Saturday, 19 August 2017

पीएफ के पैसों से रिटायर्ड फौजी ने बनवा दी सड़क,बोले- खून का एक-एक कतरा देश के नाम है

 फौजी सिर्फ सरहदों की रक्षा नहीं करते। गांव-समाज की बेहतरी की चिंता भी उनके जेहन में रहती है। 34 साल देश की सेवा के बाद सूबेदार मेजर भग्गुराम मौर्य गांव पहुंचे तो उन्होंने पीएफ की राशि से गांव की सड़क बनाकर मिसाल पेश की। 10 फीट चौड़ी और डेढ़ किमी. लंबी सड़क ने कई बस्तियों को 'विकास पथ' से जोड़ा है।वाराणसी शहर से 20 किमी. दूर जंसा के रामेश्वर गांव की एक छोटी सी बस्ती हीरमपुर के भग्गुराम मौर्य सेना के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में रहे। बीते साल दिसम्बर में रिटायर्ड होने के बाद गांव आए। वह घर जाने के लिए गांव के ऐसे रास्ते से गुजरे, जिस पर साइकल चलाना भी मुश्किल था।इस पर उन्होंने पीएफ का पैसा लिया और घर व अपनी अन्य सुविधाओं को दरकिनार कर सड़क बनवाने में दिन-रात जुट गए। सात महीने की कोशिश के बाद अब उस रास्ते से साइकल, बाइक ही नहीं बल्कि फोर व्हीलर और ट्रैक्टर भी आसानी से गुजरने लगे हैं। 

इससे उन्हें 'हरिजनों को ईसाई बनाने के प्रयासों में कठिनाई होगी।'


पिछले सौ साल का प्रामाणिक रिकार्ड है कि दलितों, अछूतों को बराबरी और सम्मान देने का विरोध हिन्दू पण्डितों से अधिक ईसाई नेताओं ने किया। पहले वे साफ कहते भी थे कि इससे उन्हें 'हरिजनों को ईसाई बनाने के प्रयासों में कठिनाई होगी।' यह स्वयं कैंटरबरी के सर्वोच्च आर्कबिशप ने कहा था, जब 1936 में त्रावणकोर के महाराजा ने मन्दिरों के द्वार सबके लिए खोल दिये थे।
जब गांधी जी ने अस्पृश्यता खत्म करने का अभियान चलाया तो सबसे तीव्र विरोध ब्राह्मणों ने नहीं, चर्च-नेताओं ने किया था। उन्होने यह दलील दी कि 'गांधी जी हिन्दू धर्म के साथ छेड़-छाड़ कर रहे हैं। यह सन्दर्भ याद रखना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह प्रवृत्ति आज भी पूरी ताकत से सक्रिय है। तभी तो न केवल दलित-मुक्ति को उनका संगठित धर्मान्तरण कराने, गोमांस खिलाने आदि से जोड़ा जाता है, बल्कि यह भी छिपाया जाता है कि स्वतंत्रता पूर्व और बाद भी, निम्न जातियों को सम्मान और बराबरी देने का कार्य हिन्दू समाज ने स्वयं किया। स्वामी दयानन्द सरस्वती, स्वामी श्रद्धानन्द, गांधी जी, सरदार पटेल, हेगड़ेवार, अम्बेडकर आदि अनगिन महापुरुषों ने यह कार्य बढ़चढ़ कर किया। इस कार्य में दोगलापन कांग्रेसी सवर्णों ने ही किया और आज भी कर रहे हैं। -
प्रा. शंकर शरण
साभार
चारूमित्र पाठक
कुमार अवधेश सिंह

मैं तो हिन्दू लड़कियों की मूर्खता पर लिखना ही नहीं चाहता क्योंकि ये मेरे लिए ही शर्मनाक होगा पर कभी कभी लिखना चाहिए।आज चारों तरफ फिर से लव जिहाद का डिबेट चालू है।अब कोर्ट ने भी मान लिया कि लव जिहाद एक सच्चाई है।अब कोई कहता है इस्लाम दोषी है तो कोई सरकार को फेलियर कहता है।
पर सच पूछो तो इसमें सबसे बड़ी दोषी हिन्दू लड़कियां है। इनको समझाना मतलब पैदल चांद पर जाना है।एक तो इनका जवाब सुनो तो सिर्फ फिल्मी डायलाग मारती है।
"तुमलोग आपस मे लड़वा रहे हो, तुमलोग ही दंगा करवाते हो,तुमलोग ही वोट के लिए ऐसे करते हो आदि आदि"
और खुद ?
एक तरफ कृष्ण पूजा का नाटक और दूसरी तरफ गौभक्षकों के साथ घूमना ?
एक तरफ शिवपूजा और दूसरी तरफ नंदी के हत्यारों के साथ ?
ये लड़कियों को इस्लाम की abc भी पता नहीं है।मुसल्मानों के जिहादी चेहरे को देख नहीं पाती।इनको सिर्फ दिखता है ,जीन्स पेंट टीशर्ट घड़ी,बाइक और कार,चुपके से पानी लगा लगा के बाल सँवार के लाइन मारते लड़के ।
क्योंकि हिन्दू लड़कियां बददिमाग है और लालची हैं।इनके रोल मॉडल सिवाय बॉलीवुड के भांड हीरोइनों को छोड़कर और कोई होता ही नहीं।इनको दिन रात बस ये बॉलीवुड गाना तो वो बॉलीवुड गाना। बस इससे ज्यादा हो गया तो फिर tv सीरियल।इनके मां बाप भी कभी इस्लाम की सच्चाई नहीं बताते।इन लड़कियों को धार्मिक संस्कारों की जगह बॉलीवुड का संस्कार मिलता है।जितने उपदेश फिल्मों में दिये जाते है।ये भी बहस होने पर उतना ही बोलती है।
इन तक सच्चाई नहीं जा रही है।हिंदुओं के लिए उनके घर की लड़कियां ही धर्म की सबसे कमजोर कड़ी है।। ये लोग धार्मिक होने की नौटंकी तो खूब करती है लेकिन धर्म मिटाने वालों के साथ दोस्ती रखती है।आज जब हिंदुओं में जागरूकता आ रही है तब भी ये लोग अपनी ही दुनिया मे व्यस्त हैं।कारण ये है कि माँ बाप इनसे घर के अंदर DEBATE नहीं करते और लड़कियों को एक उम्र के बाद समझाया नहीं जा सकता क्योंकि तबतक ये बहुत काबिल बन जाती हैं।थोड़ी सी बड़ी हुई नहीं कि बोलेगी
"ये मेरी जिंदगी है तुम कौन होते हो बोलने वाले कि मैं क्या करूँ ?"
और ऐसा तो ये आपको ही नही अपने बाप और मां को ही बोलने लगती है.. यही लड़कियां मुल्लों के घरों में सौतन के साथ गौमांस पका रही है और isis में भेजी जा रही है।
में तो एक सुझाव दूंगा जो लड़कियां बड़ी हो गयी वो तो काबिल बन चुकी है सुनेंगी नहीं इसलिए कम से कम जो आज आपके घर में छोटी बच्चियां है उसको धार्मिक जानकारी दीजिये और सेकुलरिज्म वाला कथा पाठ मत सुनाइये। इस्लाम से नफरत सिखाइये।मुल्लों से नफरत सिखाइये।क्योंकि गंदी चीजों से आप प्रेम करना सिखाएंगे क्या ? नहीं तो कल आपको ही शर्मिंदा होना पड़ेगा जैसे हमलोग आज हैं।
19 घंटे 
 
वायुयान विज्ञान के जनक भारतीय वैदिक ॠषि भरद्वाज ~ प्रगति हेतु शोध की आवश्यकता।
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*सप्तर्षियों में से एक महर्षि भरद्वाज का फैकल्टी "अग्नि विज्ञान - स्पेस साइंस" था।
* महर्षि भरद्वाज रचित "अक्ष-तंत्र" में आकाशीय परिधि का वर्गीकरण है। मनुष्य आकाश में कहाँ तक जा सकता है और उसके बाहर जाकर कैसे नष्ट हो सकता है।
* महर्षि भरद्वाज रचित "अंशु प्रबोधिनी" के "विमानाधिकरण" में विमान रचना के प्रकार और उसके आकाशीय गति का वर्णन है~
1. विद्युत शक्ति से चलने वाले विमान।
2. पंचमहाभूत शक्ति से चलने वाले विमान।
3.धुँयें से चलने वाले विमान।
4. वनस्पति तेल की मोमबत्ती से चलने वाले।
5.सूर्य किरणों की शक्ति से चलने वाले विमान।
6.नक्षत्रों की शक्ति से चलने वाले विमान।
7. वायुमंडलीय तापविद्युत से चलने वाले विमान।
8. वायुमंडलीय शीत विद्युत से चलने वाले विमान।
9. सूर्य किरणों की द्वादश शक्तियों से मणि तैयार कर बने दर्पण शक्ति से चलने वाले विमान।
वैदिक ॠषियों ने जो आत्मानुसंधान कर न्यूनतम संसाधन से भौतिक विज्ञान में जो आश्चर्यजनक कार्य किये हैं, उनका विचार कर सकना भी हमारे लिए असंभव है।
पृथ्वी के आधुनिक वैज्ञानिक यदि चाहें तो वैदिक साइंस पर शोध कार्य कर काफी कुछ नये सूत्र प्राप्त कर वैज्ञानिक प्रगति में अनेकों नये आयाम को प्राप्त कर सकते हैं।
( संलग्न फोटो में डेटान (अमेरिका) प्रवास के दौरान National Air Force Museum of America के कुछ दृश्य)
इस पंद्रह अगस्त ने देश को ये मौका दिया कि केरल, बंगाल और जम्मू-कश्मीर को 'ज़ूम' करके देख सके। जब ज़ूम किया तो बंगाल में कालिख से लिपटी सुभाष बोस की मूर्ति दिखाई दी। केरल में तिरंगा लहराने पर एफआईआर दर्ज कराने वाले डीएम दिखाई दिए। कश्मीर में हमने स्टेडियम में सौ-पचास लोगों को बैठे देखा और ये भी देखा कि उनमे से ज्यादातर लोग राष्ट्रगान के समय खड़े ही नहीं हुए।
बंगाल-केरल-कश्मीर को लाल घेरे में अंकित कर देना चाहिए। ये वो राज्य हैं जहां अब संविधान का राज नहीं चलता। कितनी जल्दी हम ये विस्फोट देख पा रहे हैं। जबकि हममे से से कितने ये सोचकर निश्चिंत थे कि कम से कम हमारे वक्त में तो नहीं होगा 'गजवा-ए-हिंद'। लीजिये आपके सामने खड़ा है और 15 अगस्त को तीन राज्यों ने स्पष्ट संदेश दे दिए हैं कि 'हमारे यहां भारत की बात न करना'।
अब आगे क्या। कश्मीर की असली 'आज़ादी' के लिए प्रयास शुरू हो गए हैं लेकिन जब केंद्र सरकार सच में शुरू होगी तो क्या होगा सोचिये। अभी कश्मीर से बाबर सैयद कादरी लाइव खुलेआम पंडितों को गाली दे रहा था। सोचिये उस दिन कश्मीर की सूरत क्या होगी, जिस दिन धारा 370 को हटाने का काम शुरू होगा। सड़के खून से नहा जाएगी।
जब तक इन तीन राज्यों का उन्मूलन होगा, तब तक अन्य राज्यों में बंगाल जैसे हालात बनने लगेंगे, बल्कि मैं कहूंगा बन चुके हैं। पिछले वर्ष धार जिले में उनकी 'संगठित शक्ति' का अच्छे से जायज़ा ले चुका हूं। कल जब देश के विभिन्न शहर राष्ट्रीय पर्व से उल्लासित हो रहे थे, तब उन्ही शहरों के अधिकांश अल्पसंख्यक मोहल्लों में सन्नाटा देखा गया। कुछ मुस्लिमों को छोड़ दे तो मामला निराशाजनक ही रहा।
दरअसल कश्मीर समस्या सुलझाने में हम बीस साल पीछे चल रहे हैं। इसके लिए तो दिनों में नहीं बल्कि घन्टों में कार्रवाई की ज़रूरत है।
बस एक बात कहनी है कि हमारे पूर्ववती सरकारे और हम कठोर निर्णय नहीं ले सके। अब ये देश हमारे बाद हमारे नन्हों का होगा। आज माँ भारती की 'तीन भुजाएं' हमारे ही सामने लगभग नष्ट हो चुकी हैं तो उनके सम्मुख क्या माँ भारती भुजा विहीन हो जाएगी

कुमार अवधेश सिंह

नरेन्द्र मोदी जी के विवाह की पूरी कहानी

नरेन्द्र मोदी जी के विवाह की पूरी कहानी
बैलगाड़ी से गई थी नरेन्द्र मोदी जी की बरात: हिमालय से 1 दिन के लिए आए थे घर !
इस समय गुजरात के मुख्यमंत्री और बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की उम्र 12 वर्ष थी। 
मोदी अपने परिवार के साथ महेसाणा जिले के वडनगर में रहा करते थे। तभी एक साधू वडनगर आया। मोदी की मां हीराबा से उस साधू ने बेटों की कुंडली मांगी। हीराबा ने मोदी के साथ उनके बड़े भाई सोमभाई की भी कुंडली दिखाई।
साधू ने सोमभाई की कुंडली देखकर कहा... इसका जीवन तो सामान्य ही रहेगा, लेकिन तुम्हारे छोटे बेटे मोदी का जीवन उथल-पुथल भरा रहेगा। इसकी कुंडली में ऐसा योग है कि यह या तो एक दिन राजा बनेगा या फिर शंकराचार्य की तरह एक महान संत की सिद्धि हासिल करेगा।
इसी बीच मोदी की पूजा-पाठ में भी बहुत रुचि हो गई। वे अधिकतर समय पूजा-पाठ में ही व्यतीत करने लगे तो परिजन को चिंता होने लगी कि कहीं ये सचमुच में ही साधू न बन जाए।
मोदी जी को सभी ने बहुत समझाया, लेकिन उनके दिमाग से साधू बनने की बात निकल ही नहीं रही थी। इसी के चलते परिवार ने मोदी की शादी करवा देने का फैसला लिया। उन्हें लगा कि शादी हो जाने के बाद वह परिवार में व्यस्त हो जाएगा।
परिवार ने आनन-फानन में न सिर्फ मोदी की शादी के लिए वधु जशोदाबेन की तलाश कर ली, बल्कि उनके ही गांव जाकर मोदी की शादी भी कर दी। यह वह समय था, जब बड़ों के फैसलों का छोटे विरोध नहीं कर सकते थे और इस समय बाल विवाह प्रचलित था।
इस समय देश में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय मोदी द्वारा अपनी पत्नी जशोदाबेन के नाम का जिक्र करना ही है। उनकी पत्नी का नाम जशोदाबेन है। इसीलिए अब मोदी की शादी के गुजरे इतिहास के कई पन्ने खुल रहे हैं। इन सभी के बीच मोदी पर किताब लिखने वाली लेखिका कालिंदी रांदेरी ने कई बातों से पर्दा उठाया है।
मां से कहा, मैं हिमालय पर जाना चाहता हूं :-
शादी के बाद मोदी ने मैट्रिक की परीक्षा पास की। अब वे बड़े हो चुके थे और परिवार ने तय किया कि अब मोदी की पत्नी को घर बुला लेना चाहिए। अभी तक जशोदाबेन का गौना नहीं हुआ था और वे अपने माता-पिता के साथ ही रहा करती थीं। यह बात सुनते ही मोदी ने न कह दिया और कहा कि उन्हें वैवाहिक जीवन में कोई रुचि नहीं। वे साधू बनना चाहते हैं और इसके लिए हिमालय पर जाने की तैयारी कर रहे हैं।
परिजन मोदी को मनाते रहे, लेकिन मोदी अपनी जिद पर ही अड़े रहे। हालांकि मोदी मां हीराबेन का बहुत सम्मान करते थे। वे उनका आदेश नहीं टाल सकते थे। इसलिए उन्होंने मां से कहा कि मैं तुम्हारी मर्जी और आशीर्वाद के बगैर नहीं जा सकूंगा, लेकिन फिर भी मैं आपसे कहना चाहता हूं कि मुझे साधू बनना है। मोदी की जिद के आगे खुद मां हीराबा झुक गईं और उन्होंने मोदी को वैवाहिक बंधन से मुक्ति पाने और साधू बनने का आशीर्वाद दे दिया।
क्यों वापस मोदी?
इसके बाद मोदी हिमालय की कंदराओं में जा पहुंचे और साधुओं के साथ रहने लगे। साधुओं के साथ वे ईश्वर की तलाश में दर-दर भटकते रहे। हालांकि उनकी उम्र अब भी बहुत छोटी थी, लेकिन फिर भी वे जीवन के वास्तविक अर्थ की तलाश में निकल पड़े थे।
उनकी छोटी सी उम्र को देखते हुए एक साधू ने उन्हें समझाया कि ईश्वर की तलाश समाज की सेवा करके भी की जा सकती है। इसके लिए साधू बने रहने की कोई जरूरत नहीं।
इसके बाद मोदी हिमालय से वडनगर वापस आ गए। लेकिन फिर भी उन्होंने अपना वैवाहिक जीवन शुरू नहीं किया। दरअसल वे अपने घर सिर्फ एक दिन के ही लिए आए थे। परिवार भी अब पूरी तरह समझ चुका था कि मोदी को सांसारिक जीवन में रुचि नहीं।
परिजन ने उनकी पत्नी जशोदाबेन के परिजन को भी सूचना दे दी थी कि वे मोदी को वैवाहिक बंधन से मुक्ति दे दें। इसके लिए पूरे परिवार ने जशोदाबेन के परिवार से माफी मांगी। मोदी के परिजन को इस फैसले का दुख था, लेकिन मोदी अपनी जिद पर अडिग थे।
माता को दुख, पिता को अंतिम समय तक रहा रंज :
लेखिका कालिंदी रांदेरी के शब्दों में.. मैं जब मोदी की मां हीराबा से मिली तो उनकी आंखों में आंसू ही थे। उनका कहना था कि मोदी के मर्जी के खिलाफ उनकी शादी कराना जीवन की सबसे बड़ी भूल थी। हीराबा ने बताया कि मोदी के पिता को तो अंतिम समय तक इस बात का रंज रहा कि उन्होंने जबर्दस्ती मोदी पर शादी थोप दी थी।
मोदी की बारात बैलगाड़ी में गई थी। विवाह के बाद मोदी अपने परिवार के साथ वापस घर आ गए थे। परिवार ने निश्चय किया था कि मोदी की मैट्रिक की परीक्षा पास करने के बाद बहू का गौना करवा लिया जाएगा। लेकिन इसके बाद ही मोदी वैवाहिक बंधनों से अपने आपको मुक्त कर हिमालय की कंदराओं में जा पहुंचे। वे हिमालय से वापस आए भी तो सिर्फ एक दिन के लिए ही।
साभार - दैनिक भास्कर

जापान सरकार नए उद्योग लगाने के लिए


जापान इतना विकसित हो गया है कि अब वहां और आगे नए उद्योग लगाने की गूंजाइस बिलकुल नहीं बची है ।
हांलाकि जापान सरकार नए उद्योग लगाने के लिए दीर्घकालीन बिना ब्याज के मनचाहा ऋण दे रही है लेकिन कोई ऋण ल्रने वाला नहीं है ।
जापान ने चीन में भारत की तुलना में 200 गुना ज्यादा पूंजी लगाकर वहां आधुनिक तकनीक आधारित नए उद्योग धंधो के पहाड़ खड़े किये थे जिनमे करोडो चीनियों को रोजगार मिला हुआ है और चीन को निर्यात करने का विदेशी व्यापार मिला.
चीन के साथ आये दिन की तकरार के कारण जापान अपने सारे व्यापारिक कारखाने और फैक्ट्रिया चीन से निकाल कर भारत लाना चाहता है और भारत को आधे प्रतिशत की ब्याज दर पर लाखो खरबों येन का ऋण देकर मुंबई-अहमदाबाद, अहमदाबाद- मुंबई- बंगलौर-मद्रास, बंगलौर-दिल्ली, दिल्ली-कोलकत्ता और दिल्ली- मुंबई में सेकण्ड जेनेरेसन का औद्योगिक कारीडोर स्थापित करने के साथ-साथ बुलेट ट्रेन हाई स्पीड ट्रेन के इन्फ्रास्ट्रक्चर में आधुनिक तकनीक का समावेश कर इन्हें उन्नत बनाने में PPP बेसिस पर साझीदारी करना चाहता है । इतना ही नहीं वह रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग का इक्षुक है ।
भारत के साथ चीन भी दादागिरी दिखा रहा है वो जापान को भी आँख दिखाता है इसलिए देश हित में यही उचित होगा की भारत को चीन के साथ व्यापार में कमी कर विदेशी निवेश के लिए जापान का हाथ थाम लेना चाहिए ताकि लाखो युवको को रोजगार तो मिलेगा ही निर्यात के लिए सामग्री भी मिलेगी ।
अमेरिका भी चाहता है कि भारत को जापान के साथ " स्ट्रेटेजिक रिलेसन" बनाकर आगे बढ़ना चाहिए और इस दिशा में काम भी होने लगा है। अभी 2 दिन पहले ही जापान के राजदुत ने डोकलाम के बारे में भारत के पक्ष वाला अधिकृति बयान दिया कि वंहा स्टेस्टेस क्यू नही बदलना चाहिए और बातचीत कर समाधान निकालना चाहिए..
सितम्बर 17 में जापान के पीएम सिजो एबे भारत आ रहे है और अहमदाबाद जाकर पीएम मोदी के साथ सयुंक्त रूप से बुलेट ट्रेन के निर्माण कार्यो की आधारशिला रखेंगे।
चूँकि चीन अब क्षेत्र में अलग-थलग पड़ता जा रहा है इसलिए खीजकर NSG में भारत सदस्यता का विरोध और अजहर मसूद जैसे आतंकी का पक्ष लेकर उसे अन्तरार्ष्ट्रीय आतंकी घोषित करने में वीटो भी लगा रहा है अतः भारत को जापान के साथ आर्थिक, व्यापारिक और रक्षा सम्बन्ध बढ़ाने में विशेष काम करना चाहिए।
उमा शंकर सिंह

Friday, 18 August 2017

ॐ..
लव जिहाद- हिन्दू लड़की शिकार हुई, मोहम्मद आरिफ की पहले से 2 पत्नी थी 7 बच्चे थे,हिन्दू युवती को मारने से पहले 4 मुस्लिम लड़को ने रेप किया..... ये घटना गुजरात की हैं....एक मुस्लिम मोहम्मद आरिफ ने पहले हिन्दू लड़की से प्यार किया फिर शादी की फिर अपने रिश्तेदरो के साथ बलत्कार और उसके बाद हत्या......लव जिहाद की कुछ तस्वीरे जो आपको विचलित कर सकती है. हिन्दू लडकिया अगर अब भी नही सुधरी तो भविष्य में भी तुम्हारा यही हाल होगा.

महाभारत नागों की भी कहानी

महाभारत नागों की भी कहानी होती है। हमें इतिहास राजाओं की कहानी की तरह पढ़ाया जाता है। टीवी पर दिखाते समय शायद ये दिक्कत हुई कि ऐसे ही सिस्टम में पढ़े-लिखे आज के लोगों ने जब महाभारत को दर्शाया तो उसे किसी पांडव और कौरवों के राजा बनने के लिए हुई लड़ाई के तौर पर दर्शाया। एक किताब के तौर पर जो भृगु महाभारत में हर जगह हैं, उनका कहीं जिक्र तक टीवी के जरिये महाभारत समझने की कोशिश करने वालों को दिखाई-सुनाई ही नहीं दिया। महाभारत में नाग बिलकुल शुरू में ही आ जाते हैं।
आरुणी नाम का एक छात्र जब अपनी गुरुदक्षिणा के लिए रानी से उनके कुंडल मांगने पहुँचता है, तभी वो उसे सावधान करती हैं कि नागराज कई दिन से इन कुण्डलों पर निगाह जमाये बैठा है। वो गरीब छात्र की गुरुदक्षिणा का इंतजाम तो करती हैं, मगर साथ ही उसे चोरी से सावधान भी कर देती हैं। सावधानी के वाबजूद तक्षक कुण्डल चुरा कर भाग जाता है। छात्र बेचारा पीछा करता हुआ पाताल पहुंचा, आखिर जैसे तैसे कुण्डल लेकर वापस गुरु माता के पास लौटता है। इस एक कहानी में कम से कम पांच नीति कथाएँ होती हैं, मगर फ़िलहाल उनसे ध्यान हटाकर हम नागों पर ही ध्यान रखेंगे।
तो वापस आते हुए, नागों का दूसरा बड़ा जिक्र कृष्ण के कालिया दमन, और भीम को विष देकर नदी में फेंके जाने के समय आता है। यमुना के इलाकों में नागों का कब्ज़ा था इस से ये बात भी समझ आती है। कृष्ण ने पांडवों के सहयोग से उन्हें इस इलाके से दूर किया था। कृष्ण और अर्जुन बाद में खांडवप्रस्थ को भी नागों से खाली करवा लेते हैं। कृष्ण को चक्र चलाना तो काफी पहले ही परशुराम सिखा चुके होते हैं, लेकिन अग्नि से उन्हें यहीं दिव्यास्त्र मिलते हैं। सुदर्शन चक्र भी अग्नि ने दिया, और अर्जुन को गांडीव भी अग्नि ने इसी समय दिया।
इस खांडव वन को जलाने की लड़ाई में अग्नि की सहायता जहाँ कृष्ण-अर्जुन कर रहे थे वहीँ वहां रहने वाले नागों की रक्षा इंद्र कर रहे थे। इंद्र नागों को बचा नहीं पाए और सिर्फ तक्षक का एक पुत्र अश्वसेन निकल के भाग पाने में कामयाब हुआ। बाकी वहां रहने वाले तक्षक के वंशज नाग वहीँ मारे गए। इस दुश्मनी को ना अश्वसेन भूला ना तक्षक। इस खांडव वन को इन्द्रप्रस्थ बनाने से थोड़ा ही पहले अर्जुन का नागकुमारी उलूपी ने अपहरण कर लिया था। इस वैवाहिक सम्बन्ध के कारण अर्जुन को पानी के अन्दर ना हारने का भी वरदान था।
नागों से इस दोस्ती-दुश्मनी का नतीजा महाभारत की लड़ाई में भी दिखेगा। युद्ध में जब कर्ण अर्जुन से लड़ रहे होते हैं तो यही खाण्डववन वाला अश्वसेन कर्ण के तरकश में जा घुसा। कर्ण के बाण से चिपक के वो अर्जुन तक पहुँच जाना चाहता था, लेकिन कृष्ण अपने अंगूठे से रथ को दबा देते हैं। इस बार इंद्र, जो कि कभी नागों की सहायता कर रहे थे, उन्हीं का दिया मुकुट अर्जुन के काम आ जाता है। कर्ण का तीर रथ के दब जाने के कारण अभेद्य मुकुट से टकराकर टूट गया और अश्वसेन अर्जुन तक नहीं पहुँच पाया। अश्वसेन दोबारा भी कर्ण के पास उसके तीर पर सवार होने का प्रस्ताव लेकर पहुंचा था, लेकिन कर्ण नागों की मदद को ओछी हरकत मानकर इनकार कर देता है।
युद्ध के अंत में जब दुर्योधन तालाब में छुपा होता है और पांडव उसे ढूंढ निकालते हैं तब भी दुर्योधन नागों की वजह से बाहर आता है। अगर अर्जुन पानी में उतरता तो उसका मारा जाना तय था, जबकि बाहर निकलकर भीम से द्वन्द युद्ध में उसके पास विजय की थोड़ी संभावना बनती थी। नागों ने युद्ध के ख़त्म होने पर युद्ध में शामिल हुए अन्य लोगों की तरह शत्रुता की भावना भी नहीं छोड़ी थी। कई साल बाद जब अर्जुन के पोते को शाप मिलता है तो तक्षक उसे डसने पहुँच जाता है। कोई उसे बचा ना पाए इसलिए काश्यप नाम के वैद्य (ऋषि नहीं, ये दुसरे थे) को वो धन इत्यादि देकर दूसरी दिशा में रवाना भी कर देता है।
अगर आप सेक्युलर विचारधारा के मुताबिक (जल्दबाजी में) इसे दो अलग अलग सभ्यताओं की जंग कहकर किसी आर्य-नाग युद्ध जैसा कुछ बताना चाहते हैं तो मत कीजिये। नाग और कौरव-पांडव के अलावा कई कुलों का जिक्र महाभारत में आता है। सब के सब इंद्र, वरुण, अग्नि, विष्णु, शिव आदि देवी-देवताओं के ही उपासक दिखते हैं। कोई एक दुसरे की परम्पराओं को हेय या निकृष्ट बता रहा हो ऐसा भी नहीं दिखता। एक दुसरे से वैवाहिक संबंधों के कारण सामाजिक बहिष्कार जैसे कोई मामले भी नजर नहीं आते। ये कहानियां इसलिए याद आई क्योंकि कर्ण के धनुष पर चढ़े अश्वसेन जैसी ये तस्वीर कल मनीष शुक्ला जी की वाल पर नजर आ गई थी।
बाकी हर अपराध पर संवेदना जताने के बहाने से जब भारत के बहुसंख्यकों पर छुपा प्रहार होने लगता है तो वो कर्ण के तीर पर चढ़े अश्वसेन जैसा ही दिखता भी है। आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता, वो तो खैर पता ही है।
टेरर फंडिंग: पाक उच्चायोग के जरिए हुर्रियत नेताओं तक पहुंचती थी रकम
पाकिस्तान से आतंकी फंडिंग के मामले में कई सनसनीखेज तथ्य सामने आ रहे हैं। एनआईए के मुताबिक टेरर फंडिंग में सीधे तौर पर पाकिस्तान के उच्चायोग की संलिप्तता उजागर हुई है। मामले की जांच करने में जुटी एनआईए के सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान से मिलने वाली टेरर फंडिंग में हुर्रियत के नेता सैयद अली शाह गिलानी के बेटे नसीम गिलानी भी बुरी तरह फंसते नजर आ रहे हैं।

एनआईए सूत्रों के अनुसार कश्मीरी कारोबारी जहूर अहमद वटाली को टेरर फंडिंग की रकम दुबई और पाकिस्तान से मिलती थी। उसे यह रकम भारत में स्थित पाकिस्तान उच्चायोग के जरिए हासिल होती थी। वह 8 से 9 पर्सेंट तक कमिशन काटने के बाद रकम हुर्रियत के लोगों को ट्रांसफर कर देता था।

कुछ दिनों से एनआईए की ओर से हुर्रियत नेताओं के दिल्ली से लेकर श्रीनगर तक के ठिकानों पर छापेमारी की गई है। इस दौरान एजेंसी को कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जिससे उन पर पाक से रकम हासिल करने के पुख्ता सबूत मिले हैं। एनआईए ने इस मामले में अलगाववादी नेता शब्बीर शाह को भी अरेस्ट किया है। एनआईए ने गिलानी के दामाद को भी इस मामले में अरेस्ट किया है।

5 डायरियों ने खोला राज़
वटाली पर आरोप है कि उसने अपने कई बिजनस का इस्तेमाल पाकिस्तान से फंड हासिल करने के लिए फ्रंट के तौर पर किया। बाद में उसने इन पैसों को संगठित तरीके से अलगाववादियों को पहुंचाया। ऐसा करने के लिए उसने अपने बैंक खातों के हिसाब में हेरफेर की। सूत्रों के मुताबिक, वटाली की गिरफ्तारी की बड़ी वजह बनी उसकी 5 डायरियां, जिससे एनआईए अफसरों को 'जानकारियों का खजाना' हाथ लगा है। इन डायरियों में इस बात की डीटेल्स हैं कि सालों से विभिन्न माध्यमों-कैश, हवाला या दूसरे ट्रांसफर के जरिए किस तरह वटाली को पैसे मिले और बाद में उससे यह पैसे कैसे दूसरों को दिए गए।

साभार NBT
"मनुष्य आध्यात्मिक ज्ञान की शक्ति के आभाव में अपनी भौतिक आवश्यकताओं को भी पूर्णतः संतुष्ट नहीं कर सकता।
क्योंकि, आध्यात्मिक ज्ञान ही एक मात्र ऐसी शक्ति है जो हमारे कष्टों को हमेशा के लिए नष्ट करने की क्षमता रखती है; अन्य कोई भी ज्ञान हमारी आकांक्षाओं को एक निश्चित समय के लिए ही संतुष्ट कर सकता है।
आध्यात्मिक ज्ञान विद्या का ऐसा संकाय है जो अभाव, अपेक्षा और आकांक्षाओं के कष्ट का स्थाई समाधान है। अतः मानवता के विकास और कल्याण के लिए अध्यात्म ज्ञान के दान को चेतना का श्रेष्तम योगदान कहना गलत न होगा; इसलिए भारत को आज अपनी विशिष्टता को यथार्थ में जीने के लिए हिन्दू राष्ट्र के रूप में अपनी वास्तविकता का बोध होना आवश्यक है।
भारत ने समय समय पर विभिन्न परिस्थितियों में विश्व के विविध मान्यताओं, जीवन शैली और धर्म को स्वीकार किया है पर चूँकि सभी 'आयातित' धर्म अथवा मान्यताओं पर उनके उद्गमस्थल के तात्कालीन भौगोलिक, सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों का प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है, इसलिए, उनका भारतीय संस्कृति और परम्पराओं से घर्षण भी संभव है, ऐसे में, यदि हम भारतीय परिपक्वता से काम लें तो विश्व के समक्ष यथार्थ में आदर्श का एक ऐसा व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत कर सकेंगे जो संभवतः वर्त्तमान में विश्व के अधिकाँश समस्याओं का समाधान होगा; विशेष कुछ नहीं करना, बस, अपनी राष्ट्रीयता को सर्वोपरि मानकर राष्ट्रधर्म निभाना है।
हो सकता है की भारत भूमि में आज प्रचलित कई धर्म व् मान्यताएं विश्व से आयातित हों , ऐसे में, भारत की अपेक्षा आयातित धर्मं से नहीं बल्कि उनके स्वदेशी धर्मावलम्बियों से हैं, जिनके धर्म का जन्मस्थल जो भी हो उनकी जन्म व् कर्म भूमि तो भारत ही है।
विवधताओं से परिपूर्ण इस देश के लिए भाषा से अधिक आज भाव को महत्वपूर्ण बनाने की आवश्यकता है, फिर बात चाहे 'भारत माता की जय' कहने की हो या 'मादर -ए-वतन ज़िंदाबाद' कहने की। वास्तव में भारत की विविधताओं के संरक्षण , संवर्धन और यहाँ के सभी धर्म और धर्मावलम्बियों की सुरक्षा के लिए आज भारत का हिन्दू राष्ट्र बनना ही एक मात्र विकल्प है।
तपस्या द्वारा ज्ञान की प्राप्ति भले ही कठिन हो पर उसकी स्वीकृति तथा प्रचार व् प्रसार तपस्या कठिन नहीं ; बस, श्रम को सतत प्रयास के दृढ़ निर्णय की आवश्यकता होती है।
भक्ति और ज्ञान एक दुसरे के पूरक हैं , ज्ञान के आभाव में भक्ति ही पाखंड बन जाती है और भक्ति के आभाव में ज्ञान महत्वहीन, फिर धर्म चाहे जो हो।
हिन्दू धर्म में 1280 बुनियादी धार्मिक ग्रन्थ हैं ; इन ग्रंथों की नीव 10,000 टिप्पणियां, एक लाख से अधिक उप टिप्पणियों, देवताओं के प्रारूप में सैंकड़ों इष्ट, असंख्य आचार्य, हजारों ऋषियों के ज्ञान के समावेश पर आधारित है, यही कारन है की आज सैकड़ों भाषाओँ द्वारा विभाजित हिन्दू एक है; सभी एक दुसरे की आस्था और धार्मिक स्थलों का सम्मान करते हैं और किसी को भी किसी के मंदिर में जाने से कोई शिकायत नहीं !
इसके विपरीत, विश्व के कई दुसरे धर्म एक ईश्वर पर आधारित , एक धर्मग्रन्थ द्वारा परिभिसित और एक पैगम्बर द्वारा प्रचारित फिर भी आज अंदर से एक नहीं; अतः कलह से ग्रषित हैं। उनके अंदर न ही एक दुसरे की आस्था और धार्मिक स्थलों का सम्मान है और न ही वो एक दुसरे के मंदिर में जाने में सहमति !
हमारा समाज इस महान समभ्यता और संस्कृति का वंसज है और अगर वर्त्तमान को अपने अस्तित्व के इस विशिष्ट पहचान से शिकायत हो तो एक राष्ट्र के रूप में हमारा भविष्य निसंदेह एक चिंता का विषय होगा।
विविधताओं को एक सूत्र में पिरोना ही हिंदुत्व की विशिष्टता रही है क्योंकि हिंदुत्व जानता है की विविधता ही श्रिष्टि में प्राकृतिक रचना की शैली है। विशिष्टता को निखारना और महत्व देना न की सामान्यकरण के प्रक्रिया से साधारण बनाना हिंदुत्व की शैली रही है।
सूरज के सामने आँखें बंद कर लेने से रात नहीं होती, हाँ, अपनी समझ और मूर्खता का प्रदर्शन अवश्य होता। अब अगर सूरज को सत्य मान लें और बंद आँखों को अनभिज्ञता का निर्णय ....तो समझदारी मुश्किल नहीं रहेगी ,
भारत एक हिन्दू राष्ट्र है और यही कारन है की यहाँ का संविधान सभी धर्मो को सामान महत्व देता है। क्योंकि हिंदुत्व को ईश्वर के एकांतम् अस्तित्व का ज्ञान है, अतः उसे एक ही गंतव्य के विभिन्न मार्ग से कोई मतभेद नहीं;
हिंदुत्व की शुद्धि और एक राष्ट्र के रूप में हमारी वास्तविकता की स्वीकृति के लिए भारत का 'हिन्दू राष्ट्र' होना आज समय की आवश्यकता है। ऐसे में, यदि आज भारतियों को भारत के 'हिन्दू राष्ट्र' होने पर अप्पत्ति है तो इसे देश का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा; क्या आपको ऐसा नहीं लगता ?"

5 रूपये का चिप्स पैकेट बेच खड़ा किया 850 करोड़ का कारोबार, एक छोटे से शहर से चलती है कम्पनी

कायदे से देखें तो 2020 तक भारत में नमकीन का व्यवसाय 35,000 करोड़ रूपये के पार होगा। ऐसी स्थिति में इस क्षेत्र में एक बड़ी कारोबारी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। और इसी कारोबारी संभावना को भांपते हुए कई क्षेत्रीय ब्रांड भी आगे आ रहे हैं। आप विश्वास नहीं करेंगें, इन क्षेत्रीय ब्रांडों ने भी अपने स्वाद से लोगों का दिल जीतते हुए न सिर्फ करोड़ों रूपये का टर्नओवर कर रहा बल्कि घरेलू बाज़ार में विदेशी ब्रांडों को काँटे की टक्कर दे रहा है
आज हम ऐसे ही एक क्षेत्रीय नमकीन ब्रांड की सफलता से आपको रूबरू करा रहे हैं। ताज्जुब की बात है कि हममें से ज्यादातर लोग इस ब्रांड का नाम तक नहीं सुने होंगें लेकिन यह कंपनी आज सालाना 850 करोड़ रूपये का टर्नओवर कर रही है। इंदौर स्थित स्नैक फूड कंपनी प्रताप नमकीन ने जब नमकीन के छल्ले बनाने शुरू किये तो उन्हें भी मालूम नहीं था कि एक दिन वे इस सेगमेंट के अग्रणी कंपनियों में से एक होंगें। साल 2003 में अमित कुमात और अपूर्व कुमात ने अपने दोस्त अरविंद मेहता के साथ मिलकर इस कंपनी की नींव रखी थी और आज यह देशभर में चार कारखानों के साथ 24 राज्यों में 168 स्टोर हाउस और 2,900 वितरकों का एक विशाल नेटवर्क बन चुका है।
एक स्नैक्स कंपनी में 10 वर्ष तक काम काम करने के बाद, अमित ने साल 2001 में कारोबारी जगत में घुसने का फैसला लिया और इसके लिए उन्होंने रसायन विनिर्माण का क्षेत्र चुना। व्यवसाय शुरू करने के एक साल के भीतर ही कंपनी के ऊपर 6 करोड़ रुपये का कर्ज हो गया और फिर उन्होंने कारोबार बंद करने का निश्चय किया। शुरूआती असफलता से उन्हें बेहद धक्का लगा। उन्होंने न केवल अपनी सारी बचतें गंवा दीं बल्कि इंदौर क्षेत्र के अपने साथी व्यापारियों के बीच सम्मान भी। उन्होंने किसी तरह अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से उधार लेकर सारे लेनदारों का भुगतान किया। लेकिन अमित अपना खुद का बिज़नेस एम्पायर बनाने के सपने को इतनी आसानी से छोड़ने वाले नहीं थे। साल 2002 में उन्होंने अपने भाई अपूर्व और मित्र अरविंद से इंदौर क्षेत्र में नमकीन का व्यवसाय शुरू करने का आइडिया साझा किया। तीनों ने अपने परिवार वालों पर काफी दबाव बनाने के बाद 15 लाख रूपये इकठ्ठा कर प्रताप स्नैक्स के रूप में अपने सपने की नींव रखी।
हमेशा उद्यमी बने रहना चाहता था और स्नैक्स बाजार में मुझे दिलचस्पी थी क्योंकि मैं सभी बड़े ब्रांडों से परिचित था। मुझे एहसास हुआ कि इंदौर जैसे शहरों में उनकी पहुंच बड़ी नहीं थी और इसी वजह से मैनें इस क्षेत्र को चुना। — अमित
कारोबार की शुरुआत करने के लिए उन्होंने एक स्थानीय खाद्य प्रसंस्करण और विनिर्माण संयंत्र में रिंग स्नैक्स के कुल 20,000 बक्से का आर्डर दिया। शुरुआती दिनों के दौरान, वे उत्पादन को स्थानीय निर्माताओं से ही ख़रीदा करते और अपना सारा ध्यान मजबूत वितरण नेटवर्क के निर्माण पर केंद्रित किया। कम पूंजी की वजह से उनके पास सीमित उपकरण थे और साथ ही संयंत्र लगाने के लिए प्रयाप्त जगह भी नहीं थी। पहले साल कंपनी ने कुल 22 लाख रुपये बनाये, दूसरे साल यह लाभ 1 करोड़ रुपये तक पहुँच गया और तीसरे साल तो टर्नओवर 7 करोड़ के पार रहा।
शुरूआती सफलता को देखकर उन्हें इस बात का अहसास हो चुका था कि यह क्षेत्र कितना फायदेमंद है। सफलता की अपार संभावनाओं को देखते हुए उन्होंने साल 2006 में अपने व्यापार को मुंबई में विस्तारित किया। लेकिन 2006 और 2010 के बीच की अवधि में हल्दीराम और बालाजी वेफर्स जैसे कई घरेलु ब्रांड आगे आकर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा का आगाज़ किया। इन ब्रांडों से मुकाबला करने के लिए अमित ने एक ही समय में संपूर्ण देश को लक्षित करने के बजाय एक क्षेत्र में विस्तार कर अपनी मजबूत पैठ ज़माने पर ज्यादा जोर दिया। साल 2011 में कंपनी ने खुद का विनिर्माण संयंत्र स्थापित करते हुए येलो डायमंड नाम से ब्रांड पेश किया और टर्नओवर को 150 करोड़ के पार पहुँचाया।
साल-दर-साल स्नैक्स फूड मार्केट में कंपनी का शेयर बढ़ता चला गया। 2010 से 2015 तक, उनकी बाजार हिस्सेदारी एक प्रतिशत से बढ़कर चार प्रतिशत हो गई। आने वाले समय में अमित देश के स्नैक्स मार्केट में कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सेदारी चाहते हैं। और इसके लिए उनकी पूरी टीम अपने प्रोडक्ट की गुणवत्ता पर खासा ध्यान दे रही है। बिलियन डॉलर क्लब में शामिल होने के लिए हाल ही में कंपनी ने अपना आईपीओ भी निकाला है।
इंदौर जैसे छोटे से शहर से निकलकर अपने आइडिया से मल्टीनेशनल कंपनी को कांटे की टक्कर देने वाले इन युवाओं की सोच को सच में सलाम करने की जरुरत है। कहानी पर आप अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट बॉक्स में अवश्य दें और इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें

आप जानकार हैरान हो जाएंगे ये क्रिकेटर्स मशहूर होने से पहले क्या किया करते थे...

क्रिकेट को भारत में लोग भगवान् की तरह पूजते है. हर गली हर नुक्कड़ में आपको बच्चों से लेकर बड़े भी क्रिकेट खेलते हुए दिख जाते है. क्रिकेट इतना मशहूर है की हर ऐज ग्रुप के लोग इसे टीवी पर या स्टेडियम में देखना पसंद करते हैं. यहाँ तक की भारतीय क्रिकेटर्स को भी लोग बहुत ही प्यार करते है. अपने पसंदीदा खिलाडी को खेलते हुए देखने के लिए वे सब छोड़ देते हैं.
पर आपको पता है ये खिलाडी ऐसे ही इतनी उचाईयों पर नहीं पहुंचे. बल्कि अपनी म्हणत और कठोर परिश्रम की वजह से ही ये आज इतने मशहूर और अमीर हैं. इन खिलाडियों ने बहुत ही बुरे वकत देखे पर सपने देखना नहीं छोड़ा. और उसका नतीजा- आज दुनिया इन्हे जानती है और इनसे प्यार करती है. हमे गर्व है ऐसे भरिया खिलाडियों पर जो कठिनायों में पीछे होने की जगह अपनी परेशानियों से लड़े.
आईये जानते हैं की क्रिकेट में आने से पहले ये खिलाडी क्या किया करते थे
1. रविन्द्र जडेजा
रविंद्र जडेजा अपने पिता की ही तरह एक चौकीदार थे. लेकिन उन्होंने अपने सपनो के लिए बहुत मेहनत की और आज वे भारतीय क्रिकेट में आल राउंडर है.
2. उमेश यादव
भारतीय क्रिकेट टीम के लोकप्रिय गेंदबाज़ उमेश यादव के सपनो में भी उनकी गेंदबाज़ी की तरह ही रफ़्तार थी. उमेश यादव एक बहुत ही गरीद घर में पैदा हुए और घर चलने के लिए १२वी के बाद ही अपने पिता के साथ मजदूरी में हाथ बटाने लग गए
3. इरफ़ान पठान और युसूफ पठान
बड़े होते होते पठान भाइयों ने अपने पिता के साथ मस्जिद जाना शुरू कर दिया. वे उनकी मदद करने लगे और उसी वक़्त में वही क्रिकेट खेलने की प्रैक्टिस करते.
4. कामरान खान
कामरान ने ऐसे दिन भी देखे है जब उनके पास रहने के लिए घर तक नहीं था और पैसों की कमी के कारण अपनी माँ को खो दिए. रेलवे स्टेशन पर रात गुज़ारने वाले कामरान के सर से गरीबी के बादल तब हेट जब उन्हें आईपीएल में खेलने का मौका मिला. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.
5. मनोज तिवारी
क्रिकेट की दुनिया में नाम कमाने से पहले तिवारी रेलवे स्टेशन में काम किया करते थे.
6. भुवनेश्वर कुमार
एक समय ऐसा भी था जब उनके प[अस पहनने के लिए जूते भी नहीं हुआ करते थे पर आज उनके बिना क्रिकेट अधूरा है.
कहानी के Centre में एक पुलिस वाला है. ऐसा हिम्मतवाला, जिसके आगे अंडरवर्ल्ड के अच्छे-अच्छों ने घुटने तक दिए. जो उसकी बन्दूक के निशाने से भागने की कोशिश करता, उसकी मौत पक्की. वो था तो टीचर का बेटा, लेकिन किस्मत में उसकी पुलिस वाला बनना लिखना था. पुलिस वाला भी कौन सा? 1983 बैच का पुलिस वाला. इस बैच को याद किया जाता है मुंबई से अंडरवर्ल्ड का सफ़ाया करने में. उसने एक-एक कर के 113 एनकाउंटर कर डाले और उसका नाम मुंबई के सबसे बड़े एनकाउंटर स्पेशलिस्ट में गिना जाने लगा. लेकिन किस्मत ने पलटी तब मारी, जब उसका नाम छोटा राजन के ख़ास लखन भैय्या के Fake एनकाउंटर में आया और उसे सर्विस से हटा दिया गया.

9 साल बाद फिर से उसकी वापसी हुई है. वो फिर से वर्दी पहनेगा और फिर से मुंबई का सबसे बड़ा एनकाउंटर वाला बन जाएगा.

ये सच्ची कहानी थी मुंबई क्राइम ब्रांच से 9 साल के लिए Suspend किये गए, इंस्पेक्टर प्रदीप शर्मा की. आज 9 साल बाद प्रदीप शर्मा की उनकी वर्दी वापस मिल रही है और लखन भैय्या के फ़र्ज़ी एनकाउंटर में आया उनका नाम हट गया है.प्रदीप शर्मा की सबसे पहली पोस्टिंग मुंबई के माहिम पुलिस थाने में हुई थी. उनके काम को देखते हुए वहीं से उन्हें स्पेशल ब्रांच के लिए ट्रांसफ़र किया गया. दुनिया अभी भी शर्मा के पहले एनकाउंटर को याद करती है. उनकी बन्दूक से निकली पहली गोली लगी थी हिटमैन सुभाष मकड़वाला को. बात 1993 की है, जब शर्मा और उनके साथ सब-इंस्पेक्टर विजय सालसकर को इंस्पेक्टर शंकर काम्बले ने मकड़वाला को Neutralize करने के लिए भेजा. मकड़वाला ने भागने की कोशिश की लेकिन वो शर्मा की 9 mm की Carbine से बच नहीं पाया.
3 साल तक एनकाउंटर स्पेशलिस्ट का नाम कमा चुके शर्मा की वर्दी पर पहला सवाल 1996 पर आया, जब उनका नाम अंडरवर्ल्ड से जुड़ा और उसी साल उन्हें चन्दन चौकी भेज दिया गया, उसके बाद भी 2002 के घाटकोपर ब्लास्ट में उनका नाम आया. 2007 में उन्हें धारावी पुलिस स्टेशन भेज दिया गया और उसके बाद फ़ेक एनकाउंटर के केस में सेवा से निष्काषित.
लेकिन 9 साल बाद प्रदीप शर्मा की वर्दी से कुछ दाग धुल गए हैं और फ़ोर्स में उनकी फिर से वापसी हो रही है. 55 साल की उम्र में इस एनकाउंटर स्पेशलिस्ट की ये दूसरी शुरुआत होगी. 

तपती गर्मी में इस महल में बिना पंखें के लगने लगी है सर्दी

जयपुर का आलिशान हवामहल महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने बनवाई थी। इसकी खास बात यह है कि यहां पर भीषण गर्मी के मौसम में भी ठंड़ी हवा लगती है। यहां पर हर तरफ हवा के लिए वेंटिलेशन का इंतजाम किया गया है। इसी कारण इस महल का नाम हवा महल रखा गया था।इस महल का निर्माण खास रानियों की सुविधाओं के लिए करवाया गया था। इमारत के हर तरफ झरोखें इसलिए रखें गए थे ताकि रानियों को निकलने वाले जलूस को देखने में सुविधा रहे। वह आसानी से हर आयोजन के देख सकें। हवामहल अपनी खासियत के कारण दुनिया भर में मशहूर है। इस इमारत में आनंदपोल और चांदपोल नाम के दो दरवाजे हैं। हवामहल में गर्मी के मौसम में भी पंखे की जरूरत नहीं पड़ती।

भारत के मदरसों में क्या पढ़ाया जाता है-
निम्न पाठ्यक्रमों से स्पश्ट है कि मुसलमान बच्चों को किस प्रकार की षिक्षा, मदरसों और मख्तबों में दी जाती है। उनके मस्तिश्क में काफिरों (हिन्दुओं) के विरुद्ध ज़हर भर दिया जाता है तथा उन्हें उनसे जिहाद करने के लिए प्रेरित किया जाता है। क्या मदरसों से निकले बच्चे सच्चे देषभक्तबन सकते हैं? क्या इन मदरसों से पढ़े मुसलमान हिन्दुओं के साथ सह-अस्तित्वकी भावना रख सकते हैं ?दारुल उलूम देवबंद तथा भारत मेंइससे जुड़े अन्य मदरसों में आज भी हनफीफिक (कानून) की शिक्षा दी जाती है। इसकी अधिकांश पुस्तकें पाँच सौ साल से अधिक पुरानी हैं, कुछ ऐसी भी हैं जोएक हजार साल पहले लिखी गईं। इनको मध्यकालीन हनफी उलेमाओं द्वारा विश्लेषण की गई तफसीर को आज तक इन मदरसों में पढ़ाया जाता है। हनफी फिक की विशेष पुस्तक जो देवबंद और अधिकांश दूसरे उच्च स्तरीय मदरसों में पढ़ायी जाती है, हिदाया के चार खण्ड हैं जो 12वीं शताब्दी में केन्द्रीय हनफी फिक ‘‘शेख बुरहानुद्दीन अबुल हसन अली अल मारगिनानी’’ ने लिखा था (जन्म 1117 ई.)इन हिदाया के खण्डों में अनेक विषय हैं जिनमें इस्लाम के अनुयायियों तथाकाफिरों के साथ कानून लगाने का विस्तृत वर्णन है।मदरसों की पुस्तकों में पढ़ाए जाने वाले कुछ अंश -1. अल्लाह को पूज, वतन को ना पूज (पृ.68, मनुहाजू अलहरव्यातू-भाग-2)2. ऐ खुदा हम तेरी इबादत करते हैं और शुक्र करते हैं, किसी दूसरे खुदा की इबादत नहीं करते। (पृ. 70, मनुहाजू अलहरव्यातू, भाग-2)3. अरब के लोग अक्सर मिट्टी और पत्थर की मूर्तियां बनाकर उन्हें पूजते थे। लड़कियों को पैदा होते उन्हें मार डालते, हज़ारों गुनाह किया करते, धीरे-धीरे लोग इस्लाम को मानने लगे। उनको समझाया गया कि आप बुतों की पूजा क्यों करते हो। खुदा एक है उसकी इबादत करो (पृ. 16, बेदीनी)4. हर एक मुसलमान को चाहिए कि वहखुदा के रास्ते पर ही चले। (पृ. 37, बेदीनी)5. आपने फरमाया कि अगर तुम मुझे सच्चा समझते हो तो खुदा एक है। इसके सिवा कोई इबादत के लायक नहीं है। जो नहीं मानता वह जूतियों की पूजा करते हैं और सब काफिर हैं। तुम लोग अल्लाह पर ईमान लाओ वरना दोज़ख में जाओगे (पृ. 34, रसूल अरबी)6. कुछ कौमें गाय के गोबर और पेशाब को पवित्र मानती हैं। गोबर से चैका देती हैं। हमारे नज़दीक इसका पेशाब और गोबर दोनों नापाक हैं। कपड़े या और चीज़ की दरमभर जगह पर पड़ जाए तो वह पलीद हो जाती है (पृ. 39, उर्दू की दूसरी किताब)7. बाज़ लोग गाय की बहुत ताजीम (इज्जत) करते हैं। इसका नाम लेना हो तो अदब का लिहाज करके ‘गोमाता’ कहते हैं। इतना ही नहीं बल्कि उसके सामने माथा भी टेकते हैं और उसे पूजते हैं। हमारे मजहब में यह दुरुस्थ नहीं है क्योंकि यह चीज़ खुदा ने हमारे आराम केलिए बनायी हैं। इतना ही काफी है कि हम उसे अच्छी हाल में रखें। आराम पाएं, यह नहीं कि उसकी ऐसी इज्ज़त करें और पूजें। (पृ 41, उर्दू की दूसरी किताब)8. हिन्दुस्तान में करोड़ों बुतों की पूजा होती थी - किस कदर शर्म की बात है। बदन के नापाक हिस्सों - लिंग को भी पूजा जाता था। हर शहर में अलग-अलग हुकूमत, लूटमार, झगड़े-फसाद थे। दुनिया को उस समय सच्चे रहबर की ज़रूरत थी। हुज़ूर हलिया वस्लम (पृ. 32, तारीख इस्लाम, प्रथम भाग)9. शहर मक्का यहाँ तक कि खाना काबा के भी जो खास इबादत का मकाम है औरबड़ा मुकद्दस घर है, मिट्टी और पत्थर की मूर्ति जिन्हें बुत कहते हैं, रखी गईं और उनकी पूजा होने लगी। इस हालत में अल्लाहताला ने अपने फजलवा कर्म से हजरत इस्माइल हलिया इस्लाम के घराने में हमारे रसूल करीम अल्लाह वलिया वस्लम को पैदा किया। जिनकी पाक तालीम की बदौलत दुनिया के बड़े हिस्से से बुतपरस्ती का नामोनिशान बिल्कुल मिट गया और सिर्फ खुदा की ही परस्ती होने लगी। (पृ. 4-5, बे-दीनी)10. सवाल: जो लोग खुदाताला के सिवा और किसी की पूजा करते हैं या दो-तीन खुदा की पूजा करते हैं, उन्हें क्या कहते हैं ?जवाब: ऐसे लोगों को काफिर मुशरफ कहते हैं।सवाल: मुशरफ बख्शे जाएंगे कि नहीं ?जवाब: मुशरफों की बक्शीश नहीं होगी। वह हमेशा तकलीफ (मुसीबत) में रहेंगेसवाल: क्या यह कह सकते हैं कि हिन्दुओं के पेशवा जैसे कृष्ण जी, रामचन्द्र जी वगैरह खुदा के पैगम्बर थे ?जवाब: नहीं कह सकते - क्योंकि पैगम्बरी का खास ओहदा है जो खुदा की तरफ से खास बंदों को अता फरमाया जाता था। हिन्दुओं या अन्य कौमों के पेशवाओं के मुतालिक हम ज़्यादा से ज़्यादा इस कदर कह सकते हैं कि अगर उनके अमान दुरुस्त हों और उसकी तालीम आसमानी तालीम के खिलाफ न हों तो मुमकिन हैं कि वे नबी हैं मगर ये कहना अटकल का तीर है। (पृ. 12, तालीम इस्लामका हिस्सा - 4)कुर्बानी1. प्रश्न: क्या मुस्लिम गाय की इबादत करता है ?उत्तर: नहीं। वह खुदा की इबादत करता है। गाय एक मख्लूक, अल्लाह इसका मालिक है। इबादत खालिक के लिए है कि ना कि मख्लूख के लिए। हर चीज़ में फायदा है। पानी में फायदा है, हवा में फायदा है, मिट्टी में फायदा है। क्या तुम इन सबकी इबादत करोगे ? नहीं - हम सिर्फ खुदा की इबादत करते हैं। (पृ. 78, मनुहाजू अलहरव्यातू, भाग-2)2. मेरी वालदा ने एक मोटी गाय ज़बे करने के लिए खरीदी थी और कहा कि इसमें सात हिस्से हैं, एक मेरा, एक तुम्हारे वालदा का, एक तुम्हारा और चार हिस्से तुम्हारे दो-भाइयों और दो-बहनों के। (पृ. 37, अल्लकरात अलअषदत भाग-2)3. कुर्बानी बच्चे, बालिक मुसलमान - मर्द व औरत, पर कुर्बानी वर्जित है। एक आदमी एक बकरा, सात बकरे,,सात आदमियों की तरफ से, एक गाय याएक और कुर्बानी चाहिए। बकरा एक साल, गाय दो साल की, और ऊँट पाँच साल का, सब ऐबों से पाक होकर इनकी कुर्बानी जायज़ है। कुर्बानी करने वाला इसका गोश्त खुद भी खाए और अजीज़ों और दोस्तांे को भी खिलाए, खैरात भी करे, बेहतर तो यह है कि एक तिहाई गोश्त खैरात करे। (पृ. 22-23, छत्तीसगढ़ मदरसा बोर्ड, रायपुर,दीनियात कक्षा-4)खुदा सब चीज़ों को पैदा करने वाला अच्छी तरह से जान लो कि ‘‘अल्लाह’’ ने तुमको मिट्टी से बनाया, इसकी कुदरतबहुत बड़ी है, देखो अल्लाह ने कैसे बड़े पहाड़ पैदा किए और समुद्र भी कैसे पैदाकिए। (पृ. 84, मनुहाजू अलहरव्यातू-भाग-2)यह ज़मीन, आसमान, सूरज, चाँद-सितारों को अल्लाह ने बनाया। अल्लाहताला एक है, बहुत नहीं। अल्लाहताला मुसलमान होने और बुरी आदतों से बचने मंे राज़ी होता है। वह काफिरों से कभी राज़ी नहीं होता। इस्लाम मज़हब तमाम मज़हबों से पाक, अच्छा और सच्चा मज़हब है। (पृ. 4-7, नूरी तालीम) अल्लाह एक है, उसका कोई शरीक नहीं, उसने ज़मीन, आसमान, चाँद, सूरज, सितारे, दरिया, पहाड़, दरख्त, इंसान, हैवान, फरिश्ते और इसी प्रकार दूसरी तमाम चीज़ों को पैदा किया।जिहाद1. आखिर अल्लाहमियां ने हुजू़र को हुक्म दिया कि दुश्मनों से लड़ाई करो।ऐसी लड़ाइयों को ‘जिहाद’ कहते हैं। (पृ. 69, रसूल अरबी)2. बादशाहों के नाम हुज़ूर ने खत लिखे जिसमें लिखा था कि तुम मुसलमान हो जाओ और अपनी रियाया को भी मुसलमान बनाओ वरना तुम पर अज़ाब आएगा। जिन्होंने खत को फाड़ कर फेंक दिया और गुस्ताखी की तो सल्तनत ही बरबाद हो जाएगी। (पृ. 106, रसूल अरबी)3. हमें अच्छी तरह से मालूम है कि सब बुराइयों की जड़ और हर किस्म के फितना, फसाद, जु़ल्म व ज़्यादती इंसानों की अल्लाह से बगावत के कारण है। हम यह जानते हैं कि यह ज़िम्मेदारीमुसलमानों पर आयद होती है। (पृ. 124, तारीख इस्लाम प्रथम भाग)4. आप में से बहुत से लोग सोचते होंगे कि हम लोग मदरसे के छोटे लड़के हैं - हम क्या कर सकते हैं। खुद को करीम, सलीम, कली, हलिया, वसलम ने भी कमसिन (छोटी आयु) में दुनिया को संभाललिया। हम भी बच्चे मिलकर बैठें। इंशाअल्लाह दुनिया की रहनुमाई ऐसे पाक हाथों मंे होगी जो तमाम खराबियों का नामोनिशां मिटा दे। (पृ. 125-126, तारीख इस्लाम, प्रथम भाग)इस्लाम1. जब इस्लामी हुकूमत हुआ करती थी और हिम्मतें बुलंद थीं तो नौजवान ‘जिहाद’ करने और मुल्क फतह करने का रियावतमंद हुआ करता था। कोई हुकूमत की बुनियाद कायम करता या शहादत की मौतहासिल करता (पृ. 51, अल्लकरात अलअशदत भाग-2)2. जन्नत ऐसी जगह है जहाँ पानी, दूध और शहद के दरिया हैं। इनसे नहरें निकलती हैं। जन्नत की औरतें इतनी खूबसरत हैं यदि उनमें से कोई औरत ज़मीनपर झाँके तो सूरज की रोशनी मिट जाए। (पृ. 9, नूरी तालीम)3. जो लोग जन्नत में जाएंगे, सदातंदरुस्त रहेंगे और हमेशा जिंदा रहेंगे (पृ. 10, नूरी तालीम)4. सब अपने अमाल (कर्म) के हिसाबसे जन्नत और दोज़ख में भेज दिए जाएंगे, जो मुसलमान अपने गुनाहों की वजह से दोज़ख में गिर पड़ेंगे, हमारे पैगम्बर उनकी सिफारिश करेंगे और दूसरे पैगम्बर गुनाहगारों की सिफारिश करेंगे और सारे मुसलमान जन्नत में चले जाएंगे और सभी काफिर दोज़ख में जाएंगे (पृ. 12, तलकीन ज़दीद)5. कब्र में भी सवाल-जवाब होंगे। मोमिन जवाब देगा - अल्लाह मेरारब है, इस्लाम मेरा दीन है। काफिर जवाब नहीं दे सकेगा और इसलिए कब्र मेंकाफिरों और गुनाहगारों का अंजाम होगा। (पृ. 13, तलकीन ज़दीद)6. वह कयामत के दिन जिं़दा करके सबके अमाल का हिसाब दे देगा और नेकी व बदी का बदला लेगा। (पृ. 26, इस्लामी तालिमात, पंजम के लिए)7. रसूल-ए-खुदा जब किसी के घर में बच्चा होता है तो सबसे पहले उसे आपकी खिदमत में पेश किया जाता है। आप बच्चे के सिर पर हाथ फेरते, खजूर चबाकर लुआब (थूक) बच्चे के मुंह में डालते और उसके लिए बरकत की दुआ फरमाते(पृ. 13, हमारी किताब, कक्षा-4)8. तुममें बेहतर वह शख्स है जो कुरआन सीखे और दूसरों को सिखाए। (पृ. 18, हमारी किताब-2, कक्षा-3)9. हमारे प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद सली अल्लाह हलिया वस्लम को जो लोग मानते गए वह मोमिन कहलाए। बाकीजो बात न मानने वाले काफिर कहलाए। अरबके सारे लोग मुसलमान हो गए। सबका दीन इस्लाम हो गया (पृ. 16-17, हमारी किताब-2, कक्षा-3)10. सवाल: कुफ्र और शरीक किसे कहते हैं ?जवाब: जिन चीज़ों पर ईमान लाना ज़रूरी है उनमें से किसी एक बात को भी नमानना कुफ्र है। खुदाताला की किताबोंको न मानना कुफ्र है। (पृ. 19, तालीम इस्लाम-4)सवाल: यदि गुनहगार आदमी बगैर तौबा किए मर जाए तो जन्नत में जाएगा या नहीं?जवाब: हाँ। सिवाए काफिर और मुशरक के बाकि तमाम गुनाहगार अपने गुनाहों की सज़ा पाकर जन्नत जाएंगे। काफिर कभी भी जन्नत नहीं जाएंगे (पृ. 25, तालीम, भाग-4) काफिर1. पैगम्बर मोहम्मद ने उस्तनतुनिया के तरफ कूच किया और इसके लिए ज़बरदस्त तैयारी की क्योंकि यह खुदा का फरमान है। काफिरों से मुकाबला करने के लिए तुम जो भी ताकत जमा कर सकते हो, तैयार करो ( पृ. 62, अल्लकरात अलअशदत भाग-2)2. इस्लाम को न मानने वाले को काफिर कहते हैं। मुसलमानों को अल्लाहताला मरने के बाद कब्र में आराम देगा और कयामत में हिसाब-किताब के बाद जन्नत में जगह इनायत फरमाएगा। काफिर अगरचे हर दुनिया में बड़े आराम से रहता है पर हकीकत में वह इज़्ज़त की जिन्दगी नहीं, और मरने के बाद उसे हमेशा दोज़ख की आग में जलाया जाएगा। (पृ-8, नूरी तालीम)3. दोज़ख एक मकान है जिसमें काफिरों और गुनाहगारों के लिए आग भड़कायी गई है। हर तरफ आग ही आग होगी। गंदगी और कीचड़ होगी। (पृ. 11, नूरी तालीम)।4. दीन इस्लाम को न मानना या दीनकी जो बातें यकीन से साबित हैं इनमें से किसी एक का भी इंकार करना, ‘कुफ्र’ है। कुफ्र व शरक पर मरने वाले हमेशा दोज़ख में रहंेगे। जन्नत एक नुशानी, रूहानी और लतीफ जिस्मों का खूबसूरत आलम है, निहायत पाकिज़ा जहाँ आराम और राहत के जिस्म और जान के सारी लज्जतेंहासिल जैसे बागात, महलात, नहरें, हूरंे(पृ. 5, तलकीन ज़दीद)5. दोज़ख एक ऐसा जहान है जिसमें दुःख, दर्द, रंज व गम के सभी अश्वाब मोहिया होंगे और हर किस्म के अज़ाम मौजूद नहीं होंगे। खुदा ने उसको काफिरों और गुनाहगारों के लिए पैदा किया है और काफिर उसमें हमेशा रहेगा। (पृ. 6, तलकीन ज़दीद)6. वह बड़ा गुनाह करता है जो हिन्दुओं और बड़ी बदऐतों के मेले में जाता है। काफिरों की दीवाली, दशहरा मनाना या इस मौके पर उनके साथ रहना यह सब गुनाह है। (पृ. 44, तलकीन ज़दीद)7. जो खुदा के अंजाम से डरते हैं, वह काफिर हैं। जो खुदा को सज़दा करते हैं, वह खुदा की रहमत के उम्मीदवार हैं। (पृ. 144, छत्तीसगढ़ मदरसा बोर्ड, दीनीयात कक्षा-2)8. सवाल: जो लोग खुदा ताला को नहीं मानते, उन्हें क्या कहते हैं ?जवाब: उन्हें काफिर कहते हैं। (तालीम इस्लाम)उपरिवर्णित पाठ्यक्रमों से स्पश्ट है कि मुसलमान बच्चों को किस प्रकार की षिक्षा, मदरसों और मख्तबों में दी जाती है। उनके मस्तिश्क में काफिरों (हिन्दुओं) के विरुद्ध ज़हर भर दिया जाता है तथा उन्हें उनसे जिहाद करने के लिए प्रेरित किया जाता है। क्या मदरसों से निकले बच्चे सच्चे देषभक्त बन सकते हैं? क्या इन मदरसों से पढ़े मुसलमान हिन्दुओं के साथ सह-अस्तित्व की भावना रख सकते हैं?
कुमार अवधेश सिंह

mediya


3. दे दी हमें आजादी बिना खड्ग बिना ढाल ।
4. ए मेरे वतन के लोगो सुनकर नेहरू रो दिए थे।
5. अकबर महान था ।
6. मजहब नही सिखाता आपस मे बैर करना ।
7. हिन्दू मुस्लिम इसाई आपस मे है भाई भाई ।
8. गंगा- जमना तहजीब ।
9. गांधी अहिंसा के पुजारी थे ।
10. नेहरू पंडित था ।
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हम तो बेवकूफ बन गए नई पीढ़ी गुमराह न हो ।
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Jitendra Pratap Singh
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पति
जब मै इतना ही खराब था तो क्यों भगवान् से अगले जनम के लिए मांग रही हो ?
पत्नि तुनक कर बोली
इतना सुधारने के बाद , किसी और को क्यों दूं ?
Jitendra Pratap Singh
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हिन्दू दुनिया का वो मूर्ख प्राणी है जो अपने धार्मिक प्रतीकों का खुद उपहास उड़ा कर मज़े लेता है और दूसरों को भी ऐसा करने का मौका देता है।

Thursday, 17 August 2017

1_लाख_निशुल्क_डिलीवरी कराने बाली #गरीबो_की_मसीहाडॉ भक्ति यादव का
15 अगस्त को #परलोक_गमन हुआ (पुरानी पोस्ट फोटो)
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vyang
सोचने वाली बात है, स्त्री सब सह लेती है..
और पुरुष उस स्त्री को सह लेता है..
तो ज्यादा महान कौन हुआ???

राहुल गांधी का सुकन्या देवी के साथ बलात्कार

चार साल पहले की पोस्ट है, इसमे राहुल गांधी का सुकन्या देवी के साथ बलात्कार का विधिवत घटनाक्रम दर्शाया गया है। पोस्ट लंबी जरूर है, परंतु कांटछांट करने से पूरे तथ्यों से अवगत नही कराया जा सकता था। इसलिए थोड़ा सा समय निकालकर पूरी गंभीरता से पढ़ने का प्रयास करे।
सब जानते है कि 2019 में लोकसभा के चुनाव होने वाले है। चूँकि विदेशी होने के कारण सोनिया भारत की प्रधानमंत्री नहीं बन सकती, इसलिए सोनिया और उसके ख़रीदे हुए खुशामदी येन केन प्रकारेण राहुल को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बिठाना चाहते हैं, वैसे तो कांग्रेसी हिन्दू संतों और नेताओं में दुर्गुण निकालने में कोई कसर नहीं छोड़ते, लेकिन राहुल गांधी द्वारा किये गए सामूहिक बलात्कार की घटना को दबा लेते है इस लेख में राहुल गंदी के शराफत का भंडाफोड़ किया जा रहा है, जो विभिन्न अखबारों और वेबसाइटों पर आधारित और प्रमाणित है। इस लेख में प्रारम्भ से अंत तक पूरी घटना देने का प्रयास किया गया है।
1-बलात्कार की पूरी घटना
अमेठी को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। चूँकि सुकन्या के पिता बलराम सिंह भी इंदिरा के समय से ही कांग्रेस के निष्ठावान कार्यकर्ता थे। और उन दिनों सोनिया राहुल को राजनीति के मैदान में उतार चुकी थी। उस समय सुकन्या की आयु 24 साल थी। और युवक होने के कारण सुकन्या राहुल को अपना आदर्श मानती थी। सुकन्या पिछले दो साल से राहुल से मिलने का मौक़ा देख रही थी। जब उसे पता चला कि राहुल अपने कुछ दोस्तों के साथ अमेठी के वी.आई.पी गेस्टहाउस में रुकने वाला है। इसलिए वह राहुल से मिलने गेस्ट हॉउस चली गयी। लेकिन वहाँ के सुरक्षा अधिकारी ने केवल एक ही व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति दी। इसलिए सुकन्या अकेली ही राहुल के पास चली गयी। यह 3 दिसम्बर सन 2006 की बात है उस समय रात के 9 बज गए थे। और काफी सर्दी हो रही थी। सुकन्या जब राहुल के कमरे के अंदर गयी तो उसे बड़ा धक्का लगा क्योंकि राहुल अपने दोस्तों के साथ शराब पी रहा था, वहाँ कुल सात युवक थे, जिनमें तीन ब्रिटिश दो इटालियन और एक अज्ञात युवक था, और जिनके साथ राहुल शराब पी रहे थे। तभी राहुल ने सुकन्या से भी शराब पीने का प्रस्ताव रखा लेकिन सुकन्या ने राहुल का प्रस्ताव ठुकरा दिया, इससे नाराज होकर राहुल और उसके सभी दोस्तों ने मिल कर बारी बारी सुकन्या से बलात्कार किया। उस समय राहुल और उसके दोस्त शराब के नशे में धुत थे। सुकन्या चिल्लाती रही लेकिन किसी ने उसकी आवाज पर और फरियाद पर कोई ध्यान नहीं दिया। और जब सुकन्या जोर जोर से रोने लगी तो राहुल ने उसे चुप होने के लिए पचास हजार रुपया देने का लालच भी दिया। साथ ही यह धमकी भी दी कि यदि तुम यह बात किसी को बताओगी तो तुम्हारे पूरे परिवार को मार दिया जायेगा। और यह कहकर सुकन्या को गेस्ट हॉउस से बाहर भगा दिया। लेकिन जब सुकन्या अपने घर जा रही थी, तो रास्ते में ही उसे कांग्रेसियों ने पकड़ लिया और घर ले जाकर उसके पिता को अपना मुंह बंद रखने की धमकी देने लगे। इस पर सुकन्या के पिता ने पहले तो सुकन्या को काफी पीटा, बाद में सुकन्या की माँ सुमित्रा देवी ने सुकन्या को तसल्ली देकर कहा कि मैं अपराधियों को सजा दिलाकर ही रहूंगी।
इसलिए दूसरे दिन सवेरे ही सुकन्या की माँ अमेठी थाने रिपोर्ट लिखवाने गयी तो थानेदार ने उनकी रिपोर्ट लिखने से मना कर दिया और जाँच करने का भरोसा देकर घर भेज दिया। लेकिन जब काफी दिन हो जाने पर भी पुलिस ने कुछ नहीं किया तो, विवश होकर सुमित्रा देवी ने 27 दिसंबर 2006 को अपने घर एक प्रेस कांफ्रेंस बुलवाई, लेकिन उसमे गिने चुने लोग ही आये थे। फिर भी इस कांफ्रेंस में सुकन्या ने पत्रकारों के सामने सारी घटना सुना दी, कि शायद इससे उसे न्याय मिल जाए। और अपराधी राहुल को उचित सजा देने में आसानी हो सके। लेकिन इससे भी कुछ नही हुआ, क्योंकि मीडिया को सोनिया ने पहले ही खरीद रखा था।
इसके बाद निराश होकर सुमित्रा देवी सुकन्या के साथ दिल्ली चली गयी वहाँ रहकर दो हफ्ते तक राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश से मिलने का प्रयत्न करती रही, लेकिन वहाँ भी उनको मिलने की अनुमति नही दी गयी, और तब से सुकन्या और सुमित्रा देवी ऐसे गायब हो गए कि किसी को उनके बारे में कोई जानकारी नहीं थी। कि वह कहाँ छुपे हैं? ज़िंदा है या मर गए हैं, कोई नहीं जानता।
मीडिया को बलात्कार की खबर थी। लोगों को पहले से ही पता था कि राहुल गांधी अमेठी में रुका हुआ है। इसलिए कई अखबारो और चैनलो के संवाददाता राहुल गांधी को घेरे हुए थे।तभी सवेरे सवेरे उनको लोगों के द्वारा यह चौंकाने वाली खबर मिली कि राहुल गांधी ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक कांग्रेसी की लड़की से सामूहिक बलात्कार किया है। यह खबर जंगल की आग की तरह सारे देश में फ़ैल गयी। उस समय अमेठी में जिन अखबारों और टी.वी चैनलों के संवाददाता मौजूद थे उनके नाम इस प्रकार हैं।
a) IBN7
b) Dainik Jagran, Dainik Bhaskar( )
c) Punjab Kesari ( )
d) Hindusthan Times (Hindi)
e) Times of India & Times now
f) NDTV (Hindi)
g) Aaj Tak
h) Star News
i) Nav bharath times
यद्यपि यह खबर 4 दिसंबर सन 2006 को उपस्थित सभी रिपोर्टरों ने अपने अखबारों और चैनलों में प्रसारित कर दी थी। लेकिन उनके मालिकों ने उनपर दवाब डाला कि वह इस खबर को महत्त्व नहीं दें। इसका नतीजा यह हुआ कि राहुल द्वारा किये गए सामूहिक बलात्कार की घटना को मीडिया ने अधिक तूल नहीं दिया। और उसकी जगह अन्य खबरों को प्रसारित करने लगे।
http://intellibriefs.blogspot.in/…/rahul-gandhi-involved-in…
3-सुकन्या के साथ अन्याय
सुकन्या जैसे तैसे रेस्ट हॉउस से भागी और घर आकर अपनी माँ सुमित्रा को सारी घटना बतायी। सुमित्रा देवी बिना किसी देर के सुकन्या के साथ पुलिस थाने गयी ताकि वहाँ शिकायत दर्ज करवा सके। लेकिन वहाँ मौजूद थाना इंचार्ज ने शिकायत दर्ज करने से इंकार कर दिया। इसमें एक दिन बर्बाद हो गया। तब दूसरे दिन सुमित्रा सुकन्या को साथ में लेकर दिल्ली गयी ताकि सोनिया गांधी से न्याय मिल सके। लेकिन सोनिया ने उनको घर से भगा दिया। निराश और परेशान होकर दोनो दिल्ली स्थित मानवाधिकार आयोग के दफ्तर में गए, कि शायद वहाँ उनकी बात सुनी जाये। परन्तु आयोग ने उनको "अम्बिका सोनी" और "सलमान खुर्शीद" के पास भेज दिया। लेकिन जब वहाँ से भी निराशा ही हाथ में आयी तो दोनो “नॅशनल कमीशन ऑफ़ वूमेन ( NATIONAL COMMISION OF WOMEN ) के दफ्तर गए जिसकी अध्यक्षा (chair person) ”गिरिजा व्यास” थी।जिस समय यह माँ बेटी गिरजा व्यास से बात कर रही थी, तभी सलमान खुर्शीद ने गिरिजा को फोन से कहा कि सुमित्रा देवी अपनी बेटी के साथ देह व्यापार का धंधा करती है (Sukanya devi with her mother Sumitra devi were running flesh trade) यह सुनते ही गिरिजा ने दोनों को दफ्तर से बाहर निकाल दिया।
और वहाँ मौजूद कांग्रेसियों को इस बात की खबर मिली तो वह सुमित्रा और सुकन्या को जान से मारने की धमकी देने लगे। यही नही सोनिया के आदेश से कांग्रेसियों ने यू.पी सभी रास्तों पर इन दोनों की तलाशी करना शुरू कर दी, ताकि अगर यह दोनों यू.पी से भागने का प्रयत्न करें तो, इनको पकड़कर सोनिया के गुर्गों के हवाले कर दिया जा सके।
इसके आलावा कांग्रेस के मुख्यालय से अमेठी के लोगों को धमकी दी गयी यदि कोई इस घटना के बारे में मुंह खोलेगा तो उसका अंजाम ठीक नहीं होगा। इस धमकी का ही असर था कि मीडिया के जिस व्यक्ति ने इस घटना की रिपोर्ट की थी, वह लोग या तो गायब हो गए या उनको नौकरी से हाथ धोना पड़ा, उदाहरण के लिए सी.एन.एन (C.N.N.) और आई.बी.एन ( I.B.N.) के प्रबंधक श्री द्रुपद (Drupadh) को उनकी नौकरी से निकाल दिया गया। तब से सुमित्रा देवी और सुकन्या अज्ञातवास में ही रह रही थी। फिर भी लोगों की जानकारी के लिए सुकन्या का पता दिया जा रहा है।
Sukanya Devi
23-12 Medical Choke
Sanjay Gandhi Marg,
Amethi,
Raebareli, UP, INDIA
4-राहुल पर बलात्कार का मुकद्दमा
जब राहुल गांधी और उसके छह दोस्तों के द्वारा 3 दिसंबर 2006 को किये गए सामूहिक बलात्कार को पांच साल से अधिक हो गए तो लोग इस घटना को लगभग भूल गए थे। तभी मध्यप्रदेश के पूर्व विधायक ”अशोक समरीते” ने दिनांक 7 मार्च 2011 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में राहुल और उसके छह लोगों पर एक पिटीशन दायर कर दिया। समरीते के वकील विवेक तनखा ने अदालत में राहुल पर सामूहिक बलात्कार और पीड़ित लड़की को बंधक बनाकर रखने का आरोप लगाया (Mr Smrite, had alleged that on December 3, 2006 Rahul Gandhi and his six friends who were in Amethi, had wrongfully confined a girl and raped her.
और अदालत से अनुरोध किया कि वह सी बी आई (C .B .I ) को निर्देशित करे कि सुकन्या का पता करे। लेकिन अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में समरीते की पिटीशन को ख़ारिज कर दिया। उल्टे समरीते पर 50 लाख रुपये का हर्जाना भी ठोक दिया। साथ में सी.बी.आई को आदेश दिया कि वह दोबारा ठीक से जाँच करे।
यह खबर टाइम्स ऑफ़ इंडिया में 18 अक्तूबर 2012 में प्रकाशित हुई थी। इसके कारण यह मामला फिर से ठन्डे बस्ते में चला गया। हालाँकि समरीते ने अदालत से कहा कि अदालत ने उनकी पिटीशन को गलत ढंग से ख़ारिज किया है क्योंकि सी.बी.आई ने निष्पक्ष रूप से जाँच नहीं की।
5-राहुल को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
पचास लाख हर्जाना के आदेश के बाद समरीते ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटकाया, और 6 अप्रेल 2011 बुधवार को समरीते का केस जस्टिस वी.एस सिरपुरकर और जस्टिस टी.एस ठाकुर बेंच में गया। वहाँ से सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी और यू.पी सरकार को आदेश दिया कि वह चार हफ्ते के अंदर समरीते द्वारा लगाये आरोपों का जवाब अदालत के सामने प्रस्तुत करे समरीते ने सुप्रीम कोर्ट में भी अपना आरोप दुहराते हुए कहा कि राहुल गांधी ने सुकन्या और उसके माता पिता को बंधक बनाकर किसी गुप्त जगह पर रखा हुआ है। और अदालत पुलिस से कहे कि उनको खोजकर अदालत के सामने पेश करे ..
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http://www.petitiononline.com/petitions/rahulrap/signatures…
6-झूठा शपथ पत्र
सब जानते हैं कि राहुल गांधी दोगला, झूठा अपराधी है। लेकिन जब अदालत ने राहुल को चार हफ्ते में जवाब देने का आदेश दिया तो कांग्रेसियों ने राहुल को बचाने के लिये एक चाल चली।उन्होंने समरीते की पिटीशन के खिलाफ एक ”गजेन्द्रपाल सिंह” नामके व्यक्ति से एक पिटीशन दायर करवा दी। उसने अदालत के सामने कहा कि बलराम सिंह का रिश्तेदार है। उसने यह भी कहां कि जिस सुकन्या को बलात्कार पीड़ित बताया जा रहा है, उसका असली नाम ”कीर्ति सिंह” है। और पिता का नाम बलराम सिंह और माता का नाम “सुशीला” है। इसके बाद अमेठी के ही रहने वाले डी.जी.पी ने उस कीर्ति सिंह नाम की लड़की को अदालत के सामने पेश कर दिया। और कीर्ति सिंह ने शपथ पूर्वक बयां दिया कि न तो मेरे साथ किसी ने कभी बलात्कार किया था और न मेरे माता पिता को किसी ने कभी बंधक बना कर रखा था। कीर्ति ने यह भी कहा कि यह राहुल गांधी जैसे प्रतिष्ठित व्यक्ति को बदनाम करने के लिए किसी का षड्यंत्र है। जिसकी जाँच होनी चाहिए। कीर्ति द्वारा दिए गए बयान के आधार पर अदालत ने याचिकाकर्ता पर भारी लागत लगायी और अपनी ओर से एक हाई प्रोफाइल व्यक्तित्व को बदनाम करने के प्रयास का संज्ञान, सीबीआई जांच का आदेश दिया।
राहुल गांधी द्वारा किये गए सामूहिक बलात्कार पूरी और प्रमाणिक जानकारी पाठकों तक पहुंचाने के लिए कई वेबसाईट का सहारा लिया गया। क्योंकि अधिकांश साइटों को ब्लॉक कर दिया गया है। इस घटना से यह बात सिद्ध होती है कि सचमुच कानून अंधा होता है। और अदालत न्याय नही, फैसला करती जो अक्सर झूठे सबूतों के आधार पर किये जाते हैं।
जिनपर विश्वास करना बेकार है। हमें पूरा विश्वास है कि जब नरेंद्र मोदी प्रधान मंत्री बनेंगे तो राहुल गांधी जैसे बलात्कारी और धोखेबाज कांग्रेसियों को जेल की हवा खाना पड़ेगी।
आखिर में एक वीडियो दी गयी है जिसमे अमेठी का एक निवासी इस घटना के बारे में बता रहा है।
Sanjeev Tripathi