Wednesday, 18 July 2018

२०१९ आपके लिए बहुत कठीण युद्ध है - 
कमजोर कड़ी है ,सेक्युलर स्वार्थी हिन्दू और कुछ राजनीति का छिछला ज्ञान रखने वाले
 असली समस्या काँग्रेस से भी ज्यादा वामपन्थ और दलित-मुस्लिम गठजोड़ का नारा है 

किसी भी युद्ध को जितने के लिए आपके पास सुचना- और दुश्मन की विचारधारा की पूरी जानकारी होनी चाहिए -हिन्दू समाज को बांटकर कमजोर कर खत्म कर देने की साज़िश कोई आज से नहीं चल रही. यह खुलेआम आज़ादी से पहले ही काम कर रही है. 
काँग्रेस व्यक्तिगत तौर पर खत्म है उसे संजीवनी दे रही है वामपंथी सोच व् लॉबी - कांग्रेस कैसे खत्म है इसे समझने के लिए बिहार और उत्तर प्रदेश में गठबन्धन में काँग्रेस को मिली सीटों से आकलन कीजिये। 
 - आप कह सकते है  कि वामपंथ खत्म है वो कहीं नहीं है - मगर आप पूर्ण रूप से गलत है ये रक्तबीज सोच है।  वो ४ महीने पुराने ''आसिफा काण्ड'' को भी जिन्दा करके UN तक पहुँचा देते हैं और आप दिव्या का मुद्दा राष्ट्रिय चैनल तक पर नहीं ला पाते - 
उनकी आपस में अंडरस्टैंडिंग बहुत बेहतरीन है -  मुलायम का समाजवाद और लालू का सामाजिक न्याय -- जयप्रकाश का लोहियावाद सब वामपन्थ ही है अलग अलग नामो से - एक आयातित नाम हैं कम्युनिस्ट और एक देशी है समाजवाद 
ज्यादातर वामपन्थी व्यक्तिगत तौर पर बहुत ईमानदार होते हैं - आप चौकं उठेंगे कि वामपन्थ और ईमानदार ? हाँ ईमानदार -
पश्चिम बँगाल को ही ले लीजिये - यहाँ के वामपन्थी बड़े नेताओ पर भर्ष्टाचार का कोई बड़ा केस है ही नहीं। पूर्व मुख्यमंत्री ''ज्योति बसु'' अपने ड्राइवर को अपनी कार का दरवाजा तक खोलने से मना करते थे। ३४ साल के लगातार शासन के बावजूद किसी की हिम्मत नहीं थी किसी सी.पी.एम. के नेता को कोई घुष ऑफर कर दें-- सी.पी.एम. के हेडक्वार्टर अलीमुद्दीन स्ट्रीट से एक व्यवसाई को इसी मुद्दे पर गिरफ्तार करवा दिया था इन्होने
- मगर इसका मतलब ये नहीं था कि ये पैसा नहीं खाते थे - इनके खाने का तरीका बहूत सोफिस्टिकेटेड था और इनकी ईमानदारी यही थी कि पार्टी के प्रति पूर्ण ईमानदार और भरस्टाचार भी अपनी विचारधारा के प्रसार के लिए तभी कश्मीर से कन्याकुमारी तक इनका नरेटिव इतनी जल्दी सेट हो जाता है। इसलिए पार्टी पूरी शक्ति से उनके पीछे खड़ी रहती है। 

 इनका अजेंडा है भारतवर्ष को टुकड़े करना और  हिन्दू धर्म के खिलाफ जहर भरना
 - माथे पर सिंदूर लगाना दासता का प्रतीक  -- राम अपनी पत्नी को घर से निकालने वाला --कृष्ण क्षमतालोभी और औरतो का रसिया - ये सारे फार्मूले वामपंथ के थिंकटैंक से निकले थे -और  हिन्दू भाई क्या कर रहे थे या हैं ? हिन्दू भाई भी इस देश को गाँधी और नेहरू का देश बतलाने में लगे हुए थे -- फिर यही मुर्ख पूछते है बीजेपी राम मंदिर कब बनाएंगी ? 
 असली समस्या काँग्रेस से भी ज्यादा वामपन्थ है - इनके सवालों के जवाब तैयार रखिये -- इनके साहित्य पढ़िए इन्हे जवाब देने के लिए , क्योंकि ये लोग पढ़ते बहुत हैं -हर विषय को गहराई से समझते हैं इसीलिए आपलोग इनसे बहस में नहीं जीत पाते - जब ये आपसे पूछते हैं हिन्दू शब्द कहाँ से आया तो आपके पास ठोस जवाब नहीं होता।
वामपंथ आरएसएस के सामने कुछ हद्द तक असहाय  रहा है कारण -- दोनों कैडर बेस संगठन है और आरएसएस का कैडर अब वामपन्थ से ज्यादा मजबूत हो चला है - मगर  कमजोर कड़ी सेक्युलर स्वार्थी हिन्दू हैं  और कुछ राजनीति का छिछला ज्ञान रखने वाले। 
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दलित-मुस्लिम गठजोड़ का नारा
.दलित-मुस्लिम गठजोड़ का नारा देने वाले आपको कभी जोगेंद्रनाथ मंडल का नाम लेते नहीं दिखेंगे । जबकी मंडल आज़ादी से पहले दलितों के सबसे बड़े नेता कहे जाते थे.बाबासाहेब से भी बड़े दलित नेता, इसीलिए कहा… क्योंकि 1945-46 में जब संविधान-निर्माण समिति के लिए चुनाव हुए तो बाबासाहेब बंबई से चुनाव हार गए. ऐसे में वे जोगेंद्र नाथ मंडल ही थे जिन्होने बाबा साहेब को बंगाल के कोटे से जितवाया.
पाकिस्तान बनने से पहले दलितों को ऐसा ही प्रलोभन दिया गया था. 
1947 से पहले अम्बेडकर जी की पार्टी के एक नेता जोगेन्द्रनाथ मंडल ने SCF (Scheduled Castes Federation) और मुस्लिम लीग में समझौता किया, हमें भारत विखंडित करके एक राष्ट्र बनाना है. दलितों और मुसलमानों के लिए, जिसका नाम होगा पाकिस्तान ।
जोगेंद्र नाथ मंडल ने भारत विभाजन के वक्त अपने दलित अनुयायियों को पाकिस्तान के पक्ष में वोट करने का आदेश दिया था. अविभाजित भारत के पूर्वी बंगाल और सिलहट (आधुनिक बांग्लादेश) में करीब 40 प्रतिशत आबादी हिंदुओं की थी, जिन्होंने पाकिस्तान के पक्ष में वोट किया और मुस्लिम लीग, मण्डल के सहयोग से भारत का एक बड़ा हिस्सा हासिल करने मे सफल हुआ ।
अंत में बाबा साहब ने जोगेन्द्रनाथ मंडल से किनारा कर लिया. वह भारत के कानून मंत्री बने. मंडल दलितों की एक बड़ी संख्या लेकर पाकिस्तान गए. जोगेंद्र नाथ मंडल पाकिस्तान के पहले कानून मंत्री बने.
जोगेंद्र नाथ मंडल ने सोचा अब पाकिस्तान बन गया है, दलितों के मज़े होंगे. पर हुआ उल्टा. संगठित आक्रामक समाज दलितों के धर्मांतरण पर तुल गया..दलितों को मिलने वाले सभी प्रकार के भत्ते बंद कर दिए. दलितों के मुसलमान किरायेदारों ने दलितों को किराया देना बंद कर दिया. दलितों की लड़कियां मुसलमान आये दिन उठा के ले जाते. आये दिन दंगे होने लगे.
अब मुस्लिम लीग को वैसे भी दलित-मुस्लिम दोस्ती का ढोंग करने की ज़रूरत नहीं रह गयी थी. उनके लिए हर गैर-मुस्लिम काफिर है. पूर्वी पाकिस्तान में मण्डल की अहमियत धीरे-धीरे खत्म हो चुकी थी. दलित हिंदुओं पर अत्याचार शुरू हो चुके थे. 30% दलित हिन्दू आबादी की जान-माल-इज्जत खतरे मे थी.
पाकिस्तान में सिर्फ एक दिन 20 फरवरी 1950 को 10,000 से ऊपर दलित मारे गए. ये सब बातें किसी संघी किताब में नहीं बल्कि खुद जोगेंद्र नाथ मंडल ने अपने इस्तीफे में लिखी हैं.
मंडल ने हिंदुओं के संग होने वाले बरताव के बारे में जिन्ना को पत्र लिखा, “मुस्लिम, हिंदू वकीलों, डॉक्टरों, दुकानदारों और कारोबारियों का बहिष्कार करने लगे, जिसकी वजह से इन लोगों को जीविका की तलाश में पश्चिम बंगाल जाने के लिए मजबूर होना पड़ा.”. पूर्वी बंगाल के हिंदुओं (दलित-सवर्ण सभी) के घरों को आधिकारिक प्रक्रिया पूरा किए बगैर कब्जा कर लिया गया और हिंदू मकान मालिकों को मुस्लिम किरायेदारों ने किराया देना काफी पहले बंद कर दिया था”.
जोगेन्द्र नाथ ने कार्यवाही हेतु बार- बार चिट्ठियां लिखीं, पर इस्लामिक सरकार को न तो कुछ करना था, न किया. आखिर उन्हें समझ में आ गया कि उन्होंने किस पर भरोसा करने की मूर्खता कर दी है.
मंडल को खुद लगा कि अब उनकी जान पाकिस्तान में सुरक्षित नहीं है  ,उनका इस्तीफा किसी भी दलित के लिए हॉरर मूवी से कम नहीं. 1950 में बेइज्जत होकर जोगेंद्र नाथ मंडल भारत लौट आये. भारत के पश्चिम बंगाल के बनगांव में वो गुमनामी की जिन्दगी जीते रहे.अपने किये पर 18 साल पछताते हुए आखिर 5 अक्टूबर 1968 को उन्होंने गुमनामी में ही आखिरी साँसे ली ।






भारत विश्व का
एकमात्र देश है
जहाँ लोग पिछड़ा और
दलित बने रहने के लिए लड़ते हैं
काहे का हम सभी भारतीय और भाई-भाई जिस देश मेँ सारे नियम कानून हिँदू के लिए ही बनते हैँ और बाकि मजा लेते हैँ
1-हिँदू के लिए हिँदू मैरिज एक्ट जिसमेँ सरकार ने इतने सँशोधन कर दिये हैँ कि हिँदू की दशा शादी के बाद कुत्ते की तरह हो गयी है वहीँ मुसलमान और ईसाईयोँ के लिए कुछ भी नहीँ
2-देश मेँ मुसलमानोँ को 4 शादियाँ करने की अनुमति दी गयी है हिँदू 2 भी करे तो बवाल मच जाय
3-तलाक के लिए भी हिँदू को कोर्ट के चक्कर खाके मरना पड़ता है और मुसलमान 3 शब्दोँ मेँ खतम कर देता है
4-देश के सारे बड़े हिँदू मंदिरोँ पर सरकार का कब्चा है ,हमारे मंदिर ट्रस्ट का 80%सरकार के पास जाता है जो मस्जिद और चर्च निर्माण मेँ जाता है
5.मदरसोँ मेँ कुरान,चर्च स्कूलोँ मेँ बाईबल पढ़ा सकते हैँ पर सरकारी स्कूलोँ मेँ गीता पढ़ाना साम्प्रदायिक है
6. अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान के नाम पर सरकार करोड़ो की सब्सिडी देती है क्या किसी हिँदू संस्थान को मिला है
8. आप सड़को पर भीड़ लगाके पूजा नहीँ कर सकते पर नमाज की अनुमति है
9.कश्मीर मेँ जाके आप बस नहीँ सकते
सारा नियम कानून हिँदू के लिए फिर भी हम सब 'भारतीय' क्या मजाक है

गेरुआधारी फर्जी अग्निवेश ...!!
माओवादी और मिशनरीज की रोटी पर पलता अग्निवेश फर्जी गेरुआधारी है: वस्तुतः ईसाई है: वेटिकन का प्यादा है अग्निवेश।
सोनियाँ सरकार में बड़ी दलाली का काम वही कर सकता था जो रोमन कैथोलिक ईसाई हो। आपको पता होना चाहिए कि सोनियाँ काँग्रेस के शासनकाल में सबसे बड़े लायजनर्स में अग्निवेश की गिनती होती थी। अग्निवेश सत्ता के गलियारे के चमकते सितारे थे उन दिनों। अग्निवेश की कृपा प्राप्त हो जाने पर सोनियाँ सरकार में बड़े से बड़ा काम करा लेते थे लोग।
अग्निवेश का जन्म हुआ आंध्रप्रदेश में। पले बढ़े पढ़े छत्तीसगढ़ में और जीवन भर काम किया मिशनरीज और माओवाद के लिए। विनायक सेन जैसे दुर्दांत माओवादी को सोनियाँ सरकार के सहारे फाँसी से बचा लेने का चमत्कार कर दिखाया था अग्निवेश ने। आज तक भी विनायक सेन की गर्दन फाँसी के फंदे तक न पहुँच सका। यह सोनियाँ की शक्ति नहीं है यह चर्च की शक्ति का परिणाम है।
अग्निवेश एक संगठन चलाता है सर्व धर्म संसद। उस संगठन की जहाँ भी बैठक होती है वहाँ सर्व धर्म के नाम पर केवल चर्च का बोलबाला होता है। और सनातन धर्म का स्वयंभू प्रतिनिधि हर बार अग्निवेश ही होता है। अर्थात यह सर्व धर्म संसद केवल चर्च की संसद बनकर रह गया है। या यूँ कहें कि चर्च के हितों को ध्यान में रखकर ही यह संगठन बनाया गया है।
19 जून 2009 को G8 सम्मेलन से ठीक पहले रोम में सर्व धर्म संसद का आयोजन हुआ। आयोजक अग्निवेश थे। चूँकि इस संगठन के सर्वेसर्वा अग्निवेश ही हैं। उस सम्मेलन से तीन दिन पहले सभी डेलीगेट्स भारी सुरक्षा व सुविधा के अंतर्गत भूकंप प्रभावित ला अकीला शहर में ले जाए गए। जहाँ वेटिकन के पादरियों द्वारा मृतकों के लिए सामूहिक प्रेयर का आयोजन हुआ। सारी व्यवस्था वेटिकन ने ही किया था। प्रेयर का आइडिया अग्निवेश का ही था। यदि तुम आर्य समाजी थे और सनातनी थे तो वहाँ वैदिक स्वस्तिवाचन व शांति पाठ भी करवा सकते थे। किन्तु चर्च का प्रेयर जिसको आनन्दित करता हो वह वैदिक शांति पाठ क्यों करेगा?
सर्व धर्म संसद का उद्घाटन संध्या 5 बजे रोम के प्रसिद्ध विला मडामा में हुआ। उद्घाटनकर्ता था कम्युनिटी ऑफ सेंट इडिगो का संस्थापक प्रोफेसर एंड्रिया रिकार्डी। एंड्रिया रिकार्डी चर्च के सम्बंध में ही पुस्तकें लिखता रहा है। इसी लेखन के कारण वह इतिहासकार कहा जाता है। चर्च के विश्वस्त लोगों में से एक वफादार है एंड्रिया रिकार्डी। वही व्यक्ति अग्निवेश के सर्व धर्म संसद का उद्घाटनकर्ता महापुरुष था। अग्निवेश के रिश्ते सम्बंधों को समझने के लिए यह लिंक महत्वपूर्ण है।
अपने वेटिकन के लिंक के कारण ही अग्निवेश लगातार हिन्दू धर्म के विविध तीर्थ, पर्व-उत्सवों और रीति नीति पर आक्रमण करता रहा है। अग्निवेश का माओवाद के साथ गहरा संबंध भी उसके हिन्दू विरोधी होने का एक प्रमुख कारण रहा है। अग्निवेश झारखंड और छत्तीसगढ़ के माओवादियों से बड़े निकट से जुड़ा रहा है। इन दोनों राज्यों के चर्च और मिशनरीज से भी अग्निवेश के बड़े गहरे संबंध रहे हैं। अग्निवेश इनके लिए अनेकों बार काम करता हुआ दिखाई देता है।
अभी की अग्निवेश की झारखंड यात्रा भी चर्च के लिए ही थी। अग्निवेश राँची के समीप खूँटी में वहाँ के सभी मिशनरीज के प्रमुख लोगों से मिलकर उनको साहस देने का काम किया। हीलिंग टच टू मिशनरीज। बच्चा बेचने वाली घटना में सिस्टर कोनसिलिया और सिस्टर मेरिडियन के पकड़े जाने और अपराध स्वीकार कर लेने के बाद राज्य सरकार द्वारा मिशनरीज ऑफ चैरिटी के ठिकानों पर पड़े छापे के बाद मिशनरीज की चूलें हिल गई हैं।
भारत का कैथोलिक विशप थियोडोर मैशकरेनहैस इस छापे के तुरंत बाद दिल्ली से दौड़ते हुए राँची पहुँचा था। किंतु उसके वहाँ जाने और दलाली के तमाम प्रयत्न विफल रहे तब दलाल शिरोमणि अग्निवेश को थियोडोर मैशकरेनहैस ने खूंटी भेजा। पाकुड़ यात्रा लोगों को भ्रमित करने के लिए आयोजित किया गया था। किन्तु कुछ नैजवानों के आक्रामक रवैये ने सारा भ्रम निवारण कर दिया।
Hardik Savani
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Tuesday, 17 July 2018

2005 मे मनमोहन सिंह doctorate की डिग्री लेने ox ford यूनिवर्सिटी गए ! वह समारोह पूरी दुनिया मे live चल रहा था वहाँ उन्होने बहुत ही तकलीफ देने वाला भाषण दिया जो किसी भी स्वाभिमानी भारतीय को नीचा दिखा सके ! उन्होने भाषण की शुरुवात ही ऐसे करी ! हम अंग्रेज़ो के बहुत ही आभरी है की उन्होने भारत मे आकर अपनी सरकार बनाई ! हम अंग्रेज़ो के बहुत आभारी है जो उन्होने आकर भारत मे शिक्षा व्यवस्था दी ! हम अंग्रेज़ो के बहुत आभारी है जो उन्होने यहाँ आकर न्याय व्यवस्था स्थापित करी ! हम अंग्रेज़ो के बहुत आभारी है जो उन्होने भारतीय लोगो को विज्ञान सिखाया ! हम अंगेजों के बहुत आभारी है जो उन्होने हमे विज्ञान और तकनीकी का अंतर समझाया ! हम अंग्रेज़ो के बहुत आभारी है जो उन्होने अँग्रेजी भाषा हमको बताई ! और ऐसा ही वो 40 मिनट तक बोलते रहे !
इस विडियो में देखिए भारत की शिक्षा अंग्रेजो के पहले कैसी थी और अब कैसी हो गई है >>
अगले दिन क्या हुआ लंदन के सभी अखबरों मे मनमोहन सिंह का ये वक्तव्य छपा ! और इस वक्तव्य के साथ सभी समाचार पत्रो मे संपादकीय टिपणी भी छपी और ज़्यादातर संपादकीय टिपनियों मे ये छपा की हमारे देश इंग्लैंड के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टल चर्चिल ने 1945 मे ये कह दिया था की ये देश आजाद होने लायक देश नहीं है !
और भारत के प्रधानमंत्री डा मनमोहन सिंह कल लंदन मे व्याख्यान देकर ये सिद्ध कर दिया कि भारत आजादी के इतने साल बाद भी अभी मानसिक रूप से गुलाम है ! जिस देश का प्रधानमंत्री अभी भी अंग्रेज़ो के गुणगाण करता हो उस देश की जनता की मानसिक गुलामी की स्थिति क्या होगी उसका अंदाजा हम लगा सकते हैं ऐसी खूब लंबी संपादकीय टिपणी उसमे की !!
केरल के स्कुलो में नर्सरी क्लास में पढ़ाया जाता है, की एक हिन्दू था जो बेहद गरीब था, वो कई मन्दिर गया लेकिन हिन्दू भगवान ने उसकी फरियाद नही सुनी . . फिर वो चर्च गया तो ईसा मसीह ने उसे तुरंत अमीर बना दिया . . और फिर वो ईसाई बन गया ! सोचिए ये कपटी बामपंथी और ईसाई मिशनरीज इन छोटे छोटे बच्चो के मन मस्तिष्क में कितना जहर भर रहे है ?
पिछले दिनों आपने न्यूज़ पढ़ा होगा किस तरह NCRT की 12बीं कलास की Political Science की किताबें भी दंगे का धर्म, हिन्दू धर्म बताती है । दंगों के नामपर किताब में सिर्फ 2002 और 1984 के दंगे की विस्तृत चर्चा की गयी, और इस दंगे के लिए सीधे तौर मे हिन्दूओं को जिम्मेदार ठहराया गया । एक और जहाँ सिखों के खिलाफ "कोंग्रेसी दंगे" को सीधे तौर पर हिन्दू बताया गया, वही 2002 दंगे की मूल बजह "गोधरा कांड" को Accidental आग लग जाने से सैकड़ों कारसेवकों का मरना बताया गया । सोचिए कितनी सुनोयोजित कपट से हिन्दू बच्चों के मन में अपने ही हिन्दू धर्म और हिन्दू भाइयों के प्रति नफरत भरी जा रही है ।
माना की #BharatiyaJanataParty को राज्यसभा में बहुमत नहीं है, इसलिए वे राम मन्दिर नहीं बना सकते, धारा 370 नहीं हटा सकते, समान नागरिक संहिता नहीं ला सकते । पर नीच कपटी बामपंथीयों के द्वारा बनाया गया झूठा इतिहास तो बदल ही सकते हैं । Narendra Modi सरकार ने पिछले ढाई साल से इन मुद्दों पर संज्ञान क्यों नहीं लिया ? मानव संसाधन मंत्री Prakash Javadekar साहब आखिर क्या कर रहे हैं ? बच्चों के कोमल-निश्च्छल मन मे हिन्दुओं के प्रति दुर्भावना भरने का यह खेल आखिर कब तक चलता रहेगा ?
पोस्ट आभार :-- विशाल सुरेश शर्मा जी
सफ़ेद चोले पहनकर दुनिया की नज़र में शरीफ बनकर अंदर ही अंदर काले धंधे करने वाले ईसाई मिशिनरी ऑफ़ चैरिटी के गोरखधंधे का बड़ा पर्दाफाश हुआ था. वर्षों से छोटे छोटे बच्चों को बेचने का काम सिस्टर धड़ल्ले से कर रही थी और किसी को कानों कान खबर तक नहीं थी. ऐसे में अब मोदी सरकार ने सभी मिशिनरी संस्थाओं के खिलाफ तगड़ा एक्शन लिया है जिसकी बहुत ज़रुरत थी.
अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने बच्चों के बेचने के स्कैंडल मामले में मिशनरीज के अंतर्गत आने वाले चाइल्ड केयर चैरिटी होम्स की जांच के आदेश दिए हैं. साथ ही मंत्रालय को कहा है कि देशभर के ऐसे चैरिटी केयर होम्स की जांच की जाए कि वहां पर क्या हालात है? ऐसे चाइल्ड केयर होम्स को लेकर के कई तरह के आरोप लगने शुरू हो गए थे कि बाकी जगहों पर भी जांच की जानी चाहिए. झारखंड के रांची में मदर टेरेसा की संस्था मिशनरीज ऑफ चैरिटी की संस्था पर नवजात शिशु को बेचने का आरोप लगने के बाद मेनका गांधी ने यह कदम उठाया है. इस मामले में मिशनरीज ऑफ चैरिटी होम के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है. मामले में पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया है और कई लोगों से पूछताछ कर रही है.
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के मुताबिक मेनका ने राज्यों को बच्चों के देखभाल की संस्थाओं यानी चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन के पंजीकरण और महीने भर के भीतर केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) से जोड़ना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. किशोर न्याय (बाल देखभाल एवं सुरक्षा) अधिनियम 2015 के तहत चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन में पंजीकरण व CARA से जोड़े जाने की अनिवार्यता है.
यह अधिनियम 2 साल पहले लागू किया गया था, लेकिन कुछ अनाथालय इसकी वैधता को अदालत में चुनौती भी दे चुके हैं. सुप्रीम कोर्ट ने वैधता को चुनौती देने के मामले में याचिकाओं को खारिज कर चुका है. साथ ही साल 2015 के अधिनियम की वैधता को अपने दिसंबर 2017 के आदेश में बरकरार रखा है.
इसके बाद से करीब 2,300 चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन को CARA से जोड़ा गया है और करीब चार हजार चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन को इससे जोड़ा जाना बाकी है. तो वहीँ हर बार की तरह बंगाल की ममता बनर्जी भी कूद पड़ी हैं उन्होंने मोदी सरकार पर ही उल्टा आरोप लगाया है. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मदर टेरेसा द्वारा स्थापित इस संस्था का समर्थन करते हुए कहा था कि उसे ‘दुर्भावनावश और बदनाम करने के लिए’ लक्षित किया जा रहा है

mediya

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खुलासा ...वेश्यावृत्ति से मिले पैसे को भी मिशनरी ऑफ चैरिटी 80c के तहत आयकर से छूट लेता था
झारखंड के मिशनरी ऑफ चैरिटी वाले अपने यहां रहने वाली बेसहारा लड़कियों से वेश्यावृत्ति करवाते थे और आने वाले ग्राहकों से जो पैसा लेते थे उसके बदले में वह उन्हें डोनेशन की रसीद देते थे यह ग्राहकों को यह समझाते थे कि आप को डबल मजा है आप यहां आराम से सेक्स का भी मजा लीजिए फिर दिए गए पैसे को आयकर छूट में भी लगा दीजिए क्योंकि हम आपको डोनेशन की पक्की रसीद दे रहे हैं और मिशनरी ऑफ चैरिटी को 80C के तहत आयकर से छूट प्राप्त है ...फिर इस संबंध से होने वाले बच्चे को भी तीन से 4 लाख में मिशनरी ऑफ चैरिटी बेच कर पैसे कमा लेता था
इतना घिनौना काम मदर टेरेसा करती थी...
कुमार अवधेश सिंह
बूझो तो जाने
फिरोज गांधी मुस्लिम तो राजीव हिन्दू कैसे?राजीव मुस्लिम सोनिया ईसाई तो राहुल गांधी हिन्दू कैसे??और वो भी जनेऊधारी??