,"घर बैठ कर",सोचते रहिये...............
"दिल्ली"....."भारत की राजधानी" है.???? या,"पाकिस्तान" की ???
ना महाराणा प्रताप ना वीर शिवाजी ना बाबू राजेंद्र प्रसाद ना वीर कुँअर सिंह और ना ही चंद्रगुप्त मौर्य या सम्राट अशोक...हमने लगभग सभी को भुला दिया है ...
बहुत ही महत्वपूर्ण मैसेज आँखें खोलिए और सोचिए सभी..




भारत एक ऐसा देश है जहाँ पटाखा फोड़ने वालो का धर्म पता है,
लेकिन ..जानलेवा बम फोड़ने वालो का धर्म आज भी रहस्य है...
--विट्ठल व्यास

KORAN KI KHATARNAK ..AAYATEN



1- ''फिर, जब पवित्र महीने बीत जाऐं, तो 'मुश्रिको' (मूर्तिपूजको ) को जहाँ-कहीं पाओ कत्ल करो, और पकड़ो और उन्हें घेरो और हर घात की जगह उनकी ताक में बैठो। ( कुरान मजीद, सूरा 9, आयत 5) (कुरान 9:5) . www.quran.com/9/5www.quranhindi.com/p260.htm

2- ''हे 'ईमान' लाने वालो (केवल एक आल्ला को मानने वालो ) 'मुश्रिक' (मूर्तिपूजक) नापाक (अपवित्र) हैं।'' (कुरान सूरा 9, आयत 28) . www.quran.com/9/28www.quranhindi.com/p265.htm

3- ''निःसंदेह 'काफिर (गैर-मुस्लिम) तुम्हारे खुले दुश्मन हैं।'' (कुरान सूरा 4, आयत 101) . www.quran.com/4/101www.quranhindi.com/p130.htm

4- ''हे 'ईमान' लाने वालों! (मुसलमानों) उन 'काफिरों' (गैर-मुस्लिमो) से लड़ो जो तुम्हारे आस पास हैं, और चाहिए कि वे तुममें सखती पायें।'' (कुरान सूरा 9, आयत 123) .www.quran.com/9/123 www.quranhindi.com/p286.htm

5- ''जिन लोगों ने हमारी ''आयतों'' का इन्कार किया (इस्लाम व कुरान को मानने से इंकार) , उन्हें हम जल्द अग्नि में झोंक देंगे। जब उनकी खालें पक जाएंगी तो हम उन्हें दूसरी खालों से बदल देंगे ताकि वे यातना का रसास्वादन कर लें। निःसन्देह अल्लाह प्रभुत्वशाली तत्वदर्शी हैं'' (कुरान सूरा 4, आयत 56)www.quran.com/4/56 www.quranhindi.com/p119.htm

6- ''हे 'ईमान' लाने वालों! (मुसलमानों) अपने बापों और भाईयों को अपना मित्र मत बनाओ यदि वे ईमान की अपेक्षा 'कुफ्र' (इस्लाम को धोखा) को पसन्द करें। और तुम में से जो कोई उनसे मित्रता का नाता जोड़ेगा, तो ऐसे ही लोग जालिम होंगे'' (कुरान सूरा 9, आयत 23) . www.quran.com/9/23 . .www.quranhindi.com/p263.htm .

7- ''अल्लाह 'काफिर' लोगों को मार्ग नहीं दिखाता'' (कुरान सूरा 9, आयत 37) . www.quran.com/9/37 . .www.quranhindi.com/p267.htm .

8- '' ऐ ईमान (अल्ला पर यकिन) लानेवालो! तुमसे पहले जिनको किताब दी गई थी, जिन्होंने तुम्हारे धर्म को हँसी-खेल बना लिया है, उन्हें और इनकार करनेवालों को अपना मित्र न बनाओ। और अल्लाह का डर रखों यदि तुम ईमानवाले हो (कुरान सूरा 5, आयत 57) . www.quran.com/5/57www.quranhindi.com/p161.htm

9- ''फिटकारे हुए, (मुनाफिक) जहां कही पाए जाऐंगे पकड़े जाएंगे और बुरी तरह कत्ल किए जाएंगे।'' (कुरान सूरा 33, आयत 61) . www.quran.com/33/61www.quranhindi.com/p592.htm

10- ''(कहा जाऐगा): निश्चय ही तुम और वह जिसे तुम अल्लाह के सिवा पूजते थे 'जहन्नम' का ईधन हो। तुम अवश्य उसके घाट उतरोगे।'' ( कुरान सूरा 21, आयत 98 .www.quran.com/21/98 www.quranhindi.com/p459.htm

11- 'और उस से बढ़कर जालिम कौन होगा जिसे उसके 'रब' की आयतों के द्वारा चेताया जाये और फिर वह उनसे मुँह फेर ले। निश्चय ही हमें ऐसे अपराधियों से बदला लेना है।'' (कुरान सूरा 32, आयत 22) . www.quran.com/32/22www.quranhindi.com/p579.htm

12- 'अल्लाह ने तुमसे बहुत सी 'गनीमतों' का वादा किया है जो तुम्हारे हाथ आयेंगी,''(लूट का माल) (कुरान सूरा 48, आयत 20) . www.quran.com/48/20 . . www.quranhindi.com/p713.htm

13- ''तो जो कुछ गनीमत (लूट का माल जैसे लूटा हुआ धन या औरते) तुमने हासिल किया है उसे हलाल (valid) व पाक समझ कर खाओ (उपयोग करो)' (कुरान सूरा 8, आयत 69) .www.quran.com/8/69 www.quranhindi.com/p257.htm

14- ''हे नबी! 'काफिरों' और 'मुनाफिकों' के साथ जिहाद करो, और उन पर सखती करो और उनका ठिकाना 'जहन्नम' है, और बुरी जगह है जहाँ पहुँचे'' (कुरान सूरा 66, आयत 9) .www.quran.com/66/9 www.quranhindi.com/p785.htm

15- 'तो अवश्य हम 'कुफ्र' (इस्लाम को धोखा देने वालो) करने वालों को यातना का मजा चखायेंगे, और अवश्य ही हम उन्हें सबसे बुरा बदला देंगे उस कर्म का जो वे करते थे।'' (कुरान सूरा 41, आयत 27) . www.quran.com/41/27www.quranhindi.com/p662.htm

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Sunday, 22 October 2017

अमेरिका से आयी बंगाल के बारे में ऐसी खौफनाक रिपोर्ट, जिसने पूरी दुनिया में मचा दी खलबली
कभी भारतीय संस्कृति का प्रतीक माने जाने वाले बंगाल की दशा आज क्या हो चुकी है, ये बात तो किसी से छिपी नहीं है. हिन्दुओं के खिलाफ साम्प्रदायिक दंगे तो पिछले काफी वक़्त से होना शुरू हो चुके हैं और अब तो हालात ये हो चुके हैं कि त्यौहार मनाने तक पर रोक लगाई जानी शुरू हो गयी है. मगर बंगाल पर मशहूर अमेरिकी पत्रकार जेनेट लेवी ने अब जो लेख लिखा है और उसमे जो खुलासे किये हैं, उन्हें देख आपके पैरों तले जमीन खिसक जायेगी.
जेनेट लेवी ने अपने ताजा लेख में दावा किया है कि कश्मीर के बाद बंगाल में जल्द ही गृहयुद्ध शुरू होने वाला है, जिसमे बड़े पैमाने पर हिन्दुओं का कत्लेआम करके मुगलिस्तान नाम से एक अलग देश की मांग की जायेगी. यानी भारत का एक और विभाजन होगा और वो भी तलवार के दम पर और बंगाल की वोटबैंक की भूखी ममता बनर्जी की सहमति से होगा सब कुछ.
जेनेट लेवी ने अपने लेख में इस दावे के पक्ष में कई तथ्य पेश किए हैं. उन्होंने लिखा है कि “बंटवारे के वक्त भारत के हिस्से वाले पश्चिमी बंगाल में मुसलमानों की आबादी 12 फीसदी से कुछ ज्यादा थी, जबकि पाकिस्तान के हिस्से में गए पूर्वी बंगाल में हिंदुओं की आबादी 30 फीसदी थी. आज पश्चिम बंगाल में मुसलमानों की जनसंख्या बढ़कर 27 फीसदी हो चुकी है. कुछ जिलों में तो ये 63 फीसदी तक हो गई है. वहीँ दूसरी ओर बांग्लादेश में हिंदू 30 फीसदी से घटकर केवल 8 फीसदी ही बचे हैं.”
आप यहाँ जेनेट का पूरा लेख खुद भी पढ़ सकते है
http://www.americanthinker.com/…/the_muslim_takeover_of_wes…
बता दें कि जेनेट ने ये लेख ‘अमेरिकन थिंकर’ मैगजीन में लिखा है. ये लेख एक चेतावनी के तौर पर उन देशों के लिए लिखा गया है, जो मुस्लिम शरणार्थियों के लिए अपने दरवाजे खोल रहे हैं. जेनेट लेवी ने बेहद सनसनीखेज दावा करते हुए लिखा है कि किसी भी समाज में मुस्लिमों की 27 फीसदी आबादी काफी है कि वो उस जगह को अलग इस्लामी देश बनाने की मांग शुरू कर दें.
उन्होंने दावा किया है कि मुस्लिम संगठित होकर रहते हैं और 27 फीसदी आबादी होते ही इस्लामिक क़ानून शरिया की मांग करते हुए अलग देश बनाने तक की मांग करने लगते हैं. पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए उन्होंने लिखा है कि ममता बनर्जी के लगातार हर चुनाव जीतने का कारण वहां के मुस्लिम ही हैं. बदले में ममता मुस्लिमों को खुश करने वाली नीतियां बनाती है.
जल्द ही बंगाल में एक अलग इस्लामिक देश बनाने की मांग उठने जा रही है और इसमें कोई संदेह नहीं कि सत्ता की भूखी ममता इसे मान भी जाए. उन्होंने अपने इस दावे के लिए तथ्य पेश करते हुए लिखा कि ममता ने सऊदी अरब से फंड पाने वाले 10 हजार से ज्यादा मदरसों को मान्यता देकर वहां की डिग्री को सरकारी नौकरी के काबिल बना दिया है. सऊदी से पैसा आता है और उन मदरसों में वहाबी कट्टरता की शिक्षा दी जाती है.
गैर मजहबी लोगों से नफरत करना सिखाया जाता है. उन्होंने लिखा कि ममता ने मस्जिदों के इमामों के लिए तरह-तरह के वजीफे भी घोषित किए हैं, मगर हिन्दुओं के लिए ऐसे कोई वजीफे नहीं घोषित किये गए. इसके अलावा उन्होंने लिखा कि ममता ने तो बंगाल में बाकायदा एक इस्लामिक शहर बसाने का प्रोजेक्ट भी शुरू किया है.
पूरे बंगाल में मुस्लिम मेडिकल, टेक्निकल और नर्सिंग स्कूल खोले जा रहे हैं, जिनमें मुस्लिम छात्रों को सस्ती शिक्षा मिलेगी. इसके अलावा कई ऐसे अस्पताल बन रहे हैं, जिनमें सिर्फ मुसलमानों का इलाज होगा. मुसलमान नौजवानों को मुफ्त साइकिल से लेकर लैपटॉप तक बांटने की स्कीमें चल रही हैं. इस बात का पूरा ख्याल रखा जा रहा है कि लैपटॉप केवल मुस्लिम लड़कों को ही मिले, मुस्लिम लड़कियों को नहीं.
जेनेट लेवी ने लिखा है कि बंगाल में बेहद गरीबी में जी रहे लाखों हिंदू परिवारों को ऐसी किसी योजना का फायदा नहीं दिया जाता. जेनेट लेवी ने दुनिया भर की ऐसी कई मिसालें दी हैं, जहां मुस्लिम आबादी बढ़ने के साथ ही आतंकवाद, धार्मिक कट्टरता और अपराध के मामले बढ़ने लगे.
आबादी बढ़ने के साथ ऐसी जगहों पर पहले अलग शरिया क़ानून की मांग की जाती है और फिर आखिर में ये अलग देश की मांग तक पहुंच जाती है. जेनेट ने अपने लेख में इस समस्या के लिए इस्लाम को ही जिम्मेदार ठहरा दिया है. उन्होंने लिखा है कि कुरान में यह संदेश खुलकर दिया गया है कि दुनिया भर में इस्लामिक राज स्थापित हो.
जेनेट ने लिखा है कि हर जगह इस्लाम जबरन धर्म-परिवर्तन या गैर-मुसलमानों की हत्याएं करवाकर फैला है. अपने लेख में बंगाल के हालातों के बारे में उन्होंने लिखा है. बंगाल में हुए दंगों का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा है कि 2007 में कोलकाता में बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन के खिलाफ दंगे भड़क उठे थे. ये पहली कोशिश थी जिसमे बंगाल में मुस्लिम संगठनों ने इस्लामी ईशनिंदा (ब्लासफैमी) कानून की मांग शुरू कर दी थी.
1993 में तस्लीमा नसरीन ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों और उनको जबरन मुसलमान बनाने के मुद्दे पर किताब ‘लज्जा’ लिखी थी. किताब लिखने के बाद उन्हें कट्टरपंथियों के डर से बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था. वो कोलकाता में ये सोच कर बस गयी थी कि वहां वो सुरक्षित रहेंगी क्योंकि भारत तो एक धर्मनिरपेक्ष देश है और वहां विचारों को रखने की स्वतंत्रता भी है.
मगर हैरानी की बात है कि धर्म निरपेक्ष देश भारत में भी मुस्लिमों ने तस्लीमा नसरीन को नफरत की नजर से देखा. भारत में उनका गला काटने तक के फतवे जारी किए गए. देश के अलग-अलग शहरों में कई बार उन पर हमले भी हुए. मगर वोटबैंक के भूखी वामपंथी और तृणमूल की सरकारों ने कभी उनका साथ नहीं दिया. क्योंकि ऐसा करने पर मुस्लिम नाराज हो जाते और वोटबैंक चला जाता.
जेनेट लेवी ने आगे लिखा है कि 2013 में पहली बार बंगाल के कुछ कट्टरपंथी मौलानाओं ने अलग ‘मुगलिस्तान’ की मांग शुरू कर दी. इसी साल बंगाल में हुए दंगों में सैकड़ों हिंदुओं के घर और दुकानें लूट लिए गए और कई मंदिरों को भी तोड़ दिया गया. इन दंगों में सरकार द्वारा पुलिस को आदेश दिये गए कि वो दंगाइयों के खिलाफ कुछ ना करें.
ममता को डर था कि मुसलमानों को रोका गया तो वो नाराज हो जाएंगे और वोट नहीं देंगे. लेख में बताया गया है कि केवल दंगे ही नहीं बल्कि हिन्दुओं को भगाने के लिए जिन जिलों में मुसलमानों की संख्या ज्यादा है, वहां के मुसलमान हिंदू कारोबारियों का बायकॉट करते हैं. मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तरी दिनाजपुर जिलों में मुसलमान हिंदुओं की दुकानों से सामान तक नहीं खरीदते.
यही वजह है कि वहां से बड़ी संख्या में हिंदुओं का पलायन होना शुरू हो चुका है. कश्मीरी पंडितों की ही तरह यहाँ भी हिन्दुओं को अपने घरों और कारोबार छोड़कर दूसरी जगहों पर जाना पड़ रहा है. ये वो जिले हैं जहां हिंदू अल्पसंख्यक हो चुके हैं.
इसके आगे जेनेट ने लिखा है कि ममता ने अब बाकायदा आतंकवाद समर्थकों को संसद में भेजना तक शुरू कर दिया है. जून 2014 में ममता बनर्जी ने अहमद हसन इमरान नाम के एक कुख्यात जिहादी को अपनी पार्टी के टिकट पर राज्यसभा सांसद बनाकर भेजा. हसन इमरान प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिमी का सह-संस्थापक रहा है.
हसन इमरान पर आरोप है कि उसने शारदा चिटफंड घोटाले का पैसा बांग्लादेश के जिहादी संगठन जमात-ए-इस्लामी तक पहुंचाया, ताकि वो बांग्लादेश में दंगे भड़का सके. हसन इमरान के खिलाफ एनआईए और सीबीआई की जांच भी चल रही है.
लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (एलआईयू) की रिपोर्ट के मुताबिक कई दंगों और आतंकवादियों को शरण देने में हसन का हाथ रहा है. उसके पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से रिश्ते होने के आरोप लगते रहे हैं. जेनेट के मुताबिक़ बंगाल का भारत से विभाजन करने की मांग अब जल्द ही उठने लगेगी. इस लेख के जरिये जेनेट ने उन पश्चिमी देशों को चेतावनी दी है, जो मुस्लिम शरणार्थियों को अपने यहाँ बसा रहे हैं, कि जल्द ही उन्हें भी इसी सब का सामना करना पडेगा.
https://m.facebook.com/story.php…
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Riots, restrictions on speech and religion, and the takeover of politics and law enforcement are just a few of the unwelcome changes that can be expected in non-Muslim societies as Muslim immigrants increase in number, according to Dr. Peter Hammond.  A Christian missionary based in South Africa and...
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ये तस्वीर जापान में बने एक पोस्टर की तस्वीर है जिसमे लिखा है कि बर्बर इस्लामिक आतंकवादियों के आक्रमण से कमजोर हुए भारत पर ब्रिटिश ने कब्जा किया और सोने की चिड़िया की हत्या की। और चर्चिल ने मैनचेस्टर को सुरक्षित रखने के लिए भारतीय टेक्सटाइल वर्कर्स की उंगलियां काट डाली। 
ब्रिटिश शासकों ने भारतीयों का रक्त चूसा और बदले में उनको भूंख और दरिद्रता का उपहार दिया।
लेकिन ब्रिटिश के तलवे चाटने वाले नेहरूवियन और वामपंथी इतिहासकारों ने इस तथ्य को कभी आम जनता के बीच तक जाने नहीं दिया। ये तलचट अकैडमिक विद्वान, जो सुभाष चंद्र बोस को तोजो का कुत्ता बुलाते थे, झूंठ गढ़गढ़ कर भारत की तीन पीढियां बर्बाद कर चुके हैं।
लेकिन अब नई पीढ़ी इस झूंठ को आगे नही बढ़ने देगी।
जो सत्य जापान में पोस्टर के रूप में छपा था आज हर भारतीय के ड्राइंग रूम में दिखेगी। 
उन्होंने अछूतपन की सच्ची झूठी कहनियां रचकर 3 करोड़ से ज्यादा इन टेक्सटाइल मनुफैक्टरर्स भारतीयों का कत्ल कर दिया , और हमको मनुषमृति और कास्ट की scheduling का झुनझुना पकड़ा गये।
और ये बौद्धिक क्लीव ( नपुंसक) वामपंथिये उन्ही हत्यारों के तलवे आज तक चाट रहे हैं ?
आखिर कब तक ?
Dr.tribhuvan singh

Saturday, 21 October 2017

   पैगंबर मोहम्मद की शिक्षा के ग़लत इस्तेमाल पर रोक लगाने  मुहिम चलाएगा सऊदी अरब ...

अब सऊदी अरब एक ऐसी संस्था तैयार करने जा रहा है जो पैगंबर मोहम्मद की शिक्षा के ग़लत इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए मुहिम चलाएगा। सऊदी के शाह सलमान ने मदीना में ऐसे मजहबी संगठन को तैयार करने का हुक्म जारी कर दिया है। इस संगठन में दुनिया भर से इस्लाम के जानकारों को शामिल किया जाएगा।
 सऊदी के सूचना मंत्रालय ने बताया कि ये जानकार किसी भी ऐसी इबारत को निकलवाएंगे जिसमें इस्लामी शिक्षा की ग़लत व्याख्या की गई हो और जिनका इस्तेमाल हिंसा और आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है।
 इस्लामिक क़ानून में सबसे ऊपर क़ुरान को माना जाता है. क़ुरान में वो सब बातें हैं जो अल्लाह ने पैगंबर मोहम्मद से कही।  दूसरा स्त्रोत सुन्नाह यानि हदीस को माना गया है। हदीस में वो बातें हैं जो इस्लाम के जानकारों ने पैगंबर मोहम्मद के रहन-सहन, आदतों से निकाली हैं। 
हदीस की व्याख्या  इस्लाम के जानकार अपनी-अपनी समझ के अनुसार करते रहे हैं। सऊदी अरब की डर जायज है क्योंकी कुरान का हवाला देकर और जिहाद को सीखा कर ये आतंकी आतंक फैलाते है। ये संगठन किस तरह काम करेगी, अभी इसकी जानकारी नहीं दी गई है।

Friday, 20 October 2017

--चित्तौड़गढ़ का तीसरा जौहर और जयमल-पत्ता का बलिदान----
राजपूत विरूद्ध मुग़ल युद्ध 1568 ईस्वी
पुरखों के शौर्य,रक्त और बलिदान को भुलाये कैसे???
पुरखो के शाका और जौहर को हम इतनी आसानी से नही भूल सकते।राजपूत योद्धा अपनी प्रजा के रक्षा करना जानते थे ,जीते जी एक पर भी आंच नही आने दी,कट गए मर मिटे इज्जत की खातिर जौहर की चिता में लाखो राजपूतानिया जिन्दा जल गई,लाखो राजपूत योद्धा कट गए, सिर कट गए धड़ लड़ते रहे ।
वक़्त 15 वी शताब्दी दिल्ली के मुग़ल बादशाह ने मेवाड़ चित्तौड़ पर आक्रमण की योजना की और खुद 60000 मुगलो की सेना लेकर मेवाड़ आया।उस वक़्त महाराणा उदय सिंह भी लोहा लेने को तैयार हुए अपने पूर्वज बाप्पा रावल राणा हमीर राणा कुम्भा राणा सांगा के मेवाड़ी वंसज तैयार हुए पर मेवाड़ के तत्कालीन ठाकुरो/उमरावो ने उदय सिंह जी को मेवाड़ हित में कहा की आप न लडे क्यों की आपको कुंभलगढ़ में सेना मजबूत करनी है ।अंत ना मानने पर भी उमरावो ठाकुरो ने उन्हें कुंभलगढ़ भेज दिया और फैसला किया मेड़ता के दूदा जी पोते वीरो के वीर शिरोमणि जयमल मेड़तिया को चित्तोड़ का सेनापति बना भार सोपने का और जयमल के साले जी पत्ता जी चुण्डावत को उनके साथ नियुक्त किया गया।
खबर मिलते ही जयमल जी और उनके भाई बन्धु प्रताप सिंह और दूसरे भाई भतीजे राठौड वीरो की तीर्थ स्थली चित्तोड़ की और निकल पड़े ।निकलते ही अजमेर के आगे मगरा क्षेत्र में उनका सामना हुआ वहा बसने वही रावत जाति के लूटेरो से!!!!!
भारी लाव लश्कर और जनाना के साथ जयमल जी को लूटेरो ने रोक दिया एक लूटरे ने सिटी बजायी देखते ही देखते एक पेड़ तीरो से भर गया सभी समझ चुके थे की वे लूटेरो से घिरे हुए है ।
तभी भाई प्रताप सिंह ने कहा की "अठे या वटे" जयमल जी ने कहा "वटे" तभी जनाना आदि ने सारे गहने कीमति सामान वही छोड़ दिया और आगे चल पड़े लूटेरो की समझ से ये बाहर था कि एक राजपूत सेना जो तलवारो भालो से सुसज्जित है वो बिना किसी विवाद और लडे इतनी आसानी से कैसे छोड़ जा सकते है।अभी जयमल की सेना अपने इष्ट नाथद्वारा में श्रीनाथ जी के दर्शन ही कर रही थी कि तभी लूटेरे फिर आ धमके और सरदार ने जयमल जी से कहा की ये "अटे और वटे" क्या है ????
तब वीर जयमल मेड़तिया ने कहा की यहाँ तुमसे धन के लिए लडे या वहा चित्तौड़ में तुर्को से ?
तभी लूटेरे सरदार की आँखों में आंसू आ गए और उसने जयमल जी के पैेरो में गिर कर माफ़ी मांगी और अपनों टुकड़ी को शामिल करने की बात कही पर जयमल जी ने कहा की तुम लूटपाठ छोड़ यहाँ मुगलो का सामना करो।अतः लूटेरे आधे रास्ते वीरो को छोड़ने आये और फिर लोट गए।
मेड़ता के वीर अब चित्तोड़ में प्रवेश कर गए और किले की प्रजा को सुरक्षित निकालने में जुटे ही थे कि तभी खबर मिली की मुग़ल सेना ने 10 किमी दूर किले के नीचे डेरा जमा दिया है। सभी 9 दरवाजे बंद किये गए 8000 राजपूत वीर वही किले में रहे।
मुगलो ने किले पर आक्रमण किया पर हर बार वो असफल हुये आखिर में मुगलो ने किले की दीवारो के निचे सुरंगे बनाई पर रात में राजपूत फिर उसे भर देते थे ।आखिर में किले के दरवाजो के पास दीवारे तोड़ी पर योद्धा उसे रात में फिर बना देते थे।ये जद्दोजहद 5 माह तक चलती रही पर किले के निचे मुगलो की लाशे बिछती गई।उस वक़्त मजदूरी इंतनी महगी हो गयी की एक बाल्टी मिट्टी लाने पर एक मुग़ल सैनिक को एक सोने का सिक्का दिया गया।वहाँ मिटटी सोने से अधिक महंगी हो गयी थी।
अब अकबर ने जयमल जी के पास अपना दूत भेजकर प्रलोभन दिया कि अगर मेरे अधीनता स्वीकार करे तो जयमल को उसके पुरखों का राज्य मेड़ता सहित पूरे मेवाड़ का भी राजा बना देगा।तब वीरवर सूर्यवंशी राजपूत गौरव राव जयमल राठौड़ मेड़तिया का उत्तर था-------
है गढ़ म्हारो म्है धणी,असुर फ़िर किम आण |
कुंच्यां जे चित्रकोट री दिधी मोहिं दीवाण ||
जयमल लिखे जबाब यूँ सुनिए अकबर शाह |
आण फिरै गढ़ उपरा पडियो धड पातशाह ||
अर्थात अकबर ने कहा जयमल मेड़तिया तू अपने प्राण चित्तोड और महाराणा के लिए क्यों लूटा रहा है ?
तू मेरा कब्ज़ा होने दे में तुझे तेरा मूल प्रदेश मेड़ता और मेवाड़ दोनों का राजा बना दूंगा ।
पर जयमल ने इस बात को नकार कर उत्तर दिया मै अपने स्वामी के साथ विश्वासघात नही कर सकता।
मेरे जीते जी तू अकबर तुर्क यहाँ प्रवेश नही कर सकता मुझे महाराणा यहाँ का सेनापति बनाकर गए है।
एक हरियाणवी रागिनी गायक ने भी जयमल के बारे में क्या खूब लिखा है कि जब अकबर के संधि प्रस्ताव को जयमल ठुकराकर अकबर को उसी के दूत के हाथों सन्देश भिजवाता है कि---
ए अकबर
"हम क्षत्री जात के ठाकुर, समझे न इंसाण तनै"
"रे तै हिजड़ा के गीत सुणे सै,देखे न बलवान तैने"।।
अब अकबर घबरा गया और उसने अजमेर शरीफ से दुवा मांगी कि अगर वो इस युद्ध में कामयाब हो गया तो वो अजमेर जियारत के लिए जरुर जाएगा।
एक दिन रात में जयमल जी किले की दिवार ठीक करवा रहे थे और अकबर की नजर उन पर पड़ गयी।तभी अकबर ने अपनी बन्दुक संग्राम से एक गोली चलाई जो जयमल के पैरो पर आ लगी और वो घायल हो गए।गोली का जहर शरीर में फैलने लगा।अब राजपूतो ने कोई चारा न देखकर जौहर और शाका का निर्णय लिया।
आखिर वो दिन आ ही गया 6 माह तक किले को मुग़ल भेद नही पाये और रसद सामग्री खाना आदि खतम हो चुकी था ।किले में आखिर में एक ऐसा निर्णय हुआ जिसका अंदाजा किसी को नही था और वो निर्णय था जौहर और शाका का और दिन था 23 फरवरी 1568!!!!!
चित्तौड़ किले में कुण्ड को साफ़ करवाया गया गंगाजल से पवित्र किया गया ।बाद में चन्दन की लकड़ी और नारियल से उसमे अग्नि लगायी गयी उसके बाद जो हुआ वो अपने आप में एक इतिहास था।
हजारों राजपूतानिया अपने अपनी पति के पाव छूकर और अंतिम दर्शन कर एक एक कर इज्जत कि खातिर आग में कूद पड़ी और सतीत्व को प्राप्त हो गयी ये जौहर नाम से जाना गया।
रात भर 8000 राजपूत योद्धा वहा बैठे रहे और सुबह होने का इन्तजार करने लगे ।सुबह के पहले पहर में सभी ने अग्नि की राख़ का तिलक किया और देवी पूजा के बाद सफ़ेद कुर्ते पजामे और कमर पर नारियल बांध तैयार हुए।
अब जौहर के बाद ये सभी भूखे शेर बन गए थे।
मुग़ल सेना चित्तोड किले में हलचल से पहले ही सकते में थी।उन्होंने रात में ही किले से अग्नि जलती देखकर समझ आ गया था कि जौहर चल रहा है और कल अंतिम युद्ध होगा।
सुबह होते ही एकाएक किले के दरवाजे खोले गए। जयमल जी के पाँव में चोट लगने की वजह से वो घोड़े पर बैठने में असमर्थ थे तो वो वीर कल्ला जी राठौड़ के कंधे पर बेठे।
युद्ध शुरू होते ही वीर योद्धाओ ने कत्ले आम मचा दिया अकबर दूर से ही सब देख रहा था।जयमल जी और कल्ला जी ने तलवारो का जोहर दिखाया और 2 पाव 4 हाथो से मारकाट करते गये उन्हें देख मुग़ल भागने लगी।
स्वयम अकबर भी यह दृश्य देखकर अपनी सुध बुध खो बैठा। उसने चतुर्भुज भगवांन का सुन रखा था।
"जयमल बड़ता जीवणे, पत्तो बाएं पास |
हिंदू चढिया हथियाँ चढियो जस आकास" ||
पत्ता जी प्रताप सिंह जी जयमल जी कल्ला जी आदि वीरो के हाथो भयंकर मार काट हुयी ।
सिर कटे धड़ लड़ते रहे ।
"सिर कटे धड़ लड़े रखा रजपूती शान "
दो दो मेला नित भरे, पूजे दो दो थोर॥
जयमल जी के एक वार से 2 - 2 मुग़ल तुर्क साथ कटते गए किले के पास बहने वाली गम्भीरी नदी भी लाल हो गयी। सिमित संसाधन होने के बाद भी राजपूती सेना मुगलो पर भारी पढ़ी।
युद्ध समाप्त हुआ कुल 48000 सैनिक मारे गए जिनमे से पुरे 8000 राजपूत वीरगति को गए तो बदले में 40000 मुग़लो को भी साथ ले गए ।
बचे तो सिर्फ अकबर के साथ 20000 मुग़ल बाद में अकबर किल्ले में गया वहा कुछ न मिला। तभी अकबर ने चित्तौड़ की शक्ति कुचलने के लिये वहाँ कत्लेआम का आदेश दिया और 30 हजार आम जनता को क्रूरता से मारा गया।यह कत्लेआम अकबर पर बहुत बड़ा धब्बा है।
अकबर जयमल जी और पत्ता जी की वीरता से प्रभावित हुआ और नरसंहार का कलंक धोने के लिये उसने उनकी अश्ववारुड मुर्तिया आगरा के किले के मुख द्वार पर लगवायी।
वही कल्ला जी घर घर लोकदेवता के रूप में पूजे गए मेवाड़ महाराणा से वीरता के बदले वीर जयमल मेड़तिया के वंशजो को बदनोर का ठिकाना मिला तो पत्ता जी चुण्डावत के वंशज को आमेट ठिकाना ।
वही प्रताप सिंह मेड़तिया के वंशज को घाणेराव ठिकाना दिया गया।
ये वही जयमल मेड़तिया है जिन्हीने एक ही झटके में हाथी की सिर काट दिया था
ये वही वीर जयमल जी है वो महाराणा प्रताप के सैनिक(अस्त्र शस्त्र) गुरु भी थे।
ये वही वीर है जो स्वामिभक्ति को अपनी जान से ज्यादा चाहा अकबर द्वारा मेवाड़ के राजा बनाए जाने के लालच पर भी नही झुके।
कर्नल जेम्स टोड राजस्थान के प्रत्येक राज्य में "थर्मोपल्ली" जैसे युद्ध और "लियोनिडास" जैसे योधा होनी की बात स्वीकार करते हैं ये जयमल पत्ता जैता कुंपा गोरा बादल जैसे सैंकड़ो वीरो के कारण है।
हिंदू,मुस्लमान,अंग्रेज,फ्रांसिस,जर्मन,पुर्तगाली आदि अनेक इतिहासकारों ने जयमल के अनुपम शौर्य का वर्णन किया है |
अबुल फजल,हर्बर्ट,सर टामस रो, के पादरी तथा बर्नियर जैसे प्रसिद्ध लेखकों ने जयमल के कृतित्व की अत्यन्त ही प्रसंशा की है |
जर्मन विद्वान काउंटनोआर ने अकबर पर जो पुस्तक लिखी उसमे जयमल को "Lion of Chittor" कहा |
नमन है ऐसे वीरो को।।
साभार :- Divyrajsinh Sarvaiya (Dedarda)
पिछले 125 सालों में एक अवधारणा विकसित की गयी कि वेदों के रचना के बाद #दुष्ट और #लालची ब्राम्हणों ने अपनी श्रेष्ठता बनाये रखने के लिए Caste यानि जाति का निर्माण किया ।

ये बात कही सबसे पहले 20वी शताब्दी के अंत में एक पादरी ने , उस पादरी का नाम था MA Sherring । जो इस बात से परेशान् था कि भारतीय समाज इस व्यवस्था के कारण एक सीमेंट की तरह एक दूसरे से जुड़ा हुवा है । वो इस बात से फ्रुस्टेट था कि 150 साल की लूट खसोट और लोगों को दरिद्रता की खाइं में धकेलने के बाद भी वे इसाईं बनने को तैयार नही थे ।

इस बात को आधार बनाकर गौरांग प्रभुओं ने लाखों पन्नों का साहित्य सृजन किया । उनके जाने के बाद ये काम वामपंथी नेहरुविअन और मार्कसिये बौद्धिक बौनों के कन्धों पर आन् पड़ा। जिसमे बौद्धिक बौने , वामिये और दलित चिंतक , सामजिक समरसता के हवाले से जाति को धर्म का byproduct बताते है ।  वरना आज ब्राम्हण क्षत्रिय वैश्य एवम् शूद्र वर्णो के नाम है न् कि जातियों के ।
आप किसी सरकारी संस्थान में जाते है तो आपसे पूंछा जाता है कि आपका धर्म और जाति क्या है ? आप लिखते हैं - फलाने पांडेय , धर्म हिंदू , जाति ब्राम्हण । खैर इसके पीछे का रहस्य समझें।

दरअसल मैकाले का भूत भारत के पढ़े लिखे तबके पर अभी भी सवार है । पिछले 150 वर्षों में अंग्रेजी ही भारत के पढ़े लिखे लोगों की एक मात्र भाषा रही है । स्वतंत्र भारत में जब्  लोग उच्च शिक्षा लेने के लिए पहुंचे तो उनके सामने आंग्ल भाषा और गौरांग प्रभुओं के लेखनी के द्वारा लिखित ब्रम्हवाक्यों से भरे साहित्य का भंडार था । मार्क्स और जेम्स मिल आदि आदि को पढ़ लिख कर जब् वे बड़े अकादमिक और सरकारी पदों पर आसीन हुए तो उनको आभास हुवा कि वे तो जाहिल और असभ्यों की वंसजें थे जिनको आंग्ल भाषी गौरंगों ने सभ्य बनाने का पुनीत रास्ता दिखाया था ।

 उन्होंने हर आंग्ल शब्द का देशज भाषा में अनुवाद किया जाय। उसमे भी कुछ दिक्कतें आयीं कि जो सभ्यता संस्कृति और शब्द देशज भाषा में उपलब्ध न् हों तो  पढ़े लिखे मैकाले पुत्र बाबुओं ने  गौरांग प्रभुओं के पूर्व आये अल्लाह के बंदों की अरबी और पर्सियन भाषा से उनको उधार ले लिया  ।
अब उद्धरण : पहले आंग्ल भाषी प्रभुओं की भाषा के शब्दों का -
रिलिजन - धर्म
Caste - जाति
Secularism - धर्मनिरपेक्षता
Sufficient - पर्याप्त
Insufficient - अपर्याप्त
अब अरबिक और फारसी शब्दों से उधार लिए शब्द -
रिलिजन - मजहब
Honesty - ईमानदारी
Dishonesty - बे ईमानी
Race - नश्ल

अन्य मित्रों से भी बोलूंगा कि इसमें जोड़ें । एक प्रश्न है - "यदि जाति यानि Caste धर्म का byproduct है तो आपसे आग्रह है कि #Half_Caste और #Quarter_Caste जैसे शब्दों की उत्पत्ति कहाँ और किस धर्म से हुयी है 
कृपया गूगल की मदद लें ।"
© त्रिभुवन सिंह