Thursday, 23 March 2017

योगी के आते ही धड़ाम हुआ गौमांस का व्यापार...

अगर ये बूचड़खाने बंद हुए तो योगी सरकार को अपने पूरे कार्यकाल में करीब 5700 करोड़ (570 अरब) रुपए का घाटा सहना होगा.योगी इसके लिए पूरी तरह तैयार दिख रहे हैं. पूरी यूपी कैबिनेट इस मुद्दे पर एकमत है और बहुमत की इस सरकार को रोक पाना मुश्किल है.
कुछ लोग #गोमुत्र बेच के भी
करोडपति बन गये
कुछ लोग पूरी गाय🐂
खा के भी भिखारी है ?

चुनावी घोषणा पत्र में भाजपा ने उत्तर प्रदेश में अवैध बूचड़खानों को बंद कराने की बात कही थी। इसका असर सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही दिखने लगा है। प्रदेश में अधिकांश क्षेत्रों में अवैध बूचड़खानों में तालाबंदी होनी शुरू हो गई है। मालूम हो कि प्रदेश में 250 से ज्यादा अवैध बूचड़खाने चिह्नित हैं। जिन्हें नगर निगम और संबंधित विभाग के अफसर कागज पर बंद बता रहे हैं। अब प्रशासन का कहना है कि उन्हें जल्द ही बंद कर दिया जाएगा क्योंकिइन बूचड़खानों में रोज सैकड़ों जानवर काटे जाते हैं।प्रदेश में नई सरकार के गठन के तुरंत बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बूचड़खानों (स्लाटर हाउस) को बंद करने की घोषणा से सकते में आए इलाहाबाद नगर निगम प्रशासन ने रविवार रात करेली पुलिस की मौजूदगी में अटाला और नैनी के चकदोंदी मोहल्ले में मानक के विपरीत चल रहे स्लाटर हाउस को सील कर दिया। शहर में अटाला के साथ रामबाग और नैनी के बूचड़खानों को बंद करने का आदेश एनजीटी पहले ही दे चुका है। सोमवार को स्लाटर हाउस बंद करने की कार्रवाई से नाराज लोगों ने नगर निगम प्रशासन को कोसा। लोगों का कहना था कि एनजीटी के आदेश पर यदि बूचड़खाने बंद किए गए तो वहां काम कैसे हो रहा था। जानकारी के मुताबिक 90 की क्षमता के विपरीत अटाला स्लाटर हाउस में तीन सौ से अधिक जानवर रोज काटे जाते हैं।मेरठ में लगातार दूसरे दिन सोमवार को पशु कटान बुरी तरह प्रभावित रहा। मीट फैक्ट्रियों में कटान बंद रहा। वहीं शहर में अधिकांश मीट की दुकानें बंद रहीं। इस काम से जुड़े करीब पांच हजार लोग हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे।
आगरा में भी मीट का कारोबार में गिरावट दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में आगरा शहर में करीब 239 मीट का दुकानों का पंजीकरण किया था लेकिन वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए लाइसेंसों की संख्या लगभग आधी हो गई है। नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक यहां करीब 127 लाइसेंस धारकों ने लाइसेंस का नवीनीकरण कराया है। इस वर्ष एक भी नए लाइसेंस का आवेदन नहीं किया गया है।मैनपुरी में शहर के आसपास के इलाकों में चोरी छिपे पशुओं का कटान होता है। यहां कोई बड़ा स्लाटर हाउस नहीं है। भाजपा की सरकार के गठन के बाद भी पशुओं के कटान में कुछ कमी आई है। हालांकि इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
फिरोजाबाद में शहर के विभिन्न क्षेत्र में चोरी छुपे चल रहे 40 प्रतिशत कट्टीघरों पर सोमवार को सन्नाटा नजर आया। अवैध रूप से चल रही कई पशु वधशालाएं बंद हुईं।
कासगंज और एटा में प्रदेश सरकार के यांत्रिक कत्ल खानों को बंद करने के निर्देश जारी होने से पहले ही पुलिस प्रशासन खुद अलर्ट हो चुका है। एसपी ने थानेदारों से इसका ब्योरा तलब किया है। चेताया है कि गोवंशीय पशुओं के कत्ल पर आरोपियों के खिलाफ रासुका लगेगी।उधर बरेली मंडल में गोकशी और गो तस्करी थम गई है। अवैध स्लाटर हाउस बंद नहीं हुए हैं लेकिन कमी आई है। पीपीपी माडल पर बरेली का बूचड़खाना तैयार है, जिसे अप्रैल के पहले सप्ताह से शुरू कराने की तैयारी की जा रही है।कमिश्नर प्रमांशु कुमार ने मंडल के सभी डीएम, एसएसपी को अवैध बूचड़खानों के खिलाफ अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
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मीट की कमी से 110 साल में पहली बार बंद रही टुंडे कबाब की दुकान पिछले 110 सालों में यह पहली बार हुआ है, जब भैंसे के मीट की कमी होने की वजह से बुधवार को टुंडे कबाबी की दुकान बंद रही है, क्योंकि कबाब बनाने के लिए भैंसे का मीट ही नहीं मिल रहा है।
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गजब का संयोग
UP + YOGI = उपयोगी









Wednesday, 22 March 2017

हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराने वाली ईसाई संस्थाओं को कांग्रेस सरकार ने बांटें करोड़ों ..!

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार क्या राज्य में ईसाई धर्म को बढ़ावा दे रही है? यह सवाल खड़ा हुआ है एक आरटीआई से पता चला है कि कांग्रेस में सिद्धारमैया की सरकार बीते कुछ समय में ईसाई संस्थाओं को करोड़ों रुपये दिए हैं। ये पैसे राज्य में बने चर्च की मरम्मत और सुंदरीकरण के नाम पर दिए गए हैं। इसके अलावा बड़ी रकम नए चर्च और क्रिश्चियन कम्युनिटी हॉल बनाने के लिए दी गई है। ऐसा करना संविधान की मूल भावना का उल्लंघन है, क्योंकि सेकुलर देश होने की वजह से कोई सरकार धार्मिक संस्थाओं को पैसा नहीं दे सकती। जाहिर है यह सवाल उठता है कि खुद को सेकुलर पार्टी बताने वाली कांग्रेस और उसकी अध्यक्ष सोनिया गांधी को क्या कर्नाटक सरकार को रोकना नहीं चाहिए। या फिर कहीं ऐसा तो नहीं कि ईसाई संस्थाओं की जेब भरने का काम आलाकमान के इशारे पर ही हो रहा है?
ईसाई धर्म को बढ़ावा देने का एजेंडा? 
26 मार्च 2016 को आरटीआई के तहत कर्नाटक सरकार से कुल 4 सवाल पूछे गए। ये सवाल सरकारी आदेश नंबर- MWD 318MDS2011 (दिनांक 16/01/2012) के हवाले से राज्य अल्पसंख्यक विभाग की तरफ से चर्च को दिए जा रहे फंड के बारे में थे।
पहला सवाल– चर्च की मरम्मत के लिए सरकार की तरफ से साल दर साल कितना फंड दिया गया?
दूसरा सवाल– उन ईसाई संस्थाओं/चर्च के नाम और पते बताएं जिन्हें मरम्मत के नाम पर सरकार से पैसे मिले हैं?
तीसरा सवाल– नए चर्च बनाने पर साल दर साल राज्य सरकार ने कितने पैसे जारी किए?
चौथा सवाल– उन ईसाई संस्थाओं/चर्च के नाम और पते बताएं जिन्हें नए चर्च बनाने के लिए पैसे दिए गए?चर्च के लिए खोला सरकारी खजाना 
2013-14 में कर्नाटक सरकार ने राज्य के 134 गिरिजाघरों को 12.30 करोड़ रुपये दिए। इसके अलावा 6.72 करोड़ रुपये क्रिश्चियन कम्युनिटी सेंटर बनाने के लिए दिए गए। इन कम्युनिटी सेंटरों में ही धर्मांतरण का ज्यादातर काम होता है।2014-15 में यह फंडिंग और बढ़ गई। इस दौरान 125 चर्चों को 16.56 करोड़ रुपये सरकारी खजाने से दिए गए। इसी तरह 55 ईसाई समुदाय भवन बनाने के लिए करीब 15 करोड़ रुपये बांटे गए।
2015-16 में चर्च की मरम्मत पर 15 करोड़ रुपये बांटे गए। इस दौरान कम्युनिटी सेंटर बनाने के खर्च का ब्योरा नहीं दिया गया।
साल दर साल चर्च की फंडिंग बढ़ती गई 
तीन साल के अंदर चर्च को बांटे जा रहे पैसे में भारी बढ़ोतरी देखी जा सकती है। 2013-14 में कुल मिलाकर 19 करोड़ रुपये दिए गए थे, जोकि 2014-15 में बढ़कर 31.55 करोड़ रुपये हो गए। 2015-16 में रकम कुछ कम हुई, लेकिन इस साल भी 23 करोड़ रुपये ईसाई संस्थाओं की जेब में डाल दिए गए।
कांग्रेस सरकार कर रही है ईसाई धर्म का प्रचार! 
अमेरिका जैसे दुनिया के बड़े-बड़े ईसाई देशों में भी सरकारें चर्च बनाने या मरम्मत करने के नाम पर एक भी पैसा नहीं देतीं। कई देशों में ऐसा करना गैर-कानूनी है। सेकुलर देश होने के नाते भारत में भी कोई सरकार किसी धर्म के पूजास्थल बनाने या मरम्मत के लिए पैसे नहीं दे सकती। जहां तक कर्नाटक सरकार का सवाल है उसने राज्य कई कई हिंदू मंदिरों की करोड़ों की संपत्ति सील कर रखी है। इन मंदिरों के रख-रखाव पर इसी में से थोड़ी-बहुत रकम खर्च की जाती है। नतीजा राज्य के सैकड़ों साल पुराने मंदिरों की हालत बेहद जर्जर होती जा रही है।
सिद्धरमैया की सांप्रदायिक राजनीति पुरानी है 
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ईसाइयों के अलावा मुस्लिम धर्म के प्रचार पर भी खर्च करती रही है। पिछले साल खबर आई थी कि सिद्धरमैया ने ईसाई और मुस्लिम छात्रों को विदेशों में पढ़ने के लिए पैसे देने का एलान किया था। इसके अलावा मुफ्त जमीन, शादी में 50 हजार रुपये के तोहफे जैसी योजनाएं लाई जा चुकी हैं।
(न्यूज़ वेबसाइट इंडियाफैक्ट्स इनपुट्स के साथ)

रामनामी समाज – पुरे शरीर पर लिखवाते हैं राम नाम।

भारत अनोखा देश हैं विविध प्रकार की संस्कृति से भरे हुए देश में हमेशा कुछ ना कुछ नया मिल ही जाता है। भारत में हर प्रकार के धर्म को पालने की शक्ति है। आपको भारत में हमेशा नया देखने को मिल ही जायेगा और शायद इसलिए ही भारत सबसे महान देश है।
आज हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के रामनामी समाज की जहां पर पुरे शरीर पर राम नाम लिखवाने की अनोखी परंपरा प्रचलित है और हर कोई इसका पालन करता है। आइये जानते हैं।
कहा जाता है कि इस समाज में यह परंपरा लगभग 100 सालों से चली आ रही है।

टैटू के पीछे है एक कहानी

कहा जाता है कि 100 साल पहले गांव में हिन्दुओं के ऊंची जाति के लोगों ने इस समाज को मंदिर में घुसने से मना कर दिया था। इसके बाद से ही इन्होंने विरोध करने के लिए चेहरे सहित पूरे शरीर में राम नाम का टैटू बनवाना शुरू कर दिया।

क्या कहते हैं लोग

इस गांव के बहुत से लोग इस परंपरा को बहुत अच्छा मानते हुए हमेशा उसका बखान करते हैं और बहुत खुशी से बताते हैं।-रामनामी समाज को रमरमिहा के नाम से भी जाना जाता है।
-जमगाहन गांव के महेतर राम टंडन इस परंपरा को पिछले 50 सालों से निभा रहे हैं।
-जमगाहन छत्तीसगढ़ के सबसे गरीब और पिछड़े इलाकों में से है।
-76 साल के रामनामी टंडन बताते हैं, जिस दिन मैंने ये टैटू बनवाया, उस दिन मेरा नया जन्म हो गया।
50 साल बाद उनके शरीर पर बने टैटू कुछ धुंधले से हो चुके हैं, लेकिन उनके इस विश्वास में कोई कमी नहीं आई है।
– नजदीकी गांव गोरबा में भी 75 साल की पुनई बाई इसी परंपरा को निभा रहीं हैं।
– पुनई बाई के शरीर पर बने टैटू को वह भगवान का किसी खास जाति का ना होकर सभी के होने की बात से जोड़ती हैं।

नई पीढ़ी की दिलचस्पी कम है

रामनामी जाति के लोगों की आबादी तकरीबन एक लाख है और छत्तीसगढ़ के चार जिलों में इनकी संख्या ज्यादा है। सभी में टैटू बनवाना एक आम बात है।
– समय के साथ टैटू को बनवाने का चलन कुछ कम हुआ है।
– रामनामी जाति की नई पीढ़ी के लोगों को पढ़ाई और काम के सिलसिले में दूसरे शहरों में जाना पड़ता है। इसलिए ये नई पीढ़ी पूरे शरीर पर टैटू बनवाना पसंद   नहीं करती।
– इस बारे में टंडन बताते हैं, आज की पीढ़ी इस तरह से टैटू नहीं बनवाती। ऐसा नहीं है कि उन्हें इस पर विश्वास नहीं है। पूरे शरीर में न सही, वह किसी भी हिस्से में राम-राम लिखवाकर अपनी संस्कृति को आगे बढ़ा रहे हैं।
इस समाज का मानना है कि वह अपनी संस्कृति को हमेशा जीवित रखना चाहते हैं इसलिए भले ही आधुनिकता के प्रभाव से कुछ चलन कम हुआ हो पर लोग आज भी आदर से टैटू जरूर बनवाते हैं।

समाज के कुछ नियम

हर समाज की तरह भी इस समाज के अपने कुछ नियम हैं जिन्हें यह सभी दिल से मानते हैं और उनका पालन करते हैं।
-इस समाज में पैदा हुए लोगों को शरीर के कुछ हिस्सों में टैटू बनवाना जरूरी है।
-खासतौर पर छाती पर और दो साल का होने से पहले।
-टैटू बनवाने वाले लोगों को शराब पीने की मनाही के साथ ही रोजाना राम नाम बोलना भी जरूरी है।
टैटू बनवाने के साथ ही राम नाम लिखे कपड़े भी पहनते हैं रामनामी।
-ज्यादातर रामनामी लोगों के घरों की दीवारों पर राम-राम लिखा होता है।
-इस समाज के लोगों में राम-राम लिखे कपड़े पहनने का भी चलन है, और ये लोग आपस में एक-दूसरे को राम-राम के नाम से ही पुकारते हैं।

समाज की दिलचस्प बातें

-नखशिख राम-राम लिखवाने वाले सारसकेला के 70 वर्षीय रामभगत ने बताया कि रामनामियों की पहचान राम-राम का गुदना गुदवाने के तरीके के मुताबिक की जाती है।
-शरीर के किसी भी हिस्से में राम-राम लिखवाने वाले रामनामी। माथे पर राम नाम लिखवाने वाले को शिरोमणि। और पूरे माथे पर राम नाम लिखवाने वाले को सर्वांग रामनामी और पूरे शरीर पर राम नाम लिखवाने वाले को नखशिख रामनामी कहा जाता है।
भले ही आज आधुनिकता के शोर में यह चलन कम हो रहा हो पर इस समाज का युवा आज भी इसे कायम रखते हुए शरीर के किसी ना किसी हिस्से पर राम नाम जरूर लिखवाता है। भले ही आज कानून में बदलाव के जरिये समाज में ऊंच-नीच को तकरीबन मिटा दिया गया है और इन सबके बीच रामनामी लोगों ने बराबरी पाने की उम्मीद नहीं खोई है।

यूपी: अवैध बूचड़खानों पर बड़ा ऐक्शन, पूर्व BSP मंत्री के यहां भी छापे !!!
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने पुलिस को अवैध बूचड़खाने बंद कराने के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, गो तस्करी पर भी पूरी तरह से रोक लगाने को कहा है। घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस गश्त को बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। अफसरों से कहा गया है कि वे पशु तस्करी रोकने की दिशा में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएं। हालांकि, योगी के इस आधिकारिक आदेश से पहले ही पुलिस ऐक्शन में है। अवैध मीट व्यापार को रोकने के लिए राज्य के कई जगहों पर धरपकड़ जारी है। मेरठ में पूर्व बीएसपी मंत्री हाजी याकूब कुरैशी और पूर्व सांसद शाहिद अखलाक की मीट फैक्ट्रियों पर भी छापे मार गए। बता दें कि बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में कहा था कि वह सत्ता में आने पर सभी गैरकानूनी बूचड़खाने बंद करने के लिए कड़े कदम उठाएगी और यांत्रिक बूचड़खानों पर प्रतिबंध लगाएगी।
वाराणसी में बड़ा ऐक्शन
पुलिस के ऐक्शन में आने के बाद पशु तस्करों में हड़कंप मचा हुआ है। वाराणसी के बड़ागांव और चंदौली के अलीनगर में तस्कर पश्चिम बंगाल ले जाए जा रहे पशुओं से लदे वाहन को छोड़कर फरार हो गए। वहीं, वाराणसी के जैतपुरा पुलिस थाना क्षेत्र के कमलगदहा इलाके में जिला प्रशासन ने कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से चलाया जा रहा एक बूचड़खाना सील कर दिया।       .....................पवन अवस्थी

Tuesday, 21 March 2017

देश की 23 यूनिवर्सिटी

279 टेक्निकल इंस्टीट्यूट हैं फेक ...

हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के अनुसार देश की राजधानी दिल्ली 66 नकली कॉलेजों के साथ इस लिस्ट में टॉप पर है। ये कॉलेज नियामक की अनुमति के बिना ही इंजीनियरिंग और अन्य तकनीकी कोर्स करवा रहे हैं। इस संस्थानों के पास छात्रों को डिग्री देने की कोई अधिकार नहीं है। ऐसे कॉलेजों द्वारा दिए गए सर्टिफिकेट कागज के टुकड़े के अलावा कुछ भी नहीं हैं।

यूजीसी और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद(AICTE) ने अपनी सालाना समीक्षा में ऐसे नकली संस्थानों की लिस्ट अपने वेबसाइट पर जारी की है और छात्रों को एडमिशन लेने से पहले सावधान रहने की हिदायत दी है। संबंधित राज्य अधिकारियों को अस्वीकृत और अनियमित तकनीकी संस्थानों की सूची भेज दी है। 

तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र भी नकली संस्थानों से अछूते नहीं हैं। यहां भी कई नकली संस्थान छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
जीवन की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है । कायरों ने इसे परेशानियों से भरा महासागर करार दिया है, तो वीरों ने इसे अवसरों का खजाना कहा है, संतों ने इसे मोक्ष का मार्ग कहा है, तो सांसारिकों ने इसे भोग का अवसर बताया है, विद्वानों को यह अनुभव की खान मालूम हुयी है, तो मूर्खों को मनमानी का स्थान लगा है. 
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पर इनमें से कोई भी जीवन की निश्चित परिभाषा नहीं कही जा सकती है. हर परिस्थिति हर स्थान पर इसकी अलग परिभाषा व्यक्त हुयी है. 
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मेरी दृष्टि से देखा जाए तो जीवन उस महान अवसर का नाम है जो एक इंसान को सिर्फ एक बार प्राप्त होता है वो भी निश्चित समयावधि के लिए है. वो चाहे तो ऐसे कर्म कर सकता है कि आने वाली समस्त पीढिया उसे याद रखे… या वो यूँही इस अवसर को गँवा सकता है !!!
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सबसे महत्वपूर्ण तथ्य हैं, "भावना" .. इस मानव जाति को कुछ सार्थक देने की 'भावना' .. जब इंसान के भीतर इस 'भावना' की ज्योति प्रज्जवलित हो जाती है तो वो कुछ ऐसा कर गुजरता है कि .. संसार उसे सिर आँखों पर बिठा लेता है !
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तुम्हे उनके सूट बूट से ऐतराज़ था,
बिना सिले भगवा वस्त्र धारी पर भी ??
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बर्बर आक्रान्ता #बाबर की मजार(काबुल अफगानिस्तान) जहाँ जानवर भी नहीं जाते ।और हमारे देश के मुल्ले उसे अपना सबकुछ मानते हैं....
श्रीमती इन्दिरा गांधी जब अफगानिस्तान गयी , तो वहाँ पर उनको लगा कि यहाँ बाबर की मजार है । उन्होंने कहा कि इतना बड़ा सम्राट हुआ , साम्राज्य संस्थापक हुआ , चलो उसकी मजार पर पुष्प चक्र चढ़ाना चाहिए । उन्होंने कहा , मैं बाबर की मजार पर पुष्प चढ़ाना चाहती हूँ । अफगानिस्तान की सरकार बड़ी घबरायी , कभी सोचा भी नहीं था , कोई आकर पुष्प चक्र चढ़ायेगा । पता लगाया , तो एक कब्रिस्तान में एक कोने में उसकी मजार थी । इतनी टूटी - फूटी अवस्था में थी , कि झाड़ - झंखाड़ खड़े हो गये थे । भारत की प्रधानमंत्री आने वाली हैं , इसलिए उन्होंने उसे साफ करके देखने लायक बनाया । प्रधानमंत्री गयी , वही पुष्प चक्र चढ़ाया । जब जाने लगी तो उनके साथ एक अधिकारी था , उसने वहाँ के कब्रिस्तान के प्रमुख से पूछा , बाबर इतने बड़े एक साम्राज्य का संस्थापक हुआ और उसकी मजार इतनी टूटी फूटी अवस्था में ? तो उसका उत्तर था - वह कौन अफगान था ! वह अफगान नहीं था , तो हम उसकी चिन्ता क्यों करें ? अफगानिस्तान का मुसलमान , मुसलमान होते हुए भी बाबर को अपना नहीं समझता । दुर्भाग्य की बात है कि अपने देश भारत में मुसलमानों का एक वर्ग बाबर को अपना पुरखा मानता है और उनके वोटों के लालची राजनीतिज्ञ भी बाबर को अपना पुरखा मानते हैं , इसलिये उसने राम मन्दिर तोड़कर वहाँ पर जो मस्जिदरूपी ढ़ाँचा बनाया था , उसको बाबरी मस्जिद कहते है