Saturday, 22 April 2017
केरल में सीपीएम-सीपीआई विरुद्ध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यह संघर्ष पुराना है। इसकी पार्श्वभूमि क्या है?
गत कुछ वर्षों मे इन घटनाओं में वृद्धि हुई है या इनमें कमी आई है?
क्या आपको लगता है कि यह वैचारिक लड़ाई है?
वामपंथी विचारधारा का प्रभाव दिन-ब-दिन कम होता जा रहा है। क्या ये हत्याएं वामपंथियों की निराशा का द्योतक है?
कम्युनिस्ट अपने पाशवी हमलों में बच्चों एवं स्त्रियों तक को नहीं छोड़ते, इस विषय में आप क्या विचार करते हैं?
रा.स्व. संघ का इन सभी हत्याओं की ओर देखने का दृष्टिकोण क्या है?
दिल्ली की वर्तमान सरकार संघ विचारों की है। अतः क्या इस मामले में सरकार ने कुछ हस्तक्षेप किया? और यदि नहीं किया हो तो भविष्य में न्याय प्राप्ति हेतु क्या कुछ योजना है?
पुलिस एवं न्यायपालिका इस विषय को किस प्रकार देखते हैं?
गत कुछ दिनों में केरल के अनेक युवकों ने ‘इसिस’ में प्रवेश किया है। क्या इसके पीछे माकपा का हाथ हो सकता है?
आतंकी साजिश को रोकने के लिए सतर्क हुई यूपी एटीएस, मदरसों और मस्जिदों पर बढ़ाई निगरानी
बिजनौर : आतंकी साजिश होने के शक में गुरुवार को छह राज्यों में हुए पुलिस के संयुक्त अभियान में 19-25 वर्ष के चार युवकों को गिरफ्तार किया गया है। जबकि आठ युवकों को हिरासत में लिया गया। गिरफ्तार किए गए युवकों पर कथित रूप से दिल्ली और यूपी में आतंकी हमले की साजिश के आरोप हैं। युवकों को हिरासत में लिए जाने के बाद यूपी पुलिस सतर्क हो गई। इसके साथ ही करीब 2000 मदरसों और मस्जिदों पर पुलिस ने निगरानी बढ़ा दी है। बिजनौर के पुलिस अधीक्षक अजय सहनी ने बताया कि शुक्रवार को पूछताछ के बाद इन युवकों को रिहा कर दिया गया, जबकि एक स्थानीय मस्जिद के इमाम मोहम्मद फैजान को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस इस पट्टी के मदरसों और मस्जिदों पर निगाह रख रही है। पुलिस ने हिरासत में लिए गए छात्रों को भटका हुआ बताया। ये अलग-अलग मदरसों में पढ़ते थे।
जिन 6 युवकों को यूपी एटीएस ने गिरफ्तार किया था, उन सभी से पूछताछ करने के बाद यूपी एटीएस ने नोएडा के किसी अज्ञात स्थान पर छोड़ दिया। बिजनौर के पुलिस अधीक्षक अजय सहनी ने बताया कि शुक्रवार को पूछताछ के बाद इन युवकों को रिहा कर दिया गया जबकि एक स्थानीय मस्जिद के इमाम मोहम्मद फैजान को गिरफ्तार कर लिया गया है। ये गिरफ्तारियां बिजनौर, महाराष्ट्र के मुंब्रा, पंजाब के जालंधर और बिहार के पूर्वी चंपारण से हुई थीं। इनमें से अधिकांश मदरसों में पढ़ते हैं।
पुलिस अधीक्षक अजय सहनी ने बताया कि पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां बिजनौर और इसके आसपास के इलाकों में धार्मिक संस्थानों पर कड़ी नजर रखेगी। हम इन संस्थानों में जाने वाले इलाके के जिम्मेदार नागिरकों से भी सहायता मांग रहे हैं, ताकि युवकों को भटकने से बचाया जा सके। इसके आलावा अल्पसंख्यक विभाग के डेटा के अनुसार इस इलाके में करीब 500 मदरसे हैं, जिनमें 15 डिग्री लेवल के हैं और 55 हाई स्कूल लेवल के हैं। इलाके के 1,500 मस्जिदों पर पुलिस नजर रख रही है।
Friday, 21 April 2017
ऋग्वेद के अनुसार जो अनाज खेतों
मे पैदा होता है, उसका बंटवारा तो देखिए...
1- जमीन से चार अंगुल भूमि का,
2- गेहूं के बाली के नीचे का पशुओं का,
3- पहली फसल की पहली बाली अग्नि की,
4- बाली से गेहूं अलग करने पर मूठ्ठी
भर दाना पंछियो का,
5- गेहूं का आटा बनाने पर मुट्ठी भर आटा चीटियों का,
6- चुटकी भर गुथा आटा मछलियों का,
7- फिर उस आटे की पहली रोटी गौमाता की,
8- पहली थाली घर के बुज़ुर्ग़ो की
9- फिर हमारी थाली,
10- आखिरी रोटी कुत्ते की,
मे पैदा होता है, उसका बंटवारा तो देखिए...
1- जमीन से चार अंगुल भूमि का,
2- गेहूं के बाली के नीचे का पशुओं का,
3- पहली फसल की पहली बाली अग्नि की,
4- बाली से गेहूं अलग करने पर मूठ्ठी
भर दाना पंछियो का,
5- गेहूं का आटा बनाने पर मुट्ठी भर आटा चीटियों का,
6- चुटकी भर गुथा आटा मछलियों का,
7- फिर उस आटे की पहली रोटी गौमाता की,
8- पहली थाली घर के बुज़ुर्ग़ो की
9- फिर हमारी थाली,
10- आखिरी रोटी कुत्ते की,
हमें गर्व है कि हम इस सनातन संस्कृति का हिस्सा हैं,जो जीव मात्र के प्रति संवेदनशील होना सिखाती हैं ।🕉
आभार--Ashtha R Nad
भारत के इस्लामी जेहादियों तथा पाकिस्तानियों ने फिल्मो तथा संगीत के जरिये भारत के समाज तथा हिन्दुओ के साथ क्या क्या किया .कभी सोचा है आप सबने !!!
#कुमार_शानू_उदित_अभिजीत_शान_सुखविंदर__सोनू_निगम_अरिजीत
आपने कभी ध्यान दिया है कि फ़िल्मों मे 92 के बाद से गायकों का करियर ग्राफ़ कैसा रहा है ?? याद है कुमार शानू जो करियर मे पीक पर चढ़कर अचानक ही , धुँध में खो गये । फिर आये अभिजीत, जिन्हे टाप पर पहुँचकर अचानक ही काम मिलना बद हो गया । उदित नारायण भी उदय होकर समय से पहले अस्त हो गये। उसके बाद सुखविंदर अपनी धमाकेदार आवाज से फलक पर छा गये और फिर अचानक ही ग्रहण लग गया । उसके बाद आये शान, और शान से बुलंदियों को छूने के अचानक ही कब नीचे आये पता ही नही लगा। फिर सोनू निगम कब काम मिलना बंद हुआ, लोग समझ ही नही पाये । उसके बाद अरिजीत जिनकी मखमली आवाज ने दिलो मे जगह बनानी शुरू ही की कि सलमान ने उनहे पब्लिकली माफ़ी माँगने के बाद भी 'जग घूमया' जैसा गाना गवाया नही और धीरे धीरे उसका करियर खतम करने की साज़िश चल रही है। सारे ही गायकों को असमय बाहर का रास्ता दिखा दिया गया ।
इसके उल्टा पहले चीख़ कर गाने वाले, क़व्वाली गायक नुसरत फ़तेह अली खान क़व्वाली गाने के लिये बुलाया जाता है, और पाकिस्तानी गायकों के लिये दरवाज़े खोल दिये जाते हैं। उसके बाद राहत फ़तेह अली खान आते हैं और बॉलीवुड में उन्हे लगातार काम मिलने लगता ह और बॉलीवुड की वजह से सुपरहिट हो जाते है। फिर नये स्टाईल के नाम पर आतिफ़ असलम आते हैं जिनकी आवाज को ट्यूनर मे डाले बग़ैर कोइ गाना नही निकलता है, उन्हे एक के बाद एक अच्छे गाने मिलने लगते हैं । अली जाफ़र जैसे औसत गायक को भी काम मिलने मे कोई दिक़्क़त नही आती । धीरे धीरे पाकिस्तानी हीरो हीरोइन को भी बॉलीवुड मे लाकर स्थापित किया जाने लगा और भारतियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाने लगा। बुरा हो हो उड़ी हमले के बाद बैक डोर से चुपके से उन्हे लाने की चाल, कुछ भारतियों की नज़र मे आ गया और उन्होंने निंदा करने की माँग करने की, हिमाक़त कर डाली जो उन्हे नागवार गुज़री और वो पाकिस्तान वापस चले गये ।
क्या आपको लगता है कि यह महज इत्तिफ़ाक़ है तो आप से बडा भोला कोइ नही । पूरा बॉलीवुड डी कंपनी या पी कंपनी (पाकिस्तान) के इशारों पर चलता है, और इसका इलाज है है टोटल बॉयकाट। कुछो बूझे का ???
#I_support_Sonu_Nigam
आपने कभी ध्यान दिया है कि फ़िल्मों मे 92 के बाद से गायकों का करियर ग्राफ़ कैसा रहा है ?? याद है कुमार शानू जो करियर मे पीक पर चढ़कर अचानक ही , धुँध में खो गये । फिर आये अभिजीत, जिन्हे टाप पर पहुँचकर अचानक ही काम मिलना बद हो गया । उदित नारायण भी उदय होकर समय से पहले अस्त हो गये। उसके बाद सुखविंदर अपनी धमाकेदार आवाज से फलक पर छा गये और फिर अचानक ही ग्रहण लग गया । उसके बाद आये शान, और शान से बुलंदियों को छूने के अचानक ही कब नीचे आये पता ही नही लगा। फिर सोनू निगम कब काम मिलना बंद हुआ, लोग समझ ही नही पाये । उसके बाद अरिजीत जिनकी मखमली आवाज ने दिलो मे जगह बनानी शुरू ही की कि सलमान ने उनहे पब्लिकली माफ़ी माँगने के बाद भी 'जग घूमया' जैसा गाना गवाया नही और धीरे धीरे उसका करियर खतम करने की साज़िश चल रही है। सारे ही गायकों को असमय बाहर का रास्ता दिखा दिया गया ।
इसके उल्टा पहले चीख़ कर गाने वाले, क़व्वाली गायक नुसरत फ़तेह अली खान क़व्वाली गाने के लिये बुलाया जाता है, और पाकिस्तानी गायकों के लिये दरवाज़े खोल दिये जाते हैं। उसके बाद राहत फ़तेह अली खान आते हैं और बॉलीवुड में उन्हे लगातार काम मिलने लगता ह और बॉलीवुड की वजह से सुपरहिट हो जाते है। फिर नये स्टाईल के नाम पर आतिफ़ असलम आते हैं जिनकी आवाज को ट्यूनर मे डाले बग़ैर कोइ गाना नही निकलता है, उन्हे एक के बाद एक अच्छे गाने मिलने लगते हैं । अली जाफ़र जैसे औसत गायक को भी काम मिलने मे कोई दिक़्क़त नही आती । धीरे धीरे पाकिस्तानी हीरो हीरोइन को भी बॉलीवुड मे लाकर स्थापित किया जाने लगा और भारतियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाने लगा। बुरा हो हो उड़ी हमले के बाद बैक डोर से चुपके से उन्हे लाने की चाल, कुछ भारतियों की नज़र मे आ गया और उन्होंने निंदा करने की माँग करने की, हिमाक़त कर डाली जो उन्हे नागवार गुज़री और वो पाकिस्तान वापस चले गये ।
क्या आपको लगता है कि यह महज इत्तिफ़ाक़ है तो आप से बडा भोला कोइ नही । पूरा बॉलीवुड डी कंपनी या पी कंपनी (पाकिस्तान) के इशारों पर चलता है, और इसका इलाज है है टोटल बॉयकाट। कुछो बूझे का ???
#I_support_Sonu_Nigam
लेख साभार Swati Gupta
Thursday, 20 April 2017
मोदी सरकार ने LOC पर फ़ाइरिंग पर कोर्ट को लताड़ा।कहा कोर्ट के हिसाब से नहीं चलेगी सेना।सरकार का समर्थन है ...
एलओसी पार पाकिस्तान से भारतीय सीमा में आतंकी घुसपैठ करते रहते हैं । ऐसी खबरों के पता चलने पर आर्मी ऐसे आतंकियों का एंकाउंटर कर देती है । परंतु समय समय पर फर्जी एंकाउंटर होने की भी काफी खबरें समय समय पर आती रही हैं ।
इसपर कोर्ट ने मोदी सरकार से जवाबदेही मांगी थी और कड़े नियम बनाने की मांग की थी । मोदी सरकार ने कहा की LOC पर सेना कब फायर करेगी, ये फैसला कोर्ट नही कर सकता। ये फैसला केवल सेना और सरकार का ही होगा । एटॉर्नी जेनरल मुकुल रोहतग्नि ने कहा की किसी भी एंकाउंटर या फ़ाइरिंग का फैसला सरकार बहुत सोच समझ कर लेगी और इसपर कोई भी निर्णय हालात की प्रामाणिकता देख कर ही किया जाएगा ।
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Wednesday, 19 April 2017
सेक्यूलर नामक जीव कैसे तैयार किया जाता है ?
🚩हिन्दुओं का इतिहास काफी गौरवशाली है इसीलिए धूर्त सेक्युलरों और देश के गद्दारों द्वारा ये महसूस किया गया कि जब तक हिन्दू अपने गौरवशाली इतिहास से अवगत रहेंगे तब तक हिन्दुओं को नपुंसक बनाना नितांत असंभव है ! इसीलिए ऐसे गद्दारों ने हमारे स्कूलों के पाठयक्रम को अपना सबसे मजबूत हथियार बनाया ताकि हम हिन्दुओं के मन में बचपन से ही हीन भावना भरी जा सके और धीरे-धीरे सेक्यूलर नामक नपुंसक हिन्दू में परिवर्तित कर दिया जाए! स तरह करते-करते आज स्थिति इतनी दयनीय हो गयी है !देश के गद्दारों द्वारा हमारे स्कूलों में कैसी शिक्षा दी जा रही है क्या कोई सेक्यूलर इन बातों का तर्कसंगत जबाब दे दे सकता है कि ऐसा क्यों है.....?
9. हद तो यह कि हमारे अराध्य भगवान राम की जन्मभूमि पावन अयोध्या भी कब और कैसे विवादित बना दी गयी हमें पता तक नहीं चला !
लेकिन चाहे कुछ भी हो जाए हमलोग उनके ऐसे नापाक मंसूबों पर पानी फेरते हुए हिन्दुस्थान को हिन्दुराष्ट्र बना कर ही रहेंगे !
सेक्युलर नहीं राक्षस थे मुस्लिम शासक, हिन्दू ने घुटने नहीं टेके, संघर्ष किया इसलिए आज भी हिन्दू है...
शंका हो तो गूगल का इस्तेमाल करते हुए, पढ़िए तो समझ में आएगा, आपको सभी सेक्युलरों की असलियत पता चलने वाली है
कांग्रेस और सेक्युलर तत्व, मुस्लिम हमलावरों, मुगलों के बचाव में अक्सर तर्क देते है की, मुस्लिम शासक बर्बर नहीं थे, वो तो सेक्युलर थे और न ही किसी का जबरन धर्मान्तरण करवाया और न ही जुल्म किये ..सेक्युलर तत्व कहते है की, मुस्लिमो ने 1000 साल भारत पर राज किया, फिर भी यहाँ हिन्दू है, कैसे है अगर मुस्लिम शासक बर्बर थे ?
इस तरह कांग्रेस और सेक्युलर और वामपंथी तत्व एक आम हिन्दू को मुर्ख बनाते है, और उसे भी सेक्युलर में परिवर्तित कर देते है ...
नोट कीजिये ...
* पहली चीज तो ये की, किसी भी मुस्लिम शासक ने पुरे भारत पर राज कभी नहीं किया, और 1000 साल ?ये मूर्खतापूर्ण मजाक है ...
* मुग़ल केवल उत्तर भारत के शासक थे, वो भी पुरे उत्तर भारत के नहीं, यहाँ तक की औरंगजेब के शासन में जब मुग़लो की सीमा सबसे अधिक बड़ी थी, उत्तर भारत में ही बुंदेलखंड में हिन्दुओ का राज था, लाहौर इत्यादि में हिन्दू सिखों का राज था, कश्मीर में हिन्दू राजा था ..राजस्थान गुजरात मध्य प्रदेश में हिन्दू राजा थे, ओडिसा में मुग़ल थे ही नहीं, महाराष्ट्र में बड़े भूमि पर शिवाजी महाराज का राज था
किसी भी मुस्लमान को भारत का शासक नहीं कहा जा सकता अकबर के समय जितना बड़ा मुग़ल राज था, उस से कहीं अधिक बड़ा और समृद्ध राज था विजयनगर साम्राज्य और ये बात स्वयं आईने अकबरी लिखने वाले अबुल फज़ल की किताब में लिखी हुई है..
* हिन्दू आज भी भारत में मौजूद है, पर किसी मुस्लिम शासक की दया से मौजूद नहीं है और न ही उसके सेकुलरिज्म के कारण, मुस्लिम शासक कभी सेक्युलर नहीं रहे, वो हमेशा राक्षस रहे है बलात्कारी, लुटेरे, हत्यारे रहे है ..हिन्दू इसलिए आज भी हिन्दू है क्योंकि हिन्दू ने घुटने नहीं टेके, हिन्दू में दम था, उसने संघर्ष किया ..जिन हिन्दुओ को जान प्यारी थी वो धर्मान्तरित कर मुसलमान हो गए, और जिनको आन प्यारी थी वो कुर्बान हुए, और आज उन्ही के वंशज हिन्दू है
राणा कुम्भा ने युद्ध किया, महाराणा प्रताप ने युद्ध किया, छत्रसाल ने युद्ध किया, सिख गुरुओं ने युद्ध किया, रंजीत सिंह ने युद्ध किया, शिवाजी महाराज ने युद्ध किया और मुगलों को हराया, बाजीराव पेशवा ने युद्ध किया और मुगलों अफगानों को पेशावर तक काटा, गाजर मूली की तरह काटा
1758 में मुग़ल शासक लाल किले से बाहर नहीं आया, मुग़ल साम्राज्य 1758 में केवल लाल किला दिल्ली तक सिमित रह गया, और बाजीराव ने लाल किले के बाहर “गौरी शंकर” मंदिर बनवाया जो आज भी दिल्ली में लाल किले के सामने शान से भव्यता से खड़ा है
हमारे देश के टुकड़े 1947 में किये गए, पर मुसलमानो ने नहीं किये टुकड़े बल्कि सेक्युलर गाँधी-नेहरू ने टुकड़े किये ..हिन्दू बस सेकुलरिज्म के कारण कमजोर और मुर्ख सा दिखता है पर असल में हिन्दू में दम है, और इसलिए उसकी हस्ती आज भी मौजूद है, आज के हिन्दू में सेकुलरिज्म घुसा है इसलिए कमजोर दीखता है, पर ये वही हिन्दू है जो महाराणा प्रताप, शिवजी, पेशवा का वंशज है जागेगा तो सेकुलरिज्म मिटा के रख दिया जायेगा
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