Monday, 16 September 2019

रामचरित मानस के कुछ रोचक तथ्य🏹
1:~लंका में राम जी = 111 दिन रहे।
2:~लंका में सीताजी = 435 दिन रहीं।
3:~मानस में श्लोक संख्या = 27 है।
4:~मानस में चोपाई संख्या = 4608 है।
5:~मानस में दोहा संख्या = 1074 है।
6:~मानस में सोरठा संख्या = 207 है।
7:~मानस में छन्द संख्या = 86 है।
8:~सुग्रीव में बल था = 10000 हाथियों का।
9:~सीता रानी बनीं = 33वर्ष की उम्र में।
10. मानस रचना के समय तुलसीदास जी की उम्र 77 वर्ष
11. पुष्पक विमान की चाल = 400 मील/घण्टा थी।
12.रामादल व रावण दल का युद्ध 87 दिन चला।
13:~राम रावण युद्ध = 32 दिन चला।
14:~सेतु निर्माण 5 दिन में हुआ।
15:~नलनील के पिता विश्वकर्मा जी हैं।
16:~त्रिजटा के पिता विभीषण हैं।
17:विश्वामित्र जी राम जी को 10 दिन के लिए लेकर गए
18:~राम ने रावण को सबसे पहले मारा था 6 वर्ष की उम्र में।
19:~रावण को जिन्दा किया सुखेन बेद ने नाभि में अमृत रखकर।
श्री राम के दादा परदादा का नाम क्या था?
1 - ब्रह्मा जी से मरीचि हुए,
2 - मरीचि के पुत्र कश्यप हुए,
3 - कश्यप के पुत्र विवस्वान थे,
4 - विवस्वान के वैवस्वत मनु हुए.वैवस्वत मनु के समय जल प्रलय हुआ था,
5 - वैवस्वतमनु के दस पुत्रों में से एक का नाम इक्ष्वाकु था, इक्ष्वाकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया और इस प्रकार इक्ष्वाकु कुलकी स्थापना की |
6 - इक्ष्वाकु के पुत्र कुक्षि हुए,
7 - कुक्षि के पुत्र का नाम विकुक्षि था,
8 - विकुक्षि के पुत्र बाण हुए,
9 - बाण के पुत्र अनरण्य हुए,
10- अनरण्य से पृथु हुए,
11- पृथु से त्रिशंकु का जन्म हुआ,
12- त्रिशंकु के पुत्र धुंधुमार हुए,
13- धुन्धुमार के पुत्र का नाम युवनाश्व था,
14- युवनाश्व के पुत्र मान्धाता हुए,
15- मान्धाता से सुसन्धि का जन्म हुआ,
16- सुसन्धि के दो पुत्र हुए- ध्रुवसन्धि एवं प्रसेनजित,
17- ध्रुवसन्धि के पुत्र भरत हुए,
18- भरत के पुत्र असित हुए,
19- असित के पुत्र सगर हुए,
20- सगर के पुत्र का नाम असमंज था,
21- असमंज के पुत्र अंशुमान हुए,
22- अंशुमान के पुत्र दिलीप हुए,
23- दिलीप के पुत्र भगीरथ हुए, भागीरथ ने ही गंगा को पृथ्वी पर उतारा था.भागीरथ के पुत्र ककुत्स्थ थे |
24- ककुत्स्थ के पुत्र रघु हुए, रघु के अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी नरेश होने के कारण उनके बाद इस वंश का नाम रघुवंश हो गया, तब से श्री राम के कुल को रघु कुल भी कहा जाता है |
25- रघु के पुत्र प्रवृद्ध हुए,
26- प्रवृद्ध के पुत्र शंखण थे,
27- शंखण के पुत्र सुदर्शन हुए,
28- सुदर्शन के पुत्र का नाम अग्निवर्ण था,
29- अग्निवर्ण के पुत्र शीघ्रग हुए,
30- शीघ्रग के पुत्र मरु हुए,
31- मरु के पुत्र प्रशुश्रुक थे,
32- प्रशुश्रुक के पुत्र अम्बरीष हुए,
33- अम्बरीष के पुत्र का नाम नहुष था,
34- नहुष के पुत्र ययाति हुए,
35- ययाति के पुत्र नाभाग हुए,
36- नाभाग के पुत्र का नाम अज था,
37- अज के पुत्र दशरथ हुए,
38- दशरथ के चार पुत्र राम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न हुए |
इस प्रकार ब्रह्मा की उन्चालिसवी (39) पीढ़ी में श्रीराम का जन्म हुआ ।

Friday, 9 August 2019

सद्‌गुरु बताते हैं कि शरीर में कुछ निश्चित पहलूओं के अपनी जगह ले लेने के बाद, कई रहस्यमयी आयाम मनुष्य के बोध में आ जाते हैं।    https://www.facebook.com/SadhguruHindi/videos/373401246598428/

Thursday, 4 July 2019

जिहाद_का_इलाज

सन 711ई. की बात है। अरब के पहले मुस्लिम आक्रमणकारी मुहम्मद बिन कासिम के आतंकवादियों ने मुल्तान विजय के बाद एक विशेष सम्प्रदाय हिन्दू के ऊपर गांवो शहरों में भीषण रक्तपात मचाया था। हजारों स्त्रियों की छातियाँ नोच डाली गयीं, इस कारण अपनी लाज बचाने के लिए हजारों सनातनी किशोरियां अपनी शील की रक्षा के लिए कुंए तालाब में डूब मरीं।लगभग सभी युवाओं को या तो मार डाला गया या गुलाम बना लिया गया। भारतीय सैनिकों ने ऎसी बर्बरता पहली बार देखी थी।

एक बालक तक्षक के पिता कासिम की सेना के साथ हुए युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो चुके थे। लुटेरी अरब सेना जब तक्षक के गांव में पहुची तो हाहाकार मच गया। स्त्रियों को घरों से खींच खींच कर उनकी देह लूटी जाने लगी।भय से आक्रांत तक्षक के घर में भी सब चिल्ला उठे। तक्षक और उसकी दो बहनें भय से कांप उठी थीं।
तक्षक की माँ पूरी परिस्थिति समझ चुकी थी, उसने कुछ देर तक अपने बच्चों को देखा और जैसे एक निर्णय पर पहुच गयी। माँ ने अपने तीनों बच्चों को खींच कर छाती में चिपका लिया और रो पड़ी। फिर देखते देखते उस क्षत्राणी ने म्यान से तलवार खीचा और अपनी दोनों बेटियों का सर काट डाला।उसके बाद अरबों द्वारा उनकी काटी जा रही गाय की तरफ और बेटे की ओर अंतिम दृष्टि डाली, और तलवार को अपनी छाती में उतार लिया।
आठ वर्ष का बालक तक्षक एकाएक समय को पढ़ना सीख गया था, उसने भूमि पर पड़ी मृत माँ के आँचल से अंतिम बार अपनी आँखे पोंछी, और घर के पिछले द्वार से निकल कर खेतों से होकर जंगल में भाग गया।
25 वर्ष बीत गए। अब वह बालक बत्तीस वर्ष का पुरुष हो कर कन्नौज के प्रतापी शासक नागभट्ट द्वितीय का मुख्य अंगरक्षक था। वर्षों से किसी ने उसके चेहरे पर भावना का कोई चिन्ह नही देखा था। वह न कभी खुश होता था न कभी दुखी। उसकी आँखे सदैव प्रतिशोध की वजह से अंगारे की तरह लाल रहती थीं। उसके पराक्रम के किस्से पूरी सेना में सुने सुनाये जाते थे। अपनी तलवार के एक वार से हाथी को मार डालने वाला तक्षक सैनिकों के लिए आदर्श था। कन्नौज नरेश नागभट्ट अपने अतुल्य पराक्रम से अरबों के सफल प्रतिरोध के लिए ख्यात थे। सिंध पर शासन कर रहे अरब कई बार कन्नौज पर आक्रमण कर चुके थे,पर हर बार योद्धा राजपूत उन्हें खदेड़ देते। युद्ध के सनातन नियमों का पालन करते नागभट्ट कभी उनका पीछा नहीं करते, जिसके कारण मुस्लिम शासक आदत से मजबूर बार बार मजबूत हो कर पुनः आक्रमण करते थे। ऐसा पंद्रह वर्षों से हो रहा था।

इस बार फिर से सभा बैठी थी, अरब के खलीफा से सहयोग ले कर सिंध की विशाल सेना कन्नौज पर आक्रमण के लिए प्रस्थान कर चुकी है और संभवत: दो से तीन दिन के अंदर यह सेना कन्नौज की सीमा पर होगी। इसी सम्बंध में रणनीति बनाने के लिए महाराज नागभट्ट ने यह सभा बैठाई थी। सारे सेनाध्यक्ष अपनी अपनी राय दे रहे थे...तभी अंगरक्षक तक्षक उठ खड़ा हुआ और बोला---
*महाराज, हमे इस बार दुश्मन को उसी की शैली में उत्तर देना होगा।*

महाराज ने ध्यान से देखा अपने इस अंगरक्षक की ओर, बोले- "अपनी बात खुल कर कहो तक्षक, हम कुछ समझ नही पा रहे।"

*"महाराज, अरब सैनिक महाबर्बर हैं, उनके साथ सनातन नियमों के अनुरूप युद्ध कर के हम अपनी प्रजा के साथ घात ही करेंगे। उनको उन्ही की शैली में हराना होगा।"*

महाराज के माथे पर लकीरें उभर आयीं, बोले-
"किन्तु हम धर्म और मर्यादा नही छोड़ सकते सैनिक। "

तक्षक ने कहा-
*"मर्यादा का निर्वाह उसके साथ किया जाता है जो मर्यादा का अर्थ समझते हों। ये बर्बर धर्मोन्मत्त राक्षस हैं महाराज। इनके लिए हत्या और बलात्कार ही धर्म है।"*

"पर यह हमारा धर्म नही हैं बीर"

"राजा का केवल एक ही धर्म होता है महाराज, और वह है प्रजा की रक्षा। देवल और मुल्तान का युद्ध याद करें महाराज, जब कासिम की सेना ने दाहिर को पराजित करने के पश्चात प्रजा पर कितना अत्याचार किया था। ईश्वर न करे, यदि हम पराजित हुए तो बर्बर अत्याचारी अरब हमारी स्त्रियों, बच्चों और निरीह प्रजा के साथ कैसा व्यवहार करेंगे, यह आप भली भाँति जानते हैं।"

महाराज ने एक बार पूरी सभा की ओर निहारा, सबका मौन तक्षक के तर्कों से सहमत दिख रहा था। महाराज अपने मुख्य सेनापतियों मंत्रियों और तक्षक के साथ गुप्त सभाकक्ष की ओर बढ़ गए।

अगले दिवस की संध्या तक कन्नौज की पश्चिम सीमा पर दोनों सेनाओं का पड़ाव हो चूका था, और आशा थी कि अगला प्रभात एक भीषण युद्ध का साक्षी होगा।

आधी रात्रि बीत चुकी थी। अरब सेना अपने शिविर में निश्चिन्त सो रही थी। अचानक तक्षक के संचालन में कन्नौज की एक चौथाई सेना अरब शिविर पर टूट पड़ी। अरबों को किसी हिन्दू शासक से रात्रि युद्ध की आशा न थी। वे उठते,सावधान होते और हथियार सँभालते इसके पुर्व ही आधे अरब गाजर मूली की तरह काट डाले गए।

इस भयावह निशा में तक्षक का शौर्य अपनी पराकाष्ठा पर था।वह घोडा दौड़ाते जिधर निकल पड़ता उधर की भूमि शवों से पट जाती थी। आज माँ और बहनों की आत्मा को ठंडक देने का समय था....

उषा की प्रथम किरण से पुर्व अरबों की दो तिहाई सेना मारी जा चुकी थी। सुबह होते ही बची सेना पीछे भागी, किन्तु आश्चर्य! महाराज नागभट्ट अपनी शेष सेना के साथ उधर तैयार खड़े थे। दोपहर होते होते समूची अरब सेना काट डाली गयी। अपनी बर्बरता के बल पर विश्वविजय का स्वप्न देखने वाले आतंकियों को पहली बार किसी ने ऐसा उत्तर दिया था।

विजय के बाद महाराज ने अपने सभी सेनानायकों की ओर देखा, उनमे तक्षक का कहीं पता नही था।सैनिकों ने युद्धभूमि में तक्षक की खोज प्रारंभ की तो देखा-लगभग हजार अरब सैनिकों के शव के बीच तक्षक की मृत देह दमक रही थी। उसे शीघ्र उठा कर महाराज के पास लाया गया। कुछ क्षण तक इस अद्भुत योद्धा की ओर चुपचाप देखने के पश्चात महाराज नागभट्ट आगे बढ़े और तक्षक के चरणों में अपनी तलवार रख कर उसकी मृत देह को प्रणाम किया। युद्ध के पश्चात युद्धभूमि में पसरी नीरवता में भारत का वह महान सम्राट गरज उठा-

"आप आर्यावर्त की वीरता के शिखर थे तक्षक.... भारत ने अबतक मातृभूमि की रक्षा में प्राण न्योछावर करना सीखा था, आप ने मातृभूमि के लिए प्राण लेना सिखा दिया। भारत युगों युगों तक आपका आभारी रहेगा।"

साभार... अज्ञात

इतिहास साक्षी है, इस युद्ध के बाद अगले तीन शताब्दियों तक अरबों कीें भारत की तरफ आँख उठा कर देखने की हिम्मत नही हुई।
तक्षक ने सिखाया कि मातृभूमि की रक्षा के लिए प्राण दिए ही नही, लिए भी जाते है, साथ ही ये भी सिखाया कि दुष्ट सिर्फ दुष्टता की ही भाषा जानता है, इसलिए उसके दुष्टतापूर्ण कुकृत्यों का प्रत्युत्तर उसे उसकी ही भाषा में देना चाहिए अन्यथा वो आपको कमजोर ही समझता रहेगा।

Friday, 14 June 2019



*दैनिक योग का अभ्यास - क्रम*

👉 *प्रारंभ* : तीन बार ओ३म् लंबा उच्चारण करें।

👉 *गायत्री - महामंत्र* :
ओ३म् भूर्भुव: स्व:। तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्।।

👉 *महामृत्युंजय - मंत्र* : ओ३म् त्र्यंबकम यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम। उर्वारुकमिव बंधनामृत्योर्मुक्षिय माऽमृतात्।।

👉 *संकल्प - मंत्र* : ओ३म् सह नवावतु। सह नोै भुनक्तु। सह वीर्य करवावहै।तेजस्विनावधीतमस्तु।मा विद्विषावहै।।

👉 *प्रार्थना - मन्त्र* ओ३म् ॐ असतो मा सद् गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्माऽमृतं गमय। ओ३म् शान्ति: शान्ति: शान्ति:।।

👉 *सहज - व्यायाम : यौगिक जौगिंग*
(समय- लगभग 5 मिनट)
तीन प्रकार की दौड़,
तीन तरह की बैठक,
चार साइड में झुकना,
दो तरह से उछलना, कुल 12 अभ्यास।

👉 सूर्य - नमस्कार 3 से 5 अभ्यास (समय- 1से 2 मिनट) 12 स्टेप
(1 प्रणाम आसन, 2 ऊर्ध्व हस्तासन, 3 पादहस्तासन, 4 दाएं पैर पर अश्वसंचालन, 5 पर्वतासन, 6 साष्टांग प्रणाम आसन, 7 भुजंगासन, 8 पर्वतासन, 9 बाएं पैर पर अश्वसंचालन, 10 पादहस्तासन, 11 ऊर्ध्वहस्तासनसन, 12 प्रणाम आसन।

👉 *भारतीय - व्यायाम* :
📌 मिश्रदण्ड अथवा युवाओं के लिए बारह प्रकार की दण्ड व आठ प्रकार की बैठकों का पूर्ण अभ्यास (समय- लगभग 5 मिनट)
1 साधारण दंड, 2 राममूर्ति दंड, 3 वक्ष विकासक दंड, 4 हनुमान दंड, 5 वृश्चिक दंड भाग 1, 6 वृश्चिक दंड भाग 2, 7 पार्श्व दंड, आठ चक्र दंड, 9 पलट दंड, 10 शेर दंड, 11 सर्पदंड, 12 मिश्र दंड।

...📌 बैठक 1 अर्ध बैठक, 2 पूर्ण बैठक, तीन राममूर्ति बैठक, चार पहलवानी बैठक भाग 1, 5 पहलवानी बैठक भाग 2, 6 हनुमान बैठक भाग 1, 7 हनुमान बैठक भाग 2, 8 हनुमान बैठक भाग 3।

👉 *मुख्य आसन*:
*बैठ कर करने वाले आसन*:
✔️ मंडूकासन (भाग 1 व 2)
✔️ शशकासन,
✔️ गोमुखासन,
✔️ वक्रासन।

👉 *पेट के बल लेट कर करने वाले आसन*:
✔️ मकरासन भुजंगासन (भाग 1 2 व 3)
✔️ शलभासन ( भाग 1 व 2)

👉 *पीठ के बल लेटकर करने वाले आसन*:
✔️ मर्कटासन (1, 2, 3),
✔️ पवनमुक्तासन (भाग 1 व 2)
✔️ अर्ध्द हलासन, पादवृतासन,
✔️ द्वि- चक्रिकासन (भाग 1 व 2) व

👉 *शवासन (योगनिंद्रा)*। समय 10 से 15 मिनट, प्रत्येक आसन की आवर्ती- 3 से 5 अभ्यास)

👉 *सूक्ष्म - व्यायाम* : हाथों, पैरों, कोहनी, कलाई, कंधों के सूक्ष्म व्यायाम व बटरफ्लाई इत्यादि लगभग 12 प्रकार के सूक्ष्म व्यायाम, प्राणायाम के पहले अथवा बीच में भी किए जा सकते हैं। प्रत्येक अभ्यास की आवृत्ति 5 - 10 बार (समय लगभग 5 मिनट)।

👉 *मुख्य प्राणायाम एवं सहयोगी क्रिया*

📌 *1.भस्त्रिका - प्राणायाम*लगभग 5 सेकंड में धीरे-धीरे लंबे गहरा श्वास लेना व छोड़ना कुल समय 3 से 5 मिनट।

📌 *2. कपालभाति - प्राणायाम* : 1 सेकंड में एक बार झटके के साथ श्वास छोड़ना कुल समय 15 मिनिट ।

📌 *3. बाह्य - प्राणायाम* : त्रिबन्ध के साथ श्वास को यथा शक्ति बाहर निकाल कर रोक कर रखना 3 से 5 अभ्यास।

📌 *(अग्निसार - क्रिया)* : मूल- बन्ध के साथ पेट को अंदर की ओर खींचना व ढीला छोडना़ 3 से 5 अभ्यास।

📌 *4. उज्जायी - प्राणायाम* : गले का आकुञचन करते हुए श्वास लेना यथाशक्ति रोकना व बाईं नासिका से छोड़ना 3 से 5 अभ्यास।

📌 *5. अनुलोम - विलोम प्रणायाम*: दाईं नासिका बंद करके बाईं से श्वास लेना व बाईं को बंद करके दाईं से श्वास छोड़ना वापिस दाईं से श्वास भरना वह बाईं से छोड़ने का क्रम करना, एक क्रम का समय 10 से 12 सेकण्ड - अभ्यास समय 15 मिनट।

📌 *6. भ्रामरी प्रणायाम* : आंखों व कानों बंद करके नासिका से भ्रमर की तरह गुंजन करना - 5 से 7 बार।

📌 *7. उद् गीथ - प्राणायाम* दीर्घ स्वर में ओ३म् का उच्चारण 5 से 7 अभ्यास।

📌 *8. प्रणव - प्राणायाम (ध्यान)* : आंखें बंद करके श्वसों पर या चक्रों में ॐ का ध्यान मुद्रा में ध्यान करना - समय कितना उपलब्ध हो।

👉 🇮🇳 *देशभक्ति - गीत* 🙏: समय लगभग 2-3 मिनट।

👉 स्वाध्याय - चिन्तन : लगभग 5 मिनट।

👉 *एक्यूप्रेशर* : समय की उपलब्धता अनुसार।
*समापन* :

👉 सिंहासन, हास्यासन, 3-3 अभ्यास (समय - 2 मिनट)

👉 🙏*शान्ति - पाठ*🙏 :
ओ३म् द्यौ: शान्ति रान्तरिक्ष शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरारोषधयःशान्तिः। वनस्पतयः शान्ति र्विश्वे देवाः शान्तिब्रर्ह्म शान्तिः सर्वगृवम शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि ।। ओ३म् शान्तिःशान्तिःशान्तिः।।

✔️ *विशेष*:
योगाभ्यास के क्रम में व्यायाम, सूक्ष्म - व्यायाम व आसनों को पहले या बाद में भी किया जा सकता है।

शीतकाल में व्यायाम व आसन पहले तथा प्राणायाम बाद में एवं ग्रीष्म काल में प्रणायाम पहले करवाकर व्यायाम व आसन बाद में कर सकते हैं

Saturday, 8 June 2019

genaretor

https://www.facebook.com/HYDERABADiTalks/videos/615319825618357/
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https://www.facebook.com/Researchtvhindi/videos/621113605073536/
suar ki charbi 

Friday, 7 June 2019



आप 10 तरीकों से कर सकते हैं पीएम मोदी से संपर्क
पीएम नरेंद्र मोदी फेसबुक से लेकर ट्वीटर तक पर एक्टिव रहते हैं। आज हम बता रहे हैं ऐसे 10 तरीके जिनके जरिए आप पीएम मोदी तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं।


- यदि आपके मन में कोई क्वेरी या सजेशन है तो आप www.pmindia.gov.in/en/interact-with-honble-pm/ पर लॉग इन कर सकते हैं और खुद को रजिस्टर कर सकते हैं। यह एक ऑफिशियल पोर्टल है, जिसे पीएम नरेंद्र मोदी से इंटरेक्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है।

- आप पीएम के ऑफिशियल एड्रेस पर उन्हें सीधे लेटर लिख सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीएम मोदी को रोजाना 2 हजार से ज्यादा लेटर देशभर से मिलते हैं।

क्या है ऑफिशियल एड्रेस : वेब इंफॉर्मेशन मैनेजर, साउथ ब्लॉक, रायसीना हिल
नईदिल्ली : 110011
फोन नंबर : 23012312
फैक्स : 23019545,23016857

आप 'ऑनरेबल प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिया, 7 रेसकोर्स रोड, नईदिल्ली' लिखकर भी लेटर पहुंचा सकते हैं।

- आइडिया शेयरिंग के लिए आप www.mygov.in पर जा सकते हैं। यहां सजेशन, आइडिया दे सकते हैं।
- आप RTI के जरिए भी पीएमओ से कोई प्रश्न पूछ सकते हैं।
- आप @PMOIndia या @Narendramodi पर ट्वीट करके भी सीधे अपनी बात पीएम तक पहुंचा सकते हैं। मोदी के ट्वीटर पर 16 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं।

- आप यू-ट्यूब के जरिए भी पीएम तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं। Narendra modi's Youtube Channel पर जाकर अपना मैसेज सेंड कर सकते हैं।

- Narendra modi Facebook Page या fb.com/pmoindia पर जाकर आप फेसबुक के जरिए भी पीएम तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं।

- narendramodi1234@gmail.com यह पीएम की ईमेल आईडी है। यह उनके एंड्रॉइड ऐप पेज से मिली है।
- इसके अलावा आप इंस्टाग्राम, लिंक्डइन पर भी पीएम से कॉन्टेक्ट कर सकते हैं। इंस्टाग्राम के लिए

https://www.instagram.com/narendramodi/ और लिंक्डइन के लिए https://in.linkedin.com/in/narendramodi पर जाएं।

- आप NaMo एंड्रॉइड ऐप डाउनलोड करके भी पीएम मोदी तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं और उनसे जुड़े रह सकते हैं।

Wednesday, 27 March 2019



नेहरू खानदान की हिमाकत की दाद देनी पड़ेगी..//
पूरा परिवार भ्रष्टाचार में जमानत पर है...ओर भाषण ईमानदारी पर दे रहे हैं...
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अंतरिक्ष में भारत की सर्जिकल स्ट्राइक .//
3 मिनट में मार गिराया जासूसी सैटेलाइट..मोदी है तो मुमकिन है
भारत अन्तरिक्ष में जो सुपरपावर बना है भारत ने एक अभूतपूर्व सिद्धि हासिल की है। भारत में आज अपना नाम ‘स्पेस पावर’ के रूप में दर्ज करा दिया है। अब तक रूस, अमेरिका और चीन को ये दर्जा प्राप्त था, आज हिंदुस्तान दुनिया की चौथी अंतरिक्ष महाशक्ति बना । "भारत" 3 मिनट में पूरे पाक में अंधेरा, टीवी, इंटनरेट, विमान और परमाणु बम सहित सारी सेवाओं को ठप्प कर सकता है।
ये मोदी का भारत है
इस तरह के सेटेलाईट का उपयोग पड़ोसी देश सेना के मूवमेंट को कैप्चर करके आतंकियो को जीपीएस के माध्यम से लोकेशन की सटीक जानकारी पहुंचाया जाती थी
उसका प्रभाव
किसी भी युद्ध में सेटेलाईट युद्ध के संचालन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है आज के दौर में सेटेलाईट के बिना कोई भी देश हर तरह के हथियार रखने के बावजूद कागजी शेर से जादा कुछ नही ओता .सेना के लगभग सभी हथियार और उपकरण सेटेलाईट संचार से जुड़े होते है.ऐसे हालात में दुश्मन के कम्युनिकेशन सिस्टम और जासूसी उपकरणों को नष्ट करने की छमता हासिल कर भारत ने बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है
== आज की कामयाबी का श्रेय कांग्रेस ने DRDO को दिया है ....और डीआरडीओ के पूर्व मुखिया डॉ वी के सारस्वत ने इसका श्रेय नरेंद्र मोदी जी को देते हुए कहा है कि DRDO भारत का संस्थान है जिसका मुखिया भारत का प्रधानमंत्री ही होता है किसी का बाप दादा नही

== डीआरडीओ के तत्कालीन प्रमुख वी के सारस्वत का बयान आया है कि भारत पहले ही एंटी सैटेलाइट मिसाइल सिस्टम बना सकता था परंतु अप्रेल 2012 में यूपीए सरकार के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसकी अनुमति नहीं दी थीं।
== 2007 में भी कर सकते थे ऐंटी-सैटलाइट मिसाइल लॉन्च, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं थी।
पूर्व इसरो चीफ माधवन नायर,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

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