Tuesday, 20 February 2018

हवा में लकड़ी की तलवार घुमाने वाले वीरों से
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जन्मना जाति मानने वाले और न मानने वाले दोनों ही प्रकार के लोगों से मेरी प्रार्थना है कि अपनी लकड़ी की तलवार हवा में घुमाते हुए आप स्वयम को वीर माने रहिये , अन्य को आप विदूषक दिखेंगे और वह इसका लाभ लेगा .
कृपया अपनी शक्ति सार्थक कार्य में लगायें ,आगे जैसी आपकी इच्छा.
१९४७ के बाद हिन्दुओं के लिए धर्म निजी विश्वास का विषय बनाया जा चूका है कानूनन और इस्लाम तथा ईसाइयत को अल्पसंख्यक के रूप में विशेष संरक्षण देकर सामूहिक शक्ति का दर्जा दिया जा चूका है ,यह महापाप कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने किया ,साधारण कांग्रेसी कुछ समझा नहीं,भाजपा इस विषय में अब तक निर्वीर्य सिद्ध हुयी है .
स्थिति यह है कि आप क्या मानते हैं (अगर आप हिन्दू हैं तो ) यह आपका वयस्क व्यक्ति का निजी अधिकार है ,अन्य को आप विवश नहीं कर सकते .शासन की तो इसमें कोई रूचि ही नहीं है कि आप क्या मानते हैं . अतः आप जाति जन्म से माने या न माने ,यह आपका निजी विश्वास है और आप इसकी अभिव्यक्ति कर सकते हैं पर आपको इस विषय में कोई अधिकार प्राप्त नहीं है जबकि इस्लम और ईसाइयत को अधिकार प्राप्त है कि वे आपके विरुद्ध अभियान चलायें .
यह स्थिति एक मामूली अध्यादेश या संशोधन से बदली जा सकती है कि.
" भारत का राज्य बहुसंख्यकों के धर्म को भी वैसा ही संरक्षण देगा जैसा अल्प संख्यकों के religion और मज्हब को देता है" . यह निवेदन ४० वर्ष से तो मैं कर रहा हूँ ,अन्य लोग और पहले से कर रहे हैं .
भारत को धार्मिक स्वतंत्रता की घोषणा करनी चाहिए कि हर भारतीय को अपने मन का धर्म चुनने का अधिकार होगा . ऐसा आज तक नहीं किया गया क्योंकि इस से मुसलमानों और ईसाइयों की करोडो की संख्या हिन्दू बनने को उमड़ पड़ेगी . इसकी जगह धार्मिक सुधार की आड़ में हिन्दू धर्म पर आक्रमण की छूट ही नहीं प्रोत्साहन दिया जा रहा है जिसमे दलितवाद आदि आदि औजार हैं
जातिगत विषमता कानूनन दंडनीय अपराध है अतः उस विषमता के विरुद्ध तलवार भांजने वाले या तो विदूषक हैं या किसी की कठपुतली . भगवान् कृष्णके शब्दों में वे " जीर्णं चरन्ति ".
आज किसी समूह या जाति या समाजके पास कोई अधिकार ही नहीं है कि वह जाति के विषय में कोई निर्णय लेकर उसे लागू करा सके . आप केवल बात कर सकते हैं . अतः आप जाति जन्म से मानते हैं या उसके विरोधी हैं ,इसकी कोई विधिक हैसियत नहीं है . आ प को मन है तो पहले समाज को अधिकार तो दिलाइये ..
वैसे अभी जन्मना जाति ही कानून में मान्य है . आप स्वयं को जाति रहित कहने के तो अधिकारी हैं पर जन्म से भिन्न अपनी जाति बताने पर आपके लिए जेल का प्रावधान है
. यह विधिक स्थिति जानकर भी ,फिर आप हवा में अपनी लकड़ी की तलवार शौक से घुमाइए , मनोरंजन अच्छा होगा .दुनिया हँसेगी और कुछ लोग लाभ भी उठायेगे तो उठायें जी , आपकी बला से .आपको तो अपनी कहनी है ,कहिये .आप १९१० या २० या ३० या ४० में मन से रहें ,भले तन २०१८ में है
ओए , तुस्सी मौज करो बादशाओ .
स्वामी विवेकानन्द : ऎसा कोई अन्य मजहब नहीं जिसने इतना अधिक रक्तपात किया हो और अन्य के लिए इतना क्रूर हो । इनके अनुसार जो कुरान को नहीं मानता कत्ल कर दिया जाना चाहिए । उसको मारना उस पर दया करना है । जन्नत ( जहां हूरे और अन्य सभी प्रकार की विलासिता सामग्री है ) पाने का निश्चित तरीका गैर ईमान वालों को मारना है । इस्लाम द्वारा किया गया रक्तपात इसी विश्वास के कारण हुआ है । * सोर्स - कम्प्लीट वर्क आफ विवेकानन्द वॉल्यूम 2 पृष्ठ 252-253


* गुरु नानक देव : मुसलमान सैय्यद , शेख , मुगल पठान आदि सभी बहुत निर्दयी हो गए हैं । जो लोग मुसलमान नहीं बनते थें उनके शरीर में कीलें ठोककर एवं कुत्तों से नुचवाकर मरवा दिया जाता था । * सोर्स- नानक प्रकाश तथा प्रेमनाथ जोशी की पुस्तक पैन इस्लाममिज्म रोलिंग बैंक पृष्ठ 80


* महर्षि दयानन्द सरस्वती : इस मजहब में अल्लाह और रसूल के वास्ते संसार को लुटवाना और लूट के माल में खुदा को हिस्सेदार बनाना शबाब का काम हैं । जो मुसलमान नहीं बनते उन लोगों को मारना और बदले में बहिश्त को पाना आदि पक्षपात की बातें ईश्वर की नहीं हो सकती । श्रेष्ठ गैर मुसलमानों से शत्रुता और दुष्ट मुसलमानों से मित्रता , जन्नत में अनेक औरतों और लौंडे होना आदि निन्दित उपदेश कुएं में डालने योग्य हैं । अनेक स्त्रियों को रखने वाले मुहम्मद साहब निर्दयी , राक्षस व विषयासक्त मनुष्य थें , एवं इस्लाम से अधिक अशांति फैलाने वाला दुष्ट मत दसरा और कोई नहीं । इस्लाम मत की मुख्य पुस्तक कुरान पर हमारा यह लेख हठ , दुराग्रह , ईर्ष्या विवाद और विरोध घटाने के लिए लिखा गया , न कि इसको बढ़ाने के लिए । सब सज्जनों के सामन रखने का उद्देश्य अच्छाई को ग्रहण करना और बुराई को त्यागना है ।। * सोर्स - सत्यार्थ प्रकाश 14 वां समुल्लास विक्रमी 2061


* महर्षि अरविन्द : हिन्दू मुस्लिम एकता असम्भव है क्योंकि मुस्लिम कुरान मत हिन्दू को मित्र रूप में सहन नहीं करता । हिन्दू मुस्लिम एकता का अर्थ हिन्दुओं की गुलामी नहीं होना चाहिए । इस सच्चाई की उपेक्षा करने से लाभ नहीं ।किसी दिन हिन्दुओं को मुसलमानों से लड़ने हेतु तैयार होना चाहिए । हम भ्रमित न हों और समस्या के हल से पलायन न करें । हिन्दू मुस्लिम समस्या का हल अंग्रेजों के जाने से पहले सोच लेना चाहिए अन्यथा गृहयुद्ध के खतरे की सम्भावना है । * सोर्स- ए बी पुरानी इवनिंग टाक्स विद अरविन्द पृष्ठ 291-289-666


* सरदार वल्लभ भाई पटेल : मैं अब देखता हूं कि उन्हीं युक्तियों को यहां फिर अपनाया जा रहा है जिसके कारण देश का विभाजन हुआ था । मुसलमानों की पृथक बस्तियां बसाई जा रहीं हैं । मुस्लिम लीग के प्रवक्ताओं की वाणी में भरपूर विष है । मुसलमानों को अपनी प्रवृत्ति में परिवर्तन करना चाहिए । मुसलमानों को अपनी मनचाही वस्तु पाकिस्तान मिल गया हैं वे ही पाकिस्तान के लिए उत्तरदायी हैं , क्योंकि मुसलमान देश के विभाजन के अगुआ थे न कि पाकिस्तान के वासी । जिन लोगों ने मजहब के नाम पर विशेष सुविधांए चाहिंए वे पाकिस्तान चले जाएं इसीलिए उसका निर्माण हुआ है । वे मुसलमान लोग पुनः फूट के बीज बोना चाहते हैं । हम नहीं चाहते कि देश का पुनः विभाजन हो * सोर्स- संविधान सभा में दिए गए भाषण का सार


* भीम राव अंबेडकर : हिन्दू मुस्लिम एकता एक अंसभव कार्य हैं भारत से समस्त मुसलमानों को पाकिस्तान भेजना और हिन्दुओं को वहां से बुलाना ही एक हल है । यदि यूनान तुर्की और बुल्गारिया जैसे कम साधनों वाले छोटे छोटे देश यह कर सकते हैं तो हमारे लिए कोई कठिनाई नहीं । साम्प्रदायिक शांति हेतु अदला बदली के इस महत्वपूर्ण कार्य को न अपनाना अत्यंत उपहासास्पद होगा । विभाजन के बाद भी भारत में साम्प्रदायिक समस्या बनी रहेगी । पाकिस्तान में रुके हुए अल्पसंख्यक हिन्दुओं की सुरक्षा कैसे होगी ? मुसलमानों के लिए हिन्दू काफिर सम्मान के योग्य नहीं है । मुसलमान की भातृ भावना केवल मुसमलमानों के लिए है । कुरान गैर मुसलमानों को मित्र बनाने का विरोधी है , इसीलिए हिन्दू सिर्फ घृणा और शत्रुता के योग्य है । मुसलामनों के निष्ठा भी केवल मुस्लिम देश के प्रति होती है । इस्लाम सच्चे मुसलमानो हेतु भारत को अपनी मातृभूमि और हिन्दुओं को अपना निकट संबधी मानने की आज्ञा नहीं देता । संभवतः यही कारण था कि मौलाना मौहम्मद अली जैसे भारतीय मुसलमान भी अपेन शरीर को भारत की अपेक्षा येरूसलम में दफनाना अधिक पसन्द किया । कांग्रेस में मुसलमानों की स्थिति एक साम्प्रदायिक चौकी जैसी है । गुण्डागर्दी मुस्लिम राजनीति का एक स्थापित तरीका हो गया है । इस्लामी कानून समान सुधार के विरोधी हैं । धर्म निरपेक्षता को नहीं मानते । मुस्लिम कानूनों के अनुसार भारत हिन्दुओं और मुसलमानों की समान मातृभूमि नहीं हो सकती । वे भारत जैसे गैर मुस्लिम देश को इस्लामिक देश बनाने में जिहाद आतंकवाद का संकोच नहीं करते । * सोर्स - प्रमाण सार डा अंबेडकर सम्पूर्ण वाग्मय , खण्ड 151



* माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर श्री गुरू जी : पाकिस्तान बनने के पश्चात जो मुसलमान भारत में रह गए हैं क्या उनकी हिन्दुओं के प्रति शत्रुता , उनकी हत्या , लूट दंगे, आगजनी , बलात्कार , आदि पुरानी मानसिकता बदल गयी है , ऐसा विश्वास करना आत्मघाती होगा । पाकिस्तान बनने के पश्चात हिन्दुओं के प्रति मुस्लिम खतरा सैकड़ों गुणा बढ़ गया है । पाकिस्तान और बांग्लादेश से घुसपैठ बढ़ रही है । दिल्ली से लेकर रामपुर और लखनउ तक मुसलमान खतरनाक हथियारों की जमाखोरी कर रहे हैं । ताकि पाकिस्तान द्वारा भारत पर आक्रमण करने पर वे अपने भाइयों की सहायता कर सके । अनेक भारतीय मुसलमान ट्रांसमीटर के द्वारा पाकिस्तान के साथ लगातार सम्पर्क में हैं । सरकारी पदों पर आसीन मुसलमान भी राष्ट्र विरोधी गोष्ठियों में भाषण देते हें । यदि यहां उनके हितों को सुरक्षित नहीं रखा गया तो वे सशस्त्र क्रांति के खड़े होंगें । * बंच आफ थाट्स पहला आंतरिक खतरा मुसलमान पृष्ठ 177-187


* रवीन्द्र नाथ टैगोर : ईसाई व मुसलमान मत अन्य सभी को समाप्त करने हेतु कटिबद्ध हैं । उनका उद्देश्य केवल अपने मत पर चलना नहीं है अपितु मानव धर्म को नष्ट करना है । वे अपनी राष्ट्र भक्ति गैर मुस्लिम देश के प्रति नहीं रख सकते । वे संसार के किसी भी मुस्लिम एवं मुस्लिम देश के प्रति तो वफादार हो सकते हैं परन्तु किसी अन्य हिन्दू या हिन्दू देश के प्रति नहीं । सम्भवतः मुसलमान और हिन्दू कुछ समय के लिए एक दूसरे के प्रति बनवटी मित्रता तो स्थापित कर सकते हैं परन्तु स्थायी मित्रता नहीं । * सोर्स - रवीन्द्र नाथ वाडमय 25 वां खण्ड पृच्च्ठ 275 , टाइम्स आफ इंडिया 1704 -1927 , कालान्तर


* यहाँ तक की घोर सेक्युलर मोहनदास करम चन्द्र गांधी ने भी इस्लाम पर कहा : मेरा अपना अनुभव है कि मुसलमान कूर और हिन्दू कायर होते हैं मोपला और नोआखली के दंगों में मुसलमानों द्वारा की गयी असंख्य हिन्दुओं की हिंसा को देखकर अहिंसा नीति से मेरा विचार बदल रहा है । * सोर्स - गांधी की जीवनी, धनंजय कौर पृष्ठ 402


* लाला लाजपत राय : मुस्लिम कानून और मुस्लिम इतिहास को पढ़ने के पश्चात मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि उनका मजहब उनके अच्छे मार्ग में एक रुकावट है । मुसलमान जनतांत्रिक आधार पर हिन्दुस्तान पर शासन चलाने हेतु हिन्दुओं के साथ एक नहीं हो सकते । क्या कोई मुसलमान कुरान के विपरीत जा सकता है ? हिन्दुओं के विरूद्ध कुरान और हदीस की निषेधाज्ञा की क्या हमें एक होने देगी ? मुझे डर है कि हिन्दुस्तान के ७ करोड़ मुसलमान अफगानिस्तान , मध्य एशिया अरब , मैसोपोटामिया और तुर्की के हथियारबंद गिरोह मिलकर अप्रत्याशित स्थिति पैदा कर देंगें । * सोर्स - पत्र सी आर दास बी एस ए वाडमय खण्ड 15 पृष्ठ 279


* समर्थ गुरू राम दास जी : छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरू अपने ग्रंथ दास बोध में लिखते हैं कि मुसलमान शासकों द्वारा कुरान के अनुसार काफिर हिन्दू नारियों से बलात्कार किए गए जिससे दुःखी होकर अनेकों ने आत्महत्या कर ली । मुसलमान न बनने पर अनेक कत्ल किए एवं अगणित बच्चे अपने मां बाप को देखकर रोते रहे । मुसलमान आक्रमणकारी पशुओं के समान निर्दयी थे , उन्होंने धर्म परिवर्तन न करने वालों को जिन्दा ही धरती में दबा दिया । * सोर्स - डा एस डी कुलकर्णी कृत एन्कांउटर विद इस्लाम


* राजा राममोहन राय : मुसलमानों ने यह मान रखा है कि कुरान की आयतें अल्लाह का हुक्म हैं । और कुरान पर विश्वास न करने वालों का कत्ल करना उचित है । इसी कारण मुसलमानों ने हिन्दुओं पर अत्यधिक अत्याचार किए , उनका वध किया , लूटा व उन्हें गुलाम बनाया । * सोर्स - वाङ्मय-राजा राममोहन राय पृष्ट 726-727


* श्रीमति ऐनी बेसेन्ट : मुसलमानों के दिल में गैर मुसलमानों के विरूद्ध नंगी और बेशर्मी की हद तक तक नफरत हैं । हमने मुसलमान नेताओं को यह कहते हुए सुना है कि यदि अफगान भारत पर हमला करें तो वे मसलमानों की रक्षा और हिन्दुओं की हत्या करेंगे । मुसलमानों की पहली वफादार मुस्लिम देशों के प्रति हैं , हमारी मातृभूमि के लिए नहीं । यह भी ज्ञात हुआ है कि उनकी इच्छा अंग्रेजों के पश्चात यहां अल्लाह का साम्राज्य स्थापित करने की है न कि सारे संसार के स्वामी व प्रेमी परमात्मा का का । स्वाधीन भारत के बारे में सोचते समय हमें मुस्लिम शासन के अंत के बारे में विचार करना होगा । * सोर्स - कलकत्ता सेशन 1917 डा बी एस ए सम्पूर्ण वाङ्मय खण्ड, पृष्ठ 272-275


* स्वामी रामतीर्थ : अज्ञानी मुसलमानों का दिल ईश्वरीय प्रेम और मानवीय भाईचारे की शिक्षा के स्थान पर नफरत , अलगाववाद , पक्षपात और हिंसा से कूट कूट कर भरा है । मुसलमानों द्वारा लिखे गए इतिहास से इन तथ्यों की पुष्टि होती है । गैर मुसलमानों आर्य खालसा हिन्दुओं की बढ़ी संख्या में काफिर कहकर संहार किया गया । लाखों असहाय स्त्रियों को बिछौना बनाया गया । उनसे इस्लाम के रक्षकों ने अपनी काम पिपासा को शान्त किया । उनके घरों को छीना गया और हजारों हिन्दुओं को गुलाम बनाया गया । क्या यही है शांति का मजहब इस्लाम ? कुछ एक उदाहरणों को छोड़कर अधिकांश मुसलमानों ने गैरों को काफिर माना है । * सोर्स - भारतीय महापुरूषों की दृष्टि में इस्लाम पृष्ठ 35-36
चाहे आप कितना भी विकास कर लो, सबके पास मर्सेडीज गाडी भी हो जाये, और 15 किलो सोना सबके पास और सबके पेट्रोल खाना पीना दारू सब फ्री, पर आप एक बात अच्छे से समझ लो, इन सभी से आपका और आपकी आने वाली पीढ़ी के दिन सुरक्षित रहेंगे, अगर आप ऐसा सोचते हो तो फिर इतिहास से आपने कुछ नहीं सीखा


3 बड़े भारतीय शहरों के नाम हम आपको बताते है, लाहौर, ढाका, और काबुल, ज्यादा मत सोचो जी, ये भारतीय शहर ही थे, और यहाँ पर हिन्दू धन्ना सेठ ऐसे थे की पुराने जमाने में भी उनके पास 7-7 मंजिले की दुकाने होती थी, आज यहाँ पर हिन्दू कितने है ये तो आप जानते ही हैं, और ये अब भारत भी नहीं रहा !!



आप भले कितना भी विकास पिकास कर लो, भारत को 2 चीजे बर्बादी की तरफ ले जा रही है, पहली तो सेकुलरिज्म और दूसरी हमारी चुप्पी, आप ऊपर अख़बार की न्यूज़ देख रहे है, ये जम्मू की स्तिथि है, सर्कार कोई भी हो पर सेकुलरिज्म के आगे उसने घुटने टेके हुए है, जम्मू कश्मीर में कहने को धारा 370 लगी हुई है, वहां एक आम भारतीय नहीं बस सकता पर रोहिंग्या चूँकि मुसलमान है, उनको सारी सुविधाएं दी जा रही है, वोटर कार्ड, राशन कार्ड, आधार कार्ड, बिजली और पानी का कनेक्शन


और बदले में रोहिंग्या हर औरत से 10 से ज्यादा बच्चे कर रहे है, अजी जल्द ही आपको ये जनसँख्या में पछाड़ देंगे, फिर आपका क्या हाल किया जायेगा, आप सोच भी नहीं सकते, क्यूंकि आप तो मस्त नींद में है, कहाँ टाइम है की थोड़ा विरोध आप करे, इतिहास से भी तो कुछ नहीं सीखा है


कश्मीरी हिन्दुओ को भारत में शरणार्थी की तरह रहते हुए 28 से ज्यादा साल हो गए है, उनको आज तक न्याय नहीं मिला पर इन विदेशी रोहिंग्यों को सुविधाएं दी जा रही है, और एक बात और नोट कर लीजिये, ये तमाम सुविधाएं आपके ही टैक्स के पैसे से दी जा रही है, इनकी फ़ौज तैयार हो रही है, कल आपको खदेड़ने के लिए !! आपकी चुप्पी आपके आने वाली पीढ़ी पर बहुत बड़ा शाप साबित होगी !
जो हिन्दू इस घमंड मे जी रहे है कि अरबों सालों से सनातन धर्म है और इसे कोई नहीं मिटा सकता, मैं उनसे केवल इतना विनम्र अनुरोध करता हूँ कि नीचे लिखे तथ्यों को एक बार ध्यान से अवश्य पढ़ें:
🌎आखिर अफगानिस्तान से हिन्दू क्यों मिट गया ?
🌎"काबुल" जो भगवान राम के पुत्र कुश का बनाया शहर था, आज वहाँ एक भी मंदिर नहीं बचा।
🌎"गांधार" जिसका विवरण महाभारत में है, जहां की रानी गांधारी थी, आज उसका नाम कंधार हो चुका है, और वहाँ आज एक भी हिन्दू नहीं बचा l
🌎"कम्बोडिया" जहां राजा सूर्य देव बर्मन ने दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर "अंकोरवाट" बनाया, आज वहाँ भी हिन्दू नहीं है l
🌎"बाली द्वीप" में 20 साल पहले तक 90% हिन्दू थे, आज सिर्फ 20% बचे हैं l
🌎"कश्मीर घाटी" में सिर्फ 25 साल पहले 50% हिंदू थे, आज एक भी हिन्दू नहीं बचा l
🌎"केरल" में 10 साल पहले तक 60% जनसंख्या हिन्दुओं की थी, आज सिर्फ 10% हिन्दू केरल में हैं l
🌎"नोर्थ ईस्ट" जैसे सिक्किम, नागालैंड, आसाम आदि में हिन्दू हर रोज मारे या भगाए जाते हैं, या उनका धर्म परिवर्तन हो रहा है l
🌎मित्रों, 1569 तक ईरान का नाम पारस या पर्शिया होता था और वहाँ एक भी मुस्लिम नहीं था, सिर्फ पारसी रहते थे l
🌎जब पारस पर मुस्लिमों का आक्रमण होता था, तब पारसी बूढ़े - बुजुर्ग अपने नौजवान को यही सिखाते थे कि हमें कोई मिटा नहीं सकता, लेकिन ईरान से सारे के सारे पारसी मिटा दिये गए l
धीरे - धीरे उनका कत्लेआम और धर्म - परिवर्तन होता रहा l
🌎एक नाव मे बैठकर 21 पारसी किसी तरह गुजरात के नौसारी जिले के उद्वावाडा गांव मे पहुंचे, और आज पारसी सिर्फ भारत में ही गिनती की संख्या में बचे हैं l
🌎हमेशा शांति की भीख मांगने वाले हिन्दुओं……
आज तक के इतिहास का सबसे बड़ा संकट अब हिन्दुओं पर आने वाला है l
🌎ईसाईयों के 80 देश और मुस्लिमों के 56 देश हैं l
🌎और हिन्दुओं का एक मात्र देश भारत ही अब हिन्दुओं के लिए सुरक्षित नहीं रहा l
🌎मैंने 10 लोगों को जो कि हिन्दू हैं, उनसे पूछा कि किस जाति के हो ?
🌎सभी ने अलग - अलग जवाब दिया……
किसी ने कहा राजपूत…
किसी ने कहा ब्राम्हण…
किसी ने कहा मेघवंशी
किसी ने कहा गुर्जर
किसी ने कहा माली
किसी ने कहा जाट…
किसी ने जैन कहा…
तो किसी ने अग्रवाल…… सब लोगों ने अलग - अलग बताया l
🌎लेकिन मैंने 10 मुसलमानोँ से पूछा कि कौन सी जाति के हो ?
सभी का एक जवाब आया…… "मुसलमान"
🌎मुझे बड़ा अजीब लगा, मैंने फिर से पूछा, फिर वही जवाब आया…… "मुसलमान"
🌎तब मुझे बहुत अफसोस हुआ, और लगा हम कितने अलग और वो कितने एक……
🌎कुछ समझ में आया हो तो आगे से कोई पूछे तो एक ही जवाब आना चाहिए……
॥ हिन्दू ॥
और अगर आप "हिन्दू" होने का गर्व करते हो तो इस मैसेज को इतना फैला दो यह मैसेज मुझे वापस किसी हिन्दू से ही मिले l
🌎पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट में एक मुस्लिम भाई ने जनहित याचिका डाली थी कि पड़ोसी मुल्क में हज करने के लिए सब्सिडी मिलती है तो हमें भी मिलनी चाहिए l
🌎पाकिस्तान कोर्ट ने जनहित याचिका रिजेक्ट करते हुये कहा कि "कुरान" और "हदीस" के हिसाब से हज पसीने की कमाई से करना पड़ता है, दूसरों की कमाई से नहीं l
🌎सब्सिडी इस्लाम के खिलाफ है, पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के हिसाब से भारतीय मुसलमानों को मिल रही सब्सिडी हराम है l
🌎क्या नेता इस पर कुछ टिप्पणी देंगे ?
🌎अजीब कानून है भैया……
गाय का चारा खाया तो जेल भेज दिया……
और जो गाय को खा रहा है उसको हज के लिए भेजते हो l
🌎ये जो नीचे एक वाक़या (कश्मीर का) लिखा है वो कोई मज़ाक नहीं है, कल ये आपके शहर में भी हो सकता है l
🌎अगर ये अमेरिका, जापान या फिर चाइना में हुआ होता तो इन शांतिप्रिय मजहब वालों को काट कर गटर में फेंक देते l
🌎कुछ दिन पहले NDTV के रवीश कुमार ने RSS के सिन्हा सर से तल्ख़ मुद्रा में पूछा था कि अगर देश में मुस्लिम ज्यादा हो जायेंगें तो कौन सा पहाड़ टूट पड़ेगा ?
इसका एक प्रायोगिक उत्तर कल के एक वाकये ने दिया l
🌎मुस्लिम बाहुल्य "काश्मीर विश्वविद्यालय" में एक फिल्म "हैदर" की शूटिंग चल रही थी, उसके एक दृश्य के फिल्मांकन के लिए तिरंगा झंडा लगाया गया, और कलाकारों को जय हिन्द बोलना पड़ा l
🌎इतना होना था कि विश्वविद्यालय के छात्र उस यूनिट पर टूट पड़े l
🌎फिल्म का सेट तोड़ दिया गया, काफी जद्दोजहद के बाद फिल्म के कलाकारों को बाहर निकाला जा सका l
🌎तिरंगे से उनकी नफरत और जय हिन्द पर आपत्ति इस सबका कारण थी l
🌎पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार किया लेकिन कालेज प्रशासन के कहने पर छोड़ दिया गया l
🌎ध्यान रहे वो अनपढ़ लोग नहीं, विश्वविद्यालय के छात्र थे l
🌎हाथ जोड़ के विनती है, इसे शेयर करें ये कोई छोटी खबर नहीं है l
🌎ये हमारे देश के सम्मान की बात है एक सुन्दर संवाद……
(एक बार ज़रूर पढ़ें )
🌎बी एस सी के छात्र का कॉलेज का पहला दिन……
(गले में बड़े-बड़े रुद्राक्ष की माला)
प्रोफेसर-- बड़े पंडित दिखाई देते हो, लेकिन कॉलेज में पढ़ाई लिखाई पर ध्यान दो…… पूजा पाठ घर में ही ठीक है l
(क्लास के सभी बच्चे ठहाका लगाते हैं)
छात्र (विनम्रता से)-- सर, आप मेरे गुरु हैं, और सम्माननीय भी इसलिए आपकी आज्ञा से ही कुछ कहना चाहूँगा l
🌎शिक्षक कहते हैं-- बोलो ?
छात्र-- सर, जब ऐसे छोटे कॉलेज छोड़िये आई आई टी और मेडिकल कॉलेज तक में मुस्लिम छात्र दाढ़ियाँ बढ़ाकर या टोपी चढ़ाकर जाते हैं और कितनी भी बड़ी लेक्चर हो क्लास छोड़कर नमाज़ के लिए बाहर निकल जाते हैं तो शिक्षकों को वो धर्मनिष्ठता लगती है l
🌎जब क्रिश्चियन छात्र गले में बड़े बड़े क्रॉस लटकाकर घूमते हैं तो वो धर्मनिष्ठता हैं, और ये उनके मजहब की बात हुई l
🌎और आज आपके सामने इसी क्लास में कितनी ही लड़कियों ने बुर्का पहना है, और कितने ही बच्चों ने जाली - टोपी चढ़ा रखी है तो आपने उन्हें कुछ नहीं कहा तो आखिर मेरी गलती क्या है ?
क्या बस इतना कि मैं एक हिंदू हूँ l
🌎शिक्षक क्लास छोड़कर बाहर चला गया ।
🌎1 मिनट चैटिंग छोडकर इस पोस्ट को जरूर पढेँ… वर्ना सारी जिन्दगी चैट ही करते रह जाओगे l
🌎आँखों से पर्दा हटाओ दोस्तों और मशाल जलाओ l

mediya

पुलिस को ठुल्ला कहा, इन्डियन आर्मी से पाकिस्तान में की गयी सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगे, अब चीफ सेक्रेटरी से मारपीट। देश मे ये पहली बार हुआ हैं विधायक द्वारा CM के कहने पर मुख्य सचिव पर हमला।
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Abhay Arondekar
कल 10:29 पूर्वाह्न बजे ·

मेरा देश वास्तव में महान है यहां घोटाले करने वाला नही कार्यवाही करने वाला दोषी माना जाता है.

Monday, 19 February 2018



विपक्ष की साजिश का रिपब्लिक टीवी ने पर्दाफाश किया है।
CII ने खुलासा किया है कि दावोस में PM के साथ ग्रुप फोटो वाली सूची में नीरव मोदी का नाम शामिल ही नहीं था! वर्ल्ड इकोनोमी फोरम के प्रायोजकों में से एक नीरव की कंपनी थी, जिस कारण अपनी कैपिसिटी पर वह एक साजिश के तहत ग्रुप में शामिल हो गया था!

 प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा NPA पर सख्ती को देखते हुए यूपीए सरकार में बैंक लूटने में पार्टनर रहे नेताओंऔर जिनके खाते में नीरव की कंपनी द्वारा करोड़ों ₹ ट्रांसफर यूपीए शासन के दौरान हुआ था ने नीरव को ग्रुप फोटो में शामिल करने की तिकड़म भिड़ाई थी ताकि पीएम पर दबाव बनाकर कार्रवाई को टाला जा सके! और यदि कार्रवाई हो तो सीधे पीएम को घसीट कर उनकी छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा सके! कांग्रेस, आपा, कम्युनिस्ट पार्टी और ‘पेटिकोट पत्रकारों’ ने इसी साजिश के तहत फोटो का खेल रचा था, जो अब खुलता जा रहा है।
चाबहार बंदरगाह के ज़रिए व्यापार बढ़ाने की पेशकश के अलावा ईरान ने अपने प्राकृतिक संसाधन को आसान शर्तों पर भारत को मुहय्या करवाने की इच्छा भी ज़ाहिर की है। यह चीन-पाकिस्तान की ग्वादर बंदरगाह-केन्द्रित गतिविधियों से बिगड़े क्षेत्र के संतुलन को वापस स्थापित करने की तरफ़ एक महत्त्वपूर्ण क़दम है। मज़हब के नज़रिए से देखें तो विश्व के शिया’ समाज के साथ सुन्नियों के मुक़ाबले हिन्दुओं के बेहतर ताल्लुक़ात रहे हैं। भारत में भी शिया’ओं की छोटी सी जनसंख्या ने अब तक कोई वबाल नहीं खड़ा किया है।
सर्वोपरि सांस्कृतिक एका का कारण यह है कि भारत की बोली उर्दू फ़ारसी व कई उत्तर भारतीय भाषाओँ के संमिश्रण से बनी जिसका एक रूप आधुनिक हिन्दी है। भारत के लिए चिंता का विषय बस इतना रहा कि भारत-ईरान रिश्तों की मज़बूती के इन तमाम ऐतिहासिक, भौगोलिक तथा सांस्कृतिक कारणों के बावजूद अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर ईरान ने हमारा साथ कम दिया है और मुसलमान राष्ट्रों का साथ ज़्यादा निभाया है।