Saturday, 19 August 2017

पीएफ के पैसों से रिटायर्ड फौजी ने बनवा दी सड़क,बोले- खून का एक-एक कतरा देश के नाम है

 फौजी सिर्फ सरहदों की रक्षा नहीं करते। गांव-समाज की बेहतरी की चिंता भी उनके जेहन में रहती है। 34 साल देश की सेवा के बाद सूबेदार मेजर भग्गुराम मौर्य गांव पहुंचे तो उन्होंने पीएफ की राशि से गांव की सड़क बनाकर मिसाल पेश की। 10 फीट चौड़ी और डेढ़ किमी. लंबी सड़क ने कई बस्तियों को 'विकास पथ' से जोड़ा है।वाराणसी शहर से 20 किमी. दूर जंसा के रामेश्वर गांव की एक छोटी सी बस्ती हीरमपुर के भग्गुराम मौर्य सेना के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में रहे। बीते साल दिसम्बर में रिटायर्ड होने के बाद गांव आए। वह घर जाने के लिए गांव के ऐसे रास्ते से गुजरे, जिस पर साइकल चलाना भी मुश्किल था।इस पर उन्होंने पीएफ का पैसा लिया और घर व अपनी अन्य सुविधाओं को दरकिनार कर सड़क बनवाने में दिन-रात जुट गए। सात महीने की कोशिश के बाद अब उस रास्ते से साइकल, बाइक ही नहीं बल्कि फोर व्हीलर और ट्रैक्टर भी आसानी से गुजरने लगे हैं। 

इससे उन्हें 'हरिजनों को ईसाई बनाने के प्रयासों में कठिनाई होगी।'


पिछले सौ साल का प्रामाणिक रिकार्ड है कि दलितों, अछूतों को बराबरी और सम्मान देने का विरोध हिन्दू पण्डितों से अधिक ईसाई नेताओं ने किया। पहले वे साफ कहते भी थे कि इससे उन्हें 'हरिजनों को ईसाई बनाने के प्रयासों में कठिनाई होगी।' यह स्वयं कैंटरबरी के सर्वोच्च आर्कबिशप ने कहा था, जब 1936 में त्रावणकोर के महाराजा ने मन्दिरों के द्वार सबके लिए खोल दिये थे।
जब गांधी जी ने अस्पृश्यता खत्म करने का अभियान चलाया तो सबसे तीव्र विरोध ब्राह्मणों ने नहीं, चर्च-नेताओं ने किया था। उन्होने यह दलील दी कि 'गांधी जी हिन्दू धर्म के साथ छेड़-छाड़ कर रहे हैं। यह सन्दर्भ याद रखना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह प्रवृत्ति आज भी पूरी ताकत से सक्रिय है। तभी तो न केवल दलित-मुक्ति को उनका संगठित धर्मान्तरण कराने, गोमांस खिलाने आदि से जोड़ा जाता है, बल्कि यह भी छिपाया जाता है कि स्वतंत्रता पूर्व और बाद भी, निम्न जातियों को सम्मान और बराबरी देने का कार्य हिन्दू समाज ने स्वयं किया। स्वामी दयानन्द सरस्वती, स्वामी श्रद्धानन्द, गांधी जी, सरदार पटेल, हेगड़ेवार, अम्बेडकर आदि अनगिन महापुरुषों ने यह कार्य बढ़चढ़ कर किया। इस कार्य में दोगलापन कांग्रेसी सवर्णों ने ही किया और आज भी कर रहे हैं। -
प्रा. शंकर शरण
साभार
चारूमित्र पाठक
कुमार अवधेश सिंह

मैं तो हिन्दू लड़कियों की मूर्खता पर लिखना ही नहीं चाहता क्योंकि ये मेरे लिए ही शर्मनाक होगा पर कभी कभी लिखना चाहिए।आज चारों तरफ फिर से लव जिहाद का डिबेट चालू है।अब कोर्ट ने भी मान लिया कि लव जिहाद एक सच्चाई है।अब कोई कहता है इस्लाम दोषी है तो कोई सरकार को फेलियर कहता है।
पर सच पूछो तो इसमें सबसे बड़ी दोषी हिन्दू लड़कियां है। इनको समझाना मतलब पैदल चांद पर जाना है।एक तो इनका जवाब सुनो तो सिर्फ फिल्मी डायलाग मारती है।
"तुमलोग आपस मे लड़वा रहे हो, तुमलोग ही दंगा करवाते हो,तुमलोग ही वोट के लिए ऐसे करते हो आदि आदि"
और खुद ?
एक तरफ कृष्ण पूजा का नाटक और दूसरी तरफ गौभक्षकों के साथ घूमना ?
एक तरफ शिवपूजा और दूसरी तरफ नंदी के हत्यारों के साथ ?
ये लड़कियों को इस्लाम की abc भी पता नहीं है।मुसल्मानों के जिहादी चेहरे को देख नहीं पाती।इनको सिर्फ दिखता है ,जीन्स पेंट टीशर्ट घड़ी,बाइक और कार,चुपके से पानी लगा लगा के बाल सँवार के लाइन मारते लड़के ।
क्योंकि हिन्दू लड़कियां बददिमाग है और लालची हैं।इनके रोल मॉडल सिवाय बॉलीवुड के भांड हीरोइनों को छोड़कर और कोई होता ही नहीं।इनको दिन रात बस ये बॉलीवुड गाना तो वो बॉलीवुड गाना। बस इससे ज्यादा हो गया तो फिर tv सीरियल।इनके मां बाप भी कभी इस्लाम की सच्चाई नहीं बताते।इन लड़कियों को धार्मिक संस्कारों की जगह बॉलीवुड का संस्कार मिलता है।जितने उपदेश फिल्मों में दिये जाते है।ये भी बहस होने पर उतना ही बोलती है।
इन तक सच्चाई नहीं जा रही है।हिंदुओं के लिए उनके घर की लड़कियां ही धर्म की सबसे कमजोर कड़ी है।। ये लोग धार्मिक होने की नौटंकी तो खूब करती है लेकिन धर्म मिटाने वालों के साथ दोस्ती रखती है।आज जब हिंदुओं में जागरूकता आ रही है तब भी ये लोग अपनी ही दुनिया मे व्यस्त हैं।कारण ये है कि माँ बाप इनसे घर के अंदर DEBATE नहीं करते और लड़कियों को एक उम्र के बाद समझाया नहीं जा सकता क्योंकि तबतक ये बहुत काबिल बन जाती हैं।थोड़ी सी बड़ी हुई नहीं कि बोलेगी
"ये मेरी जिंदगी है तुम कौन होते हो बोलने वाले कि मैं क्या करूँ ?"
और ऐसा तो ये आपको ही नही अपने बाप और मां को ही बोलने लगती है.. यही लड़कियां मुल्लों के घरों में सौतन के साथ गौमांस पका रही है और isis में भेजी जा रही है।
में तो एक सुझाव दूंगा जो लड़कियां बड़ी हो गयी वो तो काबिल बन चुकी है सुनेंगी नहीं इसलिए कम से कम जो आज आपके घर में छोटी बच्चियां है उसको धार्मिक जानकारी दीजिये और सेकुलरिज्म वाला कथा पाठ मत सुनाइये। इस्लाम से नफरत सिखाइये।मुल्लों से नफरत सिखाइये।क्योंकि गंदी चीजों से आप प्रेम करना सिखाएंगे क्या ? नहीं तो कल आपको ही शर्मिंदा होना पड़ेगा जैसे हमलोग आज हैं।
19 घंटे 
 
वायुयान विज्ञान के जनक भारतीय वैदिक ॠषि भरद्वाज ~ प्रगति हेतु शोध की आवश्यकता।
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*सप्तर्षियों में से एक महर्षि भरद्वाज का फैकल्टी "अग्नि विज्ञान - स्पेस साइंस" था।
* महर्षि भरद्वाज रचित "अक्ष-तंत्र" में आकाशीय परिधि का वर्गीकरण है। मनुष्य आकाश में कहाँ तक जा सकता है और उसके बाहर जाकर कैसे नष्ट हो सकता है।
* महर्षि भरद्वाज रचित "अंशु प्रबोधिनी" के "विमानाधिकरण" में विमान रचना के प्रकार और उसके आकाशीय गति का वर्णन है~
1. विद्युत शक्ति से चलने वाले विमान।
2. पंचमहाभूत शक्ति से चलने वाले विमान।
3.धुँयें से चलने वाले विमान।
4. वनस्पति तेल की मोमबत्ती से चलने वाले।
5.सूर्य किरणों की शक्ति से चलने वाले विमान।
6.नक्षत्रों की शक्ति से चलने वाले विमान।
7. वायुमंडलीय तापविद्युत से चलने वाले विमान।
8. वायुमंडलीय शीत विद्युत से चलने वाले विमान।
9. सूर्य किरणों की द्वादश शक्तियों से मणि तैयार कर बने दर्पण शक्ति से चलने वाले विमान।
वैदिक ॠषियों ने जो आत्मानुसंधान कर न्यूनतम संसाधन से भौतिक विज्ञान में जो आश्चर्यजनक कार्य किये हैं, उनका विचार कर सकना भी हमारे लिए असंभव है।
पृथ्वी के आधुनिक वैज्ञानिक यदि चाहें तो वैदिक साइंस पर शोध कार्य कर काफी कुछ नये सूत्र प्राप्त कर वैज्ञानिक प्रगति में अनेकों नये आयाम को प्राप्त कर सकते हैं।
( संलग्न फोटो में डेटान (अमेरिका) प्रवास के दौरान National Air Force Museum of America के कुछ दृश्य)
इस पंद्रह अगस्त ने देश को ये मौका दिया कि केरल, बंगाल और जम्मू-कश्मीर को 'ज़ूम' करके देख सके। जब ज़ूम किया तो बंगाल में कालिख से लिपटी सुभाष बोस की मूर्ति दिखाई दी। केरल में तिरंगा लहराने पर एफआईआर दर्ज कराने वाले डीएम दिखाई दिए। कश्मीर में हमने स्टेडियम में सौ-पचास लोगों को बैठे देखा और ये भी देखा कि उनमे से ज्यादातर लोग राष्ट्रगान के समय खड़े ही नहीं हुए।
बंगाल-केरल-कश्मीर को लाल घेरे में अंकित कर देना चाहिए। ये वो राज्य हैं जहां अब संविधान का राज नहीं चलता। कितनी जल्दी हम ये विस्फोट देख पा रहे हैं। जबकि हममे से से कितने ये सोचकर निश्चिंत थे कि कम से कम हमारे वक्त में तो नहीं होगा 'गजवा-ए-हिंद'। लीजिये आपके सामने खड़ा है और 15 अगस्त को तीन राज्यों ने स्पष्ट संदेश दे दिए हैं कि 'हमारे यहां भारत की बात न करना'।
अब आगे क्या। कश्मीर की असली 'आज़ादी' के लिए प्रयास शुरू हो गए हैं लेकिन जब केंद्र सरकार सच में शुरू होगी तो क्या होगा सोचिये। अभी कश्मीर से बाबर सैयद कादरी लाइव खुलेआम पंडितों को गाली दे रहा था। सोचिये उस दिन कश्मीर की सूरत क्या होगी, जिस दिन धारा 370 को हटाने का काम शुरू होगा। सड़के खून से नहा जाएगी।
जब तक इन तीन राज्यों का उन्मूलन होगा, तब तक अन्य राज्यों में बंगाल जैसे हालात बनने लगेंगे, बल्कि मैं कहूंगा बन चुके हैं। पिछले वर्ष धार जिले में उनकी 'संगठित शक्ति' का अच्छे से जायज़ा ले चुका हूं। कल जब देश के विभिन्न शहर राष्ट्रीय पर्व से उल्लासित हो रहे थे, तब उन्ही शहरों के अधिकांश अल्पसंख्यक मोहल्लों में सन्नाटा देखा गया। कुछ मुस्लिमों को छोड़ दे तो मामला निराशाजनक ही रहा।
दरअसल कश्मीर समस्या सुलझाने में हम बीस साल पीछे चल रहे हैं। इसके लिए तो दिनों में नहीं बल्कि घन्टों में कार्रवाई की ज़रूरत है।
बस एक बात कहनी है कि हमारे पूर्ववती सरकारे और हम कठोर निर्णय नहीं ले सके। अब ये देश हमारे बाद हमारे नन्हों का होगा। आज माँ भारती की 'तीन भुजाएं' हमारे ही सामने लगभग नष्ट हो चुकी हैं तो उनके सम्मुख क्या माँ भारती भुजा विहीन हो जाएगी

कुमार अवधेश सिंह

नरेन्द्र मोदी जी के विवाह की पूरी कहानी

नरेन्द्र मोदी जी के विवाह की पूरी कहानी
बैलगाड़ी से गई थी नरेन्द्र मोदी जी की बरात: हिमालय से 1 दिन के लिए आए थे घर !
इस समय गुजरात के मुख्यमंत्री और बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की उम्र 12 वर्ष थी। 
मोदी अपने परिवार के साथ महेसाणा जिले के वडनगर में रहा करते थे। तभी एक साधू वडनगर आया। मोदी की मां हीराबा से उस साधू ने बेटों की कुंडली मांगी। हीराबा ने मोदी के साथ उनके बड़े भाई सोमभाई की भी कुंडली दिखाई।
साधू ने सोमभाई की कुंडली देखकर कहा... इसका जीवन तो सामान्य ही रहेगा, लेकिन तुम्हारे छोटे बेटे मोदी का जीवन उथल-पुथल भरा रहेगा। इसकी कुंडली में ऐसा योग है कि यह या तो एक दिन राजा बनेगा या फिर शंकराचार्य की तरह एक महान संत की सिद्धि हासिल करेगा।
इसी बीच मोदी की पूजा-पाठ में भी बहुत रुचि हो गई। वे अधिकतर समय पूजा-पाठ में ही व्यतीत करने लगे तो परिजन को चिंता होने लगी कि कहीं ये सचमुच में ही साधू न बन जाए।
मोदी जी को सभी ने बहुत समझाया, लेकिन उनके दिमाग से साधू बनने की बात निकल ही नहीं रही थी। इसी के चलते परिवार ने मोदी की शादी करवा देने का फैसला लिया। उन्हें लगा कि शादी हो जाने के बाद वह परिवार में व्यस्त हो जाएगा।
परिवार ने आनन-फानन में न सिर्फ मोदी की शादी के लिए वधु जशोदाबेन की तलाश कर ली, बल्कि उनके ही गांव जाकर मोदी की शादी भी कर दी। यह वह समय था, जब बड़ों के फैसलों का छोटे विरोध नहीं कर सकते थे और इस समय बाल विवाह प्रचलित था।
इस समय देश में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय मोदी द्वारा अपनी पत्नी जशोदाबेन के नाम का जिक्र करना ही है। उनकी पत्नी का नाम जशोदाबेन है। इसीलिए अब मोदी की शादी के गुजरे इतिहास के कई पन्ने खुल रहे हैं। इन सभी के बीच मोदी पर किताब लिखने वाली लेखिका कालिंदी रांदेरी ने कई बातों से पर्दा उठाया है।
मां से कहा, मैं हिमालय पर जाना चाहता हूं :-
शादी के बाद मोदी ने मैट्रिक की परीक्षा पास की। अब वे बड़े हो चुके थे और परिवार ने तय किया कि अब मोदी की पत्नी को घर बुला लेना चाहिए। अभी तक जशोदाबेन का गौना नहीं हुआ था और वे अपने माता-पिता के साथ ही रहा करती थीं। यह बात सुनते ही मोदी ने न कह दिया और कहा कि उन्हें वैवाहिक जीवन में कोई रुचि नहीं। वे साधू बनना चाहते हैं और इसके लिए हिमालय पर जाने की तैयारी कर रहे हैं।
परिजन मोदी को मनाते रहे, लेकिन मोदी अपनी जिद पर ही अड़े रहे। हालांकि मोदी मां हीराबेन का बहुत सम्मान करते थे। वे उनका आदेश नहीं टाल सकते थे। इसलिए उन्होंने मां से कहा कि मैं तुम्हारी मर्जी और आशीर्वाद के बगैर नहीं जा सकूंगा, लेकिन फिर भी मैं आपसे कहना चाहता हूं कि मुझे साधू बनना है। मोदी की जिद के आगे खुद मां हीराबा झुक गईं और उन्होंने मोदी को वैवाहिक बंधन से मुक्ति पाने और साधू बनने का आशीर्वाद दे दिया।
क्यों वापस मोदी?
इसके बाद मोदी हिमालय की कंदराओं में जा पहुंचे और साधुओं के साथ रहने लगे। साधुओं के साथ वे ईश्वर की तलाश में दर-दर भटकते रहे। हालांकि उनकी उम्र अब भी बहुत छोटी थी, लेकिन फिर भी वे जीवन के वास्तविक अर्थ की तलाश में निकल पड़े थे।
उनकी छोटी सी उम्र को देखते हुए एक साधू ने उन्हें समझाया कि ईश्वर की तलाश समाज की सेवा करके भी की जा सकती है। इसके लिए साधू बने रहने की कोई जरूरत नहीं।
इसके बाद मोदी हिमालय से वडनगर वापस आ गए। लेकिन फिर भी उन्होंने अपना वैवाहिक जीवन शुरू नहीं किया। दरअसल वे अपने घर सिर्फ एक दिन के ही लिए आए थे। परिवार भी अब पूरी तरह समझ चुका था कि मोदी को सांसारिक जीवन में रुचि नहीं।
परिजन ने उनकी पत्नी जशोदाबेन के परिजन को भी सूचना दे दी थी कि वे मोदी को वैवाहिक बंधन से मुक्ति दे दें। इसके लिए पूरे परिवार ने जशोदाबेन के परिवार से माफी मांगी। मोदी के परिजन को इस फैसले का दुख था, लेकिन मोदी अपनी जिद पर अडिग थे।
माता को दुख, पिता को अंतिम समय तक रहा रंज :
लेखिका कालिंदी रांदेरी के शब्दों में.. मैं जब मोदी की मां हीराबा से मिली तो उनकी आंखों में आंसू ही थे। उनका कहना था कि मोदी के मर्जी के खिलाफ उनकी शादी कराना जीवन की सबसे बड़ी भूल थी। हीराबा ने बताया कि मोदी के पिता को तो अंतिम समय तक इस बात का रंज रहा कि उन्होंने जबर्दस्ती मोदी पर शादी थोप दी थी।
मोदी की बारात बैलगाड़ी में गई थी। विवाह के बाद मोदी अपने परिवार के साथ वापस घर आ गए थे। परिवार ने निश्चय किया था कि मोदी की मैट्रिक की परीक्षा पास करने के बाद बहू का गौना करवा लिया जाएगा। लेकिन इसके बाद ही मोदी वैवाहिक बंधनों से अपने आपको मुक्त कर हिमालय की कंदराओं में जा पहुंचे। वे हिमालय से वापस आए भी तो सिर्फ एक दिन के लिए ही।
साभार - दैनिक भास्कर

जापान सरकार नए उद्योग लगाने के लिए


जापान इतना विकसित हो गया है कि अब वहां और आगे नए उद्योग लगाने की गूंजाइस बिलकुल नहीं बची है ।
हांलाकि जापान सरकार नए उद्योग लगाने के लिए दीर्घकालीन बिना ब्याज के मनचाहा ऋण दे रही है लेकिन कोई ऋण ल्रने वाला नहीं है ।
जापान ने चीन में भारत की तुलना में 200 गुना ज्यादा पूंजी लगाकर वहां आधुनिक तकनीक आधारित नए उद्योग धंधो के पहाड़ खड़े किये थे जिनमे करोडो चीनियों को रोजगार मिला हुआ है और चीन को निर्यात करने का विदेशी व्यापार मिला.
चीन के साथ आये दिन की तकरार के कारण जापान अपने सारे व्यापारिक कारखाने और फैक्ट्रिया चीन से निकाल कर भारत लाना चाहता है और भारत को आधे प्रतिशत की ब्याज दर पर लाखो खरबों येन का ऋण देकर मुंबई-अहमदाबाद, अहमदाबाद- मुंबई- बंगलौर-मद्रास, बंगलौर-दिल्ली, दिल्ली-कोलकत्ता और दिल्ली- मुंबई में सेकण्ड जेनेरेसन का औद्योगिक कारीडोर स्थापित करने के साथ-साथ बुलेट ट्रेन हाई स्पीड ट्रेन के इन्फ्रास्ट्रक्चर में आधुनिक तकनीक का समावेश कर इन्हें उन्नत बनाने में PPP बेसिस पर साझीदारी करना चाहता है । इतना ही नहीं वह रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग का इक्षुक है ।
भारत के साथ चीन भी दादागिरी दिखा रहा है वो जापान को भी आँख दिखाता है इसलिए देश हित में यही उचित होगा की भारत को चीन के साथ व्यापार में कमी कर विदेशी निवेश के लिए जापान का हाथ थाम लेना चाहिए ताकि लाखो युवको को रोजगार तो मिलेगा ही निर्यात के लिए सामग्री भी मिलेगी ।
अमेरिका भी चाहता है कि भारत को जापान के साथ " स्ट्रेटेजिक रिलेसन" बनाकर आगे बढ़ना चाहिए और इस दिशा में काम भी होने लगा है। अभी 2 दिन पहले ही जापान के राजदुत ने डोकलाम के बारे में भारत के पक्ष वाला अधिकृति बयान दिया कि वंहा स्टेस्टेस क्यू नही बदलना चाहिए और बातचीत कर समाधान निकालना चाहिए..
सितम्बर 17 में जापान के पीएम सिजो एबे भारत आ रहे है और अहमदाबाद जाकर पीएम मोदी के साथ सयुंक्त रूप से बुलेट ट्रेन के निर्माण कार्यो की आधारशिला रखेंगे।
चूँकि चीन अब क्षेत्र में अलग-थलग पड़ता जा रहा है इसलिए खीजकर NSG में भारत सदस्यता का विरोध और अजहर मसूद जैसे आतंकी का पक्ष लेकर उसे अन्तरार्ष्ट्रीय आतंकी घोषित करने में वीटो भी लगा रहा है अतः भारत को जापान के साथ आर्थिक, व्यापारिक और रक्षा सम्बन्ध बढ़ाने में विशेष काम करना चाहिए।
उमा शंकर सिंह