Friday, 24 June 2016

🚩प्रश्न - ‪#‎साधू‬-‪#‎संतो‬ के पास करोड़ो की संपत्ति है । साधू-संतो को इतनी संपत्ति की क्या जरुरत है? साधू को तो अपरिग्रही होना चाहिए ?
💥उत्तर : रोमन केथोलिक ‪#‎चर्च‬ का एक छोटा राज्य है जिसे वेटिकन बोलते है । अपने धर्म (‪#‎ईसाई‬) के प्रचार के लिए वे हर साल 171,600,000,000
डॉलर खर्च करते है । तो उनके पास कुल कितनी ‪#‎संपत्ति‬ होगी?
💥वेटिकन के किसी भी व्यक्ति को पता नहीं है कि उनके कितने व्यापार चलते है ।
💥रोम शहर में 33% इलेक्टोनिक, ‪#‎प्लास्टिक‬‪#‎एर‬ लाइन, ‪#‎केमिकल‬ और‪#‎इंजीनियरिंग‬ बिजनेस वेटिकन के हाथ में है ।
💥दुनिया में सबसे बड़े shares वेटिकन के पास है ।
💥‪#‎इटालियन‬ ‪#‎बैंकिंग‬ में उनकी बड़ी संपत्ति है और ‪#‎अमेरिका‬ एवं स्विस बेंको में उनकी बड़ी भारी deposits है ।
💥ज्यादा जानकारी के लिए पुस्तक पढाना जिसका नाम है ‪#‎VATICAN‬ EMPIRE
💥उनकी संपत्ति के आगे आपके भारत के साधुओं के करोड रुपये कोई मायना नहीं रखते ।
💥वे लोग खर्च करते है विश्व में धर्मान्तरण करके लोगों को अपनी ‪#‎संस्कृति‬, और ‪#‎धर्म‬से भ्रष्ट करने में और भारत के संत खर्च करते है लोगों को शान्ति देने में, उनकी स्वास्थ्य सेवाओं में, ‪#‎आदिवासियों‬ और गरीबों की सेवा में, ‪#‎प्राकृतिक‬ आपदा के समय पीडितों की सेवा में और अन्य लोकसेवा के कार्यों में ।
💥‪#‎प्राचीन‬ काल में ‪#‎ऋषियों‬ के पास इतनी संपत्ति होती थी, कि बड़े बड़े राजा जब आर्थिक संकट में आ जाते थे, तब उनसे लोन लेकर अपने राज्य की अर्थ व्यवस्था ठीक करते थे ।
💥कौत्स ब्राह्मण ने अपने गुरु वर्तन्तु को 14 करोड स्वर्ण मुद्रा गुरु दक्षिणा में दी थी ।
💥साधू संतो के पास संपत्ति नहीं होगी तो वे धर्म प्रचार का कार्य कैसे करेंगे 
💥प्राचीन काल में राज्य से धर्म प्रचार के लिए धन दिया जाता था । भगवान बुद्ध के प्रचार के लिए सम्राट अशोक जैसे राजाओं ने अपनी सारी संपत्ति लगा दी और आज के समय में सरकार मंदिरों व ‪#‎आश्रमो‬ की संपत्ति और आय को हड़प कर लेती है और उसे #चर्च एवं ‪#‎मस्जिदों‬ में खर्च करती है लेकिन ‪#‎हिंदू‬ धर्म के प्रचार के लिए पैसा खर्च नहीं करती ।
💥आम हिंदू समाज भी अपने परिवार के लिए ही सब धन खर्च करना जानता है, धर्म की सेवा के लिए 10% आय भी लगाता नहीं और लोगों के अपवित्र जीवन और उदासीनता के कारण भिक्षा वृत्ति भी अब संभव नहीं है ।
💥इसलिए ‪#‎आश्रमवासियों‬ के लिए भोजन बनाने के लिए भी संतों को व्यवस्था करनी पड़ती है । उनको व्यापारी मुफ्त में तो दाल, चावल, शक्कर, आदि नहीं देंगे ।
💥अपरिग्रह की बात सिर्फ हिंदू साधुओं के लिए ही सिखाई जाती है ।
💥‪#‎बिकाऊ‬ ‪#‎मीडिया‬ को हिंदू साधुओं की संपत्ति पर ही बार-बार स्टोरी बनाकर दिखाते है, ईसाई पादरिओ की नही जबकि उनके पास दुनिया में सबसे ज्यादा संपत्ति है और उसमें से 17 हजार करोड़ डॉलर हर साल #ईसाई ‪#‎धर्मांतरण‬ पर खर्च किया जाता है ।
जिसके बारे में आम लोगों को पता भी नहीं चलता ।  ...इसपर मीडिया चुप क्यों ? ..क्यों की मीडिया की ‪#‎चैनले‬ 90% ईसाई मिशनरियों द्वारा संचालित होती है इसलिए वो हमेशा हिन्दू संग़ठन और साधू-संतो को ही बदनाम करते रहते है ।
-डॉ.प्रेमजी

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