Monday, 24 April 2017

बहुत ही कम लोग जानते है की जापान में हनुमान जी भी प्रधान देवता की तरह पूजे जाते है केवल हनुमान जी नहीं, जापान में अन्य हिंदू देवी देवताओं की भी पूजा की जाती है। जापान में कई हिंदू देवी-देवताओं जैसे शिव जी, ब्रह्मा, गणेश, गरुड़, वायु, वरुण आदि की पूजा आज भी की जाती है।आज हम आपको बताते है जापान के हनुमान जी के बारे में, ये है जापान के सन्नो गोंगेन – Sanno Gongen (Sannō) 山王権現 नामक देवता जो कि वानर देवता है। जापान में इन्हें Messanger या सन्देश लाने वाला देवता माना जाता है।

जापान में हनुमान जी का मंदिर

हनुमान जी के इस रूप को जापान में सदियों पहले से पूजा जाता रहा है। बोद्ध धर्म के प्रचार के बाद इन्हें जापान में बोद्ध देवता माना जाने लगा। जापान में आज भी इनके कई मन्दिर है।जापान में कई स्थलों पर वानरों को पूज्य माना जाता है और उनके कई मंदिर जापान में आज भी बने हुए है। ठीक उसी तरह जैसे भारत में वानरों को हनुमान जी का प्रतीक मानकर उनका सम्मान किया जाता है।

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kashmir

फसल बर्बाद, दाने दाने के लिए मोहताज तो फ्लाइट में उड़ने के लिए कहाँ से आ गया किसानों के पास पैसा

पहले ही शक हो रहा था कि तमिल नाडु के किसानों के नाम पर किया जा रहा यह धरना मोदी सरकार और बीजेपी के खिलाफ साजिश है, कल जिस प्रकार से किसानों से अपना धरना ख़त्म किया उससे मेरा शक यकीन में बदल गया, जो किसान अपनी मांगों के लिए Urine पी रहे थे, मल खाने के लिए तैयार थे उन्होंने MCD चुनावों के साथ साथ अपना धरना भी समाप्त कर दिया.

इससे भी हैरान करने वाली बात यह थी कि धरना ख़त्म करने के बाद अचानक किसानों के पास पता नहीं कहाँ से पैसा आ गया, सब के सब एयरपोर्ट पहुंचे और तमिल-नाडु के लिए उड़ गए, अब सवाल यह उठता है कि अगर किसानों की वाकई में फसल बर्बाद हो गयी थी, अगर वे वाकई में दाने दाने के लिए मोहताज हैं तो उनके पास फ्लाइट में उड़ने के लिए पैसे कहाँ से आ गए. एकाएक उनका रूप कैसे बदल गया. यह सोचने का विषय है, ऐसा लग रहा है कि किसानों का धरना PAID था यानी कि किसी ने धरने की फंडिंग की थी.यह भी हो सकता है कि BJP को MCD चुनाव में नुकसान पहुंचाने के लिए AAP ने कोई साजिश रची हो क्योंकि केजरीवाल हमेशा किसानों के संपर्क में थे और उनका धरना ख़त्म करवाने के लिए AAP नेता कुमार विश्वास पहुंचे. उन्होंने मोदी के खिलाफ कविता गाई - 

आत्महत्या की चिता पर देख कर किसान को,
नींद कैसे आ रही है देश के प्रधान को.

क्या स्क्रिप्टेड था किसानों का धरना

सबसे पहले तो बता दें कि इसमें से कई किसान प्रोफेशनल धरनेबाज थे और दूसरी बात ये कि कोई भी किसान अपनी जान दे देगा लेकिन अपनी बात मनवाने के लिए मूत्र नहीं पिएगा और ना ही मल खाएगा लेकिन ये किसान तो मूत्र भी पी रहे थे और मल खाने की धमकी भी दे रहे थे और वो भी मोदी सरकार के खिलाफ जबकि उन्हें अपनी सरकार के खिलाफ धरना देना चाहिए था. वैसे हमें तो नहीं लगता कि उनके बोतल में मूत्र रहा होगा, हमें तो लगता है कि किसी और चीज को उन्होंने मूत्र बता दिया होगा, वरना कौन आदमी मूत्र पी सकता है.

अगर मान भी लें कि उन्होंने मूत्र पीया था तो इतना सब कुछ करने के बाद वे एकाएक धरना कैसे ख़त्म कर सकते हैं, यह अपने आप में सोचने का विषय है, कल AAP नेता कुमार विश्वास खुद धरना ख़त्म करवाने के लिए जंतर मंतर पर पहुंचे और मोदी के खिलाफ बयान दिया, इसके अलावा किसानों ने यह भी बताया कि उनकी कई बार केजरीवाल से भी बात हुई है.

सन्देश क्या गया?

इस धरने में AAP नेता कुमार विश्वास ने सिर्फ यही सन्देश दिया कि अन्नदाता मूत्र पी रहे हैं, मरे हुए चूहे खा रहे हैं, सांप खा रहे हैं, मूत्र पी रहे हैं लेकिन देश के प्रधान यानी मोदी सो रहे हैं, यह साफ़ साफ़ मोदी के खिलाफ साजिश थी, साथ ही मोदी विरोधी यह भी सोच रहे थे कि MCD चुनावों में किसान मोदी सरकार के खिलाफ खड़े हो जाँय, ताकि MCD में भी AAP की सरकार बन सके.

बड़े बड़े होटलों से किसानों के लिए आता था खाना, मिनरल वाटर

जानकारी के लिए बता दें कि धरनेबाज किसानों के लिए बड़े बड़े होटलों से खाना आता था, मिनरल वाटर की बोतल आती थीं, हर समय चाय-समोसे मिलते थे, ऐसा लग रहा था कि कोई इनके धरने की फंडिंग कर रहा है, ये लोग टीवी-मीडिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए मरे हुए सांप, चूहे खाने का दिखावा करते थे और दूसरी तरफ होटलों के लजीज व्यंजन खाते थे.
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कभी इस बात पर भी विचार करिएगा की आखिर इन नक्सलियों का मददगार कौन है ??
यह वामपंथी दल यह.. तमाम एनजीओ चलाने वाले जैसे मेघा पाटकर स्वामी अग्निवेश कविता कृष्णन अरविंद केजरीवाल मनीष सिसोदिया कन्हैया कुमार यह लोग खुलकर नक्सलियों के समर्थन में बोलते हैं और नक्सलियों पर कार्यवाही का विरोध करते हैं         
Jitendra Pratap Singh
 प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो हमला करने वाले नक्सली 350 की संख्या में थे और अत्याधुनिक हथियारों से लैस थे। जवानों का दोष केवल इतना था कि वे सड़क निर्माण को सुरक्षा दे रहे थे। इस घटना के बाद एक सवाल मन में उठने लगा है कि क्या राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दबाव में राज्य सरकार द्वारा बस्तर आईजी एसआरपी कल्लूरी को हटाने का निर्णय क्या सही था? बस्तर में कल्लूरी के रहते नक्सलियों ने हिंसा का तांडव करने की कोई हिमाकत नहीं की। लेकिन उनके हटते ही बस्तर को फिर लाल आतंक का गढ़ बनते हुए हम देख रहे हैं। बस्तर फिर पांच साल पीछे चला गया है, जब नक्सल एंबुश में फंसकर जवानों के शहीद होने की खबरें आम होती थीं, अब लगता है वही दौर लौट आया है।..और इस बात पर भी कोई आश्चर्य नहीं कि नक्सलियों की मौत पर विधवा विलाप करने वाले जवानों की मौत पर मौन हैं। शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि। ईश्वर उनके परिजनों को दुख सहने की शक्ति प्रदान करे।
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सऊदी अरब सरकार ने अरबी में गीता रिलीज की। यहाँ तो भारत माता की जय बोलने में इस्लाम खतरे में आ जाता हैं। 
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Sunday, 23 April 2017

हिन्दू लड़कियों को इस्लामिक जिहाद के बारे में समझाया कैसे जाये..??
इस्लामिक जिहाद को सबसे ज्यादा सहयोग देती हैं पढ़ी लिखी सेक्युलर हिन्दू लड़कियां..और ये लड़कियाँ लगभग हर घर में हैं... ये कार्य आप अपने ही घर से शुरू करें..जैसा कि पहले भी कहा गया है कि जब भी आप अपने घर में अपनी सगी बहन या फिर रिश्ते की बहनों के सामने बैठे हों तो ये इस्लामिक जिहाद की चर्चा अवश्य ही छेड़ें..चाहे उनको ये बात अच्छी लगे या न लगे..क्योंकि जब मरीज़ डाक्टर से ईलाज करवाता है तो उसको भी कड़वी दवाई अच्छी नहीं लगती पर वही दवा उस मरीज के भले के लिये होती है।
सबसे बड़ी बात आप उसको इस्लाम में रोज घट रही बातों के बारे में बताएं....बोको हराम ...ISIS आदि संगठनों के किये जा रहे क्रियाकलापों के बारे में बताएं ... या उसके एक दो न्यूज़ ही सुना दें...याद रखिये....आज के समय में जो सबसे बड़ी गलती हिंदूवादी कर रहे हैं वो यही है कि आप अपने धर्म के बारे में तो बताते हैं लेकिन इस्लाम कि बुराई को बता पाने में असमर्थ होते हैं.... मान लिया कि वो हिन्दू धर्म के बारे में तो जान गयी लेकिन इस्लाम को जान ही नहीं पायी तो वो तो उसको अच्छा ही समझेगी ....
आप पागल कुत्ते को देख कर क्यूँ डरते हैं ? आप सांप देख कर क्यूँ डरते हैं ? आखिर क्यूँ ? क्यूंकि आपने उसके खतरनाक और ज़हरीले क्रियाकलापों को जान लिया और ये भी जान लिया कि अगर सांप ने काटा तो मुझे मरने का डर है... कुत्ते ने काटा तो 14 इंजेक्शन लगने का डर है...तो आपको सबसे पहले इस्लामिक जिहाद के बारे में बताना होगा...
ये कहना खराब लगता है ...ऐसा लगता है जैसे मैं नफरत करने को सिखा रहा हूँ.पर जो लोग आपसे आलरेडी नफरत कर रहे हैं उससे कैसी दोस्ती ? जो आपको बर्बाद करने पर तुला है और जो आपकी बहन बेटी कि इज्जत लूटना चाहते है उससे नफरत नहीं तो और क्या किया जाए ? विकल्प कहाँ है ? रास्ता क्या है ? या तो बहन बेटी सौंप दो अगर आप नामर्द हो...या फिर बहन बेटी से खेलने वाले को सबक सिखाओ...
आखिरी बात...इसे फेसबुक आदि जगहों पर ये सोच कर शेयर करने से डरें नहीं कि आपके फ्रेंड लिस्ट कि कोई सुन्दर मगर मुर्ख और सेक्युलर लडकी आपको अनफ्रेंड कर देगी..क्यूंकि यही फैलते फैलते फिर आपके घर कि लड़कियों तक भी बात जायेगी..अगर वो अनफ्रेंड भी करती है तो आपने एक अच्छा काम किया है इसका संतोष रखिये...क्योंकि उसके भी कान तक एक बार तो आपने सच्चाई पहुंचाई ही।
खुश पाण्डेय

Saturday, 22 April 2017

 इस्लामी अंधविज्ञान के कुछ तथ्य

 जो कि कुरान और हदीसों में 

विज्ञानं और इस्लाम एक दूसरे के विरोधी हैं , क्योंकि विज्ञानं तथ्यों को तर्क की कसौटी पर परखने के बाद और कई बार परीक्षण करने के बाद उनको स्वीकार करता है .जबकि इस्लाम निराधार , बेतुकी , और ऊलजलूल बातों पर आँख मूँद पर ईमान रखने पर जोर देता है . इतिहास गवाह है कि इस्लाम के उदय से लेकर मुसलमानों ने ” हुक्के ” के आलावा कोई अविष्कार नहीं किया ,लेकिन दूसरों के द्वारा किये गए अविष्कारों के फार्मूले चोरी करके उनका उपयोग दुनिया को बर्बाद करने के लिए जरुर किया है .
लगभग 15 वीं शताब्दी तक मुसलमान तलवार की जोर से इस्लाम फैलाते . लेकिन जैसे जैसे विज्ञानं की उन्नति होने लगी , तो लोगों की विज्ञानं के प्रति प्रति रूचि बढ़ने लगी , यह देख कर जाकिर नायक जैसे धूर्त इस्लाम के प्रचारकों ने नयी तरकीब निकाली ,यह लोग कुरान और हदीस में दी गयी बेसिर पर की बातों का तोड़ मरोड़ कर ऐसा अर्थ करने लगे जिस से यह साबित हो जाये कि कुरान और हदीसें विज्ञानं सम्मत हैं .मुसलमानों की इसी चालाकी भरी नीति को ही ” इस्लामी अंधविज्ञानं ” कहा जाता है .इसका उद्देश्य पढ़े लिखे लोगों को गुमराह करके उनका धर्म परिवर्तन कराना है .लेकिन जाकिर नायक जैसे लोग विज्ञानं की आड़ में लोगों के दिमाग में इस्लाम का कचरा भरने का कितना भी प्रयास करें ,खुद कुरान और हदीस ही उनके दावों का भंडाफोड़ कर देते है .यद्यपि कुरान और हदीस में हजारों ऐसे बातें मौजूद है ,जो विज्ञानं के बिलकुल विपरीत हैं , लेकिन कुछ थोड़े से उदहारण यहाँ दिए जा रहे हैं
1-आकाश के सात तल
इस्लामी मान्यता के अनुसार आकाश के सात तल हैं , जो एक दुसरे के ऊपर टिके हुए हैं . और अल्लाह सबसे ऊपर वाले असमान पर अपना सिंहासन जमा कर बैठा रहता है . और वहीँ से अपने फरिश्तों या नबियों के द्वारा हुकूमत चला रहा है .इसी लिए आकाश को अरबी में ” समावात ” भी कहा जाता है , जो बहुवचन शब्द है . अंगरेजी में इसका अनुवाद Heavens इसी लिए किया जाता है , क्योंकि इस्लाम में आकाश के सात तल माने गए हैं .जैसा कि इन आयतों में कहा गया है .
“क्या तुमने नहीं देखा कि अल्लाह ने किस प्रकार से सात आसमान ऊपर तले बनाये हैं ”
सूरा -नूह 71:15
कुरान की इस बात की पुष्टि इस हदीस से भी होती है ,
अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने अपनी पुत्री फातिमा से कहा करते थे कि जब भी अल्लाह को पुकारो तो , कहा करो कि ‘ हे सात असमानों के स्वामी अल्लाह ”
وَحَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلاَءِ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي، شَيْبَةَ وَأَبُو كُرَيْبٍ قَالاَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُبَيْدَةَ، حَدَّثَنَا أَبِي كِلاَهُمَا، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي، صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ أَتَتْ فَاطِمَةُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم تَسْأَلُهُ خَادِمًا فَقَالَ لَهَا ‏ “‏ قُولِي اللَّهُمَّ رَبَّ السَّمَوَاتِ السَّبْعِ ‏”‏ ‏.‏ بِمِثْلِ حَدِيثِ سُهَيْلٍ عَنْ أَبِيهِ ‏.‏
सही मुस्लिम -किताब 35 हदीस 6553
2-तारे पृथ्वी के निकट हैं
विज्ञानं ने सिद्ध कर दिया है कि तारे ( stars ) पृथ्वी से करोड़ों प्रकाश वर्ष मील दूर हैं .और दूरी के कारण छोटे दिखायी देते हैं .लेकिन कुरान इस से बिलकुल उलटी बात कहती है ,कि तारे आकाश के सबसे निचले आकाश में सजे हुए है .यानी पृथ्वी के बिलकुल पास हैं .कुरान की यह आयत देखिये ,
“हमने दुनिया के आकाश को सबसे निचले आकाश को तारों से सजा दिया है ”
सूरा -अस साफ्फात 37:6
3-सूरज दलदल में डूब जाता है
कुरान की ऐसी कई कहानियां हैं ,जो यूनानी दन्तकथाओं से ली गयी हैं .ऐसी एक कहानी सिकंदर की है , जिसने दावा किया था कि उसने सूरज को एक कीचड़ वाले दलदल में डूबा हुआ देखा था .सिकंदर को कुरान में “जुल करनैन ” ذو القرنين “कहा गया है . अरबी में इस शब्द का अर्थ “दो सींगों वाला two-horned one” होता है .इस्लामी किताबों में इसे भी अल्लाह का एक नबी बताया जाता है ,लेकिन जुल करनैन वास्तव में कौन था इसके बारे में इस्लामी विद्वानों में मतभेद है , मौलाना अबुल कलाम आजाद ने अपनी किताब ‘ असहाबे कहफ ” में इसे सिकंदर महान Alexander the Great साबित किया है .कहा जाता है कि जब सिकंदर विश्वविजय के लिए फारस से आगे निकल गया तो उसने सूरज को एक दलदल में डूबते हुए देखा था .और कुरान इस बात को सही मानकर जोड़ लिया गया .कुरान में बताया गया है कि सूर्यास्त के बाद सूरज कहाँ डूब जाता है ,
” यहाँ तक कि वह ( जुल करनैन ) उस जगह पहुंच गया ,और उसने सूरज को एक कीचड़ वाले दलदल (muddy spring ) डूबा हुआ पाया ”
सूरा -अल कहफ़ 18:86
4-रात में सूरज कहाँ रहता है ?
इस बात को सभी लोग जानते हैं कि सूरज अस्त होने के बाद भी प्रथ्वी के किसी न किसी भाग पर प्रकाश देता रहता है ,यानि प्रथ्वी के उस भाग पर दिन बना रहता है , लेकिन हदीस के अनुसार अस्त होने के बाद सूरज रात भर अल्लाह के सिंहासन के नीचे छुपा रहता है
“अबू जर ने कहा कि एक बार रसूल ने मुझ से पूछा कि क्या तुम जानते हो कि सूर्यास्त के बाद सूरज कहाँ छुप जाता है , तो मैंने कहा कि रसूल मुझ से अधिक जानते है . तब रसूल ने कहा सुनो जब सूरज अपना सफ़र पूरा कर लेता है ,तो अल्लाह को सिजदा करके उसके सिंहासन के कदमों के नीचे छुप जाता है .फिर जब अल्लाह उसे फिर से निकलने का हुक्म देते है , तो सूरज अल्लाह को सिजदा करके वापस अपने सफ़र पर निकल पड़ता है .और यदि अल्लाह सूरज को हुक्म देगा तो सूरज पूरब की जगह पश्चिम से निकल सकता है
.सही बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 421
5-अंधविश्वासी रसूल
सूर्यग्रहण एक प्राकृतिक घटना है .जिसका क़यामत से कोई सम्बन्ध नहीं है .लेकिन मुसलमान जिस मुहम्मद को अल्लाह का रसूल और हर विषय का जानकार बताते हैं , वह सूर्यग्रहण के समय डर के मारे कांपने लगता था ,यह बात इस हदीस से पता चलती है ,
“अबू मूसा ने कहा कि जिस दिन भी सूर्यग्रहण होता था , रसूल डर के मारे खड़े होकर कांपने लगते थे .उनको लगता था कि यह कियामत का दिन है , जिसमे कर्मों का हिसाब होने वाला है .फिर रसूल भाग कर मस्जिद में घुस जाते थे , वहां लम्बी लम्बी नमाजें पढ़ते थे और सिजदे करते थे .हमने उनको इतना भयभीत कभी नहीं देखा . शायद वह सूर्यग्रहण को कियामत की निशानी समझते थे . और अल्लाह से अपने गुनाहों को माफ़ करने के लिए इतनी अधिक इबादत किया करते थे .”
सही बुखारी – जिल्द 2 किताब 15 हदीस 167
6-कपड़ा चोर चट्टान
मुसलमान जिन हदीसों को प्रमाणिक मानकर खुद मानते हैं ,और दूसरों को मानने पर जोर डालते हैं , उनमे ऐसी ऐसी बातें दी गयी हैं ,जिनपर कोई मूर्ख ही विश्वास कर सकता है .फिर भी मुस्लिम प्रचारक दावा करते रहते हैं कि कुरान की तरह हदीसें भी विज्ञानं सम्मत है .इसके लिए यह एक हदीस ही काफी है ,जिसे पढ़कर हदीस कहने वाले की बुद्धि पर हंसी आती है .जिसमे मूसा (Moses ) के बारे में एक घटना दी गयी है ,हदीस देखिये ,

“अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने बताया है कि बनीइजराइल के लोग नंगे होकर नहाया करते थे ,और एक दूसरे के गुप्तांगों को देखा करते थे . लेकिन मूसा अकेले ही नहाते थे . क्योंकि उनके अंडकोष काफी बड़े थे . उनमे (scrotal hernia ) की बीमारी थी . और लोगों को यह बात पता नहीं थी . एक बार जब मूसा अपने कपडे एक चट्टान पर रख कर नहाने के लिए नदी में गए तो . चट्टान उनके कपडे लेकर भागने लगी . और मूसा नंगे ही उसके पीछे दौड़ते हुए कहने लगे ” चट्टान मेरे कपडे वापस कर ” इस तरह लोगों को पता चल गया कि मूसा के अंडकोष बड़े हैं . तब लोगों ने चट्टान से मूसा के कपडे वापस दिलवाए .और नाराज होकर मूसा ने उस चट्टान को काफी मारा .रसूल ने कहा ” अल्लाह की कसम आज भी उस चट्टान पर मारने के छह सात निशान मौजूद हैं ”
सही बुखारी – जिल्द 1किताब 5 हदीस 277
यही हदीस सही मुस्लिम में भी मौजूद है .
सही मुस्लिम -किताब 3 हदीस 669 और सही मुस्लिम -किताब 30 हदीस 5849
ही नहीं मूसा की इस कहानी के बारे में कुरान में भी लिखा है . और मुसलमानों को निर्देश दिया गया है कि ” हे ईमान वालो तुम उन लोगों जैसे नहीं बन जाना , जिन्होंने मूसा को (नंगा देख कर ) दुःख पहुंचाया था ” सूरा -अहजाब 33:69
कुरान और हदीसों के इन कुछ उदाहरणों को पढ़ कर लोग यही सोचेंगे कि जब मुसलमानों के अल्लाह और रसूल आकाश ,सूरज ,और चट्टान के बारे में ऐसे अवैज्ञानिक विचार रखते हैं ,तो मुसलमान कुरान और् हदीस विरोधी विज्ञानं क्यों पढ़ते हैं? इसका एक ही कारण है कि मुसलमान विज्ञानं से दुनियां की भलाई नहीं दुनिया को बर्बाद करना चाहते हैं ,या तो वह कहीं से किसी अविष्कार का फार्मूला चुरा लेते है .या फिर विज्ञानं का उपयोग विस्फोटक बनाने , नकली नोट छापने , फर्जी क्रेडिट कार्ड से रुपये निकालने ,और दूसरों की साईटों को हैक करने में करते हैं .
लेकिन विज्ञानं की सहायता से इतने कुकर्म करने के बाद भी ,मुसलमानों में इस्लामी अंधविज्ञानं हमेशा बना रहता है .और क़यामत तक बना रहेगा

कौन थे नेहरु ?


नेहरू - गांधी वंश मुग़ल Ghiyasuddin गाजी नाम के एक आदमी के साथ शुरू होता है. वह सिटी कोतवाल यानी पुलिस अधिकारी दिल्ली के 1857 के विद्रोह से पहले मुगल शासन के अधीन था. दिल्ली पर कब्जा करने के बाद 1857 में, गदर के वर्ष में, ब्रिटिश सभी मुगलों हर जगह कत्लेआम रहे थे. ब्रिटिश एक गहन खोज की है और हर मुग़ल मार डाला इतना है कि दिल्ली के सिंहासन के लिए कोई भविष्य दावेदार थे. दूसरे हाथ पर हिंदुओं ब्रिटिश द्वारा लक्षित नहीं जब तक पृथक हिंदुओं मुगलों, पिछले संघों के कारण के साथ साइडिंग हो पाए थे. इसलिए, यह कई मुसलमान हिंदू नाम को अपनाने के लिए प्रथागत हो गया. तो, आदमी Ghiyasuddin गाजी (काफिर का हत्यारा शब्द का मतलब है) एक हिंदू नाम गंगाधर नेहरू अपनाया और इस प्रकार छल द्वारा उसकी जान बचाई. Ghiyasuddin गाजी जाहिरा तौर पर लाल किले के निकट एक नहर (या Nehr) के तट पर रहते थे. इस प्रकार, वह परिवार के नाम के रूप में 'नेहरू' के नाम को अपनाया. बाहर की दुनिया के माध्यम से, हम किसी भी गंगाधर की तुलना में अन्य वंशज नहीं मिल कुलनाम नेहरू. एम.के. द्वारा "भारतीय आजादी के युद्ध के विश्वकोश" (ISBN :81-261-3745-9) के 13 वें मात्रा सिंह अलंकृत राज्यों. भारत सरकार इस तथ्य को छुपा रहा है.शहर कोतवाल पुलिस आज के आयुक्त की तरह एक महत्वपूर्ण पद था. यह मुगल रिकॉर्ड से प्रतीत होता है कि वहाँ कोई हिंदू कोतवाल नियुक्त किया गया था. यह एक हिंदू के लिए बहुत संभावना नहीं है कि पद के लिए काम पर रखा जाना था. विदेशी पुरखे की अनिवार्य टोरंटो या सिडनी में केवल मुसलमान इस तरह के महत्वपूर्ण पदों के लिए काम पर रखा गया.
जवाहरलाल नेहरू की दूसरी बहन कृष्णा Hutheesing भी अपने संस्मरण में कहा गया है कि उसके दादा दिल्ली शहर कोतवाल 1857 के विद्रोह से पहले था जब बहादुर शाह जफर को अभी भी दिल्ली के सुल्तान था. जवाहर लाल नेहरू ने अपनी आत्मकथा में कहा है, कि वह अपने दादा जो उसे एक मुगल ठाकुर की तरह में चित्रित की एक तस्वीर देखी है. यह है कि चित्र में दिखाई देता है कि वह लंबी और बहुत मोटी दाढ़ी कर रहा था, एक मुस्लिम टोपी पहने हुए किया गया था और उसके हाथ में दो तलवारें. जवाहरलाल नेहरू ने अपनी आत्मकथा है कि दिल्ली से आगरा (मुगल प्रभाव का एक सीट) के लिए अपने रास्ते पर, अपने भव्य पिता के परिवार के सदस्यों को अंग्रेजों द्वारा हिरासत में लिया गया राज्यों में है. निरोध के लिए कारण उनके मुग़ल सुविधाओं था. लेकिन वे वकालत की कि वे कश्मीरी पंडित थे और इस तरह दूर हो गया. 19 वीं सदी के उर्दू साहित्य, विशेष रूप से ख्वाजा हसन निज़ामी का काम करता, miseries कि मुगलों और मुसलमान का सामना करना पड़ता है तो पूरा कर रहे हैं. उन्होंने यह भी वर्णन कैसे मुगलों अन्य शहरों के लिए बच गए उनके जीवन को बचाने. सभी संभावना में, जवाहर नेहरू मुग़ल दादा और अपने परिवार के उन के बीच में थे.
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जवाहर लाल नेहरू एक व्यक्ति है कि भारत प्यार करते थे. वह निस्संदेह एक बहुत ही ध्वनि राजनीतिज्ञ और एक प्रतिभाशाली व्यक्ति था. लेकिन, भारत सरकार अपने जन्म इलाहाबाद में जगह 77 Mirganj में जवाहरलाल नेहरू के एक स्मारक का निर्माण नहीं किया है, क्योंकि यह एक वेश्यालय है. पूरे इलाके में एक अच्छी तरह से जाना जाता है लंबे समय के बाद से लाल बत्ती क्षेत्र है. यह हाल ही में एक वेश्यालय नहीं बन गया है, लेकिन यह जवाहरलाल नेहरू के जन्म से पहले भी एक वेश्यालय किया गया है. एक ही घर के एक हिस्से को अपने पिता मोतीलाल नेहरू ने लाली जान नाम एक वेश्या के लिए बेच दिया गया था और यह करने के लिए रूप में "Imambada" में जाना जाने लगा. यदि आप कुछ संदेह है, तो आप जगह की यात्रा कर सकते हैं. कई भरोसेमंद स्रोतों और भी encyclopedia.com और विकिपीडिया यह कहना है. मोतीलाल नेहरू अपने परिवार के साथ बाद में आनंद भवन में स्थानांतरित कर दिया गया. याद रखें कि आनंद भवन जवाहरलाल नेहरू के पैतृक घर और अपने जन्म स्थान नहीं है.
भारतीय सिविल सेवा की एमओ मथाई प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के निजी सचिव के रूप में सेवा की. मथाई एक पुस्तक "नेहरू आयु के संस्मरण" (ISBN-13: 9780706906219) पुस्तक में लिखा है मथाई से पता चलता है कि वहाँ जवाहरलाल नेहरू और एडविना माउंटबेटन (भारत के लिए अंतिम वायसराय की पत्नी लुईस माउंटबेटन) के बीच गहन प्रेम प्रसंग था. रोमांस इंदिरा गांधी, जो उसके पिता को राजी करने के लिए उनके रिश्ते के बारे में थोड़ा सावधानी बरतनी में मौलाना अबुल कलाम आजाद की मदद की तलाश करने के लिए इस्तेमाल किया के लिए बहुत शर्मिंदगी का एक स्रोत था.
इसके अलावा नेहरू सरोजिनी नायडू की बेटी पद्मजा नायडू, जिसे नेहरू ने बंगाल के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया के साथ प्रेम प्रसंग था. यह पता चला है कि वह अपने बिस्तर कमरे में उसके चित्र रखने के लिए, जो इंदिरा अक्सर को दूर करेगा. यह पिता और बेटी के बीच कुछ तनाव के कारण होता है.
इन महिलाओं के अलावा, पंडित नेहरू श्रद्धा माता का नाम बनारस से एक संन्यासिन के साथ चक्कर चल रहा था. वह एक आकर्षक संस्कृत अच्छी तरह से प्राचीन भारतीय शास्त्रों और पुराणों में निपुण विद्वान था. जब वह उनके अवैध संबंध की कल्पना की है, 1949 में बंगलौर में एक कॉन्वेंट में, वह जोर देकर कहा है कि नेहरू ने उनसे शादी करनी चाहिए. लेकिन, नेहरू कि मना कर दिया है, क्योंकि यह उनके राजनीतिक कैरियर को प्रभावित कर सकता है. एक बेटा पैदा हुआ था और वह एक ईसाई मिशनरी बोर्डिंग स्कूल में रखा गया था. उनके जन्म की तिथि को 30 किया जा सकता है, 1949 के लिए अनुमान है. वह अपने प्रारंभिक साठ के दशक में अब हो सकता है. ऐसे मामलों में convents बच्चे के अपमान को रोकने की गोपनीयता बनाए रखने के लिए. हालांकि मथाई बच्चे के अस्तित्व की पुष्टि की, कोई प्रयास कभी उसे पता लगाने के लिए बनाया गया है. वह एक कैथोलिक ईसाई blissfully उसका पिता कौन था अज्ञानी के रूप में बड़े हो गए चाहिए.
Sraddha माता
नेताजी सुभाष चंद्र बोस और डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत के प्रधानमंत्री के पद के लिए जवाहर लाल नेहरू के प्रतियोगियों थे और उन दोनों को रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई.
इन सभी तथ्यों को जानने का, नेहरू का जन्मदिन बाल दिवस के रूप में मना करने का कोई अर्थ है? उसे अपने बच्चों के लिए एक अलग व्यक्ति के रूप में पेश करने और सच छुपा है, उन्हें करने के लिए शिक्षा से इनकार करने के लिए बराबर है.
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किताब "महान डिवाइड: मुस्लिम अलगाववाद और विभाजन" के अनुसार (ISBN-13: 9788121205917) अनुसूचित जाति भट्ट जवाहरलाल नेहरू की बहन विजया लक्ष्मी उसके पिता कर्मचारी Syud हुसैन के साथ भाग गई. तब मोतीलाल नेहरू जबरदस्ती उसे वापस ले लिया और उसे एक और रंजीत पंडित नाम के एक आदमी के साथ शादी कर ली.
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इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरू राजवंश में अनैतिकता perpetuated. बौद्धिक इंदिरा ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था, लेकिन वहाँ से बाहर गैर - प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया गया. वह तो शांतिनिकेतन विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था, लेकिन गुरु देव रवीन्द्रनाथ टैगोर उसे बुरा आचरण के लिए पीछा किया.
बाद शान्तिनिकेतन के बाहर संचालित, इंदिरा अकेला हो गया है के रूप में पिता और राजनीति के साथ व्यस्त था और माँ तपेदिक के स्विट्जरलैंड में मर गया था. उसे अकेलापन, फिरोज खान, नवाब खान नाम पंसारी जो इलाहाबाद में मोतीलाल नेहरू घरेलू वाइन आदि की आपूर्ति के बेटे के साथ बजाना उसके करीब आकर्षित करने में सक्षम था. महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल डा. श्रीप्रकाश नेहरू ने चेतावनी दी है, कि इंदिरा फिरोज खान के साथ अवैध संबंध हो रही थी. फिरोज खान इंग्लैंड में तो था और वह काफी इंदिरा के लिए सहानुभूति थी. जल्द ही वह अपने धर्म बदल पर्याप्त, एक मुस्लिम महिला बन गया है और लंदन के एक मस्जिद में फिरोज खान से शादी कर ली. इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरू Maimuna बेगम के लिए उसका नाम बदल दिया है. उसकी माँ कमला नेहरू कि शादी के खिलाफ पूरी तरह से था. नेहरू मुस्लिम के लिए रूपांतरण के रूप में प्रधानमंत्री बनने की उसकी संभावना को ख़तरे में डालना होगा खुश नहीं था.

तो, नेहरू युवा आदमी फिरोज खान से पूछा खान से गांधी के लिए अपने उपनाम बदल. यह इस्लाम से हिंदू धर्म के लिए धर्म परिवर्तन के साथ कुछ नहीं करना था. यह सिर्फ एक हलफनामा द्वारा नाम की एक परिवर्तन का एक मामला था. और इसलिए फिरोज खान फिरोज गांधी बन गया है, हालांकि यह बिस्मिल्लाह सरमा की तरह एक असंगत नाम है. दोनों अपने नाम करने के लिए भारत की जनता मूर्ख बदल दिया है. जब वे भारत लौटे, एक नकली वैदिक शादी जनता के उपभोग के लिए स्थापित किया गया था. इस प्रकार, इंदिरा और उसके वंश काल्पनिक नाम गांधी मिला. नेहरू और गांधी दोनों फैंसी नाम हैं. इस वंश के रूप में एक गिरगिट अपने रंग बदलता है, अपने नाम बदल गया है अपनी असली पहचान छिपाने के.
इंदिरा गांधी के दो बेटों अर्थात् राजीव गांधी और संजय गांधी था. संजय मूल संजीव कि राजीव अपने बड़े भाई के नाम के साथ तुकांतवाला के रूप में नामित किया गया था. संजीव ब्रिटेन और उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया था में एक कार चोरी के लिए ब्रिटिश पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था. इंदिरा गांधी की दिशा में तत्कालीन भारतीय राजदूत ब्रिटेन, कृष्ण मेनन अपनी शक्ति का दुरूपयोग, संजय के लिए उसका नाम बदल दिया और एक नया पासपोर्ट की खरीद. इस प्रकार संजीव गांधी संजय गांधी के रूप में जाना जाने लगा.
यह एक ज्ञात तथ्य है कि राजीव गांधी की जन्म के बाद, इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी अलग रहते थे, लेकिन वे नहीं तलाक ले रहे थे. पुस्तक के.एन. राव राज्यों द्वारा "नेहरू राजवंश" (10:8186092005 ISBN) है कि इंदिरा (या श्रीमती फिरोज खान) के दूसरे बेटे संजय गांधी के रूप में जाना जाता फिरोज गांधी के पुत्र नहीं था. वह एक और मुस्लिम मोहम्मद यूनुस नाम सज्जन का बेटा था.
दिलचस्प सिख लड़की मेनका के साथ संजय गांधी की शादी नई दिल्ली में मोहम्मद यूनुस के घर में जगह ले ली. जाहिरा तौर पर यूनुस शादी से नाखुश था के रूप में वह अपनी पसंद की एक मुस्लिम लड़की के साथ उसकी शादी करना चाहता था. यह मोहम्मद यूनुस, जो सबसे अधिक रोया जब संजय गांधी की विमान दुर्घटना में निधन हो गया था. 'यूनुस पुस्तक में, "व्यक्तियों, जुनून और राजनीति" (ISBN-10: 0706910176) एक खोज कर सकते हैं कि बच्चे संजय खतना निम्नलिखित इस्लामी कस्टम था.
यह एक तथ्य है कि संजय गांधी को लगातार उनकी मां इंदिरा गांधी का रहस्य उसका असली पिता कौन है के साथ, ब्लैकमेल के लिए इस्तेमाल किया है. संजय उसकी माँ पर एक गहरा भावनात्मक नियंत्रण का प्रयोग किया, जो वह अक्सर दुरुपयोग. इंदिरा गांधी अपने कुकर्मों की अनदेखी करने के लिए चुना है और वह परोक्ष रूप से सरकार नियंत्रित किया गया था.
जब संजय गांधी की मृत्यु की खबर इंदिरा गांधी पर पहुंच गया, उसे पहला सवाल था? "उसकी कुंजी और उसकी कलाई घड़ी कहाँ हैं." नेहरू - गांधी वंश के बारे में कुछ गहरे रहस्य उन objects.The विमान दुर्घटना में छिपा हो लगता है भी रहस्यमय था. यह एक नया है कि एक दुर्घटना के लिए ग़ोता मारना और अभी तक विमान के प्रभाव पर विस्फोट नहीं था विमान था. यह तब होता है जब कोई ईंधन है. लेकिन उड़ान रजिस्टर से पता चलता है कि ईंधन टैंक बंद करने से पहले पूरा किया गया था. इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुचित प्रभाव का उपयोग कर जगह ले जाने से किसी भी जांच के निषिद्ध. तो, जो संदिग्ध है?
इंदिरा और संजय गांधी
पुस्तक (ISBN: 9780007259304) इंदिरा नेहरू गांधी के जीवन "कैथरीन फ्रैंक ने इंदिरा गांधी के अन्य प्रेम संबंधों के कुछ पर प्रकाश डालता है. यह लिखा है कि इंदिरा पहला प्यार शान्तिनिकेतन में उसे जर्मन शिक्षक के साथ हुई थी. बाद में वह एमओ मथाई (पिता के सचिव), तो धीरेंद्र ब्रह्मचारी (उसे योग शिक्षक) और दिनेश सिंह (विदेश मंत्री) के साथ पिछले चक्कर था.
पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह मुगलों के इंदिरा गांधी की आत्मीयता के बारे में एक दिलचस्प रहस्योद्घाटन किया अपनी पुस्तक "प्रोफाइल और पत्र" (ISBN: 8129102358). यह कहा गया है कि 1968 में इंदिरा गांधी ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में अफगानिस्तान के लिए एक सरकारी यात्रा पर चला गया. नटवर गाओ उसे कर्तव्य में एक आईएफएस अधिकारी के रूप में साथ थे. दिन भर सगाई पूरा होने के बाद, इंदिरा गांधी शाम में एक सवारी के लिए बाहर जाना चाहता था. कार में एक लंबी दूरी जाने के बाद इंदिरा गांधी बाबर दफन जगह यात्रा करना चाहता था, हालांकि इस कार्यक्रम में शामिल नहीं था. अफगान सुरक्षा अधिकारियों के लिए उसे न करने के लिए समझाना की कोशिश की, लेकिन वह अड़े हुए थे. अंत में वह उस दफन जगह पर चला गया. यह एक सुनसान जगह थी. वह बाबर की कब्र से पहले चला गया, सिर श्रद्धा में नीचे तुला के साथ कुछ मिनट के लिए वहाँ खड़ा था. नटवर सिंह उसके पीछे खड़ा था. जब इंदिरा ने उसकी प्रार्थना को समाप्त हो गया था, वह वापस कर दिया और "आज हम इतिहास के साथ हमारे ब्रश पड़ा है," सिंह ने बताया वॉर्थ करने का उल्लेख है कि बाबर भारत में मुगल शासन, जिसमें से नेहरू - गांधी वंश के वंशज है के संस्थापक था.
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यह मुश्किल है कि कई उच्च शिक्षा के संस्थानों कैसे गिनती राजीव गांधी के नाम पर कर रहे हैं, लेकिन राजीव गांधी कम क्षमता के एक व्यक्ति था. 1962 से 1965 तक, वह ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज में एक यांत्रिक अभियांत्रिकी पाठ्यक्रम के लिए दाखिला लिया था. लेकिन, वह एक डिग्री के बिना कैम्ब्रिज के लिए छोड़ दिया है, क्योंकि वह परीक्षा पारित नहीं कर सका. अगले साल 1966 में, वह एक डिग्री के बिना इंपीरियल कॉलेज, लंदन, लेकिन यह फिर से छोड़ दिया में शामिल हो गए.
इसके बाद के संस्करण में के.एन. राव ने कहा कि पुस्तक का आरोप है कि राजीव गांधी एक कैथोलिक बने सानिया माइनो शादी. राजीव रॉबर्टो बन गया. उनके बेटे का नाम राउल और बेटी का नाम Bianca है. बहुत बड़ी चतुराई से एक ही नाम राहुल और प्रियंका के रूप में भारत के लोगों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं.
व्यक्तिगत आचरण में राजीव बहुत बहुत एक मुगल था. 15 अगस्त 1988 को वह लाल किले की प्राचीर से गरजा, "हमारा प्रयास हाइट्स करने के लिए जो इसे 250-300 साल पहले के बारे में संबंधित देश लेने के लिए होना चाहिए. यह तो औरंगजेब के शासनकाल 'jeziya गुरु और नंबर एक मंदिर विध्वंसक था. "
भारत के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभालने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राजीव गांधी ने लंदन में दिया बहुत जानकारीपूर्ण था. इस पत्रकार सम्मेलन में राजीव दावा है कि वह एक हिंदू लेकिन एक पारसी नहीं है. फिरोज खान के पिता और राजीव गांधी के दादा गुजरात के जूनागढ़ क्षेत्र से एक मुस्लिम सज्जन था. नवाब खान के नाम से यह मुस्लिम पंसारी उसे इस्लाम के लिए परिवर्तित करने के बाद एक पारसी महिला से विवाह रचाया था. यह स्रोत है जहां राजीव एक पारसी होने के मिथक से प्राप्त किया गया है. मन है कि वह कोई पारसी पूर्वज सब पर था. उनकी दादी नवाब खान शादी पारसी धर्म परित्यक्त होने के बाद मुस्लिम दिया था. हैरानी की बात है, पारसी राजीव गांधी वैदिक संस्कार के अनुसार भारतीय जनता के पूर्ण दृश्य में अंतिम संस्कार किया गया.
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डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी लिखते हैं कि सोनिया गांधी के नाम Antonia Maino था. उसके पिता एक मेसन था. उन्होंने इटली के कुख्यात फासीवादी शासन के एक कार्यकर्ता था और वह रूस में पांच साल की कैद की सेवा की. सोनिया गांधी उच्च विद्यालय से परे नहीं अध्ययन किया है. वह एक अंग्रेजी शिक्षण Lennox कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय परिसर में स्कूल का नाम की दुकान से कुछ अंग्रेजी सीखा. इस तथ्य से वह प्रतिष्ठित कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में अध्ययन का दावा है. कुछ अंग्रेजी सीखने के बाद, वह कैम्ब्रिज शहर में एक रेस्तरां में एक वेट्रेस था.
सोनिया गांधी ब्रिटेन में माधवराव सिंधिया, जो उसकी शादी के बाद भी जारी रखा के साथ तीव्र दोस्ती थी. 2 में एक रात 1982 में माधवराव सिंधिया और सोनिया गांधी के साथ अकेले पकड़े गए थे जब उनकी कार आईआईटी दिल्ली के मुख्य द्वार के पास एक दुर्घटना से मुलाकात की.
जब इंदिरा गांधी और राजीव गांधी प्रधानमंत्री मंत्री थे, प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए नई दिल्ली और चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के लिए जाना मंदिर मूर्तियां, प्राचीन वस्तुओं की तरह भारतीय खजाने के बक्से भेजने के लिए इस्तेमाल किया, पेंटिंग करने के लिए रोम आदि. मुख्यमंत्री के रूप में अर्जुन सिंह और संस्कृति के आरोप में केंद्रीय मंत्री लूट का आयोजन किया के रूप में बाद में. सीमा शुल्क विभाग द्वारा अनियंत्रित, वे इटली में पहुंचा दिया गया दो Etnica और गणपति, सोनिया गांधी की बहन Alessandra माइनो विंची द्वारा स्वामित्व नाम की दुकानों में बेचा जा.
इंदिरा गांधी, क्योंकि उसके दिल या मस्तिष्क गोलियों से छेदा गया, नहीं मृत्यु हो गई, लेकिन वह रक्त की हानि की मृत्यु हो गई. बाद इंदिरा गांधी पर निकाल दिया गया था, सोनिया गांधी अजीब जोर देकर कहा है कि खून बह रहा इंदिरा गांधी डा. राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया जा चाहिए एम्स जो करने के लिए ठीक से इस तरह की घटनाओं के साथ निपटने के लिए एक आपात प्रोटोकॉल था के विपरीत दिशा में है. डा. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में पहुंचने के बाद, सोनिया गांधी ने उसके मन और मांग है कि इंदिरा गांधी ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान से लिया जाना चाहिए बदल गया है, इस प्रकार 24 बहुमूल्य मिनट बर्बाद. यह संदिग्ध है कि यह सोनिया गांधी की अपरिपक्वता या एक चाल के लिए तेजी से सत्ता में उसके पति लाने था.

राजेश पायलट और माधव राव सिंधिया के प्रधान मंत्री पद के लिए मजबूत दावेदार थे और वे सोनिया गांधी की सत्ता में रास्ते में सड़क ब्लॉक थे. उन दोनों रहस्यमय दुर्घटनाओं में मृत्यु हो गई.
प्रथम दृष्टया संभावना है कि माइनो परिवार लिट्टे अनुबंधित किया है राजीव गांधी की हत्या की ओर इशारा करते हुए परिस्थितिजन्य सबूत हैं. आजकल, सोनिया गांधी एमडीएमके, पीएमके और द्रमुक जैसे उन जो राजीव गांधी के हत्यारों की प्रशंसा के साथ राजनीतिक गठबंधन होने में काफी अडिग है. कोई भारतीय विधवा कभी करना होगा. ऐसे हालात कई हैं, और एक संदेह बढ़ा. राजीव गांधी की हत्या में सोनिया की भागीदारी में एक जांच आवश्यक है. (ISBN 81-220-0591-8) - आप डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी की पुस्तक "आशातीत प्रश्न और अनुत्तरित प्रश्न राजीव गांधी की हत्या" पढ़ सकते हैं. यह ऐसी साजिश के संकेत हैं.
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1992 में, सोनिया गांधी इतालवी नागरिकता कानून के अनुच्छेद 17 के तहत इटली की उसकी नागरिकता को पुनर्जीवित किया. इतालवी कानून के तहत, राहुल और प्रियंका इतालवी नागरिक हैं क्योंकि सोनिया ने एक इतालवी नागरिक था जब वह उन्हें को जन्म दिया. राहुल गांधी इतालवी उसकी हिंदी से बेहतर है. राहुल गांधी एक इतालवी नागरिक तथ्य यह है कि 27 सितंबर, 2001 को वह बोस्टन हवाई अड्डे, संयुक्त राज्य अमेरिका में एफबीआई द्वारा एक इतालवी पासपोर्ट पर यात्रा करने के लिए गिरफ्तार कर लिया गया था से प्रासंगिक है. अगर भारत में एक कानून बनाया गया है कि कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के जैसे महत्वपूर्ण पदों पर विदेशी मूल के एक व्यक्ति द्वारा नहीं ठहराया जाना चाहिए, तो राहुल गांधी स्वचालित रूप से प्रधानमंत्री पद के लिए संघर्ष करने के लिए disqualifies.
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स्कूल शिक्षा खत्म करने के बाद, राहुल गांधी नई दिल्ली में सेंट स्टीफंस कॉलेज में दाखिला मिल गया, योग्यता के आधार पर नहीं, लेकिन राइफल शूटिंग के खेल कोटे पर. 1989-90 में एक संक्षिप्त रहने के बाद वह 1994 में रोलिंस कालेज, फ्लोरिडा से बी.ए. किया. बस एक बीए करने के लिए अमेरिका के लिए जाने की जरूरत नहीं है. अगले ही साल 1995 में उन्होंने एम. फिल मिला. ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज से डिग्री. इस डिग्री की असलियत के रूप में वह एम. फिल किया है पूछताछ की है. एमए कर के बिना. Amaratya सेन की मदद के लिए हाथ के पीछे माना जाता है. आप में से कई मशहूर फिल्म "मुन्नाभाई एमबीबीएस" देखा हो सकता है.
2008 में राहुल गांधी को कानपुर में चन्द्र शेखर आजाद विश्वविद्यालय के छात्रों की रैली के लिए एक सभागार का उपयोग करने से रोका गया था. बाद में, विश्वविद्यालय के कुलपति वी.के., सूरी, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल द्वारा अपदस्थ किया गया था. 26/11 के दौरान जब पूरे देश कैसे मुंबई आतंक से निपटने के बारे में परेशान था, राहुल गांधी lavishly 05:00 तक अपने दोस्तों के साथ जश्न मना. राहुल गांधी ने सभी कांग्रेस सदस्यों के लिए तपस्या की सलाह है. वे कहते हैं, यह सभी नेताओं का कर्तव्य है तपस्या. दूसरी ओर वह एक पूरी तरह से सुसज्जित जिम के साथ एक मंत्री बंगला है. वह कम से कम दिल्ली के poshest जिम के दो, जिनमें से एक 5 - सितारा दर्जा दिया है की एक नियमित सदस्य है. राहुल गांधी चेन्नई यात्रा 2009 में तपस्या के लिए अभियान के लिए पार्टी के 1 करोड़ रुपये से अधिक लागत. इस तरह की विसंगतियों दिखाने के लिए है कि राहुल गांधी द्वारा की गई पहलों उसका अपना नहीं कर रहे हैं, लेकिन उनकी पार्टी केवल पुरुषों की कसरत.
2007 उत्तर प्रदेश में चुनाव अभियान के दौरान राहुल गांधी ने कहा है कि "अगर नेहरू - गांधी परिवार से किसी को तो राजनीति में सक्रिय किया गया था, बाबरी मस्जिद गिर गया है नहीं होगा." यह doubtlessly अपने पूर्वजों के लिए एक वफादारी के रूप में अपने मुसलमान संबद्धता से पता चलता है. 31 दिसंबर, 2004 को, जॉन एम. Itty, केरल के अलाप्पुझा जिले में एक सेवानिवृत्त कॉलेज के प्रोफेसर का तर्क था कि केरल में एक रिसोर्ट में तीन दिनों के लिए एक साथ रहने के लिए राहुल गांधी और उसकी प्रेमिका Juvenitta उर्फ वेरोनिका के खिलाफ कार्रवाई लिया जाना चाहिए. यह अनैतिक तस्करी अधिनियम के तहत एक अपराध है के रूप में वे शादी नहीं कर रहे. वैसे भी, एक अधिक विदेशी बहू सहिष्णु भारतीयों शासन इंतज़ार कर रही है.
राहुल गांधी withVeronica
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स्विस पत्रिका Schweizer Illustrierte 11 वीं नवंबर 1991 मुद्दे से पता चला है कि राहुल गांधी ने अमेरिका के 2 अरब डॉलर के लायक खातों के लाभार्थी उनकी मां सोनिया गांधी द्वारा नियंत्रित किया गया था. 2006 में स्विस बैंकिंग एसोसिएशन से एक रिपोर्ट से पता चला है कि भारतीय नागरिकों की संयुक्त जमा के रूप में अभी तक किसी भी अन्य देश, अमेरिका 1.4 खरब डॉलर का एक कुल, एक भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) से अधिक आंकड़ा से अधिक कर रहे हैं. इस राजवंश भारत के आधे से अधिक नियम. केंद्र की उपेक्षा, 28 राज्यों और 7 संघ शासित प्रदेशों के बाहर, उनमें से आधे से अधिक समय के किसी भी बिंदु पर कांग्रेस सरकार है. राजीव गांधी तक भारत में मुगल शासन के साथ सोनिया गांधी, भारत पर रोम शासन शुरू कर दिया था.
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इस लेख को लिखने के पीछे उद्देश्य के लिए अपने राष्ट्रीय नेताओं के साथ भारत के नागरिकों परिचित और दिखाने के लिए कैसे एक राजवंश इस देश के लोकतंत्र का दुरुपयोग किया है. कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संपत्ति और योजनाओं इन खो चरित्र लोगों के नाम हैं उन्हें अमर. सबूत के समर्थन की कमी की वजह से इस लेख में कई अन्य चौंकाने वाला तथ्य नहीं प्रस्तुत कर रहे हैं.
वंदे मातरम्.
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अन्य अर्क से स्रोतों
आरोप है कि 3 दिसंबर 2006 की रात में, उसकी परदेशी मित्रों गिरोह के साथ राहुल गांधी अमेठी में एक वीआईपी गेस्ट हाउस में तो बीस चार साल पुराने सुकन्या देवी के साथ बलात्कार किया. वह 23-12 मेडिकल गला दबा के बलराम सिंह और सुमित्रा देवी, संजय गांधी मार्ग, अमेठी, रायबरेली, उत्तर प्रदेश की बेटी है. पुलिस शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया, डॉ. गिरिजा व्यास की अध्यक्षता में महिलाओं के लिए राष्ट्रीय आयोग ने एक कांग्रेस पार्टी कार्यालय के रूप में काम किया. शिकार और उसके परिवार तब से लापता है.
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मोतीलाल और शादी अपनी पहली पत्नी और बेटे को प्रसव में निधन हो गया.
मोतीलाल और उनकी दूसरी पत्नी THUSSU (नाम स्वरूप रानी बदल) तीन बच्चों की थी
THUSSU MOBARAK अली (मोतीलाल बॉस) के साथ 1 पुत्र जवाहर लाल नेहरू (वह खतना किया गया था)
मोतीलाल THUSSU नाम (भी बुलाया विजया लक्ष्मी) नेन और कृष्णा द्वारा दो बेटियां थी
मोतीलाल नाम शेख अब्दुल्ला और SYUD हुसैन द्वारा मुस्लिम महिलाओं के बाहर भी दो कमीने बेटे थे
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विजया लक्ष्मी SYUD हुसैन (आधा भाई और बहन) के साथ भागकर एक लड़की चंद्रलेखा था
विजयलक्ष्मी शादी आर.एस. पंडित और दो अधिक नयनतारा और रीता लड़कियों था
जवाहर लाल नेहरू विवाहित कमला कौल (consummated कभी नहीं शादी)
जवाहर लाल SARADDHA माता (कल्पित नाम) के साथ चक्कर चल रहा था और एक बेटे को एक अनाथालय को दूर बंगलौर में दिया था
जवाहर लाल लेडी माउण्टबेटन के साथ एक चक्कर है, लेकिन बच्चों को नहीं थी
जवाहर लाल कई मामलों था और अंत में गरमी की मृत्यु हो गई
कमला कौल MANZUR अली (जो Mobark अली के बेटे जो नेहरू भी जन्मा है) और उनकी बेटी के साथ एक चक्कर था इंदिरा PRIYADARSINI नेहरू
कमला कौल फिरोज खान (नवाब खान जो उनके घर शराब की आपूर्ति के बेटे), लेकिन कोई बच्चों के साथ चक्कर चल रहा था
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इंदिरा बिस्तर में उसे जर्मन शिक्षक के साथ शान्तिनिकेतन में पाया गया था
इंदिरा PRIYADARSINI खुद को इस्लाम के लिए परिवर्तित करने के बाद इस्लामी संस्कार फिरोज खान के अनुसार nikhahed. उसकी नई नाम MAIMUNA बेगम था और दोनों उनके नाम बदल गांधी की सलाह पर भारत की एक अदालत में एक शपथ पत्र के द्वारा जनता के लिए इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी मूर्ख था
इंदिरा और फिरोज नाम राजीव गांधी (के रूप में इस्लामी संस्कार प्रति वह खतना किया गया था) द्वारा एक बेटा था
इंदिरा मोहम्मद यूनुस के साथ एक चक्कर था और एक दूसरे बेटे संजीव गांधी था (बाद में संजय गांधी को बदल कार चोरी के लिए ब्रिटेन में अभियोजन पक्ष से बचने के लिए एक नाम वह इस्लामी संस्कार के अनुसार खतना किया गया था.)
इंदिरा प्रसूतिविज्ञान निष्णात साथ एक चक्कर था मथाई (नेहरू स्टेनो) और एक बेटा निरस्त किया गया था
इंदिरा धीरेन्द्र BRAMMACHARI के साथ एक चक्कर है, लेकिन बच्चों को नहीं थी
इंदिरा DHINESH सिंह के साथ एक चक्कर है, लेकिन बच्चों को नहीं थी
फिरोज TARAKESWARI सिन्हा के साथ चक्कर चल रहा था
फिरोज MEHMUNA सुल्ताना के साथ एक चक्कर था
फिरोज सुभद्रा जोशी और कई अन्य लोगों के साथ एक चक्कर था.

केरल की हिंसा वामपंथियों की राजनीति का हिस्सा - जे. नंदकुमार

कई वर्षों से केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं राष्ट्रवादी विचारधारा के कार्यकर्ताओं की हत्या की जा रही है| इन घटनाओं की पार्श्वभूमि, वैचारिक संघर्ष, राज्य सरकार एवं पुलिस की भूमिका तथा संघ का इन सब घटनाओं की ओर देखने का दृष्टिकोण, ये सारी बातें नागरिकों को ज्ञात हो इसलिए प्रस्तुत है ‘मुंबई तरुण भारत’ के प्रतिनिधि महेश पुराणिक द्वारा संघ की राष्ट्रीय मीडिया टीम के सह-समन्वयक श्री जे. नंदकुमार से किए गए विशेष साक्षात्कार के महत्वपूर्ण अंश

 केरल में सीपीएम-सीपीआई विरुद्ध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यह संघर्ष पुराना है। इसकी पार्श्वभूमि क्या है?
संघ कार्यकर्ताओं पर कम्युनिस्ट हिंसाचार का प्रारंभ सन १९६९ से हुआ। उस समय वडीकल रामकृष्णन नामक गरीब स्वयंसेवक की हत्या की गई। उसके बाद गत ५० वर्षों में केरल में २६७ से ज्यादा स्वयंसेवक एवं हितचिंतक मारे जा चुके हैं। इनमें से २३२ लोगों की हत्या माकपा के कार्यकर्ताओं द्वारा तथा शेष कट्टरपंथी इस्लामी गुंडो द्वारा की गई है। कन्नूर जिले में बड़ी मात्रा में घटनाएं हुई हैं जिनकी निश्चित संख्या बताना मुश्किल है। जितनी तादाद में ये हत्याएं हुई हैं उससे छह गुना अधिक लोग घायल हुए हैं। कन्नूर में इन हमलों का मुख्य कारण है सीपीएम कार्यकर्ताओं का संघ और अन्य राष्ट्रवादी संगठनों की ओर बढ़ता आकर्षण। कन्नूर में हमारे सर्वाधिक कार्यकर्ता मुख्यत: माकपा छोड़कर आए हैं। अन्य राजनीतिक अथवा अराजनीतिक संगठनों ने मार्क्सवादीयों की इस विस्तारवादी, वर्चस्ववादी नीतियों एवं गुंडागर्दी के सामने घुटने टेके, परंतु संघ ने उसका विरोध किया। इसी कारण संघ हमेशा मार्क्सवादियों के निशाने पर रहता है। संघ के पहले बलिदानी रामकृष्णन का गुनाह केवल इतना था कि वह संघ का स्वयंसेवक था। मैं यहां कुछ कहना नहीं चाहता परंतु सत्य यही है कि केरल के वर्तमान मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन रामकृष्णन की हत्या के प्रमुख आरोपी थे। कन्नूर के हिंसाचार का यह इतिहास है।

गत कुछ वर्षों मे इन घटनाओं में वृद्धि हुई है या इनमें कमी आई है?
वडीकल रामकृष्णन की हत्या के बाद सीपीएम ने यही पद्धति अन्य जगह भी अपनाई जिसे बाद में ‘कन्नूर मॉडल‘ का नाम दिया गया। इसके बाद तो इस प्रकार की हत्याओं एवं हिंसा का सिलसिला ही चल पड़ा जो आज तक चालू है। सीपीएम नेतृत्व इसी मॉडल को राज्य में अन्य जगह भी अपनाता है। आपातकाल के बाद सीपीएम के कार्यकर्ताओं ने बड़े पैमाने पर संघ एवं अन्य राष्ट्रवादी संगठनों की सदस्यता ग्रहण की। इसका कारण आपातकाल को सीपीएम का मौन समर्थन एवं संघ की लोकतंत्र के पुनरुस्थान के लिए निभाई गई सक्रिय भूमिका थी। आपातकाल के बाद सीपीएम की संघ कार्यकर्ताओं पर हमलों में तीव्र वृद्धि हुई। राज्य की सत्ता में सीपीएम प्रत्येक पांच वर्ष के अंतराल में आती रही है। जब जब सीपीएम सत्ता में होती है वह प्रशासन का उपयोग संघ को कुचलने में करती है। इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि यही घटनाएं अब भी घटित हो रही हैं। सीपीएम के राज्य सचिव कोडियारी एवं कन्नूर के जिला सचिव जी जयराजन इन दोनों ने ही सीपीएम की सत्ता आने के बाद संघ एवं भाजपा के विरोध में हिंसा भड़काने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बाद की घटनाओं से यह सिद्ध भी हुआ। उनके कार्यकर्ताओं ने पार्टी के इस आदेश को और अधिक जोर से अमल में लाने हेतु प्रयत्नों की पराकाष्ठा की। इस कारण आवश्यकता है कि संपूर्ण समाज को इस पार्टी एवं सरकार द्वारा प्रायोजित आतंक के विरोध में खड़ा होना होगा।

क्या आपको लगता है कि यह वैचारिक लड़ाई है?
रा. स्व. संघ लड़ाई- झगड़ा, संघर्ष और हिंसा पर विश्वास नहीं रखता। सब की एकता हेतु हम एकात्म मानव दर्शन पर विश्वास रखते हैं। इसमें अन्य विचारों के बाबत यदि भेदाभेद भी हैं या तनाव है तब भी सब को समान स्थान रहेगा। संघर्ष और वह भी सशस्त्र यह कम्युनिस्ट विचारधारा के लिए आवश्यक है। यदि हम वैश्विक दृष्टि से भी देखें तो हिंसा इस पार्टी के कार्यक्रम एवं नीतियों में शामिल है। वे वर्ग संघर्ष (वर्ग-शत्रु) पर विश्वास रखते हैं, एवं उनके समूल नाश का प्रयत्न करते हैं। इस कारण वे अपने विश्वास को अमल में लाते हैं। उनके हमलों से कांग्रेस, आईयूएमएल, सीपीआई एवं एआईएसएफ के कार्यकर्ता भी अछूते नहीं रहे हैं।
‘सीपीएम विरुद्ध रा. स्व. संघ’ के बजाय ‘सीपीएम विरुद्ध अन्य सभी’ यह प्रचलित परिस्थिति है। यदि आप पुरानी घटनाओं का अवलोकन करें तो स्पष्ट होगा कि हमारे सर्वाधिक बलिदानी पहले सीपीएम के कार्यकर्ता रहे हैं।

वामपंथी विचारधारा का प्रभाव दिन-ब-दिन कम होता जा रहा है। क्या ये हत्याएं वामपंथियों की निराशा का द्योतक है?
यह सच है कि वामपंथी विचारधारा का सभी जगह दिन-ब-दिन र्हास हो रहा है। विश्व की परिस्थिति का विचार एवं भारतीय राजनीति का इतिहास दोनों इसके साक्षी हैं। परंतु आपने सब ओर देखा होगा कि वामपंथी अपनी विचारधारा के लिए अंत तक संघर्ष करते हैं। इस अंतिम संघर्ष में वे हमेशा हिंसा एवं आतंक का सहारा लेते हैं। यही घटनाएं वर्तमान में हम केरल में देख रहे हैं। 
रा.स्व.संघ का विचार संपूर्ण देश में हो रहा है परंतु आपने केरल जैसी परिस्थिति कही नहीं देखी होगी। इसका यह अर्थ नहीं है कि रा.स्व. संघ की विचारधारा के विरोधी देश में अन्यत्र नही हैं। वे तो हैं परंतु रा.स्व.संघ के विस्तार कार्यक्रम में वैचारिक विरोधियों के विरुद्ध हिंसा को स्थान नहीं है। परंतु यदि आप केरल की सभी राजनीतिक हिंसक घटनाओं का अध्ययन करें तो एक सिरे पर चाहे अन्य कोई भी हो दूसरे पर हमेशा माकपा एवं उसके कार्यकर्ता होंगे। फासिस्ट एवं दलीय विचारधारा के कारण कम्युनिस्ट राष्ट्रवादियों के विरुद्ध हमेशा असहिष्णु हैं।

कम्युनिस्ट अपने पाशवी हमलों में बच्चों एवं स्त्रियों तक को नहीं छोड़ते, इस विषय में आप क्या विचार करते हैं?
सीपीएम अपने हिंसक विचारों के प्रचार -प्रसार में कोई भेदभाव नहीं बरतते हैं। अर्थात हिंसक हमले करते समय वे स्त्री-पुरुष- बच्चों में कोई भेद नहीं करते। जैसा मैंने पहले कहा, यह परिस्थिति ‘कम्युनिस्ट विरुद्ध अन्य सब’ जैसी ही है। कम्युनिस्टों ने न केवल हमारे कार्यकर्ताओं पर वरन उनके घरों में घुस कर उनके स्त्री-पुत्रों पर भी हिंसक हमले किए हैं। इतना ही नहीं उन्होंने पुरुषों के गले काट दिए एवं उनके पालतू प्राणियों की भी हत्या कर दी। माकपा कार्यकर्ताओं ने गत हफ्ते में केरल के पलक्कड में एक सात वर्षीय बच्चे पर बार-बार हमला किया, उसके परिवारजनों को जलाने का प्रयास किया। इस बच्चे के परिवारजन भाजपा से सबंधित थे, उस समय उन्हें बचाने गए भाजपा कार्यकर्ता श्री राधाकृष्णन को भी गंभीर चोंटें आईं। इस घटना के अन्य सभी पीड़ित अभी भी बीमार हैं। यह अत्यंत निराशाजनक है कि किसी भी प्रचार प्रसार माध्यम ने इसकी खोज खबर नहीं ली। मलप्पुरम नामक मुस्लिम बहुल जिले में सीपीएम के गुंडों ने भाजपा कार्यकर्ता के दस महीने के पुत्र को रास्ते पर फेंक दिया। मैं तो कहूंगा कि हिंसक कारनामे मार्क्सवादियों की विफलता के द्योतक हैं। ऐसे तिरस्कारणीय कृत्यों को करने वालों को तो केवल बालकभक्षी-नरभक्षी ही कहा जा सकता है।

रा.स्व. संघ का इन सभी हत्याओं की ओर देखने का दृष्टिकोण क्या है?
केरल का हिंसाचार वामपंथियों ने शुरू किया है इसमें किंचित भी शंका नहीं है। राज्य में रा.स्व. संघ एवं गैर कम्युनिस्ट दलों पर अनेक बार इकतरफा हमले हुए। इसका एकमेव उपाय है कि वे हिंसा छोड़े एवं संघ के साथ शांति हेतु बात करें। एक बार सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत कन्नूर में विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता श्री अशोक जी सिंघल को श्रंद्धाजलि देने हेतु प्रचार माध्यमों से रुबरु हुए। जब कन्नूर के राजनीतिक हिंसाचार के विषय में उनसे प्रश्न पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘‘हमने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की ओर शांति के लिए हाथ बढ़ाया है।’’ क्या कल्पना कर सकते हैं कि रा. स्व. संघ के सर्वोच्च पद पर बैठा व्यक्ति यह बात कह रहा है। मोहनजी को पता था कि वहां की परिस्थिति कितनी गंभीर है। परंतु वर्तमान मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन ने अपनी पुरानी ठसन भरी पद्धति से ही उत्तर दिया कि यदि मोहन भागवत की इच्छा होगी तो हिंसाचार का अंत होगा।
‘साप्ताहिक केसरी’ के संपादक के नाते, हमारे संगठन के किसी भी वरिष्ठ अधिकारी से चर्चा न करते हुए हिंसाचार की समाप्ति हेतु आवाहन करने वाला एक लेख प्रकाशित किया। मैंने इसमें इतिहास की किसी घटना का उल्लेख नहीं किया। यह सब किसने शुरू किया इसका किसी पर आरोप नहीं किया एवं किसके कितने कार्यकर्ताओं की हत्या हुई इसे भी न लिखते हुए केवल सकारात्मक भूमिका प्रस्तुत की। वैसे ही हिंसा की तत्काल समाप्ति हेतु आवाहन किया। परंतु माकपा की प्रतिक्रिया बहुत ही निराशाजनक एवं शांति के आवाहन का मजाक उड़ाने वाली थी। यदि ऐसा भी है तब भी रा. स्व. संघ हमेशा शांति के पक्ष में ही खड़ा रहेगा यह निश्चित है।

दिल्ली की वर्तमान सरकार संघ विचारों की है। अतः क्या इस मामले में सरकार ने कुछ हस्तक्षेप किया? और यदि नहीं किया हो तो भविष्य में न्याय प्राप्ति हेतु क्या कुछ योजना है?
हम न्याय के लिए गत ५० वर्षों से अथक प्रयत्न कर रहे हैं। रा. स्व. संघ, भाजपा और अन्य राष्ट्रवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं को केरल में गत अनेक दशकों से संवैधानिक अधिकार नकारे जा रहे हैं। हम कानून एवं संविधान के दायरे में सभी स्थायी उपायों पर विचार कर रहे हैं। परंतु राज्य सरकार पर हमारा विश्वास नहीं है। क्योंकि वहां की सरकार ने इस प्रायोजित आतंकवाद का हमेशा समर्थन किया है। केन्द्र सरकार के अतिरिक्त देश के अन्य भागों में कार्यरत मानवाधिकार संगठनों, प्रचार माध्यमों एवं नागरिकों को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के अमानुष कृत्यों को उजागर करने हेतु आगे आना चाहिए।

पुलिस एवं न्यायपालिका इस विषय को किस प्रकार देखते हैं?
हमारी न्यायपालिका पर पूर्ण श्रद्धा है। मतभेद होते हुए भी न्यायपालिका राजनीति से दूर है इस पर हमारा विश्वास है। हमें हमारे मूलभूत एवं संवैधानिक अधिकार पुन: प्राप्त होने चाहिए यह इच्छा है। भारतीय संविधान ने स्वतंत्रता एवं सांस्कृतिक सुरक्षा की गारंटी दी है। ऐसा होते हुए भी, कन्नूर की राजनीति का विचार करते समय ऐसा लगता है कि पुलिस को माकपा का डर लगता है एवं हर पांच वर्ष बाद सत्ता में आने वाले इस दल से सख्ती से निपटने में अपने आप को असहाय पाती है। पुलिस प्रशासन में भी माकपा के लोग हैं। यदि माकपा का कोई कार्यकर्ता किसी आरोप में जेल में जाता है तो उसे वहां वीआईपी ट्रीटमेंट मिलती है। विधान सभा चुनाव जीतने के बाद माकपा के राज्य के प्रमुख नेता कुन्नुर सेंट्रेल जेल के ब्लॉक आठ में बंद सीपीएम के सजायाफ्ता कार्यकर्ताओं से मिलने आए थे। सीपीएम के सजायाफ्ता गुनहगारों को एल.डी. एफ. के सत्ता में आने के बाद मुक्त कर दिया गया। कांग्रेस की भी इसमें मूक सम्मति है क्योंकि दोनों ही भाजपा को अपना मुख्य शत्रु समझते हैं। पुलिस संघ स्वयंसेवकों को बिना किसी कानून कायदे के जेल में ठूंसती है एवं माकपा के अनुकुल बयान देने को बाध्य करती है। गत दिनों इस प्रकार की अनेक घटनाएं सामने आई हैं जहां पुलिस ने स्वयंसेवकों पर भयानक अत्याचार किए एवं सरकार ने पुलिस को निर्दोष घोषित कर दिया। इस प्रचलित परिस्थिति में हम पुलिस से कैसे न्याय की अपेक्षा कर सकते हैं?

गत कुछ दिनों में केरल के अनेक युवकों ने ‘इसिस’ में प्रवेश किया है। क्या इसके पीछे माकपा का हाथ हो सकता है?
युवकों के इसिस में प्रवेश की ओर तो केन्द्र एवं राज्य सरकार को गंभीरता से सोचना चाहिए। केरल में गत अनेक वर्षों से राष्ट्रवादी विचारों की सरकार न होने से आतंकवादी संगठनों को प्रचार के लिए यह राज्य उपजाऊ जमीन की तरह लगता है। अब तो विशेषत: सीपीएम की सरकार आने के बाद अनेक घटनाओं में आतंकवाद का संबंध होने के प्रमाण सामने आए हैं। वहां मुस्लिम युवकों के मन में कट्टरवाद के बीज आसानी से बोए जा रहे हैं। ब्रिटेन के दैनिक ‘द गार्डियन’ ने इस संदर्भ में एक लेख प्रकाशित किया था-‘‘ क्या इसिस में भरती होने के लिए केरल की जमीन उपजाऊ है?’’ इस्लामी आतंकवादियों की बढोत्तरी यहां जबरदस्त है। इसके कारण कई अंतरराष्ट्रीय माध्यमों ने भी अपना ध्यान इस ओर केंद्रित किया है। कई इस्लामी संस्थाओं एवं संगठनों ने इस्लामी विचारधारा (कट्टर इस्लामिक विचारधारा) के प्रचार प्रसार हेतु राज्य सरकार, कांग्रेस एवं मुस्लिम लीग सरीखी संस्थाओं के साथ गठबंधन किया है। इस्लामी विचारधारा की संस्थाएं कुकुरमुत्ते की तरह हर चौक एवं नाकों पर पैदा हो गई हैं। अब यह सिद्ध हो गया है कि यह छोटा सा राज्य कितने ही आतंकियों को इसिस में भर्ती करने का कारण बना है। परंतु अभी भी राज्य सरकार इस ओर आंखें मूंदे बैठी है और यह खतरा कम करने की कोई कार्रवाई नहीं कर रही है; वरन ऐसे लोगों पर वह मेहरबान है। राज्य सरकार एवं माकपा के उग्र विचारों के लोगों, संस्थाओं को सारी सुखसुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं और अपनी कट्टर धर्मांध इस्लामी मतपेटी को सुरक्षित रखने हेतु रा. स्व. संघ जैसे राष्ट्रवादी संगठनों को निशाना बनाया जा रहा है । रा. स्व. संघ पर कम्युनिस्टों के हमले का एक मुख्य कारण यह भी हैै कि माकपा का मतदाता बड़े पैमाने पर इकठ्ठा मुस्लिम समाज है। इन सब को खुश करने हेतु ‘बीफ फेस्टिवल’ जैसे आयोजन भी किए जाते हैं। यह जानकारी पहले भी दी जा चुकी है कि यहां लाल जिहादी मिलकर काम कर रहे हैं और अनेक राष्ट्रविरोधी एवं जनविरोधी घटनाओं में उनका हाथ होने के स्पष्ट प्रमाण समाने आए हैं।